top button
    Futurestudyonline Community

अच्छी_आर्थिक_स्थिति_कब_होती_है

0 votes
44 views
कुंडली में दूसरा और ग्यारहवा भाव आर्थिक स्थिति के लिए जाने जाते है।जातक धन के मामले में कैसा रहेगा और उसकी क्या आर्थिक स्थिति रहेगी?इसके लिए कुंडली मे दूसरे, ग्यारहवे भाव का अच्छा होना आवश्यक है।जिन भी जातको की कुंडली मे दूसरे और ग्यारहवे भाव के स्वामियों के संबंध अच्छी स्थिति में होना अच्छा रहता है।दूसरे और ग्यारहवे भाव के स्वामियों के बीच संबंध होना, दूसरे ग्यारहवे भाव के स्वामियों के संबंध राजयोग कारक(केन्द्रेश/त्रिकोणेश) से हो जाना धन-दौलत के लिए शुभ फल मिलते है दूसरे/ग्यारहवे स्वामियों के संबंध 5वे, 9वे, भाव के स्वामी से होना अच्छा होता है क्योंकि 5वे और 9वे भाव के स्वामी वृद्धि कारक और शुभ फल कारक होते है जो कि धन के संबंध में शुभ परिणाम देते है।इसके अलावा भी यदि दूसरे/"ग्यारहवे भाव के स्वामी अपने ही अपने भावो में बैठे हो या एक दूसरे के भावों में बैठ जाते है तब भी धन कमाने के कई रास्ते खुले होते है।धनेश/लाभेश जितना ज्यादा शुभ स्थिति में होंगे उतना बढ़िया फल आर्थिक रूप से होते है। अब_कुछ_उदाहरण_अनुसार #मेष_लग्न कुंडली मे दूसरे और ग्यारहवे भाव का स्वामी शुक्र और शनि होता है और यह दोनो ग्रह आपस मे मित्र भी है यदि अब यह दोनों आपस मे संबंध बनाए, राजयोग कारक ग्रहो के साथ बैठ जाये, केंद्र त्रिकोण में शुभ ग्रहों से प्रभावित हो तब ऐसा जातक धन के मामले में बहुत भाग्यशाली होगा।। #सिंह_लग्न:- सिंह लग्न में दूसरे/ग्यारहवे भाव दोनो का स्वामी बुध होता है अब यहाँ बुध ही जातक की आर्थिक स्थिति के लिए मुख्य ग्रह होता है क्योंकि दूसरे और ग्यारहवे दोनो भावों का स्वामी बुध ही होता है।अब बुध दूसरे/ग्यारहवे भाव में हो या राजयोग बनाने वाले ग्रहो के साथ हो या मंगल गुरु के साथ हो क्योंकि यह मंगल सिंह लग्न में योगकारक और गुरु कारक होता है तो ऐसे में जातक धन के मामले में भाग्यशाली रहेगा।। नोट:- दूसरे/ग्यारहवे भाव के स्वामी जितने बलवान और धन उन्नति कारक भावों से संबंध बनाए उतनी ही आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है।

References

अच्छी_आर्थिक_स्थिति_कब_होती_है
posted Sep 16, 2019 by Deepika Maheshwary

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button
बहुत अच्छा लेख बिल्कुल शास्त्र के अनुसार एकदम बिल्कुल सत्य और ऑथेंटिक है

Related Articles
0 votes
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के नाम से जाना जाता है। वे सभी कष्टों का नाश करने वाले हैं। उनकी महिमा अपरंपार है। ऐसी मान्यता है कि श्री गणेश की पूजा बुधवार के दिन करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। श्री गणेश की पूजा करने से पहले उन्हें रोली और लाल सिंदूर का तिलक करें। सिंदूर की लालिमा श्री गणेश को बहुत पसंद है और ऐसा करने से आपके घर में किसी भी चीज की कमी नहीं होगी। श्री गणेश को मोदक बेहद पसंद है। ऐसे में मोदक का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। पूजा समाप्त हो जाने के बाद श्री गणेश को मोदक का भोग लगायें इससे भगवान बहुत खुश होते हैं। भगवान श्री गणेश की पूजा दूर्वा से करें। ऐसा करने से गणेश भगवान अपने भक्तों के भंडार भर देते हैं। शमी की आराधना करने से भगवान गणेश बहुत खुश होते हैं क्योंकि शमी एक ऐसा पौधा है जिसकी पूजा करने से भगवान शिव, शनिदेव और गणेश जी सारे देवता खुश होते हैं। कहते हैं कि जब भगवान श्रीराम को रावण पर विजय पानी थी तब उन्होंने ने भी शमी के पौधे की आराधना की थी। जो कोई भी भगवान गणेश के समक्ष घी के दीए जलाता है उसपर भगवान की हमेशा कृपा होती है। भगवान श्री गणेश की पूजा करने के लिए अखंडित चावल को प्रयोग करें। भगवान श्री गणेश जी को चावल चढ़ाने से पहले चावलों को गंगाजल में डालकर उसे गीला करे फिर ‘इदं अक्षतम् ऊं गं गणपतये नमः’ बोलते हुए तीन बार गणेश जी पर चावल चढ़ाएं। शास्त्रों के अनुसार गणपति जी के पीठ का दर्शन नहीं करना चाहिए ऐसा माना जाता है कि उनकी पीठ में दरिद्रता का निवास होता है। गणेश जी को भोग लगाते समय याद रखें कि तुलसी दल को प्रयोग न करें। पान के पत्ते पर स्वास्तिक बनाकर गणेश जी पर अर्पित करें। ऐसा करने से आपके शत्रुओं का नाश होगा। मक्के के दाने गणेश जी पर चढ़ाकर रसोई घर में छिपा कर रख दें इससे आपके घर में अन्न, धन की कभी कमी नहीं होगी।
0 votes
श्री हरिवंश पुराण महात्म्य मानव जीवन के लिये उपयोगी इस ग्रन्थ का पाठ करने से पूर्व महर्षि वेद व्यास भगवान श्रीकृ,ण, पाण्डुपुत्र अर्जुन एवं ज्ञान की देवी सरस्वती का ध्यान करे । सनातन धर्म के रचियता महर्षि वेद व्यास जिन्होंने इस पुराण की कथा क वर्णन किया, उनके चरण कमलों में सादर वन्दन । अज्ञान के तिमिर में यह प्रकाश ज्योतिरुप सबका कल्याण करे । मैं उन गुरुदेव को नमस्कार करता हूँ । यह अखण्ड मंगलाकार चराचर विश्व जिस परमपिता परमात्मा से व्याप्त है । मैं उनके नमस्कार करता हूँ । उनका साक्षात दर्शन कराने वाले गुरुदेव को नमस्कार करता हूँ । ज्ञानियों ने हरिवंश पुराण को ब्रहृ, विष्णु, शिव का रुप कहा है । यह सनातन शब्द ब्रहमय है । इसका पारायण करने वाला मोक्ष प्राप्त करता है । जैसे सूर्योदय के होने प अन्धकार का नाश हो जाता है, इसी प्रकार हरिवंश के पठन पाठन, क्षवण से मन, वाणी और देह द्घावरा किये गए सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते है । जो फल अठारह पुराणों के क्षवण से प्राप्त होता है, उतना फल विष्णु भक्त को हरिवंस पुराण के सुनने से मिलता है, इसमें संदेह नहीं है । इसे पढ़ने और सुनने वाले स्त्री, पुरुष, बालक, विष्णुधाम प्राप्त करते है । पुत्रांकाक्षी स्त्री-पुरुष इसे अवश्य सुने । विधिपूर्वक हरिवंश पुराण का पठन-पाठन, सन्तान गोपाल स्तोत्र का एकवर्षीय पाठ अवश्य पुत्ररत्न प्रदान करता है । जो पुरुष या स्त्री चन्द्रमा, सूर्य, गुरु, गुरुधाम, अग्नि की ओर मुख करके मलमूत्र त्याग करता है वह नपुंसक, बांझ होता है । अकारण फल-फूल तोड़ने वाला, सन्तान क्षय को प्राप्त होता है । परस्त्री गमन, बिना पत्नी बनाये क्वांरी कन्या का शीलहरण करने वाला वृद्घावस्था में घोर दुःख पाता है । व्यभिचारिणी स्त्री बुढ़ापे में गल-गलकर मरती है । निन्दनीय र घृणित कर्मी महाशोक को प्राप्त होता है । अतएव श्री हरिवंश पुराण का पारायण कर वह अपना दुख हल्का कर सकता है । हरिवंश पुराण के श्रवण, पाठने से वह दोष दूर हो सकता है । ओम् नमो भगवते वासुदेवाय
0 votes
RAJYA PUJIT RAJYOGA This Rajyoga is usually applicable for female horoscope: This Rajyoga is formed when exalted Mercury placed in Lagna ( this is only possible in Virgo ascendant) & Jupiter takes position in 11th house of the ascendant. According to Sastra this Rajyoga gives name , fame , wealth and her husband will be a respected and affluent person in the society. Fortunately I got an opportunity to judge a horoscope having this yoga. The native is a famous actress. I would mention here that even afflicted Jupiter couldn't minimise the result of this Rajyoga. With regards
0 votes
मुझसे अपनी कुंडली कॉल पर डिस्कस करने के लिए मेरी ओर से दिया गया यह गिफ्ट कोड। FS497 को यूज करके आपको अपने वॉलेट में 150 रुपए। मिलेंगे। और 7 मिनट तक आप मुझसे अपनी कुंडली कॉल पर डिस्कस कर सकते हैं। अपने कुंडली को लेकर किसी भी तरह का प्रश्न आप मुझसे कॉल पर पूछ सकते हैं। जिसे उपायों सहित आपको बताया जाएगा।
0 votes
व्‍यापार में बार-बार असफलता मिलने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार मेहनत करने और अथक प्रयासों के बाद भी व्‍यापार में सफलता नहीं मिल पाती है या बनती हुई बात बिगड़ जाती है। अगर आप भी व्‍यापार में असफलता की समस्‍या से परेशान है या आप जो भी काम करते हैं उसमें आपको असफलता ही मिलती है तो आपकी इस समस्‍या का समाधान ज्‍योतिष/और वास्तु सम्मत् प्रयोगों द्वारा किया जा सकता है. आज आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिन्‍हें आप अपनी दुकान या ऑफिस में कर सकते हैं और अपने व्‍यापार में वृद्धि पा सकते हैं। ज्‍योतिष शास्‍त्र और वास्‍तु की सहायता से आप व्‍यापार या ऑफिस में कुछ विशेष नियम और उपाय अपनाकर अपने बिजनेस की दिशा और दशा दोनों को बेहतर कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं उन उपायों के बारे में जो आपके व्‍यापार में वृद्धि और सफलता प्रदान कर सकते हैं. वास्‍तु के नियमों के अनुसार व्‍यापारियों को अपने कार्यस्‍थल में दक्षिण और पश्चिम दिशा के कोण पर बैठना चाहिए। वास्‍तु के अनुसार यह कोण मालिक से संबंध रखता है। अगर आपने घर पर ही ऑफिस बना रखा है या आप घर से ही काम करते हैं तो अपने कार्यों के लिए घर की दक्षिण और पश्चिम दिशा को चुनें। व्‍यापारिक सौदे के लिए ये जगह उत्तम रहती है। व्‍यापारिक सफलता के लिए कंपनी या दुकान का नाम दक्षिण दिशा की दीवार पर लाल रंग के पेंट या स्‍टीकर से लिखवाएं। इससे व्‍यापार में लाभ मिलता है और आय में भी वृद्धि होती है। ऑ‍फिस की दीवार की ओर पीठ करके बैठना अशुभ माना जाता है। आपका ऐसा करना आपके ही काम को नुकसान पहुंचा सकता है। उत्तर पूर्व की ओर मुख करके बैठना ज्‍यादा शुभ रहता है। ऐसा करने से व्‍यापार की सारी परेशानियां और नुकसान दूर होता है और धन लाभ में वृद्धि होती है. अपने ऑ‍फिस या दुकान में बेकार की चीजों को इधर-उधर ना फेंके। वास्‍तु के अनुसार ऐसा करना नुकसान देता है। अपने कार्यस्‍थल में कैश बॉक्‍स या गल्‍ले को उत्तर की दिशा में रखें। अगर आप अपने व्‍यापार में तरक्‍की में पाना चाहते हैं तो अपने ऑफिस के ईशान कोण यानि उत्तर पूर्व की दिशा को खाली रखें। यहां पर किसी भी तरह का बेकार का सामान या कबाड़ ना रखें। ऑफिस में मंदिर भी ईशान कोण में ही रखें। जब भी रोज़ सुबह आप दुकान खोलें तो उस समय ‘ॐ महालक्ष्‍मयै च विद्महे विष्‍णुपत्‍नी, च धीमहि तन्‍नो लक्ष्‍मी प्रचोदयात्’ मंत्र का जाप अवशय करें. ऑफिस की पश्चिम या दक्षिण दिशा में सामान, अलमारी या फर्नीचर आदि रखें। अपनी दुकान या फैक्‍ट्री के आसपास पेड़-पौधे लगाएं। इससे काम में सकारात्‍मक ऊर्जा बनी रहती है.. ऑफिस के मालिक की कुर्सी के पीछे की दीवार मजबूत होनी चाहिए। इससे वहां काम करने वाले लोगों और मालिक में कभी भी आत्‍मविश्‍वास की कमी नहीं होती है। ऑफिस में जो व्‍यक्‍ति अकाउंट का काम संभालता हो उसे दक्षिण पूर्व दिशा में बैठना चाहिए। मार्केटिंग करने वाले लोगों के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा बेहतर रहती है.. अगर आपकी दूकान या आॅफिस किसी भी वेध दोष से ग्रसित हैं (मार्ग वेध/स्तंभ वेध/वृक्ष वेध या द्वार वेध) तो द्वार के ठीक ऊपर मध्य में पन्ना गणेश (मरकज) की स्थापना करवायें.. सभी वास्तुदोष समाप्त हो जायेंगे. अगर आप इन उपायों और वास्‍तु सुझावों का ध्‍यान रखते हैं तो आपके व्‍यापार की सभी समस्‍याएं दूर हो जाएंगी और व्‍यापार में वृद्धि भी होगी. ----------------------------------------------------------
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...