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श्राद्धकाल मे क्या करे

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श्राद्धकाल मे गाय, कुत्ता, कौआ, चीटी तथा देवताओं के लिए पांच ग्रास जरूर निकाले, गाय के लिए निकाले ग्रास को गाय को ही , कुत्ते, कौअे तथा चीटी के निमित निकाले ग्रास को क्रमशः इन्हे ही दे, देवताओं के निमित्त निकाले ग्रास को गाय को ही खिलाये । गाय तथा देवता देवतत्व है, कौआ वायुतत्व,( गंध तथा स्पर्श ) कुत्ता अग्नि तत्व (गंध और श्रवण ) तथा चीटी पृथ्वी तत्व ( पुरुषार्थ का प्रतीक है )
posted Sep 4, 2017 by Astro Shaliini Malhotra

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श्रावण  मास के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर कुछ विशेष वास्तु अर्पित की जाती है जिसे शिवामुट्ठी कहते है।
1. प्रथम सोमवार को कच्चे चावल एक मुट्ठी,
2. दूसरे सोमवार को सफेद तिल् एक मुट्ठी,
3. तीसरे सोमवार को खड़े मूँग एक मुट्ठी,
4. चौथे सोमवार को जौ एक मुट्ठी और
5. यदि जिस मॉस में पांच सोमवार हो तो पांचवें सोमवार को सतुआ चढ़ाने जाते हैं। 
यदि पांच सोमवार  न हो तो आखरी सोमवार को दो मुट्ठी भोग अर्पित करते है।
माना जाता है कि श्रावण मास में शिव की पूजा करने से सारे कष्ट खत्म हो जाते हैं। महादेव शिव सर्व समर्थ हैं। वे मनुष्य के समस्त पापों का क्षय करके मुक्ति दिलाते हैं। इनकी पूजा से ग्रह बाधा भी दूर होती है।
1. सूर्य से संबंधित बाधा है, तो विधिवत या पंचोपचार के बाद लाल { बैगनी } आक के पुष्प एवं पत्तों से शिव की पूजा करनी चाहिए।
2. चंद्रमा से परेशान हैं, तो प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर गाय का दूध अर्पित करें। साथ ही सोमवार का व्रत भी करें।
3. मंगल से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गिलोय की जड़ी-बूटी के रस से शिव का अभिषेक करना लाभप्रद रहेगा।
4. बुध से संबंधित परेशानी दूर करने के लिए विधारा की जड़ी के रस से शिव का अभिषेक करना ठीक रहेगा।
5. बृहस्पति से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए प्रत्येक बृहस्पतिवार को हल्दी मिश्रित दूध शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए।
6. शुक्र ग्रह को अनुकूल बनाना चाहते हैं, तो पंचामृत एवं घृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।
7. शनि से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गन्ने के रस एवं छाछ से शिवलिंग का अभिषेक करें।
8-9. राहु-केतु से मुक्ति के लिए कुश और दूर्वा को जल में मिलाकर शिव का अभिषेक करने से लाभ होगा।

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5 जून से 5 जुलाई 2020 के बीच मे तीन ग्रहण है l एक महीने में तीन ग्रहण , दो चंद्र ग्रहण , एक सूर्य ग्रहण l जब कभी एक महीने में तीन से ज्यादा ग्रहण आ जाये तो एक चिंता का विषय बनता है l 5 जून 2020 चंद्रग्रहण प्रारंभ रात 11:15 मिनिट समाप्ति 6 जून सुबह 2:34 चंद्र ग्रहण जिसमे शुक्र वक्री और अस्त रहेगा गुरु शनि वक्री रहेंगे तो तीन ग्रह वक्री रहेंगे, जिसके कारण जिसके प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर होगा। शेयर बाजार से जुड़े हुए लोग सावधान रहें। यह ग्रहण वृश्चिक राशि पर बहोत बुरा प्रभाव डालेगा। 21 जून 2020 सूर्य ग्रहण, एक साथ छ ग्रह वक्री रहेंगे बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु यह छह ग्रह 21 जून 2020 को वक्री रहेंगे। 5 जुलाई 2020 चंद्रग्रहण एक बहुत बड़ा परिवर्तन l मंगल का राशि परिवर्तन, सूर्य का राशि परिवर्तन, गुरु धनु राशि मे वापस, लेकिन वक्री रहेंगे। शुक्र मार्गी l
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विषयोग एक ऐसा योग है तो जहर की तरह विषैला है।यह योग चंद्र और शनि के योग से बनता है।जब भी शनि चन्द्र की युति किसी भाव(घर) मे होती है या शनि चन्द्र का दृष्टि संबंध हो या शनि चन्द्र या राशि परिवर्तन हो शनि चन्द्र की राशि मे और चन्द्र शनि की राशि मे हो तब यह योग बनेगा।इसमे शनि चन्द्र का किसी एक भाव मे एक साथ होना सबसे खराब स्थिति होती है, इसके बाद शनि चन्द्र का दृष्टि संबंध और इसके बाद सबसे कम चन्द्र शनि में राशि परिवर्तन होना जैसे कि चन्द्रमा मकर या कुम्भ में हो और शनि कर्क राशि मे होगा यह सबसे कम प्रभावी होता।अमूमन यह योग अशुभ ही होता है जातक को उस भाव से संबंधित निराशाएं मिलती है जिस भाव मे शनि चन्द्र बैठे हो और शनि चन्द्र जिस भाव के स्वामी होते है ऐसे भाव के फल में दिक्कते, समस्याएं, असफलता मिलती है लेकिन कुछ स्थितियां ऐसी होती है जब विषयोग भी सामान्य हो जाता है या कोई खास अशुभ प्रभाव नही दिखाता जैसे यदि चन्द्र और शनि केंद्र त्रिकोण के स्वामी हो जैसे तुला लग्न में शनि चौथे, पाचवे भाव का स्वामी होकर योगकारक होता है तो चन्द्र दशम भाव केंद्र का स्वामी यदि अब विषयोग बनेगा तो ज्यादा अशुभ प्रभावी न होगा, इसी तरह विषयोग बनने पर चन्द्र शनि पर बलवान शुभ गुरु का दृष्टि प्रभाव होगा तब भी इस योग की अशुभता में कमी आ जायेगी।। मुख्य रूप से यह मानसिक उदासी, खुशियो में कमी देता है ऐसे जातक/जातिका अंदर से बहुत अकेले होंगे।। क्योंकि चन्द्र मतलब मन और शनि मतलब विष जब मन(चन्द्र) और विष(शनि) आपस मे एक साथ होंगे तो विषरूपी विषयोग का अशुभ प्रभाव कुंडली के उस भाव भावेश पर रहेगा जिस भाव मे शनि चन्द्र बैठे है और जिन भावो के स्वामी है।। #उदाहरण:- यदि शनि चन्द्र दसवे भाव मे एक साथ बैठ जाये तो नोकरी या कार्य छेत्र से कभी भी न संतुष्टि मिलेगी, और सफलता में कमी रहकर मन के विपरीत जाकर नोकरी में काम करने पड़ते है मतलब संघर्ष होगा।इस तरह से विषयोग का ओरभवि रहता है हालांकि कुंडली मे इस योग के समाधान के कुछ योग ओर भी होते है जैसे कि #नवमांश_कुंडली मे शनि चन्द्र का संबंध न हो और चन्द्र गुरु या शुक्र के साथ संबंध बना के।चन्द्र नवमांश कुंडली मे बहुत बलवान हो और किसी भी पाप ग्रह के प्रभाव में न हो।। #नोट:- यह योग तब बहुत ज्यादा अशुभ होता है जब शनि चन्द्र मेष, वृश्चिक राशि मे या विषयोग बनाकर शनि मेष में और चन्द्र वृश्चिक राशि मे हो क्योंकि यहाँ यह नीच राशि के होते है जो ज्यादा खराब स्थिति हो जाती है।
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