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Daily knowledge of subhashini

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*सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।* *भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥*  भावार्थ : *सर्वस्वरूपा, सर्वश्वरी तथा सब प्रकार की शक्तियों से सम्पन्न दिव्यरूपा दुर्गा देवी ! सब भयों से हमारी रक्षा करें। आपको नमस्कार है।* *Sarvaswarupa, Sarveswari, Divyarupa Durga Devi, complete with omnipresence and all kinds of powers! Protect us from all fears. Greetings to you.* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
posted Oct 9 by anonymous

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*सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।* *शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।* *”रिद्धि दे सिद्धि दे, अष्ट नव निद्धि दे,* *वंश में वृद्धि दे, ह्रदय में ज्ञान दे,* *चित्त में ध्यान दे, अभय वरदान दे,* *दुःख को दूर कर, सुख भरपुर दे*; *सज्जन सो हित दे, कुटुंब में प्रीत दे,* *जग में जीत दे, माया दे, साया दे,* *और निरोगी काया दे,* *मान-सम्मान दे, सुख समृद्धि* *और ज्ञान दे,* *शान्ति दे, शक्ति दे, भक्ति भरपूर दें…”* *जय माता दी* *।।जय माँ भवानी।।*
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संसारविषवॄक्षस्यज्ञन्ब्स्प; द्वे एव मधुरे फले | सुभाषितं च सुस्वादु सद्भिश्र्च सह संगम: || Poisonous tree (in the form of materialistic world ) has only two sweet fruits. Sweetest Subhashit and company of good people ! संसार रूपी विषवृक्ष में दो ही मधुर फल है – एक सुभाषित और दूसरा साधू पुरुषोंका संगत। *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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*प्रदोषे दीपकश्चंद्र प्रभाते दीपको रवि:।* *त्रैलोक्ये दीपको धर्म सुपुत्र: कुलदीपक:॥* भावार्थ : *शाम को चन्द्रमा प्रकाशित करता है, दिन को सूर्य प्रकाशित करता है, तीनों लोकों को धर्म प्रकाशित करता है और सुपुत्र पूरे कुल को प्रकाशित करता है।* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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*पंचेन्द्रियस्य मर्त्यस्य छिद्रं चेदेकमिन्द्रियम्।* *ततोऽस्य स्त्रवति प्रज्ञा दृतेः पात्रादिवोदकम्॥*  भावार्थ : *मनुष्य की पाँचों इंद्रियों में यदि एक में भी दोष उत्पन्न हो जाता है तो उससे उस मनुष्य की बुद्धि उसी प्रकार बाहर निकल जाती है, जैसे मशक (जल भरने वाली चमड़े की थैली) के छिद्र से पानी बाहर निकल जाता है । अर्थात् इंद्रियों को वश में न रखने से हानि होती है।* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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*षड् दोषा: पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छिता।* *निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता॥*  भावार्थ : *संसार में उन्नति के अभिलाषी व्यक्तियों को नींद, तंद्रा(ऊँघ), भय, क्रोध, आलस्य तथा देर से काम करने की आदत-इन छह दुर्गुणों को सदा के लिए त्याग देना चाहिए।* *Person who desire for progress in the world should be sacrificed these habits sleep, drowsiness (fright), fear, anger, idleness and late work - these six debacles are forever sacrificed.* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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