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अंगारक योग का वर्णन

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अंगारक-योग     अंगारक योग  (angarak yoga) मंगल राहु केतु के योग से बनने वाला योग है। जब मंगल की युति राहु या केतु से होती है तब अंगारक योग बनता है। ज्योतिषशास्त्र में इस योग को अशुभ फल देने वाला बताया गया है। लेकिन वास्तव में यह योग सदैव ही अशुभ फल नही देता। इस योग के शुभ-अशुभ फल इस योग की स्थिति पर निर्भर करते है कि यह योग किस प्रकार और कैसी स्थिति में बन रहा है। उसी के अनुसार उतनी ही मात्रा में इस योग के शुभ-अशुभ फल होते है।   यदि मंगल शुभ होकर अशुभ राहु या अशुभ केतु से सम्बन्ध बनाता है तो इस योग के अशुभ फल ही प्राप्त होंगे। इसके विपरीत मंगल और राहु-केतु तीनो कुंडली में शुभ स्थिति में स्थित होकर योग बनाते है तो इस योग के अधिकतर शुभ फल ही प्राप्त होते है।   मंगल कुंडली में योगकारक होकर शुभ और बली स्थिति में स्थित हो राहु-केतु भी शुभ स्थिति में स्थिति हो तथा मंगल का राहु-केतु से सम्बन्ध हो तब भी इस योग के अशुभ फल अधिक मात्रा में प्राप्त न होकर शुभ फल ही प्राप्त होंगे। इसका कारण यह कि राहु-केतु स्वयं योगकारी ग्रहों के साथ सम्बन्ध बनाकर स्वयं योगकारी हो जाते है।   इसी तरह मंगल राहु-केतु का सम्बन्ध(योग) कुंडली में बन रहा हो और इस योग पर अधिक से अधिक शुभ बली ग्रहो का प्रभाव हो तो इस योग के शुभ फल प्राप्त हो जाते है। इसके विपरीत मंगल राहु-केतु का योग कुंडली में बन रहा हो तथा इस योग के साथ शनि भी युति या दृष्टि सम्बन्ध बना ले तो इस योग की अशुभता बहुत अधिक बढ़ जाती है। मंगल के वर्गोत्तम, उच्च, स्वराशि में होने पर इस योग के अशुभ फलो में बहुत कमी होगी ऐसी स्थिति में मंगल राहु-केतु से अधिक बलवान होगा। यही अंगारक योग कर्क राशि में बने तो ऐसी स्थिति में यह योग बहुत काफी मात्रा में अशुभ फल दे सकता है क्योंकि कर्क राशि में मंगल होने से नीच का होकर निर्बल होगा।   इसी प्रकार अन्य प्रकार से भी इस योग पर विचार करना चाहिए।मंगल राहु-केतु योग सप्तम भाव में अधिक अशुभफल दायी होता है कारण ये स्थान वैवाहिक जीवन का है इस भाव में अंगारक योग वैवाहिक जीवन को दूषित करता है।   इस योग में अंतिम बात यही कहना चाहता हूँ कि पहले कुंडली में यह देख लेना आवश्क है कि कोई भी योग किस प्रकार से कैसी स्थिति में बन रहा है क्योंकि कुंडलियो में योग तो बनते ही है लेकिन वह योग कैसी स्थिति में, किस प्रभाव से बन रहे है, कुंडली में इन योग बनाने वाले ग्रहो की स्थिति क्या है, योग बनाने वाले ग्रहो पर किन ग्रहो का प्रभाव है आदि।इस बात का विचार करना अधिक आवश्यक है तभी किसी भी शुभ-अशुभ योग के फलो की उचित जानकारी प्राप्त कर की जा सकती है।   किसी जातक को अंगारक योग के साथ जोड़े जाने वाले अशुभ फल तभी प्राप्त होते हैं जब कुंडली में अंगारक योग बनाने वाले मंगल व राहु अथवा केतु दोनों ही अशुभ हों   कुंडली में मंगल तथा राहु केतु में से किसी के शुभ होने की स्थिति में जातक को अधिक अशुभ फल प्राप्त नहीं होते…   कुडली में मंगल तथा राहु केतु दोनों के शुभ होने की स्थिति में इन ग्रहों का संबंध अशुभ फल देने वाला अंगारक योग न बना कर शुभ फल देने वाला अंगारक योग बनाता है …   उदाहरण के लिए किसी कुंडली के तीसरे घर में अशुभ मंगल का अशुभ राहु अथवा अशुभ केतु के साथ संबंध हो जाने की स्थिति में ऐसी कुंडली में निश्चय ही अशुभ फल प्रदान करने वाले अंगारक योग का निर्माण हो जाता है|   जिसके चलते इस योग के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक अधिक आक्रामक तथा हिंसक होते हैं …   कुंडली में कुछ अन्य विशेष प्रकार के अशुभ प्रभाव होने पर ऐसे जातक भयंकर अपराधी जैसे …   पेशेवर हत्यारे तथा आतंकवादी आदि बन सकते हैं …   दूसरी ओर किसी कुंडली के तीसरे घर में शुभ मंगल का शुभ राहु अथवा शुभ केतु के साथ संबंध हो जाने से कुंडली में बनने वाला अंगारक योग शुभ फलदायी होगा   जिसके प्रभाव में आने वाले जातक उच्च पुलिस अधिकारी  सेना अधिकारी, कुशल योद्धा आदि बन सकते हैं |   जो अपनी आक्रमकता तथा पराक्रम का प्रयोग केवल मानवता की रक्षा करने के लिए और अपराधियों को दंडित करने के लिए करते हैं | ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय 9450537461

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ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय
9450537461
posted Sep 17, 2017 by anonymous

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केमद्रुम-Kemdrum Yog   वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली में बनने वाले विभिन्न प्रकार के अशुभ योगों में से केमद्रुम-Kemdrum Yog को बहुत अशुभ माना जाता है।   केमद्रुम-Kendrum Yog की प्रचलित परिभाषा के अनुसार किसी कुंडली में यदि किसी कुंडली में चन्द्रमा के अगले और पिछले दोनों ही घरों में कोई ग्रह न हो तो ऐसी कुंडली में केमद्रुम योग बन जाता है जिसके कारण जातक को निर्धनता अथवा अति निर्धनता, विभिन्न प्रकार के रोगों, मुसीबतों, व्यवसायिक तथा वैवाहिक जीवन में भीषण कठिनाईयों आदि का सामना करना पड़ता है।   अनेक वैदिक ज्योतिषी यह मानते हैं कि केमद्रुम योग से पीड़ित जातक बहुत दयनीय जीवन व्यतीत करते हैं तथा इनमें से अनेक जातक अपने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कठिनाईयों तथा असफलतओं का सामना करते हैं तथा इन जातकों के जीवन का कोई एक क्षेत्र तो इस अशुभ योग के प्रभाव के कारण बिल्कुल ही नष्ट हो जाता है जैसे कि इस दोष से पीड़ित कुछ जातकों का जीवन भर विवाह नहीं हो पाता, कुछ जातकों को जीवन भर व्यवसाय ही नहीं मिल पाता तथा कुछ जातक जीवन भर निर्धन ही रहते हैं।   कुछ ज्योतिषी यह मानते हैं कि केमद्रुम योग के प्रबल अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ जातकों को लंबे समय के लिए कारावास अथवा जेल में रहना पड़ सकता है तथा इस योग के प्रबल अशुभ प्रभाव में आने वाले कुछ अन्य जातकों को देष निकाला जैसे दण्ड भी दिये जा सकते हैं।   केमद्रुम योग से पीड़ित जातकों का सामाजिक स्तर सदा सामान्य से नीचे अथवा बहुत नीचे रहता है तथा इन्हें जीवन भर समाज में सम्मान तथा प्रतिष्ठा नहीं मिल पाती। उपाए –  सफ़ेद गए को रोटी खिलाएं | सफ़ेद मदार के पेड़ की थोड़ी सी जड़ को सोमवार को गंगा जल से पवित्र कर के घर के पूजा स्थल पर स्थापित कर के नित्य पूजा करें | इसे श्वेताआर्क गणपति कहा जाता है | ये दोष को समाप्त कर के अपार धन सम्पदा की प्राप्ति कर वाता है | पूर्णमासी के दिन खीर बना कर नै गरीब कन्याओं को खिलाएं | ज्योतिर्विद् अभय पाण्डेय वाराणसी 9450537461
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किसी भी जातक की जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव घर, वाहन, माता व सुख भाव होता है। इसी भाव से अचल संपत्ति, भौतिक सुख-सुविधा, तालाब, बावड़ी व घर का वातावरण जान सकते हैं। इस भाव में विभिन्न प्रकार के सुख को जानिए ग्रह की उपस्थिति और उनकी दृष्टि से। 1. चतुर्थ भाव में यदि बुध स्थित है और इसी भाव में शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ रही है तो राजयोगी योग बनता है। ऐसे जातक के घर में अनेक नौकर-चाकर रहते हैं। साधन-संपन्न होकर तमाम सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने वाला होता है। 2. चतुर्थ भाव में कारक ग्रह चंद्रमा यदि विराजमान है और यदि वह उच्च का या स्वराशि पर स्थित है तथा उच्च ग्रहों की दृष्टि इस भाव पर पड़ रही है तो जातक को सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं। उसका जीवन आनंदमय व्यतीत होता है। 3. इस भाव में सूर्य शुभ नहीं माना गया है। नीच का सूर्य जातक को धनहीन, भूमिहीन बना देता है। इसके कारण बार-बार स्थान परिवर्तन भी होता है। सिंह का सूर्य इस भाव में शुभ होता है। किसी भी जातक की जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव घर, वाहन, माता व सुख भाव होता है। इसी भाव से अचल संपत्ति, भौतिक सुख-सुविधा, तालाब, बावड़ी व घर का वातावरण जान सकते हैं। इस भाव में विभिन्न प्रकार के सुख को जानिए ग्रह की उपस्थिति और उनकी दृष्टि से। 4. चतुर्थ भाव में चंद्रमा स्थित होने पर और शुभ ग्रहों की दृष्टि पड़ने पर साथ में शुक्र पर चंद्रमा की दृष्टि पड़ने पर जातक के पास अनेक वाहन होते हैं। 5. चतुर्थ भाव में यदि राहु-केतु विराजमान हैं तो जातक को धार्मिक प्रवृत्ति वाला बना देते हैं। ये चतुर्थ भाव में मौन रहते हैं। 6. शनि का चतुर्थ भाव जातक को वृद्धावस्था में चिड़चिड़ा, एकांतप्रिय या संन्यासी बना सकता है। नीच का शनि भिखारी जैसी हालत कर सकता है। 7. चतुर्थ भाव का शुक्र और शुभ ग्रहों की दृष्टि जातक को भौतिक सुख प्रदान करती है। कभी-कभी ऐसे जातक का भाग्य उसके विवाह करने के बाद उदय होता है। 8. चतुर्थ भाव में मंगल जातक को अपराधी प्रवृत्ति का बना देता है और सबकुछ तबाह कर देता है। जिन जातकों की कुंडली में यह स्थिति हो उन जातकों को इसकी शांति अवश्य कराना चाहिए। 9. चतुर्थ भाव में उच्च का बृहस्पति होना और यदि शुभ ग्रहों की दृष्टि उस पर पड़ रही है तो जातक को राज्य से धन प्राप्ति का योग बनता है। इसके फलस्वरूप वह उच्च पद भी पा सकता है। नीच का गुरु परिवार और भाई से द्वेष या दुश्मनी करा सकता है।
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किस ग्रह को आपकी जन्मकुंडली में ‘मारक’ होने का अधिकार प्राप्त हैं ?? मेष लग्न के लिए मारकेश शुक्र, वृषभ लग्न के लिये मंगल, मिथुन लगन वाले जातकों के लिए गुरु, कर्क और सिंह राशि वाले जातकों के लिए शनि मारकेश हैं कन्या लग्न के लिए गुरु, तुला के लिए मंगल, और वृश्चिक लग्न के लिए शुक्र मारकेश होते हैं, जबकि धनु लग्न के लिए बुध, मकर के लिए चंद्र, कुंभ के लिए सूर्य, और मीन लग्न के लिए बुध मारकेश नियुक्त किये गये हैं।सूर्य जगत की आत्मा तथा चंद्रमा अमृत और मन हैं इसलिए इन्हें मारकेश होने का दोष नहीं लगता इसलिए ये दोनों अपनी दशा-अंतर्दशा में अशुभता में कमी लाते हैं। मारकेश का विचार करते समय कुण्डली के सातवें भाव के अतिरिक्त, दूसरे, आठवें, और बारहवें भाव के स्वामियों और उनकी शुभता-अशुभता का भी विचार करना आवश्यक रहता है, सातवें भाव से आठवां द्वितीय भाव होता है जो धन-कुटुंब का भी होता हैं, इसलिए सूक्ष्म विवेचन करके ही फलादेश क‌िया जाता है। शास्त्र में शनि को मृत्यु एवं यम का सूचक माना गया है। उसके त्रिषडायाधीय या अष्टमेश होने से उसमें पापत्व तथा मारक ग्रहों से संबंध होने से उसकी मारक शक्ति चरम बिंदु पर पहुंच जाती है। तात्पर्य यह है कि शनि स्वभावतः मृत्यु का सूचक है। फिर उसका पापी होना और मारक ग्रहों से संबंध होना- वह परिस्थिति है जो उसके मारक प्रभाव को अधिकतम कर देती है। इसीलिए मारक ग्रहों के संबंध से पापी शनि अन्य मारक ग्रहों को हटाकर स्वयं मुख्य मारक हो जाता है। इस स्थिति में उसकी दशा-अंतर्दशा मारक ग्रहों से पहले आती हो तो पहले और बाद में आती हो तो बाद में मृत्यु होती है। इस प्रकार पापी शनि अन्य मारक ग्रहों से संबंध होने पर उन मारक ग्रहों को अपना मारकफल देने का अवसर नहीं देता और जब भी उन मारक ग्रहों से आगे या पहले उसकी दशा आती है उस समय में जातक को काल के गाल में पहुंचा देता है।मारकेश अर्थात-मरणतुल्य कष्ट या मृत्यु देने वाला वह ग्रह जिसे आपकी जन्मकुंडली में ‘मारक’ होने का अधिकार प्राप्त हैं। अलग-अलग लग्न के ‘मारक’ अधिपति भी अलग-अलग होते हैं। मारकेश की दशा जातक को अनेक प्रकार की बीमारी, मानसिक परेशानी, वाहन दुर्घटना, दिल का दौरा, नई बीमारी का जन्म लेना, व्यापार में हानि, मित्रों और संबंध‌ियों से धोखा तथा अपयश जैसी परेशानियां आती हैं। जन्मकुण्डली का सामयिक विशलेषण करने के पश्चात ही यह ज्ञात हो सकता है कि व्यक्ति विशेष की जीवन अवधि अल्प, मध्यम अथवा दीर्घ है। जन्मांग में अष्टम भाव, जीवन-अवधि के साथ-साथ जीवन के अन्त के कारण को भी प्रदर्शित करता है। अष्टम भाव एंव लग्न का बली होना अथवा लग्न या अष्टम भाव में प्रबल ग्रहों की स्थिति अथवा शुभ या योगकारक ग्रहों की दृष्टि अथवा लग्नेश का लग्नगत होना या अष्टमेश का अष्टम भावगत होना दीर्घायु का द्योतक है। मारकेश की दशा में व्यक्ति को सावधान रहना जरूरी होता है क्योंकि इस समय जातक को अनेक प्रकार की मानसिक, शारीरिक परेशनियां हो सकती हैं. इस दशा समय में दुर्घटना, बीमारी, तनाव, अपयश जैसी दिक्कतें परेशान कर सकती हैं. जातक के जीवन में मारक ग्रहों की दशा, अंतर्दशा या प्रत्यत्तर दशा आती ही हैं. लेकिन इससे डरने की आवश्यकता नहीं बल्कि स्वयं पर नियंत्रण व सहनशक्ति तथा ध्यान से कार्य को करने की ओर उन्मुख रहना चाहिए||मारकेश-निर्णय के प्रसंग में यह सदैव ध्यान रखना चाहिए कि पापी शनि का मारक ग्रहों के साथ संबंध हो तो वह सभी मारक ग्रहों का अतिक्रमण कर स्वयं मारक हो जाता है। इसमें संदेह नहीं है। (1) पापी या पापकृत का अर्थ है पापफलदायक। कोई भी ग्रह तृतीय, षष्ठ, एकादश या अष्टम का स्वामी हो तो वह पापफलदायक होता है। ऐसे ग्रह को लघुपाराशरी में पापी कहा जाता है। मिथुन एवं कर्क लग्न में शनि अष्टमेश, मीन एवं मेष लग्न में वह एकादशेश, सिंह एवं कन्या लग्न में वह षष्ठेश तथा वृश्चिक एवं धनु लग्न में शनि तृतीयेश होता है। इस प्रकार मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु एवं मीन इन आठ लग्नों में उत्पन्न व्यक्ति की कुंडली में शनि पापी होता है। इस पापी शनि का अनुच्छेद 45 में बतलाये गये मारक ग्रहों से संबंध हो तो वह मुख्य मारक बन जाता है। तात्पर्य यह है कि शनि मुख्य मारक बन कर अन्य मारक ग्रहों को अमारक बना देता है और अपनी दशा में मृत्यु देता है। मारकेश ग्रह का निर्णय करने से पूर्व योगों के द्वारा अल्पायु, मध्यायु या दीर्घायु है, यह निश्चित कर लेना चाहिए क्योंकि योगों द्वारा निर्णीत आयु का समय ही मृत्यु का संभावना-काल है और इसी संभावना काल में पूर्ववर्णित मारक ग्रहों की दशा में मनुष्य की मृत्यु होती है। इसलिए संभावना-काल में जिस मारक ग्रह की दशा आती है वह मारकेश कहलाता है। इस ग्रंथ में आयु निर्णय के लिए ग्रहों को तीन वर्गों में वर्गीकृत किया गया है- 1. मारक लक्षण 2. मारक एवं 3. मारकेश। जो ग्रह कभी-कभी मृत्युदायक होता है उसे मारक लक्षण कहते हैं। जिन ग्रहों में से कोई एक परिस्थितिवश मारकेश बन जाता है वह मारक ग्रह कहलाता है और योगों के द्वारा निर्णीत आयु के सम्भावना काल में जिस मारक ग्रह की दशा-अंतर्दशा में जातक की मृत्यु हो सकती है वह मारकेश कहलाता है। पं रामनिवास गुरु
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*सूर्य का कन्या राशि में गोचर* वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नव ग्रहों के राजा की उपाधि दी गई है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है अत: सूर्य के बिना जीवन संभव नहीं है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा और पिता का कारक माना गया है इसलिए कुंडली में सूर्य को पूर्वजों का प्रतिनिधि कहा जाता है। सूर्य प्रधान जातक सरकारी और अन्य सेवाओं में बड़े पदों पर आसीन रहते हैं। सूर्य ग्रह 17 सितंबर 2017 (रविवार) को रात्रि 12:55 बजे कन्या राशि में गोचर करेगा। सूर्य इस राशि में 17 अक्टूबर 2017 (मंगलवार) को दोपहर 12:50 बजे तक स्थित रहेगा। निश्चित ही सूर्य के इस गोचर का प्रभाव आपके जीवन पर पड़ेगा। उन तमाम प्रभावों का उल्लेख नीचे आपकी राशि के अनुसार दिया जा रहा है साथ ही शुभ और उत्तम फल की प्राप्ति के लिए प्रभावी उपाय बताए गए हैं।  यह राशिफल आपकी चंद्र राशि पर आधारित है *मेष* *सूर्य आपकी राशि से षष्ठम भाव* में गोचर करेगा। सूर्य की यह स्थिति आपके लिए सकारात्मक रहेगी। इस दौरान आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। वहीं आपके साहस और बल के कारण शत्रु भयभीत महसूस करेंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छी तैयारी के कारण आप सफल रहेंगे। कार्य क्षेत्र में आप अच्छा प्रदर्शन करेंगे और सीनियर्स भी आपके काम से ख़ुश रहेंगे। गोचर के दौरान आपको स्वास्थ्य लाभ मिलेगा। सरकार की किसी योजना से आप लाभान्वित हो सकते हैं। निजी जीवन में भी ख़ुशियाँ बनी रहेंगी। *वृषभ* *सूर्य आपकी राशि से पंचम भाव* में गोचर करेगा। इस दौरान आप असमंजस की स्थिति में रह सकते हैं और बड़े निर्णय लेने में आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। कार्य क्षेत्र में सीनियर्स के साथ आपके रिश्ते बिगड़ सकते हैं, कोशिश करें कि सीनियर्स के साथ आपके रिश्ते मधुर रहें। समाज में भी कुछ लोगों से आपका विवाद संभव है। बच्चों की सेहत का पूरा ध्यान रखें। जीवनसाथी को गोचर के अनुकूल परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। करियर में उन्हें ज़बरदस्त सफलता मिलने के योग हैं। यात्राओं का परिणाम आपके लिए प्रतिकूल रहेगा। वैसे कुल मिलाकर गोचर आपके लिए अच्छा है। *मिथुन* *सूर्य आपकी राशि से चतुर्थ भाव* में गोचर करेगा। इस दौरान आपको मानसिक तनाव तथा स्वास्थ्य में कमज़ोरी रह सकती है। मानसिक तनाव को दूर करने के लिए मनोरंजन का सहारा लिया जा सकता है। माता जी के स्वास्थ्य में भी कमी देखी जा सकती है इसलिए उनकी सेहत की देखभाल ज़रुरी है। घर में परिजनों के साथ किसी बात को लेकर आपका मनमुटाव हो सकता है इसलिए ऐसे मुद्दों पर ज़्यादा ध्यान न दें जिससे घर की शांति भंग हो। यदि ज़्यादा ज़रुरी न हो तो यात्रा को टाला जा सकता है। वहीं वैवाहिक जीवन में भी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। जीवनसाथी को कार्य क्षेत्र में गोचर का लाभ मिलेगा। *कर्क* *सूर्य आपकी राशि से तृतीय भाव* में गोचर करेगा। इस दौरान स्वास्थ्य की दृष्टि से गोचर आपको सकारात्मक परिणाम देने वाला है। भौतिक सुख सुविधाओं का आप आनंद लेंगे। अपने लक्ष्य के प्रति आपकी इच्छा शक्ति में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में आप सराहनीय कार्य करेंगे जिससे सीनियर्स भी आपके काम से ख़ुश रहेंगे। उच्च अधिकारियों से आपके रिश्ते बनेंगे। समाज में भी प्रतिष्ठित लोगों के साथ आपका उठना-बैठना होगा। छोटी दूरी की यात्राएं आपके लिए लाभकारी साबित हो सकती हैं। इसके अलावा दोस्तों और भाई-बहनों की मदद से आपको आर्थिक लाभ मिल सकता है। विरोधियों पर आपका भय बना रहेगा। समाज में भी आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी पदोन्नति की प्रबल संभावना है। लोगों के प्रति आपका व्यवहार मधुर और सौम्य रहेगा। *सिंह* *सूर्य आपकी राशि से द्वितीय भाव* में गोचर करेगा। इस दौरान आपको थोड़ा संभलकर चलना होगा। कठोर शब्द बोलकर किसी की भावना को आहत न करें, बल्कि सभी से प्रेम से बातचीत करें। गोचर की अवधि में आपको शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बुखार, सिरदर्द और आँखों में संक्रमण जैसी समस्या से गुज़रना पड़ सकता है। परिवार में किसी बात को लेकर झगड़ा भी हो सकता है। घर में परिजनों के बीच सामंजस्य बिठाने का प्रयास करें। गोचर के दौरान जीवनसाथी का स्वास्थ्य कुछ कमज़ोर रह सकता है अतः उनकी सेहत का ख़्याल रखें। धन के लेन-देन में सावधानी बरतें। दोस्तों और रिश्तेदारों से किसी बात पर आपका मनमुटाव हो सकता है, हालाँकि ऐसे मामलों को ज़्यादा तूल न दें। निजी जीवन से जुड़ी समस्याएँ आपके लिए मानसिक तनाव का कारण बन सकती हैं। तनाव से बचने के लिए मनोरंजन का सहारा लिया जा सकता है। *कन्या* *सूर्य आपकी राशि में गोचर करेगा और यह आपके प्रथम भाव* में स्थित होगा। इस दौरान धन के लेन-देन में सावधानी बरतें और ऐसा कोई काम न करें जिससे समाज में आपकी मानहानि होती हो। गोचर की अवधि में बुखार, सिरदर्द, अपच और आँख में किसी प्रकार का संक्रमण आदि हो सकता है इसलिए अपनी सेहत का ख़्याल रखें। काम के वक़्त आपको आलस आ सकता है और इसी वजह से आपके काम लंबित रह सकते हैं। वहीं काम के चलते आपको घर से दूर जाना पड़ सकता है। तनाव और अहंकार आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं इसलिए हमेशा इनसे बचें। विदेशr संबंधों से आपको लाभ प्राप्त हो सकता है। *तुला* *सूर्य आपकी राशि से द्वादश भाव* में गोचर करेगा। इस दौरान आप विदेश यात्रा पर जा सकते हैं। काम के चलते घर से दूर भी रहना पड़ सकता है। आप किसी हिल स्टेशन पर जाने की योजना बना सकते हैं। इस बीच अपनी सेहत का भी पूरा ध्यान रखें। गोचर की अवधि में आपका ख़र्चा थोड़ा बढ़ सकता है। अनुचित कार्यों को न करें वरना आपकी मानहानि संभव है। अपने विरोधियों से भी सावधान रहें। दोस्तों से किसी बात को लेकर मनमुटाव हो सकता है परंतु आप बात को ज़्यादा न बढ़ाएँ। *वृश्चिक* *सूर्य आपकी राशि से एकादश भाव* में संचरण करेगा। सूर्य की यह स्थिति आपके लिए सकारात्मक रहेगी। विभिन्न स्रोतों से आपको लाभ मिलने के योग हैं। इस दौरान आपकी आय में वृद्धि होने की संभावना है और शत्रुओं पर आप विजय प्राप्त करेंगे। दान-धर्म के कार्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ कर्मियों का सहयोग और उनका मार्गदर्शन आपको प्राप्त होगा। इसके अलावा सूर्य के इस गोचर के दौरान कोई बड़ी उपलब्धि हासिल हो सकती है। पिता के आशीर्वाद और उनकी प्रेरणा से आप जीवन की राह पर आगे बढ़ेंगे। *धनु* *सूर्य आपकी राशि से दशम भाव* में स्थित होगा। इस दौरान कार्य क्षेत्र में आपको सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। जैसे- नौकरी में आपकी पदोन्नति और आय में वृद्धि हो सकती है। सरकार की ओर से भी लाभ मिलने के शुभ संकेत हैं। आर्थिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से गोचर आपके लिए शुभ होने के संकेत दे रहा है। समाज में प्रभावी व्यक्तियों से आपके संबंध बनेंगे और समय आने पर उनके द्वारा आपको लाभ मिल सकता है। अपने कार्य में आपको सफलता मिलेगी। वहीं सोसायटी में आपका मान-सम्मान भी बढ़ेगा। *मकर* *सूर्य आपकी राशि से नवम भाव* में गोचर करेगा। इस अवधि में आपको उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। अनैतिक और ग़ैरक़ानूनी कामों से दूर रहें वरना समाज में आपका मान-सम्मान गिर सकता है। पैसों की लेन-देन में सावधानी बरतें, वरना आपको धन की हानि हो सकती है। पिताजी के साथ किसी बात को लेकर मनमुटाव हो सकता है। आपकी सेहत कुछ कमज़ोर रह सकती है इसलिए अपनी सेहत पर पूरी तरह से ध्यान दें और मानसिक तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें। किसी मुद्दे पर वरिष्ठ जनों से वैचारिक मतभेद होने की संभावना है। कार्य क्षेत्र में सफलता पाने के लिए आपको संघर्ष करना पड़ सकता है। *कुंभ* *सूर्य आपकी राशि से अष्टम भाव* में गोचर करेगा। इस दौरान किसी कारण आपको विवाद का सामना करना पड़ सकता है इसलिए ऐसा कोई भी काम न करें जिससे विवाद की स्थिति पैदा हो। आपके पिछले कर्मों का फल आपको इस गोचर के दौरान मिलने वाला है। शत्रुओं से आपका सामना हो सकता है। यदि बल और बुद्धि दोनों से दुश्मन का सामना करते हैं तो आपको सफलता मिलने की संभावना है। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, अन्यथा किसी रोग का सामना करना पड़ सकता है। ग़ैरक़ानूनी काम से दूर रहें। इस अवधि में जीवनसाथी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से गुज़रना पड़ सकता है। अप्रत्याशित ख़र्चे भी आपके लिए समस्या का कारण बन सकता है इसलिए धन का ख़र्च सोच समझकर करें और बचत पर ज़्यादा ध्यान दें। *मीन* *सूर्य आपकी राशि से सप्तम भाव* में जाएगा। इस दौरान जीवनसाथी से मतभेद होने के संकेत हैं। अहंकार आपके वैवाहिक रिश्ते में खटास पैदा कर सकता है, इसलिए इसका त्याग करें। इसके अलावा गोचर के दौरान जीवनसाथी और बच्चों की सेहत कुछ कमज़ोर रह सकती है अतः उनकी सेहत पर भी ध्यान दें। व्यापार के लिए परिस्थितियाँ आपके लिए अनुकूल नहीं है। बिज़नेस पार्टनर के साथ किसी तरह का विवाद हो सकता है। यदि आप नौकरी कर रहे हैं तो आपको कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। यात्रा के दौरान आपको अधिक सावधान रहने की आवश्यकता है। अपच, पेटदर्द, सिरदर्द एवं मानसिक तनाव जैसी समस्याएँ आपको घेर सकती हैं, लिहाज़ा पहले से सेहत को लेकर सतर्क रहें।
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