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आज हम बात करेंगे मनचाही नौकरी चाहिए तो पढ़ें नवग्रह के 9 अचूक उपाय

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आज हम बात करेंगे मनचाही नौकरी चाहिए तो पढ़ें नवग्रह के 9 अचूक उपाय ग्रह अनुसार रोजगार के सिद्ध अनुभूत तरीके अगर आप नौकरी चाहते हैं और सभी उपाय आजमा कर थक गए हैं तो सबसे पहले किसी योग्य ज्योतिषी को अपना भविष्य दिखाएं और यह जानकारी प्राप्त करें कि किस ग्रह के कारण आपको रोजगार में बाधा आ रही है। उसी ग्रह के अनुसार उपाय आजमाएं, सफलता अवश्य मिलेगी। प्रस्तुत है नवग्रह के अनुसार रोजगार के 9 उपाय- * सूर्य के कारण आपके रोजगार में बाधा हो, तो गाय को रोटी देने का प्रयोग आरंभ करें। काली अथवा पीली गाय को ही रोटी खिलानी चाहिए। * चंद्र के कारण आपके रोजगार में बाधा हो, तो रात्रि में दूध ग्रहण न करें और प्रतिदिन रात्रि में अपने पिता को स्वयं दूध ले जाकर पिलाएं * बुध ग्रह के कारण आपके रोजगार में बाधा उत्पन्न हो, तो चांदी का कोई आभूषण धारण करें तथा सोना खरीदें। घर में पेड़-पौधे कम लगाएं * गुरु ग्रह के कारण आपके रोजगार में बाधा उत्पन्न हो तो लाल गुंजा एवं सोने का सिक्का एक पीले कपड़े में बांधकर घर में किसी स्थान पर रख दें। मनचाही नौकरी चाहिए तो पढ़ें नवग्रह के 9 अचूक उपाय * शुक्र ग्रह के कारण आपको रोजगार में बाधा उत्पन्न हो, तो सबसे पहले महिलाओं का सम्मान करें। स्त्री को शुक्र की कारक माना गया है। अपनी पत्नी से कभी धोखा न करें। पत्नी को प्यार करें। विवाह न हुआ हो तो घर की सम्मानीय स्‍त्रियों के चरण स्पर्श करना चाहिए तथा नित्य इस नियम को अपनाना चाहिए।नन्ही बालिकाओं को उपहार देते रहें * शनि आपके रोजगार में बाधा उत्पन्न कर रहा है, तो एक पात्र में तिल्ली का तेल लेकर उसमें अपनी परछाई देखकर भिखारी को दान कर दें। * राहु के कारण आपके रोजगार में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो सौंफ, लाल गुंजा एक लाल वस्त्र में बांधकर अपने शयन कक्ष में स्थापित कर दें। * केतु के कारण आपके रोजगार में बाधा उत्पन्न हो रही हो, तो तेल की चुपड़ी हुई रोटी नित्य प्रति कुत्ते को खिलाएं। किसी भी सहायता के लिए संपर्क करें पारद शिवलिंग पारद श्री यंत्र पारद की मूर्तियां सभी उपलब्ध हैं संपर्क करें

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ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय
वाराणसी
9450537461
posted Sep 10, 2017 by anonymous

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आज हम बात करेंगे महिलाएं और उनको प्रभावित करने वाले नौ ग्रहों के विषय मे वैसे तो सौरमंडल के सभी ग्रह धरती पर सभी प्राणियों पर एक जैसा ही प्रभाव डालते हैं। लेकिन सभी प्राणियों का रहन सहन और प्रवृत्ति या प्रकृति एक दूसरे से भिन्न होती है इसलिए ग्रहों का प्रभाव कुछ कम -ज्यादा तो होता ही है। यहाँ सिर्फ महिलाओं पर सभी ग्रहों के प्रभाव का ही जिक्र किया जा रहा है। कई बार महिलाएं असामान्य व्यवहार करती हैं तो उन्हें बहुत झेलना पड़ता है कि उसे किसी ने कुछ सिखा दिया है या बहाने बना रही है जबकि कई बार ग्रहों की अच्छी (उग्र) या बुरी ( कुपित ) स्थिति भी कारण होती है। जन्म -कुंडली में विभिन्न ग्रहों के साथ युति का अलग-अलग प्रभाव हो सकता है। ♐सूर्य सूर्य एक उष्ण और सतोगुणी ग्रह है,यह आत्मा और पिता का कारक हो कर राज योग भी देता है। अगर जन्म कुंडली में यह अच्छी स्थिति में हो तो इंसान को स्फूर्तिवान,प्रभावशाली व्यक्तित्व, महत्वाकांक्षी और उदार बनाता है। परन्तु निर्बल सूर्य या दूषित सूर्य होने पर इंसान को चिड़चिड़ा, क्रोधी, घमंडी, आक्रामक और अविश्वसनीय बना देता है। अगर किसी महिला कि कुंडली में सूर्य अच्छा हो तो वह हमेशा अग्रणी ही रहती है और निष्पक्ष न्याय में विश्वास करती है चाहे वो शिक्षित हो या नहीं पर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देती है। परन्तु जब यही सूर्य उसकी कुंडली में नीच का हो या दूषित हो जाये तो महिला अपने दिल पर एक बोझ सा लिए फिरती है। अन्दर से कभी भी खुश नहीं रहती और आस -पास का माहौल भी तनाव पूर्ण बनाये रखती है। जो घटना अभी घटी ही ना हो उसके लिए पहले ही परेशान हो कर दूसरों को भी परेशान किये रहती है। बात-बात पर शिकायतें, उलाहने उसकी जुबान पर तो रहते ही हैं, धीरे -धीरे दिल पर बोझ लिए वह एक दिन रक्त चाप की मरीज बन जाती है और न केवल वह बल्कि उसके साथ रहने वाले भी इस बीमारी के शिकार हो जाते है। दूषित सूर्य वाली महिलायें अपनी ही मर्जी से दुनिया को चलाने में यकीन रखती हैं सिर्फ अपने नजरिये को ही सही मानती हैं दूसरा चाहे कितना ही सही हो उसे विश्वास नहीं होगा। सूर्य का आत्मा से सीधा सम्बन्ध होने के कारण यह अगर दूषित या नीच का हो तो दिल डूबा-डूबा सा रहता है जिस कारण चेहरा निस्तेज सा होने लगता है। ♐उपाय♏ सूर्य को जल देना ,सुबह उगते हुए सूर्य को कम से कम पंद्रह -मिनट देखते हुए गायत्री मन्त्र का जाप ,आदित्य-हृदय का पाठ और अधिक परेशानी हो तो रविवार का व्रत भी किया जा सकता है। संतरी रंग (उगते हुए सूरज) का प्रयोग अधिक करें . ♐चंद्रमा किसी भी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। स्त्री की कुंडली में इसका महत्व और भी अधिक है। चन्द्र राशि से स्त्री का स्वभाव, प्रकृति, गुण -अवगुण आदि निर्धारित होते है। चंद्रमा माता, मन, मस्तिष्क, बुद्धिमत्ता, स्वभाव, जननेन्द्रियाँ, प्रजनन सम्बंधी रोगों, गर्भाशय अंडाशय, मूत्र -संस्थान, छाती और स्तन का कारक है..इसके साथ ही स्त्री के मासिक -धर्म ,गर्भाधान एवं प्रजनन आदि महत्वपूर्ण क्षेत्र भी इसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। चंद्रमा मन का कारक है ,इसका निर्बल और दूषित होना मन एवं मति को भ्रमित कर किसी भी इंसान को पागल तक बना सकता है। कुंडली में चंद्रमा की कैसी स्थिति होगी यह किसी भी महिला के आचार -व्यवहार से जाना जा सकता है। अच्छे चंद्रमा की स्थिति में कोई भी महिला खुश -मिजाज होती है। चेहरे पर चंद्रमा की तरह ही उजाला होता है। यहाँ गोरे रंग की बात नहीं की गयी है क्योंकि चंद्रमा की विभिन्न ग्रहों के साथ युति का अलग -अलग प्रभाव हो सकता है। कुंडली का अच्छा चंद्रमा किसी भी महिला को सुहृदय ,कल्पनाशील और एक सटीक विचारधारा युक्त करता है। अच्छा चन्द्र महिला को धार्मिक और जनसेवी भी बनाता है। लेकिन किसी महिला की कुंडली में यही चन्द्र नीच का हो जाये या किसी पापी ग्रह के साथ या अमावस्या का जन्म को या फिर क्षीण हो तो महिला सदैव भ्रमित ही रहेगी। हर पल एक भय सा सताता रहेगा या उसको लगता रहेगा कोई उसका पीछा कर रहा है या कोई भूत -प्रेत का साया उसको परेशान कर रहा है। कमजोर या नीच का चन्द्र किसी भी महिला को भीड़ भरे स्थानों से दूर रहने को उकसाएगा और एकांतवासी कर देता है धीरे-धीरे। , महिला को एक चिंता सी सताती रहती है जैसे कोई अनहोनी होने वाली है। बात-बात पर रोना या हिस्टीरिया जैसी बीमारी से भी ग्रसित हो सकती है। बहुत चुप रहने लगती है या बहुत ज्यादा बोलना शुरू कर देती है। ऐसे में तो घर-परिवार और आस पास का माहौल खराब होता ही है। बार-बार हाथ धोना, अपने बिस्तर पर किसी को हाथ नहीं लगाने देना और देर तक नहाना भी कमजोर चन्द्र की निशानी है। ऐसे में जन्म-कुंडली का अच्छी तरह से विश्लेषण करवाकर उपाय करवाना चाहिए। ♐उपाय♐ अगर किसी महिला के पास कुंडली नहीं हो तो ये सामान्य उपाय किये जा सकते हैं, जैसे शिव आराधाना,अच्छा मधुर संगीत सुनें, कमरे में अँधेरा न रखें,हल्के रंगों का प्रयोग करें। पानी में केवड़े का एसेंस डाल कर पियें, सोमवार को एक गिलास ढूध और एक मुट्ठी चावल का दान मंदिर में दं, और घर में बड़ी उम्र की महिलाओं के रोज चरण -स्पर्श करते हुए उनका आशीर्वाद अवश्य लें। छोटे बच्चों के साथ बैठने से भी चंद्रमा अनुकूल होता है। ♈♈♈♈♈♈♈♈♈♈♈♈♈ ♐मंगल⏬ ग्रहों का सेनापति मंगल, अग्नितत्व प्रधान तेजस ग्रह है। इसका रंग लाल है और यह रक्त-संबंधो का प्रतिनिधित्व करता है। जिस किसी भी स्त्री की जन्म कुंडली में मंगल शुभ और मजबूत स्थिति में होता है उसे वह प्रबल राज योग प्रदान करता है। शुभ मंगल से स्त्री अनुशासित, न्यायप्रिय,समाज में प्रिय और सम्मानित होती है। जब मंगल ग्रह का पापी और क्रूर ग्रहों का साथ हो जाता है तो स्त्री को मान -मर्यादा भूलने वाली ,क्रूर और हृदय हीन भी बना देता है। मंगल रक्त और स्वभाव में उत्तेजना, उग्रता और आक्रामकता लाता है इसीलिए जन्म-कुंडली में विवाह से संबंधित भावों–जैसे द्वादश, लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम व अष्टम भाव में मंगल की स्थिति को विवाह और दांपत्य जीवन के लिए अशुभ माना जाता है। ऐसी कन्या मांगलिक कहलाती है। लेकिन जिन स्त्रियों की जन्म कुंडली में मंगल कमजोर स्थिति में हो तो वह आलसी और बुजदिल होती है,थोड़ी सी डरपोक भी होती है। मन ही मन सोचती है पर प्रकट रूप से कह नहीं पाती और मानसिक अवसाद में घिरती चली जाती है। ⏬उपाय⏬ कमजोर मंगल वाली स्त्रियाँ हाथ में लाल रंग का धागा बांध कर रखे और भोजन करने के बाद थोड़ा सा गुड़ जरुर खा लें। ताम्बे के गिलास में पानी पियें और अनामिका में ताम्बे का छल्ला पहन लें। जिन स्त्रियों की जन्म कुंडली में मंगल उग्र स्थिति में होता है उनको लाल रंग कम धारण करना चाहिए और मसूर की दाल का दान करना चाहिए। रक्त-सम्बन्धियों का सम्मान करना चाहिए जैसे बुआ, मौसी, बहन,भाई और अगर शादी शुदा है तो पति के रक्त सम्बन्धियों का भी सम्मान करें . हनुमान जी की शरण में रहना कैसे भी मंगल दोष को शांत रखता है। ◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀ ♐बुध♐ बुध ग्रह एक शुभ और रजोगुणी प्रवृत्ति का है। यह किसी भी स्त्री में बुद्धि, निपुणता, वाणी ..वाकशक्ति, व्यापार, विद्या में बुद्धि का उपयोग तथा मातुल पक्ष का नैसर्गिक कारक है। यह द्विस्वभाव, अस्थिर और नपुंसक ग्रह होने के साथ-साथ शुभ होते हुए भी जिस ग्रह के साथ स्थित होता है, उसी प्रकार के फल देने लगता है। अगर शुभ ग्रह के साथ हो तो शुभ, अशुभ ग्रह के अशुभ प्रभाव देता है। अगर यह पाप ग्रहों के दुष्प्रभाव में हो तो स्त्री कटु भाषी, अपनी बुद्धि से काम न लेने वाली यानि दूसरों की बातों में आने वाली या हम कह सकते हैं कि कानाें की कच्ची होती है। जो घटना घटित भी न हुई उसके लिए पहले से ही चिंता करने वाली और चर्मरोगों से ग्रसित हो जाती है। बुध बुद्धि का परिचायक भी है अगर यह दूषित चंद्रमा के प्रभाव में आ जाता है तो स्त्री को आत्मघाती कदम की तरफ भी ले जा सकता है। जिस किसी भी स्त्री का बुध शुभ प्रभाव में होता है वे अपनी वाणी के द्वारा जीवन की सभी ऊँचाइयों को छूती हैं, अत्यंत बुद्धिमान, विद्वान् और चतुर और एक अच्छी सलाहकार साबित होती है। व्यापार में भी अग्रणी तथा कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी समस्याओं का हल निकाल लेती हैं। उपाय♓ हरे मूंग (साबुत), हरी पत्तेदार सब्जी का सेवन और दान, हरे वस्त्र को धारण और दान देना उपुयक्त है। तांबे के गिलास में जल पीना चाहिए। अगर कुंडली न हो और मानसिक अवसाद ज्यादा रहता हो तो सफेद और हरे रंग के धागे को आपस में मिला कर अपनी कलाई में बाँध लेना चाहिए।

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आज मंगल ग्रह के बारे में बात करते है। ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय वाराणसी 9450537461 मंगल ग्रह ये अग्नि तत्व ग्रह है मेष और वृश्चिक का स्वामि है मंगल कर्क में नीच का और मकर में उच्च का होके शुभ अशुभ फल देता है।आज मंगल की महादशा में बाकि ग्रहो की अंतरदशा को फलित करते है। मंगल में मंगल यदि मंगल उच्च राशि, स्वक्षेत्री, शुभ यहीं से दुष्ट होकर केन्द्र, त्रिकोण, आय और सहज भावस्थ हो तो अपनी दशा-अन्तर्दशा में शुभा-शुभ फल प्रदान करता है। बलवान मंगल, बली आयेश या धनेश से सम्बन्ध करता हो तो जातक इसकी दशा में राज्यानुग्रह प्राप्त कर लेता है । सेना अथवा अर्द्धसैनिक बल में नौकरी मिल जाती है, कमाण्डर जैसे पद प्राप्त होते हैं, सैन्य या पुलिस पदक मिलता है, व्यवसायी हो तो व्यवसाय खूब चमकता है क्या लश्मी की कूपा बनी रहती है। व्यक्ति परमोत्साही, पर क्रूरकमाँ बन जाता है, खून में गरमी बढ जाती है।अशुभ मंगल एव अशुभ स्थानस्थ मंगल की दशा में, व्यक्ति को क्रोध अधिक आ जाता है, बुद्धि भ्रमित हो जाती है, निम्न पदों पर नौकरी करनी पड़ती है, इष्टजनों से कलह, व्यवसायियों का ग्राहकों से झगडा, रक्तचाप, रक्तविकार, शिरोवेदना, नेत्र रोग, खुजली, देह में चकते जैसे रोग व अन्य व्याधिया हो जाती है क्या इनकी चिकित्सा कराने में धन व्यय होता है। व्यवसाय स्थिर हो जाता है।कुंडली के अनुसार उपाय करवा कर समाधान पाया जा सकता है। मंगल में राहु मंगल और राहु दोनों ही नैसर्गिक पापी ग्रह है। मंगल की महादशा में राहु की अन्तर्दशा में शुभाशुभ, अर्थात मिश्रित फल मिलते है। शुभ मंगल की महादशा में शुभ राहु का अंतर चल रहा हो तो जातक मकान, भूमि, धन, माल आकस्मिक रूप से पा लेता है, शत्रुओँ का मनमर्दन कर विशेष बाहुबल का परिचय देता है। कृषि में लाभ, वाद-विवाद में विजय मिलती है। प्रवास अधिक करने पड़ते हैं, दुर्घटना का भय रहता है । अशुभ राहु के दशाकाल में जातक मन में बहम, अपने-परायों से झगडा,व्यर्थ के लाछन और अपवाद, शत्रुआँ से कष्ट, स्थानान्तरण, उदर शूल, वायुबिकार, मन्दाग्नि, रक्तक्षय, श्यास-कास से पीडित रहता है, बनते कार्यों में विघ्न आते हैं और प्रत्येक कार्य में असफलता मिलती है ।परन्तु ग्रहो का समाधान से रहत मिलती है नक्षत्रो की विवेचना भी जरूरी है। वृहस्पति शुभ मंगल की दशा में यदि शुभ और बलवान ब्रिहस्पती की अन्तर्दशा चले तो जातक की सल्कीर्ति फैलती है, कई अच्छे ग्रन्धों का निर्माण होता है, अकर्मण्य को कर्म मिलता है, पूर्वार्जित सम्पत्ति मिलती है, नौकरी में पदवृद्धि, वेतनवृछि होती है, सत्कर्म, परोपकार, तीर्थाटन में रुचि बढती है, आरोग्यता वनी रहती है, कार्य-व्यवसाय में वृद्धि होती है । पुत्रोत्सव से मन में हर्ष, सन्तान के कारण यश मिलता है तथा समाज में मान-सम्मान बहता है। अशुभ और निर्बल बृहस्पति की अन्तर्दशा चल रही हो तो फलित बदल जाता है शनि मंगल महादशा में राहु अन्तर्दशा के जैसे मिश्रित मंगल शनि अन्तर्दशा के भी मिलते है। बलवान शनि शुभ अवस्था आदि में हो तो अपनी अन्तर्दशा से जातक को स्लेछ वर्ग से लाभ, स्वग्राम में व अपने समाज में यश-प्रतिष्ठा, घन-घान्य की वृद्धि, काले पशुधन से लाभ एव ग्रामसभा का सदस्य आदि जैसे पाल प्रदान करता है। किसी पराक्रमपूर्ण कार्य के लिए स्वल्प पारितोषिक मिलता है । यदि पापी और अशुभ स्थानस्थ शनि हो तो जातक इस दशाकाल में अस्थिर-धि, एक कार्य को छोड़कर दूसरा कार्य प्रारम्भ करने वाला, स्वजनों का नाश देखने वाला, चोर-लुटेरों-शत्रुओँ व शस्त्राघात से पीडित होने वाला, पुत्र सुख से हीन, अपकीर्ति पाने वाला होता है । नौबत यहा तक आ पहुंचती है कि जातक सभी ओर से निराश होकर ईंश्वरभक्ति करता है अथवा आत्महनन करने की चेष्टा कर कारागृह की शोभा बढा देता है । बुध बली बुध शुभ होकर केन्द्र, त्रिकोण या आय स्थान में हो तथा मंगल में बुध का अन्तर चल रहा हो तो जातक स्थिर मति, पश्चिम से कार्य करने वाला होता है । उसके यहा संख्या, कीर्तन, प्रवचन आदि होते रहते है ।वैश्य वर्ग से लाभ मिलता है। सेना में पदृवृद्धि, विद्या-विनोद, बहुमूल्य सम्पत्ति का स्वामित्व प्राप्त होता है। कन्या रत्न उत्पत्ति के उपलक्ष्य से उत्सव मनाता है। निर्बल और अशुभ बुध की अन्तर्दशा हो तो जातक की अपकीर्ति फैलती है, कठिन श्रम का फल शून्य मिलता है, लेखन कार्य से अपयश, कार्य-व्यवसाय में हानि, दुष्टजनों से मनस्ताप, ग्रहक्लह से मानसिक वेदना मिलती है । अनुभव से ऐसा आता है कि जिन्हें दशा के प्रारम्भ में हानि होती है, उन्हें दशा के अन्त में लाभ मिल जाता है और जिन्हें दशा के अन्त में हानि रहती है, उन्हें दशा के प्रारम्भ में लाभ मिलता है । केतु शुभ केतु की अन्तर्दशा में जातक को सुख और शान्ति मिलती है, पद व उत्साह में वृद्धि और साकार होता है। अशुभ केतु की दशा में जातक के मन में भय, पाप कर्म में रुचि, निराशा, इष्टजनों को कष्ट, नीव तीनों की संगति से अपयश, शत्रुओ से पराजय, व्यर्थ में इधर-उधर भटकना, बिजली, बादल से अपपृत्यु, अग्नि भय, आवास का नाश, राज्यदण्ड जिने की आशंका बनती है । उदर शूल, पेड़ शूल, पत्यरी, कार्बक्ल, नासूर, भगन्दर जैसे दुष्ट रोग पीडित करते है । केतु अन्तर्दशा विशेष कष्टदायक होती है शुक्र ज़ब मंगल की महादशा में शुभ और बलवान शुक्र की अंतर्दशा व्यतीत हो रही हो तो जातक के मन में चंचलता, कामावेग में वृद्धि, चित्त में ईष्यएँ व द्वेष भर जाते हैं ।परीक्षार्थी येन-केन-प्रकारेण उतीर्ण हो जाते हैं, पुत्र उत्पत्ति का हर्ष, श्वसुर पक्ष से दान-दहेज मिलता है, सुन्दर स्त्रियों से प्रेमालाप एव उपहारों की प्राप्ति होती है । राज्य कृपा से भूमि की प्राप्ति, नाटक, संगीत, सिनेमा, नाच-गाने में रुचि बढती है । पापी और अशुभ क्षेत्री शुक्र की अन्तर्दशा से जातक विदेश गंमन करता है,| सूर्य मंगल की महादशा में जब उच्च, स्वक्षेत्री, शुभ ग्रह युक्त या दृष्ट सूर्य की अन्तर्दशा चलती है तो व्यक्ति राज्य से विशेष लाभ प्राप्त करता है । नौकर हो तो आनरेरी पद से वृद्धि, अग्रिम वेतन वृद्धि होती है । उच्चधिकांरेयों का कृपापात्र बनता है । सेना व पुलिस सेवा के कर्मचारी इस दशा में विशेष लाभान्वित होते है। युद्ध व वादविवाद में विजय मिलती है। दूर-दराज के जंगलों, पहाडों मेँ निवास होता है। पापक्षेत्री, पापप्रभाबी, निर्बल सूर्य की दशा हो तो जातक गुरु-ब्राहम्ण से द्वेष करता है, माता-पिता को कष्ट मिलता है, मन को परिताप पहुँचता है, धनहानि व पशुओ का नाश होता है। विष्य-वासना बढ़ती है और जातक समलैंगिक संसर्ग करता है। चन्द्रमा शुभ पाल की महादशा में जब शुभ और बली चन्द्रमा की अन्तर्दशा चलती है तो जातक का मन शान्त, लेकिन देह में आलस्य बढ़ जाता है। जातक अधिक सोता है, दूध, खोये के पदार्थ खाने को मिलते हैं, प्रवास अधिक होते हैं, प्राकृतिक दृश्यों की छटा के अवलोकन की विशेष रुचि बनती है, श्वेत वस्तुओं व घातुओँ के व्यवसाय से विशेष लाभ मिलता है। बाग-बगीचे लगवाने पर धन व्यय, विवाहोत्सव एव मांगलिक कार्य सप्पन्न होते है। इष्ट-मित्रों से बहुमूल्य उपहार मिलते है। अशुभ और पाप प्रभावी चन्द्रमा की अन्तर्दशा से जातक को नजला, जुकाम, स्वप्नदोष, जिगर-तिल्ली में शोथ,| जातक अविवाहित और पराई रित्रयों से रमण करता है, मन में उद्धिग्नत्ता बनी रहती है, कल्पनालोक से विचरण कर अमूल्य समय को नष्ट करता है। यदि चन्द्रमा मारकेश से सम्बन्थ करता हो तो अपमृत्यु का भय बनता है। ये एक साधारण फलित है।विशेष् नक्षत्रो और भाव लगन स्वामी के उपाय अवश्य समाधान मिलता है। ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय वाराणसी 9450537461
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नवग्रह और पितृ दोष की शांति करना है तो जपें ये चमत्का‍री मंत्र, खास बातें 1. जन्म कुंडली में पितृ दोष हो तो उसकी शांति के लिए श्रीकृष्ण-मुखामृत गीता का पाठ करना चाहिए। 2. प्रेत शांति व पितृ दोष निवारण के लिए भी श्रीकृष्ण चरित्र की कथा श्रीमद्भागवत महापुराण का पाठ पौराणिक विद्वान ब्राह्मणों से करवाना चाहिए। 3. ग्रह शांति व सभी ग्रहों द्वारा किए जा रहे सर्वविध उपद्रव शमनार्थ 'नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र की 1008 आहुतियां देनी चाहिए। 4. 'नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र प्राय: सभी ग्रहों की शांति के लिए उपयोग में लाया जाता है। 5. शारीरिक ऊर्जा, मानसिक शांति व आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन प्रात: या सायं 16 बार निम्न मंत्र का जप करना चाहिए। 6. भगवान श्रीकृष्ण का मूलमंत्र, जिसे द्वादशाक्षर मंत्र कहते हैं- 'नमो भगवते वासुदेवाय।
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