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*परस्य पीडया लब्धं धर्मस्योल्लंघनेन च ।* *आत्मावमानसंप्राप्तं न धनं तत् सुखाय वै ।।* भावार्थ - *दूसरों को दु:ख देकर , धर्म का उल्लंघन करके या खुद का अपमान सहकर मिले हुए धन से कभी सुख नही प्राप्त होता ।* *It does not get any pleasure by harassing others, violating religion or wealth received by getting insulted yourself.* *हरि ओम्, प्रणाम, जय सीताराम*
posted Feb 3 by anonymous

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*कामस्यान्तं हि क्षुत्तृड्भ्यां क्रोधस्यैतत्फलोदयात् ।* *जनो याति न लोभस्य* *जित्वाभुक्त्वा दिशो भुवः।।* *भावार्थ - लोभ मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। क्रोध अपना काम पूरा करके शान्त हो जाता है, परन्तु यदि मनुष्य पृथ्वी की समस्त दिशाओं को भी जीत ले और भोग ले, तब भी लोभ का अन्त नहीं होता है ।* *Greed is the greatest enemy of man. Anger becomes calm by fulfilling his work, but if a person conquers all directions of the earth and enjoys it, then greed does not end.* *Hari om, pranam, Jai sitaram*
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*यत् सुखं सेवमानोपि धर्मार्थाभ्यां न हीयते।* *कामं तदुपसेवेत न मूढव्रतमाचरेत्।।* व्यक्ति को यह छूट है कि वह न्यायपूर्वक और धर्म के मार्ग पर चलकर इच्छानुसार सुखों का भरपूर उपभोग करें ,लेकिन उनमें इतना आसक़्त न हो जाए कि अधर्म का मार्ग पकड़ ले। *हरि ओम्, प्रणाम, जय सीताराम*
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*सुशीलो मातृपुण्येन, पितृपुण्येन चातुरः ।* *औदार्यं वंशपुण्येन, आत्मपुण्येन भाग्यवान ।।* भावार्थ - *कोई भी मनुष्य अपनी माता के पुण्य से सुशील होता है, पिता के पुण्य से चतुर होता है, वंश के पुण्य से उदार होता है और अपने स्वयं के पुण्य होते हैं तभी वह भाग्यवान होता है। अतः सौभाग्य प्राप्ति के लिए सत्कर्म करते रहना आवश्यक है।* *Any human being is virtuous with the virtue of his mother, being wiser by the father's virtue, generous by the virtue of the lineage and having his own virtue, he is only fortunate. Therefore, it is necessary to continue doing good deeds for achieving good fortune.* *हरि ओम्, प्रणाम, जय सीताराम*
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*न धैर्येण विना लक्ष्मीर्न शौर्येण विना जयः।* *न ज्ञानेन विना मोक्षो न दानेन विना यशः॥* *धैर्य के बिना धन, वीरता के बिना विजय, ज्ञान के बिना मोक्ष और दान के बिना यश प्राप्त नहीं होता है॥* *Money Without patience, victory without virta, salvation without knowledge & success without charity, achievement is not attained.* *हरि ओम्, प्रणाम, जय सीताराम*
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*सत्यं रुपं श्रुतं विद्या कौल्यं शीलं बलं धनम्।* *शौर्यं य च चित्रभाष्यं च दशेमे स्वर्गयोनयः॥* भावार्थ : *सच्चाई, खूबसूरती, शास्त्रज्ञान, उत्तम कुल, शील, पराक्रम, धन, शौर्य, विनय और वाक् पटुता - ये दस गुण स्वर्ग पाने के अर्थात समस्त एेश्वर्य पाने के साधन हैं।* *These ten qualities are the means of attaining Paradise - the truth, the beauty, the science, the noble family, the majesty, the power, wealth, valor, modesty and speech.* *हरि ओम्, प्रणाम, जय सीताराम*
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