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इन वास्तु उपायों से बढ़ेगी आमदनी और बढ़ेगा आपका व्यापार..

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व्‍यापार में बार-बार असफलता मिलने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार मेहनत करने और अथक प्रयासों के बाद भी व्‍यापार में सफलता नहीं मिल पाती है या बनती हुई बात बिगड़ जाती है। अगर आप भी व्‍यापार में असफलता की समस्‍या से परेशान है या आप जो भी काम करते हैं उसमें आपको असफलता ही मिलती है तो आपकी इस समस्‍या का समाधान ज्‍योतिष/और वास्तु सम्मत् प्रयोगों द्वारा किया जा सकता है. आज आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जिन्‍हें आप अपनी दुकान या ऑफिस में कर सकते हैं और अपने व्‍यापार में वृद्धि पा सकते हैं। ज्‍योतिष शास्‍त्र और वास्‍तु की सहायता से आप व्‍यापार या ऑफिस में कुछ विशेष नियम और उपाय अपनाकर अपने बिजनेस की दिशा और दशा दोनों को बेहतर कर सकते हैं. तो चलिए जानते हैं उन उपायों के बारे में जो आपके व्‍यापार में वृद्धि और सफलता प्रदान कर सकते हैं. वास्‍तु के नियमों के अनुसार व्‍यापारियों को अपने कार्यस्‍थल में दक्षिण और पश्चिम दिशा के कोण पर बैठना चाहिए। वास्‍तु के अनुसार यह कोण मालिक से संबंध रखता है। अगर आपने घर पर ही ऑफिस बना रखा है या आप घर से ही काम करते हैं तो अपने कार्यों के लिए घर की दक्षिण और पश्चिम दिशा को चुनें। व्‍यापारिक सौदे के लिए ये जगह उत्तम रहती है। व्‍यापारिक सफलता के लिए कंपनी या दुकान का नाम दक्षिण दिशा की दीवार पर लाल रंग के पेंट या स्‍टीकर से लिखवाएं। इससे व्‍यापार में लाभ मिलता है और आय में भी वृद्धि होती है। ऑ‍फिस की दीवार की ओर पीठ करके बैठना अशुभ माना जाता है। आपका ऐसा करना आपके ही काम को नुकसान पहुंचा सकता है। उत्तर पूर्व की ओर मुख करके बैठना ज्‍यादा शुभ रहता है। ऐसा करने से व्‍यापार की सारी परेशानियां और नुकसान दूर होता है और धन लाभ में वृद्धि होती है. अपने ऑ‍फिस या दुकान में बेकार की चीजों को इधर-उधर ना फेंके। वास्‍तु के अनुसार ऐसा करना नुकसान देता है। अपने कार्यस्‍थल में कैश बॉक्‍स या गल्‍ले को उत्तर की दिशा में रखें। अगर आप अपने व्‍यापार में तरक्‍की में पाना चाहते हैं तो अपने ऑफिस के ईशान कोण यानि उत्तर पूर्व की दिशा को खाली रखें। यहां पर किसी भी तरह का बेकार का सामान या कबाड़ ना रखें। ऑफिस में मंदिर भी ईशान कोण में ही रखें। जब भी रोज़ सुबह आप दुकान खोलें तो उस समय ‘ॐ महालक्ष्‍मयै च विद्महे विष्‍णुपत्‍नी, च धीमहि तन्‍नो लक्ष्‍मी प्रचोदयात्’ मंत्र का जाप अवशय करें. ऑफिस की पश्चिम या दक्षिण दिशा में सामान, अलमारी या फर्नीचर आदि रखें। अपनी दुकान या फैक्‍ट्री के आसपास पेड़-पौधे लगाएं। इससे काम में सकारात्‍मक ऊर्जा बनी रहती है.. ऑफिस के मालिक की कुर्सी के पीछे की दीवार मजबूत होनी चाहिए। इससे वहां काम करने वाले लोगों और मालिक में कभी भी आत्‍मविश्‍वास की कमी नहीं होती है। ऑफिस में जो व्‍यक्‍ति अकाउंट का काम संभालता हो उसे दक्षिण पूर्व दिशा में बैठना चाहिए। मार्केटिंग करने वाले लोगों के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा बेहतर रहती है.. अगर आपकी दूकान या आॅफिस किसी भी वेध दोष से ग्रसित हैं (मार्ग वेध/स्तंभ वेध/वृक्ष वेध या द्वार वेध) तो द्वार के ठीक ऊपर मध्य में पन्ना गणेश (मरकज) की स्थापना करवायें.. सभी वास्तुदोष समाप्त हो जायेंगे. अगर आप इन उपायों और वास्‍तु सुझावों का ध्‍यान रखते हैं तो आपके व्‍यापार की सभी समस्‍याएं दूर हो जाएंगी और व्‍यापार में वृद्धि भी होगी. ----------------------------------------------------------

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posted Feb 24 by Deepika Maheshwary

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ज्योतिष के अनुसार शनिदेव कब और कैसे प्रसन्न होते हैं, इसके कई कारण है। शनिदेव यदि प्रसन्न हैं तो ऐसे जातक हर क्षेत्र में प्रगति करते है। उसके जीवन में किसी भी प्रकार की बाधा और कष्ट नहीं होता है। यदि शनिदेव आप पर प्रसन्न है या शनि का अच्छा प्रभाव आप पर पड़ रहा है तो बाल और नाखून मजबूत रहते हैं। वक्त के पहले आंखें कमजोर नहीं होती है। यदि आप न्यायप्रीय हैं और आपको हमेशा सच बोलने वाले लोग पसंद हैं तो निश्चित ही आप पर शनिदेव की कृपा है। यदि आपको अचानक ही धन की प्राप्ति होने लगे और समाज में मान-सम्मान मिलने लगे तो माना जाएगा कि शनिदेव की आप पर कृपा है और कुंडली में भी शनि की शुभ स्थिति है। कहते हैं कि यदि आपके घर के बाहर या पश्चिम दिशा में शमी का वृक्ष लगा है तो शनिदेव की आप पर साक्षात कृपा बनी रहेगी। यदि आप नियमित हनुमान चालीसा पढ़ते हैं और उन्हीं की भक्ति करते हैं तो निश्चि्त रूप से आप पर शनिदेव प्रसन्न ही रहेंगे। यदि आप शराब नहीं पीते हैं, ब्याज का धंधा नहीं करते हैं, झूठी गवाही नहीं देते हैं, गृहकलह नहीं करते हैं और पराई स्त्री पर नज़र नहीं रखते हैं तो यह मान लें कि शनिदेव की आप पर कृपा है। यदि आप पर चाचा-चाची, माता-पिता, मामा-मामी, सेवक, सफाईकर्मी, अपंग लोग, कमजोर और अंधे लोग प्रसन्न हैं तो समझो कि शनिदेव आप पर प्रसन्न हैं। ऐसे लोगों को मजदूर, कमजोर और गरीब लोगों का बहुत साथ मिलता है। यदि शनिवार को आपके जूते या चप्पल चोरी हो जाते हैं तो मान लीजिए कि यह शनिदेव की शुभता का संकेत हैं।
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होली का त्‍योहार बुराई पर अच्‍छाई की जीत का प्रतीक है. होली में जितना महत्‍व रंगों का है उतना ही महत्‍व होलिका दहन का भी है. रंग वाली होली से एक दिन पहले होली जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन कहते हैं. होलिका दहन की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो जाती हैं. सूखी टहनियां, लकड़ी और सूखे पत्ते इकट्ठा कर उन्‍हें एक सार्वजनिक और खुले स्‍थान पर रखा जाता है,पूर्णिमा की तिथि पर सूर्य अस्त होने के बाद प्रदोष काल में होलिका दहन किया जाता है। होलिका दहन की अग्नि को पवित्र माना जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत की अग्नि होती है। कुछ लोग इस अग्नि में नई फसल को भूनकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं और भगवान की पूजा की जाती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। इस शुभ दिन पर कुछ लोग भगवान के प्रति आस्था मजबूत करने के लिए व्रत भी रखते हैं और कथा पढ़ते हैं।होलिका दहन के साथ ही बुराइयों को भी अग्नि में जलाकर खत्‍म करने की कामना की जाती है.   होलिका दहन कब है? हिन्‍दू पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा की रात्रि ही होलिका दहन किया जाता है. यानी कि रंग वाली होली से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है. इस बार होलिका दहन 9 मार्च को किया जाएगा, जबकि रंगों वाली होली 10 मार्च को है. होलिका दहन के बाद से ही मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं. मान्‍यता है कि होली से आठ दिन पहले तक भक्त प्रह्लाद को अनेक यातनाएं दी गई थीं. इस काल को होलाष्टक कहा जाता है. होलाष्टक में मांगलिक कार्य नहीं होते हैं. कहते हैं कि होलिका दहन के साथ ही सारी नकारात्‍मक ऊर्जा समाप्‍त हो जाती है. होलिका दहन का शुभ मुहूर्त  जानते हैं कि होलिका दहन का शुभ मुहूर्त क्या है और इस मौके शुभ मुहूर्त देखने के लिए दो बातों को ध्यान रखा जाता है.  पहला, उस दिन “भद्रा” न हो। दूसरा, पूर्णिमा प्रदोषकाल-व्यापिनी होनी चाहिए। सरल शब्दों में कहें तो उस दिन सूर्यास्त के बाद के तीन मुहूर्तों में पूर्णिमा तिथि होनी चाहिए। इस बार 9 मार्च 2020 सोमवार को होलिका दहन के समय भद्राकाल की बाधा नहीं रहेगी। फाल्गुन माह की पूर्णिमा यानी होलिका दहन के दिन भद्राकाल सुबह सूर्योदय से शुरू होकर दोपहर करीब डेढ़ बजे ही खत्म हो जाएगा।  इसलिए शाम को प्रदोषकाल में होलिका दहन के समय भद्राकाल नहीं होने से होलिका दहन शुभ फल देने वाला रहेगा। जिससे रोग, शोक और दोष दूर होंगे।9 मार्च 2020 को सुबह 3 बजकर 3 मिनट से पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी 9 मार्च को सोमवार है और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है वहीं पूर्णिमा तिथि सोमवार को होने से चंद्रमा का प्रभाव ज्यादा रहेगा। क्योंकि ज्योतिष के अनुसार सोमवार को चंद्रमा का दिन माना जाता है। इसके साथ ही स्वराशि धनु में स्थित देवगुरु बृहस्पति की दृष्टि चंद्रमा पर रहेगी। जिससे गजकेसरी योग का प्रभाव रहेगा।इस बार होली भद्रा रहित, ध्वज एवं गजकेसरी योग भी बन रहा है। इसके बाद 10 मार्च को रंग वाली होली में त्रिपुष्कर योग बनेगा। इस साल होली पर गुरु और शनि का विशेष योग बन रहा है। ये दोनों ग्रह अपनी-अपनी राशि में रहेंगे।  तो इस बार होली का यह पावन पर्व ग्रहों के शुभ संयोग के कारण शुभ फलदाई मानी गई है होलिका दहन का शुभ मुहूर्त  होलिका दहन की तिथि: 9 मार्च 2020 पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 9 मार्च 2020 को सुबह 3 बजकर 3 मिनट से  पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 9 मार्च 2020 को रात 11 बजकर 17 मिनट तक  होलिका दहन मुहूर्त: शाम 6 बजकर 26 मिनट से रात 8 बजकर 52 मिनट तक होली का दहन की महिमा रंग वाली होली से भी ज्यादा मानी गई है .भारतीय परंपरा में पुराने साल को विदाई देते हुए नए साल के आगमन की खुशियां मनाई जाती है पुराना साल जिसे संवत कहते हैं को विदाई देने के लिए होली का पावन पर्व मनाया जाता है इसलिए होलिका दहन को संवत जलाना भी कहते चैत्र शुक्ल पक्ष के पहले दिन से जब नवरात्रि शुरू होते हैं तो भारतीय नव संवत की शुरुआत हो जाती है होलिका की अग्नि में पुराने साल और संवत की यादों को समस्याओं को परेशानियों को जलाते हुए जीवन की सारी पुरानी साल की मुश्किलों से निजात पाया जाता है माना जाता है कि इस राख को घर पर लाकर उससे अपने सभी परिवार के लोग अपने माथे पर तिलक करें तो निश्चित ही पिछले साल की सारी नकारात्मकता खत्म हो जाती है पुराने साल की विदाई और नए साल की खुशियां बनाने के साथ-साथ होलिका दहन के पर्व पर किसी भी तरह की आर्थिक समस्या व मानसिक परेशानी हो धन संबंधी समस्याओं से लेकर स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या का समाधान किया जा सकता है.. ज्योतिष के हिसाब से कुछ ऐसे उपाय होते हैं जिन्हें अगर आप होलिका दहन के अवसर पर करें और होलिका के जलने के साथ उन चीजों को अग्नि में डाले तीन बार परिक्रमा करते हुए प्रार्थना करें तो आपकी प्रार्थना जरूर पूरी होती है तो चलिए उन्हीं सभी छोटे-छोटे उपायों की बात करते हैं 1. बीमारी से मुक्ति के लिए और सेहत में लाभ के लिए अच्छा स्वास्थ्य पाने के लिए इस दिन एक मुट्ठी काले तिल होलिका की अग्नि में डाले ,कोई बीमारी से मुक्ति पाना चाहता है तो हरी इलायची और कपूर डालें तीन परिक्रमा करते हुए बीमारी से मुक्ति की प्रार्थना करें 2. धन प्राप्ति के लिए और किसी भी तरह की आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं. तू होली के दिन एक छोटी सी चंदन की लकड़ी होली की अग्नि में डाल देतीन बार परिक्रमा करते हुए प्रार्थना करें 3. अगर किसी को रोजगार की समस्या है यह व्यापार या व्यवसाय में परेशानी आ रही है तो इसके लिए एक मुट्ठी पीली सरसों के दाने होलिका की अग्नि में डालें निश्चित ही व्यापार संबंधी रोजगार संबंधी सारी समस्याएं दूर होंगी 4. अगर किसी को विवाह की समस्या आ रही है विवाह नहीं हो पा रहा, वैवाहिक जीवन में परेशानी और दिक्कतें आ रही हैं खुशहाली नहीं है तो उसके लिए हवन सामग्री लेकर जरा सा देसी घी मिलाकर उसे होलिका की अग्नि में डालें तो निश्चित ही जीवन में सभी तरह की समस्याएं दूर होती हैं 5. किसी भी तरह के तंत्र मंत्र नजर दोष और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए एक मुट्ठी काली सरसों को अपने सिर पर से एंटी क्लॉक वाइज 7 बार घुमाकर होली की जलती हुई अग्नि में डाल दिया जाए तो जीवन की सारी नकारात्मकता खत्म हो जाती हैहोलिकादहन करने या फिर उसके दर्शन मात्र से भी व्यक्ति को शनि-राहु-केतु के साथ नजर दोष से मुक्ति मिलती है। होली की भस्म का टीका लगाने से नजर दोष तथा प्रेतबाधा से मुक्ति मिलती है। 6. जिन लोगों को अपनी नाम राशि लग्न राशि नहीं पता यह जिनको अपनी जन्म कुंडली के बारे में ज्ञान नहीं है वह लोग होलिका दहन के दिन गोबर के उपले गेहूं की बालियां और काले तिल लेकर होलिका की जलती अग्नि में डालकर तीन बार परिक्रमा करके प्रार्थना करें तो उनके जीवन में से सभी तरह की समस्याएं विघ्न बाधाएं अपने आप खत्म हो जाते हैं ..और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है 7. किसी को मन संबंधी समस्याएं मानसिक परेशानी है या किसी की कुंडली में चंद्रमा पीड़ित है तो वह होलिका दहन के बाद घर आकर अपने हाथ पैर धोकर अगर चंद्रमा के दर्शन करते हुए चंद्रमा की रोशनी में बैठे और श्री कृष्ण के किसी भी मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय ,ओम क्लीम कृष्णाय नमः, या गीता का पाठ करें तो निश्चित रूप से उनके सभी तरह की मानसिक परेशानियां दूर होने के साथ-साथ जीवन के सभी दिक्कत और परेशानियां खत्म हो जाती है मन मजबूत होता है
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मुझसे अपनी कुंडली कॉल पर डिस्कस करने के लिए मेरी ओर से दिया गया यह गिफ्ट कोड। FS497 को यूज करके आपको अपने वॉलेट में 150 रुपए। मिलेंगे। और 7 मिनट तक आप मुझसे अपनी कुंडली कॉल पर डिस्कस कर सकते हैं। अपने कुंडली को लेकर किसी भी तरह का प्रश्न आप मुझसे कॉल पर पूछ सकते हैं। जिसे उपायों सहित आपको बताया जाएगा।
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मुझसे अपनी कुंडली कॉल पर डिस्कस करने के लिए मेरी ओर से दिया गया यह गिफ्ट कोड। FS497 को यूज करके आपको अपने वॉलेट में 150 रुपए। मिलेंगे। और 7 मिनट तक आप मुझसे अपनी कुंडली कॉल पर डिस्कस कर सकते हैं। अपने कुंडली को लेकर किसी भी तरह का प्रश्न आप मुझसे कॉल पर पूछ सकते हैं। जिसे उपायों सहित आपको बताया जाएगा।
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यदि आप भी उनमें से हैं जिन्हें कड़ी मेहनत के वाबजूद भी जीवन में वो मुकाम नहीं मिल पाया जिसकी आपने उम्मीद की थी तो यकीन मानिये आपको इस खबर को पढ़ने की बेहद आवश्यकता है। आज हम आपको कुछ ऐसे सुगंधित फूलों के प्रयोग के बारे में बताने जा रहे हैं जिनका प्रयोग आप अपने दिन प्रतिदिन के जीवन में करके अपने सोये हुए भाग्य को जगा सकते हैं। आईये जानते है कौन से हैं वो फूल जिनका प्रयोग कर आप अपने भाग्य को जगा सकते हैं। गुलाब: गुलाब के फूलों का प्रयोग अापने आज तक अलग-अलग रूपों में किया होगा, लेकिन यदि इस फूल का प्रयोग आप खासतौर से अपनी सोई किस्मत को जगाने के लिए करें तो इससे आपको काफी लाभ मिल सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुलाब का फूल सूर्य और मंगल के प्रभाव को शुभ बनाने वाला होता है। यदि आप अपने किसी काम में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो मंगलवार के दिन हनुमान जी को सात गुलाब के फूल चढ़ाने से आपको लाभ मिल सकता है। किसी भी प्रकार के मनवांछित फल प्राप्त करने के लिए यदि दुर्गा माँ को प्रतिदिन ग्यारह गुलाब के फूल चढ़ाये जाएं तो इससे भी आपको बेहद लाभ मिल सकता है। आर्थिक तंगी से निजात पाने के लिए यदि लक्ष्मी माता और विष्णु जी को पांच गुलाब के फूल अर्पित किये जाएं तो आपको अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। गेंदा: गेंदे का फूल मुख्य रूप से बृहस्पति ग्रह के प्रभाव को शुभ बनाता है। रोजाना यदि एक गेंदे के फूल को गंगाजल के साथ पीसकर उसके लेप को माथे पर लगाया जाए तो इससे आप दूसरों को प्रभावित कर पाने में सफल हो सकते हैं। इसके साथ ही लक्ष्मीनारायण को रोजाना गेंदे के फूल की दो माला चढ़ाने से आपको वैवाहिक जीवन में सफलता प्राप्त हो सकती है। गुड़हल: ऐसी मान्यता है की इस फूल का प्रयोग आप जीवन में महावरदान पाने के लिए कर सकते हैं। जीवन में अपने मन के अनुसार फल पाने के लिए रोजाना 25 गुड़हल फूलों की माला माँ दुर्गा को चढ़ाने से लाभ मिल सकता है। यदि आप जीवन में शत्रुओं से परेशान हैं तो काली माँ को रोजाना पांच गुड़हल फूल की माला चढ़ाने से शत्रुओं से मुक्ति पा सकते हैं। आक: सोमवार के दिन विशेष रूप से आक का फूल शिवजी को चढ़ाने से आपको जीवन के हर क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। इसके साथ ही यदि बुध ग्रह के हानिकारक प्रभाव से ग्रसित हों तो बुधवार के दिन गणेश जी को पांच आक के फूल जरूर अर्पित करें।
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