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मकरसंक्रांति की शुभकामनाएं

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ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च| हिरण्येन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्। जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम। तमोsरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोsस्मि दिवाकर। भगवान सूर्य का उत्तरायण प्रवेश हो चुका है। उत्तरायण सूर्य आप सभी के लिए मंगलमय हो। सूर्य की रश्मियां से जीवन में व्याप्त अंधकार समाप्त हो ग्रह राज्य सूर्य की कृपा आप सब को प्राप्त हो । राष्ट्र विकास में आप सभी सहभागिता बने। राष्ट्र सेवा और देश सेवा के राष्ट्र के गणक ( ज्योतिर्विद) राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की अनुपालना करे। हम देश के ज्योतिषीय विकास , आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण कर सके। *मकरसंक्रांति की शुभकामनाएं* 15 जनवरी 2020
posted Jan 15 by anonymous

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श्रीगणेश बुद्धि के देवता हैं । अक्षरों को ‘गण’ कहा जाता है, उनके ईश होने के कारण इन्हें ‘गणेश’ कहा जाता है । इसलिए श्रीगणेश ‘विद्या-बुद्धि के दाता’ कहे गये हैं । आदिकवि वाल्मीकि ने श्रीगणेश की वन्दना करते हुए कहा है—‘गणेश्वर ! आप चौंसठ कोटि विद्याओं के दाता तथा देवताओं के आचार्य बृहस्पतिजी को भी विद्या प्रदान करने वाले हैं । कठ को भी अभीष्ट विद्या देने वाले आप है (अर्थात् कठोपनिषद् के दाता है) । आप द्विरद हैं, कवि हैं और कवियों की बुद्धि के स्वामी हैं; मैं आपको प्रणाम करता हूँ ।’ श्रीगणेश असाधारण बुद्धि व विवेक से सम्पन्न होने के कारण अपने भक्तों को सद्बुद्धि व विवेक प्रदान करते हैं । इसीलिए हमारे ऋषियों ने मनुष्य के अज्ञान को दूर करने, बुद्धि शुद्ध रखने व काम में एकाग्रता प्राप्त करने के लिए बुद्धिदाता श्रीगणेश की सबसे पहले पूजा करने का विधान किया है । श्रीगणेश की कृपा से कैसे मिलता है तेज बुद्धि का वरदान ? श्रीगणेश का ध्यान करने से भ्रमित मनुष्य को सुमति और विवेक का वरदान मिलता है और श्रीगणेश का गुणगान करने से सरस्वती प्रसन्न होती हैं । तीव्र बुद्धि और स्मरण-शक्ति के लिए श्रीगणेश का करें प्रात:काल ध्यान!!!!!! विद्या प्राप्ति के इच्छुक मनुष्य को प्रात:काल इस श्लोक का पाठ करते हुए श्रीगणेश के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए— प्रात: स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम् उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्ड- माखण्डलादिसुरनायकवृन्दवन्द्यम् ।। अर्थात्—जो अनाथों के बन्धु हैं, जिनके दोनों कपोल सिन्दूर से शोभायमान हैं, जो प्रबल विघ्नों का नाश करने में समर्थ हैं और इन्द्रादि देव जिनकी वन्दना करते हैं, उन श्रीगणेश का मैं प्रात:काल स्मरण करता हूँ । विद्या प्राप्ति और तीव्र स्मरण-शक्ति के लिए बुधवार को करें श्रीगणेश के ये उपाय !!!!!! ▪️बुध ग्रह भी बुद्धि देने वाले हैं । बुधवार के दिन गणेशजी की पूजा बहुत फलदायी होती है । श्रीगणेश अपनी संक्षिप्त अर्चना से ही संतुष्ट हो भक्त को ऋद्धि-सिद्धि प्रदान कर देते हैं । गणेशजी को प्रसन्न करना बहुत ही सरल है । इसमें ज्यादा खर्च की आवश्यकता नही है । ▪️स्नान आदि करके पूजा शुद्ध पीले वस्त्र पहन कर करें । ▪️पूजा-स्थान में गणेशजी की तस्वीर या मूर्ति पूर्व दिशा में विराजित करें । श्रीगणेश को रोली, चावल आदि चढ़ाएं । कुछ न मिले तो दो दूब ही चढ़ा दें । घर में लगे लाल (गुड़हल, गुलाब) या सफेद पुष्प (सदाबहार, चांदनी) या गेंदा का फूल चढ़ा दें । ▪️श्रीगणेश को सिंदूर अवश्य लगाना चाहिए । ▪️श्रीगणेश को बेसन के लड्डू बहुत प्रिय हैं यदि लड्डू या मोदक न हो तो केवल गुड़ या बताशे का भोग लगा देना चाहिए । ▪️एक दीपक जला कर धूप दिखाएं और हाथ जोड़ कर छोटा-सा एक श्लोक बोल दें– तोहि मनाऊं गणपति हे गौरीसुत हे । करो विघ्न का नाश, जय विघ्नेश्वर हे ।। विद्याबुद्धि प्रदायक हे वरदायक हे । रिद्धि-सिद्धिदातार जय विघ्नेश्वर हे ।। ▪️एक पीली मौली गणेशजी को अर्पित करते हुए कहें—‘करो बुद्धि का दान हे विघ्नेश्वर हे’ । पूजा के बाद उस मौली को माता-पिता, गुरु या किसी आदरणीय व्यक्ति के पैर छूकर अपने हाथ में बांध लें। ▪️श्रीगणेश पर चढ़ी दूर्वा को अपने पास रखें, इससे एकाग्रता बढ़ती है । ▪️‘ॐ गं गणपतये नम:’ इस गणेश मन्त्र का 108 बार जाप करने से बुद्धि तीव्र होती है । ▪️गणपति अथर्वशीर्ष में कहा गया है—‘जो लाजों (धान की खील) से श्रीगणेश का पूजन करता है, वह यशस्वी व मेधावी होता है ।’ अत: गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने से भी विद्या, बुद्धि, विवेक व एकाग्रता बढ़ती है । बुद्धि के सागर और शुभ गुणों के घर गणेशजी का स्मरण करने से ही समस्त सिद्धियां प्राप्त हो जाती
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शुक्रवार को लक्ष्मी का पूजन करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन की वर्षा होती है। हिंदू धर्म में शुक्रवार को मां लक्ष्मी का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजन से धन की प्राप्ति होती है। इसलिए वे लोग जो आर्थिक तंगी का सामना कर रहे होते हैं शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं। इस‍ दिन व्रत रखने का भी प्रावधान है। हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता या देवी को समर्पित है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी, मां संतोषी की पूजा की जाती है शास्त्रों में लक्ष्मी को चंचला कहा गया है। चंचला का मतलब है ऐसी देवी जिनका किसी एक स्थान पर अधि‍क समय तक रहना तय नहीं। वे चंचल हैं इसलिए एक स्थान पर ज्यादा नहीं रूकतीं। तभी तो कहते हैं न धन का क्या है आज आपके पास अपार है कल हो सकता है कि बिल्कुल न हो। हिंदू धर्म में लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है। इसलिए धन को अपने पास स्थाई बनाने के लिए मां लक्ष्मी का पूजन कर उन्हें प्रसन्न रखा जाता है, ताकि वे कहीं और न जाएं। इसके लिए हिंदू धर्म में कई उपाय, पूजन, आराधना और मंत्र-जाप आदि का विधान है। शुक्रवार के दिन भगवान विष्णु का दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर अभिषेक करें। अगर यह अभिषेक मन से किया जाए तो माँ लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं और आप को धन से संपन्‍न कर देती हैं। शुक्रवार के दिन शाम को गाय के घी का दीपक घर के ईशान कोण में लगायें। और दीपक में रुई की जगह पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें और दीपक में थोड़ा केसर भी डालें। शुक्रवार के एक पिला कपड़ा ले उसमे पांच लक्ष्मी (पिली) कौड़ी और थोड़ा सा केसर – चंडी के सिक्के डाले और वह सब बाँध ले और धन के स्थान पर रख दे। और बस देखिये कुछ दिनों में आपको इसका प्रभाव दिखेगा। शुक्रवार के दिन कुवांरी लड़कियों को घर बुलाकर उन्हें खीर खिलायें तथा उन्हें वस्त्र और दक्षिणा दें। ऐसा करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और धन प्राप्ति होती है। शुक्रवार के दिन अगर कोई भक्त गरीबों को दान करता है तो उसे धन के रूप में आशीर्वाद मिलता है। और गरीबों को सफ़ेद रंग की वस्तु या खाद्य पदार्थ दान करें तो बहुत शुभ रहता है। शुक्रवार के दिन गाय के दूध से श्रीयंत्र का अभिषेक करें और जो भी अभिषेक का जल बचेगा उसे पूरे घर में छिड़क दें और श्री यंत्र को धन रखने की जगह पर रख दें उससे धन का लाभ होगा।
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आपको शुक्र ग्रह और महिलाओं से जुड़ी कुछ बातें बताने जा रहे हैं। कुछ विद्वान ज्योतिषियों के अनुसार शुक्र ग्रह को शुभ और रजोगुणी ग्रह माना जाता है। इस ग्रह को जीवन, प्यार, रोमांस और यौन संबंधों का कारक माना जाता है। लेकिन शुक्र ग्रह का महिलाओं से एक गहरा संबंध होता है, इसके बारे में शायद कोई नहीं जानता हो। कहा जाता है कि किसी भी स्त्री की कुंडली में जैसे वृहस्पति ग्रह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वैसे ही शुक्र भी दांपत्य जीवन में प्रमुख भूमिका निभाता है। माना जाता है कि अच्छा चेहरा देखने से कुंडली में शुक्र के होने का पता चल जाता है। यह स्त्री के चेहरे को आकर्षण का केंद्र बनाता है। परंतु ज़रूरी नहीं है कि की स्त्री का रंग गोरा है या सांवला। ज्योतिष के अनुसार सुंदर नेत्र और सुंदर केश यानि बालों से पहचाना जा सकता है स्त्री का शुक्र शुभ ग्रहों के सानिध्य में है। जिस किसी स्त्री कुंडली में शुक्र का अच्छा प्रभाव हो तो उसे जीवन में हर सुख सुविधा प्राप्त होती है, जिसमें वाहन, घर, ज्वेलरी, वस्त्र आदि शामिल हैं। किसी भी वर्ग की औरत हो, उच्च, मध्यम या निम्न उसे अच्छा शुक्र सभी वैभव प्रदान करता ही है। वहीं कुंडली का अच्छा शुक्र स्त्री को गायन, अभिनय, काव्य-लेखन की और प्रेरित करता है। इसके अलावा कहा जाता है कि अगर शुक्र ग्रह चन्द्र के साथ संबंध रखता हो तो ऐसी स्त्री भावुक होती हैं। साथ ही अगर बुध का साथ भी मिल जाए तो स्त्री लेखन के क्षेत्र में पारंगत होती है। मगर ऐसा कहा जा सकता है कि अच्छा शुक्र स्त्री में मोटापा भी देता है। परंतु बता दें कि जहां वृहस्पति स्त्री को थुलथुला मोटापा दे कर अनाकर्षक बनता है वही शुक्र से आने वाला मोटापा स्त्री को और भी सुन्दर दिखाता है। अब बता दें कि अगर कुंडली में शुक्र बुरे या पापी ग्रहों का सानिध्य या कुंडली के दूषित भावों के साथ हो तो स्त्री में चारित्रिक दोष भी पैदा कर सकता है। जिसके कारण विवाह में, कष्ट प्रद दांपत्य जीवन, बहु विवाह और तलाक की स्थिति पैदा होने के आसार बढ़ते है। ज्योतिष के अनुसार अगर ऐसा हो तो स्त्री को हीरा पहनने से परहेज़ करना चाहिए। अगर ऐसे हालात में हीरा पहना जाए तो कमज़ोर शुक्र स्त्री में मधुमेह, थाइराईड, यौन रोग, अवसाद और वैभव हीनता लाता है।
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ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों का जन्म शुक्रवार को हुआ है उन पर माँ लक्ष्मी और शुक्र दोनों का शुभ प्रभाव देखने को मिलता है, क्योंकि शुक्रवार के स्वामी शुक्र देव है और इसकी देवी लक्ष्मी है। यही कारण है कि इस दिन जन्म लने वाले व्यक्ति भौतिक सुख सुविधाओं के आदी और शौकीन मिजाज होते है l शुक्रवार को जन्मे लोग जीवन को मौज मस्ती से व्यतीत करने के पक्षधर होते है। इस दिन जन्मे लोग विरोधियों को भी अपने पक्ष में करने की कला जानते है, इनमे एक अलग ही आकर्षण होता है। जिससे ये अपने मित्रों के दायरे में काफी लोकप्रिय होते है। शुक्रवार को जन्में लोग बड़े ही खुशमिजाज होते है और जिंदगी को एक जश्न की तरह जीते है। इनको कलात्मक चीजों और कला से गहरा लगाव होता है, इसलिये ये अपना कैरियर भी संगीत, लेखन, चित्रकला, फिल्म, फैशन, ब्यूटी इंडस्ट्री में बनाना पसंद करते है। ऐसे व्यक्ति आमतौर पर प्रसन्न दिखाई देते है। इनके चेहरे पर रौनक होती है।
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--- पौराणिक कथाओं कथाओं के अनुसार एक बार भगवान शिव और पार्वती के दोनों पुत्र गणेश और कार्तिकेय के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। भगवान शिव ने काफी सोच-विचार कर एक प्रतियोगिता आयोजित की और कहा कि जो अपने वाहन पर सवार होकर समस्त तीर्थ और संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके पहले लौटेगा वही पृथ्वी पर प्रथम पूजनीय होगा। कार्तिकेय ने शिवजी एवं पार्वती जी का आशीर्वाद लिया और अपने वाहन मोर पर तुरंत सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए निकल पड़े। इधर गणेश जी सोच में पड़ गए कि मेरा वाहन तो चूहा है। चूहा थोड़ा छोटा है और हम थोडे़ मोटे हैं। इस तरह तो हमारी हार पक्की है। तब गणेश जी ने सोचा कि माता-पिता में संपूर्ण तीर्थ होते हैं यदि मैं इनकी परिक्रमा कर लूंगा तो मुझे समस्त तीर्थ और समस्त पृथ्वी की परिक्रमा करने का फल मिल जाएगा। ये सोचकर श्री गणेश जी महाराज ने अपनी मां पार्वती और पिता शिव जी से आशीर्वाद लिया और अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा कर शांत भाव से उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए। इधर कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार हो पृथ्वी का चक्कर लगाकर लौटे तो श्री गणेश को स्थान पर खड़ा पाकर कार्तिकेय ने कहा कि यह प्रतियोगिता मैंने जीत ली है क्योंकि गणेश जी अभी तक यहीं खड़े हैं। तब शिव जी ने कहा- पुत्र गणेश आपसे पहले ब्रह्मांड की परिक्रमा कर चुका है, वही प्रथम पूजा का अधिकारी होगा। कार्तिकेय गुस्सा होकर बोले, पिताजी, यह कैसे संभव है? गणेश अपने वाहन चूहे पर बैठकर कई वर्षों में भी पूरी परिक्रमा नहीं कर सकता है! पिताजी आप मजाक क्यों कर रहे हैं ? तब भगवान भोले नाथ बोले- नहीं बेटे! गणेश अपने माता-पिता की परिक्रमा करके यह प्रमाणित कर चुका है कि इस ब्रह्माड में मात-पिता से बढ़कर कुछ नही है। गणेश ने संपूर्ण जगत् को इस बात का ज्ञान कराया है इसलिए इस दुनिया में सबसे पहले गणेश को ही पूजा जाएगा। इस तरह गणेश प्रथम पूजनीय बन गए।
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