top button
    Futurestudyonline Community

चंद्रमा के अशुभ प्रभावों से बचाता है सोम प्रदोष व्रत

+1 vote
107 views
हिन्दू धर्मशास्त्रों में मुख्य रूप से प्रदोष व्रत को शिव जी की पूजा अर्चना का दिन माना जाता है। जहाँ तक सोम प्रदोष व्रत की बात है तो सोमवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को सोम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। सोमवार के दिन को शिव जी की पूजा अर्चना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इसलिए सोम प्रदोष व्रत के दिन पूजा अर्चना और व्रत रखने का विशेष महत्व है। इस व्रत का संबंध मुख्यरूप से चन्द्रमा से भी है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से चन्द्रमा के अशुभ प्रभाव से आप खुद को बचा सकते हैं। आइए जानते हैं सोम प्रदोष व्रत किस प्रकार से चन्द्रमा के अशुभ प्रभावों को दूर करने में सहायक है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार चंद्रमा का अशुभ प्रभाव विशेष रूप से हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। यदि किसी की सेहत खराब है तो इसका एक कारण कुंडली में चंद्रमा की अशुभ स्थिति भी हो सकती है। इसलिए यदि आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित हों तो सोम प्रदोष के दिन निम्न उपायों को आजमाकर इससे निजात पा सकते हैं। मुख्यतौर पर उच्च रक्तचाप या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तब उत्पन्न होती है जब कुंडली में चन्द्रमा और मंगल ग्रह की स्थिति अशुभ भावों और अशुभ ग्रहों के साथ बनती है। इससे निजात पाने के लिए तैलीय चीजों को खाने से परहेज करें। एक ग्लास पानी में आवलें का रस मिलाकर नियमित रूप से लें। ऊँगली में शुद्ध मोती की अंगूठी पहनें। मीठे पदार्थों का सेवन बंद कर दें। सोम प्रदोष का व्रत विधि पूर्वक व्रत रखें और मूंगा धारण करें। चंद्रमा के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए सोम प्रदोष व्रत के दिन ऐसे करें शिव जी की आराधना आज सोम प्रदोष व्रत के दिन चंद्रमा के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए यदि आप शिव जी की निम्न विधि से पूजा अर्चना करते हैं तो आपको लाभ मिल सकता है। इस दिन शिव जी के पवित्र मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का जाप करना लाभप्रद साबित हो सकता है। आज के दिन शिव जी को कच्चा दूध चढ़ाने और किसी जरूरतमंद को दूध और कच्चा चावल दान करना फलदायी साबित हो सकता है। आज के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीया जलाना भी लाभदायक साबित हो सकता है। सोम प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर शहद और बेलपत्र चढ़ाने से भी चंद्रमा के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। चंद्रमा के इन अशुभ प्रभावों से बचाता है सोम प्रदोष व्रत यहाँ हम आपको चंद्रमा के कुछ ऐसे अशुभ प्रभावों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका निजात आप सोम प्रदोष व्रत के द्वारा पा सकते हैं। सबसे पहले बता दें कि चंद्रमा के अशुभ प्रभाव से आप मानसिक तनाव या डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं। इससे बचने के लिए इस दिन निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं। सोम प्रदोष व्रत के दिन विशेष रूप से व्रत रखकर भोलेनाथ और कृष्ण जी की पूजा अर्चना करें। इस दिन खासतौर से गुलाबी रंग का वस्त्र पहनना ख़ासा मायने रखता है। व्रत के दौरान किसी प्रकार का अन्न ग्रहण ना करें, केवल फलहार का सेवन करें। रात के समय “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः” मंत्र का करीबन तीन रुद्राक्ष की माला से जाप करें। इस उपाय को करने से आप सभी प्रकार के मानसिक तनाव से मुक्ति पा सकते हैं।

References

सोम प्रदोष व्रत
posted Jul 29, 2019 by Deepika Maheshwary

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
0 votes
वैसे तो अगर पर्यावरण के दृष्टिकोण से देखा जाए तो घर के आस पास पेड़ पौधे का होना अच्छा माना जाता है। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ ऐसे भी पेड़ पौधे हैं जिनका आपके घर आस-पास होना अशुभ फलदायी माना जाता है। आज हम आपको कुछ ऐसी ही पेड़-पौधों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें अपने घर के आसपास आपको नहीं लगाना चाहिए और यदि ये आपके घर के पास हों भी तो आपको ख़ास तौर से सावधान हो जाने की जरुरत पड़ सकती है। घर के आस-पास ना रहने दें इन पेड़-पौधों को हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर के मुख्य द्वार के सामने पीपल, बरगद, नीम और बांस के पेड़ों को लगाना वर्जित माना जाता है। इसके साथ ही साथ गूलर, आम, बहेड़ा और इमली आदि के पेड़ों को भी घर से कुछ दूरी पर ही लगाना चाहिए। ऐसा माना जाता है इन पेड़ों की छाया घर पर पड़ने से घर में रहने वाले सदस्यों के जीवन पर अशुभ प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा ऐसा माना जाता है कि पूर्व दिशा में पीपल, दक्षिण दिशा में पाकड़, पश्चिम दिशा में बबूल और उत्तर दिशा में केला और गूलर के पेड़ भूल से भी नहीं लगवाने चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि पूर्व दिशा में कोई फलदार पेड़ लगाया जाता है तो इससे संतान को चोट पहुंच सकती है, या कोई अप्रिय घटना हो सकती है। इसके अलावा पश्चिम दिशा में बबूल या अन्य कोई कांटेदार पेड़ लगाने शत्रु पक्ष मजबूत हो सकता है। दक्षिण दिशा में पीपल, बरगद और नीम का पेड़ लगाने से धन से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा इन दिशाओं में ऐसे पेड़ पौधे लगाने से परिवार में शोक की खबर और विभिन्न प्रकार की बीमारियों से भी व्यक्ति ग्रसित हो सकता है। ऐसी मान्यता है कि कांटेदार पेड़ के घर के आस पास होने से परिवार में सदस्यों के बीच दुश्मनी की भावना जागृत हो सकती है। हालांकि कांटेदार पौधों में गुलाब का पौधा एक अपवाद है, इसे घर के आँगन में बखूबी लगाया जा सकता है। इन पेड़ों के प्रभाव के बारे में भी जरूर जान लें सबसे पहले आपको बता दें कि घर के परिसर में जामुन और अमरुद के पेड़ छोड़कर अन्य कोई पेड़ नहीं लगाया जाना चाहिए। इसके अलावा घर के आस पास गुलमोहर और कटहल के पेड़ लगाने से आपस में शत्रुता की भावना बढ़ती है और परिवार में कलह की स्थिति उत्पन्न होती है। लिहाजा सभी पेड़-पौधे के लगाए जाने के लिए उचित दिशा और घर से एक विशेष दूरी का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।
+1 vote
यदि आप भी उनमें से हैं जिन्हें कड़ी मेहनत के वाबजूद भी जीवन में वो मुकाम नहीं मिल पाया जिसकी आपने उम्मीद की थी तो यकीन मानिये आपको इस खबर को पढ़ने की बेहद आवश्यकता है। आज हम आपको कुछ ऐसे सुगंधित फूलों के प्रयोग के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका प्रयोग आप अपने दिन प्रतिदिन के जीवन में करके अपने सोये हुए भाग्य को जगा सकते हैं। आईये जानते है कौन से हैं वो फूल जिनका प्रयोग कर आप अपने भाग्य को जगा सकते हैं। गुलाब: गुलाब के फूलों का प्रयोग अापने आज तक अलग-अलग रूपों में किया होगा, लेकिन यदि इस फूल का प्रयोग आप खासतौर से अपनी सोई किस्मत को जगाने के लिए करें तो इससे आपको काफी लाभ मिल सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुलाब का फूल सूर्य और मंगल के प्रभाव को शुभ बनाने वाला होता है। यदि आप अपने किसी काम में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो मंगलवार के दिन हनुमान जी को सात गुलाब के फूल चढ़ाने से आपको लाभ मिल सकता है। किसी भी प्रकार के मनवांछित फल प्राप्त करने के लिए यदि दुर्गा माँ को प्रतिदिन ग्यारह गुलाब के फूल चढ़ाये जाएं तो इससे भी आपको बेहद लाभ मिल सकता है। आर्थिक तंगी से निजात पाने के लिए यदि लक्ष्मी माता और विष्णु जी को पांच गुलाब के फूल अर्पित किये जाएं तो आपको अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। गेंदा: गेंदे का फूल मुख्य रूप से बृहस्पति ग्रह के प्रभाव को शुभ बनाता है। रोजाना यदि एक गेंदे के फूल को गंगाजल के साथ पीसकर उसके लेप को माथे पर लगाया जाए तो इससे आप दूसरों को प्रभावित कर पाने में सफल हो सकते हैं। इसके साथ ही लक्ष्मीनारायण को रोजाना गेंदे के फूल की दो माला चढ़ाने से आपको वैवाहिक जीवन में सफलता प्राप्त हो सकती है। गुड़हल: ऐसी मान्यता है की इस फूल का प्रयोग आप जीवन में महावरदान पाने के लिए कर सकते हैं। जीवन में अपने मन के अनुसार फल पाने के लिए रोजाना 25 गुड़हल फूलों की माला माँ दुर्गा को चढ़ाने से लाभ मिल सकता है। यदि आप जीवन में शत्रुओं से परेशान हैं तो काली माँ को रोजाना पांच गुड़हल फूल की माला चढ़ाने से शत्रुओं से मुक्ति पा सकते हैं। आक: सोमवार के दिन विशेष रूप से आक का फूल शिवजी को चढ़ाने से आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। इसके साथ ही यदि बुध ग्रह के हानिकारक प्रभाव से ग्रसित हों तो बुधवार के दिन गणेश जी को पांच आक के फूल जरूर अर्पित करें।
0 votes

आप यहाँ मुफ्त प्रश्न कर सकते है लेकिन थोड़ी जानकारी से समाधान नही मिलता ,टेलीफोन से पूरी वार्ता के लिये सभी ज्योतिष विद्वान उपलब्ध है , यदि असिमित समय चाहिय तो book now करे , या per minute के लिए call now बटन दबाये , तुरन्त आपकी बात होगी ,बुक now से आपको 200 पेज की जन्मपत्रिका भी मिलेगी एवम असिमित वार्ता का लाभ मिलेगा । अपने भविष्य में कैरियर, धन, विवाह, उधोग, व्यापर ,राजनीति, सरकारी नोकरी , आदि अनेक जानकारी हासिल करिये

Best Astrologer in bangalore

Best astrologer in HSR layout

Best astrologer in bengaluru

Best astrologer in Jayanagar

Best astrologer in Elelctronic city

 www.futurestudyonline.com

 

+1 vote

देश के इन 42 स्थानों पर श्राद्ध कर्म से पितरों को मिलती है शांति बरेली। पितृपक्ष में श्राद्ध कर्म और पिंडदान का विशेष महत्व है। भारतवर्ष में पितृ दोष शांति के लिए 42 तीर्थों को मुख्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार किया गया पिंडदान और श्राद्ध कर्म सबसे ज्यादा मान्य है। इन 42 प्रमुख स्थानों पर श्राद्ध करने पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। 1. देव प्रयाग, उत्तराखंड- यह भागीरथी एवं अलखनन्दा का संगम है। यहां पितृों के निमित्त श्राद्ध तर्पण आदि किया जाता है। 2. त्रियूगीनारायण या सरस्वती कुंड, उत्तराखंड - रूद्र प्रयाग के समीप इस तीर्थ पर भगवान नारायण, भू-देवी एवं लक्ष्मी देवी विराजमान हैं। यहां सरस्वती नदी पर स्थित रूद्र कुण्ड स्नान, विष्णु कुण्ड मार्जन, ब्रह्मकुण्ड आश्वन और सरस्वती कुण्ड तर्पण के लिए हैं। 3. मदमहेश्वर या मध्यमेश्वर, उत्तराखंड- केदारधाम पर स्थित इस तीर्थ पर भगवान शंकर की नाभि प्रतिष्ठित है। यह तीर्थ पंच केदार में शामिल द्वितीय केदार है। 4. रूद्रनाथ - यह तीर्थ पंच केदार में से एक तुंगनाथ के समीप स्थित है। 5. बद्रीनाथ (ब्रह्म कपाल शिला) - अलखनन्दा नदी के किनारे ब्रह्म कपाल (कपाल मोचन) तीर्थ है। यहां पिण्डदान किया जाता है। 6. हरिद्वार (हरि की पैड़ी) - यहां सप्त गंगा, त्रि-गंगा और शक्रावर्त में विधिपूर्वक देव ऋषि एवं पितृ तर्पण करने वाला पुण्यलोक में प्रतिष्ठित होता है। तदन्तर कनखल में पवित्र स्नान किया जाता है। 7. कुरू क्षेत्र (पेहेवा) - पंजाब के अम्बाला जिले में सरस्वती के दाहिने तट पर स्थित इस तीर्थ को अधिक पुण्यमय माना जाता है। 8. पिण्डास्क (हरियाणा) - इसे पिण्ड तारक तीर्थ भी कहते हैं। यहां स्नान करके पितृ तर्पण किया जाता है। 9. मथुरा (ध्रुवघाट) - मथुरा में यमुना किनारे 24 प्रमुख घाटों में से एक ध्रुव घाट है। इसके पास धु्रव टीले पर छोटे मंदिर में ध्रुव जी का विग्रह है। इसे पितृ तर्पण के लिए प्रधान माना जाता है। 10. नैमिषारण्य (उत्तर प्रदेश) - बालामऊ जंक्शन के पास नैमिषारण्य में तपस्या, श्राद्ध, यज्ञ, दान इत्यादि की पूजा एंव क्रिया सात जन्मों के पापों को दूर करती है। 11. धौतपाप (हत्याहरण तीर्थ) - निमिषारण्य से लगभग 13 किमी दूर गोमती नदी के किनारे स्थित इस तीर्थ पर स्नान एवं श्राद्ध तर्पण करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। 12. बिठूर (ब्रह्मावर्त) - कानपुर के निकट बिठूर नामक स्थान है, यहां गंगा जी के कई घाटों में प्रमुख ब्रह्मा घाट है। 13. प्रयागराज, इलाहाबाद- यहां श्राद्ध एवं पितृ तर्पण करने से बहुत अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। 14. काशी (मणिकर्णिका घाट) - यह पुरी भगवान शंकर के त्रिशूल पर बसी हुई है और प्रलय में भी इसका नाश नहीं होता है। यहां श्राद्ध एवं पितृ तर्पण करने से पितृ तृप्त होकर सभी सुख प्रदान करते हैं। 15. अयोध्या - सप्त पुरियों में अयोध्या को प्रथम पुरी माना गया है। यहां सरयू नदी पर पितृ तर्पण एवं श्राद्ध करने से पितृ तृप्त होकर आशीर्वाद देते हैं। 16. गया, बिहार - यह भारत का प्रमुख पितृ तीर्थ है। पुराणों के अनुसार पितृ कामना करते हैं कि उनके वंश में कोई ऐसा पुत्र हो जो गया जाकर उनका श्राद्ध करे। गया में पिण्डदान से पितृों को अक्षय तृप्ति प्रदान होती है। 17. बोधगया, बिहार - यहां भगवान बुद्ध का विशाल मंदिर है। यहां पितृ तर्पण एवं श्राद्धकर्म का विशेष महत्व है। 18. राजगृह, बिहार - यह हिन्दू, बौद्ध एवं जैन तीनों धर्मों का तीर्थ स्थल है। यहां पुरूषोत्तम मास में श्राद्ध करने से पितृ तृप्त होते हैं। 19. परशुराम कुण्ड, असम - पूर्वकाल में इसे श्राद्धकर्म के लिए बहुत पवित्र माना जाता था। 20. याजपुर, ओडिशा - यहां श्राद्ध एवं तर्पण आदि का बहुत महत्व है। ऐसा माना जाता है कि यहां ब्रह्मा जी ने यज्ञ किया था। 21. भुवनेश्वर, ओडिशा - यहां काशी के समान अत्यधिक शिव मंदिर हैं। इसे उत्कल-वाराणसी और गुप्त काशी भी कहा जाता है। श्राद्ध एवं पितृ तर्पण के लिए यह पवित्र स्थान है। 22. जगन्नाथपुरी, ओडिशा - भारत के पावन चार धामों में से एक जगन्नाथपुरी है। यह क्षेत्र श्राद्ध एवं पितृकर्म के लिए अत्यन्त पावन माना जाता है। 23. उज्जैन, मध्यप्रदेश - यहां बहती शिप्रा नदी भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न मानी जाती है, जिस पर कई घाट पर मंदिर बने हैं, महाकाल के इस स्थान पर श्राद्ध करने से पितृ पूर्ण तृप्त होते हैं। 24. अमर कण्टक, मध्यप्रदेश - ऐसा माना जाता है कि सरस्वती का जल तीन दिन में, यमुना का एक सप्ताह में तथा गंगा का जल छूते ही पवित्र कर देता है। 25. नासिक, महाराष्ट्र - यहां बहने वाली गोदावरी नदी भारत की प्रसिद्ध सात नदियों में से एक है। यहां पितृों की संतुष्टि हेतु स्नान तर्पण आदि कर्म किये जाते हैं। 26. त्र्यम्बकेश्वर, महाराष्ट्र - यहां महर्षि गौतम ने तपस्या कर शिव जी को प्रसन्न किया था। पितृ दोष शान्ति का यह प्रमुख स्थान है। 27. पंढरपुर महाराष्ट्र- यहां भीमा नदी है, जिसे चन्द्रभागा भी कहा जाता है। यहां भगवान श्री बिट्ठल का प्रसिद्ध मंदिर भी है, जोकि पितृकर्म के लिए अत्यन्त श्रेष्ठ माना गया है। 28. लोहार्गल, सीकर राजस्थान - यहां देशभर के लोग अस्थि विसर्जन के लिए आते हैं। यहां मुख्य तीन पर्वत से निकलने वाली सात धारायें हैं। 29. पुष्कर, अजमेर राजस्थान - यहां अधिकतर लोग हरिद्वार आदि तीर्थ में अस्थि विसर्जन के बाद पुष्कर में आकर पिण्डदान करते हैं। 30. तिरूपति, तमिलनाडू - यह श्राद्ध के लिए अत्यन्त पवित्र माना जाता है। यहां कपिल तीर्थ में स्नान, बैंकटाचल पर बालाजी दर्शन के बाद ऊपर के अन्य तीर्थ दर्शन के बाद तिरूपति में गोविन्दराज आदि के दर्शन किये जाते हैं। 31. शिवकांची, सर्वतीर्थ सरोवर तमिलनाडू - मोक्षदायिनी सप्त पुरियों में शामिल कांची हरिहरात्मकपुरी है। इसके शिवकांची और विष्णुकांची दो भाग हैं। भगवान शिव और विष्णु का क्षेत्र एंव शक्ति सति स्थान होने के कारण इसे अत्यन्त पावन पितृ तीर्थ माना गया है। 32. कुम्भ कोणम, केरल - कावेरी नदी के तट पर स्थित यहां मुख्य तीर्थ महामघम सरोवर है। 33. रामेश्वरम, लक्ष्मणतीर्थ - यहां पर पिण्डदान करने से पितृगण पूर्ण रूप से संतुष्ट होते हैं। 34. दर्भशयनम् - यहां भगवान राम ने दर्भशय्या पर शयन किया था। इसे भी श्राद्ध आदि के लिए मुख्य तीर्थ माना जाता है। 35. सिद्धपुर, गुजरात- यहां श्राद्ध करने से पितृों को पूर्ण तृप्ति प्राप्त होती है। 36. द्वारकापुरी, गुजरात - श्रीकृष्ण का धाम होने के कारण यहां श्राद्ध करने से पितृों को पूर्ण तृप्ति प्राप्त होती है। 37. नारायणसर, गुजरात - यहां आदि नारायण, लक्ष्मी नारायण, गोबर्धनन्नाथ आदि के मंदिर हैं। अतः नारायण सरोवर के पास पितृों की तृप्ति का तीर्थ स्थान है। 38. प्रभास-पाटण, वेरावल - यहां अग्निकुण्ड, ज्योर्तिलिंगसोमनाथ, अहिल्याबाई इत्यादि कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। इस क्षेत्र से प्राची त्रिवेणी संगम पर भालक तीर्थ भी है। जहां श्री कृष्ण को पैर में बाण लगा था। 39. शूलपाणी, गुजरात - नरवदा तट के मुख्य तीर्थों में शामिल शूलपाणी तीर्थ पर शूलपाणी महादेव का मंदिर है। इसके अलावा पिंडदान के लिए चाणोद, श्रीरंगम, और रीवा भी प्रमुख स्थान हैं।

0 votes
*ज्योतिष अनुसार शुभ अशुभ भावो के प्रकार :* #कुण्डली_के_त्रिकोण_भाव : जन्म कुण्डली के 1, 5, 9वे भावो को त्रिकोण भाव कहा जाता है । इन भावो के स्वामी ग्रह की दशा हमेशा ही शुभ फल देते हुए व्यक्ति की सामाजिक पद प्रतिष्ठा में वृद्धि करती है, जातक को नई चीजें सीख कर आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होते हैं , एक तरह से जातक का personality development इन भाव से संबंधित दशा में होता है ऐसा कह सकते हैं । हालांकि लग्न की स्थिति के आधार पर अगर त्रिकोण भाव का स्वामी ग्रह 6, 8, 12वे का भी स्वामी हो तो शुभ प्रभाव में कमी आती है । #कुण्डली_के_केंद्र_भाव : जन्म कुण्डली के 1, 4, 7, 10वे भावो को केंद्र भाव कहा जाता है । इन भावो के स्वामी ग्रहो की दशा भी शुभ फल देती है, शुभ फल देते हुए इन भावो के स्वामी ग्रह भौतिक सुखों की वृद्धि करते हैं, रिश्तो का सुख देते हैं , कार्यस्थल का विस्तार करते हैं । #कुण्डली_के_पनफर_भाव : जन्म कुण्डली के 2, 5, 8, 11वे भावो को पनफर भाव कहा जाता है । यह भाव द्वितीय भाव से केंद्र स्थान हैं , इस लिए द्वितीय भाव से संबंधित विशेष सुख दुख जैसे कि आर्थिक स्थिति में उतार चढ़ाव , व्यवसाय में सफलता, धन संपदा के सुख, परिवारजनों व अन्य रिश्तों के सुख में इन भावो की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । इन भावो के स्वामी ग्रह अपने नैसर्गिक स्वभाव अनुसार फल देते हैं जैसे कि क्रूर और पापी ग्रह ( सूर्य, मंगल, शनि ) इन भावो के स्वामी हो तो अशुभता देते हुए घर परिवार के सुख धन संपदा के सुख खराब करते हैं , लेकिन यदि स्वामी ग्रह शुभ ग्रह ( चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र ) हो तो घर परिवार का अच्छा सुख और व्यवसाय में सफलता देते हैं । #कुण्डली_के_अपोकलिमस_भाव : जन्म कुण्डली के 3, 6, 9, 12वे भावो को अपोकलिमस भाव कहा जाता है । यह भाव तृतीय से केंद्र स्थान हैं , इस लिए यह बल, पराकर्म और साहस की वृद्धि को दर्शाते हैं । इन भावो के स्वामी ग्रह क्रूर और पापी ग्रह होना शुभता देता है, जबकि शुभ ग्रह भावो का स्वामित्व होना अपनी दशा के दौरान हानि देते हैं । #कुण्डली_के_उपचय_भाव : जन्म कुण्डली के 3, 6, 10, 11वे भावो को उपचय भाव कहा जाता है । उपचय का मतलब है गुजरते समय के साथ उत्थान होना , जैसे कि बढ़ती उम्र के साथ 3rd भाव यानी साहस बढ़ता है, 6th भाव से बढ़ती उम्र के साथ शत्रु बढ़ते हैं, बढ़ती उम्र के साथ अनुभव आने से दसम भाव और एकादश भावो की वृद्धि से आय और सामाजिक दायरा बढ़ते हैं । #कुण्डली_के_त्रिक_भाव : जन्म कुण्डली के 6, 8, 12वे भावो को त्रिक स्थान कहा जाता है । इन भावो से संबंधित ग्रह अपनी दशा के दौरान अशुभ फल जैसे स्वास्थ्य कमज़ोरी, शत्रु बाधा, चरित्र पर लांछन और मानहानि जैसे योग देता है । यह फल ग्रह के नैसर्गिक स्वभाव अनुसार होते हैं जैसे कि मंगल से चोट और दुर्घटना, बुध से गलत फैसलों से नुकसान, गुरु से बड़े अधिकारी लोगो की वजह से समस्या, शुक्र से हार्मोन्स से संबंधित समस्या, शनि से कानूनी मामलों से परेशानी । Astrology can Help you as navigation for future path of life. We had started Online Consultation Just Download App and Register You will get free Horoscope and You will get 100 Rs gift wallet money for call Now .My GiftCode is : FS16 Use my gift code and talk with me via app using call now button For Astro, Please visit:https://www.futurestudyonline.com/astro-details/16 Expertise :Counselling Therapist , Lal Kitab Expert , Meditation , Numerology , Palmistry , Reki Healing , Vastu , Vedic Astrology , Yoga and Spiritual Healer , For Mobile App, Please visit: https://goo.gl/YzQXe1
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...