top button
    Futurestudyonline Community

शुक्र देव का होगा कन्या राशि में स्थान परिवर्तन, जानें उनकी शांति के उपाय

+1 vote
112 views
सभी ग्रहों में से शुक्र ग्रह को सबसे चमकीला ग्रह माना जाता है, जो प्रेम का प्रतीक होता है। जहाँ शास्त्रों अनुसार शुक्र को असुरों के देवता शुक्राचार्य बताया गया है, तो वहीं ज्योतिष विज्ञान में इसे स्त्री गृह माना गया है। शुक्र मनुष्य की कामुकता, उसके सौंदर्य, भौतिक सुख और ऐश्वर्य का कारक प्राप्त होता है। जिसके कारण जिस भी जातक की कुंडली में शुक्र शुभ स्थिति में या मजबूत होता है तो उसके परिणामस्वरूप जातक व्यक्तित्व से आकर्षक, सुंदर और मनमोहक होता है। शुक्र के सकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति जीवनभर सुखी रहता है। इसीलिए शुक्र को सुंदरता और सुख का कारक माना जाता है। कुंडली में शुक्र की स्थिति का प्रभाव सौरमंडल के सभी ग्रहों में से शुक्र की चमक एवं शान सबसे अलग व निराली मानी जाती है, जिस कारण हर किसी की राशि में शुक्र की स्थिति का खासा महत्व होता है। इसके विपरीत जिस भी कुंडली में शुक्र निर्बल या कमज़ोर होता है तो ज्योतिषी अनुसार वो व्यक्ति शुक्र की आराधना कर उसे अपनी राशि में बलवान बनाकर उनसे सुख व ऐश्वर्य की प्राप्ति कर सकता है। शुक्र की शान्ति के लिए करें कुछ विशेष उपाय जैसा सभी जानते हैं कि आज हम अपने जीवन में सुख-सुविधाओं की वस्तुओं पर अधिक खर्च करते हैं, जिसका संबंध सीधे तौर पर शुक्र से होता है। इसलिए ही कहा गया है कि यदि अपने स्थान परिवर्तन के दौरान शुक्र की स्थिति किसी भी कुंडली में खराब या नकारात्मक हो जाती है या कोई भी अपने जीवन को ऐश्वर्य और आराम से भरपूर बनाना चाहते हैं तो उस व्यक्ति को विशेष तौर से शुक्र के कारगर उपाय करने चाहिए। शुक्र का गोचर ऐसे में शुक्र देव हमेशा की तरह एक बार पुनः अपना राशि परिवर्तन करते हुए अपने शत्रु ग्रहण सूर्य की राशि सिंह से निकलकर अपने मित्र ग्रह बुध की राशि कन्या में अपना स्थान परिवर्तन करने वाले हैं। जिसके चलते शुक्र मंगलवार, 10 सितंबर 2019 को 01:24 बजे कन्या राशि में गोचर करेगा जो वहां 4 अक्टूबर 2019 तक इसी राशि में स्थित रहेगा। इसलिए इससे करीब-करीब हर राशि प्रभावित होंगी। अशुभ शुक्र के लिए अवश्य करें ये काम वैदिक ज्योतिष में अशुभ शुक्र की शांति के लिए जातक को उससे संबंधित कारगर उपाय करने की सलाह दी गई है। अपनी राशि में शुक्र की मज़बूती के लिए कुछ विशेष वस्तुओं का दान करना चाहिए। जिसमें चाँदी, चावल, दूध, श्वेत वस्त्र आदि शामिल होते हैं। इसके अलावा शुक्र के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए जातक को हर शुक्रवार दुर्गाशप्तशती का पाठ करना भी उचित माना गया है। कन्या पूजन एवं शुक्रवार का व्रत करने से भी शुक्र के शुभ फलों की प्राप्ति होती है। शुक्र को बली या मजबूत करने के लिए जातक को अच्छी क्वालिटी का हीरा धारण करना चाहिए। इसके साथ ही यदि किसी कारणवश हीरा पहनना संभव न हो तो व्यक्ति अर्किन, सफेद मार्का, ओपल, स्फटिक आदि किसी भी शुभ वार, शुभ नक्षत्र और शुभ लग्न में धारण कर सकता है। हर शुक्रवार शुक्र देव की पूजा के दौरान शुक्र के बीज मंत्र का जाप करना भी शुभ माना गया है ॐ शुं शुक्राय नमः। ॐ हृीं श्रीं शुक्राय नमः। शुक्र की शान्ति के लिए कारगर तांत्रिक उपाय काली चींटियों को चीनी खिलाना शुक्र से शुभ फलों की प्राप्ति हेतु बेहद कारगर होता है। शुक्रवार के दिन सफेद गाय को आटा खिलाना भी शुभ होता है। शुक्र को प्रबल बनाने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करें जिसकी एक आँख खराब हो। 10 वर्ष से कम आयु की कन्याओं का हर शुक्रवार पूजन करें। घर के फर्श पर और रसोई घर में सफेद पत्थर लगाएँ। किसी कन्या के विवाह में कन्यादान से भी शुक्र के शुभ फलों की प्राप्ति होती है। शुक्र देव से जुड़े कुछ विशेष मंत्र जीवन में आर्थिक संपन्नता, प्रेम और आकर्षण में वृद्धि हेतु जातक को शुक्र के बीज मंत्र “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” का उच्चारण करने की सलाह दी जाती है। इस मन्त्र का कम से कम 16000 बार उच्चारण करने से मान्यता अनुसार शुक्र के गोचर के दौरान उसके अशुभ प्रभावों से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके अलावा देश-काल-पात्र सिद्धांत के अनुसार शुक्र के अशुभ प्रभावों को कम करने और राशि में उसके शुभ फलों की प्राप्ति के लिए इस बीज मंत्र का 64000 बार जाप करना चाहिए। इसके अलावा शुक्र को शांत करने के लिए “ॐ शुं शुक्राय नमः।” मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। *********
posted Sep 10 by Deepika Maheshwary

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
0 votes
कुंडली में उच्च के ग्रह वैदिक ज्योतिष के अनुसार मकर राशि में स्थित होने पर मंगल को उच्च का मंगल कहा जाता है जिसका साधारण शब्दों में अर्थ यह होता है कि मकर राशि में स्थित होने पर मंगल अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलवान हो जाते हैं। कुछ वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि कुंडली में उच्च का मंगल सदा शुभ फलदायी होता है जो सत्य नहीं है क्योंकि कुंडली में मंगल का उच्च होना केवल उसके बल को दर्शाता है तथा उसके शुभ या अशुभ स्वभाव को नहीं जिसके चलते किसी कुंडली में उच्च का मंगल शुभ अथवा अशुभ दोनों प्रकार के फल ही प्रदान कर सकता है जिसका निर्णय उस कुंडली में मंगल के शुभ अशुभ स्वभाव को देखकर ही लिया जा सकता है। आज के इस लेख में हम कुंडली के विभिन्न 12 घरों में स्थित होने पर उच्च के मंगल द्वारा प्रदान किये जाने वाले कुछ संभावित शुभ तथा अशुभ फलों के बारे में विचार करेंगे। 1 कुंडली के पहले घर में उच्च का मंगल : किसी कुंडली के पहले घर में स्थित उच्च का मंगल शुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन से संबंधित शुभ फल दे सकता है विशेषतया तब जब ऐसा शुभ मंगल कुंडली के पहले घर में स्थित होकर कुंडली में शुभ फलदायी मांगलिक योग बनाता हो। इस प्रकार का शुभ उच्च मंगल जातक को उसके व्यवसायिक क्षेत्र में भी शुभ फल प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अपने व्यवसाय के माध्यम से बहुत धन कमा सकते हैं। कुंडली के पहले घर में स्थित शुभ मंगल जातक की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में सहायता कर सकता है जिसके कारण इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक आर्थिक रूप से समृद्ध अथवा बहुत समृद्ध हो सकते हैं तथा इस प्रकार का शुभ प्रभाव जातक को सुख, सुविधा तथा ऐश्वर्य से युक्त जीवन भी प्रदान कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के पहले घर में स्थित उच्च के मंगल के अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं पैदा हो सकतीं हैं तथा ये समस्याएं उस स्थिति में और भी दुखदायी हो सकतीं हैं जब कुंडली के पहले घर में स्थित ऐसा अशुभ उच्च मंगल कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण कर दे। कुंडली के किसी भी घर में अशुभ उच्च के मंगल द्वारा बनाया गया मांगलिक दोष जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत कष्टमय बना सकता है क्योंकि ऐसा अशुभ मंगल उच्च होने के कारण बहुत अधिक बलवान हो जाता है जिसके कारण ऐसे बलवान मंगल द्वारा बनाया गया मांगलिक दोष भी साधारण मांगलिक दोष की तुलना में अधिक बलवान होता है जिसके कारण इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित जातक का एक विवाह तो आसानी से टूट सकता है तथा जातक की शेष कुंडली अनुकूल न होने की स्थिति में जातक के एक से अधिक विवाह भी टूट सकते हैं। कुंडली के पहले घर में स्थित अशुभ उच्च का मंगल जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में भी बाधाएं पैदा कर सकता है जिसके कारण इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को लंबे समय तक व्यवसायहीन रहना पड़ सकता है। 2 कुंडली के दूसरे घर में उच्च का मंगल : किसी कुंडली के दूसरे घर में स्थित उच्च का मंगल शुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत सुखमय बना सकता है, विशेषतया तब जब इस प्रकार का शुभ उच्च मंगल कुंडली में शुभ फलदायी मांगलिक योग बना रहा हो जिसके चलते ऐसे जातक को अपने विवाह से बहुत सुख प्राप्त हो सकता है। कुंडली में इस प्रकार के उच्च मंगल का शुभ प्रभाव जातक को बहुत मात्रा में धन भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक अपने व्यवसाय से बहुत मात्रा में धन कमाने के अतिरिक्त नाम तथा यश भी कमाते हैं। कुंडली के दूसरे घर में स्थित शुभ उच्च का मंगल जातक को बहुत अच्छी अथवा उत्तम संतान भी प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के प्रभाव में आने वाले जातक की संतान जातक की सेवा करने वाली और जातक को सहायता प्रदान करने वाली होती है। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के दूसरे घर में स्थित उच्च के मंगल के अशुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन में गंभीर अथवा अति गंभीर समस्याएं पैदा हो सकतीं हैं तथा यह समस्याएं उस स्थिति में और भी गंभीर बन सकती हैं जब इस प्रकार का अशुभ उच्च मंगल कुंडली में मांगलिक दोष का निर्माण कर दे। इस प्रकार के मांगलिक दोष से पीड़ित कुछ जातकों का विवाह देरी से अथवा बहुत ही देरी से हो सकता है जबकि इस प्रकार के मांगलिक दोष के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ अन्य जातकों के 2 या इससे भी अधिक विवाह बहुत बुरी स्थितियों में टूट सकते हैं। कुंडली के दूसरे घर में स्थित अशुभ उच्च का मंगल जातक की आर्थिक स्थिति पर भी अशुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले जातकों को समय समय पर अनचाहे खर्चों से पीड़ित रहना पड़ सकता है जिससे इन जातकों की आर्थिक स्थिति पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। कुंडली के दूसरे घर में स्थित अशुभ उच्च का मंगल जातक को अनेक प्रकार के रोगों से पीड़ित भी कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के अशुभ प्रभाव में आने वाले विभिन्न जातक भिन्न भिन्न प्रकार के रोगों के कारण लंबे समय तक कष्ट उठा सकते हैं। 3 कुंडली के तीसरे घर में उच्च का मंगल : कुंडली के तीसरे घर में स्थित उच्च का मंगल शुभ होने की स्थिति में जातक को स्वस्थ तथा बलवान शरीर प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक सामान्यतया जीवन भर स्वस्थ तथा सक्रिय रहते हैं। इस प्रकार का शुभ प्रभाव जातक को बहुत साहस, पराक्रम तथा शौर्य प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के उच्च मंगल के शुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातक युद्ध कला में बहुत प्रवीण हो सकते हैं तथा पुलिस बल, सेना बल अथवा ऐसी किसी अन्य संस्था में कार्यरत हो सकते हैं जहां इन्हें अपने शौर्य प्रदर्शन का भरपूर अवसर प्राप्त हो सके। कुंडली के तीसरे घर में स्थित शुभ उच्च के मंगल के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस, आशा तथा प्रयत्न का साथ नहीं छोड़ते तथा अपनी निरंतर संघर्ष करते रहने की क्षमता के कारण विकट से विकट परिस्थितियों में से भी निकल कर अनुकूल परिणाम प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। इस प्रकार के जातक सामान्यतया बहुत अच्छे मित्र भी सिद्ध होते हैं तथा विपत्ति में फंसे अपने किसी मित्र की सहायता करने के लिए ऐसे जातक अपने प्राणों को संकट में भी डाल सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के तीसरे घर में स्थित उच्च के मंगल के अशुभ होने की स्थिति में जातक को अपने विरोधियों तथा शत्रुओं के कारण बहुत विकट परिस्थितियों तथा संकटों का सामना करना पड़ सकता है तथा ऐसे जातक के विरोधी अथवा शत्रु जातक को हानि पहुंचाने के लिए समय समय पर जातक के विरुद्ध षड़यंत्र रचते रहते हैं। कुंडली के तीसरे घर में स्थित अशुभ उच्च मंगल के प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने मित्रों, सहयोगियों अथवा भाईयों के कारण भी संकट अथवा हानि का सामना करना पड़ सकता है तथा कुछ स्थितियों में इस प्रकार के अशुभ प्रभाव के कुंडली में बहुत प्रबल होने पर जातक का कोई करीबी मित्र या जातक का सगा भाई भी जातक के साथ विश्वासघात करके उसे गंभीर आर्थिक हानि पहुंचा सकता है अथवा उसे किसी अन्य प्रकार के गंभीर संकट में डाल सकता है। 4 कुंडली के चौथे घर में उच्च का मंगल : किसी कुंडली के चौथे घर में स्थित उच्च का मंगल शुभ होने की स्थिति में जातक के विवाह तथा वैवाहिक जीवन पर शुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते जातक का वैवाहिक जीवन बहुत सुखमय तथा आनंदमय बन सकता है तथा यह संभावनाएं उस स्थिति में और भी बलवान हो जातीं हैं जब कुंडली में स्थित ऐसा शुभ उच्च का मंगल कुंडली में शुभ फलदायी मांगलिक योग बनाता हो। इस प्रकार का शुभ उच्च मंगल जातक को सुंदर तथा धनी पत्नी प्रदान कर सकता है तथा ऐसे शुभ प्रभाव में आने वाले जातकों को अपने जीवन में अनेक प्रकार के सुखों, सुविधाओं तथा साधनों आदि की प्राप्ति होती है जिसके चलते इन जातकों का जीवन सुविधापूर्वक तथा आनंदमय होता है। कुंडली के चौथे घर में स्थित शुभ उच्च का मंगल जातक को विभिन्न प्रकार के सुविधापूर्वक वाहन, आलीशान घर, सुख सुविधा के अन्य साधन तथा बहुत से अन्य लाभ प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक अपने व्यवसायिक जीवन में भी सफल अथवा बहुत सफल रहते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के चौथे घर में स्थित उच्च के मंगल के अशुभ होने की स्थिति में जातक के वैवाहिक जीवन को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है तथा जातक के वैवाहिक जीवन में आने वाली मुसीबतें उस स्थिति में और भी बढ़ सकतीं हैं जब इस प्रकार का अशुभ उच्च मंगल कुंडली में मांगलिक दोष बनाता हो। इस प्रकार के मांगलिक दोष के दुष्प्रभाव में आने वाले जातक का विवाह किसी कठोर अथवा बहुत कठोर स्वभाव वाली अथवा बुरे आचरण वाली स्त्री के साथ हो सकता है जो अपने स्वभाव और आचरण के चलते जातक के वैवाहिक जीवन को बहुत कष्टमय अथवा नर्क समान बना सकती है। कुंडली के चौथे घर में स्थित अशुभ उच्च के मंगल का दुष्प्रभाव जातक की मानसिक शांति पर अशुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते ऐसे जातक किसी न किसी प्रकार की चिंता के कारण मानसिक रूप से पीड़ित तथा अशांत ही रहते हैं। 5 कुंडली के पांचवें घर में उच्च का मंगल : किसी कुंडली के पांचवें घर में स्थित उच्च का मंगल शुभ होने की स्थिति में जातक की आर्थिक समृद्धि पर शुभ प्रभाव डाल सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक आर्थिक रूप से समृद्ध अथवा बहुत समृद्ध हो सकते हैं। इस प्रकार का शुभ प्रभाव जातक को रचनात्मक विशेषताएं भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते ऐसे जातक रचनात्मकता से जुड़े व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के पांचवें घर में स्थित शुभ उच्च का मंगल जातक को आध्यात्म तथा परा विज्ञान जैसे क्षेत्रों के प्रति रूचि तथा इन क्षेत्रों में विकास करने की क्षमता भी प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातक ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, हस्त रेखा शास्त्र आदि जैसे क्षेत्रों में भी कार्यरत पाये जा सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के पांचवें घर में स्थित उच्च का मंगल अशुभ होने की स्थिति में जातक की शिक्षा पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है जिसके कारण इस प्रकार के कुछ जातक उच्च शिक्षा प्राप्त ही नहीं कर पाते जबकि इस प्रकार के कुछ अन्य जातकों की शिक्षा बहुत रुकावटों के पश्चात ही पूर्ण हो पाती है। कुंडली के पांचवें घर में स्थित अशुभ उच्च के मंगल का प्रभाव जातक को किसी असामान्य प्रेम संबंध में पड़ने के कारण बहुत समस्याएं दे सकता है। उदाहरण के लिए इस प्रकार के कुछ जातक किसी विवाहित स्त्री के साथ प्रेम संबंध स्थापित कर सकते हैं जिसका भेद खुल जाने के कारण इन जातकों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के पांचवें घर में स्थित अशुभ उच्च के मंगल का प्रभाव जातक को स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से भी पीड़ित कर सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ मंगल के प्रबल प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को अपने जीवन में एक से अधिक बार शल्य चिकित्सा अर्थात सर्जरी का सामना करना पड़ सकता है। 6 कुंडली के छठे घर में उच्च का मंगल : किसी कुंडली के छठे घर में स्थित उच्च का मंगल शुभ होने की स्थिति में जातक को स्वस्थ शरीर तथा लंबी आयु प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ मंगल के प्रभाव में आने वाले जातक सामान्यतया स्वस्थ ही रहते हैं। कुंडली में उच्च मंगल का इस प्रकार का प्रभाव जातक के व्यवसायिक क्षेत्र में भी शुभ फल प्रदान कर सकता है जिसके चलते इस प्रकार के शुभ प्रभाव में आने वाले जातक विभिन्न व्यवसायिक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। कुंडली के छठे घर में स्थित शुभ उच्च के मंगल का विशिष्ट प्रबल प्रभाव जातक को सरकार में कोई उच्च आधिकारिक पद प्रदान कर सकता है तथा इस प्रकार के कुछ जातक राजनीति के माध्यम से भी सरकार में लाभ तथा प्रभुत्व वाला कोई पद प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार के शुभ मंगल के प्रभाव में आने वाले राजनेता सामान्यता जनता के मध्य बहुत लोकप्रिय होते हैं तथा जन समुदाय के समर्थन के कारण ही ऐसे नेता सरकार में प्रभुत्व का कोई पद प्राप्त करते हैं। वहीं दूसरी ओर, कुंडली के छठे घर में स्थित उच्च के मंगल के अशुभ होने की स्थिति में जातक को अपनी संपत्ति आदि से संबंधित विवादों के चलते लंबे समय तक कोर्ट केसों का सामना करना पड़ सकता है तथा इस प्रकार के अशुभ प्रभाव के कुंडली में बहुत प्रबल होने की स्थिति में जातक को न्यायालय के प्रतिकूल निर्णय के कारण संपत्ति अथवा धन की हानि भी उठानी पड़ सकती है। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ उच्च के मंगल के प्रभाव के कारण जातक को अपने पिता के माध्यम से आने वाली अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जिसके चलते इस प्रकार के कुछ जातकों को अपने पिता द्वारा लिया गया कर्ज चुकाना पड़ सकता है जबकि कुछ अन्य जातकों को बहुत लंबे समय तक अपने पिता के किसी रोग के उपचार के लिए बहुत धन व्यय करना पड़ सकता है जिससे इन जातकों को धन की कमी का सामना भी करना पड़ सकता है। कुंडली के छठे घर में स्थित अशुभ उच्च के मंगल का दुष्प्रभाव जातक को किसी गंभीर रोग से पीड़ित भी कर सकता है।।
0 votes
*मंगल का हुआ कर्क राशि में गोचर, देखिये अपनी राशि पर असर।* *मंगल ने किया चंद्र की राशि कर्क राशि में प्रवेश, सभी 12 राशियों पर दिखेगा असर। जानें आपकी कुंडली पर कैसा होगा इस गोचर का असर। * सौर मंडल में मंगल ग्रह को बेहद महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। कहा जाता है कि मंगल ग्रह धरती और उसके जीवों को कई सारी आपदाओं से बचाने में मदद करता है। जैसे मंगल ग्रह धरती को शनि, राहु और केतु के बुरे प्रभाव से भी बचाता है। इसके साथ ही माना गया है कि मंगल ग्रह के कारण ही नीले समुद्र में मूँगे का जन्म होता है और यही विशेष कारण है कि प्रकृति में लाल रंग की उत्पत्ति हुई है।  ज्योतिष शास्त्रों में मंगल ग्रह को बेहद क्रूर ग्रह माना गया है। मंगल ग्रह को अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व प्राप्त है, इसलिए इसे अंगारे जैसा रक्त वर्ण भौम यानि भूमि पुत्र का दर्जा भी दिया गया है। लेकिन ये केवल अशुभ हो, ये आवश्यक नहीं। हर कुंडली के लिए मंगल अच्छा और बुरा दोनों तरह का फल देने में सक्षम है। वहीं अगर लाल किताब की मानें तो उसमें मंगल ग्रह को नेक और मंगल को शुभ और कभी-कभी अशुभ फल देने वाला ग्रह अलग-अलग रूप में माना गया है जिसके चलते ही जातक को मंगल ग्रह के फल और अन्य सभी बातों को अलग-अलग बताया गया है। लाल किताब के अनुसार कुंडली में मंगल के दोषपूर्ण या खराब होने की स्थिति के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। जिसके निवारण हेतु आपको इससे उपाय भी सुझाए गए हैं।  मंगल देव को युद्ध के देवता की उपाधि भी दी गयी है, जिन्हें शारीरिक ऊर्जा, आत्मविश्वास, अहंकार, क्रोध, वीरता और साहस जैसे गुणों का प्रतिनिधित्व भी प्राप्त है। इसी कारण जिस भी जातक की कुंडली में मंगल कमज़ोर होता है तो ये देखा गया है कि इसके दुष्प्रभाव से व्यक्ति को रक्त संबंधी समस्याएं, फोड़े, फुंसी, दुर्घटनाएँ आदि से जुड़ी कोई परेशानी रहती है और वह जातक आमतौर से थोड़ा डरपोक प्रवृत्ति का होता है। आइये जानें जातक के मंगल कमज़ोर या दुर्बल होने के पीछे क्या कारण होते हैं:-  भगवान हनुमान या श्री राम जी का मज़ाक उड़ाने या उनका अपमान करने से जातक का मंगल दुर्बल हो जाता है।अपने धर्म धर्म का पालन नहीं करने से भी जातक का मंगल खराब हो जाता है। घर या कार्य स्थल का पश्‍चिम कोण यदि अशुद्ध हो तो जातक का मंगल भी खराब होगा।अपने भाई या किसी मित्र या क़रीबी को दुश्मन बनाने से इसका बुरा असर आपके मंगल के ऊपर पड़ता है।निरंतर क्रोध करते रहने से मंगल ग्रह का कुंडली पर नकारात्मक प्रभाव दिखता है।किसी भी कुंडली के चौथे और आठवें भाव में मंगल का होना बेहद अशुभ माना गया है।किसी भी भाव में मंगल अकेला हो तो वो एक पिंजरे में बंद शेर की भाँति हो जाता है।सूर्य और शनि के साथ मिलकर मंगल अशुभ बन जाते हैं।मंगल के साथ केतु हो तो उसका बेहद अशुभ फल जातक को भुगतना पड़ता है। मंगल के साथ शत्रु ग्रह बुध का होना अशुभ फलों की प्राप्ति कराता है।  हर राशि के लिए मंगल का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि इसके किसी कुंडली में बली या मजबूत होने पर जहाँ ये जातक को अच्छे फल देता है। वहीं कुंडली में मंगल के खराब होने पर जातक को कई गंभीर बीमारी या समस्या होने का खतरा सदैव बना रहता है। जानते हैं मंगल के खराब होने से जातक को किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है: मंगल ग्रह को हौसले, बल शक्ति और लड़ाई का प्रतीक बताया गया है। इसलिए यदि व्यक्ति डरपोक है तो उसका मतलब उसका मंगल खराब है।जिस भी जातक का मंगल खराब या कमज़ोर होता है तो उस जातक के बड़े भाई पर उसका अशुभ फल पड़ता है। मंगल के खराब होने पर जातक को संतान सुख की प्राप्ति होने में अड़चनें आती हैं। मंगल खराब होने पर व्यक्ति हर समय झगड़ता रहता है। मंगल के अशुभ प्रभाव के चलते व्यक्ति को जेल या कोर्ट -कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं।  *गोचर काल का समय* अब यही पराक्रम और साहस का कारक लाल ग्रह मंगल 22 जून 2019, शनिवार को मिथुन से कर्क राशि में गोचर करने जा रहा है। मंगल का ये गोचर रात्रि 23:21 बजे कर्क राशि में होगा, जिसके बाद मंगल 9 अगस्त 2019 की सुबह 04:32 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल के इस गोचर का सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ेगा। इस राशिफल के अनुसार जानते हैं मंगल के इस गोचर का आपकी राशि पर क्या होगा प्रभाव, लेकिन उससे पहले आइये जानते हैं कि ये गोचर देशभर में क्या बदलाव लेकर आने वाला है:- *मंगल गोचर का शेयर बाज़ार पर प्रभाव* मंगल ताँबा, सोना, लोहा एवं अन्य धातुएं, मशीनरी, चौपाये, गुड़, धनिया, हल्दी, गन्ना, मुनक्का, किशमिश, लौंग, सुपारी, किराना, लाल मिर्च, चाय, शराब, छुहारा, मसूर, मोठ तथा गेहूं को नियंत्रित करता है। इसके अतिरिक्त मंगल को बिजली अर्थात ऊर्जा का स्वामित्व प्राप्त होता है इसलिए अपनी नीच राशि कर्क में गोचर करने के कारण इन वस्तुओं के दामों में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।  *मंगल का राजनीति पर प्रभाव* हाल ही में आए लोकसभा चुनाव 2019 के परिणामों में जिस प्रकार बीजेपी को पीएम मोदी की अच्छी छवि का फायदा मिला। दरअसल उसके पीछे का कारण भी उनकी कुंडली में मंगल देव द्वारा रूचक योग बनाकर उन्हें अधिक शक्तिशाली बनाना शामिल है। उनकी कुंडली में मंगल की शुभ स्थिति में होना और नवम भाव में हो रहा ये गोचर उनके लिए बेहद अच्छा माना जा रहा है। इस गोचर के दौरान उन्हें और सफलताएँ एवं वाह-वाही मिलेगी।  *मंगल के गोचर से देश पर पड़ेगा ऐसा असर* इसके अलावा 22 जून को जिस प्रकार मंगल अपनी नीच राशि कर्क में गोचर कर रहा है। उसी प्रकार 21 जून को मंगल के शत्रु ग्रह बुध का भी कर्क राशि में ही गोचर हुआ, जिसके चलते भारत के अपने पड़ोसी देशों से संबंध बिगड़ने या उसमें खटास आने की संभावना दिखाई दे रही है। ऐसे में इस गोचर के चलते देश भर के नेतों की जुबान खराब हो सकती है जिसके चलते आपको बीच-बीच में नेताओं से अपशब्द या जुबानी जंग सुनने को मिलती रहेगी। जिससे देश की छवि अंतराष्ट्रीय स्तर पर खराब हो सकती है।  *चलिए अब जानते हैं कैसा रहेगा 12 राशियों पर मंगल के कर्क राशि में हो रहे गोचर का विशेष प्रभाव* मेष मंगल का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में हो रहा है। इस भाव से हम माता, गृह निर्माण, वाहन सुख आदि के बारे में विचार करते हैं। मंगल के इस गोचर के आपको मिलेजुले परिणाम मिलेंगे। अपने माता-पिता का इस दौरान आपको विशेष ख्याल रखना होगा उनकी सेहत में गिरावट आ सकती है। वैवाहिक जीवन में आपको चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है। आपका जीवनसाथी इस दौरान किसी बात को लेकर आपसे नाराज़ हो सकता है। उनकी नाराज़गी को दूर करना चाहते हैं तो उनके साथ ज्यादा तर्क-वितर्क न करें। वक्त के साथ चीजें सकारात्मक रूप लेंगी। इस राशि के नौकरी पेशा लोग कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। इस गोचर के चलते आपकी ऊर्जा में वृद्धि होगी और आप इस ऊर्जा को अच्छी तरह से इस्तेमाल भी कर पाएंगे। इस दौरान कुछ जातकों की आमदनी में वृद्धि होने की संभवना भी है। उपाय: मंगलवार को अनंतमूल की जड़ी अपनी भुजा में पहनें। वृषभ मंगल के कर्क राशि में प्रवेश करते ही आपका तृतीय भाव सक्रिय हो जाएगा। काल पुरुष कुंडली में यह भाव मिथुन राशि का है और यह आपके साहस और पराक्रम का कारक होता है। इस भाव में मंगल के गोचर से आपकी संकल्प शक्ति में इज़ाफा होगा। आप जो सोचेंगे उसे करने की पूरी कोशिश करेंगे। हालांकि आपको सलाह दी जाती है कि किसी भी चीज की अति न करें इससे आपको नुक्सान हो सकता है। तृतीय भाव में मंगल के गोचर के चलते आपके छोटे भाई-बहनों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं, इसलिए उनकी सेहत का ख्याल रखें। आपके जीवनसाथी को कार्यक्षेत्र में कामयाबी मिलने के योग हैं। यह गोचर समाज में आपके मान-सम्मान को भी बढ़ाएगा और इस दौरान आप अपने विरोधियों पर हावी रहेंगे। हालांकि आपको बेवजह के विवादों में इस समय नहीं पड़ना चाहिए। इस राशि के कुछ जातक इस दौरान छोटी दूरी की यात्रा पर भी जा सकते हैं। उपाय: मंगलवार के दिन लाल मसूर का दान करें। मिथुन मंगल का गोचर आपकी राशि से द्वितीय भाव में हो रहा है। यह भाव धन और वाणी का कारक माना जाता है। द्वितीय भाव में मंगल के गोचर के चलते आपकी वाणी में कर्कशता आ सकती है। अगर आप शादीशुदा हैं तो आपका जीवनसाथी आपकी बातों से इस दौरान आहत हो सकता है। पारिवारिक जीवन में भी इस दौरान आप आक्रामक हो सकते हैं और आपका व्यवहार परिवार के सदस्यों को भी ठेस पहुंचा सकता है। आर्थिक पक्ष इस अवधि में मजबूत होगा। सेहत पर इस वक्त ध्यान देने की जरूरत है, आपका गलत व्यवहार आपको मानसिक तनाव दे सकता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए आपको एकांत में समय बिताने की जरूरत है और खुद का आकलन करने की आवश्यकता है। छात्र इस दौरान गलत संगति से बचकर रहें और जितना हो सके अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। अगर आपको पाठ्यक्रम के किसी विषय में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो अपने गुरुजनों से बात करें। उपाय: ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को अनार का दान करें। कर्क मंगल ग्रह आपकी ही राशि अर्थात आपके प्रथम भाव या लग्न भाव में गोचर करेगा। काल पुरुष कुंडली में यह भाव मेष राशि का होता है और इस भाव से हम स्वभाव, स्वास्थ्य, आत्मज्ञान और आपके रंग रुप के बारे में विचार करते हैं। इस भाव में मंगल के गोचर से आपकी सेहत में गिरावट आ सकती है। इस गोचर के चलते आपको छोटी-छोटी बातों से भी ठेस पहुँच सकती है और आप बात-बात पर भावुक हो सकते हैं। हालांकि इस दौरान आपके क्रोध और अहंकार में भी वृद्धि देखी जा सकती है। जीवनसाथी के साथ बात करते समय शब्दों का सोच-समझकर इस्तेमाल करें आपकी कोई बात झगड़े का कारण बन सकती है। कार्यक्षेत्र में आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। आपके अच्छे प्रयास आपको प्रगति के मार्ग पर ले जाएंगे। छात्रों के लिए यह गोचर अच्छा रहेगा, आप अपना ज्यादातर समय किताबों के बीच बिताना पसंद करेंगे। इस गोचर के दौरान आप विषम परिस्थितियों में भी अपने साहस के बल पर अच्छे परिणाम प्राप्त कर पाएंगे। उपाय: रोज़ाना चाँदी के बर्तनों का प्रयोग करें। सिंह आपकी राशि से द्वादश भाव में मंगल का गोचर होगा। इस समयावधि में आप नौकरी या उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए विदेश जा सकते हैं। वहीं इस राशि के जो लोग पहले से ही विदेशों में रह रहे हैं उन्हें थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में इस दौरान आपको सफलता मिलेगी। आर्थिक पक्ष थोड़ा कमजोर रह सकता है इस समय आपके ख़र्चों में वृद्धि हो सकती है जिसकी वजह से आपको मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ सकता है। वैवाहिक जीवन में भी संभलकर चलने की आवश्यकता है इस समय आपके जीवनसाथी के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करें और गप्पबाजी से बचें। जीवन की आपाधापी में खुद के लिए भी वक्त निकालना सीखें। इस राशि की गृहणियों को जीवनसाथी से कोई तोहफ़ा मिल सकता है। यह तोहफ़ा रिश्ते में नयी ताज़गी ला सकता है। उपाय: मंगल बीज मंत्र का जाप करें। कन्या आपके एकादश भाव में मंगल के गोचर से आपको जीवन के किसी क्षेत्र में उच्च लाभ मिलने की पूरी संभावना है। इस गोचर के चलते आपको आर्थिक परेशानियां नहीं होंगी और धन का आगमन किसी न किसी स्रोत से होता रहेगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होने के कारण आप जीवन के अन्य पहलुओं पर ध्यान लगा सकेंगे। वैवाहिक जीवन में थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपके प्रति जीवनसाथी के प्रेम में कमी आ गई है। प्रेम संबंधों में पड़े इस राशि के जातकों को अपने संगी के प्रति ईमानदार होने की जरूरत है। सामजिक जीवन में आपको अच्छे फल मिलेंगे। अपने दोस्तों के साथ आप सैर-सपाटे पर जा सकते हैं। नौकरी पेशा लोग कार्यक्षेत्र में अपना प्रभुत्व बनाएंगे। आपके विरोधी इस दौरान आपके सामने टिक नहीं पाएंगे। कारोबारियों को इस दौरान किसी ऐसे काम से लाभ हो सकता है जिसमें सफलता मिलने की उनको उम्मीद नहीं थी। उपाय: तांबा एवं लाल पुष्प का दान करना आपके लिए शुभ होगा। तुला मंगल ग्रह का गोचर आपकी राशि से दशम भाव में होगा। दशम भाव को कर्म भाव भी कहा जाता है। पारिवारिक मोर्चे पर आपको इस दौरान संभलकर चलने की जरूरत है। इस गोचर के दौरान घर में किसी बात को लेकर वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है। मंगल के प्रभाव से इस दौरान आपका स्वभाव भी उग्र रहेगा। अपनी वाणी पर संयम रखने की कोशिश करें। नौकरी पेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम मिलेंगे। आपका अच्छा काम बॉस की नजरों में आ सकता है और आपको पदोन्नति मिल सकती है। स्वास्थ्य को लेकर इस दौरान गंभीर होने की जरूरत है, ऐसे में जितना हो सके घर से बाहर भोजन करने से बचें। प्रेम में पड़े इस राशि के जातकों के जीवन में अड़चनें आ सकती हैं। छात्रों को भी पढ़ाई से ज्यादा इस समय खेलने-कूदने में मजा आएगा। खेलना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है लेकिन पढ़ाई के लिए भी समय अवश्य निकालें। उपाय: मंगलवार के दिन शिवलिंग पर गेहूँ एवं चना चढ़ाएँ। वृश्चिक भविष्यफल के अनुसार मंगल का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है। इस भाव को धर्म भाव भी कहा कहा जाता है। यह भाव कारक है धर्म का, भाग्य का, गुरु और गुरुतुल्य लोगों का। इस समय में आपको अच्छे फल पाने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ेगा। पिता से आपके संबंध बिगड़ सकते हैं और उनकी सेहत में गिरावट भी देखी जा सकती है। भाई-बहनों से रिश्ते बिगड़ सकते हैं इसलिए अपने अहम को पीछे रखकर उनसे बात करें। कार्यक्षेत्र में इस दौरान आपको सफलता मिलेगी और इस राशि के कुछ लोग जॉब में परिवर्तन भी कर सकते हैं। धर्म के प्रति आपका रुख इस दौरान अच्छा नहीं रहेगा। धर्म की बातों में आप कोई दिलचस्पी नहीं लेंगे। इस दौरान आप किसी लंबी दूरी की यात्रा पर भी जा सकता हैं। छात्रों को पढ़ाई के प्रति सकारात्मक रुख अपनाने की जरूरत है। अगर पढ़ाई में आपका मन नहीं लग पा रहा है तो योग ध्यान का सहारा लें आपको फायदा मिलेगा। उपाय: मंगलवार को अनंतमूल की जड़ अपनी भुजा या गले में धारण करें। धनु मंगल ग्रह आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर करेगा। इस भाव में मंगल के गोचर के चलते इस राशि के जातकों को जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपकी बातों का लोग गलत अर्थ निकाल रहे हैं। ऐसी स्थिति आपको खिन्न करेगी लेकिन फिर भी आप खुद को संभाल लेंगे। इस समय आपकी सेहत भी बिगड़ सकती है इसलिए अपने स्वास्थ्य का इस वक्त ध्यान दें। वैवाहिक जीवन में तकरार की स्थिति बन सकती है। अपने पिता के स्वास्थ्य का भी इस दौरान आपको ख्याल रखना होगा, उन्हें कोई छोटी-मोटी परेशानी भी हो तो डॉक्टर के पास ले जाएं। अगर आप वाहन चलाते हैं तो इस दौरान नियमों का उल्लंघन न करें। इस राशि के जो लोग साधना करते हैं वो इस दौरान मदिरा और माँस का सेवन न करें तो अच्छा रहेगा। आपके भाई-बहनों को इस दौरान जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके साथ समय बिताकर आपको उनकी उलझनें दूर करनी चाहिए। उपाय: चाँदी का कड़ा हाथ में पहनें। मकर मंगल ग्रह आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर करेगा। काल पुरुष की कुंडली में यह स्थान तुला राशि का होता है। इस भाव से मुख्य रूप से हम जीवन में होने वाली साझेदारियों के बारे में विचार करते हैं। मंगल के गोचर से आपके जीवन में थोड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान आपको अपने क्रोध पर भी नियंत्रण रखने की जरूरत है। जीवनसाथी के साथ तकरार न हो इसलिए जितना हो सके ठंडे दिमाग से उनके साथ बात करें। यह समय कार्यक्षेत्र में भी बहुत अच्छा नहीं रहेगा आपको कड़ी मेहनत के बाद ही अच्छे परिणाम मिलेंगे। छात्रों को इस दौरान यार दोस्तों से थोड़ा दूर रहना चाहिए नहीं तो आपकी पढ़ाई पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है। अगर आप सिंगल हैं तो किसी विपरीत लिंगी की तरफ आज आकर्षित हो सकते हैं। हालांकि किसी भी रिश्ते में आगे बढ़ने से पहले आपको सामने वाले के बारे में ठीक से जान लेना चाहिए। उपाय: मंगलवार के दिन गुड़ का दान करें। कुंभ आपके षष्टम भाव में मंगल ग्रह का गोचर होगा। इस दौरान किसी अन्य के मामले में टांग अड़ाने से आपको बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करके आप अपना ही नुकसान कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन इस समय सामान्य रहेगा हालांकि अपने विरोधियों पर इस दौरान आप हावी रहेंगे। पारिवारिक जीवन जैसा चल रहा है वैसा चलता रहेगा लेकिन वैवाहिक जीवन में थोड़ी बहुत परेशानियों का सामना आपको करना पड़ सकता है। इस अवधि में आपके जीवनसाथी के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। ख़र्चों में वृद्धि होने के कारण चिंतित हो सकते हैं। छात्रों को उन दोस्तों से दूर रहने की जरूरत है जो आपका समय बर्बाद करते हैं। गलत संगति में रहने से अच्छा है आप अकेले वक्त बिताएं। कारोबारी लोग जिन योजनाओं को लागू करने के बारे में सोच रहे हैं उनपर उन्हें ठंडे दिमाग से विचार करने की जरूरत है। उपाय: मंगवार के दिन लाल चंदन का दान करें। मीन मंगल ग्रह का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है। इस भाव को संतान भाव भी कहा जाता है। इस भाव में मंगल के गोचर के चलते आपके बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं इसलिए उनका ख्याल रखें। नौकरी पेशा से जुड़े लोगों को कार्यक्षेत्र में लाभ मिलेगा, इस अवधि में आपकी आमदनी में वृद्धि हो सकती है। छात्रों के लिए यह समय थोड़ा कठिन होगा, पढ़ाई से इस दौरान आपका ध्यान बार-बार भटकेगा। हालांकि इस राशि के कुछ छात्र इस दौरान पढ़ने के लिए विदेश जा सकते हैं। दांपत्य जीवन में ख़ुशियाँ आएंगी, आपके जीवनसाथी को इस दौरान अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है। अगर किसी से प्रेम करते हैं तो इस दौरान उनको प्रपोज न करें। जो लोग पहले से ही प्रेम में पड़े हैं उन्हें अपने संगी के साथ आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए साथ बैठकर बात करनी चाहिए। उपाय: हनुमान जी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर चढ़ाएं।
0 votes
पंचम स्थान संतान का होता है। वही विद्या का भी माना जाता है। पंचम स्थान कारक गुरु और पंचम स्थान से पंचम स्थान (नवम स्थान) पुत्र सुख का स्थान होता है। पंचम स्थान गुरु का हो तो हानिकारक होता है, यानी पुत्र में बाधा आती है। सिंह लग्न में पंचम गुरु वृश्चिक लग्न में मीन का गुरु स्वग्रही हो तो संतान प्राप्ति में बाधा आती है, परन्तु गुरु की पंचम दृष्टि हो या पंचम भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो संतान सुख उत्तम मिलता है। पंचम स्थान का स्वामी भाग्य स्थान में हो तो प्रथम संतान के बाद पिता का भाग्योदय होता है। यदि ग्यारहवें भाव में सूर्य हो तो उसकी पंचम भाव पर पूर्ण दृष्टि हो तो पुत्र अत्यंत प्रभावशाली होता है। मंगल की यदि चतुर्थ, सप्तम, अष्टम दृष्टि पूर्ण पंचम भाव पर पड़ रही हो तो पुत्र अवश्य होता है। पुत्र संततिकारक चँद्र, बुध, शुक्र यदि पंचम भाव पर दृष्टि डालें तो पुत्री संतति होती है। यदि पंचम स्थान पर बुध का संबंध हो और उस पर चँद्र या शुक्र की दृष्टि पड़ रही हो तो वह संतान होशियार होती है। पंचम स्थान का स्वामी शुक्र यदि पुरुष की कुंडली में लग्न में या अष्टम में या तृतीय भाव पर हो एवं सभी ग्रहों में बलवान हो तो निश्चित तौर पर लड़की ही होती है। पंचम स्थान पर मकर का शनि कन्या संतति अधिक होता है। कुंभ का शनि भी लड़की देता है। पुत्र की चाह में पुत्रियाँ होती हैं। कुछ संतान नष्ट भी होती है। पंचम स्थान पर स्वामी जितने ग्रहों के साथ होगा, उतनी संतान होगी। जितने पुरुष ग्रह होंगे, उतने पुत्र और जितने स्त्रीकारक ग्रहों के साथ होंगे, उतनी संतान लड़की होगी। एक नियम यह भी है कि सप्तमांश कुंडली में चँद्र से पंचम स्थान में जो ग्रह हो एवं उसके साथ जीतने ग्रहों का संबंध हो, उतनी संतान होगी। संतान सुख कैसे होगा, इसके लिए भी हमें पंचम स्थान का ही विश्लेषण करना होगा। पंचम स्थान का मालिक किसके साथ बैठा है, यह भी जानना होगा। पंचम स्थान में गुरु शनि को छोड़कर पंचम स्थान का अधिपति पाँचवें हो तो संतान संबंधित शुभ फल देता है। यदि पंचम स्थान का स्वामी आठवें, बारहवें हो तो संतान सुख नहीं होता। यदि हो भी तो सुख मिलता नहीं या तो संतान नष्ट होती है या अलग हो जाती है। यदि पंचम स्थान का अधिपति सप्तम, नवम, ग्यारहवें, लग्नस्थ, द्वितीय में हो तो संतान से संबंधित सुख शुभ फल देता है। द्वितीय स्थान के स्वामी ग्रह पंचम में हो तो संतान सुख उत्तम होकर लक्ष्मीपति बनता है। पंचम स्थान का अधिपति छठे में हो तो दत्तक पुत्र लेने का योग बनता है। पंचम स्थान में मीन राशि का गुरु कम संतान देता है। पंचम स्थान में धनु राशि का गुरु हो तो संतान तो होगी, लेकिन स्वास्थ्य कमजोर रहेगा। गुरु का संबंध पंचम स्थान पर संतान योग में बाधा देता है। सिंह, कन्या राशि का गुरु हो तो संतान नहीं होती। इस प्रकार तुला राशि का शुक्र पंचम भाव में अशुभ ग्रह के साथ (राहु, शनि, केतु) के साथ हो तो संतान नहीं होती। पंचम स्थान में मेष, सिंह, वृश्चिक राशि हो और उस पर शनि की दृष्टि हो तो पुत्र संतान सुख नहीं होता। पंचम स्थान पर पड़ा राहु गर्भपात कराता है। यदि पंचम भाव में गुरु के साथ राहु हो तो चांडाल योग बनता है और संतान में बाधा डालता है यदि यह योग स्त्री की कुंडली में हो तो। यदि यह योग पुरुष कुंडली में हो तो संतान नहीं होती। नीच का राहु भी संतान नहीं देता। राहु, मंगल, पंचम हो तो एक संतान होती है। पंचम स्थान में पड़ा चँद्र, शनि, राहु भी संतान बाधक होता है। यदि योग लग्न में न हों तो चँद्र कुंडली देखना चाहिए। यदि चँद्र कुंडली में यह योग बने तो उपरोक्त फल जानें। पंचम स्थान पर राहु या केतु हो तो पितृदोष, दैविक दोष, जन्म दोष होने से भी संतान नहीं होती। यदि पंचम भाव पर पितृदोष या पुत्रदोष बनता हो तो उस दोष की शांति करवाने के बाद संतान प्राप्ति संभव है। पंचम स्थान पर नीच का सूर्य संतान पक्ष में चिंता देता है। पंचम स्थान पर नीच का सूर्य ऑपरेशन द्वारा संतान देता है। पंचम स्थान पर सूर्य मंगल की युति हो और शनि की दृष्टि पड़ रही हो तो संतान की शस्त्र से मृत्यु होती है।
0 votes
पंचम भाव– जन्म कुंडली में पंचम भाव मुख्य रूप से संतान और ज्ञान का भाव होता है। ऋषि पाराशर के अनुसार इसे सीखने के भाव के तौर पर भी देखा जाता है। यह भाव किसी भी बात को ग्रहण करने की मानसिक क्षमता को दर्शाता है कि, कैसे आप आसानी से किसी विषय के बारे में जान सकते हैं। पंचम भाव गुणात्मक संभावनाओं को भी प्रकट करता है। कुंडली में पंचम भाव को निम्न प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है। सम्राट की निशानी, कर, बुद्धि, बच्चे, पुत्र, पेट, वैदिक ज्ञान, पारंपरिक कानून, पूर्व में किये गये पुण्य कर्म कुंडली में पंचम भाव से क्या देखा जाता है बुद्धिमता, लगाव, आत्मन बच्चे, प्रसिद्धि, संचित कर्म पद का बोध पंचम भाव से लगाया जाता है ज्योतिष विद्या से संबंधित पुस्तकों में पंचम भाव प्रश्नज्ञान में भट्टोत्पल कहते हैं कि मंत्रों का उच्चारण या धार्मिक भजन, आध्यात्मिक गतिविधियां, बुद्धिमता और साहित्यिक रचनाएँ पंचम भाव से प्रभावित होती हैं। पंचम भाव प्रथम संतान की उत्पत्ति, खुशियां, समाज और सामाजिक झुकाव का प्रतिनिधित्व करता है। यह भाव स्वाद और प्रशंसा, कलात्मक गुण, नाट्य रुपांतरण, मनोरंजन, हॉल और पार्टी, रोमांस, प्यार, प्रेम प्रसंग, सिनेमा, मनोरंजन का स्थान, रंगमंच आदि को दर्शाता है। यह भाव सभी प्रकार की वस्तुओं और भौतिक सुखों जैसे- खेल, ओपेरा, ड्रामा, संगीत, नृत्य और मनोरंजन को दर्शाता है। उत्तर कालामृत के अनुसार पंचम भाव कुंडली में एक महत्वपूर्ण भाव होता है क्योंकि यह उच्च नैतिक मूल्य, मैकेनिकल आर्ट, विवेक, पुण्य और पाप के बीच भेदभाव, मंत्रों के द्वारा प्रार्थना, वैदिक मंत्र और गीतों का उच्चारण, धार्मिक प्रवृत्ति, गहरी सोच, गहन शिक्षा और ज्ञान, विरासत में मिला उच्च पद, साहित्यिक रचना, त्यौहार, संतुष्टि, पैतृक संपत्ति, वेश्या के साथ संबंध और चावल से निर्मित उपहार को दर्शाता है। ऋषि पाराशर के अनुसार, पंचम भाव, दशम भाव से अष्टम पर स्थित होता है इसलिए पंचम भाव उच्च पद और प्रतिष्ठा में गिरावट को दर्शाता है। इससे पूर्व जन्म में किये जाने वाले पुण्य कर्मों का पता चलता है। यह भाव प्राणायाम, आध्यात्मिक कार्य, मंत्र-यंत्र, इष्ट देवता, शिष्य और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए आमंत्रण को दर्शाता है। यह भाव मानसिक चेतना से आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति को प्रकट करता है। काल पुरुष कुंडली में पंचम भाव पर सिंह राशि का नियंत्रण रहता है और इसका स्वामी सूर्य है। पंचम भाव की विशेषताएँ पंचम भाव विशेष विषयों में उच्च शिक्षा, फैलोशिप, पोस्ट ग्रेजुएशन, लेखन, पढ़ना, वाद-विवाद, रिसर्च, मानसिक खोज और कौशल को दर्शाता है। इस भाव से सट्टेबाजी में होने वाले लाभ, शेयर बाजार, जुआ, मैच फिक्सिंग और लॉटरी से जुड़े मामलों को भी देखा जाता है। पंचम भाव के संबंध में जातक परिजात में उल्लेख मिलता है कि यह बुद्धिमता, पुत्र, धर्म, शासक या राजा को दर्शाता है। तीर्थयात्रा को द्वितीय, पंचम, सप्तम और एकादश भाव से देखा जाता है। पंचम भाव प्रेम-प्रसंग, किस प्रेम-प्रसंग में सफलता मिलेगी, लाइसेंस, वैध और तर्कसंगत आकर्षण, बलात्कार, अपहरण आदि को दर्शाता है। यह भाव दो लोगों के बीच शारीरिक और चुंबकीय व्यक्तित्व को आकर्षित करता है। यह भाव पेट की चर्बी और ह्रदय का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अलावा यह दायें गाल, ह्रदय का दायां भाग या दायें घुटने को भी दर्शाता है। मेदिनी ज्योतिष में पंचम भाव बुद्धिमता, संवेदना की स्थिरता, सांप्रदायिक सौहार्द, लोगों में सट्टेबाजी की प्रवृत्ति, निवेश, स्टॉक एक्सचेंज, बच्चे, आबादी, विश्वविद्यालय, लोगों के नैतिक मूल्य आदि बातों को दर्शाता है। यह भाव जन्म दर और उससे संबंधित रुचि, मनोरंजन स्थल, सिनेमा, रंगमंच, कला, स्पोर्ट्स, सभी प्रकार के मनोरंजन और खुशियों को प्रदर्शित करता है। यह भाव राजदूत, सरकार के प्रतिनिधि और विदेशों में स्थित राजनयिकों पर शासन करता है। यह मानव संसाधन मंत्रालय, शिक्षा, स्कूल, संभावनाओं पर आधारित देश की अर्थव्यवस्था, लोगों की खुशियां या दुःख, शिक्षा से संबंधित सुविधाएँ, कला और देश की कलात्मक रचना आदि का बोध कराता है। पंचम भाव का कुंडली के अन्य भावों से अंतर्संबंध पंचम भाव का कुंडली के अन्य भावों से अंतर्संबंध हो सकता है। जैसे कि पंचम भाव संतान, कला, मीडिया, सृजनात्मकता, रंगमंच प्रस्तुति, सिनेमा, मनोरंजन से संंबंधित अन्य साधन, रोमांस और अस्थाई आश्रय या निवास से संबंधित होता है। पंचम भाव चतुर्थ भाव से द्वितीय स्थान पर होता है। तृतीय भाव हमारे अहंकार, अपरिपक्व व्यवहार और सोचने-समझने की शक्ति व ज्ञान को दर्शाता है लेकिन असल में इनका निर्धारण कुंडली में पंचम भाव से होता है। पंचम भाव उन बिन्दुओं को दर्शाता है, जिनसे जीवन में आप कुछ सीखते हैं। चतुर्थ भाव शुरुआती शिक्षा का कारक होता है, यह प्राथमिक शिक्षा, निवास और भवन को दर्शाता है। पंचम भाव गणित, विज्ञान, कला आदि से संबंधित होता है। इससे तात्पर्य है कि आप किस विषय में विशेषज्ञता प्राप्त करेंगे। शेयर बाजार, सट्टे से लाभ, सिनेमा, अचानक होने वाला धन लाभ और हानि कुंडली में पंचम भाव से देखा जाता है। पंचम भाव राजनीति, मंत्री, मातृ भूमि से लाभ की प्राप्ति, स्थाई और पारिवारिक संपत्ति को दर्शाता है। आपके पास कितना धन होगा यह कुंडली में चतुर्थ भाव से देखा जाता है। वहीं आपके परिवार के पास कितना धन होगा यह पंचम भाव से जाना जाता है। पंचम भाव बुद्धिमता, अहंकार और आपके बड़े भाई-बहनों की संवाद क्षमता को दर्शाता है। आपकी माता का धन और उन्हें होने वाले लाभ, बच्चों से जुड़े खर्च, आपके जीवनसाथी और भाई-बहनों की इच्छा व उन्हें प्राप्त होने वाले लाभ का बोध भी पंचम भाव से होता है। यह भाव अंतर्ज्ञान और जीवनसाथी के परिवार की छवि के प्रभाव को भी दर्शाता है। यह भाव धर्म, दर्शन, धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताओं का सबसे उच्च भाव है। यह दर्शाता है कि आपके पिता और गुरु से आप किस प्रकार ज्ञान प्राप्त करेंगे। ज्योतिष शास्त्र की पुस्तकों में पंचम भाव कर्म या नौकरी का अंत और शुरुआत को दर्शाता है। इसका मतलब है कि आप नौकरी खो देंगे और आपको नई नौकरी मिलेगी या जॉब के लिए नये अवसर मिलेंगे। पंचम भाव बॉस की गुप्त संपत्तियाँ, इच्छाओं का अंत, बड़े भाई-बहनों के जीवनसाथी, दादी की सेहत, मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति की राह में आने वाली कठिनाइयों को दर्शाता है।
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...