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ज्योतिष की मूल बातें

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इससे पहले कि ज्योतिष की भविष्यवाणी की जाए, ज्योतिष और खगोल विज्ञान, दोनों विज्ञानों का अध्ययन किया जाना चाहिए। खगोल विज्ञान हमें हमारे सौर मंडल में विभिन्न ग्रहों की स्थिति के बारे में बताता है। सौर मंडल के संदर्भ का अर्थ है कि सूर्य केंद्र में है और नौ ग्रह उसके चारों ओर घूमते हैं

यह ग्रह हैं बुध, शुक्र, मंगल, पृथ्वी, बृहस्पति, शनि, यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो हैं। प्रत्येक ग्रह की गति अलग-अलग होती है इसलिए प्रत्येक ग्रह को वर्ष या वर्षों के दौरान सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में अलग-अलग समय लगता है।

पेहले 6 ग्रह विरोधी घड़ी वार दिशा में घूमते हैं। भारतीय ज्योतिष में चंद्रमा भी एक ऐसा ग्रह है जहां वास्तव में यह पृथ्वी का उपग्रह है। सूर्य लगभग 14.96 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर पृथ्वी का सबसे निकट का तारा है। यह व्यास में पृथ्वी से 109.3 गुना अधिक है।

 

posted Sep 23, 2019 by Astro Suresh Chawla

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★ एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। ★ सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। ★ बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें। ★ जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं। ★ जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। ★ जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए। ★ संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं। ★ दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए। ★ यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं। ★ शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करना श्रेष्ठ है, ★ कूमड़ा-मतीरा-नारियल आदि को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं। ★ भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए। ★ देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें। ★ किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए। ★ एकादशी, अमावस्या, कृृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए । ★ बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं। ★ शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं। ★ शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुंुकुम नहीं चढ़ती। ★ शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा, देवी जी को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे। ★ अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावंे। ★ नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं। ★ विष्णु भगवान को चावल गणेश जी को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें। ★ पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें। ★ किंतु बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें। ★पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें। ★ सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे। ★ गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं। ★ पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है। ★ दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं। ★ सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए। ★ पूजन करनेवाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें। ★ पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा, धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें। ★ घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें।
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विवाहेत्तर संबंध क्यों बनते है ,ज्योतिष विश्लेषण लव व मैरिज में एक दूसरे को को धोखा देने वाले जातक आज के समय में कितनी ही शादियां सिर्फ इसीलिए टूट रही हैं क्योंकि पुरूषों का किसी और महिला के साथ अफेयर होता है। शादी के बाद एक्स्ट्रा मैरेटियल अफेयर होने का मतलब है कि पुरुष अपनी पत्नी से अब पहले जैसा आकर्षण और लगाव नहीं रखता है। ( शुक्र , मंगल , राहु , चन्द्रमा , केतु के प्रभाव के कारण ) लेकिन क्या आप जानते हैं शादी के बाद अफेयर करने के क्या कारण हो सकते हैं। आईए आज कुंडली के उन्हीं कारणों को जानते हैं: 1. कूछ नया करने की चाह ( चन्द्रमा और शुक्र पर केतु का प्रभाव ) पुरूष हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करते है। पुरूष हमेशा अपनी दैनिक दिनचर्या वाले जीवन में कुछ नया चाहते है और एक रोमांचक चीजों के साथ सम्बंध जोड़ना चाहते है। वह बहुत जल्दी की अपनी रोजाना जिन्दगी से बोर हो जाते हैं। ऐसे में वे शादी के बाद लव अफेयर जैसा कदम उठाते हैं। . 2) सेक्सुअल इच्छाओं के कारण ( मंगल और शुक्र पर राहु का प्रभाव और कमज़ोर चन्द्रमा ) यह बात कई शोधों में भी साबित हो चुकी है कि लगभग 80 फीसदी पुरूष अपनी पत्नियों को सेक्सुअल इच्छाओं के कारण धोखा देते हैं। आमतौर पर सेक्सुअल इच्छा भी कई तरह की होती है। उनके भीतर सेक्सुअल एडिक्शन हो सकता है, जिसके चलते वे अपने मौजूदा रिश्ते से असंतुष्ट होकर नई जगह संबंध बनाने की कोशिश करते हैं। . 3) अहंकार की भावना ( मंगल और राहु का शुक्र पर दुष प्रभाव ) कुछ पुरूष अपने अहंकार के कारण भी अफेयर करते हैं। कई बार अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए वे दूसरी महिलाओं के प्रति आकर्षित हो जाते हैं। दरअसल वे अपने पार्टनर को दिखाना चाहते हैं कि वे महिलाओं को कितनी आसानी से अपनी ओर आकर्षित कर सकते हैं। 4) रिश्तों में बढ़ती बोरियत के कारण ( खराब बुध + चन्द्रमा + शुक्र पर राहु का प्रभाव ) शादी के बाद पुरूषों के एक्स्ट्रा मैरिटयल रिलेशनशिप का एक महत्वपूर्ण कारण है रिश्ते में बोरियत आना। लाइफ उस समय और भी ज्यादा नीरस हो जाती है जब पत्नी घरेलू कामकाज और बच्चों में इतनी व्यस्त हो जाए कि पुरुष के लिए समय ही ना निकाल पाए। ऐसे में कुछ पुरूष इस बोरियत को दूर करने के लिए अलग-अलग महिलाओं से रिश्ता रखते हैं। . 5. आत्मसम्मान की तलाश में ( राहु + सूर्य में खराब शुक्र ) कुछ महिलाओं की आदत होती है ‌कि वे अपने पतियों में किसी ना किसी बात को लेकर मीन-मेख निकालती रहती हैं या हर बात पर उन्हें टोकती हैं। ऐसे में पति चाहे-अनचाहे अपनी पत्नी से दूर हो जाता है और दूसरी महिलाओं की ओर आकर्षित होने लगता है। . 6) सोसाइटी में आया खुलापन ( मंगल+शुक्र / चन्द्र + शुक्र ) यह सच है कि आज के समय में विवोहत्तर संबंध बहुत आम बात है। आज वर्कप्लेस पर महिलाएं और पुरूष दोनों कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। ऐसे में पुरूष महिलाओं के साथ उठते-बैठते अपनी भावनाएं शेयर करने लगता है, जिससे वह चाहे-अनचाहे नए रिश्तों में बंधता चला जाता है और अपनी पत्नी को धोखा देने लगता है। 7. काम के दौरान महिलाओं से मिलना ( शुक्र + केतु ) आज के इस दौर में जहां पुरूष और महिला ऐक साथ काम करते हैं। दिन के नौ-दस घंटे वे एक साथ ऑफिस में गुजारते हैं। ऐसे में एक दूसरे की तरफ आकर्षित होने लगते हैं। एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगता है जिसके कारण यहीं से एक्स्ट्रा मैरेटियल अफेयर की शुरुआत होने लगती है। 8. तांकझांक करने वाली आदत ( नीच शुक्र + राहु ) पुरूषों में अक्सर तांकझांक करने की आदत होती है। उन्हें दूसरी औरतें ज्यादा आकर्षित करती है, जो महिला उनकी बीबी होती है उसमें उन्हे ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती है। 9. दोस्तों का दबाव ( मंगल नीच + शुक्र खराब पर राहु का प्रभाव ) कई बार दोस्तों के दबाव में आकर पुरूष शादी के बाद अफेयर चला लेता है और अपनी बीबी को धोखा देता है। पुरूष अक्सर अफेयर को मजा समझते है और खुद तो करते ही है और दोस्तों को भी ऐसा करने के लिए कहते है। अगर वो दोस्त ऐसा न करे तो उसे बीबी का गुलाम कहकर उसका मजाक उड़ाते है। 10. बदले की भावना ( मंगल + राहु / बुध+राहु / नीच अगर पत्नी अपने पति को लेकर वफादार नहीं है तो पति भी खुन्नस में आकर अफेयर चलाने के बारे में सोचता है, ताकि वो उसके साथ अपने हिसाब को पूरा कर सके। कुंडली में शुक्र का नीच होना ( छठे / आठवें / बारवें भाव में ) राहु या केतु की शुक्र संग युति मंगल+शुक्र पर राहु का प्रभाव चन्द्र+शुक्र पर केतु का प्रभाव बुध+मंगल+शुक्र पर राहु का प्रभाव ऐसी कई जुगलबंधियां ही ये गुल खिलाती है की पुरुष भँवरा बन नई नई कलियों की तलाश में भटकता रहता है और ऐसे ही कई योग हैं जो स्त्री की कुंडली में भी हों तो वो भी तितली की तरह चक्कर काटती पाई जाती हैं। https://youtu.be/rPNIipOk2og
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रंगों का अपना एक विशेष महत्व है। रंग व्यक्तित्व को निखारते हैं। खुशी का अहसास कराते हैं। मन की भावनाएँ भी दर्शाते हैं। कई रोग भी रंगों द्वारा ठीक किए जाते हैं जिन्हें हम कलर थैरेपी के नाम से जानते हैं। तो क्या रंग हमारे भाग्य को तय करने में भी कोई भूमिका निभाते हैं? जो लोग इस पर विश्वास करते हैं, उनका तो जवाब यही है कि हाँ! दिनों के हिसाब से रंगों का चुनाव फायदेमंद है। जानते हैं सप्ताह के दिनों के हिसाब से कौन सा रंग कौन से दिन पहना जा सकता है सोमवार- सोमवार यानी शीतल चंद्रमा का दिन। इसलिए इस दिन का रंग है सफेद । मंगलवार - यह हनुमानजी का दिन है। उनकी मूर्तियों में भगवा रंग में देखा है। इसलिए इस दिन का विशेष रंग है भगवा, जिसे अंग्रेजी में ऑरेंज कलर कहते हैं। बुधवार- तीसरा दिन होता है देवों के देव गणपति का, जिन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है दूर्वा। इसलिए इस दिन हरे रंग का महत्व है। गुरुवार- यानी हफ्ते का चौथा दिन, जो बृहस्पति देव और साईं बाबा का है। बृहस्पति देव स्वयं पीले हैं, तो इस दिन का रंग है पीला। शुक्रवार- यह देवी माँ का दिन होता है, जो सर्वव्यापी जगतजननी हैं। इसलिए यह दिन सभी रंगों का मिक्स या प्रिंटेड कपड़ों का होता है। वैसे शुक्र ग्रह से संबंधित सफेद रंग या गुलाबी रंग का प्रयोग किस दिन किया जा सकता है शनिवार- शनि देवता को समर्पित इस दिन नीला कलर पहना जाता है। रविवार- सूर्य की उपासना के इस दिन लाल रंग ,मरून लालिमा युक्त रंग का विशेष महत्व है। कुछ रंगों से हमारा अच्छा तालमेल होता है, जो हमें 'पॉजीटिव एनर्जी' देते हैं। इसलिए कुछ खास रंग हमें ज्यादा आकर्षित करते हैं। इसे ही 'कलर साइंस' या रंग विज्ञान कहा जाता है। लेकिन ज्योतिष पर यकीन करने वाले भी दिन के लिहाज से रंगों का चयन करने लगे हैं।
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