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Daily knowledge of subhashini

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*आयुषः क्षण एकोऽपि सर्वरत्नैर्न न लभ्यते।* *नीयते स वृथा येन प्रमादः सुमहानहो ॥*  भावार्थ : *आयु का एक क्षण भी सारे रत्नों को देने से प्राप्त नहीं किया जा सकता है, अतः इसको व्यर्थ में नष्ट कर देना महान असावधानी है ।* *A moment of age can not be obtained by giving all the gems. Therefore, it is a great mistake to waste it in vain.* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
posted Oct 10, 2019 by anonymous

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*प्रदोषे दीपकश्चंद्र प्रभाते दीपको रवि:।* *त्रैलोक्ये दीपको धर्म सुपुत्र: कुलदीपक:॥* भावार्थ : *शाम को चन्द्रमा प्रकाशित करता है, दिन को सूर्य प्रकाशित करता है, तीनों लोकों को धर्म प्रकाशित करता है और सुपुत्र पूरे कुल को प्रकाशित करता है।* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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*पंचेन्द्रियस्य मर्त्यस्य छिद्रं चेदेकमिन्द्रियम्।* *ततोऽस्य स्त्रवति प्रज्ञा दृतेः पात्रादिवोदकम्॥*  भावार्थ : *मनुष्य की पाँचों इंद्रियों में यदि एक में भी दोष उत्पन्न हो जाता है तो उससे उस मनुष्य की बुद्धि उसी प्रकार बाहर निकल जाती है, जैसे मशक (जल भरने वाली चमड़े की थैली) के छिद्र से पानी बाहर निकल जाता है । अर्थात् इंद्रियों को वश में न रखने से हानि होती है।* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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*षड् दोषा: पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छिता।* *निद्रा तन्द्रा भयं क्रोध आलस्यं दीर्घसूत्रता॥*  भावार्थ : *संसार में उन्नति के अभिलाषी व्यक्तियों को नींद, तंद्रा(ऊँघ), भय, क्रोध, आलस्य तथा देर से काम करने की आदत-इन छह दुर्गुणों को सदा के लिए त्याग देना चाहिए।* *Person who desire for progress in the world should be sacrificed these habits sleep, drowsiness (fright), fear, anger, idleness and late work - these six debacles are forever sacrificed.* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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दुर्लभं त्रयमेवैतत् देवानुग्रहहेतुकम्। मनुष्यत्वं मुमुक्षुत्वं महापुरूषसंश्रय:॥ These three are very difficult to get and can be got only by the grace of the gods - human birth, desire for salvation and the company of the nobles. यह तीन दुर्लभ हैं और देवताओं की कृपा से ही मिलते हैं - मनुष्य जन्म, मोक्ष की इच्छा और महापुरुषों का साथ। *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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*दर्शने स्पर्शणे वापि श्रवणे भाषणेऽपि वा।* *यत्र द्रवत्यन्तरङ्गं स स्नेह इति कथ्यते॥*  भावार्थ : *यदि किसी को देखने से या स्पर्श करने से, सुनने से या बात करने से हृदय द्रवित हो तो इसे स्नेह कहा जाता है ।* *If your heart feels emotionally attach by looking at someone or by touching, listening or speaking, it is called affection.* *ॐ हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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