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लग्न कुण्डली से जानिये अपने ईष्ट देव

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हम सब प्रतिदिन विभिन्न देवी -देवताओं का पूजन करते हैं। लगभग सभी सकाम पूजा ही करते हैं। कहने का मतलब यह है कि हम हमारी मनोकामना पूर्ण करने के लिए ही ईश्वर को मानते है। बहुत कम लोग होते हैं निष्काम पूजा करते हैं। बहुत सारे लोगों कि यह शिकायत होती है कि वो पूजा -व्रत आदि बहुत करते हैं फिर भी फल नहीं मिलता। मैं यहाँ कहना चाहूंगी कि हमें काम तो बिजली विभाग में होता है और चले जाते हैं जल-विभाग में ! जब हम गलत कार्यालय में जायेंगे तो काम कैसे होगा। इसी प्रकार हर कुंडली के अनुसार उसके अपने अनुकूल देवता होते हैं। किसी भी कुंडली के लग्न /प्रथम भाव , पंचम भाव और नवम भाव में स्थित राशि के अनुसार इष्ट देव निर्धारित होते है और इनके अनुसार ही रत्न धारण किये जा सकते हैं। मेष लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर प्रथम राशि मेष होती है तो वह मेष लग्न की कुंडली कही जायेगी। मेष लग्न में पांचवे भाव में सिंह राशि और नवम भाव में धनु राशि होती है। मेष राशि का स्वामी मंगल , सिंह राशि का स्वामी है सूर्य और धनु राशि का स्वामी वृहस्पति है। इस कुंडली के लिए अनुकूल देव हनुमान जी , सूर्य देव और विष्णु भगवान है । मेष लग्न के लिए हनुमान जी की आराधना , मंगल के व्रत , सूर्य चालीसा , आदित्य - हृदय स्त्रोत , राम रक्षा स्त्रोत , रविवार का व्रत , वृहस्पति वार का व्रत , विष्णु पूजन करना चाहिए। मूंगा , माणिक्य और पुखराज रत्न अनुकूल रहेंगे। वृषभ लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर द्वितीय राशि वृषभ होती है तो वह वृषभ लग्न की कुंडली कही जायेगी। वृषभ लग्न में पांचवे भाव में कन्या राशि और नवम भाव में मकर राशि होती है। वृषभ राशि का स्वामी शुक्र , कन्या राशि का बुध और मकर राशि के स्वामी शनि देव है। वृषभ लग्न वालों के लिए लक्ष्मी देवी , गणेश जी और दुर्गा देवी की आराधना उचित रहेगी। लक्ष्मी चालीसा , दुर्गा चालीसा और गणेश चालीसा का पाठ करना चाहिए। इस लग्न के लिए हीरा , नीलम और पन्ना अनुकूल रत्न है । मिथुन लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर तृतीय राशि मिथुन होती है तो वह मिथुन लग्न की कुंडली कही जायेगी। मिथुन लग्न में पांचवे भाव में तुला राशि और नवम भाव में कुम्भ राशि होती है। मिथुन राशि का स्वामी बुध , तुला राशि का शुक्र और कुंभ राशि का स्वामी शनि देव हैं। इस लग्न के लिए गणेश जी , लक्ष्मी देवी और काली माता अराध्य होगी। कुम्भ राशि के स्वामी शनि होने के कारण शनि देव को प्रसन्न और शांत रखने के उपाय किये जा सकते हैं। इस लग्न के लिए पन्ना , हीरा और नीलम अनुकूल रत्न हैं। कर्क लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर चतुर्थ राशि कर्क होती है तो वह कर्क लग्न की कुंडली कही जायेगी। कर्क लग्न के पांचवे भाव में वृश्चिक राशि और नवम भाव में मीन राशि होती है। कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा,वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल और मीन राशि के स्वामी वृहस्पति होते है। इस लग्न के लिए शिव जी , हनुमान जी और विष्णु जी अराध्य देव होंगे। इस लग्न के लिए मोती , मूंगा और पुखराज अनुकूल रत्न हैं। सिंह लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर पंचम राशि सिंह होती है तो वह सिंह लग्न की कुंडली कही जायेगी। सिंह लग्न के पांचवे भाव में धनु राशि और नवम भाव में मेष राशि होती है। सिंह राशि का स्वामी सूर्य देव , धनु राशि के स्वामी वृहस्पति और मेष राशि के स्वामी मंगल होता है। इस लग्न के लिए सूर्य देव , विष्णु जी और हनुमान जी आराध्य देव होंगे। इस लग्न के लिए माणिक्य , मूंगा और पुखराज रत्न अनुकूल होते हैं। कन्या लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर षष्ठ राशि कन्या होती है तो वह कन्या लग्न की कुंडली कही जायेगी। इस लग्न के पांचवे भाव में मकर राशि और नवम भान में वृषभ राशि होती है। कन्या राशि का स्वामी बुध , मकर राशि का स्वामी शनि और वृषभ राशि का स्वामी शुक्र होता है। इस लग्न के लिए गणेश जी , दुर्गा देवी ,लक्ष्मी देवी आराध्य देव होते हैं और पन्ना, नीलम और हीरा अनुकूल रत्न होते हैं। तुला लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर सप्तम राशि तुला हो तो वह तुला लग्न की कुंडली कही जायेगी। तुला लग्न में पांचवे भाव में कुम्भ राशि और नवम भाव में मिथुन राशि होती है। तुला राशि का स्वामी शुक्र , कुम्भ राशि का स्वामी शनि और मिथुन राशि का स्वामी बुध होता है। इस लग्न के लिए लक्ष्मी देवी , काली देवी , दुर्गा देवी और गणेश जी आराध्य देव हैं और हीरा , नीलम और पन्ना अनुकूल रत्न है। वृश्चिक लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर अष्ठम राशि वृश्चिक हो तो वह वृश्चिक लग्न की कुंडली कही जायेगी। वृश्चिक लग्न में पांचवे भाव में मीन राशि और नवम भाव में कर्क राशि होती है। वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल , मीन राशि का स्वामी वृहस्पति और कर्क राशि का स्वामी चन्द्रमा होता है। इस लग्न के लिए हनुमान जी , विष्णु जी और शिव जी अराध्य देव होते है और मूंगा , पुखराज और मोती अनुकूल रत्न है। धनु लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर नवम राशि धनु हो तो वह धनुलग्न की कुंडली कही जायेगी। धनु लग्न में पांचवे भाव में मेष राशि और नवम भाव में सिंह राशि होती है। धनु राशि का स्वामी वृहस्पति , मेष राशि का स्वामी मंगल और सिंह राशि का स्वामी सूर्य होता है। इस लग्न के लिए विष्णु जी ,हनुमान जी और सूर्य देव आराध्य देव हैं और पुखराज , मूंगा और माणिक्य अनुकूल रत्न है। मकर लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर दशम राशि मकर हो तो वह मकर लग्न की कुंडली कही जायेगी। मकर लग्न में पांचवे भाव में वृषभ राशि और नवम भाव में कन्या राशि होती है। मकर राशि का स्वामी शनि , वृषभ राशि का स्वामी शुक्र और कन्या राशि का स्वामी बुध होता है। इस लग्न के लिए शनि देव , हनुमान जी , दुर्गा देवी , लक्ष्मी देवी और गणेश जी आराध्य देव है और नीलम , हीरा और पन्ना अनुकूल रत्न है। कुम्भ लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर एकादश राशि कुम्भ हो तो वह कुम्भ लग्न की कुंडली कही जायेगी। कुम्भ लग्न में पांचवे भाव में मिथुन राशि और नवम भाव में तुला राशि होती है।कुम्भ राशि का स्वामी शनि , मिथुन राशि का स्वामी बुध और तुला राशि का स्वामी शुक्र होता है। इस लगन के लिए शनि देव , काली देवी , गणेश जी , दुर्गा देवी और लक्ष्मी देवी आराध्य देव है और नीलम , पन्ना और हीरा अनुकूल रत्न है। मीन लग्न :-- जन्म कुंडली के प्रथम भाव में अगर द्वादश राशि मीन हो तो वह मीन लग्न की कुंडली कही जायेगी। मीन लग्न में पांचवे भाव में कर्क राशि और नवम भाव में वृश्चिक राशि होती है। मीन राशि का स्वामी वृहस्पति , कर्क राशि का स्वामी चन्द्र और वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल होता है। इस लग्न के लिए विष्णु जी , शिव जी और हनुमान जी आराध्य देव है और पुखराज , मोती और मूंगा अनुकूल रत्न है। लेकिन यहाँ यह भी देखा जायेगा कि उपरोक्त राशि स्वामी किस भाव में और कितने अंशो पर स्थित है। क्या वो उच्च या नीच के तो नहीं है। अक्सर विद्वान् जन ग्रह के उच्च या नीच के होने पर रत्न पहना देते हैं जो कि उचित नहीं है। उच्च का ग्रह तो स्वतः ही अच्छा फल देता है। नीच ग्रह का रत्न पहनने से उस ग्रह के नीचत्व में ही वृद्धि होती है। ऐसे में उस ग्रह को शांत करने के लिए पूजा और व्रत आदि उचित रहेगी। खराब ग्रह को अनुकूल बनाने के लिए उस देव का चालीसा का पाठ करना चाहिए। यहाँ पर यह ध्यान रखने वाली बात है कि जो ग्रह अधिक कमजोर हो उसे बलवान करने के लिए पूजा - व्रत आदि करें। रत्न भी धारण किया जा सकता है लेकिन कुंडली को अच्छी तरह विश्लेषण करवा कर ही। क्यूंकि कई बार उपरोक्त तीनों भावों के स्वामी तीसरे , छठे , आठवें और बाहरवें भाव में स्थित होते हैं। इन भावों में स्थित ग्रहों के रत्न भी धारण नहीं किये जा सकते। इस स्थिति में व्रत-पूजन और दान ही उचित रहेगा। जिनके पास कुंडली हैं वे तो यह जान सकते हैं कि उनके ईष्ट देव कौन है। लेकिन जिनके पास कुंडली नहीं है और ना ही कोई विवरण है तो वे क्या करे या कैसे जाने कि उनका ईष्ट कौन है ! हर इंसान की प्रकृति और व्यवहार ग्रहों से ही तय होती है। किसी भी इंसान को उसके ईष्ट उसके अंतर्मन को आकर्षित करते हैं। अपनी पसंद के रंगो के अनुसार भी तय कर सकते हैं कि उनका ईष्ट देव कौन हो सकता है। उपासना सियाग ( अबोहर , पंजाब ) ॐ शांति।।
posted Sep 22, 2019 by Upasna Siag

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कुण्डली के लग्न भाव में बुध का प्रभाव लग्नस्थ बुध जातक को सुन्दर तथा बुद्धिमान बनाता है. जातक स्वभाव से विनम्र, शांत धैर्यवान, उदार तथा सत्य प्रेमी होता है. लग्नस्थ बुध का जातक परिस्थितियों के अनुकूल अपने आपको ढालने की अद्भुद क्षमता होती है। वह परिस्थितियों का आंकलन कर उचित समय पर निर्णय ले लेता है। बुध जिस भी राशि में हो उसका गुण आत्मसात कर लेता है फलतः ऐसे जातक बहुत जल्दी दूसरों से घुल मिल जाते हैं तथा किसी भी बात को बहुत शीघ्रता से समझ लेते हैं. लग्न में बैठा बुध जातक को बुद्धिमान तथा जिज्ञासु बनाता है. ऐसा जातक गणित में कुशल होता है। लग्नस्थ बुध का जातक आत्म केन्द्रित होता है तथा तर्क सांगत दृष्टिकोण रखता है. व्यवहार से हास परिहास प्रेमी तथा वार्ता में कुशल होता है. ऐसे जातक अक्सर विवादों को बहुत कुशलता से सुलझा देते हैं. लग्नस्थ बुध जातक को गहन अध्यन में रूचि देता है. लग्नस्थ बुध के जातक के जीवन में यात्राओं का विशेष महत्व होता है. जीवन में अनेक बार वह यात्राएं करता है कभी मौज मस्ती के लिए तो कभी व्यापार के लिए। यदि लग्न में बुध हो तो कुंडली के अनेक दोषों का नाश होता है. लग्नस्थ बुध जातक को धनि , यशस्वी तथा एक प्रतिभासंपन्न विद्वान् बनाता है. लग्नस्थ बुध के जातक अधिकतर ललित कला प्रेमी होते हैं. शुभ ग्रहों की दृष्टि/ प्रभाव या युति के कारण जातक के गुणों में और अधिक वृद्धि होती है। सूर्य + बुध = व्यापार कुशल तथ कर्तव्यनिष्ठ चन्द्रमा + बुध = कमीशन के कार्यों या अनाज के थोक कार्यों से लाभ। मंगल + बुध = भवन निर्माण या मशीनरी कार्यों में दक्षता बुध + गुरू = स्वभाव में धार्मिकता और अध्यात्मिकता बुध + शुक्र = ललित कलाओं में रूचि बुध + शनि = आंकड़ो के विश्लेषण में दक्षता विषम राशि यानी (मेष , मिथुन, सिंह, तुला , धनु , कुम्भ) का बुध शुभ माना गया है ऐसा जातक पत्रकारिता, लेखन या सम्पादन के क्षेत्र में सफलता पाते हैं वहीँ सम(even) राशि ( वृषभ, कर्क, कन्या , वृश्चिक, मकर और मीन) का बुध जातक को पुत्रों का सुख एवं लाभ देता है। अग्नि तत्व राशि (मेष, सिंह, धनु ) का बुध जातक को लाभ तो देता है परन्तु भ्रष्ट और अनैतिक मार्ग द्वारा। भू तत्व राशि (वृषभ, मकर, कन्या ) का बुध जातक को अंतर्मुखी एवं एकांत प्रिय बनाता है । वायु तत्व राशि (तुला, कुम्भ, मिथुन) का बुध जातक की कल्पना शक्ति को बहुत बढ़ावा देता है तथा लेखन, अन्वेषण या शोध कार्यों में सफलता दिलाता है। जल तत्व राशी (कर्क, वृश्चिक, मीन) का बुध जातक को प्रकाशन कार्यों में सफल बनाता है।
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ईश्वर की सत्ता निरंतर पूरे विश्व को अपने नियंत्रण में रखती है चांद सितारे नक्षत्र ग्रह सभी अपनी परिधि में निरंतर बढ़ते रहते हैं चलते रहते हैं पूरा विश्व चलाया महान है ब्रह्मांड जो है वह अपनी विभिन्न प्रकार से ग्रह नक्षत्र राशि बदलती रहती है उन सब की दृष्टि संबंध या उनके किस राशि में कौन सा ग्रह जाने से नक्षत्र के परिवर्तन होने से मनुष्य के जीवन में बहुत सारे अचानक बदलाव आते हैं और मौके भी आते हैं आगे बढ़ने के लिए सफलता के लिए तरक्की के लिए तो आप भी अपने आप को जरूर जन्मपत्रिका बनानी चाहिए और साथ के साथ विस्तार से अपने जीवन की रूपरेखा तैयार करनी चाहिए आपको जीवन में क्या करना है कहां रहना है कैसी दुनिया आपको पसंद है और किस प्रकार से एक सफल जीवन जिया जाए उसके लिए अपनी जन्म जन्म की जो आपने कुछ लोग लेकर आप संसार में आए हैं तो उसको समझे एवं ज्योतिष का फायदा उठाएं अपना कैरियर सलाह ले अपने जीवनसाथी के बारे में जाने इत्यादि बहुत सारे जीवन में मार्गदर्शन के लिए आज ही फ्यूचर स्टडी ऑनलाइन के विद्वानों से बातचीत करें और अनलिमिटेड कॉल वाला बटन दबाएं ताकि आपकी 200 पेज के करीब पूर्ण जन्म पत्रिका के साथ आपको असीमित समय दिया जाए आपके जीवन के बारे में वार्ता करने के लिए। https://www.futurestudyonline.com/astro-details/16
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सबसे पहले तो यह समझना चाहिए कि भारत का यह ज्योतिष विज्ञान कितना सदुपयोग करने लायक है आप यह जान लें कि हमारे ऋषि प्रभु पराशर वैदिक ज्योतिष का जो उन्होंने सूत्र दिए वह आज अचंभित करने वाले हैं किसी की जन्म पत्रिका को देखकर यह बताया जा सकता है कि वह किस क्षेत्र में तरक्की करेगा उसको लाभ होगा तो आप भी जानिए क्या आप राजनीति में आप भविष्य बना सकते हैं या आप सेना पुलिस में जाकर देश की सेवा कर सकते हैं या आप वरिष्ठ अधिकारी बनकर देश की सेवा कर सकते हैं या आपकी कुंडली में डॉक्टर बनने के योग हैं या आज के जमाने की तकनीकी कंप्यूटर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में आप विशेष योग्यता हासिल करके इंजीनियर बन कर अपने भविष्य को संवार सकते हैं इस प्रकार के ग्रह योग आपकी जन्मकुंडली में है अगर आप जान जाते हैं आपके लिए अच्छा होगा तो हमारे यहां फ्यूचर स्टडी ऑनलाइन ऐप के अंदर बहुत सारे विद्वान आपको दिखाई दे रहे हैं इन सभी विद्वानों की नॉलेज वैदिक लाल किताब केपी एस्ट्रोलॉजी फॉर मिस्ट्री वास्तु न्यूमैरोलॉजी एवं पारंपरिक ज्योतिष ज्ञान के साथ आधुनिक समावेश में आपको भविष्य के लिए अच्छी राय मिल सकती है तो हमारे विद्वानों से बात करने के लिए बहुत ही सरल तरीका है अगर आप अनलिमिटेड कॉल पर क्लिक करते हैं तो आपको समय की कोई लिमिट नहीं है बात करने में अन्यथा आप पर मिनट कॉल का ऑप्शन प्रयोग कर सकते हैं और आप अपने लिए भविष्य के लिए अच्छी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं
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अपने शुभ अंको के हिसाब से ख़रीदे माकन , वाहन और मोबाइल नंबर अंक शास्त्र में नौ अंक है और उन सबके एक स्वामी ग्रह है ,अंक शास्त्र में 0 (शून्य) को कोई महत्व नहीं दिया गया। इस शास्त्र में इकाई 1 से 9 तक के अंको का विश्लेषण करते हुए भविष्य कथन किया जाता है जैसे - अंक 1 का स्वामी ग्रह सूर्य होता है. अंक 2 का स्वामी ग्रह चंद्रमा होता है। अंक 3 का स्वामी ग्रह बृहस्पति होता है। अंक 4 का स्वामी ग्रह यूरेनस अथवा राहु को माना गया है। अंक 5 का स्वामी ग्रह बुध है। अंक 6 का स्वामी ग्रह शुक्र है। अंक 7 का स्वामी ग्रह नेप्च्यून अथवा केतु को माना जाता है। अंक 8 का स्वामी ग्रह शनि है। अंक 9 का स्वामी ग्रह मंगल है। मूलांक के अनुसार शुभ दिन: मूलांक दिन 1 रविवार 2 सोमवार 3 गुरुवार 4 शनिवार 5 बुधवार 6 शुक्रवार 7 रविवार 8 शनिवार 9 मंगलवार जीवन में अंकों का गहरा प्रभाव होता है कई बार अशुभ नंबर से जीवन में अनेक परेशानियां उठानी पड़ती है यो चाहे आप के घर , दुकान , गाडी अथवा मोबाइल का नंबर अगर आप के मूलांक के अनुसार शुभ नहीं है तो आप के लिए परेशानी पैदा कर सकता है इस लेख के माध्यम से आप सब को अपने मूलांक के आधार पर शुभ और अशुभ अंक बताने का प्रयास कर रहा हूँ आशा है की आप सब को इसका लाभ मिलेगा , जन्म की तारीख का कुल योग मूलांक कहलाता है और जन्म , महीना और वर्ष का कुल योग भाग्यांक कहलाता है , 2015 का कुल योग हुआ 8 और इस अंक के स्वामी है शनि देव है किसी व्यक्ति का मूलांक और भाग्यांक अलग-अलग हों तो ऐसी स्थिति में जीवन की घटनाओं का विश्लेषण करते हुए यह देखना चाहिए कि कौन सा मूलांक अधिक शुभप्रद रहा है। फिर उसी के अनुरूप वाहन के नंबर का चयन करना चाहिए। जानिए किस मूलांक और भाग्यांक के जातक के लिए कौन सा अंक और रंग शुभ रहेगा मूलांक या भाग्यांक 1: जिन लोगों का जन्म 1,10,19 या 28 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 1 होगा। 1 मूलांक या भाग्यांक वाले व्यक्ति को 1, 2, 4 और 7 मूलांक वाले वाहन रखने चाहिए । 1 मूलांक या भाग्यांक वाले किसी व्यक्ति को 6 या 8 मूलांक वाला वाहन नहीं रखना चाहिए। इन्हें पीले, सुनहरे अथवा क्रीम रंग का वाहन क्रय करना चाहिए, नीले, भूरे, बैंगनी या काले रंग का वाहन नहीं। मूलांक या भाग्यांक 2: जिन लोगों का जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 2 होगा। 2 मूलांक वाले किसी व्यक्ति को 1,2,4 और 7 मूलांक वाला वाहन रखना चाहिए। इसके लिए मूलांक 9 वाला वाहन अशुभ होगा। ऐसे लोग सफेद अथवा हल्के हरे रंग का वाहन क्रय करें लाल और गुलाबी रंग का नहीं। मूलांक या भाग्यांक 3: जिनका जन्म 3,12,21 या 30 तारीख को हुआ हो उनका मूलांक 3 होगा। ऐसे लोग 3,6 या 9 मूलांक वाला वाहन रखें, 5 या 8 वाला वाहन अशुभ सिद्ध हो सकता है। 3 मूलांक वालों को पीले, बैंगनी, नीले या गुलाबी रंग का वाहन खरीदना चाहिए, हल्के हरे, सफेद या भूरे रंग का वाहन नहीं। मूलांक या भाग्यांक 4: जिन व्यक्ति का जन्म 4,13,22 या 31 तारीख को हुआ हो उनका मूलांक 4 होगा। इन्हें 4, 1, 2 या 7 मूलांक वाला वाहन रखना चाहिए। ऐसे लोगों के लिए मूलांक 9, 6 और 8 वाला वाहन अशुभ होगा। नीले या भूरे रंग का वाहन क्रय करना ऐसे लोगों के लिए शुभ होगा, गुलाबी या काले रंग का नहीं। मूलांक या भाग्यांक 5: 5, 14 या 23 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 5 होगा, ऐसे लोगों को 5 मूलांक वाले वाहन रखने चाहिए, 3, 8 या 9 मूलांक वाले वाहन अशुभ साबित होंगे। ऐसे लोग हल्के हरे, सफेद या भूरे रंग का वाहन रखें, पीले, गुलाबी या काले रंग का नहीं। मूलांक या भाग्यांक 6: जिन व्यक्ति का जन्म 6, 15 एवं 24 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 6 होगा। इन्हें 3, 6 या 9 मूलांक वाला वाहन रखना चाहिए। 8 या 4 मूलांक वाला वाहन इनके लिए अशुभ होगा। इन्हें हल्के नीले, गुलाबी या पीले रंग का वाहन क्रय करना चाहिए, काले रंग का वाहन अनिष्टकर हो सकता है। मूलांक या भाग्यांक 7: तारीख 7,16 या 25 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 7 होगा। मूलांक या भाग्यांक 7 वाले व्यक्ति को मूलांक 7,1,2 या 4 वाला वाहन रखना चाहिए। 8 या 9 मूलांक वाला वाहन इनके लिए अशुभ होगा। वाहन नीले या सफेद रंग का हो तो शुभ रहेगा। मूलांक या भाग्यांक 8: जिन लोगों का जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ हो, उनका मूलांक 8 होगा। इस मूलांक वालों को 8 मूलांक वाला वाहन खरीदना चाहिए और 1 और 4 मूलांक वाले वाहन से परहेज करना चाहिए। काले, नीले, भूरे एवं बैंगनी रंगों के वाहन रखना इनके लिए उपयुक्त होगा। मूलांक या भाग्यांक 9: तारीख 9, 18 यां 27 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 9 होगा। ऐसे लोगों के लिए 9, 3 या 6 मूलांक वाला वाहन शुभ और 5 या 7 मूलांक वाला अशुभ होगा। वाहन का रंग लाल या गुलाबी रखें तो शुभ हो।
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