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2020 गोचर फल ग्रहानुसार

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*फरवरी महीने के दौरान ग्रह गोचर और प्रभाव* : #शनि_ग्रह_उदय : भले ही शनि ग्रह 23 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश किये हैं लेकिन अभी तक सूर्य के प्रभाव से अस्त चल रहे हैं , जो कि 2 फरवरी को उदय होंगे और मकर राशि में रहते हुए अपना प्रभाव दिखाएंगे । शनि की साढ़ेसाती धनु, मकर और कुंभ राशि पर है और शनि की ढैय्या मिथुन और तुला राशि वालो पर है । शनि ग्रह का गोचर लग्न राशि से 3, 6, 10, 11वे भाव में शूभता देता है , जबकि लग्न राशि से 4, 8, 12वे भाव में शनि का गोचर कष्टकारी होता है । बाकी भावो में शनि का यह गोचर सामान्य फल देगा । जिनका देव लग्न ( मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन ) है वह शनि की शूभता के लिए शनिवार के दिन शनि से संबंधित चीज़े ( काला वस्त्र, सरसो का तेल, उड़द की दाल, लोहा , चमड़ा ) का दान गरीब ज़रूरतमंद को करें , जबकि दैत्य लग्न ( वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ ) वाले यही सब चीजें मंदिर में दें । #बुध_ग्रह_वक्री : 31 जनवरी से बुध ग्रह का गोचर कुंभ राशि में है जो कि 7 अप्रैल तक रहेगा । इसी दौरान 17 फरवरी से 10 मार्च के दरमियान बुध ग्रह वक्री रहेंगे । और 20 फरवरी से 6 मार्च के दरमियान बुध ग्रह अस्त रहेंगे । कुंभ राशि शनि की राशि है , शनि की राशि में बुध निष्फल होता है । इस लिए जन्म कुण्डली में बुध ग्रह अपनी राशि से संबंधित फल देने में असमर्थ होंगे । जबकि 17 फरवरी से 10 मार्च के दरमियान बुध के वक्री रहने से वित्तिय मामलों में समस्या होगी , खुद से लिये गए फैसलों में गलती होने से नुकसान होगा , मित्रो की वजह से समस्या होगी । इस लिए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य हो वह या तो 17 फरवरी से पहले करें या फिर 10 मार्च के बाद करें । जन्म कुण्डली के 1, 2, 3, 5, 6, 7, 9वे भाव में शूभता देता है । जबकि 4, 8, 10, 11, 12वे भाव में बुध ग्रह अशुभता देता है । #शुक्र_ग्रह_मीन_राशि_में : 3 फरवरी से 29 फरवरी के दरमियान शुक्र ग्रह का गोचर मीन राशि में होगा । मीन राशि शुक्र के लिए उच्च राशि है । उच्च राशि में विराजमान ग्रह शूभता देते हैं । शुक्र के उच्च राशि में आने से कारक विषय जैसे कि प्रेम संबंध अच्छे होंगे, व्यवसायक साँझीदारी में लाभ होगा, जो लोग वस्त्र, डिजाइनिंग, टेक्सटाइल , पार्लर जैसे विषयों से जुड़े हैं उनके लिए यह समय अच्छा लाभ देने वाला रहेगा । जन्म कुण्डली में जिन भी भावो का स्वामी ग्रह शुक्र होगा उन से संबंधित शुभ फल की प्राप्ति होगी । जन्म कुण्डली के 2, 4, 7, 8, 11, 12वे भाव में शुक्र शूभता देता है । #मंगल_ग्रह_राशि_परिवर्तन : 8 फरवरी से 22 मार्च के दरमियान मंगल ग्रह का गोचर धनु राशि में रहेगा । वर्तमान समय में वृश्चिक राशि में गोचर कर रहे मंगल ग्रह 8 फरवरी को धनु राशि में आएंगे, धनु राशि मंगल के लिए मित्र राशि है , मित्र राशि में विराजमान ग्रह शूभता देते हैं । जन्म कुण्डली के 3, 6, 10, 11वे भाव में मंगल ग्रह शुभता देता है । जबकि 2, 4, 7, 8, 12वे भाव में मंगल का गोचर कष्टकारी होता है , बाकी भावो में मंगल का गोचर सामान्य फल देता है । मंगल ग्रह की शूभता के लिए पके हुए भोजन का दान मंगलवार के दिन अस्पताल में करें । #सूर्य_ग्रह_राशि_परिवर्तन : 13 फरवरी से 14 मार्च के दरमियान सूर्य ग्रह का गोचर कुंभ राशि में रहेगा । कुंभ राशि शनि की राशि है , शनि की राशि में कोई भी ग्रह निष्फल होता है । इस लिए यहां गोचर के दौरान सूर्य अपने कारक विषयो और भाव से संबंधित शुभ फल देने में असमर्थ रहेगा । जन्म कुण्डली के 2, 4, 7, 8, 12वे भाव में सूर्य ग्रह कष्टकारी होता है , जबकि 3, 6, 10, 11वे भाव शूभता देता है और बाकी भावो में सामान्य फल देता है । चतुर्थ भाव में सूर्य का गोचर रोग , अष्टम भाव में सूर्य का गोचर झगड़ा और अवसाद , 12वे भाव में सूर्य का गोचर मानहानि देता है । सूर्य की शूभता के लिए रविवार के दिन संतरे का दान गरीब ज़रूरतमंद को करें । #पूर्णिमा_तिथि : 9 फरवरी दिन रविवार को माघ महीने की पूर्णिमा तिथि रहेगी । माघ पूर्णिमा पर किए गए दान-धर्म और स्नान का विशेष महत्व होता है। पंचांग के मुताबिक ग्यारहवें महीने यानी माघ में स्नान, दान, धर्म-कर्म का विशेष महत्व है। जब कर्क राशि में चंद्रमा और मकर राशि में सूर्य का प्रवेश होता है तब माघ पूर्णिमा का योग बनता है। इस योग को पुण्य योग भी कहा जाता है। इस दिन स्नान के करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि माघी पूर्णिमा पर खुद भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। इस दिन भैरव जयंती भी मनाई जाती है। पूरे महीने स्नान-दान नहीं करने की स्थिति में केवल माघी पूर्णिमा के दिन तीर्थ में स्नान किया जाए तो संपूर्ण माघ मास के स्नान का पूर्ण फल मिलता है। माघ स्नान वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। माघ में हेमंत ऋतु खत्म होने की ओर रहती है तथा इसके साथ ही शिशिर ऋतु की शुरुआत होती है। ऋतु के बदलाव का स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर नहीं पड़े इसलिए प्रतिदिन सुबह स्नान करने से शरीर को मजबूती मिलती है। #अमावस्या_तिथि : 23 फरवरी दिन रविवार को फाल्गुन महीने की अमावस्या तिथि रहेगी । इस दिन का भारतीय जनजीवन में अत्यधिक महत्व हैं। इस दिन नदी स्नान और तीर्थक्षेत्र में स्नान-दान का विशेष महत्व है। इस दिन समस्त सुखों की प्राप्ति के लिए कुछ खास उपाय किए जाते हैं। अक्सर यह भी कहा जाता है कि पितृ दोष के लिए अमावस्या पर पूजा करने का विशेष महत्व है। विशेष अचूक उपाय:- * हर अमावस्या पर दक्षिणाभिमुख होकर दिवंगत पितरों के लिए पितृ तर्पण करना चाहिए। पितृस्तोत्र या पितृसूक्त का पाठ करना चाहिए। * अपने पितरों का ध्यान करते हुए प्रत्येक अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ पर कच्ची लस्सी, थोड़ा गंगाजल, काले तिल, चीनी, चावल, जल तथा पुष्प अर्पित करें और 'ॐ पितृभ्य: नम:' मंत्र का जाप करें। उसके बाद पितृसूक्त का पाठ करना शुभ फल प्रदान करता है। * हर संक्रांति, अमावस्या और रविवार के दिन सूर्य देव को ताम्र बर्तन में लाल चंदन, गंगा जल और शुद्ध जल मिलाकर 'ॐ पितृभ्य: नम:' का बीज मंत्र पढ़ते हुए 3 बार अर्घ्य दें। * पितृ दोष में कमी , शुभ फलों की प्राप्ति के लिए हर त्रयोदशी को नीलकंठ स्तोत्र का पाठ करना, पंचमी तिथि को सर्पसूक्त पाठ, पूर्णमासी के दिन श्रीनारायण कवच का पाठ करने के बाद ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दिवंगत की पसंदीदा मिठाई और दक्षिणा सहित भोजन कराना चाहिए। * शिवालय में जाकर भगवान शिव का इस दिन कच्चे दूध, दही से अभिषेक कर उन्हें काले तिले अर्पित करने का विशेष महत्व है। * आपने सारे कष्ट दूर करने और जीवन में सबकुछ शुभ घटित होने के लिए इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु के मंदिर पीले रंग की ध्वजा अर्पित करना चाहिए।

References

संकलित
posted Feb 2 by Jyotish Vimal Jain

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*मंगल का हुआ कर्क राशि में गोचर, देखिये अपनी राशि पर असर।* *मंगल ने किया चंद्र की राशि कर्क राशि में प्रवेश, सभी 12 राशियों पर दिखेगा असर। जानें आपकी कुंडली पर कैसा होगा इस गोचर का असर। * सौर मंडल में मंगल ग्रह को बेहद महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। कहा जाता है कि मंगल ग्रह धरती और उसके जीवों को कई सारी आपदाओं से बचाने में मदद करता है। जैसे मंगल ग्रह धरती को शनि, राहु और केतु के बुरे प्रभाव से भी बचाता है। इसके साथ ही माना गया है कि मंगल ग्रह के कारण ही नीले समुद्र में मूँगे का जन्म होता है और यही विशेष कारण है कि प्रकृति में लाल रंग की उत्पत्ति हुई है।  ज्योतिष शास्त्रों में मंगल ग्रह को बेहद क्रूर ग्रह माना गया है। मंगल ग्रह को अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व प्राप्त है, इसलिए इसे अंगारे जैसा रक्त वर्ण भौम यानि भूमि पुत्र का दर्जा भी दिया गया है। लेकिन ये केवल अशुभ हो, ये आवश्यक नहीं। हर कुंडली के लिए मंगल अच्छा और बुरा दोनों तरह का फल देने में सक्षम है। वहीं अगर लाल किताब की मानें तो उसमें मंगल ग्रह को नेक और मंगल को शुभ और कभी-कभी अशुभ फल देने वाला ग्रह अलग-अलग रूप में माना गया है जिसके चलते ही जातक को मंगल ग्रह के फल और अन्य सभी बातों को अलग-अलग बताया गया है। लाल किताब के अनुसार कुंडली में मंगल के दोषपूर्ण या खराब होने की स्थिति के बारे में भी विस्तार से बताया गया है। जिसके निवारण हेतु आपको इससे उपाय भी सुझाए गए हैं।  मंगल देव को युद्ध के देवता की उपाधि भी दी गयी है, जिन्हें शारीरिक ऊर्जा, आत्मविश्वास, अहंकार, क्रोध, वीरता और साहस जैसे गुणों का प्रतिनिधित्व भी प्राप्त है। इसी कारण जिस भी जातक की कुंडली में मंगल कमज़ोर होता है तो ये देखा गया है कि इसके दुष्प्रभाव से व्यक्ति को रक्त संबंधी समस्याएं, फोड़े, फुंसी, दुर्घटनाएँ आदि से जुड़ी कोई परेशानी रहती है और वह जातक आमतौर से थोड़ा डरपोक प्रवृत्ति का होता है। आइये जानें जातक के मंगल कमज़ोर या दुर्बल होने के पीछे क्या कारण होते हैं:-  भगवान हनुमान या श्री राम जी का मज़ाक उड़ाने या उनका अपमान करने से जातक का मंगल दुर्बल हो जाता है।अपने धर्म धर्म का पालन नहीं करने से भी जातक का मंगल खराब हो जाता है। घर या कार्य स्थल का पश्‍चिम कोण यदि अशुद्ध हो तो जातक का मंगल भी खराब होगा।अपने भाई या किसी मित्र या क़रीबी को दुश्मन बनाने से इसका बुरा असर आपके मंगल के ऊपर पड़ता है।निरंतर क्रोध करते रहने से मंगल ग्रह का कुंडली पर नकारात्मक प्रभाव दिखता है।किसी भी कुंडली के चौथे और आठवें भाव में मंगल का होना बेहद अशुभ माना गया है।किसी भी भाव में मंगल अकेला हो तो वो एक पिंजरे में बंद शेर की भाँति हो जाता है।सूर्य और शनि के साथ मिलकर मंगल अशुभ बन जाते हैं।मंगल के साथ केतु हो तो उसका बेहद अशुभ फल जातक को भुगतना पड़ता है। मंगल के साथ शत्रु ग्रह बुध का होना अशुभ फलों की प्राप्ति कराता है।  हर राशि के लिए मंगल का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि इसके किसी कुंडली में बली या मजबूत होने पर जहाँ ये जातक को अच्छे फल देता है। वहीं कुंडली में मंगल के खराब होने पर जातक को कई गंभीर बीमारी या समस्या होने का खतरा सदैव बना रहता है। जानते हैं मंगल के खराब होने से जातक को किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है: मंगल ग्रह को हौसले, बल शक्ति और लड़ाई का प्रतीक बताया गया है। इसलिए यदि व्यक्ति डरपोक है तो उसका मतलब उसका मंगल खराब है।जिस भी जातक का मंगल खराब या कमज़ोर होता है तो उस जातक के बड़े भाई पर उसका अशुभ फल पड़ता है। मंगल के खराब होने पर जातक को संतान सुख की प्राप्ति होने में अड़चनें आती हैं। मंगल खराब होने पर व्यक्ति हर समय झगड़ता रहता है। मंगल के अशुभ प्रभाव के चलते व्यक्ति को जेल या कोर्ट -कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं।  *गोचर काल का समय* अब यही पराक्रम और साहस का कारक लाल ग्रह मंगल 22 जून 2019, शनिवार को मिथुन से कर्क राशि में गोचर करने जा रहा है। मंगल का ये गोचर रात्रि 23:21 बजे कर्क राशि में होगा, जिसके बाद मंगल 9 अगस्त 2019 की सुबह 04:32 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल के इस गोचर का सभी 12 राशियों पर प्रभाव पड़ेगा। इस राशिफल के अनुसार जानते हैं मंगल के इस गोचर का आपकी राशि पर क्या होगा प्रभाव, लेकिन उससे पहले आइये जानते हैं कि ये गोचर देशभर में क्या बदलाव लेकर आने वाला है:- *मंगल गोचर का शेयर बाज़ार पर प्रभाव* मंगल ताँबा, सोना, लोहा एवं अन्य धातुएं, मशीनरी, चौपाये, गुड़, धनिया, हल्दी, गन्ना, मुनक्का, किशमिश, लौंग, सुपारी, किराना, लाल मिर्च, चाय, शराब, छुहारा, मसूर, मोठ तथा गेहूं को नियंत्रित करता है। इसके अतिरिक्त मंगल को बिजली अर्थात ऊर्जा का स्वामित्व प्राप्त होता है इसलिए अपनी नीच राशि कर्क में गोचर करने के कारण इन वस्तुओं के दामों में काफी उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।  *मंगल का राजनीति पर प्रभाव* हाल ही में आए लोकसभा चुनाव 2019 के परिणामों में जिस प्रकार बीजेपी को पीएम मोदी की अच्छी छवि का फायदा मिला। दरअसल उसके पीछे का कारण भी उनकी कुंडली में मंगल देव द्वारा रूचक योग बनाकर उन्हें अधिक शक्तिशाली बनाना शामिल है। उनकी कुंडली में मंगल की शुभ स्थिति में होना और नवम भाव में हो रहा ये गोचर उनके लिए बेहद अच्छा माना जा रहा है। इस गोचर के दौरान उन्हें और सफलताएँ एवं वाह-वाही मिलेगी।  *मंगल के गोचर से देश पर पड़ेगा ऐसा असर* इसके अलावा 22 जून को जिस प्रकार मंगल अपनी नीच राशि कर्क में गोचर कर रहा है। उसी प्रकार 21 जून को मंगल के शत्रु ग्रह बुध का भी कर्क राशि में ही गोचर हुआ, जिसके चलते भारत के अपने पड़ोसी देशों से संबंध बिगड़ने या उसमें खटास आने की संभावना दिखाई दे रही है। ऐसे में इस गोचर के चलते देश भर के नेतों की जुबान खराब हो सकती है जिसके चलते आपको बीच-बीच में नेताओं से अपशब्द या जुबानी जंग सुनने को मिलती रहेगी। जिससे देश की छवि अंतराष्ट्रीय स्तर पर खराब हो सकती है।  *चलिए अब जानते हैं कैसा रहेगा 12 राशियों पर मंगल के कर्क राशि में हो रहे गोचर का विशेष प्रभाव* मेष मंगल का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में हो रहा है। इस भाव से हम माता, गृह निर्माण, वाहन सुख आदि के बारे में विचार करते हैं। मंगल के इस गोचर के आपको मिलेजुले परिणाम मिलेंगे। अपने माता-पिता का इस दौरान आपको विशेष ख्याल रखना होगा उनकी सेहत में गिरावट आ सकती है। वैवाहिक जीवन में आपको चुनौतियों का सामना भी करना पड़ सकता है। आपका जीवनसाथी इस दौरान किसी बात को लेकर आपसे नाराज़ हो सकता है। उनकी नाराज़गी को दूर करना चाहते हैं तो उनके साथ ज्यादा तर्क-वितर्क न करें। वक्त के साथ चीजें सकारात्मक रूप लेंगी। इस राशि के नौकरी पेशा लोग कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। इस गोचर के चलते आपकी ऊर्जा में वृद्धि होगी और आप इस ऊर्जा को अच्छी तरह से इस्तेमाल भी कर पाएंगे। इस दौरान कुछ जातकों की आमदनी में वृद्धि होने की संभवना भी है। उपाय: मंगलवार को अनंतमूल की जड़ी अपनी भुजा में पहनें। वृषभ मंगल के कर्क राशि में प्रवेश करते ही आपका तृतीय भाव सक्रिय हो जाएगा। काल पुरुष कुंडली में यह भाव मिथुन राशि का है और यह आपके साहस और पराक्रम का कारक होता है। इस भाव में मंगल के गोचर से आपकी संकल्प शक्ति में इज़ाफा होगा। आप जो सोचेंगे उसे करने की पूरी कोशिश करेंगे। हालांकि आपको सलाह दी जाती है कि किसी भी चीज की अति न करें इससे आपको नुक्सान हो सकता है। तृतीय भाव में मंगल के गोचर के चलते आपके छोटे भाई-बहनों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं, इसलिए उनकी सेहत का ख्याल रखें। आपके जीवनसाथी को कार्यक्षेत्र में कामयाबी मिलने के योग हैं। यह गोचर समाज में आपके मान-सम्मान को भी बढ़ाएगा और इस दौरान आप अपने विरोधियों पर हावी रहेंगे। हालांकि आपको बेवजह के विवादों में इस समय नहीं पड़ना चाहिए। इस राशि के कुछ जातक इस दौरान छोटी दूरी की यात्रा पर भी जा सकते हैं। उपाय: मंगलवार के दिन लाल मसूर का दान करें। मिथुन मंगल का गोचर आपकी राशि से द्वितीय भाव में हो रहा है। यह भाव धन और वाणी का कारक माना जाता है। द्वितीय भाव में मंगल के गोचर के चलते आपकी वाणी में कर्कशता आ सकती है। अगर आप शादीशुदा हैं तो आपका जीवनसाथी आपकी बातों से इस दौरान आहत हो सकता है। पारिवारिक जीवन में भी इस दौरान आप आक्रामक हो सकते हैं और आपका व्यवहार परिवार के सदस्यों को भी ठेस पहुंचा सकता है। आर्थिक पक्ष इस अवधि में मजबूत होगा। सेहत पर इस वक्त ध्यान देने की जरूरत है, आपका गलत व्यवहार आपको मानसिक तनाव दे सकता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए आपको एकांत में समय बिताने की जरूरत है और खुद का आकलन करने की आवश्यकता है। छात्र इस दौरान गलत संगति से बचकर रहें और जितना हो सके अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। अगर आपको पाठ्यक्रम के किसी विषय में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है तो अपने गुरुजनों से बात करें। उपाय: ग़रीबों और ज़रूरतमंदों को अनार का दान करें। कर्क मंगल ग्रह आपकी ही राशि अर्थात आपके प्रथम भाव या लग्न भाव में गोचर करेगा। काल पुरुष कुंडली में यह भाव मेष राशि का होता है और इस भाव से हम स्वभाव, स्वास्थ्य, आत्मज्ञान और आपके रंग रुप के बारे में विचार करते हैं। इस भाव में मंगल के गोचर से आपकी सेहत में गिरावट आ सकती है। इस गोचर के चलते आपको छोटी-छोटी बातों से भी ठेस पहुँच सकती है और आप बात-बात पर भावुक हो सकते हैं। हालांकि इस दौरान आपके क्रोध और अहंकार में भी वृद्धि देखी जा सकती है। जीवनसाथी के साथ बात करते समय शब्दों का सोच-समझकर इस्तेमाल करें आपकी कोई बात झगड़े का कारण बन सकती है। कार्यक्षेत्र में आपको अच्छे परिणाम मिलेंगे। आपके अच्छे प्रयास आपको प्रगति के मार्ग पर ले जाएंगे। छात्रों के लिए यह गोचर अच्छा रहेगा, आप अपना ज्यादातर समय किताबों के बीच बिताना पसंद करेंगे। इस गोचर के दौरान आप विषम परिस्थितियों में भी अपने साहस के बल पर अच्छे परिणाम प्राप्त कर पाएंगे। उपाय: रोज़ाना चाँदी के बर्तनों का प्रयोग करें। सिंह आपकी राशि से द्वादश भाव में मंगल का गोचर होगा। इस समयावधि में आप नौकरी या उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए विदेश जा सकते हैं। वहीं इस राशि के जो लोग पहले से ही विदेशों में रह रहे हैं उन्हें थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में इस दौरान आपको सफलता मिलेगी। आर्थिक पक्ष थोड़ा कमजोर रह सकता है इस समय आपके ख़र्चों में वृद्धि हो सकती है जिसकी वजह से आपको मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ सकता है। वैवाहिक जीवन में भी संभलकर चलने की आवश्यकता है इस समय आपके जीवनसाथी के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। कार्यक्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश करें और गप्पबाजी से बचें। जीवन की आपाधापी में खुद के लिए भी वक्त निकालना सीखें। इस राशि की गृहणियों को जीवनसाथी से कोई तोहफ़ा मिल सकता है। यह तोहफ़ा रिश्ते में नयी ताज़गी ला सकता है। उपाय: मंगल बीज मंत्र का जाप करें। कन्या आपके एकादश भाव में मंगल के गोचर से आपको जीवन के किसी क्षेत्र में उच्च लाभ मिलने की पूरी संभावना है। इस गोचर के चलते आपको आर्थिक परेशानियां नहीं होंगी और धन का आगमन किसी न किसी स्रोत से होता रहेगा। आर्थिक पक्ष मजबूत होने के कारण आप जीवन के अन्य पहलुओं पर ध्यान लगा सकेंगे। वैवाहिक जीवन में थोड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपके प्रति जीवनसाथी के प्रेम में कमी आ गई है। प्रेम संबंधों में पड़े इस राशि के जातकों को अपने संगी के प्रति ईमानदार होने की जरूरत है। सामजिक जीवन में आपको अच्छे फल मिलेंगे। अपने दोस्तों के साथ आप सैर-सपाटे पर जा सकते हैं। नौकरी पेशा लोग कार्यक्षेत्र में अपना प्रभुत्व बनाएंगे। आपके विरोधी इस दौरान आपके सामने टिक नहीं पाएंगे। कारोबारियों को इस दौरान किसी ऐसे काम से लाभ हो सकता है जिसमें सफलता मिलने की उनको उम्मीद नहीं थी। उपाय: तांबा एवं लाल पुष्प का दान करना आपके लिए शुभ होगा। तुला मंगल ग्रह का गोचर आपकी राशि से दशम भाव में होगा। दशम भाव को कर्म भाव भी कहा जाता है। पारिवारिक मोर्चे पर आपको इस दौरान संभलकर चलने की जरूरत है। इस गोचर के दौरान घर में किसी बात को लेकर वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है। मंगल के प्रभाव से इस दौरान आपका स्वभाव भी उग्र रहेगा। अपनी वाणी पर संयम रखने की कोशिश करें। नौकरी पेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम मिलेंगे। आपका अच्छा काम बॉस की नजरों में आ सकता है और आपको पदोन्नति मिल सकती है। स्वास्थ्य को लेकर इस दौरान गंभीर होने की जरूरत है, ऐसे में जितना हो सके घर से बाहर भोजन करने से बचें। प्रेम में पड़े इस राशि के जातकों के जीवन में अड़चनें आ सकती हैं। छात्रों को भी पढ़ाई से ज्यादा इस समय खेलने-कूदने में मजा आएगा। खेलना आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है लेकिन पढ़ाई के लिए भी समय अवश्य निकालें। उपाय: मंगलवार के दिन शिवलिंग पर गेहूँ एवं चना चढ़ाएँ। वृश्चिक भविष्यफल के अनुसार मंगल का गोचर आपकी राशि से नवम भाव में हो रहा है। इस भाव को धर्म भाव भी कहा कहा जाता है। यह भाव कारक है धर्म का, भाग्य का, गुरु और गुरुतुल्य लोगों का। इस समय में आपको अच्छे फल पाने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ेगा। पिता से आपके संबंध बिगड़ सकते हैं और उनकी सेहत में गिरावट भी देखी जा सकती है। भाई-बहनों से रिश्ते बिगड़ सकते हैं इसलिए अपने अहम को पीछे रखकर उनसे बात करें। कार्यक्षेत्र में इस दौरान आपको सफलता मिलेगी और इस राशि के कुछ लोग जॉब में परिवर्तन भी कर सकते हैं। धर्म के प्रति आपका रुख इस दौरान अच्छा नहीं रहेगा। धर्म की बातों में आप कोई दिलचस्पी नहीं लेंगे। इस दौरान आप किसी लंबी दूरी की यात्रा पर भी जा सकता हैं। छात्रों को पढ़ाई के प्रति सकारात्मक रुख अपनाने की जरूरत है। अगर पढ़ाई में आपका मन नहीं लग पा रहा है तो योग ध्यान का सहारा लें आपको फायदा मिलेगा। उपाय: मंगलवार को अनंतमूल की जड़ अपनी भुजा या गले में धारण करें। धनु मंगल ग्रह आपकी राशि से अष्टम भाव में गोचर करेगा। इस भाव में मंगल के गोचर के चलते इस राशि के जातकों को जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपकी बातों का लोग गलत अर्थ निकाल रहे हैं। ऐसी स्थिति आपको खिन्न करेगी लेकिन फिर भी आप खुद को संभाल लेंगे। इस समय आपकी सेहत भी बिगड़ सकती है इसलिए अपने स्वास्थ्य का इस वक्त ध्यान दें। वैवाहिक जीवन में तकरार की स्थिति बन सकती है। अपने पिता के स्वास्थ्य का भी इस दौरान आपको ख्याल रखना होगा, उन्हें कोई छोटी-मोटी परेशानी भी हो तो डॉक्टर के पास ले जाएं। अगर आप वाहन चलाते हैं तो इस दौरान नियमों का उल्लंघन न करें। इस राशि के जो लोग साधना करते हैं वो इस दौरान मदिरा और माँस का सेवन न करें तो अच्छा रहेगा। आपके भाई-बहनों को इस दौरान जीवन में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके साथ समय बिताकर आपको उनकी उलझनें दूर करनी चाहिए। उपाय: चाँदी का कड़ा हाथ में पहनें। मकर मंगल ग्रह आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर करेगा। काल पुरुष की कुंडली में यह स्थान तुला राशि का होता है। इस भाव से मुख्य रूप से हम जीवन में होने वाली साझेदारियों के बारे में विचार करते हैं। मंगल के गोचर से आपके जीवन में थोड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान आपको अपने क्रोध पर भी नियंत्रण रखने की जरूरत है। जीवनसाथी के साथ तकरार न हो इसलिए जितना हो सके ठंडे दिमाग से उनके साथ बात करें। यह समय कार्यक्षेत्र में भी बहुत अच्छा नहीं रहेगा आपको कड़ी मेहनत के बाद ही अच्छे परिणाम मिलेंगे। छात्रों को इस दौरान यार दोस्तों से थोड़ा दूर रहना चाहिए नहीं तो आपकी पढ़ाई पर इसका बुरा प्रभाव पड़ सकता है। अगर आप सिंगल हैं तो किसी विपरीत लिंगी की तरफ आज आकर्षित हो सकते हैं। हालांकि किसी भी रिश्ते में आगे बढ़ने से पहले आपको सामने वाले के बारे में ठीक से जान लेना चाहिए। उपाय: मंगलवार के दिन गुड़ का दान करें। कुंभ आपके षष्टम भाव में मंगल ग्रह का गोचर होगा। इस दौरान किसी अन्य के मामले में टांग अड़ाने से आपको बचना चाहिए क्योंकि ऐसा करके आप अपना ही नुकसान कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपका प्रदर्शन इस समय सामान्य रहेगा हालांकि अपने विरोधियों पर इस दौरान आप हावी रहेंगे। पारिवारिक जीवन जैसा चल रहा है वैसा चलता रहेगा लेकिन वैवाहिक जीवन में थोड़ी बहुत परेशानियों का सामना आपको करना पड़ सकता है। इस अवधि में आपके जीवनसाथी के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। ख़र्चों में वृद्धि होने के कारण चिंतित हो सकते हैं। छात्रों को उन दोस्तों से दूर रहने की जरूरत है जो आपका समय बर्बाद करते हैं। गलत संगति में रहने से अच्छा है आप अकेले वक्त बिताएं। कारोबारी लोग जिन योजनाओं को लागू करने के बारे में सोच रहे हैं उनपर उन्हें ठंडे दिमाग से विचार करने की जरूरत है। उपाय: मंगवार के दिन लाल चंदन का दान करें। मीन मंगल ग्रह का गोचर आपकी राशि से पंचम भाव में हो रहा है। इस भाव को संतान भाव भी कहा जाता है। इस भाव में मंगल के गोचर के चलते आपके बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं इसलिए उनका ख्याल रखें। नौकरी पेशा से जुड़े लोगों को कार्यक्षेत्र में लाभ मिलेगा, इस अवधि में आपकी आमदनी में वृद्धि हो सकती है। छात्रों के लिए यह समय थोड़ा कठिन होगा, पढ़ाई से इस दौरान आपका ध्यान बार-बार भटकेगा। हालांकि इस राशि के कुछ छात्र इस दौरान पढ़ने के लिए विदेश जा सकते हैं। दांपत्य जीवन में ख़ुशियाँ आएंगी, आपके जीवनसाथी को इस दौरान अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है। अगर किसी से प्रेम करते हैं तो इस दौरान उनको प्रपोज न करें। जो लोग पहले से ही प्रेम में पड़े हैं उन्हें अपने संगी के साथ आ रही परेशानियों को दूर करने के लिए साथ बैठकर बात करनी चाहिए। उपाय: हनुमान जी की पूजा करें और उन्हें सिंदूर चढ़ाएं।
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*वसंत पंचमी 2020 का महत्त्व | Basant Panchami 2020 Significance* बसंत पंचमी 2020 शुभ मुहूर्त: बसंत पंचमी पर पूरा दिन शुभ होता है। इस दिन मां सरस्वती के साथ-साथ भगवान विष्णु की भी पूजा की जाती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक इस बार बसंत पंचमी बुधवार 29 जनवरी को सुबह 10: 45 बजे से शुरू होगी और गुरुवार अगले दिन यानी 30 जनवरी 2020 दोपहर 1:15 बजे तक रहेगी। वहीं कुछ ज्योतिष के मुताबिक 29 जनवरी को ही बसंत पंचमी का दिन पूजा की दृष्टि से ज्यादा शुभ रहेगा। वसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं। वसंत पंचमी या श्रीपंचमी एक हिन्दू त्योहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। सरस्वती पूजा की विधि: प्रात:काल स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर लें। उसके सामने बैठकर धूप-दीप, अगरबत्ती जलाएं। उसके बाद क्लश स्थापित कर भगवान गणेश, नवग्रह और मां सरस्वती की विधिवत पूजा करें। मां की पूजा से पहले उन्हें आचमन और स्नान कराएं। माता का श्रृंगार करें। ध्यान रखें कि माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र ही अर्पित करें। खीर अथवा दूध से बनी मिठाई से मां को भोग लगाएं। माता को सफेद या पीले फूल चढ़ाएं। इस दिन कई जगहों पर देवी की पूजा कर उनकी प्रतिमा को विसर्जित किया जाता है। स्कूलों में इस दिन मां सरस्वती की विशेष पूजा की जाती है साथ ही कई तरह के प्रोग्राम भी आयोजित किए जाते हैं। वसंत पंचमी की कथा: सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्माजी ने मनुष्य योनि की रचना की, परंतु वह अपनी सर्जना से संतुष्ट नहीं थे, तब उन्होंने विष्णु जी से आज्ञा लेकर अपने कमंडल से जल को पृथ्वी पर छि़ड़क दिया, जिससे पृथ्वी पर कंपन होने लगा और एक अद्भुत शक्ति के रूप में चतुर्भुजी सुंदर स्त्री प्रकट हुई। जिनके एक हाथ में वीणा एवं दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। वहीं अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। जब इस देवी ने वीणा का मधुर नाद किया तो संसार के समस्त जीव-जंतुओं को वाणी प्राप्त हो गई, तब ब्रह्माजी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। वसंत पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पचंमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी। Note: विद्यार्थी भी ज्योतिष शास्त्र अनुसार अपनी कुंडली और. कैरियर के विषय में जन्मपत्रिका विश्लेषण प्राप्त करने के लिए फ्यूचर स्टडी आनलाइन में विद्वान ज्योतिषी से बात करने के लिए आज बहुत अच्छा दिन है
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*ज्योतिष अनुसार राहु के फल* राहू कूटनीति का सबसे बड़ा ग्रह है राहू संघर्ष के बाद सफलता दिलाता है यह कई महापुरुषों की कुंडलियो से स्पष्ट है राहू का 12 वे घर में बैठना बड़ा अशुभ होता है क्योकि यह जेल और बंधन का मालिक है 12 वे घर में बैठकर अपनी दशा, अंतरदशा में या तो पागलखाने में या अस्पताल और जेल में जरूर भेजता है। किसी भी कुंडली में राहू जिस घर में बैठता है 19 वे वर्ष में उसका फल दे कर 20 वे वर्ष में नष्ट कर देता है राहू की महादशा 18 वर्ष की होती है। राहू चन्द्र जब भी एक साथ किसी भी भाव में बैठे हुए हो तो चिंता का योग बनाते है। राहू की अपनी कोई राशी नहीं है वह जिस ग्रह के साथ बैठता है वहा तीन कार्य करता है। 1
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वैदिक ज्योतिष में भावानुसार उच्च के चंद्र का फल 〰️〰️
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अधिकांश मामलों में यहां स्थित केतू को अशुभफल देने वाला माना गया है। अत: आपको दुष्टजनों की संगति अधिक प्रिय होगी। आप लोभी और चालाक हो सकते हैं। किसी व्यक्ति को कष्ट पहुंचाने में आपको कोई हिचक नहीं होगी। आप जाने अंजाने कुछ ऐसे काम कर सकते हैं जो पाप संज्ञक हो सकते हैं। कभी-कभी आपके द्वारा किए कार्यों से विवेकहीनता परिलक्षित हो सकती है। यहां स्थित केतू आपको गुह्यरोग, मुखरोग या दंत रोग देता है। यह स्थिति आर्थिक मामलों के लिए अच्छी नहीं होती। दूसरों को दिए हुए अपने द्रव्य को मिलने में रुकावट होती है। धन आगमन में व्यवधान आता है। दूसरों के धन और जन के प्रति आशक्ति हो सकती है। वाहन आदि के माध्यम से कष्ट मिल सकता है। मित्रों से विवाद या अलगाव भी हो सकता है। यहां स्थित केतू के कुछ शुभ फल कहे गए हैं। अत: आप पराक्रमी और सदैव उद्यम करने वाले व्यक्ति हो सकतें हैं। आप अपने कामों के प्रति गंभीर रहते हैं। खेलकूद में भी आपकी गहरी रुचि होगी। आप सुखी रहेंगे। आप शीलवान व्यक्ति हैं।
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