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ग्रहों से होने वाली परेशानियां

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ग्रहों से होने वाली परेशानियां प्रत्येक जातक की कुंडली में अशुभ ग्रहों की स्थिति अलग-अलग रहती है। कुंडली में कुल बारह भाव होते हैं सभी भाव के अलग-अलग स्वामी होते हैं। आप खुद ही देख सकते हैं की कौन सा ग्रह खराब है और उसका उपाय कैसे करें। ग्रहों से होने वाली परेशानियां इस प्रकार हैं। सूर्य : सरकारी नौकरी या सरकारी कार्यों में परेशानी, सिर दर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग, अस्थि रोग, चर्म रोग, पिता से अनबन आदि। चंद्र : मानसिक परेशानियां, अनिद्रा, दमा, कफ, सर्दी, जुकाम, मूत्र रोग, स्त्रियों को मासिक धर्म, निमोनिया। मंगल : अधिक क्रोध आना, दुर्घटना, रक्त विकार, कुष्ठ रोग, बवासीर, भाइयों से अनबन आदि। बुध : गले, नाक और कान के रोग, स्मृति रोग, व्यवसाय में हानि, मामा से अनबन आदि। गुरु : धन व्यय, आय में कमी, विवाह में देरी, संतान में देरी, उदर विकार, गठिया, कब्ज, गुरु व देवता में अविश्वास आदि। शुक्र : जीवन साथी के सुख में बाधा, प्रेम में असफलता, भौतिक सुखों में कमी व अरुचि, नपुंसकता, मधुमेह, धातु व मूत्र रोग आदि। शनि : वायु विकार, लकवा, कैंसर, कुष्ठ रोग, मिर्गी, पैरों में दर्द, नौकरी में परेशानी आदि। राहु : त्वचा रोग, कुष्ठ, मस्तिष्क रोग, भूत प्रेत वाधा, दादा से परेशानी आदि। केतु : नाना से परेशानी, भूत-प्रेत, जादू टोने से परेशानी, रक्त विकार, चेचक आदि।

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Problems related to nine planets
posted Jul 22 by Deepika Maheshwary

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ग्रह बाधा होने से पूर्व मिलते हैं ये संकेत: ग्रह अपना शुभाशुभ प्रभाव गोचर एवं दशा-अन्तर्दशा-प्रत्यन्तर्दशा में देते हैं । जिस ग्रह की दशा के प्रभाव में हम होते हैं, उसकी स्थिति के अनुसार शुभाशुभ फल हमें मिलता है । जब भी कोई ग्रह अपना शुभ या अशुभ फल प्रबल रुप में देने वाला होता है, तो वह कुछ संकेत पहले से ही देने लगता है ।इनके उपाय करके बढ़ी समस्याओं से बचा जा सकता है | ऐसे ही कुछ पूर्व संकेतों का विवरण यहाँ दिया है – सूर्य के अशुभ होने के पूर्व संकेत – सूर्य अशुभ फल देने वाला हो, तो घर में रोशनी देने वाली वस्तुएँ नष्ट होंगी या प्रकाश का स्रोत बंद होगा । जैसे – जलते हुए बल्ब का फ्यूज होना, तांबे की वस्तु खोना । किसी ऐसे स्थान पर स्थित रोशनदान का बन्द होना, जिससे सूर्योदय से दोपहर तक सूर्य का प्रकाश प्रवेश करता हो । ऐसे रोशनदान के बन्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं । जैसे – अनजाने में उसमें कोई सामान भर देना या किसी पक्षी के घोंसला बना लेने के कारण उसका बन्द हो जाना आदि । सूर्य के कारकत्व से जुड़े विषयों के बारे में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है । सूर्य जन्म-कुण्डली में जिस भाव में होता है, उस भाव से जुड़े फलों की हानि करता है । यदि सूर्य पंचमेश, नवमेश हो तो पुत्र एवं पिता को कष्ट देता है । सूर्य लग्नेश हो, तो जातक को सिरदर्द, ज्वर एवं पित्त रोगों से पीड़ा मिलती है । मान-प्रतिष्ठा की हानि का सामना करना पड़ता है । किसी अधिकारी वर्ग से तनाव, राज्य-पक्ष से परेशानी । यदि न्यायालय में विवाद चल रहा हो, तो प्रतिकूल परिणाम । शरीर के जोड़ों में अकड़न तथा दर्द । किसी कारण से फसल का सूख जाना । व्यक्ति के मुँह में अक्सर थूक आने लगता है तथा उसे बार-बार थूकना पड़ता है । सिर किसी वस्तु से टकरा जाता है । तेज धूप में चलना या खड़े रहना पड़ता है । चन्द्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत जातक की कोई चाँदी की अंगुठी या अन्य आभूषण खो जाता है या जातक मोती पहने हो, तो खो जाता है । जातक के पास एकदम सफेद तथा सुन्दर वस्त्र हो वह अचानक फट जाता है या खो जाता है या उस पर कोई गहरा धब्बा लगने से उसकी शोभा चली जाती है । व्यक्ति के घर में पानी की टंकी लीक होने लगती है या नल आदि जल स्रोत के खराब होने पर वहाँ से पानी व्यर्थ बहने लगता है । पानी का घड़ा अचानक टूट जाता है । घर में कहीं न कहीं व्यर्थ जल एकत्रित हो जाता है तथा दुर्गन्ध देने लगता है । उक्त संकेतों से निम्नलिखित विषयों में अशुभ फल दे सकते हैं -> माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है या अन्य किसी प्रकार से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है । नवजात कन्या संतान को किसी प्रकार से पीड़ा हो सकती है । मानसिक रुप से जातक बहुत परेशानी का अनुभव करता है । किसी महिला से वाद-विवाद हो सकता है । जल से जुड़े रोग एवं कफ रोगों से पीड़ा हो सकती है । जैसे – जलोदर, जुकाम, खाँसी, नजला, हेजा आदि । प्रेम-प्रसंग में भावनात्मक आघात लगता है । समाज में अपयश का सामना करना पड़ता है । मन में बहुत अशान्ति होती है । घर का पालतु पशु मर सकता है । घर में सफेद रंग वाली खाने-पीने की वस्तुओं की कमी हो जाती है या उनका नुकसान होता है । जैसे – दूध का उफन जाना । मानसिक रुप से असामान्य स्थिति हो जाती है मंगल के अशुभ होने के पूर्व संकेत भूमि का कोई भाग या सम्पत्ति का कोई भाग टूट-फूट जाता है । घर के किसी कोने में या स्थान में आग लग जाती है । यह छोटे स्तर पर ही होती है । किसी लाल रंग की वस्तु या अन्य किसी प्रकार से मंगल के कारकत्त्व वाली वस्तु खो जाती है या नष्ट हो जाती है । घर के किसी भाग का या ईंट का टूट जाना । हवन की अग्नि का अचानक बन्द हो जाना । अग्नि जलाने के अनेक प्रयास करने पर भी अग्नि का प्रज्वलित न होना या अचानक जलती हुई अग्नि का बन्द हो जाना । वात-जन्य विकार अकारण ही शरीर में प्रकट होने लगना । किसी प्रकार से छोटी-मोटी दुर्घटना हो सकती है । बुध के अशुभ होने के पूर्व संकेत व्यक्ति की विवेक शक्ति नष्ट हो जाती है अर्थात् वह अच्छे-बुरे का निर्णय करने में असमर्थ रहता है । सूँघने की शक्ति कम हो जाती है । काम-भावना कम हो जाती है । त्वचा के संक्रमण रोग उत्पन्न होते हैं । पुस्तकें, परीक्षा ले कारण धन का अपव्यय होता है । शिक्षा में शिथिलता आती है । गुरु के अशुभ होने के पूर्व संकेत अच्छे कार्य के बाद भी अपयश मिलता है । किसी भी प्रकार का आभूषण खो जाता है । व्यक्ति के द्वारा पूज्य व्यक्ति या धार्मिक क्रियाओं का अनजाने में ही अपमान हो जाता है या कोई धर्म ग्रन्थ नष्ट होता है । सिर के बाल कम होने लगते हैं अर्थात् व्यक्ति गंजा होने लगता है । दिया हुआ वचन पूरा नहीं होता है तथा असत्य बोलना पड़ता है । शुक्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत किसी प्रकार के त्वचा सम्बन्धी रोग जैसे – दाद, खुजली आदि उत्पन्न होते हैं । स्वप्नदोष, धातुक्षीणता आदि रोग प्रकट होने लगते हैं । कामुक विचार हो जाते हैं । किसी महिला से विवाद होता है । हाथ या पैर का अंगुठा सुन्न या निष्क्रिय होने लगता है । शनि के अशुभ होने के पूर्व संकेत दिन में नींद सताने लगती है । अकस्मात् ही किसी अपाहिज या अत्यन्त निर्धन और गन्दे व्यक्ति से वाद-विवाद हो जाता है । मकान का कोई हिस्सा गिर जाता है । लोहे से चोट आदि का आघात लगता है । पालतू काला जानवर जैसे- काला कुत्ता, काली गाय, काली भैंस, काली बकरी या काला मुर्गा आदि मर जाता है । निम्न-स्तरीय कार्य करने वाले व्यक्ति से झगड़ा या तनाव होता है । व्यक्ति के हाथ से तेल फैल जाता है । व्यक्ति के दाढ़ी-मूँछ एवं बाल बड़े हो जाते हैं । कपड़ों पर कोई गन्दा पदार्थ गिरता है या धब्बा लगता है या साफ-सुथरे कपड़े पहनने की जगह गन्दे वस्त्र पहनने की स्थिति बनती है । अँधेरे, गन्दे एवं घुटन भरी जगह में जाने का अवसर मिलता है । राहु के अशुभ होने के पूर्व संकेत -> मरा हुआ सर्प या छिपकली दिखाई देती है । धुएँ में जाने या उससे गुजरने का अवसर मिलता है या व्यक्ति के पास ऐसे अनेक लोग एकत्रित हो जाते हैं, जो कि निरन्तर धूम्रपान करते हैं । किसी नदी या पवित्र कुण्ड के समीप जाकर भी व्यक्ति स्नान नहीं करता। पाला हुआ जानवर खो जाता है या मर जाता है । याददाश्त कमजोर होने लगती है । अकारण ही अनेक व्यक्ति आपके विरोध में खड़े होने लगते हैं । हाथ के नाखुन विकृत होने लगते हैं । मरे हुए पक्षी देखने को मिलते हैं । बँधी हुई रस्सी टूट जाती है । मार्ग भटकने की स्थिति भी सामने आती है । व्यक्ति से कोई आवश्यक चीज खो जाती है । केतु के अशुभ होने के पूर्व संकेत > मुँह से अनायास ही अपशब्द निकल जाते हैं । कोई मरणासन्न या पागल कुत्ता दिखायी देता है । घर में आकर कोई पक्षी प्राण-त्याग देता है । अचानक अच्छी या बुरी खबरें सुनने को मिलती है । हड्डियों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । पैर का नाखून टूटता या खराब होने लगता है । किसी स्थान पर गिरने एवं फिसलने की स्थिति बनती है ।भ्रम होने के कारण व्यक्ति से हास्यास्पद गलतियाँ होती है।
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वैदिक ज्योतिष में भावानुसार उच्च के चंद्र का फल 〰️〰️
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*वाणी-पर-कैसे-होता-है-ग्रहों-का-असर*:-- कुंडली में द्वितीय भाव वाणी का भी होता है। आज मै आपको ये जानकारी देने जा रहा हूँ कि जब कोई ग्रह वाणी भाव में अकेला बैठा हो तो उसका वाणी पर क्या असर पडेगा। ये सिर्फ एक General Opinion है अतः यहाँ हम दृष्टि या युति का विचार नही करेगे :-- *यदि वाणी भाव( द्वितीय ) में सूर्य हो* तो जातक की वाणी तेजस्वी होगी।वाणी आदेशात्मक ज्यादा होगी।गलत बात होने पर जातक जोरदार आवाज से प्रतिक्रिया देगा। *यदि वाणी भाव में चंद्र हो* तो जातक की वाणी शालीन होगी।जातक बहुत धीरे और कम शब्दों में अपनी राय रखेगा।जातक की मधुर वाणी की दुनिया कायल होगी।जातक बात रखने से पहले आज्ञा माँगेगा। *यदि वाणी भाव में मंगल हो* तो जातक की वाणी उग्र और तेज होगी। जातक की बात पड़ोसियों के कानों तक पहुँचेगा ।गुस्सा आने पर जातक गाली-गलौच में भी संकोच नही करेगा।जातक चिल्लाने और शोर मचाने में माहिर होगा। *यदि वाणी भाव में बुध हो* तो जातक बेवजह बातूनी होगा।मुफ्त की राय देना जातक का शौक होगा।चूंकि अकेला बैठा बुध कभी शुभकर्तरी में नही होता,यदि बुध पापकर्तरी में हुआ तो जातक चुगलखोर होगा। *यदि वाणी भाव में गुरु है* तो जातक की वाणी सकारात्मक होगी जातक उपदेशक की तरह अपनी बात को विस्तारपूर्वक कहता है जैसे -“मतलब/अर्थात/Means” ये उसकी बातों में ज्यादा उपयोग होता है। जातक पुरुष से तीव्र और स्त्रियों से मधुर वाणी में बात करने वाला होता है। *यदि वाणी भाव में शुक्र हो* तो जातक की वाणी अत्यंत विनम्र होगी।जातक कवि,गायक भी हो/बन सकता है।वाणी में प्यार और आनंद की मिठास होगी।जातक की बातें रोमांटिक होती है। *यदि वाणी भाव में शनि हुआ* तो जातक की वाणी बहुत संतुलित और संयमित होगी। शब्दों की मर्यादा का उल्लंघन बहुत कम या ना के बराबर करेगा ।जातक हमेशा “शासन कर रही सरकार” का वाणी से विरोध करेगा। *यदि वाणी भाव में राहू हुआ* तो जातक गप्पें मारने वाला,बेवजह बहस करने वाला होगा।जातक के मुँह से हमेशा गाली/अपशब्द निकलेगें । वाणी नकारात्मक होगी।सीटी बजाना जातक का शौक हो सकता है। *यदि वाणी भाव में केतु हो* तो जातक मुँहफट होगा।यदि केतु शुभकर्तरी में हो तो जातक जो भी कहेगा उसकी 70% बातें/भविष्यवाणी सही होगीं..और यदि केतु पापकर्तरी में हो तो जातक हमेशा “हाय देने वाला” और “कडवी जुबान” बोलेगा, साथ ही उसकी बातें 70% तक सच साबित होगीं ।
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ग्रहों के कारक तत्व सभी ग्रह के कारक उस ग्रह के प्रभावों को प्रदर्शित करने में सहायक होते हैं. नौ ग्रहों में से जब कोई भी ग्रह अपने प्रभाव देता है तो उसे समझने के लिए उसके कारकों पर दृष्टि डालनी आवश्यक होती है. सूर्य ग्रह | Sun Planet आत्मा, स्वयं शक्ति, सम्मान, राजा, पिता, राजनीति हडिड्यों, चिक्तित्सा विज्ञान, स्वास्थ्य, ह्रदय, पेट. पित्त , दायीं आँख, रक्त प्रवाह में बाधा गर्मी तथा बिजली इत्यादि का कारक है सूर्य. चंद्र ग्रह | Moon Planet चंद्रमा मन, माता. मानसिक स्थिति, मनोबल, द्रव्य वस्तुओं, चित्त की प्रसन्नता, जलाश्य, यात्रा, सुख शंति, धन संपत्ति का शरीर के तरल पदार्थ, रक्त बायीं आँख, छाती, दिमागी परेशानी, महिलाओं में मासिक चक्र इत्यादि का कारक होता है. मंगल ग्रह | Mars Planet मंगल साहस, वीरता, शौर्य, शक्ति, क्रोध सेनापति, युद्ध, शत्रु अस्त्र-शस्त्र, दुर्घटनाओं, भूमि, अचल संपत्ति, छोटे भाई बहनों, वैज्ञानिक डाक्टर्स, यान्त्रिक कार्यों, पुलिस, सेना, सिर, जानवरों द्वारा काटना, दुर्घटना, जलना, घाव, शल्य क्रिया, आपरेशन, उच्च रक्तचाप, गर्भपात इत्यादि का कारक होता है. बुध ग्रह | Mercury Planet बुध ग्रह बुद्धि चातुर्य, वाणी, मनोविनोद, शिक्षा, गणित, लेखन, तर्क-वितर्क, मुद्रण, ज्योतिष विज्ञान, नृत्य एवं नाटक, वनस्पति, व्यापार, मध्यस्थता कराने वाला, मामा, मित्र, संबंधियों, गला, नाक, कान, फेफड़े, आवाज इत्यादि का कारक है. गुरू ग्रह | Jupiter Planet बृहस्पति जी ज्ञान, विद्वता, शिक्षा, धार्मिक कार्यों, श्रेष्ठजनों का, भक्ति, प्राचीन साहित्य, धन संपत्ति, मान सम्मान, पूर्वजों, पुत्र, बडे़ भाई, फल वाले वृक्षों, शरीर में चर्बी, मधुमेह, चिरकालीन बीमारियों, कान, बैंक, आयकर, खंजाची, राजस्व, मंदिर, धर्मार्थ संस्थाएं, कानूनी क्षेत्र, जज, न्यायाल्य, वकील, लेखापरीक्षक, सम्पादक, प्राचार्य, शिक्षाविद, अध्यापक, शेयर बाजार, पूंजीपति, मंत्री, दार्शनिक, निगम पार्षद, ज्योतिषी, वेदो और शास्त्रों इत्यादि का कारक बनता है. शुक्र ग्रह | Venus Planet शुक्र ग्रह वैवाहिक संबंधों, पत्नि, इन्द्रिय भोग विलास, यौन विषय, सभी प्रकार की सुख स्म्पत्ति, आभूषणों, सुंदरता, सुगंधित वस्तुओं, पुष्पों, सजावत के सामा, कलात्मकता, डिजाइनर वस्तुओं, श्वेत रंग के पदार्थों का, सुन्दर शरीर, बडी आंखे दिखने में आकर्षक, घुंघराले बाल, काव्यात्मक, गाना बजाना, काले बाल, विलासिता, व्यभिचार, शराब, नशीले पदार्थों, कफमय कम खाने वाला, छोटी कद-काठी, दिखने में युवा, गुप्त रोग, आँख, आंतें , अपेंडिक्स, मधुमेह इत्यादि का कारक बनता है. शनि ग्रह | Saturn Planet शनि ग्रह जीवन, आयु, मृत्यु, दुख, दरिद्रता, अनादर, निर्धनता, चापलुस, बीमारी, अनुचित व्यवहार, निम्न स्तर के कार्य, प्राकृतिक आपदाओं, मृत्यु, बुढापे, रोग, पाप, भय, गोपनीयता, कारावास, नौकरी, विज्ञान नियम, तेल-खनिज, कामगार, मजदूर सेवक, सेवाभाव, दासता, कृषि, त्याग, उंचाई से गिरना, अपमान, अकाल, ऋण, कठोर परिश्रम, अनाज के काले दाने, लकडी, विष, टांगें, राख, अपंगता, आत्मत्याग, बाजू, ड्कैती, अवरोध, लकडी, ऊन, यम अछूत, इस्पात, कार्यो में देरी लाना. सेवा विभाग, तेल, खनिज पदार्थों, भूमि से निकलने वाले पदार्थ, विदेशी भाषा, लोभ लालच, अहंकार, चोरी, निर्मम कार, लगंडापन, बुढा़पा, पांव, पंजे की नसें, लसीका तंत्र, लकवा, उदासी, थकान इत्यादि का कारक होता है. राहु ग्रह | Rahu Planet राहु ग्रह पितामह, दादा, विदेश यात्रा, समाज एवं जाती से अलग लोगों, सर्प, सर्प का काटना, त्वचा रोगों, खुजली, हड्डियां , जहर फैलाना, सर्प दंश, क्रानिक बीमारियां, डर विधवा, दुर्वचन, तीर्थ यात्राओं, निष्ठुर वाणी युक्त, विदेश में जीवन, अकाल, इच्छाएं, त्वचा पर दाग, चर्म रोग, सरीसृप, सांप और सांप का जहर, महामारी, अनैतिक महिला से संबन्ध, नानी, व्यर्थ के तर्क, भडकाऊ भाषण, बनावटीपन, दर्द और सूजन,डूबना, अंधेरा, दु:ख पहुंचाने वाले शब्द, निम्न जाति, दुष्ट स्त्री, जुआरी, विधर्मी, चालाकी, संक्रीण सोच, पीठ पीछे बुराई करने वाले, पाखण्डी, बुरी आदतों का आदी, जहाज के साथ जलमण्न होना, डूबना, रोगी स्त्री के साथ आनन्द, अंगच्छेदन होना, डूबना, पथरी, कोढ, बल, व्यय, आत्मसम्मान, शत्रु, मिलावट दुर्घटना, नितम्ब, देश निकाला, विकलांग, खोजकर्ता, शराब, झगडा, गैरकानूनी, तरकीब से सामान देश से अन्दर बाहर ले जाना. जासूसी, आत्महत्या, विषैला, विधवा, पहलवान, शिकारी, दासता, शीघ्र उत्तेजित होने इत्यादि का कारक होता है. केतु ग्रह | Ketu Planet केतु ग्रह रंग बिरंगे धब्बे वाले पशु-पक्षिओं का, कुत्ते, मुर्गा सींग वाले पशु, काला जादु, घाव, जीवाणु, वैराग्य एवं मोक्ष, हकलाना, पहचानने में दिक्कत, आंत, परजीवी, उन्माद, कारावास, विदेशी भूमि में जमीन, कोढ, दासता, आत्महत्या, नाना, दादी, आंखें, तुनकमिजाज, तुच्छ और जहरीली भाषा, लम्बा कद, धुआं जैसा रंग, निरन्तर धूम्रपान करने वाला,घाव, शरीर पर दाग, छरहरा और पतला, दुर्भावपूर्ण अपराधी, गिरा हुआ, साजिश, अलौकिक, दर्शनशास्त्र, वैराग्य, आकस्मिक मृत्यु, बुरी आत्मा, कीडों के कारण होने वाले रोग, विषैला काटना, धर्म, ज्योतिष, अन्तिम उद्वार, औषधियों का प्रयोग करने वाला, मिलावट करके अशुद्ध करने वाला, गिरफ्तारी, दिवालिया, चोट, मैथुन, अपहरण, खून, विष, सजा, कृमि, चोट, अग्निकाण्ड, हत्या और कृपणता इत्यादि का कारक बनता है.
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ग्रहो के कमजोर होने पर जीवन पर होने वाले प्रभाव*** : सूर्य सबसे पहले बात करते हैं सूर्य ग्रह की। सामाजिक अपयश, पिता के साथ कलह या वैचारिक मतभेद, आंख, हृदय या पेट का कोई रोग होना इस बात को दर्शाता है कि जातक की कुंडली में सूर्य अशुभ स्थिति में है। जीवन में असंतुष्ट रहना और मुंह में कमजोर चंद्रमा घर में पानी के नल्कों या कुंओं का सूख जाना, पालतू दुधारू पशु की मृत्यु हो जाना, माता को कष्ट होना, मन में बार-बार आत्महत्या करने के विचारों का जन्म लेना भी कमजोर चंद्रमा की ओर इशारा करता है। मंगल आए दिन कोई ना कोई दुर्घटना होना, घर के बिजली के समान जल्दी खराब हो जाना, विशेषकर जिस कमरे में व्यक्ति रहता है वहां मौजूद बिजली के उपकरणों का कम समय में ही खराब हो जाना, मंगल दोष की वजह से होता है। मंगल के दोषी होने पर रक्त समस्या, भाई से विवाद और अत्याधिक क्रोध जैसी स्थिति जन्म लेती है। बुध ज्योतिष विद्या में बुध को व्यापार और स्वास्थ्य का कारक बताया गया है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध अशुभ या कमजोर स्थिति में होता है उस व्यक्ति के दांत कमजोर रहते हैं। उसकी सूंघने की शक्ति कम हो जाती है और एक समय के बाद उसे गुप्त रोग होने की संभावना भी प्रबल हो जाती है। बृहस्पति अगर किसी विद्यार्थी को पढ़ाई में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, किसी के असमय बाल झड़ने शुरू हो गए हैं, अपमान का शिकार होना पड़ रहा है, व्यापार की स्थिति बदतर होती जा रही है, घर में कलह का माहौल बन गया है तो निश्चित तौर पर यह कमजोर बृहस्पति की ओर इशारा करता है। शुक्र ज्योतिष के अनुसार शुक्र ग्रह मौज-मस्ती, भोग-विलास और आलीशान जीवन व्यतीत करवाता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र सही नहीं है तो उस व्यक्ति के मन में भटकाव अवश्य रहेगा। वह अपने हाथ से धन का नाश करता है, उसे चर्म रोग और स्वप्न दोष होने की संभावना रहती है। शनि शनि धीमी गति का ग्रह है, अगर किसी की कुंडली में शनि पीड़ित या कमजोर होता है तो उस व्यक्ति का हर कार्य बहुत आराम से होता है। अगर आपके मकान का कोई हिस्सा गिर गया है या टूट गया है तो यह कमजोर शनि की ओर इशारा करता है। वाहन से दुर्घटना या धड़ के निचले हिस्से, विषेकर जांघों के हिस्से में परेशानी कमजोर शनि की वजह से होती है। राहु शक, संदेह, मानसिक परेशानियां, आपसी तालमेल में रुकावट, बात-बात पर क्रोधित हो जाना, गुस्से एमं अपशब्द या गाली-गलौज करना, ये सब राहु के परिणाम हैं। कुंडली में राहु के अशुभ होने से हाथ के नाखून टूटने लगते हैं और पेट से संबंधित परेशानियां लग जाती हैं वाहन से दुर्घटना, मस्तिष्क की पीड़ा, दिमागी संतुलन बिगड़ जाना, भोजन या किसी खाद्य पदार्थ में अकसर बाल दिखना, सामाजिक मानहानि होना, ये सभी राहु ग्रह के दुष्प्रभाव हैं। केतु जब किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु अशुभ फलदायी होता है तो उसे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ चर्म रोग भी हो सकता है। वह व्यक्ति खुद अपने लिए ही गलत धारण बना लेता है जो उसे नुकसान पहुंचाती है।
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