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जय भोलनाथ**मैं बुध हू

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जय श्री बालाजी में बुध हु लोग मुझे बच्चा समझकर ध्यान नही देते। लेकिन में ही उनके दिमाग की नशे हु। उनका तंत्रिका तंत्र हु। उनको नही पता में बिगड़ गया तो भेजा खाली कर सकता हु उनका। ये सही है कि मुझ अकेले को सम्हालना मुश्किल है लेकिन में उनकी एनर्जी का 75% ग्रहण कर लेता हूं। मे सूर्य के पास रहता हूं इसलिए सूर्य का भी तेज है मेरे पास। में तो विष्णु से क्या कम हु। सामने वाले के रंग में रंग जाता हूं। में बुध हु। तेरी वाणी भी में ही हु पार्थ। तेरी त्वचा भी में ही हु। तेरी बड़ी आंत भी में ही हु। मुझे तू कम न आंक मनुष्य। में बिगड़ा तो तू कहि का न रहेगा। तंत्रिका तंत्र गया। बड़ी आंत गयी तो बचेगा क्या तेरे अंदर। में बुध हु। में तो किसी के रंग में भी रंग जाता हूं। वराह ने तो मुझे लग्न के साथ मिलाके लग्न को ओर बलि ओर शुभ बना दिया। क्योंकि में तो सांमने वाले कर रंग में रंग जाता हूं। सूर्य के रंग में रंगा तो बुधादित्य योग में रंग गया। चन्दर कर साथ मिला तो मन की गहराइयों में ऐसा लेके जाता हूं कि सूक्ष्म से सूक्ष्म बात को समझा देता हूं। मंगल के साथ दिमाग के घोड़े ऐसे दौड़ाता हु की तुझ चैन से नही बैठने देता हूं बड़े बड़े काम करवाता हु तुझसे। गुरु के साथ तो तुझे महाज्ञानी ओर महा शुभ बना देता हूं। में बुध ही तो हु। शुक्र के साथ महालक्ष्मी योग बना देता हूं। यही शुक्र मुझे अपना बल दे देता है। शनि भी तो मेरे रंग में रंग जाता है। क्या जबरदस्त निर्णय क्षमता बनाता हूँ इसी शनि के साथ मिलकर। लोग राहु का गुण गाते है। उसके रंग में रंगे है। लेकिन यही राहु मेरी राशियों में नतमस्तक हो जाता है। मिथुन मेरी ही राशि है जहाँ यह उच्च का हो जाता है। में ही तो इसको मिथुन में कन्ट्रोल करता हु। मेरी इसी मिथुन राशि मे राहु इतनी व्रद्धि करता है कि कोई सीमा न रहे। मेरी राशि कन्या में तो राहु कब्जा जमा के ढेर डाल लेता है। हिलता ही नही। हर प्रतियोगिता में अव्वल लेके आता है। सब इस रंग राहु को भयावह मानते है। लेकिन यही राहु मेरे बल के आगे एक मच्छर कर समान है। इस राहु को सिर्फ में ही नियंत्रित कर सकता हु। क्योंकि में बुध हु। ए राहु मेरी क्षत्र छाया में ही पलता बढ़ता है। इसकी क्या मजाल जो मेरे आगे चूँ भी कर ले। मुझे बलवान कर लो तो राहु भी चुपचाप जहा है वहा बैठा रहे। सेनापति भी भले ही कितना भी पराक्रमी हो। मेरे घरों की तोउसे रक्षा करनी ही पड़ेगी। में राजकुमार जो हु। उसका कर्तव्य है मेरी रक्षा करना। में बुध हु। सूर्य मुझे अपने पास रखता है। चन्द्रमा मेरा पिता है। सूर्य सब ग्रहों का राजा है। चन्द्रमा सब ग्रहों के बल का बिज। सूर्य सब ग्रहों के दोष हरने की क्षमता रखता है। सूर्य चन्दर का प्यार हु में। बुध हु में। सेनापति मेरी रक्षा करता है। राहु मेरे आगे नतमस्तक है। शुक्र मुझे बल दे देता है अपना। बुध्जो हु में। पंचम में स्वग्रही या उच्च का होवू तो बिना गुरु के ही तुझे ज्ञानी बना दु। में एकमात्र ऐसा ग्रह हु जिसके बल पे में तुझे गुरु की पदवी दिला सकता हु। अष्टम में में ही तो तुझे अनन्त ज्ञान की गहराइयों में लेके चला जाता हूं। में बुध हु वत्स। मेरी तेज़ी के आगे भी सब फैल है। में इंतज़ार नही करवाता तुझे । तुरन्त फैसला करता हु। जहा बैठूंगा जल्दी जल्दी तुझे वहां के फल प्रदान करूँगा। में बुध हु। में तरी ग्रहण क्षमता हु। तू जो भी ग्रहण कर रहा है सारः से वो में ही तो हु। तेरी बहन में हु। बुआ में हु। बेटी में हु। हंसी में हु। लेखन में हु। बोलने की कला में हु। हाज़िर जीबि में हु। में बुध हु। बाहत कुछ हु में। कहा राहु के चक्कर मे पड़ा है तू। मेरी गुण गाले तू। राहु की माया से दो minut में निकाल के ले अवउँगा तुझे। मेरे रंग में तू रंग जा। में तेरे रंग में रंग जाऊंगा क्योंकि बुध हूँ मैं एस्ट्रो ईश्वर दत्त
posted Aug 14 by Ishwer Dutt

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सरल एवम सीधी ज्योतिष :- गुरु राहु जिसे हम चांडाल योग बोलते है गुरु मतलब ज्ञान, विवेक, जीव राहु जहरीली धुंवा,अहंकार,धोकेबाज़,छलिया, राहु आकाश में उड़ने वाला धुंवा ,गुरु पाताल एवं प्राण दायनी वायु,जितना ऊपर जाओगे सांस लेने में उतनी ही तकलीफ होगी, जितना नीचे आओगे, सांस उतना गहरा और स्वच्छ होगा,जब जन्मकुंडली में दोनों मतलब(गुरू,राहु) मिल गए तो गुरु (जीव एवम ज्ञान),राहु (धुंवे एवमअहंकार,) में फंस गया,अब सोचो कौन बचाएगा ? बिल्कुल सरल है,आपकी बुद्धि बचाएगी, बुद्धि का कारक बुध है। इसका अर्थ ये निकला,जब जन्मकुंडली में गुरु,राहु इकट्ठे हो तो बुध का उपाय करना चाहिए ऐस्ट्रो ईश्वर दत्त
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जय श्री बालाजी में बुध हु लोग मुझे बच्चा समझकर ध्यान नही देते। लेकिन में ही उनके दिमाग की नशे हु। उनका तंत्रिका तंत्र हु। उनको नही पता में बिगड़ गया तो भेजा खाली कर सकता हु उनका। ये सही है कि मुझ अकेले को सम्हालना मुश्किल है लेकिन में उनकी एनर्जी का 75% ग्रहण कर लेता हूं। मे सूर्य के पास रहता हूं इसलिए सूर्य का भी तेज है मेरे पास। में तो विष्णु से क्या कम हु। सामने वाले के रंग में रंग जाता हूं। में बुध हु। तेरी वाणी भी में ही हु पार्थ। तेरी त्वचा भी में ही हु। तेरी बड़ी आंत भी में ही हु। मुझे तू कम न आंक मनुष्य। में बिगड़ा तो तू कहि का न रहेगा। तंत्रिका तंत्र गया। बड़ी आंत गयी तो बचेगा क्या तेरे अंदर। में बुध हु। में तो किसी के रंग में भी रंग जाता हूं। वराह ने तो मुझे लग्न के साथ मिलाके लग्न को ओर बलि ओर शुभ बना दिया। क्योंकि में तो सांमने वाले कर रंग में रंग जाता हूं। सूर्य के रंग में रंगा तो बुधादित्य योग में रंग गया। चन्दर कर साथ मिला तो मन की गहराइयों में ऐसा लेके जाता हूं कि सूक्ष्म से सूक्ष्म बात को समझा देता हूं। मंगल के साथ दिमाग के घोड़े ऐसे दौड़ाता हु की तुझ चैन से नही बैठने देता हूं बड़े बड़े काम करवाता हु तुझसे। गुरु के साथ तो तुझे महाज्ञानी ओर महा शुभ बना देता हूं। में बुध ही तो हु। शुक्र के साथ महालक्ष्मी योग बना देता हूं। यही शुक्र मुझे अपना बल दे देता है। शनि भी तो मेरे रंग में रंग जाता है। क्या जबरदस्त निर्णय क्षमता बनाता हूँ इसी शनि के साथ मिलकर। लोग राहु का गुण गाते है। उसके रंग में रंगे है। लेकिन यही राहु मेरी राशियों में नतमस्तक हो जाता है। मिथुन मेरी ही राशि है जहाँ यह उच्च का हो जाता है। में ही तो इसको मिथुन में कन्ट्रोल करता हु। मेरी इसी मिथुन राशि मे राहु इतनी व्रद्धि करता है कि कोई सीमा न रहे। मेरी राशि कन्या में तो राहु कब्जा जमा के ढेर डाल लेता है। हिलता ही नही। हर प्रतियोगिता में अव्वल लेके आता है। सब इस रंग राहु को भयावह मानते है। लेकिन यही राहु मेरे बल के आगे एक मच्छर कर समान है। इस राहु को सिर्फ में ही नियंत्रित कर सकता हु। क्योंकि में बुध हु। ए राहु मेरी क्षत्र छाया में ही पलता बढ़ता है। इसकी क्या मजाल जो मेरे आगे चूँ भी कर ले। मुझे बलवान कर लो तो राहु भी चुपचाप जहा है वहा बैठा रहे। सेनापति भी भले ही कितना भी पराक्रमी हो। मेरे घरों की तोउसे रक्षा करनी ही पड़ेगी। में राजकुमार जो हु। उसका कर्तव्य है मेरी रक्षा करना। में बुध हु। सूर्य मुझे अपने पास रखता है। चन्द्रमा मेरा पिता है। सूर्य सब ग्रहों का राजा है। चन्द्रमा सब ग्रहों के बल का बिज। सूर्य सब ग्रहों के दोष हरने की क्षमता रखता है। सूर्य चन्दर का प्यार हु में। बुध हु में। सेनापति मेरी रक्षा करता है। राहु मेरे आगे नतमस्तक है। शुक्र मुझे बल दे देता है अपना। बुध्जो हु में। पंचम में स्वग्रही या उच्च का होवू तो बिना गुरु के ही तुझे ज्ञानी बना दु। में एकमात्र ऐसा ग्रह हु जिसके बल पे में तुझे गुरु की पदवी दिला सकता हु। अष्टम में में ही तो तुझे अनन्त ज्ञान की गहराइयों में लेके चला जाता हूं। में बुध हु वत्स। मेरी तेज़ी के आगे भी सब फैल है। में इंतज़ार नही करवाता तुझे । तुरन्त फैसला करता हु। जहा बैठूंगा जल्दी जल्दी तुझे वहां के फल प्रदान करूँगा। में बुध हु। में तरी ग्रहण क्षमता हु। तू जो भी ग्रहण कर रहा है सारः से वो में ही तो हु। तेरी बहन में हु। बुआ में हु। बेटी में हु। हंसी में हु। लेखन में हु। बोलने की कला में हु। हाज़िर जीबि में हु। में बुध हु। बाहत कुछ हु में। कहा राहु के चक्कर मे पड़ा है तू। मेरी गुण गाले तू। राहु की माया से दो minut में निकाल के ले अवउँगा तुझे। मेरे रंग में तू रंग जा। में तेरे रंग में रंग जाऊंगा क्योंकि बुध हूँ मैं एस्ट्रो ईश्वर दत्त
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बुध केतु युति बुध जो बुद्धिमत्ता का ग्रह है वाणी संवाद लेखन, तर्क शक्ति, और व्यवसायिक चातुर्य भी बुध के ही अधिपत्य में आते है। व्यक्ति अगर बुद्धि चातुर्य के साथ साथ अच्छा लेखक है , बहुत अच्छा वक्ता है और साथ ही उसकी भाषा पर बहुत अच्छी पकड़ है , तो वो अपनी इन क्षमताओं का उपयोग अच्छे व्यक्तिगत और व्यवसायिक सम्बन्ध बनाने में कर सकता है। बुध प्रधान व्यक्ति हाजिर जवाब होने के साथ साथ अच्छा मित्र भी होता है क्योंकि वो सम्बन्धो को निभाना जानता है। केतु एक विभाजित करने वाला ग्रह , एक संत की तरह जो अकेले रहता है , सुख सुविधाओं और भोग -विलास से पूर्णतः दूर , रिश्तों और उनमे संवाद की जंहा कोई आवश्यकता नहीं। केतु का स्वभाव बुध से पूर्णतः विपरीत है , केतु जब भी किसी ग्रह के साथ होता है तो उसे उसके फल देने से भटकाता है ,बुध का प्रमुख फल बुद्दि (मति) प्रदान करना है , इसलिए बुध – केतु योग को मति भ्रम योग कहते है। केतु और बुध की युति का भी फल इसी प्रकार बुद्धि को भ्रमित करने वाला होता है , हालांकि किस राशि और कुंडली के किस भाव में ये योग बना है इस बात पर भी फल निर्भर करता है। इस योग में बुध के प्रभाव दूषित हो जाते है जैसे बुध की प्रबल होने की परिस्थिति में कोई व्यक्ति बहुत अच्छा वक्ता है तो केतु के साथ आने की परिस्थिति में अर्थ हीन , डींगे हांकने वाला और आवश्यकता से अधिक बोलने वाला हो सकता है , कई बार उसके व्यक्तव्य उसी के लिए परेशानी खड़ी करने वाले हो सकते है (वाणी पर नियंत्रण होना) , यही हाल उसकी वाणिज्यिक योजनाओं का हो सकता है , उसके समीकरण और योजनाएं सत्य से परे हो सकते है जो उसके लिए परेशानी का कारन बन सकते है, या कहे बुद्धि की भ्रमित होने की परिस्थिति का निर्मित होना । उदहारण के लिए आर्थिक परिस्थिति को जांचे बिना व्यापारिक योजना बनाना और आर्थिक स्थिति का ध्वस्त होना । विचारधारा का संकुचित होना पर सोचा का अत्यधिक संवेदनशील होना , हमेशा अज्ञात भय रहना और वाणी पर नियंत्रण न होना बुध केतु योग में बुध बहुत कमजोर हो तो व्यक्ति कम बोलने वाला , संकोची और अपने पक्ष या मन की बात को स्पष्ट रूप से नहीं रख पाने वाला होगा। ऐसे लोग बड़े एकाकी होते है , आपसी रिश्तों में संवाद की कमी के चलते और संकोच के कारन अपनी योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं कर पाते साथ ही व्यापारिक का क्रियान्वयन भी नहीं हो पता। रिश्तों में कई बार धोखा होने की सम्भावना बनी रहती है , विशेषकर व्यवसायिक। बुध केतु युति में आर्थिक उतार चढाव बहुत बार देखा गया है , जिसका कारण बिना परिस्थितियों को समझे निवेश या खर्च करना होता है और व्यापारिक दृष्टिकोण का आभाव। कई बार ये लोग मीत व्ययी और कई बार अति व्ययी हो जाते है , बहुत सी परिस्थितियों में जब बुध अत्यन्त ही कमजोर और दुःस्थान में हो तब ये योग गम्भीर एकाकीपन गम्भीर मानसिक अवसाद जेल योग (या लम्बे समय तक हास्पिटल /सुधार ग्रह तक में रहने की नौबत ला देता है। इस योग की वजह से व्यक्ति दूसरों की बात और सलाह को स्वीकार करने या समझने की परिस्थिति से अत्यन्त दूर होता है जो उसकी आर्थिक परेशानी और एकाकीपन का कारन भी बनता है। इस दुर्योग से बचने के बहुत से तरीके हो सकते है परन्तु मेरी सोच में सबसे सटीक उपाय है , अधिक से अधिक सामाजिक होने की चेष्टा करना और दूसरों की सलाह ले कर आगे बढ़ना , साथ ही धन के निवेश या कोई भी योजना बनते समय सतर्क रहना। बुद्धि के देवता भगवान श्री गणेश की आराधना इस दुर्योग से बचाने का कार्य करती है, अतः विघ्न हर्ता बुद्धि के दाता श्रीगणेश की आराधना करते रहे।
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