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गायत्री मंत्र की महिमा

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गायत्री मंत्र का विवेचन!!!!!!!!! ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्। भावार्थ:- उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अन्तःकरण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे। मित्रो, गायत्री मंत्र सर्वशक्ति मंत्र है, सब कुछ उसके भीतर है लेकिन? है तभी जब गायत्री मंत्र के बीज को तीनों चीजों से समन्वित किया जायें, उच्चस्तरीय दृष्टिकोण, अटूट श्रद्धा-विश्वास और परिष्कृत व्यक्तित्व, अगर तीनों बातें हमारे साथ है तो अटूट फल पायेंगें, गायत्री को कामधेनु कहा जाता है, यह सही है, गायत्री को कल्पवृक्ष कहा जाता है, यह सही है, गायत्री को पारस कहा जाता है, इसको छूकर के लोहा सोना बन जाता है, यह सही है, गायत्री को अमृत कहा जाता है, जिसको पीकर के अजर और अमर हो जाते हैं, यह भी सही है। यह सब कुछ सही उसी हालत में है जबकि गायत्री रूपी कामधेनु को चारा भी खिलाया जायें, पानी पिलाया जायें, उसकी रखवाली भी की जायें, गाय को चारा आप खिलायें नहीं और दूध पीना चाहें तो यह कैसे संभव होगा? पानी पिलाएँ नहीं ठंढ से उसका बचाव करें नहीं, तो कैसे संभव होगा? गाय दूध देती है, यह सही है, लेकिन साथ साथ में यह भी सही है कि इसको परिपुष्ट करने के लियें, दूध पाने के लिए उन तीन चीजों की जरूरत है जो कि मैंने अभी आप से निवेदन किया। यह विज्ञान पक्ष की बात हुई, अब ज्ञानपक्ष की बात आती है, गायत्री के तीन पाद तीन चरण में तीन शिक्षायें भरी हैं, और ये तीनों शिक्षायें ऐसी हैं कि अगर उन्हें मनुष्य अपने व्यक्तिगत जीवन में समाविष्ट कर सके तो धर्म और अध्यात्म का सारे का सारा रहस्य और तत्त्वज्ञान का उसके जीवन में समाविष्ट होना संभव है, तीन पक्ष त्रिपदा गायत्री हैं, आस्तिकता, आध्यात्मिकता, धार्मिकता, इन तीनों को मिला करके त्रिवेणी संगम बन जाता है, ये क्या हैं तीनों? पहला है आस्तिकता, आस्तिकता का अर्थ है- ईश्वर का विश्वास, भजन-पूजन तो कई आदमी कर लेते हैं, पर ईश्वर- विश्वास का अर्थ यह है कि सर्वत्र जो भगवान् समाया हुआ है, उसके संबंध में यह दृष्टि रखें कि उसका न्याय का पक्ष, कर्म का फल देने वाला पक्ष इतना समर्थ है कि उसका कोई बीच-बचाव नहीं हो सकता, भगवान सर्वव्यापी है, सर्वत्र है, सबको देखता है, अगर यह विश्वास हमारे भीतर हो तो हमारे लिए पाप कर्म करना संभव नहीं होगा। हम हर जगह भगवान को देखेंगे और समझेंगे कि उसकी न्याय, निष्पक्षता हमेशा अक्षुण्ण रही है, उससे हम अपने आपका बचाव नहीं कर सकते, इसलिए आस्तिक का, ईश्वर विश्वासी का पहला क्रिया-कलाप यह होना चाहियें कि हमको कर्मफल मिलेगा, इसलिए हम भगवान् से डरें, जो भगवान् से डरता है उसको संसार में और किसी से डरने की जरूरत नहीं होती। आस्तिकता, चरित्रनिष्ठा और समाजनिष्ठा का मूल है, आदमी इतना धूर्त है कि वह सरकार को झुठला सकता है, कानूनों को झुठला सकता है, लेकिन अगर ईश्वर का विश्वास उसके अंत:करण में जमा हुआ है तो वह बराबर ध्यान रखेगा, हाथी के ऊपर अंकुश जैसे लगा रहता है, आस्तिकता का अंकुश हर आदमी को ईमानदार बनने के लिए, अच्छा बनने के लिए प्रेरणा करता है, प्रकाश देता है। ईश्वर की उपासना का अर्थ है, जैसा ईश्वर महान है वैसे ही महान ईश्वर के लायक बनने के लिए हम कोशिश करें, हम अपने आप को भगवान में मिलायें, यह विराट विश्व भगवान का रूप है और हम इसकी सेवा करें, सहायता करें ओंर इस विश्व उद्यान को समुन्नत बनाने की कोशिश करें, क्योंकि हर जगह भगवान समाया हुआ है, सर्वत्र भगवान विद्यमान है यह भावना रखने से ''आत्ववत्सर्वभूतेषु'' की भावना मन में पैदा होती है, नदी जिस तरीके से अपना समर्पण करने के लिए समुद्र की ओर चल पड़ती है, आस्तिक व्यक्ति, ईश्वर का विश्वासी व्यक्ति भी अपने आप को भगवान में समर्पित करने के लिए चल पड़ता है, इसका अर्थ यह हुआ कि भगवान् की इच्छा? मुख्य हो जाती हैं, व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षायें, व्यक्तिगत कामनायें भगवान् की भक्ति समाप्त कराती हैं और यह सिखाती हैं कि ईश्वर के संदेश, ईश्वर की आज्ञायें ही हमारे लिये सब कुछ होनी चाहिए। हमें अपनी इच्छा भगवान् पर थोपने की अपेक्षा, भगवान की इच्छा को अपने जीवन में धारण करना सिखें, आस्तिकता के ये बीज हमारे अंदर जमे हुयें हों, तो जिस तरीके से वृक्ष से लिपटकर बेल उतनी ही ऊँची हो जाती है जितना कि ऊँचा वृक्ष है, उसी प्रकार से हम भगवान की ऊँचाई के बराबर ऊँचे चढ़ सकते हैं, जिस तरीके से पतंग अपनी डोरी बच्चे के हाथ में थमाकर आसमान में ऊँचे उड़ती चली जाती है। जिस तरीके से कठपुतली के धागे बाजीगर के हाथ में बँधे रहने से कठपुतली अच्छे से अच्छा नाच-तमाशा दिखाती है, उसी तरीके से ईश्वर का विश्वास, ईश्वर की आस्था अगर हम स्वीकार करें, हृदयंगम करें और अपने जीवन की दिशाधारायें भगवान् के हाथ में सौंप दें अर्थात भगवान के निर्देशों को ही अपनी आकांक्षायें मान लें तो हमारा उच्चस्तरीय जीवन बन सकता है, और हम इस लोक में शांति और परलोक में सद्गति प्राप्त करने के अधिकारी बन सकते हैं। आस्तिकता गायत्री मंत्र की शिक्षा का पहला वाला चरण है, इसका दूसरा वाला चरण है आध्यात्मिकता, अध्यात्मिकता का अर्थ होता है- आत्मावलम्बन, अपने आप को जानना, अपने आप को न जानने से हम बाहर भटकते रहते हैं, कई अच्छी आकांक्षाओं को पूरा करने के लियें, अपने दु:खो का कारण बाहर तलाश करते फिरते रहते हैं, जानते नहीं किं हमारी मन स्थिति के कारण ही हमारी परिस्थितियाँ उत्पन्न होती हैं, अगर हम यह जान पाएँ, तब फिर अपने आप को सुधारने के लिए कोशिश करें। स्वर्ग और नरक हमारे ही भीतर हैं, हम अपने ही भीतर स्वर्ग दबाये हुयें हैं और अपने ही भीतर नरक दबाए हुयें हैं, हमारी मन की स्थिति के आधार पर ही परिस्थितियाँ बनती हैं, कस्तूरी का हिरण चारों तरफ खुशबू की तलाश करता फिरता था, लेकिन जब उसको पता चला कि वह तो नाभि में ही है, तब उसने इधर-उधर भटकना त्याग दिया और अपने भीतर ही ढूँढने लगा। फूल जब खिलता है तब भौरे आते ही हैं, तितलियों आती हैं, बादल बरसते तो हैं लेकिन जिसके आँगन में जितना पात्र होता है, उतना ही पानी देकर के जाते हैं, चट्टानों के ऊपर बादल बरसते रहते हैं, लेकिन घास का एक तिनका भी पैदा नहीं होता, छात्रवृत्ति उन्हीं को मिलती है जो अच्छे नंबर से पास होते हैं, संसार में सौंदर्य तो बहुत हैं पर हमारी ओंख न हो तो उसका क्या मतलब? संसार में संगीत गायन तो बहुत हैं, शब्द बहुत हैं, पर हमारे कान न हों, तो उन शब्दों का क्या मतलब? संसार में ज्ञान-विज्ञान तो बहुत हैं, पर हमारा मस्तिष्क न हो तो उसका क्या मतलब ईश्वर उन्हीं की सहायता करता है जो अपनी सहायता आप करते हैं, इसलिये आध्यात्मिकता का संदेश यह है कि हर आदमी को अपने आप को देखना, समझना, सुधारने के लिए भरपूर प्रयत्न करना चाहियें, अपने आपको हम जितना सुधार लेते हैं, उतनी ही परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल बनती चली जाती हैं, यह सिद्धांत गायत्री मंत्र का दूसरा वाला चरण है। तीसरा वाला चरण गायत्री मंत्र का है धार्मिकता, धार्मिकता का अर्थ होता है! कर्तव्यपरायणता, कर्तव्यों का पालन, कर्तृत्व, कर्म और धर्म लगभग एक ही चीज हैं, मनुष्य में और पशु में सिर्फ इतना ही अंतर है कि पशु किसी मर्यादा से बँधा हुआ नहीं है, मनुष्य के ऊपर हजारों मर्यादायें और नैतिक नियम बँधे हैं और जिम्मेदारियाँ लादी गयीं हैं, जिम्मेदारियों को और कर्तव्यों को पूरा करना मनुष्य का कर्तव्य है। शरीर के प्रति हमारा कर्तव्य है कि इसको हम नीरोग रखें, मस्तिष्क के प्रति हमारा कर्तव्य है कि इसमें अवांछनीय विचारों को न आने दें, परिवार के प्रति हमारा कर्तव्य है कि उनको सद्गुणी बनायें देश, धर्म, समाज और संस्कृति के प्रति हमारा कर्तव्य है कि उन्हें भी समुन्नत बनाने के लिए भरपूर ध्यान रखें, लोभ और मोह के पास से अपने आप को छुड़ा करके अपनी जीवात्मा का उद्धार करना, यह भी हमारा कर्तव्य है, भगवान ने जिस काम के लिए हमको इस संसार में भेजा है, जिस काम के लिए मनुष्य योनि में जन्म दिया है, उस काम को पूरा करना भी हमारा कर्तव्य है। इन सारे के सारे कर्तव्यों को अगर हम ठीक तरीके से पूरा न कर सके तो हम धार्मिक कैसे कहला सकेंगे? धार्मिकता का अर्थ होता है कर्तव्यों का पालन करना, हमने सारे जीवन में गायत्री मंत्र के बारे में जितना भी विचार किया, शास्त्रों को पढ़ा, सत्संग किया, चिंतन- मनन किया, उसका सारांश यह निकला कि बहुत सारा विस्तार ज्ञान का है, बहुत सारा विस्तार धर्म और अध्यात्म का है, लेकिन इसके सार में तीन चीजें समाई हुई हैं। आस्तिकता अर्थात ईश्वर पर विश्वास,आध्यात्मिकता अर्थात स्वावलंबन, आत्मबोध और अपने आप को परिष्कृत करना, अपनी जिम्मेदारियों को स्वीकार करना और धार्मिकता अर्थात कर्तव्यपरायणता, कर्तव्य परायण, स्वावलंबी और ईश्वरपरायण कोई भी व्यक्ति गायत्री मंत्र का उपासक कहा जा सकता है और गायत्री मंत्र के ज्ञानपक्ष के द्वारा जो शांति और सद्गति मिलनी चाहिये उसका अधिकारी बन सकता है, हमारे जीवन का यही निष्कर्ष हैं। विज्ञान पक्ष में तीन धारायें और ज्ञानपक्ष में तीन धारायें, इनको जो कोई प्राप्त कर सकता हो, गायत्री मंत्र की कृपा से निहाल बन सकता है और ऊँची से ऊँची स्थिति प्राप्त करके इसी लोक में स्वर्ग और मुक्ति का अधिकारी बन सकता है, ऐसा हमारा अनुभव, ऐसा हमारा विचार और ऐसा हमारा विश्वास है। जय माँ गायत्री! www.futurestudyonline.com

References

गायत्री मंत्र का प्रभाव
posted Jan 16 by Rakesh Periwal

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गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन कलंक निवारण के उपाय गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन कलंक निवारण के उपाय भारतीय शास्त्रों में गणेश चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन निषेध माना गया हैं इस दिन चंद्र दर्शन करने से व्यक्ति को एक साल तक मिथ्या कलंक लगता हैं। भगवान श्री कृष्ण को भी चंद्र दर्शन का मिथ्या कलंक लगने के प्रमाण हमारे शास्त्रों में विस्तार से वर्णित हैं। भाद्रशुक्लचतुथ्र्यायो ज्ञानतोऽज्ञानतोऽपिवा। अभिशापीभवेच्चन्द्रदर्शनाद्भृशदु:खभाग्॥ अर्थातः जो जानबूझ कर अथवा अनजाने में ही भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चंद्रमा का दर्शन करेगा, वह अभिशप्त होगा। उसे बहुत दुःख उठाना पडेगा। गणेशपुराणके अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्रमा देख लेने पर कलंक अवश्य लगता हैं। ऐसा गणेश जी का वचन हैं। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन न करें यदि भूलसे चंद्र दर्शन हो जाये तो उसके निवारण के निमित्त श्रीमद्‌भागवत के १०वें स्कंध, ५६-५७वें अध्याय में उल्लेखित स्यमंतक मणि की चोरी कि कथा का का श्रवण करना लाभकारक हैं। जिस्से चंद्रमा के दर्शन से होने वाले मिथ्या कलंक का ज्यादा खतरा नहीं होगा। चंद्र-दर्शन दोष निवारण हेतु मंत्र यदि अनिच्छा से चंद्र-दर्शन हो जाये तो व्यक्ति को निम्न मंत्र से पवित्र किया हुआ जल ग्रहण करना चाहिये। मंत्र का २१, ५४ या १०८ बा जप करे। ऐसा करने से वह तत्काल शुद्ध हो निष्कलंक बना रहता हैं। मंत्र निम्न है सिंहः प्रसेनमवधीत्‌ , सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मा रोदीस्तव, ह्येष स्यमन्तकः ॥ अर्थात: सुंदर सलोने कुमार! इस मणि के लिये सिंह ने प्रसेन को मारा हैं और जाम्बवान ने उस सिंह का संहार किया हैं, अतः तुम रोऒ मत। अब इस स्यमंतक मणि पर तुम्हारा ही अधिकार हैं।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, अध्यायः ७८) जानें दोष से बचने के अन्य उपाय - भागवत की स्यमंतक मणि की कथा सुने या पाठ करें। - एक पत्थर अपने पड़ोसी की छत पर फेंक दीजिए। - शाम के समय अपने अतिप्रिय निकट संबंधी से कटु वचन बोलें, तत्पश्चात अगले दिन प्रातः उससे क्षमा मांग लें। - आईने में अपनी शक्ल देखकर उसे बहते पानी में बहा दें। - 21 अलग-अलग पेड़-पौधों के पत्ते तोड़कर अपने पास रखें। - मौली में 21 दूर्वा बांधकर मुकुट बनाएं तथा इस मुकुट को गणपति मंदिर में गणेश जी के सिर पर सजाएं। - रात के समय मुहं नीचे करके और आंखें बंद करके आकाश में स्थित चंद्रमा को आईना दिखाइए तथा आईने को चौराहे पर ले जाकर फेंक दीजिए। - गणेश जी की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति पर 21 लड्डूओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू गणेश जी की प्रतिमा के पास रखकर शेष ब्राह्मणों में बांट दें।
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ज्योतिष सिर्फ काल की गणना या भविष्य के दर्शन का साधन मात्र ही नहीं बल्कि यह सामाजिक समरसता का भी शास्त्र है. सामाजिक संबंधों के मोतियों को जितनी सुन्दरता से ज्योतिष शास्त्र ने पिरोया है ऐसा अद्भुत कार्य कहीं और देखने को नहीं मिलता है. ज्योतिष यह मानता है की समाज के सभी घटक एक दूसरे के पूरक हैं और एक सभ्य समाज के विकास के लिए आवश्यक तत्व हैं। अपने भविष्य कथन के सूत्रों में यह शास्त्र समाजिक समरसता की अनिवार्यता को स्वीकार करता है और उस पथ पर चलने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश भी प्रदान करता है। ब्रम्हांड में विचरण करते ग्रहों और नक्षत्रों के मानवीय जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों और उन प्रभावों के कारण होने वाले परिवर्तनों पर अनुसंधान करता हुआ ज्योतिष शास्त्र अपने फलकथन में इन्ही समाजिक संबंधों को ग्रहों के स्वरुप में भी वर्णित करता है। और ज्योतिष के ये सिद्धांत मानवीय जीवन पर प्रभाव भी डालते हैं। ज्योतिष में नवग्रहों विभिन्न कारको का अधिपत्य प्रदान किया गया है अर्थात हमारे जीवन से जुड़ा प्रत्येक महत्वपूर्ण कार्य और सम्बन्ध किसी न किसी ग्रह के द्वारा आवश्यक रूप से शासित और नियंत्रित है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को पिता, चंद्रमा को माता, मंगल को भाई, बुध को बहन, बुआ, मौसी और अन्य स्त्री सम्बन्धियों का, बृहस्पति को गुरु, शिक्षक, बुजुर्ग, शुक्र को स्त्री और पत्नी तथा शनि को सेवक का करक माना गया है। भविष्य कथन के सूत्रों में ये सम्बन्ध आवश्यक रूप से शामिल किये जाते हैं और जातक को इन संबंधो के प्रति उदासीन न होने के लिए निर्देशित भी किया जाता है. उदाहरण के तौर पर यदि कोई अपने पिता या पिता समान व्यक्ति का अनादर करता है तो ऐसे स्थति में वह सूर्य के प्रभाव को ख़राब करता है क्योकि ज्योतिष के सिद्धांत के अनुसार पिता का कारक या सूचक ग्रह सूर्य है ऐसे स्थति में सूर्य अपने अन्य प्रभावित क्षेत्रो और अधिपत्य वाले कार्यों में सम्बंधित व्यक्ति को नकारात्मक परिणाम देने लगता है जैसे की कार्य की सफलता में बाधाएँ उत्पन्न होना, समाज या राजकीय कार्यों में अपयश मिलना बदनामी होना या हानि होना ऐसे प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखते हैं। इसी तरह शनि को सेवक या दास वर्ग का अधिपति माना गया है। ज्योतिष इस विषय में सचेत करता है की अगर कोई अपने सेवको या अपने अधीनस्थों का अनुचित शोषण करता है या भेदभाव पूर्वक कार्य करता है तो उसे शनि का नकारात्मक फल भोगना पड़ता है। बुध और शुक्र ग्रह के द्वारा नियंत्रित होने वाले कार्यों में शुभफलों की वृद्धि के लिए ज्योतिष स्त्रियों के सम्मान के प्रति सचेत करता है। ज्योतिष के सर्वमान्य सूत्रों में बुध को व्यापार और शुक्र को धन एवं ऐश्वर्य का अधिपति कहा जाता है और देवी महालक्ष्मी को शुक्र ग्रह का अधिपति। तात्पर्य यह है की शुक्र और बुध के क्षेत्रों शुभफल प्राप्त करने हों तो पत्नी के साथ-साथ अन्य स्त्रियों के सम्मान के प्रति भी सचेत रहे, ऐसा निर्देशित करते हुए ज्योतिष शास्त्र मनुष्य से अपने सामाजिक और नैतिक दायित्वों का भी पालन करवाता है। http://www.futurestudyonline.com/astro-deatail-89 इन उदाहरणों पर गौर करेंगे तो पाएंगे की हमारी गौरवशाली प्राचीन संस्कृति का प्रत्येक अवयव अपने आप में अद्भुत और अपूर्व है। मनुष्य के कर्तव्य पथ के निर्माण में ज्योतिष का योगदान भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। समाजशास्त्र की किताबे तो आपने आज पढनी शरू की हैं लेकिन ज्योतिष हजारों वर्षों यह सामाजिक संतुलन स्थापित करता हुआ चला आ रहा है।
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It wouldn't be incorrect to say that jupiter is the best benefic planet of zodiac. Now it is in Scorpio , 8th house of zodiac. I gonna share with you the expected results of 8th house occupied Jupiter in view of 12 th signs. Let's start Arise : Jupiter is in 8th house. Good chances to gain inherits. Taurus : Get ready for suddenly marriage. Jemini : Suffering from asthma. Delay in all cases. Cancer : Fall in love , bliss of progeny . Leo : Owing the property, pain in love , gain from lottery or sharemarket . Virgo : Change / transfer in job ,but opportunities for opening new business or launching a new product/ project for those who are already in business. Libra : possibility of demise or deathly suffering of father or fatherly person . Healthy fixed deposit. Scorpio : Many good relations will be spoilt. Suffering from hormonal imbalance. Sagittarius : Mental depression, confusion about do & don't. Capricorn : Expenses for philanthropic work, suffering from migraine & possibility of ocular surgery . Aquarius : Obstacles in all cases but situation may be solved with the interference of influential person . Pisces : Separation from joint family , hearts diseases/ surgery , vicinity of spiritual master. This is a brief & generalised prediction of Jupiter in Scorpio. Don't take it personally. To get exact prediction contact with me via futurestudyonline with accurate dob. To know more follow my articles. With regards, Baksiddha Vaswati
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                THE GENERALISED ANALYSIS OF THE TRANSITION OF PROGRESSIVE   JUPITER IN LIBRA

JUPITER will direct in sign Libra on July 10th (Tuesday) at 22:46. Here I will predict some good or bad results of twelve zodiac sign accordingly.

Aries-   Jupiter is becoming direct in transit over your seventh house. This is an auspicious transit for Aries ascendant or sign. It indicates relationships and friendships but average chance of marriage bcs delay & difficulties may arise in settlement.  A suitable time for fixing marriage yet it is already settled. There may be a development of aptitude and offer of a new business. Unemployed native may get job.

Taurus- This is an unfavorable (6th) transit for Taurus sign or ascendant. Financial problem may arise. Good time for cracking interview or any treaty. You will feel a great relief as your debts start clearing.      Increase in expenditure for righteous work. Enjoy health but some people may have symptoms of asthma or allergy. The winning the legal battle.

 Gemini- Jupiter will direct over your favorable 5th House. An important house related to relations and love. Very good chance is of earning by speculation. Good news for those who were depriving by their progeny or had a long gap with them. This is the good time for cover up the gap or misunderstanding    & to improve relationships with them.    Gemini people may be blessed with new born baby.   Auspicious events in the family or other long waited desires may be fulfilled.

Cancer- Good transit is for cancer sign & ascendant. Ninth lord is in 4th. Students may do good performance at educational font .Desires of higher study or research will be fulfilled. Good chances of purchasing property, car or electrical gadgets etc. Go ahead for establish temple or install god’s idol. Family dispute or domestic unhappiness will recover. Take care of mother’s health.

Leo- Jupiter is transiting into the 3rd house Leo. Good time for communication. Personal status will enhance due to associate with people in high position. Relation with subordinate & siblings will certainly improve. Good transit for writers, communicators. Has a chance of break-up due to interference of third person.

Virgo- It is a favorable transit for Virgo sign and ascendant for their financial satisfaction. Financial status will enhance. Improvement in wealth, new relation is indicating.  Unmarried people have a good chance to find their desired spouse. Compatibility with your partner will go for better. Enjoy your relationship or love life. Family disputes may arise. Mother’s health may be a major issue.

Libra- Jupiter’s transition is moderate for this sign. 3rd and 6th lord is in ascendant. A good change is expected. There is the chance of getting success due to strong will power. Health issue will be the cause of tension. Good chance of marriage if you are still unmarried. Good transfer or favorable changes in job. Some Libra women have possibility to conceive.

Scorpio - Get ready for drainage of money although this has been going on for last one and half years.  Restrain the habit of extravagant shopping to balance your fund.  Long concrete relation may break now. This transit may not favorable for change of job or transfer. There may be delay or disputes making decision. Be careful of subordinates. Pack for pilgrimage & spend money on it or any kind of philanthropic work.  Possibility of winning award of honor.

 

Sagittarius- It is a very favorable transition for sagi. Good indication for enhancing personal & financial status. Jupiter is in 11th. 11 th house is consider for all around prosperities.  After a long pause (ups and downs) you will achieve your success. Students will get success in their higher studies. Some Sagi people may win the prize of honor. Jupiter’s transition is a bit relief in your sadesati.

Capricorn- You may invest in business if your original chart supports for business. Good time for purchasing land flat, car, gold etc.  You will do well at the work front. There is the chance of illicit relationship. Enjoy happy family life. Focus on your carrier to utilize this transit.

Aquarius- Jupiter’s transit is favorable for Aquarius.  Many opportunities are knocking at your door. Good changes are expected to job , promotion. Boss is now very co-operative & positive to you, hence this is the golden time to enhance your carrier by the grace of him. All doors of higher education is opened for the students bcs already they have done good performance in education for the favorable transit. Development in father’s health is observed.

Pisces- It is not a favorable transit for Pisces sign & ascendant. Frequent ups and downs will come in carrier. Transfer to a distance place or bad change in job even chance of jobless. Ultimate unhappiness is in terms of job, family life, friendship etc. Think before making big investment. Don’t go to start a new venture now. Work hard for future. Change of place is indicated.

It is a generalized prediction. The complete transition analysis should be consulted properly according to the birth chart. If a major period of Jupiter or sub period, then the result may vary. If the position of Jupiter in the birth chart is favorable or malefic then also there can be a far demarcation in the result of this transition.  The planetary position at the time of birth, dasha , ascendant, nakshatra ,should be carefully analyzed during transit prediction.

To know in details the transition of Jupiter in Libra is favorable or unfavorable for ur sign you may call me or visit my page ASTROLOGER VASWATI BAKSIDDHA.

 

Best of luck

 

 

 

 

 

 

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                             Colors of palm

 

Palm reading is one of the art of prediction of human’s future. Mainly health status of the person can be distinctly judge by reading the colors of palm. Colors of palm signify certain diseases. .Although the colors of palm may vary from one country to another. Yet generally the color of normal palm is a light red or pinkish red with a shiny, smooth texture. If the color appears either darker or lighter than normal, this may indicates that the condition of health is abnormal.

 

Here are some signs of diseases, which are due to the abnormal palm colors

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  Pale White

 

 A palm appearing pale white in color, indicates anemia or possibly occult bleeding & when the palm looks white, this usually indicates lung disease or inflammation in the body.

 

Blue:

 

 A Blue palm usually indicates intestinal obstruction.

 

 Green

 

 A Palm with a dark green color, usually indicates obstruction in the circulation of the blood & a light greenish palm indicates anemia or Spleen or stomach oriented disease.

 

 

Yellow

 

 A sallow yellow palm usually indicate chronic disease. A palm with a bright, golden yellow color often seen in the liver disease accompanied by jaundice. In this case, there is liver/gallbladder damp heat.  If the palm skin grows thicker, stiffer and is dry with a light yellow, shiny, smooth surface this is the indication of palm calcar keratosis. A palm that looks yellowish brown and has no sheen indicates the possibility of cancer.

 

 Red

 

 A palm with Red, net like capillaries often appears with Vitamin C deficiency. When the whole palm is covered with dark red or purple spots, this is for liver problem.  The palm that first appears red and gradually changes to dark purple is usually a sign of heart disease.

 

 

 Purple

 

Purple colored palm is the indication of infectious disease.

 

 Grey

 

 Thin Cigarette-ash like spots on the palm are sign of heart disease in a heavy smoker.

 

 Black

 

A palm that looks black is often seen in kidney disease. If the central part of the palm looks brownish–black, this often indicates gastro-intestinal disease.


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