top button
    Futurestudyonline Community

जन्माष्टमी ( Janmashtami ) धन लाभ

0 votes
148 views
आर्थिक संकट के निवारण के लिए ,धन लाभ के ;लिए जन्माष्टमी ( Janmashtami ) के दिन प्रात: स्नान आदि करने के बाद किसी भी राधा-कृष्ण मंदिर में जाकर प्रभु श्रीकृष्ण जी को पीले फूलों की माला अर्पण करें। इससे आर्थिक संकट दूर होने लगते है धन लाभ के योग प्रबल होते है । आचार्य शालिनी मल्होत्रा
posted Aug 14, 2017 by Astro Shaliini Malhotra

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
0 votes
जन्माष्टमी विशेष :--- ---------------------- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में मनत मांगने वाले भक्तों ने शुद्ध- पूत होकर पूजाविधि से अलावा सिर्फ "जन्मराशि" के अनुसार नीचे उपलब्ध अलग अलग बैदिक विष्णुमन्त्र को "एकसौ आठ बार" जाप करने के लिए भी मुझे मेरे गुरु से दिग्दर्शन/ आज्ञा मिला था, जिसको आजतक मैंने और मेरे अनुगामी तथा प्रिय यजमानों ने श्रद्धा तथा विश्वास के साथ पालन करते हैं।। राशि मंत्र इस प्रकार है – ------ ---------- ----- ----
0 votes
धन लाभ के बिस्त्रित उपाय,धन प्राप्ती के उपाय एक बार अवश्य पढें एवं शेयर करें ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय वाराणसी 9450537461 आज हम बात करेंगे धन लाभ के विषय में(धन लाभ के लिये बिस्त्रित  उपाय) प्रश्नः धन, संपत्ति एवं वैभव प्राप्त करने हेतु ज्योतिष एवं वास्तु एवं तंत्र.मंत्र के अनुभूत एवं कारगर धन लक्ष्मी प्राप्ति के टोटकों का विस्तारपूर्वक वर्णन करें? संसार का प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह किसी भी जातिएवं  धर्म व संप्रदाय का क्यों न हो, ‘धनवान बनने एवं वैभवशाली जीवन व्यतीत करने की प्रबल इच्छा उसके हृदय में प्रतिपल.प्रतिक्षण विद्यमान रहती है। वेद.पुराण व शास्त्रों में चार पुरूषार्थ कहे गये हैं. ‘धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष’। धर्म को अर्थ खा गया, काम अर्थ में विलोपित हो गया। मोक्ष की किसी को इच्छा नहीं है। अतः ले.देकर केवल ‘अर्थ ही रह गया जिस पर गरीब, अमीर, रोगी, भोगी और योगी का भी ध्यान केन्द्रित है। ’ यहां यह बताना आवश्यक है कि धन लक्ष्मी प्राप्ति के टोटकों का प्रयोग क्यों किया जाए। वास्तव में हर व्यक्ति की इच्छा होती है कि वह अधिक से अधिक धनार्जन करें। परंतु धन का जमा होना तो ‘माता महालक्ष्मी’ को प्रसन्न करके ही किया जा सकता है। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए वैदिक, मांत्रिक, यांत्रिक अनुष्ठान अत्यधिक खर्चीले होते हैं और समय भी अधिक लगता है जो करना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं। फलस्वरूप धन प्राप्ति के लिए अंधी दौड़ लगाने के पश्चात भी निराशा का सामना करना पड़ता है। एतदर्थ आधुनिक परिस्थितियों में धन लक्ष्मी प्राप्ति के टोटकों का सरल एवं सुगम प्रयोग सभी के लिए कल्याणकारी है। जड़ी-बूटियों द्वारा धन प्राप्ति के अति सरल और चमत्कारिक उपाय लंकाधिपति रावण कहता है- हे प्रिय मन्दोदरी ! जगजननी माता पार्वती ने जिन जड़ी-बूटियों के कल्प की महिमा के संबंध में मुझे बताया है, वह तुम्हें बतलाता हूं, ध्यानपूर्वक श्रवण करना। सर्व प्रथम उन जड़ी-बूटियों के गुण बताता हूं, जो धन प्राप्त करने में परम लाभदायक हैं। 1. ‘‘भरणी नक्षत्र’’ में ‘‘कुश’’ का बांदा लाकर अपने घर के पूजा स्थल में लाल कपड़े में लपेट कर रखने से आर्थिक समस्या दूर हो जाती है। 2. ‘‘मृगशिरा नक्षत्र’’ में ‘‘केले’’ के पत्ते का एक छोटा सा टुकड़ा पीले कपड़े में लपेटकर ताबीज की तरह बनाकर पीले धागे में गले या दायीं बाजू में धारण करने से धन प्राप्ति के अवसर प्राप्त होते हैं साथ ही मान-सम्मान और यश-प्रतिष्ठा में भरपूर वृद्धि होती है। 3. ‘‘पुष्य नक्षत्र’’ में रविवार के दिन ‘श्वेतार्क’’ (सफेद अकौआ) की जड़ विधिपूर्वक लाकर सफेद वस्त्र में लपेटकर दाहिनी भुजा में धारण करने से धन प्राप्ति के अवसर प्राप्त होते हैं। 4. ‘‘अश्लेषा नक्षत्र’’ में ‘‘बरगद’’ (वटवृक्ष) का पत्ता लाकर लाल वस्त्र में लपेट कर तिजोरी, कैश बाॅक्स या रूपये-पैसे रखने के स्थान पर रखने से धन घर में भरा रहता है और खजाना कभी खाली नहीं होता। इसे अन्न के स्थान में रखने से घर में अन्न की कमी कभी नहीं होती है। 5. ‘‘मघा नक्षत्र’’ में ‘‘पारिजात’’ (हर शृंगार) का बांदा लाकर पीले वस्त्र में लपेटकर पूजा स्थल पर रखने से धन का लाभ होता है। 6. ‘‘शतभिषा नक्षत्र’’ में लाल रंग की ‘‘घुंघची’’ (रत्ती जिससे स्वर्णकार स्वर्ण की तौल करते हैं) की जड़ लाकर लाल वस्त्र में रखकर गले या दायीं बाजू में धारण करने से धन-वृद्धि के साथ समस्त कार्यों में भी सफलता प्राप्त होती है। 7. ‘‘सूर्य या चंद्र ग्रहण’’ के समय ‘‘शंखपुष्पी’’ की जड़ लाकर घर के पूजा स्थल पर रखने से धन में पूर्ण वृद्धि होती है तथा धन प्राप्ति के अवसर भी प्राप्त होते हैं। 8. माता महालक्ष्मी के चित्र या प्रतिमा पर 41 दिन तक आंवला फल प्रसाद रूप में चढ़ायें तथा लगातार 41 दिन तक आंवलावृक्ष की जड़ में जल चढ़ायें। 9. ‘‘पीपल वृक्ष’’ की जड़ में प्रतिदिन दूध, शक्कर या गुड़ मिश्रित जल चढ़ाएं। 10. ‘‘सहदेवी पौधे की जड़’’ को किसी भी शुभ मुहूर्त में लाकर लाल वस्त्र में लपेट कर गले या बाजू में धारण करने से दरिद्रता का नाश होता है तथा तांत्रिक बाधाएं भी दूर होती हैं और धन की प्राप्ति होती है। 11. सोमवार के दिन ‘‘एकाक्षी नारियल’’ घर के पूजा स्थल पर स्थापित करने से धन प्राप्ति के रास्ते खुलते हैं। 12. ‘‘निर्गुण्डी की जड़’’ पीली सरसों के साथ पीले वस्त्र में बांधकर दुकान या व्यवसाय स्थल पर लटकाने से व्यवसाय में चमत्कारिक सफलता प्राप्त होती है। 13. ‘‘तुलसी’’ का पौधा घर में लगाकर प्रतिदिन प्रातः स्नानादि कर उस पर जल चढ़ायें तथा सुगंधित धूप जलायें तथा शाम को भी शुद्ध होकर घी का दीपक जलाकर धूप जलाएं। 14. अशोक, अनार, आम, गूलर, पीपल, बरगद आदि वृक्षों में किसी का बांदा शुभमुहूर्त में लाकर धन स्थान में रखने से धन की वृद्धि होती है। 15. जिस वृक्ष पर चमगादड़ों का स्थाई निवास हो उस वृक्ष की एक छोटी सी टहनी रविवार को तोड़कर कपड़े में लपेटकर अपने व्यवसाय की गद्दी के नीचे रखें या कुर्सी से बांध दें तो धन के साथ-साथ व्यवसाय में वृद्धि होगी। 16. हरिद्रा अर्थात् हल्दी कई प्रकार की होती है। एक हल्दी खाने के काम आती है व चोट लगने तथा औषधीय रूप में प्रयोग होती है। ये सभी पीले रंग की होती हैं और पवित्रता का तत्व सभी में होता है। इन्हीं हल्दियों में से काली हल्दी भी प्राप्त होती है। यह अगर किसी को प्राप्त हो जाये तो समझना चाहिए कि लक्ष्मी प्राप्त करने का एक श्रेष्ठ देवी साधन प्राप्त हो गय है 17. दूर्वा अर्थात् दूब। यह एक प्रकार की घास होती है। श्री गणेश भगवान को यह अत्यंत प्रिय है। कोई भी व्यक्ति इस उपाय को शुक्ल पक्ष के प्रथम बुधवार से प्रारंभ कर सकता है। प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर श्री गणेश जी के चित्र या प्रतिमा के समक्ष धूप-दीप जलाकर गुड़ का भोग लगायें और 108 दूर्वादल श्री गणेश जी के चरणों में अर्पित करें। यह क्रिया 41 दिन लगातार करें। इसके पश्चात धन उपार्जन के कार्य हेतु कहीं जायें तो चित्र या प्रतिमा पर अर्पित दूर्वादलों में से 9 दूर्वादल प्रसाद स्वरूप लाल वस्त्र में लपेटकर अपनी जेब में रख लें। यह उपाय धनोपार्जन एवं कार्य सिद्धि की अद्भुत एवं चमत्कारिक कुंजी है। 18. पीपल के पत्ते पर ‘‘राम’’ लिखकर उस पर कोई मिष्टान्न रखकर श्रीहनुमान मंदिर में चढ़ाने से धन लाभ होता है। 19. किसी भी मास के प्रथम शुक्रवार को लाल कमल का पुष्प लाकर कुमकुम से तिलक लगाकर लाल वस्त्र के ऊपर रखकर धूप-दीप दिखाकर उसी वस्त्र में लपेटकर धन स्थान पर रखने से धन वृद्धि होती है। 20. ‘‘अशोक वृक्ष’’ की जड़ का टुकड़ा लाकर पूजा स्थल में रखकर नित्य धूप-दीप करने से धन सम्पत्ति की प्रचुरता रहती है। शंख तंत्र द्वारा धन प्राप्ति के उपाय: 1. माता लक्ष्मी जी के चित्र या प्रतिमा के दोनों चरण शंख में जलभर कर धोयें और उनके समक्ष दीप व धूप जलाकर नमस्कार करें। 2. ‘‘दक्षिणावर्ती’’ शंख पूजा स्थल में स्थापित कर नित्य धूप-दीप जलायें। 3. नित्य प्रातः स्नानादि से निवृत्त होकर शंख में जल भरकर तुलसी वृक्ष की जड़ में चढ़ायें साथ ही धूप जलाकर नमस्कार कर एक तुलसी का पत्ता तोड़कर प्रसाद समझकर मुख में डाल लें। 4. माह के प्रथम शुक्रवार को एक ‘‘मोती’’ शंख में चांदी का एक सिक्का रखकर उसमें साबुत चावल भर दें फिर लाल कपडे़ पर रखकर रोली व केसर का तिलक करें तथा कमलगट्टे की माला से ‘‘ऊँ श्रीं श्रिययै नमः’’ मंत्र का यथाशक्ति जाप करें। इस प्रकार लगातार 5 शुक्रवार तक जप करें। अंतिम दिन किसी कन्या को भोजन करायें। दक्षिणा देकर विदा करें फिर उस शंख को उसी लाल वस्त्र में लपेटकर धन स्थान पर रख दें। आर्थिक अस्थिरता से मुक्ति मिलेगी। 5. माह के प्रथम रविवार को सायंकाल मोती शंख में चांदी का सिक्का डालकर उसमें जलभर दें अगले दिन सोमवार को प्रातः उठते ही वह जल पी लें। इस उपाय से चंद्र की अनुकूलता के साथ माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होगी। जिनकी पत्रिका में चंद्र प्रतिकूल हो वह भी इस उपाय से लाभ उठा सकते हैं। कौड़ी तंत्र द्वारा धन प्राप्ति के उपाय: 1. गुरुवार या रविवार के पुष्य नक्षत्र में हल्दी से रंगकर 21 कौड़ियां पीले वस्त्र में बांधकर धन स्थान पर रखने से धन की स्थिरता बनी रहेगी। 2. किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार या रविवार को 21 कौड़ी तथा 11 गोमती चक्र पीले वस्त्र पर रख हल्दी से तिलक करें व धूप-दीप दिखाकर उसी वस्त्र में बांधकर पूजा स्थल पर रखने से माता लक्ष्मी की सदैव कृपा बनी रहती है। 3. सात पीली कौड़ी अपने गल्ले या तिजोरी में रखने से आय में वृद्धि होती है। काले चावल द्वारा धन प्राप्ति: ये चावल किसी भी प्रजाति के हो सकते हैं। सफेद चावलों में ही कभी-कभी काले चावल के कुछ दाने भी आ जाते हैं। यदि यह आपको प्राप्त हो जाये तो विधानपूर्वक इनकी पूजा कर धूप-दीप दिखाकर अपने पास रखें। जब आवश्यकता हो तो निम्न उपाय करें: 1. काले चावलों को लाल वस्त्र में धन स्थान पर रखने से आर्थिक अस्थिरता दूर होकर धन वृद्धि होती है। 2. आर्थिक समृद्धि चाहने वाले किसी भी मास के प्रथम शुक्रवार को लाल या पीले रेशमी वस्त्र में कुछ काले चावल के दाने, 7 काली हल्दी की गांठ, 7 गोमती चक्र तथा 11 पीली कौड़ी बांधकर धन स्थान पर रख दें। इस उपाय से आपके निवास में माता लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करेंगी। हत्था जोड़ी का प्रयोग: यह कुश वृक्ष की जड़ में प्राप्त होती है। इसकी आकृति हाथ के पंजे जैसी होती है। दिखने में ऐसा लगता है जैसे हाथ के दो पंजों को मुट्ठी का रूप देकर कलाई की तरफ से जोड़कर एक साथ कर दिया गया है। किसी शुभ मुहूर्त में इसे प्राप्त करें तथा लाल रेशमी वस्त्र में सिंदूर, 11 साबुत लौंग और हत्था जोड़ी के साथ धन स्थान पर रख दें। धन वृद्धि के साथ गुप्त शत्रुओं तथा तांत्रिक बाधाओं से मुक्ति मिलती है।। उल्लू के नाखून द्वारा धन प्राप्ति: किसी भी शुभ समय में उल्लू का नाखून या नाखून सहित पंजा प्राप्त करें व लाल रेशमी वस्त्र में लपेटकर धूप-दीप दिखाकर अलमारी में रखने से मां लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होगी। ऊँट कटैला का धन प्राप्ति में प्रयोग: यह पौधा राजस्थान में पाया जाता है। कांटे वाला यह पौधा ऊँटों के द्वारा बड़े चाव से खाया जाता है। शायद इसी कारण इसका नाम ऊँट कटैला रखा गया। ‘‘पूर्वा फाल्गुनी’’ नक्षत्र में विधि पूर्वक आमंत्रित कर लाल वस्त्र में लपेटकर घर लाएं व धूप-दीप अर्पित कर लाल वस्त्र में लपेटकर धन स्थान पर रखने से आर्थिक वृद्धि होती है। अश्वजिह्वा द्वारा प्राप्ति: जब घोड़ी का प्रसव होता है तो उसकी जीभ का अगला भाग स्वतः टूट कर गिर जाता है। जो इसको प्राप्त कर लेता है उसकी किस्मत ही बदल जाती है। यह बिल्ली की जेर की तरह ही दुर्लभ है। किसी शुभ समय में इसे अभिमंत्रित करवाकर इस पर हल्दी लगाकर चांदी की डिब्बी में रख दें फिर धूप-दीप अर्पित करें तथा मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हुए धन स्थान पर रख दें। मां लक्ष्मी का स्थायी वास होगा। यंत्रों द्वारा प्राप्ति: 1. धन वृद्धि यंत्र: इस यंत्र को आलू के रस में लिखकर (कागज, भोजपत्र) ‘‘ऊँ लं सं पं दं बं नं नमः’’ मंत्र से अभिमंत्रित कर धूप-दीप दिखाकर पूजा स्थल पर सुरक्षित रूप से रखें व नित्य सुबह-शाम धूप-दीप दिखायें। माता लक्ष्मी प्रसन्न होंगी व धन की कमी नहीं रहेगी। 2. श्री कुबेर यंत्र: इस यंत्र को शुद्ध घी में सिंदूर मिलाकर व्यापार स्थल की दीवार तथा धन स्थान पर रखने वाली जगह पर लिखें। रोजाना धूप-दीप जलायें। व्यापार की व धन की प्रतिदिन वृद्धि होगी। भोजपत्र पर लिखकर दायीं भुजा पर धारण करने से आयु की वृद्धि होगी। 3. धन प्राप्ति यंत्र: इस यंत्र को शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से केसर की स्याही से भोजपत्र के ऊपर प्रतिदिन 125 की संख्या में लिखें। 40 दिन में 5000 हो जायेंगे। 41वें दिन एक यंत्र को छोड़कर जो अंतिम दिन अंतिम बार बनाया हो शेष को बहते जल में प्रवाहित करें व एक यंत्र को चांदी के ताबीज में भरकर धूप-दीप दिखाकर गले या दायीं भुजा में धारण करें तो आजीवन आश्चर्यजनक रूप से धन प्राप्त होता रहेगा तथा जीवन में कभी भी धन की कमी न होगी। 4. स्वास्तिक बीसा यंत्र यंत्र: इस यंत्र को सफेद कागज या भोजपत्र पर लाल स्याही से लिखकर घर के पूजा स्थल या व्यापार स्थल पर रखकर पुष्प, धूप-दीप अर्पित कर ‘‘ऊँ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरी स्वाहा’’ मंत्र का एक माला नित्य जाप करने से लक्ष्मी की प्राप्ति व हर मनोकामना पूर्ण होती है। मान-सम्मान बढ़ता है। 5. महालक्ष्मी बीसा यंत्र: इस यंत्र को सफेद कागज पर केसर से लिखकर तांबे के ताबीज में डालकर ‘‘ऊँ ह्रीं श्रीं नमः’’ मंत्र से अभिमंत्रित कर धूप-दीप दिखाकर अपने पास रखें तो धन प्राप्ति के साथ मान-सम्मान में वृद्धि होगी। 6. धनप्रद भाग्योदयकारी यंत्र: इस यंत्र को दुकान या मकान के पूजा घर की दीवार पर शुद्ध घी और सिंदूर मिलाकर लिखें व पंचोपचार पूजा करें तथा एक माला ‘‘ऊँ श्रीं लक्ष्मी दैव्ये नमः’’ का रोजाना जाप करने से कर्ज से मुक्ति, व्यापार वृद्धि, धन वृद्धि होकर सारे सुख प्राप्त होते हैं। 7. लक्ष्मी प्राप्ति व व्यापारवर्धक यंत्र: उपरोक्त यंत्र क्रः 7/8 को रवि पुष्य में केसर, लाल चंदन, कुमकुम से या अष्टगंध से लिखकर (लिखने हेतु भोजपत्र) ‘‘ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः’’ का जाप करने से दिनों दिन धन की वृद्धि होती है तथा धन की कमी नहीं होती है। 8. मनोकामना यंत्र: (कलम अनार की) कांच के फ्रेम में मंढ़वाकर घर या दुकान के पूजा स्थल पर स्थापित करें व नित्य एक माला लक्ष्मी मंत्र ‘‘ऊँ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः’’ का जाप करने से दिनों दिन धन की वृद्धि होती है तथा धन की कमी नहीं होती है। 9. धन प्राप्त करने हेतु बीसा यंत्र: इस यंत्र को सफेद कागज या भोजपत्र पर केसर की स्याही से लिखकर तांबे के ताबीज में भरकर ‘‘ऊँ क्लीं श्रीं धनं कुरु कुरु स्वाहा’’ मंत्र से अभिमंत्रित कर धूप-दीप दिखाकर अपने गले में धारण करें व उपरोक्त मंत्र की एक माला जाप नित्य करें। 10. आजीविका व धन प्राप्ति का बीसा यंत्र: इस यंत्र को मंगलवार या गुरुवार को भोजपत्र पर केसर से लिखकर (अनार की कलस से) धूप देकर तांबे के ताबीज में डालकर दाहिनी भुजा में धारण करने से नौकरी व धन प्राप्त होता है। 11. लक्ष्मी प्राप्ति का अमोघ चैंतीसा लक्ष्मी यंत्र: इस यंत्र को केशर की स्याही से अनार की कलम से भोजपत्र पर गुरु या रवि पुष्य में लिखें तथा फ्रेम करवाकर दुकान या घर के पूजा स्थल में स्थापित कर नित्य धूप-दीप कर ग्यारह माला ‘‘ऊँ ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरी स्वाहा’’ मंत्र का जाप करें या तांबे के ताबीज में डालकर गले में धारण करने से सम्पत्ति, व्यापार, यश मान-प्रतिष्ठा में दिनों दिन बढ़ोत्तरी होगी। 12. लक्ष्मी प्राप्ति का बीसा यंत्र: इस यंत्र को केसर से भोजपत्र पर लिखकर अपने पर्स, पूजा स्थान, तिजोरी या कैश बाॅक्स में रखने से कभी धन की कमी नहीं होगी। सुख-समृद्धि व मान-सम्मान दिलाने वाले अचूक उपाय:
0 votes

krishna janmastami celebrations

 

 

more details available at

 

How India Celebrates Krishna Janmashtami - http://www.awesomecuisine.com/foodguide/23797/india-celebrates-krishna-janmashtami.htm

 

let us celebrate krishna ashtamil and get his blessings for a happy future.

0 votes
14-8-2017 को अष्टमी तिथि ७:४५ शाम से लगेगी , जिसका फल शास्त्रोक्त नहीं है। १५ -८-२०१७ को अष्टमी सायं ५:३९ तक है जो उदय व्यपीनी होने से रात्रि में भी मान्य होगी । और रोहिणी नक्षत्र भी २:३० से प्रारम्भ होगा । ये न कुर्वन्ति जानन्त: कृष्णजन्माष्टमी व्रतं। ते भवन्ति नरा: प्राज्ञ! व्यालव्याघ्राश्च कानने।। अष्टमी कृष्णपक्षस्य, रोहणी संयुता यदि। भवेत प्रौ ष्ठ पदे मा सि जयन्ति नाम सा समुता।।( वि. र.) इन दो श्लोकों में से पहिले में केवल अष्टमी तथा दूसरे में जयंती नाम होने से पता चलता है कि जन्माष्टमी के दो भेद है- (1) अष्टमी,(2) जयन्ति। जयंती में यदि रोहिणी का योग रात दिन होतो सर्वश्रेष्ठ, रात ही में होतो मध्यम और केवल दिन में होतो सामान्य है। किंतु यदि यदि जन्माष्टमी में रोहिणी का योग हो जावे तो जन्माष्टमी का जयंती में अंतर्भाव हो जाने के कारण फिर पृथक व्रत न करना चाहिए।जैसा कि मदन रत्न, निर्णायामृत, इत्यादि ग्रंथों के देखने से पता चलता है:- यस्मिन वर्षे जेन्त्याख्यो योगी जन्माष्टमी तदा। अन्तर्भूता जयंतयां स्याद्रहक्षयोग प्रशस्तितत:।। विष्णु धर्म में भी कहा है:- रोहिन्यामधर्मरात्रे च यदा कृष्णाष्टमी भवेत। तस्यामभ्यरचन शोरे रह्न्ति पापं त्रिजन्मजम।। अर्धरात्रि में कृष्णअष्टमी, मेंरोहिणी दिखाय। तीन जन्म का पाप तब हरिपुजे कटि जाय।। त्रेतायां द्वापरे चैव राजन! कृत युगे तथा। रोहिणी सहिता चेय विद्वदिभ: समुपोषिता।। अतः परै महिपाल! संप्राप्ते तामसे कलौ। जन्मना वासुदेवस्य भविता व्रतमुत्त मम।। इन श्लोको के आधार से कलिकाल में अष्टमी ही को व्रत मानना बताया गया है जयंती को नहीं, तथापि यह बात ठीक नहीं। क्योंकि श्लोक में ' तमि से कलौ' यह शब्द देखने से पता चलता है कि यह जयंती योग कलिकाल में यह योग दुर्लभ है। उक्त विवरणों अनुसार १५-८-२०१७ मंगलवार को श्री कृष्णजन्मोत्सब मनाना उत्तम है। जन्माष्टमी 15 को मनाई जायेगी
0 votes
ग्रह योग जो छप्पर फाड़ के देते हैं धन यदि आप Rich बनने का सपना देखते हैं, तो अपनी जन्म कुण्डली में इन ग्रह योगों को देखकर उसी अनुसार अपने प्रयासों को गति दें। १ यदि लग्र का स्वामी दसवें भाव में आ जाता है तब जातक अपने माता-पिता से भी अधिक धनी होता है। २ मेष या कर्क राशि में स्थित बुध व्यक्ति को धनवान बनाता है। ३ जब गुरु नवे और ग्यारहवें और सूर्य पांचवे भाव में बैठा हो तब व्यक्ति धनवान होता है। ४ शनि ग्रह को छोड़कर जब दूसरे और नवे भाव के स्वामी एक दूसरे के घर में बैठे होते हैं तब व्यक्ति को धनवान बना देते हैं। ५ जब चंद्रमा और गुरु या चंद्रमा और शुक्र पांचवे भाव में बैठ जाए तो व्यक्ति को अमीर बना देते हैं। ६ दूसरे भाव का स्वामी यदि ८ वें भाव में चला जाए तो व्यक्ति को स्वयं के परिश्रम और प्रयासों से धन पाता है। ७ यदि दसवें भाव का स्वामी लग्र में आ जाए तो जातक धनवान होता है। ८ सूर्य का छठे और ग्यारहवें भाव में होने पर व्यक्ति अपार धन पाता है। विशेषकर जब सूर्य और राहू के ग्रहयोग बने। ९ छठे, आठवे और बारहवें भाव के स्वामी यदि छठे, आठवे, बारहवें या ग्यारहवे भाव में चले जाए तो व्यक्ति को अचानक धनपति बन जाता है। १० यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हों और ग्यारहवें भाव में शनि या मंगल या राहू बैठा हो तो व्यक्ति खेल, जुंए, दलाली या वकालात आदि के द्वारा धन पाता है। ११ मंगल चौथे भाव, सूर्य पांचवे भाव में और गुरु ग्यारहवे या पांचवे भाव में होने पर व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से, खेती से या भवन से आय प्राप्त होती है, जो निरंतर बढ़ती है। १२ गुरु जब कर्क, धनु या मीन राशि का और पांचवे भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति पुत्र और पुत्रियों के द्वारा धन लाभ पाता है। १३ राहू, शनि या मंगल और सूर्य ग्यारहवें भाव में हों तब व्यक्ति धीरे-धीरे धनपति हो जाता है। १४ बुध, शुक और शनि जिस भाव में एक साथ हो वह व्यक्ति को व्यापार में बहुत ऊंचाई देकर धनकुबेर बनाता है १५ दसवें भाव का स्वामी वृषभ राशि या तुला राशि में और शुक्र या सातवें भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति को विवाह के द्वारा और पत्नी की कमाई से बहुत धन लाभ होता है। १६ शनि जब तुला, मकर या कुंभ राशि में होता है, तब आंकिक योग्यता जैसे अकाउण्टेट, गणितज्ञ आदि बनकर धन अर्जित करता है। १७ बुध, शुक्र और गुरु किसी भी ग्रह में एक साथ हो तब व्यक्ति धार्मिक कार्यों द्वारा धनवान होता है। जिनमें पुरोहित, पंडित, ज्योतिष, प्रवचनकार और धर्म संस्था का प्रमुख बनकर धनवान हो जाता है। १८ कुण्डली के त्रिकोण घरों या चतुष्कोण घरों में यदि गुरु, शुक्र, चंद्र और बुध बैठे हो या फिर ३, ६ और ग्यारहवें भाव में सूर्य, राहू, शनि, मंगल आदि ग्रह बैठे हो तब व्यक्ति राहू या शनि या शुक या बुध की दशा में अपार धन प्राप्त करता है। १९ गुरु जब दसर्वे या ग्यारहवें भाव में और सूर्य और मंगल चौथे और पांचवे भाव में हो या ग्रह इसकी विपरीत स्थिति में हो व्यक्ति को प्रशासनिक क्षमताओं के द्वारा धन अर्जित करता है। २० यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हों और ग्यारहवें भाव में केतु को छोड़कर अन्य कोई ग्रह बैठा हो, तब व्यक्ति व्यापार-व्यवसार द्वारा अपार धन प्राप्त करता है। यदि केतु ग्यारहवें भाव में बैठा हो तब व्यक्ति विदेशी व्यापार से धन प्राप्त करता है।
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...