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श्रीशनि अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्

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*॥ श्रीशनि अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥* शनि बीज मन्त्र -

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श्रीशनि अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्
posted Jan 11 by Rakesh Periwal

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शनि का बारह भाव मे फल ओर उसके उपाय .......शनि का पहले भाव में फल पहला घर सूर्य और मंगल ग्रह से प्रभावित होता है। पहले घर में शनि तभी अच्छे परिणाम देगा जब तीसरे, सातवें या दसवें घर में शनि के शत्रु ग्रह न हों। यदि, बुध या शुक्र, राहू या केतू, सातवें भाव में हों तो शनि हमेशा अच्छे परिणाम देगा। यदि शनि नीच का हो और जातक के शरीर में बाल अधिक हों तो जातक गरीब होगा। यदि जातक अपना जन्मदिन मनाता है तो बहुत बुरे परिणाम मिलेंगे हालांकि जातक दीर्घायु होगा। उपाय: (1) शराब और मांसाहारी भोजन से स्वयं को बचाएं। (2) नौकरी और व्यवसाय में लाभ के लिए जमीन में सुरमा दफनायें। (3) सुख और समृद्धि के लिए बंदरों की सेवा करें। (4) बरगद के पेड़ की जड़ों पर मीठा दूध चढानें से शिक्षा और स्वास्थ्य में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। शनि का दूसरे भाव में फल जातक बुद्धिमान, दयालु और न्यायकर्ता होगा। वह धन का आनंद लेगा और धार्मिक स्वभाव का होगा। भले ही शनि उच्च का हो या नीच का, यह नतीजा आठवें भाव में बैठे ग्रह पर निर्भर करेगा। जातक की वित्तीय स्थिति सातवें भाव में स्थित ग्रह पर निर्भर करेगी। परिवार में पुरुष सदस्यों की संख्या छठवें भाव और आयु आठवें भाव पर निर्भर करेगी। जब शनि इस भाव में नीच का हो तो शादी के बाद उसके ससुराल वाले परेशान होंगे। उपाय: (1) लगातार 43 दिनों तक नंगे पांव मंदिर जाएं। (2) माथे पर दही या दूध का तिलक लगाएं। (3) साँप को दूध पिलाए। शनि का तीसरे भाव में फल इस घर में शनि अच्छा परिणाम देता है। यह घर मंगल ग्रह का पक्का घर है। जब केतु अपने इस घर को देखता है तो यहां बैठा शनि बहुत अच्छे परिणाम देता है। जातक स्वस्थ, बुद्धिमान और बहुत सरल स्वभाव का होता है। यदि जातक धनवान होगा तो उसके घर में पुरुष सदस्यों की संख्या कम होगी। गरीब होने की दशा में परिणाम उल्टा होगा। यदि जातक शराब और मांशाहार से दूर रहता है तो वह लम्बे और स्वस्थ जीवन का आनंद उठाएगा। उपाय: (1) तीन कुत्तों की सेवा करें। (2) आँखों की दवाएं मुफ्त बांटें। (3) घर में एक कमरे में हमेशा अंधेरा रखना बहुत फायदेमंद साबित होगा। शनि का चौथे भाव में फल यह भाव चंद्रमा का घर होता है। इसलिए शनि इस भाव में मिलेजुले परिणाम देता है। जातक अपने माता पिता के प्रति समर्पित होगा और प्रेम मुहब्बत से रहने वाला होगा। जब कभी जातक बीमार होगा तो चंद्रमा से संबंधित चीजें फायदेमंद होंगी। जातक के परिवार से कोई व्यक्ति चिकित्सा विभाग से संबंधित होगा। जब शनि इस भाव में नीच का होकर स्थित हो तो शराब पीना, सांप मारना और रात के समय घर की नीव रखना जैसे काम बहुत बुरे परिणाम देते हैं। रात में दूध पीना भी अहितकर है। उपाय: (1) साँप को दूध पिलाएं अथवा दूध चावल किसी गाय या भैंस को खिलाएं। (2) किसी कुएं में दूध डालें और रात में दूध न पियें। (3) चलते पानी में रम डालें। शनि का पांचवें भाव में फल यह भाव सूर्य का घर होता है। जो शनि का शत्रु ग्रह है। जातक घमंडी होगा। जातक को 48 साल तक घर का निर्माण नहीं करना चाहिए, अन्यथा उसके बेटे को तकलीफ होगी। उसे अपने बेटे के बनवाए या खरीदे हुए घर में रहना चाहिए। जातक को अपने पैतृक घर में बृहस्पति और मंगल ग्रह से संबंधित वस्तुएं रखनी चाहिए, इससे उसके बच्चों का भला होता है। यदि जातक के शरीर में बाल अधिक होंगे तो जातक बेईमान हो जाएगा। उपाय: (1) बेटे के जन्मदिन पर नमकीन चीजें बाटें। (2) बादाम का एक हिस्सा मंदिर में बाटें और दूसरा हिस्सा लाकर घर में रख दें। सम्पूर्ण जन्म कुंडली विश्लेषण हेतु सम्पर्क करें शनि का छठें भाव में फल यदि शनि ग्रह से संबंधित काम रात में किया जाय तो हमेशा लाभदायक परिणाम मिलेंगे। यदि शादी के 28 साल के बाद होगी तो अच्छे परिणाम मिलेंगे। यदि केतु अच्छी स्थित में हो जातक धन, लाभदायक यात्रओं और बच्चों के सुख का आनंद पाता है। यदि शनि नीच का हो तो शनि से सम्बंधित चीजें जैसे चमडा, लोहा आदि को लाना हानिकारक होता है, खासकर तब, जब शनि वर्षफल में छठवें भाव में हो। उपाय: (1) एक काला कुत्ता पालें और उसे भोजन करायें। (2) नदी या बहते पानी में नारियल और बादाम बहाएं। (3) सांप की सेवा बच्चों के कल्याण के लिए फायदेमंद साबित होगी। शनि का सातवें भाव में फल यह घर बुध और शुक्र से प्रभावित होता है, दोनो ही शनि के मित्र ग्रह हैं। इसलिए शनि इस घर में बहुत अच्छा परिणाम देता है। शनि से जुड़े व्यवसाय जैसे मशीनरी और लोहे का काम बहुत लाभदायक होगा। यदि जातक अपनी पत्नी से अच्छे संबंध रखता है तो वह अमीर और समृद्ध होगा और लंबी आयु के साथ अच्छे स्वास्थ्य का आनंद लेगा। यदि बृहस्पति पहले घर में हो तो सरकार से लाभ होगा। यदि जातक व्यभिचारी हो जाता है या शराब पीने लगता है तो शनि नीच और हानिकर हो जाता है। यदि जातक 22 साल के बाद शादी करता है तो उसकी दृष्टि पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है। उपाय: (1) किसी बांसुरी में चीनी भरें और किसी सुनसान जगह जैसे कि जंगल आदि में दफना दें। (2) काली गाय की सेवा करें। शनि का आठवें भाव में फल आठवें घर में कोई भी ग्रह शुभ नहीं माना जाता है। जातक दीर्घायु होगा लेकिन उसके पिता की उम्र कम होती है और जातक के भाई एक-एक करके शत्रु बनते जाते हैं। यह घर शनि का मुख्यालय माना जाता है, लेकिन यदि बुध, राहू और केतु जातक की कुंडली में नीच के हैं तो शनि बुरा परिणाम देगा। उपाय: (1) अपने साथ चांदी का एक चौकोर टुकड़ा रखें। (2) नहाते समय पानी में दूध डालें और किसी पत्थर या लकड़ी के आसन पर बैठ कर स्नान करें। शनि का नौवें भाव में फल जातक के तीन घर होंगे। जातक एक सफल यात्रा संचालक (टूर ऑपरेटर) या सिविल इंजीनियर होगा। वह एक लंबे और सुखी जीवन का आनंद लेगा साथ ही जातक के माता - पिता भी सुखी जीवन का आनंद लेंगे। यहां स्थित शनि जातक की तीन पीढ़ियों शनि के दुष्प्रभाव से बचाएगा। अगर जातक दूसरों की मदद करता है तो शनि ग्रह हमेशा अच्छे परिणाम देगा। जातक के एक बेटा होगा, हालांकि वह देर से पैदा होगा। उपाय: (1) बहते पानी में चावल या बादाम बहाएं। (2) बृहस्पति से संबंधित (सोना, केसर) और चंद्रमा से संबंधित (चांदी, कपड़ा) का काम अच्छे परिणाम देंगे। शनि का दसवें भाव में फल यह शनि का अपना घर है, जहां शनि अच्छा परिणाम देगा। जातक तब तक धन और संपत्ति का आनंद लेता रहेगा, जब तक कि वह घर नहीं बनवाता। जातक महत्वाकांक्षी होगा और सरकार से लाभ का आनंद लेगा। जातक को चतुराई से काम लेना चाहिए और एक जगह बैठ कर काम करना चाहिए। तभी उसे शनि से लाभ और आनंद मिल पाएगा। उपाय: (1) प्रतिदिन मंदिर जाएं। (2) शराब, मांस और अंडे से परहेज करें। (3) दस अंधे लोगों को भोजन कराएं। शनि का ग्यारहवें भाव में फल जातक के भाग्य का निर्धारण उसकी उम्र के अडतालीसवें वर्ष में होगा। जातक कभी भी निःसंतान नहीं रहेगा। जातक चतुराई और छल से पैसे कमाएगा। शनि ग्रह राहु और केतु की स्थिति के अनुसार अच्छा या बुरा परिणाम देगा। उपाय: (1) किसी महत्वपूर्ण काम को शुरू करने से पहले 43 दिनों तक तेल या शराब की बूंदें जमीन पर गिराएं। (2) शराब न पियें और अपना नैतिक चरित्र ठीक रखें। शनि का बारहवें भाव में फल शनि इस घर में अच्छा परिणाम देता है। जातक के दुश्मन नहीं होंगे। उसके कई घर होंगे। उसके परिवार और व्यापार में वृद्धि होगी। वह बहुत अमीर हो जाएगा। हालांकि, यदि जातक शराब पिए, मांशाहार करे या अपने घर के अंधेरे कमरे में रोशनी करे तो शनि नीच का हो जाएगा। उपाय: (1) किसी काले कपड़े में बारह बादाम बांधकर उसे किसी लोहे के बर्तन में भरकर किसी अंधेरे कमरे में रखने से अच्छे परिणाम मिलेंगे।
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शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी एवं मां संतोषी की पूजा की जाती है। शास्त्रों में लक्ष्मी को चंचला कहा गया है। चंचला का मतलब है ऐसी देवी जिनका किसी एक स्थान पर अधिक समय तक रहना तय नहीं है। जी को हिंदू धर्म में सुख-समृद्धि, धन, वैभव तथा ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। देवी लक्ष्मी की कई मंत्रों से पूजा की जाती है लेकिन सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी मंत्र वैभव लक्ष्मी मंत्र को माना जाता है। मान्यता है कि लक्ष्मी जी की पूजा करते हुए वैभव लक्ष्मी मंत्र का जाप करने से व्यक्ति के घर में कभी धन का अभाव नहीं रहता है। पूजा पाठ करने वाले और भक्ति भाव में लीन लोग शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को पूजते हैं। मान्यता है कि शुक्रवार को लक्ष्मी का पूजन करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन की वर्षा होती है। हिंदू धर्म में शुक्रवार को मां लक्ष्मी का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजन से धन की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने का भी प्रावधान है। हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता या देवी को समर्पित है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी एवं मां संतोषी की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है। धन को अपने पास स्थाई बनाने के लिए मां लक्ष्मी का पूजन कर उन्हें प्रसन्न रखा जाता है ताकि वे कहीं ओर न जाएं। इसके लिए हिंदू धर्म में कई उपाय, पूजन, आराधना और मंत्र-जाप आदि का विधान है। शुक्रवार को पूरे दिन व्रत रख शाम को स्नान के बाद माता लक्ष्मी की पूजा करें। वैभव लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र की पूजा में खासतौर पर लाल चंदन, गंध, लाल वस्त्र, लाल फूल अर्पित करें। खीर का भोग लगाएं। मान्यता है घी के पांच बत्तियों वाले दीप से आरती कर माता को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। श्री वैभव लक्ष्मी मंत्र का जाप करने से जातक के घर में कभी किसी वस्तु का अभाव नहीं रहता है और लक्ष्मी जी की कृपा से उसका जीवन सुख- शांति, धन- वैभव से हमेशा भरा रहता है।
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हिन्दू धर्म में मुख्य रूप से नवरात्रि के त्यौहार को बेहद ख़ास माना जाता है। इस दौरान पूरे नौ दिनों तक देवी मान के विभिन्न नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि, देवी के विभिन्न रूपों की पूजा करने से विभिन्न प्रकार के ग्रहों की शांति भी होती है। आज हम आपको मुख्य रूप से नवरात्रि के नौ दिनों के अंतर्गत देवी के उन सभी रूपों के साथ ही उन ग्रहों के बारे में भी बताने जा रहे हैं जिनकी पूजा करने से उनकी शांति हो सकती है। प्रथम दिन नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माता शैलीपुत्री को विशेष रूप से चंद्रमा का कारक माना जाता है। लिहाजा इस दिन विशेष रूप से माँ शैलपुत्री की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति के चंद्रमा ग्रह की शांति होती है। दूसरा दिन नवरात्रि के दूसरे दिन मुख्य रूप से दुर्गा माँ के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा की जाती है। माता ब्रह्मचारिणी विशेष रूप से मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति के मंगल ग्रह की शांति होती है। तीसरा दिन नवरात्रि के तीसरे दिन खासतौर से देवी चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जाती है। माता चन्द्रघंटा को मुख्य रूप से शुक्रग्रह का कारक माना जाता है। इस दिन माता के इस रूप की पूजा अर्चना करने से विशेष रूप से शुक्र ग्रह की शांति होती है और व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि आती है। चौथा दिन नवरात्रि के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन माँ के इस रूप की पूजा उन लोगों को अवश्य करनी चाहिए जिनकी कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर हो। सूर्य ग्रह की शांति के लिए श्रद्धा पूर्वक माता कुष्मांडा की पूजा की जानी चाहिए। पांचवां दिन नवरात्रि के पांचवें दिन खासतौर से देवी स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है। माँ स्कंदमाता को विशेष रूप से बुध ग्रह का नियंत्रण प्राप्त है। इस लिहाज से जिन व्यक्तियों को बुध ग्रह की शांति करनी हो उन्हें विशेषतौर पर आज के दिन माँ के इस रूप की पूजा जरूर करनी चाहिए। छठे दिन नवरात्रि के छठे दिन विशेष रूप से माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। माँ के इस रूप को मुख्य रूप से बृहस्पति ग्रह का नियंत्रण प्राप्त है। इस दिन माता कात्यायनी की पूजा अर्चना करने से बृहस्पति ग्रह की शांति होती है। सातवां दिन नवरात्रि के सातवें दिन विशेष रूप से माँ के कालरात्रि की आराधना की जाती है। देवी के इस रूप को शनि ग्रह का नियंत्रण प्राप्त है। बहरहाल इस दिन आप माता कालरात्रि की पूजा अर्चना कर शनि ग्रह की शांति कर सकते हैं। आठवां दिन नवरात्र के आठवें दिन विशेष रूप से महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन माँ के इस रूप की आराधना करने से आप राहु ग्रह दोष से मुक्त हो सकते हैं। माता के इस स्वरुप को मुख्य रूप से राहु ग्रह का नियंत्रण प्राप्त है। नौवां दिन केतु ग्रह के विपरीत प्रभावों से बचने के लिए नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन माता के इस स्वरुप का नमन कर और केतु ग्रह दोष से मुक्त हो सकते हैं।
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आनन्द नामक सम्वत्सर 2077 का आरम्भ यद्यपि 25 मार्च बुधवार,रेवती नक्षत्र को उदयव्यापिनी तिथि में होगा किन्तु 24 मार्च 2020 को अमावस्या तिथि 14:56 बजे समाप्त हो जाएगी तथा 14:57 बजे से नववर्ष की प्रतिपदा का आरम्भ कर्क लग्न में होगा। उस समय की आकाशीय कौंसिल के अनुसार कर्क, मकर (लग्न एवं सप्तम) में शनि-मंगल का विध्वंसकारी योग तथा षष्ठ-द्वादश भाव में कालसर्प योग राष्ट्र के लिए जन-धन हानि और उपद्रव लेकर आ रहा है। हालांकि राजा बुध एवं मन्त्री चंद्र का शुभ प्रभाव सत्ता पक्ष की सूझबूझ को बल देगा। सरकार कठोर कानून लागू करेगी। दो-तीन प्रान्तों में सत्ता संघर्ष एवं परिवर्तन के योग भी बन सकते हैं। 29 मार्च से तीन ग्रह (शनि, मंगल, गुरु) का मकर राशि में अशुभ फलदायक होगा। साम्प्रदायिक दंगे होने की आशंका है। इससे जन-धन और व्‍यापक स्‍तर पर राष्ट्रीय सम्पत्ति की हानि का योग बन रहे हैं, लेकिन सरकार कठोर फैसले लेने में संकोच नहीं करेगी। देश में वर्तमान में जारी कोरोना महामारी की व्‍यापकता में कमी और कुछ बाद इसका प्रभाव खत्‍म होने के आसार हैं। आर्थिक दृष्‍टि से आगामी सम्वत्सर शुभ रहेगा। लंबे समय से व्यापारी वर्ग में चल रही निराशा दूर होगी। विदेशी पूंजी में वृद्धि होगी।
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शनिदेव के जीवन पर प्रभाव और उपाय 〰️〰️
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