top button
    Futurestudyonline Community

जय भोलनाथ **मै बुध हूं***

0 votes
55 views
जय श्री बालाजी में बुध हु लोग मुझे बच्चा समझकर ध्यान नही देते। लेकिन में ही उनके दिमाग की नशे हु। उनका तंत्रिका तंत्र हु। उनको नही पता में बिगड़ गया तो भेजा खाली कर सकता हु उनका। ये सही है कि मुझ अकेले को सम्हालना मुश्किल है लेकिन में उनकी एनर्जी का 75% ग्रहण कर लेता हूं। मे सूर्य के पास रहता हूं इसलिए सूर्य का भी तेज है मेरे पास। में तो विष्णु से क्या कम हु। सामने वाले के रंग में रंग जाता हूं। में बुध हु। तेरी वाणी भी में ही हु पार्थ। तेरी त्वचा भी में ही हु। तेरी बड़ी आंत भी में ही हु। मुझे तू कम न आंक मनुष्य। में बिगड़ा तो तू कहि का न रहेगा। तंत्रिका तंत्र गया। बड़ी आंत गयी तो बचेगा क्या तेरे अंदर। में बुध हु। में तो किसी के रंग में भी रंग जाता हूं। वराह ने तो मुझे लग्न के साथ मिलाके लग्न को ओर बलि ओर शुभ बना दिया। क्योंकि में तो सांमने वाले कर रंग में रंग जाता हूं। सूर्य के रंग में रंगा तो बुधादित्य योग में रंग गया। चन्दर कर साथ मिला तो मन की गहराइयों में ऐसा लेके जाता हूं कि सूक्ष्म से सूक्ष्म बात को समझा देता हूं। मंगल के साथ दिमाग के घोड़े ऐसे दौड़ाता हु की तुझ चैन से नही बैठने देता हूं बड़े बड़े काम करवाता हु तुझसे। गुरु के साथ तो तुझे महाज्ञानी ओर महा शुभ बना देता हूं। में बुध ही तो हु। शुक्र के साथ महालक्ष्मी योग बना देता हूं। यही शुक्र मुझे अपना बल दे देता है। शनि भी तो मेरे रंग में रंग जाता है। क्या जबरदस्त निर्णय क्षमता बनाता हूँ इसी शनि के साथ मिलकर। लोग राहु का गुण गाते है। उसके रंग में रंगे है। लेकिन यही राहु मेरी राशियों में नतमस्तक हो जाता है। मिथुन मेरी ही राशि है जहाँ यह उच्च का हो जाता है। में ही तो इसको मिथुन में कन्ट्रोल करता हु। मेरी इसी मिथुन राशि मे राहु इतनी व्रद्धि करता है कि कोई सीमा न रहे। मेरी राशि कन्या में तो राहु कब्जा जमा के ढेर डाल लेता है। हिलता ही नही। हर प्रतियोगिता में अव्वल लेके आता है। सब इस रंग राहु को भयावह मानते है। लेकिन यही राहु मेरे बल के आगे एक मच्छर कर समान है। इस राहु को सिर्फ में ही नियंत्रित कर सकता हु। क्योंकि में बुध हु। ए राहु मेरी क्षत्र छाया में ही पलता बढ़ता है। इसकी क्या मजाल जो मेरे आगे चूँ भी कर ले। मुझे बलवान कर लो तो राहु भी चुपचाप जहा है वहा बैठा रहे। सेनापति भी भले ही कितना भी पराक्रमी हो। मेरे घरों की तोउसे रक्षा करनी ही पड़ेगी। में राजकुमार जो हु। उसका कर्तव्य है मेरी रक्षा करना। में बुध हु। सूर्य मुझे अपने पास रखता है। चन्द्रमा मेरा पिता है। सूर्य सब ग्रहों का राजा है। चन्द्रमा सब ग्रहों के बल का बिज। सूर्य सब ग्रहों के दोष हरने की क्षमता रखता है। सूर्य चन्दर का प्यार हु में। बुध हु में। सेनापति मेरी रक्षा करता है। राहु मेरे आगे नतमस्तक है। शुक्र मुझे बल दे देता है अपना। बुध्जो हु में। पंचम में स्वग्रही या उच्च का होवू तो बिना गुरु के ही तुझे ज्ञानी बना दु। में एकमात्र ऐसा ग्रह हु जिसके बल पे में तुझे गुरु की पदवी दिला सकता हु। अष्टम में में ही तो तुझे अनन्त ज्ञान की गहराइयों में लेके चला जाता हूं। में बुध हु वत्स। मेरी तेज़ी के आगे भी सब फैल है। में इंतज़ार नही करवाता तुझे । तुरन्त फैसला करता हु। जहा बैठूंगा जल्दी जल्दी तुझे वहां के फल प्रदान करूँगा। में बुध हु। में तरी ग्रहण क्षमता हु। तू जो भी ग्रहण कर रहा है सारः से वो में ही तो हु। तेरी बहन में हु। बुआ में हु। बेटी में हु। हंसी में हु। लेखन में हु। बोलने की कला में हु। हाज़िर जीबि में हु। में बुध हु। बाहत कुछ हु में। कहा राहु के चक्कर मे पड़ा है तू। मेरी गुण गाले तू। राहु की माया से दो minut में निकाल के ले अवउँगा तुझे। मेरे रंग में तू रंग जा। में तेरे रंग में रंग जाऊंगा क्योंकि बुध हूँ मैं एस्ट्रो ईश्वर दत्त
posted Aug 14 by anonymous

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
0 votes
जय श्री बालाजी में बुध हु लोग मुझे बच्चा समझकर ध्यान नही देते। लेकिन में ही उनके दिमाग की नशे हु। उनका तंत्रिका तंत्र हु। उनको नही पता में बिगड़ गया तो भेजा खाली कर सकता हु उनका। ये सही है कि मुझ अकेले को सम्हालना मुश्किल है लेकिन में उनकी एनर्जी का 75% ग्रहण कर लेता हूं। मे सूर्य के पास रहता हूं इसलिए सूर्य का भी तेज है मेरे पास। में तो विष्णु से क्या कम हु। सामने वाले के रंग में रंग जाता हूं। में बुध हु। तेरी वाणी भी में ही हु पार्थ। तेरी त्वचा भी में ही हु। तेरी बड़ी आंत भी में ही हु। मुझे तू कम न आंक मनुष्य। में बिगड़ा तो तू कहि का न रहेगा। तंत्रिका तंत्र गया। बड़ी आंत गयी तो बचेगा क्या तेरे अंदर। में बुध हु। में तो किसी के रंग में भी रंग जाता हूं। वराह ने तो मुझे लग्न के साथ मिलाके लग्न को ओर बलि ओर शुभ बना दिया। क्योंकि में तो सांमने वाले कर रंग में रंग जाता हूं। सूर्य के रंग में रंगा तो बुधादित्य योग में रंग गया। चन्दर कर साथ मिला तो मन की गहराइयों में ऐसा लेके जाता हूं कि सूक्ष्म से सूक्ष्म बात को समझा देता हूं। मंगल के साथ दिमाग के घोड़े ऐसे दौड़ाता हु की तुझ चैन से नही बैठने देता हूं बड़े बड़े काम करवाता हु तुझसे। गुरु के साथ तो तुझे महाज्ञानी ओर महा शुभ बना देता हूं। में बुध ही तो हु। शुक्र के साथ महालक्ष्मी योग बना देता हूं। यही शुक्र मुझे अपना बल दे देता है। शनि भी तो मेरे रंग में रंग जाता है। क्या जबरदस्त निर्णय क्षमता बनाता हूँ इसी शनि के साथ मिलकर। लोग राहु का गुण गाते है। उसके रंग में रंगे है। लेकिन यही राहु मेरी राशियों में नतमस्तक हो जाता है। मिथुन मेरी ही राशि है जहाँ यह उच्च का हो जाता है। में ही तो इसको मिथुन में कन्ट्रोल करता हु। मेरी इसी मिथुन राशि मे राहु इतनी व्रद्धि करता है कि कोई सीमा न रहे। मेरी राशि कन्या में तो राहु कब्जा जमा के ढेर डाल लेता है। हिलता ही नही। हर प्रतियोगिता में अव्वल लेके आता है। सब इस रंग राहु को भयावह मानते है। लेकिन यही राहु मेरे बल के आगे एक मच्छर कर समान है। इस राहु को सिर्फ में ही नियंत्रित कर सकता हु। क्योंकि में बुध हु। ए राहु मेरी क्षत्र छाया में ही पलता बढ़ता है। इसकी क्या मजाल जो मेरे आगे चूँ भी कर ले। मुझे बलवान कर लो तो राहु भी चुपचाप जहा है वहा बैठा रहे। सेनापति भी भले ही कितना भी पराक्रमी हो। मेरे घरों की तोउसे रक्षा करनी ही पड़ेगी। में राजकुमार जो हु। उसका कर्तव्य है मेरी रक्षा करना। में बुध हु। सूर्य मुझे अपने पास रखता है। चन्द्रमा मेरा पिता है। सूर्य सब ग्रहों का राजा है। चन्द्रमा सब ग्रहों के बल का बिज। सूर्य सब ग्रहों के दोष हरने की क्षमता रखता है। सूर्य चन्दर का प्यार हु में। बुध हु में। सेनापति मेरी रक्षा करता है। राहु मेरे आगे नतमस्तक है। शुक्र मुझे बल दे देता है अपना। बुध्जो हु में। पंचम में स्वग्रही या उच्च का होवू तो बिना गुरु के ही तुझे ज्ञानी बना दु। में एकमात्र ऐसा ग्रह हु जिसके बल पे में तुझे गुरु की पदवी दिला सकता हु। अष्टम में में ही तो तुझे अनन्त ज्ञान की गहराइयों में लेके चला जाता हूं। में बुध हु वत्स। मेरी तेज़ी के आगे भी सब फैल है। में इंतज़ार नही करवाता तुझे । तुरन्त फैसला करता हु। जहा बैठूंगा जल्दी जल्दी तुझे वहां के फल प्रदान करूँगा। में बुध हु। में तरी ग्रहण क्षमता हु। तू जो भी ग्रहण कर रहा है सारः से वो में ही तो हु। तेरी बहन में हु। बुआ में हु। बेटी में हु। हंसी में हु। लेखन में हु। बोलने की कला में हु। हाज़िर जीबि में हु। में बुध हु। बाहत कुछ हु में। कहा राहु के चक्कर मे पड़ा है तू। मेरी गुण गाले तू। राहु की माया से दो minut में निकाल के ले अवउँगा तुझे। मेरे रंग में तू रंग जा। में तेरे रंग में रंग जाऊंगा क्योंकि बुध हूँ मैं एस्ट्रो ईश्वर दत्त
+1 vote
बुध केतु युति बुध जो बुद्धिमत्ता का ग्रह है वाणी संवाद लेखन, तर्क शक्ति, और व्यवसायिक चातुर्य भी बुध के ही अधिपत्य में आते है। व्यक्ति अगर बुद्धि चातुर्य के साथ साथ अच्छा लेखक है , बहुत अच्छा वक्ता है और साथ ही उसकी भाषा पर बहुत अच्छी पकड़ है , तो वो अपनी इन क्षमताओं का उपयोग अच्छे व्यक्तिगत और व्यवसायिक सम्बन्ध बनाने में कर सकता है। बुध प्रधान व्यक्ति हाजिर जवाब होने के साथ साथ अच्छा मित्र भी होता है क्योंकि वो सम्बन्धो को निभाना जानता है। केतु एक विभाजित करने वाला ग्रह , एक संत की तरह जो अकेले रहता है , सुख सुविधाओं और भोग -विलास से पूर्णतः दूर , रिश्तों और उनमे संवाद की जंहा कोई आवश्यकता नहीं। केतु का स्वभाव बुध से पूर्णतः विपरीत है , केतु जब भी किसी ग्रह के साथ होता है तो उसे उसके फल देने से भटकाता है ,बुध का प्रमुख फल बुद्दि (मति) प्रदान करना है , इसलिए बुध – केतु योग को मति भ्रम योग कहते है। केतु और बुध की युति का भी फल इसी प्रकार बुद्धि को भ्रमित करने वाला होता है , हालांकि किस राशि और कुंडली के किस भाव में ये योग बना है इस बात पर भी फल निर्भर करता है। इस योग में बुध के प्रभाव दूषित हो जाते है जैसे बुध की प्रबल होने की परिस्थिति में कोई व्यक्ति बहुत अच्छा वक्ता है तो केतु के साथ आने की परिस्थिति में अर्थ हीन , डींगे हांकने वाला और आवश्यकता से अधिक बोलने वाला हो सकता है , कई बार उसके व्यक्तव्य उसी के लिए परेशानी खड़ी करने वाले हो सकते है (वाणी पर नियंत्रण होना) , यही हाल उसकी वाणिज्यिक योजनाओं का हो सकता है , उसके समीकरण और योजनाएं सत्य से परे हो सकते है जो उसके लिए परेशानी का कारन बन सकते है, या कहे बुद्धि की भ्रमित होने की परिस्थिति का निर्मित होना । उदहारण के लिए आर्थिक परिस्थिति को जांचे बिना व्यापारिक योजना बनाना और आर्थिक स्थिति का ध्वस्त होना । विचारधारा का संकुचित होना पर सोचा का अत्यधिक संवेदनशील होना , हमेशा अज्ञात भय रहना और वाणी पर नियंत्रण न होना बुध केतु योग में बुध बहुत कमजोर हो तो व्यक्ति कम बोलने वाला , संकोची और अपने पक्ष या मन की बात को स्पष्ट रूप से नहीं रख पाने वाला होगा। ऐसे लोग बड़े एकाकी होते है , आपसी रिश्तों में संवाद की कमी के चलते और संकोच के कारन अपनी योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं कर पाते साथ ही व्यापारिक का क्रियान्वयन भी नहीं हो पता। रिश्तों में कई बार धोखा होने की सम्भावना बनी रहती है , विशेषकर व्यवसायिक। बुध केतु युति में आर्थिक उतार चढाव बहुत बार देखा गया है , जिसका कारण बिना परिस्थितियों को समझे निवेश या खर्च करना होता है और व्यापारिक दृष्टिकोण का आभाव। कई बार ये लोग मीत व्ययी और कई बार अति व्ययी हो जाते है , बहुत सी परिस्थितियों में जब बुध अत्यन्त ही कमजोर और दुःस्थान में हो तब ये योग गम्भीर एकाकीपन गम्भीर मानसिक अवसाद जेल योग (या लम्बे समय तक हास्पिटल /सुधार ग्रह तक में रहने की नौबत ला देता है। इस योग की वजह से व्यक्ति दूसरों की बात और सलाह को स्वीकार करने या समझने की परिस्थिति से अत्यन्त दूर होता है जो उसकी आर्थिक परेशानी और एकाकीपन का कारन भी बनता है। इस दुर्योग से बचने के बहुत से तरीके हो सकते है परन्तु मेरी सोच में सबसे सटीक उपाय है , अधिक से अधिक सामाजिक होने की चेष्टा करना और दूसरों की सलाह ले कर आगे बढ़ना , साथ ही धन के निवेश या कोई भी योजना बनते समय सतर्क रहना। बुद्धि के देवता भगवान श्री गणेश की आराधना इस दुर्योग से बचाने का कार्य करती है, अतः विघ्न हर्ता बुद्धि के दाता श्रीगणेश की आराधना करते रहे।
+1 vote
कमजोर बुध उत्पन्न करता है ये स्वास्थ समस्याएँ फलित ज्योतिष में बुध अपनी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और हमारे जीवन के बहुत विशेष घटकों को नियंत्रित करता है बुध को सबसे कम आयु का ग्रह माना गया है इस लिए इसे राजकुमार का पद दिया गया है, बुध का रंग हरा है वर्ण वैश्य है बुध मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है कन्या राशि बुध की उच्च राशि भी है और मीन राशि में बुध नीचस्थ अर्थात सबसे कमजोर होता है, शनि, शुक्र और राहु बुध के मित्र ग्रह हैं और गोचरवश बुध किसी भी राशि में लगभग एक माह रहता है। ज्योतिष में बुध को वैसे तो बुद्धि, कैचिंग पॉवर, तर्कशक्ति, निर्णय क्षमता, याददास्त, सोचने समझने की क्षमता, वाणी, बोलने की क्षमता, उच्चारण, व्यव्हार कुसलता, सूचना, संचार, यातायात, व्यापार, वाणिज्य, गणनात्मक विषय, लेखन, कम्युनिकेशन और गहन अध्ययन का कारक माना गया है और ये सभी घटक हमारे जीवन में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं विशेषतः बुद्धि क्षमता की तो आज के समय में सर्वाधिक और हर जगह आवश्यकता होती है पर इन सब के अलावा बुध का हमारे स्वास्थ और शरीर पर भी बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है बुध हमारे शरीर के बहुत विशेष घटकों को नियंत्रित करता है ज्योतिष की चिकित्सीय शाखा में बुध को मष्तिष्क, नर्वस-सिस्टम, गला, नसें, त्वचा, बोलने की क्षमता, याददाश्त आदि का प्रतिनिधित्व बुध ही करता है इसलिए यदि कुंडली में बुध कमजोर या पीड़ित हो तो व्यक्ति को कुछ विशेष स्वास्थ समस्यायों का सामना करना पड़ता है – यदि कुंडली में बुध नीच राशि (मीन) में हो, छटे या आठवे भाव में स्थित हो, केतु या मंगल से पीड़ित हो, सूर्य के साथ समान अंश पर होने से पूर्णासत हो, षष्टेश अष्टमेश से पीड़ित हो या अन्य किसी भी प्रकार जब बुध बहुत कमजोर या पीड़ित हो ऐसे में व्यक्ति को मष्तिष्क से जुडी समस्यायें और न्यूरो प्रॉब्लम्स रहती हैं, मष्तिष्क से ही शरीर की सभी गतिविधियां नियंत्रित होती हैं इसलिए फिट्स पड़ने वाली समस्या भी कुंडली में बुध पीड़ित होने के कारण ही होती है, बुध पीड़ित होना ही नर्वससिस्टम और नसों से जुडी समस्याएं उत्पन्न करता है, कुंडली में पीड़ित बुध के कारण व्यक्ति को त्वचा संबंधी समस्याएं (स्किन प्रॉब्लम्स) और स्किन एलर्जी की समस्या बहुत होती है इसके अलावा कुंडली में बुध का पीड़ित होना उच्चारण को लेकर भी समस्याएं देता है हकलाहट या शब्दों को स्पष्ट रूप से ना बोल पाने की समस्या भी कमजोर या पीड़ित बुध के कारण ही होती है, गले से जुडी समस्याएं जल्दी जल्दी टॉन्सिल होना भी पीड़ित बुध के ही लक्षण हैं, जिन लोगों की कुंडली में बुध पीड़ित स्थिति में होता है उन्हें याददाश्त से जुडी समस्याएं भी बहुत परेशान करती हैं ऐसे लोगो को बातों को भूलने की समस्या भी रहती है इन सबके अतिरिक्त बुध का पीड़ित होना व्यक्ति को हेजिटेशन की समस्या भी देता है।
0 votes
यदि जन्म पत्रिका (कुंडली) का अध्ययन करते समय इन सबका ध्यान रखा जाए तो भावी जीवनसाथी की झलक पहले से ही मिल सकती है..जेसे—- * सप्तम भाव में शनि हो तो अपनी उम्र वाला वर मिलेगा, रंग सांवला भी हो सकता है। * सप्तमेश शुक्र उच्च का होकर द्वादश भाव में हो तो जन्म स्थान से दूर विवाह होगा, लेकिन पति सुंदर होगा। * सप्तम भाव में मंगल उच्च का हो तो ऐसी कन्या को वर उत्तम, तेजस्वी स्वभाव का, पुलिस या सेना में काम करने वाला मिल सकता है। * सप्तम भाव में धनु का गुरु हो तो ऐसी कन्या को मिलने वाला वर सुंदर, गुणी, उद्यमी या वकील, शिक्षक या बैंककर्मी भी हो सकता है। * मंगल के साथ शनि हो तो ऐसी कन्या को वियोग का योग होता है। * शुक्र-शनि साथ हो तो ऐसी कन्या को वर सांवला, सुंदर, आकर्षक, इंजीनियर या चिकित्सा के क्षेत्र में मिलेगा। धनवान भी हो सकता है। * सप्तमेश सप्तम भाव में उच्च का हो तो ऐसी कन्या का वर भाग्यशाली होगा, लेकिन विवाह बाद उसे अधिक लाभ रहेगा। – यदि मेष लग्न हो और सातवें भाव में शुक्र हुआ तो लाइफ पार्टनर सुंदर होगा, वहीं वह फाइनेंशियली साउंड भी होगा। – वृषभ लग्न हो और सप्तम भाव में मंगल हो व चंद्र लग्न में हो तो वह जीवनसाथी उग्र स्वभाव का होगा लेकिन धन के मामलों में सौभाग्यशाली होगा। – मिथुन लग्न हो और सप्तम भाव का मालिक भी सातवें भाव में ही बैठा हो तो ऐसी पत्रिका ‍जिसकी होगी वह ज्ञानी, न्यायप्रिय, मधुरभाषी, परोपकारी, धर्म-कर्म को मानने वाला या वाली होगी। – कर्क लग्न वालों के लिए शनि सप्तम भाव में या सप्तमेश उच्च का होकर चतुर्थ भाव में हो तो वह साँवला या साँवली होगी, लेकिन जीवनसाथी सुंदर होगा या होगी व शनि उच्च का हुआ तो विवाह सुख उत्तम मिलेगा। – सिंह लग्न हो और सप्तमेश सप्तम में हो या उच्च का हो तो वह साधारण रंग-रूप की होगी पर उसका पति या पत्नी पराक्रमी होगें लेकिन भाग्य में रुकावटें आएँगी। – कन्या लग्न हो और सप्तम भाव में गुरु हो तो पति या पत्नी सुंदर मिलता है। स्नेही व उत्तम संतान सुख मिलेगा। ऐसी स्थिति वाला प्रोफेसर, जज, गजेटेट ऑफिसर भी हो सकता है। लाइफ पार्टनर सम्माननीय होगा। – तुला लग्न हो और सप्तम भाव में मेष का मंगल हो तो वह उग्र स्वभाव, साहसिक, परिवार से अलग रहने वाली होगा। लाइफ पार्टनर की पारिवारिक स्थिति मध्यम होगी व नौकरी या व्यापार में बाधा होगी। – वृश्चिक लग्न हो और सप्तम भाव में शुक्र हो तो स्वराशि का होने से उसे सुसराल से धन मिलेगा। पति पत्नी से लाभ पाने वाला और पत्नी पति से लाभ पाने वाली होगी। – धनु लग्न हो और सप्तम भाव में बुध हो तो लाइफ पार्टनर समझदार, विद्वान, विवेकी, पढ़ी-लिखा होगा। अगर पत्रिका लड़के की है तो लड़की सर्विस में हो सकती है। – मकर लग्न हो और चंद्रमा सप्तम भाव में हो तो ऐसा युवा सुंदर, सॉफ्ट स्पोकन, शांतिप्रिय होगा। लाइफ पार्टनर बेहद खूबसूरत होगा। – कुंभ लग्न हो और सप्तम भाव में सूर्य हो तो वह साहसिक, महत्वाकांक्षी, तेजस्वी स्वभाव की होगी व हुकूमत करने वाली होगी। परिवार से भी अलग हो सकती है। – मीन लग्न हो और सप्तम में उच्च का बुध हो तो वह युवा प्रतिष्ठित होगा, ऐसी प्लेनेट कंडीशन वाली वाली युवती पढ़ी-लिखी, समझदार, माता-पिता, भूमि-भवन से लाभ पाने वाली होगी। परिवार में सम्माननीय होगी
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...