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हर बाधा से मुक्ति दिलाते हैं श्रीराम भक्त हनुमान जी

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मंगलवार का दिन हनुमान जी की आराधना का विशेष दिन माना जाता है। हनुमान जी की उपासना करने से जीवन के सारे कष्ट मिट जाते हैं। हनुमान जी ऐसे देवता हैं जो थोड़ी-सी प्रार्थना से भी अतिशीघ्र प्रसन्न होकर मनुष्य को जीवन में सुखी बना देते हैं। श्रीराम भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। पुराणों के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मंगलवार, स्वाति नक्षत्र एवं मेष लग्न में स्वयं भगवान शिवजी ने माता अंजना के गर्भ से रुद्रावतार लिया था। इस दिन सुंदरकांड, हनुमान चालीसा, हनुमत अष्टक व बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। इस दिन हनुमान जी की आराधना करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार माना जाता है कि मंगलवार के दिन ही हनुमान जी का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन विशेष उपाय करने से हनुमान जी शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं। हनुमान जी शिवजी के ही अंशावतार हैं। इसी वजह से हनुमान जी की पूजा से शिवजी, महालक्ष्मी और सभी देवी-देवता भी प्रसन्न होते हैं।

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हर बाधा से मुक्ति दिलाते हैं श्रीराम भक्त हनुमान जी
posted Jan 21, 2020 by Deepika Maheshwary

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ग्रह बाधा होने से पूर्व मिलते हैं ये संकेत: ग्रह अपना शुभाशुभ प्रभाव गोचर एवं दशा-अन्तर्दशा-प्रत्यन्तर्दशा में देते हैं । जिस ग्रह की दशा के प्रभाव में हम होते हैं, उसकी स्थिति के अनुसार शुभाशुभ फल हमें मिलता है । जब भी कोई ग्रह अपना शुभ या अशुभ फल प्रबल रुप में देने वाला होता है, तो वह कुछ संकेत पहले से ही देने लगता है ।इनके उपाय करके बढ़ी समस्याओं से बचा जा सकता है | ऐसे ही कुछ पूर्व संकेतों का विवरण यहाँ दिया है – सूर्य के अशुभ होने के पूर्व संकेत – सूर्य अशुभ फल देने वाला हो, तो घर में रोशनी देने वाली वस्तुएँ नष्ट होंगी या प्रकाश का स्रोत बंद होगा । जैसे – जलते हुए बल्ब का फ्यूज होना, तांबे की वस्तु खोना । किसी ऐसे स्थान पर स्थित रोशनदान का बन्द होना, जिससे सूर्योदय से दोपहर तक सूर्य का प्रकाश प्रवेश करता हो । ऐसे रोशनदान के बन्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं । जैसे – अनजाने में उसमें कोई सामान भर देना या किसी पक्षी के घोंसला बना लेने के कारण उसका बन्द हो जाना आदि । सूर्य के कारकत्व से जुड़े विषयों के बारे में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है । सूर्य जन्म-कुण्डली में जिस भाव में होता है, उस भाव से जुड़े फलों की हानि करता है । यदि सूर्य पंचमेश, नवमेश हो तो पुत्र एवं पिता को कष्ट देता है । सूर्य लग्नेश हो, तो जातक को सिरदर्द, ज्वर एवं पित्त रोगों से पीड़ा मिलती है । मान-प्रतिष्ठा की हानि का सामना करना पड़ता है । किसी अधिकारी वर्ग से तनाव, राज्य-पक्ष से परेशानी । यदि न्यायालय में विवाद चल रहा हो, तो प्रतिकूल परिणाम । शरीर के जोड़ों में अकड़न तथा दर्द । किसी कारण से फसल का सूख जाना । व्यक्ति के मुँह में अक्सर थूक आने लगता है तथा उसे बार-बार थूकना पड़ता है । सिर किसी वस्तु से टकरा जाता है । तेज धूप में चलना या खड़े रहना पड़ता है । चन्द्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत जातक की कोई चाँदी की अंगुठी या अन्य आभूषण खो जाता है या जातक मोती पहने हो, तो खो जाता है । जातक के पास एकदम सफेद तथा सुन्दर वस्त्र हो वह अचानक फट जाता है या खो जाता है या उस पर कोई गहरा धब्बा लगने से उसकी शोभा चली जाती है । व्यक्ति के घर में पानी की टंकी लीक होने लगती है या नल आदि जल स्रोत के खराब होने पर वहाँ से पानी व्यर्थ बहने लगता है । पानी का घड़ा अचानक टूट जाता है । घर में कहीं न कहीं व्यर्थ जल एकत्रित हो जाता है तथा दुर्गन्ध देने लगता है । उक्त संकेतों से निम्नलिखित विषयों में अशुभ फल दे सकते हैं -> माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है या अन्य किसी प्रकार से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है । नवजात कन्या संतान को किसी प्रकार से पीड़ा हो सकती है । मानसिक रुप से जातक बहुत परेशानी का अनुभव करता है । किसी महिला से वाद-विवाद हो सकता है । जल से जुड़े रोग एवं कफ रोगों से पीड़ा हो सकती है । जैसे – जलोदर, जुकाम, खाँसी, नजला, हेजा आदि । प्रेम-प्रसंग में भावनात्मक आघात लगता है । समाज में अपयश का सामना करना पड़ता है । मन में बहुत अशान्ति होती है । घर का पालतु पशु मर सकता है । घर में सफेद रंग वाली खाने-पीने की वस्तुओं की कमी हो जाती है या उनका नुकसान होता है । जैसे – दूध का उफन जाना । मानसिक रुप से असामान्य स्थिति हो जाती है मंगल के अशुभ होने के पूर्व संकेत भूमि का कोई भाग या सम्पत्ति का कोई भाग टूट-फूट जाता है । घर के किसी कोने में या स्थान में आग लग जाती है । यह छोटे स्तर पर ही होती है । किसी लाल रंग की वस्तु या अन्य किसी प्रकार से मंगल के कारकत्त्व वाली वस्तु खो जाती है या नष्ट हो जाती है । घर के किसी भाग का या ईंट का टूट जाना । हवन की अग्नि का अचानक बन्द हो जाना । अग्नि जलाने के अनेक प्रयास करने पर भी अग्नि का प्रज्वलित न होना या अचानक जलती हुई अग्नि का बन्द हो जाना । वात-जन्य विकार अकारण ही शरीर में प्रकट होने लगना । किसी प्रकार से छोटी-मोटी दुर्घटना हो सकती है । बुध के अशुभ होने के पूर्व संकेत व्यक्ति की विवेक शक्ति नष्ट हो जाती है अर्थात् वह अच्छे-बुरे का निर्णय करने में असमर्थ रहता है । सूँघने की शक्ति कम हो जाती है । काम-भावना कम हो जाती है । त्वचा के संक्रमण रोग उत्पन्न होते हैं । पुस्तकें, परीक्षा ले कारण धन का अपव्यय होता है । शिक्षा में शिथिलता आती है । गुरु के अशुभ होने के पूर्व संकेत अच्छे कार्य के बाद भी अपयश मिलता है । किसी भी प्रकार का आभूषण खो जाता है । व्यक्ति के द्वारा पूज्य व्यक्ति या धार्मिक क्रियाओं का अनजाने में ही अपमान हो जाता है या कोई धर्म ग्रन्थ नष्ट होता है । सिर के बाल कम होने लगते हैं अर्थात् व्यक्ति गंजा होने लगता है । दिया हुआ वचन पूरा नहीं होता है तथा असत्य बोलना पड़ता है । शुक्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत किसी प्रकार के त्वचा सम्बन्धी रोग जैसे – दाद, खुजली आदि उत्पन्न होते हैं । स्वप्नदोष, धातुक्षीणता आदि रोग प्रकट होने लगते हैं । कामुक विचार हो जाते हैं । किसी महिला से विवाद होता है । हाथ या पैर का अंगुठा सुन्न या निष्क्रिय होने लगता है । शनि के अशुभ होने के पूर्व संकेत दिन में नींद सताने लगती है । अकस्मात् ही किसी अपाहिज या अत्यन्त निर्धन और गन्दे व्यक्ति से वाद-विवाद हो जाता है । मकान का कोई हिस्सा गिर जाता है । लोहे से चोट आदि का आघात लगता है । पालतू काला जानवर जैसे- काला कुत्ता, काली गाय, काली भैंस, काली बकरी या काला मुर्गा आदि मर जाता है । निम्न-स्तरीय कार्य करने वाले व्यक्ति से झगड़ा या तनाव होता है । व्यक्ति के हाथ से तेल फैल जाता है । व्यक्ति के दाढ़ी-मूँछ एवं बाल बड़े हो जाते हैं । कपड़ों पर कोई गन्दा पदार्थ गिरता है या धब्बा लगता है या साफ-सुथरे कपड़े पहनने की जगह गन्दे वस्त्र पहनने की स्थिति बनती है । अँधेरे, गन्दे एवं घुटन भरी जगह में जाने का अवसर मिलता है । राहु के अशुभ होने के पूर्व संकेत -> मरा हुआ सर्प या छिपकली दिखाई देती है । धुएँ में जाने या उससे गुजरने का अवसर मिलता है या व्यक्ति के पास ऐसे अनेक लोग एकत्रित हो जाते हैं, जो कि निरन्तर धूम्रपान करते हैं । किसी नदी या पवित्र कुण्ड के समीप जाकर भी व्यक्ति स्नान नहीं करता। पाला हुआ जानवर खो जाता है या मर जाता है । याददाश्त कमजोर होने लगती है । अकारण ही अनेक व्यक्ति आपके विरोध में खड़े होने लगते हैं । हाथ के नाखुन विकृत होने लगते हैं । मरे हुए पक्षी देखने को मिलते हैं । बँधी हुई रस्सी टूट जाती है । मार्ग भटकने की स्थिति भी सामने आती है । व्यक्ति से कोई आवश्यक चीज खो जाती है । केतु के अशुभ होने के पूर्व संकेत > मुँह से अनायास ही अपशब्द निकल जाते हैं । कोई मरणासन्न या पागल कुत्ता दिखायी देता है । घर में आकर कोई पक्षी प्राण-त्याग देता है । अचानक अच्छी या बुरी खबरें सुनने को मिलती है । हड्डियों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । पैर का नाखून टूटता या खराब होने लगता है । किसी स्थान पर गिरने एवं फिसलने की स्थिति बनती है ।भ्रम होने के कारण व्यक्ति से हास्यास्पद गलतियाँ होती है।
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ज्योतिष के अनुसार शनिदेव कब और कैसे प्रसन्न होते हैं, इसके कई कारण है। शनिदेव यदि प्रसन्न हैं तो ऐसे जातक हर क्षेत्र में प्रगति करते है। उसके जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा और कष्ट नहीं होता है। यदि शनिदेव आप पर प्रसन्न है या शनि का अच्छा प्रभाव आप पर पड़ रहा है तो बाल और नाखून मजबूत रहते हैं। वक्त के पहले आंखें कमजोर नहीं होती है। यदि आप न्यायप्रीय हैं और आपको हमेशा सच बोलने वाले लोग पसंद हैं तो निश्चित ही आप पर शनिदेव की कृपा है। यदि आपको अचानक ही धन की प्राप्ति होने लगे और समाज में मान-सम्मान मिलने लगे तो माना जाएगा कि शनिदेव की आप पर कृपा है और कुंडली में भी शनि की शुभ स्थिति है। कहते हैं कि यदि आपके घर के बाहर या पश्चिम दिशा में शमी का वृक्ष लगा है तो शनिदेव की आप पर साक्षात कृपा बनी रहेगी। यदि आप नियमित हनुमान चालीसा पढ़ते हैं और उन्हीं की भक्ति करते हैं तो निश्चि्त रूप से आप पर शनिदेव प्रसन्न ही रहेंगे। यदि आप शराब नहीं पीते हैं, ब्याज का धंधा नहीं करते हैं, झूठी गवाही नहीं देते हैं, गृहकलह नहीं करते हैं और पराई स्त्री पर नज़र नहीं रखते हैं तो यह मान लें कि शनिदेव की आप पर कृपा है। यदि आप पर चाचा-चाची, माता-पिता, मामा-मामी, सेवक, सफाईकर्मी, अपंग लोग, कमजोर और अंधे लोग प्रसन्न हैं तो समझो कि शनिदेव आप पर प्रसन्न हैं। ऐसे लोगों को मजदूर, कमजोर और गरीब लोगों का बहुत साथ मिलता है। यदि शनिवार को आपके जूते या चप्पल चोरी हो जाते हैं तो मान लीजिए कि यह शनिदेव की शुभता का संकेत हैं।
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मंगलवार हिंदू धर्म में हनुमान जी का दिन होता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक हनुमान जी उन देवताओं में शुमार होते हैं जो भक्तों पर बहुत जल्दी कृपा बरसाते हैं। हालांकि हनुमान जी का दिन शनिवार को भी माना जाता है लेकिन सबसे ज्यादा फलदायक अराधना का दिन मंगलवार ही होता है। मंगलवार को हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए लोग उनकी प्रिय वस्तुएं चढ़ाते हैं जैसे सिंदूर, चमेली का तेल और चोला आदि चढ़ाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन चीजों को मंगलवार को चढ़ाने से हनुमान जी प्रसन्न होकर भक्तों के संकट दूर करते हैं और सभी मनोरथ को पूर्ण करते हैं। हनुमान जी पर सिंदूरी चोला क्यों चढ़ाते हैं मंगलवार या शनिवार को दिन हनुमान जी की प्रतिमा को चोला चढ़ाते हैं। हनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए मंगलवार को तथा शनि महाराज की साढ़े साती, अढैया, दशा, अंतरदशा में कष्ट कम करने के लिए शनिवार को चोला चढ़ाया जाता है। हनुमान जी की प्रतिमा को सिंदूर का चोला चढ़ाने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। हनुमान जी को सिंदूर लगाने से प्रतिमा का संरक्षण होता है। इससे प्रतिमा किसी प्रकार से खंडित नहीं होती और लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। साथ ही चोला चढ़ाने से प्रतिमा की सुंदरता बढ़ती है, हनुमानजी का प्रतिबिंब साफ-साफ दिखाई देता है। जिससे भक्तों की आस्था और अधिक बढ़ती है। चोला चढ़ाए जाने को लेकर एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसे पूरा चढ़ाया जाना चाहिए। यानी हनुमान जी की प्रतिमा उपर से लेकर नीचे तक पूरी तरह ढ़क जाएं। कैसे चढ़ाएं चोला -मंगलवार के दिन हनुमानजी को चोला चढाएं। -चोला चढ़ाने के लिए चमेली के तेल का उपयोग करें। - -चोला चढ़ाते समय एक दीपक हनुमानजी के सामने जलाकर रखें। दीपक में भी चमेली के तेल का ही उपयोग करें। -हनुमान की प्रतिमा पर सिंदूर का चोला चढ़ाने जा रहे हैं तो पहले उनकी प्रतिमा को जल से स्नान कराएं। -सभी पूजा सामग्री अर्पण करें। -इसके बाद मंत्र का उच्चारण करते हुए चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर या सीधे प्रतिमा पर हल्का सा देसी घी लगाकर उस पर सिंदूर का चोला चढ़ा दें। इस प्रक्रिया में कुछ बातें समझने की हैं। पहली बात चोला चढ़ाने में ध्यान रखने की है। अछूते (शुद्ध) वस्त्र धारण करें। दूसरी नख से शिख तक (सृष्टि क्रम) तथा शिख से नख तक संहार क्रम होता है। सृष्टि क्रम यानी पैरों से मस्तक तक चढ़ाने में देवता सौम्य रहते हैं। संहार क्रम से चढ़ाने में देवता उग्र हो जाते हैं। यह चीज श्रीयंत्र साधना में सरलता से समझी जा सकती है। यदि कोई विशेष कामना पूर्ति हो तो पहले संहार क्रम से, जब तक कि कामना पूर्ण न हो जाए, पश्चात सृष्टि क्रम से चोला चढ़ाया जा सकता है। -चोले में चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर प्रतिमा पर लेपन कर अच्‍छी तरह मलकर, रगड़कर चांदी या सोने का वर्क चढ़ाते हैं। -चोला चढ़ाने के दिन सात्विक जीवन, मानसिक एवं शारीरिक ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है। -चोला कभी भी एक या दो नहीं चढ़ाया जाता। -चोला चढ़ाने के पहले संकल्प करना चाहिए। फिर 5, 11, 21, 51 या फिर 101 चोला (लगातार) चढ़ाना चाहिए। -ऐसा कहा जाता है कि 11 या 21 चोला चढ़ाने से हनुमान जी सभी मनोरथों को सिद्ध करते हैं। -चोला चढ़ाने के दिन बेहतर होगा कि उस मंदिर का सिंदूर तिलक आप ही बनाएं। फिर इसके बाद चमेली के तेल के कुछ छीटें हनुमान जी की प्रतिमा पर लगा दें और उन्हें जनेऊ पहनाएं। यह काम करने के बाद हनुमान जी को चने, गुड़ और मिठाई आदि का भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद हनुमान जी को पान और सुपारी अर्पित करें। फिर धूप, दीप दिखाने के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार हनुमान जी को दक्षिणा भेंट करें। अंत में हनुमान चालीसा का पाठ और आरती करें और फिर प्रतिमा से सिंदूर लेकर अपने माथे पर लगाएं और अपनी मनोकामना कहें।
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ग्रह योग जो छप्पर फाड़ के देते हैं धन यदि आप Rich बनने का सपना देखते हैं, तो अपनी जन्म कुण्डली में इन ग्रह योगों को देखकर उसी अनुसार अपने प्रयासों को गति दें। १ यदि लग्र का स्वामी दसवें भाव में आ जाता है तब जातक अपने माता-पिता से भी अधिक धनी होता है। २ मेष या कर्क राशि में स्थित बुध व्यक्ति को धनवान बनाता है। ३ जब गुरु नवे और ग्यारहवें और सूर्य पांचवे भाव में बैठा हो तब व्यक्ति धनवान होता है। ४ शनि ग्रह को छोड़कर जब दूसरे और नवे भाव के स्वामी एक दूसरे के घर में बैठे होते हैं तब व्यक्ति को धनवान बना देते हैं। ५ जब चंद्रमा और गुरु या चंद्रमा और शुक्र पांचवे भाव में बैठ जाए तो व्यक्ति को अमीर बना देते हैं। ६ दूसरे भाव का स्वामी यदि ८ वें भाव में चला जाए तो व्यक्ति को स्वयं के परिश्रम और प्रयासों से धन पाता है। ७ यदि दसवें भाव का स्वामी लग्र में आ जाए तो जातक धनवान होता है। ८ सूर्य का छठे और ग्यारहवें भाव में होने पर व्यक्ति अपार धन पाता है। विशेषकर जब सूर्य और राहू के ग्रहयोग बने। ९ छठे, आठवे और बारहवें भाव के स्वामी यदि छठे, आठवे, बारहवें या ग्यारहवे भाव में चले जाए तो व्यक्ति को अचानक धनपति बन जाता है। १० यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हों और ग्यारहवें भाव में शनि या मंगल या राहू बैठा हो तो व्यक्ति खेल, जुंए, दलाली या वकालात आदि के द्वारा धन पाता है। ११ मंगल चौथे भाव, सूर्य पांचवे भाव में और गुरु ग्यारहवे या पांचवे भाव में होने पर व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से, खेती से या भवन से आय प्राप्त होती है, जो निरंतर बढ़ती है। १२ गुरु जब कर्क, धनु या मीन राशि का और पांचवे भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति पुत्र और पुत्रियों के द्वारा धन लाभ पाता है। १३ राहू, शनि या मंगल और सूर्य ग्यारहवें भाव में हों तब व्यक्ति धीरे-धीरे धनपति हो जाता है। १४ बुध, शुक और शनि जिस भाव में एक साथ हो वह व्यक्ति को व्यापार में बहुत ऊंचाई देकर धनकुबेर बनाता है १५ दसवें भाव का स्वामी वृषभ राशि या तुला राशि में और शुक्र या सातवें भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति को विवाह के द्वारा और पत्नी की कमाई से बहुत धन लाभ होता है। १६ शनि जब तुला, मकर या कुंभ राशि में होता है, तब आंकिक योग्यता जैसे अकाउण्टेट, गणितज्ञ आदि बनकर धन अर्जित करता है। १७ बुध, शुक्र और गुरु किसी भी ग्रह में एक साथ हो तब व्यक्ति धार्मिक कार्यों द्वारा धनवान होता है। जिनमें पुरोहित, पंडित, ज्योतिष, प्रवचनकार और धर्म संस्था का प्रमुख बनकर धनवान हो जाता है। १८ कुण्डली के त्रिकोण घरों या चतुष्कोण घरों में यदि गुरु, शुक्र, चंद्र और बुध बैठे हो या फिर ३, ६ और ग्यारहवें भाव में सूर्य, राहू, शनि, मंगल आदि ग्रह बैठे हो तब व्यक्ति राहू या शनि या शुक या बुध की दशा में अपार धन प्राप्त करता है। १९ गुरु जब दसर्वे या ग्यारहवें भाव में और सूर्य और मंगल चौथे और पांचवे भाव में हो या ग्रह इसकी विपरीत स्थिति में हो व्यक्ति को प्रशासनिक क्षमताओं के द्वारा धन अर्जित करता है। २० यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हों और ग्यारहवें भाव में केतु को छोड़कर अन्य कोई ग्रह बैठा हो, तब व्यक्ति व्यापार-व्यवसार द्वारा अपार धन प्राप्त करता है। यदि केतु ग्यारहवें भाव में बैठा हो तब व्यक्ति विदेशी व्यापार से धन प्राप्त करता है।
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व्‍यापार में बार-बार असफलता मिलने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार मेहनत करने और अथक प्रयासों के बाद भी व्‍यापार में सफलता नहीं मिल पाती है या बनती हुई बात बिगड़ जाती है। अगर आप भी व्‍यापार में असफलता की समस्‍या से परेशान है या आप जो भी काम करते हैं उसमें आपको असफलता ही मिलती है तो आपकी इस समस्‍या का समाधान ज्‍योतिष/और वास्तु सम्मत् प्रयोगों द्वारा किया जा सकता है. आज आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिन्‍हें आप अपनी दुकान या ऑफिस में कर सकते हैं और अपने व्‍यापार में वृद्धि पा सकते हैं। ज्‍योतिष शास्‍त्र और वास्‍तु की सहायता से आप व्‍यापार या ऑफिस में कुछ विशेष नियम और उपाय अपनाकर अपने बिजनेस की दिशा और दशा दोनों को बेहतर कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं उन उपायों के बारे में जो आपके व्‍यापार में वृद्धि और सफलता प्रदान कर सकते हैं. वास्‍तु के नियमों के अनुसार व्‍यापारियों को अपने कार्यस्‍थल में दक्षिण और पश्चिम दिशा के कोण पर बैठना चाहिए। वास्‍तु के अनुसार यह कोण मालिक से संबंध रखता है। अगर आपने घर पर ही ऑफिस बना रखा है या आप घर से ही काम करते हैं तो अपने कार्यों के लिए घर की दक्षिण और पश्चिम दिशा को चुनें। व्‍यापारिक सौदे के लिए ये जगह उत्तम रहती है। व्‍यापारिक सफलता के लिए कंपनी या दुकान का नाम दक्षिण दिशा की दीवार पर लाल रंग के पेंट या स्‍टीकर से लिखवाएं। इससे व्‍यापार में लाभ मिलता है और आय में भी वृद्धि होती है। ऑ‍फिस की दीवार की ओर पीठ करके बैठना अशुभ माना जाता है। आपका ऐसा करना आपके ही काम को नुकसान पहुंचा सकता है। उत्तर पूर्व की ओर मुख करके बैठना ज्‍यादा शुभ रहता है। ऐसा करने से व्‍यापार की सारी परेशानियां और नुकसान दूर होता है और धन लाभ में वृद्धि होती है. अपने ऑ‍फिस या दुकान में बेकार की चीजों को इधर-उधर ना फेंके। वास्‍तु के अनुसार ऐसा करना नुकसान देता है। अपने कार्यस्‍थल में कैश बॉक्‍स या गल्‍ले को उत्तर की दिशा में रखें। अगर आप अपने व्‍यापार में तरक्‍की में पाना चाहते हैं तो अपने ऑफिस के ईशान कोण यानि उत्तर पूर्व की दिशा को खाली रखें। यहां पर किसी भी तरह का बेकार का सामान या कबाड़ ना रखें। ऑफिस में मंदिर भी ईशान कोण में ही रखें। जब भी रोज़ सुबह आप दुकान खोलें तो उस समय ‘ॐ महालक्ष्‍मयै च विद्महे विष्‍णुपत्‍नी, च धीमहि तन्‍नो लक्ष्‍मी प्रचोदयात्’ मंत्र का जाप अवशय करें. ऑफिस की पश्चिम या दक्षिण दिशा में सामान, अलमारी या फर्नीचर आदि रखें। अपनी दुकान या फैक्‍ट्री के आसपास पेड़-पौधे लगाएं। इससे काम में सकारात्‍मक ऊर्जा बनी रहती है.. ऑफिस के मालिक की कुर्सी के पीछे की दीवार मजबूत होनी चाहिए। इससे वहां काम करने वाले लोगों और मालिक में कभी भी आत्‍मविश्‍वास की कमी नहीं होती है। ऑफिस में जो व्‍यक्‍ति अकाउंट का काम संभालता हो उसे दक्षिण पूर्व दिशा में बैठना चाहिए। मार्केटिंग करने वाले लोगों के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा बेहतर रहती है.. अगर आपकी दूकान या आॅफिस किसी भी वेध दोष से ग्रसित हैं (मार्ग वेध/स्तंभ वेध/वृक्ष वेध या द्वार वेध) तो द्वार के ठीक ऊपर मध्य में पन्ना गणेश (मरकज) की स्थापना करवायें.. सभी वास्तुदोष समाप्त हो जायेंगे. अगर आप इन उपायों और वास्‍तु सुझावों का ध्‍यान रखते हैं तो आपके व्‍यापार की सभी समस्‍याएं दूर हो जाएंगी और व्‍यापार में वृद्धि भी होगी. ----------------------------------------------------------
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