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*शास्त्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खा* *यस्तु क्रियावान् पुरूष: स विद्वान् ।* *सुचिन्तितं चौषधमातुराणां* *न नाममात्रेण करोत्यरोगम् ॥* *वास्तव में विद्वान् और सफलतम् व्यक्ति बनने के लिये अच्छी पुस्तकों और शास्त्रों का केवल अध्ययन करना पर्याप्त नहीं, अपितु जीवन में उनका अनुकरण करना आवश्यक होता है, जैसे रोग दूर करने के लिए दवा की अच्छी जानकारी होना या दवा का नाम ले लेना पर्याप्त नही अपितु दवा का नियमित सेवन करना आवश्यक एवम् लाभदायक होता है।* *In order to become a scholar and a successful person, studying only good books and scriptures is not enough, but it is necessary to imitate them in life, such that it is not enough to get good knowledge of medication or to take name of medication. Regular consumption of medication is necessary and beneficial.* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
posted Sep 21 by Ajay Shastri

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*दर्शने स्पर्शणे वापि श्रवणे भाषणेऽपि वा।* *यत्र द्रवत्यन्तरङ्गं स स्नेह इति कथ्यते॥*  भावार्थ : *यदि किसी को देखने से या स्पर्श करने से, सुनने से या बात करने से हृदय द्रवित हो तो इसे स्नेह कहा जाता है ।* *If your heart feels emotionally attach by looking at someone or by touching, listening or speaking, it is called affection.* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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*उदये सविता रक्तो रक्त:श्चास्तमये तथा।* *सम्पत्तौ च विपत्तौ च महतामेकरूपता॥*  भावार्थ : *उदय होते समय सूर्य लाल होता है और अस्त होते समय भी लाल होता है, सत्य है महापुरुष सुख और दुःख में समान रहते हैं।* *While rising, the sun is red and when it is sunset, it is red. it is true, the great men live in happiness and misery in the same way.* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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अमित्रो न विमोक्तव्य: कृपणं वणपि ब्रावुन् कृपा | न तस्मिन् कर्तव्या हन्यादेवापकारिणाम् || Never let your enemy free (if you catch him) even if he asks for (and you feel pity on him). Assuming he will harm you in future, kill him. शत्रु अगर क्षमायाचना करे, तो भी उसे क्षमा नही करनी चाहिये| वह अपने जीवित को हानि पहुंचा सकता है,यह सोचके उसको समाप्त करना चाहिये। *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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*आयुषः क्षण एकोऽपि सर्वरत्नैर्न न लभ्यते।* *नीयते स वृथा येन प्रमादः सुमहानहो ॥*  भावार्थ : *आयु का एक क्षण भी सारे रत्नों को देने से प्राप्त नहीं किया जा सकता है, अतः इसको व्यर्थ में नष्ट कर देना महान असावधानी है ।* *A moment of age can not be obtained by giving all the gems. Therefore, it is a great mistake to waste it in vain.* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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*मुखो पवित्रं यदि रामनामं।* *हृदय पवित्रं यदि ब्रह्म ज्ञानं।।* *चरणौ पवित्रं यदि तीर्थ गमनं।* *हस्तौ पवित्रं यदि पुण्य दानं।।* भावार्थ - *"राम नाम से मुख पवित्र होता है, ब्रह्मज्ञान से ह्रदय पवित्र होता है, तीर्थ गमन से चरण पवित्र होते है, और दान पुण्य से हाथ पवित्र होते है।* *The mouth is sanctified by the name of Ram, the heart is sanctified by the science of Brahmagnan, feet are sanctified by the visit of pilgrimage, and hands are sanctified by the charity.* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय माता दी* *जय सीताराम*
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