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शनिवार: इस दिन को गवाए बिना करें ये चीजे, शनिदेव की कृपा बनाएगी राजा

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शनिवार: इस दिन को गवाए बिना करें ये चीजे, शनिदेव की कृपा बनाएगी राजा नवग्रहों में शनि अत्यंत सुंदर एवं महत्वपूर्ण ग्रह है। यह मंद गति से 30 वर्ष में सूर्य का एक चक्कर पूरा करता है। शनि सूर्य से 88 करोड़ 60 लाख मील तथा पृथ्वी से 79 करोड़ 10 लाख मील दूर स्थित है। लोग इसे अनिष्टकारी ग्रह कहते हैं लेकिन यह अच्छे फल भी प्रदान करता है। शनि का प्रभाव मनुष्य पर व्यापक रूप से पड़ता है, इसका दिन शनिवार है। शनिवार के दिन यह विशेष रूप से अपना प्रभाव डालता है। प्राचीन ग्रंथों में शनिवार के दिन किए जाने वाले अनेक प्रयोगों का वर्णन मिलता है, जो सुख-समृद्धि प्रदान करने वाले तथा रोगों को दूर करने वाले हैं। शनिवार को गवाए बिना करें ये चीजे, शनिदेव की कृपा बनाएगी राजा शनिवार के दिन आधा तोला काले धतूरे की जड़ को कमर में बांधने से बवासीर रोग में बहुत लाभ होता है। इस दिन अपने घर के मुख्य द्वार पर नाव की कील ठोंक दें। सुख-समृद्धि की प्राप्ति होगी। दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में विधिपूर्वक लोहे की अंगूठी पहनें। पथरी के रोग में इस उपाय से लाभ होता है। उग्र शनि को शांत करने के लिए इस मंत्र का जाप करें- ऊं ऐं ह्रीं क्लीं शं शनैश्‍चराय नम: शनिवार के दिन अपने घर से मकड़ी के जाले, रद्दी एवं टूटी-फूटी सामग्री आदि हटाने से दुख-दरिद्रता अवश्य दूर होती है। शनिवार के दिन सरसों का तेल तथा काली उड़द का दान करने से समस्त बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलने लगती है। कृष्णपक्ष के किसी भी शनिवार को नाव की कील से बना लॉकेट गले में पहनने से धन आदि की कमी नहीं होती। शनिवार के दिन बबूल की जड़ को सफेद सूत में लपेटकर रोगी की भुजा में बांधने से शीत ज्वर को नष्ट करने में सहायता मिलती है।

References

ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय
वाराणसी
9450537461
posted Sep 9, 2017 by anonymous

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कुंडली के ये ग्रहयोग धन को अस्थिर बनाते है। हमारी जन्मकुंडली में द्वित्य अर्थात "दूसरा भाव" धन और हमारे पास एकत्रित धन का प्रतिनिधित्व करता है कुंडली का 'बारहवा भाव" व्यय, हानि, खर्चा या अस्थिरता का कारक होता है अतः कुंडली में धन भाव, धनेश तथा द्वादश भाव द्वादशेश के द्वारा कुछ विशेष ग्रहस्थितियां बनने पर व्यक्ति को जीवन में धन की अस्थिरता की समस्या होती है" 1 कुंडली में यदि धनेश (दूसरे भाव का स्वामी) बारहवे भाव में बैठा हो तो ऐसे व्यक्ति के पास कभी धन नहीं रूक पाता और धन की अस्थिरता बनी रहती है। 2 यदि राहु या शनि कुंडली के बारहवे भाव में शत्रु राशि में बैठे हों तो व्यक्ति के पास धन नहीं रूक पाता या अनचाहे खर्चे बहुत होते हैं। 3 धनेश और द्वादशेश का योग भी धन को स्थिर नहीं होने देता। 4 यदि कुंडली के बारहवे भाव में कोई पाप योग (ग्रहण योग, गुरुचांडाल योग, अंगारक योग आदि) बन रहा हो तो ऐसे में भी व्यक्ति धन प्राप्ति के बाद भी धन को अधिक समय तक अपने पास नहीं रोक पाता। 5 बारहवे भाव में यदि कोई पाप ग्रह नीच राशि में हो तो भी धन के नुकसान की समस्या या धन की अस्थिरता की समस्या बनी रहती है। 6 धन भाव में कोई पाप योग बनने या धनेश के नीच राशि में होने पर भी धन की स्थिरता नहीं बन पाती। धन हानि से बचने के उपाय 1 अपनी कुंडली के धनेश (दूसरे भाव के स्वामी) ग्रह के मन्त्र का नियमित कम से कम 3 माला जाप करें। 2 यदि बारहवे या दूसरे भाव में कोई पाप ग्रह हो तो उस ग्रह से सम्बंधित पदार्थो का नियमित दान करना चाहिए। 3 श्री सूक्त का प्रतिदिन पाठ करें।
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