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ज्योतिष शास्त्र और कलर थेरेपी

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रंगों का अपना एक विशेष महत्व है। रंग व्यक्तित्व को निखारते हैं। खुशी का अहसास कराते हैं। मन की भावनाएँ भी दर्शाते हैं। कई रोग भी रंगों द्वारा ठीक किए जाते हैं जिन्हें हम कलर थैरेपी के नाम से जानते हैं। तो क्या रंग हमारे भाग्य को तय करने में भी कोई भूमिका निभाते हैं? जो लोग इस पर विश्वास करते हैं, उनका तो जवाब यही है कि हाँ! दिनों के हिसाब से रंगों का चुनाव फायदेमंद है। जानते हैं सप्ताह के दिनों के हिसाब से कौन सा रंग कौन से दिन पहना जा सकता है सोमवार- सोमवार यानी शीतल चंद्रमा का दिन। इसलिए इस दिन का रंग है सफेद । मंगलवार - यह हनुमानजी का दिन है। उनकी मूर्तियों में भगवा रंग में देखा है। इसलिए इस दिन का विशेष रंग है भगवा, जिसे अंग्रेजी में ऑरेंज कलर कहते हैं। बुधवार- तीसरा दिन होता है देवों के देव गणपति का, जिन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है दूर्वा। इसलिए इस दिन हरे रंग का महत्व है। गुरुवार- यानी हफ्ते का चौथा दिन, जो बृहस्पति देव और साईं बाबा का है। बृहस्पति देव स्वयं पीले हैं, तो इस दिन का रंग है पीला। शुक्रवार- यह देवी माँ का दिन होता है, जो सर्वव्यापी जगतजननी हैं। इसलिए यह दिन सभी रंगों का मिक्स या प्रिंटेड कपड़ों का होता है। वैसे शुक्र ग्रह से संबंधित सफेद रंग या गुलाबी रंग का प्रयोग किस दिन किया जा सकता है शनिवार- शनि देवता को समर्पित इस दिन नीला कलर पहना जाता है। रविवार- सूर्य की उपासना के इस दिन लाल रंग ,मरून लालिमा युक्त रंग का विशेष महत्व है। कुछ रंगों से हमारा अच्छा तालमेल होता है, जो हमें 'पॉजीटिव एनर्जी' देते हैं। इसलिए कुछ खास रंग हमें ज्यादा आकर्षित करते हैं। इसे ही 'कलर साइंस' या रंग विज्ञान कहा जाता है। लेकिन ज्योतिष पर यकीन करने वाले भी दिन के लिहाज से रंगों का चयन करने लगे हैं।

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ज्योतिष शास्त्र और कलर थेरेपी
posted Dec 11, 2019 by Deepika Maheshwary

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रंगों का अपना एक विशेष महत्व है। रंग व्यक्तित्व को निखारते हैं। खुशी का अहसास कराते हैं। मन की भावनाएँ भी दर्शाते हैं। कई रोग भी रंगों द्वारा ठीक किए जाते हैं जिन्हें हम कलर थैरेपी के नाम से जानते हैं। तो क्या रंग हमारे भाग्य को तय करने में भी कोई भूमिका निभाते हैं? जो लोग इस पर विश्वास करते हैं, उनका तो जवाब यही है कि हाँ! दिनों के हिसाब से रंगों का चुनाव फायदेमंद है। जानते हैं सप्ताह के दिनों के हिसाब से कौन सा रंग कौन से दिन पहना जा सकता है सोमवार- सोमवार यानी शीतल चंद्रमा का दिन। इसलिए इस दिन का रंग है सफेद । मंगलवार - यह हनुमानजी का दिन है। उनकी मूर्तियों में भगवा रंग में देखा है। इसलिए इस दिन का विशेष रंग है भगवा, जिसे अंग्रेजी में ऑरेंज कलर कहते हैं। बुधवार- तीसरा दिन होता है देवों के देव गणपति का, जिन्हें सबसे ज्यादा प्रिय है दूर्वा। इसलिए इस दिन हरे रंग का महत्व है। गुरुवार- यानी हफ्ते का चौथा दिन, जो बृहस्पति देव और साईं बाबा का है। बृहस्पति देव स्वयं पीले हैं, तो इस दिन का रंग है पीला। शुक्रवार- यह देवी माँ का दिन होता है, जो सर्वव्यापी जगतजननी हैं। इसलिए यह दिन सभी रंगों का मिक्स या प्रिंटेड कपड़ों का होता है। वैसे शुक्र ग्रह से संबंधित सफेद रंग या गुलाबी रंग का प्रयोग किस दिन किया जा सकता है शनिवार- शनि देवता को समर्पित इस दिन नीला कलर पहना जाता है। रविवार- सूर्य की उपासना के इस दिन लाल रंग ,मरून लालिमा युक्त रंग का विशेष महत्व है। कुछ रंगों से हमारा अच्छा तालमेल होता है, जो हमें 'पॉजीटिव एनर्जी' देते हैं। इसलिए कुछ खास रंग हमें ज्यादा आकर्षित करते हैं। इसे ही 'कलर साइंस' या रंग विज्ञान कहा जाता है। लेकिन ज्योतिष पर यकीन करने वाले भी दिन के लिहाज से रंगों का चयन करने लगे हैं।
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आज पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। भारत में भी इस बीमारी ने अपना भरपूर कब्जा़ कर लिया है। लगभग 1 महीने से ऊपर हो चला है, पूरे देश में लॉकडाउन के चलते हम सभी अपने-अपने घरों में बंद हैं। घर में हर कोई अपनी रुचि अनुसार समय व्यतीत कर रहा है। किंतु कुछ लोग ऐसे हैं, जो कि न्यूज़ चैनल में टकटकी लगाए कोरोना अपडेटस् पर पूरी निगाह रखते हैं। कितने लोग संक्रमित हुए, कितनों की मौतें हुई, क्या करें, क्या ना करें? बस सारा दिन इस बीमारी के बारे में सोचते रहते हैं। ऐसे में उनमें डिप्रेशन यानी अवसाद की संभावना बढ़ती जा रही है। कोरोना से अपने बचाव के लिए हम बार-बार हाथ धो रहे हैं, जिससे जल का अपव्यय हो रहा है। लेकिन अभी ऐसा करने के अलावा हमारे पास कोई और उपाय भी नहीं है। ज्योतिष में जल का अपव्वय होने से व्यक्ति का चंद्रमा कमज़ोर हो जाता है। चंद्रमा के कमज़ोर होने से व्यक्ति मे अवसाद, भय, मानसिक चिंताएं व आत्मविश्वास में कमी आती है। कुलमिलाकर कहें तो कोरोना वायरस से बचाव के लिए घर में रहते हुए भी हम बहुत सी ऐसी चीज़ें कर रहे है, जिसकी वजह से कुछ अन्य बीमारियां या कह ले समस्याएं जन्म ले रही हैं। इन समस्यायों के उपचार हेतु आप घर में रहते हुए बड़ी आसानी से कलर थेरेपी का प्रयोग कर सकते हैं। आईये जानते हैं कुछ खास रंगों के महत्व और बीमारियों से बचाव वके लिए इन रंगों के उपयोग के बारे में– नारंगी रंग का महत्व आमतौर पर किसी व्यक्ति को डिप्रेशन से बचाने के लिए नारंगी रंग के वस्त्र, भोज्य पदार्थ का सेवन व उसके कक्ष की साज-सज्जा नारंगी रंग की जाती है। नारंगी रंग लाल व पीले रंग का मिश्रण होता है, अर्थात सूर्य की ऊर्जा जो कि व्यक्ति को आत्मविश्वास व सकारात्मक देती है व पीले रंग से गुरू यानी विवेक की वृद्धि होती है। इन दोनों रंगो के मिश्रित प्रभाव से भगवा रंग जन्म लेता है। जो कि व्यक्ति को शक्ति के साथ ज्ञान भी समुचित मात्रा में देता है। तभी तो साधु संतों का चोला भगवा रंग का होता है। वे अपने परिवार और करीबियों से दूर होकर भी समाज सेवा कर, दूसरों के जीवन को प्रकाशित करते हैं। इस रंग में तंत्रिका तंत्र को मजबूती प्रदान करने की अद्भुत शक्ति होती है। महत्वकांक्षा को बढ़ाना, भूख बढ़ाना व श्वास के रोगों से आराम देना इस रंग के गुण हैं। हरा रंग का महत्व हरा रंग ताज़गी का प्रतीक है। यह रंग व्यक्ति के “बुध ग्रह” की शुद्धि करता है और व्यक्ति की बुद्धि का विकास कर जीवन में नए आयामों की ओर आकर्षित करता है। ऐसे में यदि हम हरे रंग के वस्त्र धारण करें, हरे रंग की कांच की बोतल से जल का सेवन करें , हरा भोजन खाए यानी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें व आस-पास पेड़ पौधे लगाए, तो घर बैठे ही मन की अशांति दूर होकर नए रास्ते खुलेंगे। हरे रंग का यह उपचार कोरोना मरीज़ों की शीघ्र उपचार के लिए भी प्रयुक्त किया जा सकता है। इस रंग के प्रयोग से व्यक्ति को नेत्र रोग, कमजोर ज्ञानतंतु, अल्सर, कैंसर व चर्म रोग जैसी बिमारियों में राहत मिलती है। बौद्धिक विकास के लिए जातक को हरे रंग का पन्ना रत्न ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। नीला रंग का महत्व नीला रंग सत्य ,आशा, विस्तार, स्वच्छता व न्याय का प्रतीक है। यह रंग स्त्री रोग, पेट में जलन, गर्मी, महत्वपूर्ण बल की कमी आदि के उपचार में प्रयुक्त किया जाता है। अब नीले रंग के भी कई प्रकार होते हैं, जैसे गहरा नीला और हल्का नीला। कोरोना लॉकडाउन के समय यह अति आवश्यक है कि हम गहरे नीले या काले रंग का प्रयोग कम से कम करें। गहरा नीला या काला रंग अकेलेपन को बढ़ाता है और व्यक्ति में निराशा व तामसिक सोच का विकास करता है। और वो कहते हैं ना, खाली दिमाग शैतान का घर होता है। ज्यादातर लोग इस वक्त अपने खाली दिमाग व समय को भरने के लिए प्रयोजन में लगे हैं। अवसाद जैसी स्थिति में इस रंग का प्रयोग कदापि न करें। ऐसे में हल्का रंग जैसे हल्के नीले रंग का प्रयोग अति शुभ रहेगा। हल्का नीला रंग श्वेत व नीले रंग के मिश्रित होता है। श्वेत रंग व्यक्ति को शीतलता, पवित्रता व शांति देता है। वही नीला रंग व्यक्ति में दृढ़ता लाता है। आसमानी या हल्के नीले रंग वाले वस्त्र पहनने से व्यक्ति को असीम शांति व सुख का अनुभव होता है और इस रंग से व्यक्ति की ग्रहण शीलता में सात्विकता आती है। लाल रंग का महत्व हर रंग की अपनी एक आभा शक्ति होती है। लाल रंग की आभा शक्ति सर्वाधिक होती है। तभी तो विवाह समारोह में वधू को लाल रंग का जोड़ा पहनाने का चलन है। हर रंग की अपनी एक उपचारक क्षमता भी होती है। लाल रंग प्रेम, उत्साह व शक्ति का प्रतीक है। लाल रंग “मंगल ग्रह” का भी प्रतिनिधित्व करता है। जिस जातक की कुंडली में मंगल ग्रह दूषित होता है, उससे लाल वस्तुओं का दान करने की सलाह दी जाती है। लाल रंग अनेकों बीमारियों के उपचार में भी प्रयोग किया जाता है। जैसे निम्न रक्त संचार, खून की कमी, अवसाद ,जोड़ों का दर्द, पैरालिसिस आदि। कलर थेरेपी में इस रंग को जातक को पहनने व भोज्य पदार्थ द्वारा ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। किंतु इस रंग का अत्यधिक प्रयोग क्रोध में हिंसा को जन्म देता है। पीला रंग का महत्व पीला रंग ज्ञान और सात्विकता का प्रतिनिधित्व करता है। खांसी, जुखाम, लीवर संबंधित बीमारियाँ कब्ज़, पीलिया, सूजन व तंत्रिका तंत्र की कमज़ोरी के उपचार में प्रयुक्त होता है। पीला रंग “गुरु ग्रह” का प्रतिनिधित्व करता है। व्यक्ति में ज्ञान और वैराग्य भावना विकसित कर सम्मानित जीवन जीने के लिए पीले रंग का पुखराज रत्न ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। बैंगनी रंग का महत्व बैंगनी रंग लाल व नीले रंग के मिश्रण से बनता है। इस रंग का प्रयोग यश, प्रसिद्धि व उत्साह प्रदान करता है। यह रंग रक्त शोधन के लिए प्रयुक्त किया जाता है। दर्द, सूजन, बुखार व कार्य क्षमता की वृद्धि के लिए इस रंग का प्रयोग किया जाता है। बैंगनी रंग सुस्त मस्तिष्क को उत्सव व आशा प्रदान करता है। सब रंगों की अपनी उपचारक क्षमता होती है। कलर थेरेपी में अलग-अलग रंगों के बल्ब, पानी की बोतल, वस्त्र, खाद्य पदार्थ, क्रिस्टल, पिरामिड, चादर व पर्दे के रूप में उपचार दिया जाता है। यह उपचार आंतरिक रूप से हमारी हर बीमारियों के इलाज में सहायक है। चाहे वह मानसिक हो या शारीरिक। विशेषज्ञ की निगरानी में किए हुए उपचार से उचित लाभ मिलता है। आशा करते हैं कि इन कलर थेरेपी के छोटे-छोटे उपचारों द्वारा आप का यह कठिन समय सही तरीके से व्यतीत कर पाएंगे
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राहु ग्रह रहस्य वैदिक ज्योतिष – ॐ राहवे नमः। अनिश्चितता के कारक राहु की प्रवृत्ति को समझना मुश्किल ही नहीं करीब करीब नामुनकिन है । इच्छाओं को अभियक्त करने वाले राहु चौंकाने वाले परिणाम देते देखे गए हैं । अमूमन इन्हें एक पापी क्रूर छाया ग्रह की तरह देखा जाता है लेकिन यह तथ्य पूर्णतया सत्य नहीं हैं । कुंडली में उचित प्रकार से स्थित राहु जातक को मात्र भक्त, शत्रुओं का पूर्णतया नाश करने वाला , बलिष्ठ , विवेकी, विद्वान , ईश्वर के प्रति समर्पित, समाज में प्रतिष्ठित व् धनवान बनाता है । वहीँ यदि राहु की स्थिति कुंडली में उचित नहीं है तो वात रोगों जैसे गैस, एसिडिटी, जोड़ों में दर्द और वात रोग से संबंधित बीमारियां देने वाला होता है। राहु की महादशा में जातक के जीवन में इतनी तेजी से और अचानक बदलाव आते हैं जिनका पूर्वानुमान लगाना सम्भव नहीं होता । कुछ भी सुव्यस्थित नहीं होरहा होता ।अतः जातक का मन परेशान रहता है । नींद गहरी नहीं आती है व् सुबह उठने पर तारो ताजा महसूस नहीं होता है । बुरी संगत , बुरे कर्मों के प्रति झुकाव बना रहता है, पैसे की तंगी बनी रहती है, व्यसनों के एडिक्ट होने की संभावना प्रबल रहती है! राहु महादशा से पूर्व यदि जातक की तैयारी ( साधना ) पूर्ण है तो राहु काल में जातक की आध्यात्मिक उन्नति में कुछ भी बाधा नहीं आ सकती और ऐसा जातक राहु महादशा को युटीलाइज़ करने में पूरी तरह सक्षम होता है । राहु ग्रह राशि, भाव और विशेषताएं -: राशि स्वामित्व : कोई नहीं दिशा : दक्षिण पश्चिम दिन : शनिवार तत्व: वायु उच्च राशि: मिथुन नीच राशि: धनु दृष्टि अपने भाव से: 7 , 5 , ९ लिंग: पुरुष नक्षत्र स्वामी : आद्रा , स्वाति तथा शतभिषा शुभ रत्न : गौमेध महादशा समय : 18 वर्ष मंत्र: ऊँ रां राहवे नम: राशि स्वामित्व : छाया गृह होने से राहु की अपनी कोई राशि नहीं होती है । वृश्चिक व् धनु राशि में राहु को नीच राशिस्थ व् वृष,मिथुन में उच्च का जाने । राहु ग्रह शुभ फल – प्रभाव कुंडली – यदि कुंडली में राहु शुभ स्थित हो तो जातक को कुशाग्र बुद्धि प्रदान करता है । ऐसे जातक कुशल , प्रोफेशनल स्नाइपर हो तो कहना ही क्या । ये बिना दुश्मन कीनजर में आये उसे खत्म करने की पूरी योग्यता रखते हैं । छाया गृह होने से फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी राहु का बलवान होना बहुत अच्छा माना जाता है । इसकेसाथ साथ राहु जातक को मात्र भक्त , शत्रुओं का पूर्णतया नाश करनेवाला , बलिष्ठ , विवेकी , विद्वान , ईश्वर के प्रति समर्पित , समाज में प्रतिष्ठित , धनवानबनाता है । अचानक लाभ करवाता है व् जुआ , सट्टे व् लाटरी से भी लाभान्वित करवाता है । राहु ग्रह अशुभ फल – प्रभाव कुंडली – यदि राहु की स्थिति कुंडली में उचित नहीं है तो मति भ्र्म की स्थिति बनती है , वात रोगों जैसे गैस, एसिडिटी, जोड़ों में दर्द और वात रोग से संबंधित बीमारियां होजाती हैं । प्रॉफेशन में दिक्कत परेशानियों का सामना करना पड़ता है । बुरी संगत , बुरे कर्मों के प्रति झुकाव बना रहता है , पैसे की तंगी बनी रहती है , व्यसनों केएडिक्ट होने की संभावना प्रबल रहती है । उचित – अनुचित का भान नहीं रहता है । परिस्थितियों से जूझने की क्षमता पर प्रतिकूल असर पड़ता है । राहु शान्ति के उपाय -रत्न लग्नकुंडली में राहु शुभ स्थित हो और बलाबल में कमजोर हो तो राहु रत्न गौमेध धारण करना उचित रहता है । गौमेध के उपरत्न तुरसा , साफी हैं । गौमेध केअभाव में उपरत्नो का उपयोग किया जा सकता है । किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व किसी योग्य ज्योतिषी से कुंडली का उचित निरिक्षण आवश्य करवाएं ।यदि राहु खराब स्थित हो तो शनिवार का व्रत रखें , शनिवार को चींटियों को काले तिल खिलाएं , ऊँ रां राहवे नम: का नित्य 108 बार जाप राहु की सम्पूर्णमहादशा में करें । किसी जरूरतमंद को चाय पत्ती , जूते दान करें। ये उपाय केतु की सम्पूर्ण महादशा में करते रहने से केतु के प्रकोप से आवश्य राहत मिलती है ।
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तुलसी पौधे का नाम सुनते ही हमारे मन में पवित्र भाव आने लगते हैं। यह इस बात का संकेत है कि तुलसी का हमारे जीवन में कितना बड़ा महत्व है। तुलसी कोई आम पौधा नहीं है बल्कि यह अपने चमत्कारिक गुणों के कारण एक विशिष्ट पौधा हो जाता है। शास्त्रों में इसे माँ लक्ष्मी का रूप माना गया है। इसलिए जिस घर में तुलसी का पौधा होता है उस घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ तुलसी पौधे का आयुर्वेदिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक महत्व भी है। ज्योतिष शास्त्र में तुलसी के पौधे के अचूक उपाय बताए गए हैं। वहीं आयुर्वेद की दृष्टि से भी यह पौधा कई रोगों के उपचार के लिए रामबाण है और वैज्ञानिक रूप से भी इसके महत्व को कम नहीं आंका जा सकता है। तुलसी के प्रकार राम तुलसी श्याम तुलसी श्वेत/विष्णु तुलसी वन तुलसी नींबू तुलसी तुलसी का धार्मिक महत्व यह तुलसी पौधे की महानता है कि भारत वर्ष में तुलसी विवाह को धार्मिक त्यौहार के रूप में मनाया जाता है। यह विवाहोत्सव कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी एकादशी) तिथि को मनाया जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु का विवाह तुलसी जी के साथ किया जाता है। यह प्रक्रिया वैवाहिक मंत्रोच्चारण के साथ होती है और भगवान विष्णु और तुलसी के ऊपर सिंदूरी रंग में रगे हुए चावल डालकर शादी को विधिपूर्वक संपन्न किया जाता है। इसके अलावा घर-घर में इस पौधे की पूजा होती है। तुलसी की आराधना मंत्र सहित करनी चाहिए। तुलसी मंत्र तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।। लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्। तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।। तुलसी पूजा के नियम सबसे पहले तुलसी को नमन करें उसके बाद तुलसी पर शुद्ध जल चढ़ाएँ अब सिंदूर और हल्दी चढ़ाएँ पूजा हेतु घी का दीया जलाएँ माँ लक्ष्मी का स्मरण कर तुलसी जी की आरती करें अंत में सुख-शांति और भाग्य की कामना करें तुलसी का ज्योतिषीय महत्व ज्योतिषीय दृष्टिकोण से तुलसी का पौधा बेहद अहम है। यह पौधा चंद्र और शुक्र ग्रह के दोषों को दूर करने में सहायक होता है। इसलिए जिस जातक की कुंडली में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति कमज़ोर हो तो उस जातक को तुलसी की पूजा और तुलसी की माला धारण करनी चाहिए। तुलसी की आराधना करने से कुंडली में अष्टम और षष्ट भाव से संबंधित दोष दूर होते हैं और सप्तम भाव भी मजबूत होता है। यदि विवाहित जातक तुलसी की नित्य आराधना करते हैं तो उसके वैवाहिक जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और पति-पत्नी के बीच रिश्ता अटूट होता है। तुलसी का पौधा वास्तु दोषों को दूर करता है। तुलसी का आयुर्वेदिक महत्व आयुर्वेदिक औषिधि के लिए तुलसी बहुत काम आती है। यह विष और दुर्गंध नाषक औषिधि है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी तुलसी मदद करती है। यदि रोजाना तुलसी की एक पत्ती को चबाकर खाया जाए तो व्यक्ति को कफ विकार की समस्या नहीं होगी। तुलसी के पत्ते को काली मिर्च के साथ खाने से सर्दी-जुकाम तथा खांसी जैसी बीमारियाँ दूर हो जाती हैं। इससे स्वाइन फ्लू जैसी गंभीर बीमारी का इलाज संभव है। तुलसी का पौधा घर में नकारात्मक प्रभावों और प्रदूषण को दूर करता है। तुलसी का वैज्ञानिक महत्व विज्ञान की दृष्टि से तुलसी एक महत्वपूर्ण पौधा है। इसका वैज्ञानिक नाम ऑसीमम सैंक्टम है। तुलसी का पौधा वातावरण में कार्बनडाई ऑक्साइड गैस को सोख कर ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है। इसलिए इसके आसपास का लगभग 50 मीटर का क्षेत्र पूर्ण रूप से शुद्ध रहता है। इसके साथ ही तुलसी के प्रभाव से घर में पिस्सू और मलेरिया के जीव आदि नहीं पनपते हैं। तुलसी का मुख्य गुण डी-टॉक्सिफिकेशन करना है जो शरीर में रक्त को शुद्ध करता है। सावधानियाँ वास्तु के अनुसार घर में तुलसी का पौधा ईशान कोण में लगाना चाहिए रविवार को छोड़कर स्नान के बाद प्रातः तुलसी को जल चढ़ाएँ गणेशजी, शिवजी और भैरव जी के ऊपर तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं तुलसी के पत्ते 11 दिनों तक शुद्ध रहते हैं अतः इन पर गंगा जल छिड़कर पूजा के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति और संध्याकाल के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए!
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