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अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक और भाग्यांक क्या होते हैं

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अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक और भाग्यांक क्या होते हैं। ज्योतिषशास्त्र की तरह ही अंक शास्त्र का भी महत्व ज्यादा होता है| अंक अपने सभी रुपो में हमारी जिन्दगी से एक या अनेक तरह से जुड़े हुए है | हमारे जन्म दिनांक में अंक है, हमारे नाम में अंक छिपा हुआ है और हमारे काम या व्यवसाय के नाम में अंक छुपा है | जब किसी माह के किसी दिन कोई घटना घटती है तो वह एक अंक में सिमट जाती है | इसी तरीके से हर साल का एक अंक होता है | अंक शास्त्र ज्योतिष विज्ञान का एक प्रकार है जिसमे अंको के विश्लेषण द्वारा भविष्य कथन किया जाता है | अंक शास्त्र के अनुसार लोगो के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में उनसे संबधित संख्या का विश्लेषण कर बहुत कुछ बताया जा सकता है | कई प्रकार के अंक और उनकी गणनाओं की तकनिक ने अंक शास्त्र एक नये विशाल क्षेत्र तक पहुँचाया है | अंक शास्त्र में कई प्रकार के अंक होते है जैसे जन्मांक, भाग्यांक, नामांक आदि | इसमें यह भी सिध्दान्त है कि जन्मांक में किसी अंक कि उपस्थिति और अनुपस्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति का व्यवहार कैसा होगा | अपने व्यक्तित्व को पहचानने के लिए इस का उपयोग किया जाता है | मूलांक - अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है। (उदा. - यदि किसी का जन्म 16 तारीख को हुआ है तो उसका मुलांक 1 + 6 = 7 साथ होगा.) भाग्यांक - दिन : महीना : साल के कुल योग को भाग्यांक कहते है। ( उदा - यदि किसी की जन्म तारीख - 16 / 12 /1991 है तो उसका भाग्यांक - 1 + 6 + 1 + 2 + 1 + 9 + 9 + 1 = 30 3 + 0 = 3 तीन होगा ) मूलांक और भाग्यांक के अनुसार काम करने से जीवन में रुके हुए काम पुरे होते चले जाते है। अंकज्योतिष में नौ ग्रहों के अंक - सूर्य, चन्द्र, गुरू, राहु, बुध, शुक्र, केतु , शनि और मंगल इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, हर ग्रह का किसी एक अंक पर विशेष प्रभाव होता है। अंक और उसके स्वामी :- 1 - सूर्य 2 - चंद्र 3 - गुरु 4 - राहु 5 - बुध 6 - शुक्र 7 - केतु 8 - शनि 9 - मंगल 10, 19, 28 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 1 11, 20, 29 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 2 3, 12, 21, 30 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 3 4, 13, 22, 31 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 4 5, 14, 23 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 5 6, 15, 24 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 6 7, 16, 25 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 7 8, 17, 26 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 8 9, 18, 27 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 9 आगे की लेखों में 1 से 9 तक मुलांक के जातकों के विषय में विस्तार से जानकारी बतायी जायेगी।

References

अंक ज्योतिष
posted Jan 20 by Rakesh Periwal

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*नवग्रहों से संबंधित उपाये आधार व्याख्या*: * प्रथम भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु को गले में धारण करना चाहिए * द्वितीय भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु को देवी - देवता को अर्पित करना चाहिए * तृतीय भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु को बाजू / हाथ में धारण करना चाहिए * चतुर्थ भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु को जल प्रवाह करें या पर्स में रखें * पंचम भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु को शिक्षा संस्थान में पहुंचाए या विद्यार्थी को दान करें * छ्ठे भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु को गड्ढे / कुएं / बरसाती नाले में गिराएं * सप्तम भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु को मिट्टी में दबाएं * अष्टम भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु को श्मशान / खाली जमीन में दबाएं * नवम भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु को संगत में बांटे * दसम भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु का सरकारी जमीन पर उपाये करें या सरकारी कर्मचारी को दान * एकादश भाव में विराजमान ग्रह के लिए ग्रह से संबंधित रंग का रुमाल उपयोग में लाएं । * द्वादश भाव में ग्रह का प्रभाव पहुचांने के लिए संबंधित वस्तु को छत पर रखें #कारक_ग्रह_को_धारण_करने_का_उपाये : किसी भी कारण वश किसी भाव से संबंधित फल प्राप्ति में बाधा का अनुभव हो तो उस भाव के कारक ग्रह के उपाये के तौर पर जातक को ग्रह से संबंधित जड़ी / ओषधि जल में मिला कर स्नान ज़रूर करना चाहिए, जैसे कि गुरु ग्रह 2, 5, 9, 12वे भाव का कारक ग्रह है तो जब भी इन में से किसी भाव से फल प्राप्ति में बाधा का अनुभव हो तो बाकी उपायों के साथ जातक को जल में हल्दी मिला कर स्नान करना चाहिए , प्रथम भाव के लिए बेल के पत्ते जल में मिला कर स्नान करें, तृतीय भाव के लिए नीम के पत्ते , चतुर्थ भाव के लिए जल में दूध मिला कर , छ्ठे भाव के लिए दूर्वा जल में मिला कर, सप्तम भाव के लिए हरी इलायची पानी में उबाल कर उस पानी को स्नान करने वाले जल में मिला दें , अष्टम और दसम भाव के लिए स्नान से पहले सरसो का तेल से मालिश करें , एकादश भाव के लिए जल में काले तिल मिला कर स्नान करें , यह उपाये लगातार 43 दिन करना चाहिए । #काल_पुरूष_कुण्डली_अनुसार_नीच_ग्रह_के_दान_का_उपाये : जैसे कि किसी की जन्म कुण्डली में चतुर्थ भाव में पापी ग्रह होकर सुख स्थान को खराब कर रहे हो तो , कालपुरुष कुण्डली अनुसार चतुर्थ भाव में मंगल नीच का होता है, इस लिए ऐसे जातक को सुख स्थान की शूभता के लिए मंगल से संबंधित दान करने चाहिए , इसी तरह लग्न भाव में शनि नीच का होता है तो लग्न भाव की शूभता के लिए शनि के दान किये जा सकते हैं । #एक_ही_भाव_में_दो_शत्रु_ग्रह_हो : जैसे कि जन्म कुण्डली के किसी भी भाव में सूर्य शनि की युति हो तो इस स्थिति में उस भाव की शूभता के लिए बुध ग्रह को उस भाव में स्थापित करना चाहिए क्योंकि बुध ग्रह दोनो का मित्र ग्रह है इस तरह बुध के उपाये से सूर्य शनि का झगड़ा खत्म हो जाएगा और भाव से शुभ फल आने लगेंगे ।
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*ज्योतिष अनुसार राहु के फल* राहू कूटनीति का सबसे बड़ा ग्रह है राहू संघर्ष के बाद सफलता दिलाता है यह कई महापुरुषों की कुंडलियो से स्पष्ट है राहू का 12 वे घर में बैठना बड़ा अशुभ होता है क्योकि यह जेल और बंधन का मालिक है 12 वे घर में बैठकर अपनी दशा, अंतरदशा में या तो पागलखाने में या अस्पताल और जेल में जरूर भेजता है। किसी भी कुंडली में राहू जिस घर में बैठता है 19 वे वर्ष में उसका फल दे कर 20 वे वर्ष में नष्ट कर देता है राहू की महादशा 18 वर्ष की होती है। राहू चन्द्र जब भी एक साथ किसी भी भाव में बैठे हुए हो तो चिंता का योग बनाते है। राहू की अपनी कोई राशी नहीं है वह जिस ग्रह के साथ बैठता है वहा तीन कार्य करता है। 1
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*ज्योतिष अनुसार शुभ अशुभ भावो के प्रकार :* #कुण्डली_के_त्रिकोण_भाव : जन्म कुण्डली के 1, 5, 9वे भावो को त्रिकोण भाव कहा जाता है । इन भावो के स्वामी ग्रह की दशा हमेशा ही शुभ फल देते हुए व्यक्ति की सामाजिक पद प्रतिष्ठा में वृद्धि करती है, जातक को नई चीजें सीख कर आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त होते हैं , एक तरह से जातक का personality development इन भाव से संबंधित दशा में होता है ऐसा कह सकते हैं । हालांकि लग्न की स्थिति के आधार पर अगर त्रिकोण भाव का स्वामी ग्रह 6, 8, 12वे का भी स्वामी हो तो शुभ प्रभाव में कमी आती है । #कुण्डली_के_केंद्र_भाव : जन्म कुण्डली के 1, 4, 7, 10वे भावो को केंद्र भाव कहा जाता है । इन भावो के स्वामी ग्रहो की दशा भी शुभ फल देती है, शुभ फल देते हुए इन भावो के स्वामी ग्रह भौतिक सुखों की वृद्धि करते हैं, रिश्तो का सुख देते हैं , कार्यस्थल का विस्तार करते हैं । #कुण्डली_के_पनफर_भाव : जन्म कुण्डली के 2, 5, 8, 11वे भावो को पनफर भाव कहा जाता है । यह भाव द्वितीय भाव से केंद्र स्थान हैं , इस लिए द्वितीय भाव से संबंधित विशेष सुख दुख जैसे कि आर्थिक स्थिति में उतार चढ़ाव , व्यवसाय में सफलता, धन संपदा के सुख, परिवारजनों व अन्य रिश्तों के सुख में इन भावो की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । इन भावो के स्वामी ग्रह अपने नैसर्गिक स्वभाव अनुसार फल देते हैं जैसे कि क्रूर और पापी ग्रह ( सूर्य, मंगल, शनि ) इन भावो के स्वामी हो तो अशुभता देते हुए घर परिवार के सुख धन संपदा के सुख खराब करते हैं , लेकिन यदि स्वामी ग्रह शुभ ग्रह ( चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र ) हो तो घर परिवार का अच्छा सुख और व्यवसाय में सफलता देते हैं । #कुण्डली_के_अपोकलिमस_भाव : जन्म कुण्डली के 3, 6, 9, 12वे भावो को अपोकलिमस भाव कहा जाता है । यह भाव तृतीय से केंद्र स्थान हैं , इस लिए यह बल, पराकर्म और साहस की वृद्धि को दर्शाते हैं । इन भावो के स्वामी ग्रह क्रूर और पापी ग्रह होना शुभता देता है, जबकि शुभ ग्रह भावो का स्वामित्व होना अपनी दशा के दौरान हानि देते हैं । #कुण्डली_के_उपचय_भाव : जन्म कुण्डली के 3, 6, 10, 11वे भावो को उपचय भाव कहा जाता है । उपचय का मतलब है गुजरते समय के साथ उत्थान होना , जैसे कि बढ़ती उम्र के साथ 3rd भाव यानी साहस बढ़ता है, 6th भाव से बढ़ती उम्र के साथ शत्रु बढ़ते हैं, बढ़ती उम्र के साथ अनुभव आने से दसम भाव और एकादश भावो की वृद्धि से आय और सामाजिक दायरा बढ़ते हैं । #कुण्डली_के_त्रिक_भाव : जन्म कुण्डली के 6, 8, 12वे भावो को त्रिक स्थान कहा जाता है । इन भावो से संबंधित ग्रह अपनी दशा के दौरान अशुभ फल जैसे स्वास्थ्य कमज़ोरी, शत्रु बाधा, चरित्र पर लांछन और मानहानि जैसे योग देता है । यह फल ग्रह के नैसर्गिक स्वभाव अनुसार होते हैं जैसे कि मंगल से चोट और दुर्घटना, बुध से गलत फैसलों से नुकसान, गुरु से बड़े अधिकारी लोगो की वजह से समस्या, शुक्र से हार्मोन्स से संबंधित समस्या, शनि से कानूनी मामलों से परेशानी । Astrology can Help you as navigation for future path of life. We had started Online Consultation Just Download App and Register You will get free Horoscope and You will get 100 Rs gift wallet money for call Now .My GiftCode is : FS16 Use my gift code and talk with me via app using call now button For Astro, Please visit:https://www.futurestudyonline.com/astro-details/16 Expertise :Counselling Therapist , Lal Kitab Expert , Meditation , Numerology , Palmistry , Reki Healing , Vastu , Vedic Astrology , Yoga and Spiritual Healer , For Mobile App, Please visit: https://goo.gl/YzQXe1
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यदि सूर्य कमजोर है तो नित्य सूर्य उपासना सूर्य को अर्ध्य देने से हरिवंशपुराण पढ़ने या सुनने से रविवार का व्रत करने से और सूर्यदेव के नित्य दर्शन करने से सूर्यदेवता प्रसन्न व बली होते हैं। यदि प्रतिदिन ऐसा नहीं कर सकते तो रविवार को सूर्य उपासना करें। शास्त्रों में बताए गए विशेष मंत्र का स्मरण सफलता के साथ व्यक्ति को यशस्वी भी बनाता है। इस उपासना से त्वचा संबंधी रोगों का अंत भी होता है। किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए प्रयास कर रहे व्यक्ति के लिए सूर्य मंत्र का स्मरण कामना सिद्धि प्रदान कर सकता है। रविवार को प्रातः स्नान के बाद यथा संभव लाल कपड़े पहनें तथा सूर्य देव का ध्यान कर पवित्र जल में कुमकुम मिलाकर अर्घ्य दें। पूजा घर में नवग्रह के चित्र अथवा पारद शिवलिंग पर घी का दीपक जलाएं। चमेली के सुगंध वाली अगरबत्ती जलाएं। सूर्य देव और शिवलिंग पर लाल चंदन चढ़ाएं। लाल कनेर के फूल अर्पित करें। सूर्यदेव को लड्डू या गुड़ का भोग लगाएं। पूर्व दिशा की ओर मुख कर किसी लाल आसन पर बैठकर इस मंत्र का लाल चंदन की माला से जाप करें। मंत्रः - ह्रीं सूर्याय सर्वभूतानां शिवायार्तिहराय च। नमः पद्मप्रबोधाय नमो वेदादिमूर्तये।।
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