top button
    Futurestudyonline Community

होली के दिनों में किये जाने वाले अदभुत प्रयोग*

0 votes
322 views
1. होली की पूजा मुखयतः भगवान विष्णु (नरसिंह अवतार) को ध्यान में रखकर की जाती है। 2. घर के प्रत्येक सदस्य को होलिका दहन में देशी घी में भिगोई हुई दो लौंग, एक बताशा और एक पान का पत्ता अवश्य चढ़ाना चाहिए। होली की ग्यारह परिक्रमा करते हुए होली में सूखे नारियल की आहुति देनी चाहिए। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है, कष्ट दूर होते हैं। 3. होली पर पूरे दिन अपनी जेब में काले कपड़े में बांधकर काले तिल रखें। रात को जलती होली में उन्हें डाल दें। यदि पहले से ही कोई टोटका होगा तो वह भी खत्म हो जाएगा। 4. होली दहन के समय 7 गोमती चक्र लेकर भगवान से प्रार्थना करें कि आपके जीवन में कोई शत्रु बाधा न डालें। प्रार्थना के पश्चात पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ गोमती चक्र दहन में डाल दें। 5. होली दहन के दूसरे दिन होली की राख को घर लाकर उसमें थोडी सी राई व नमक मिलाकर रख लें। इस प्रयोग से भूतप्रेत या नजर दोष से मुक्ति मिलती है। 6. होली के दिन से शुरु होकर बजरंग बाण का 40 दिन तक नियमित पाठ करनें से हर मनोकामना पूर्ण होगी। 7. यदि व्यापार या नौकरी में उन्नति न हो रही हो, तो 21 गोमती चक्र लेकर होली दहन के दिन रात्रि में शिवलिंग पर चढा दें। 8. नवग्रह बाधा के दोष को दूर करने के लिए होली की राख से शिवलिंग की पूजा करें तथा राख मिश्रित जल से स्नान करें। 9. होली वाले दिन किसी गरीब को भोजन अवश्य करायें। 10. होली की रात्रि को सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाकर पूजा करें व भगवान से सुख - समृद्धि की प्रार्थना करें। इस प्रयोग से बाधा निवारण होता है। 11. यदि बुरा समय चल रहा हो, तो होली के दिन पेंडुलम वाली नई घडी पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाए। परिणाम स्वयं देखे। 12. राहु का उपाय - एक नारियल का गोला लेकर उसमे अलसी का तेल भरकर..उसी में थोडा सा गुड डाले..फिर उस नारियल के गोले को राहू से ग्रस्त व्यक्ति अपने शारीर के अंगो से स्पर्श करवाकर जलती हुई होलिका में डाल देवे. पुरे वर्ष भर राहू से परेशानी की संभावना नहीं रहेगी. 13. मनोकामना की पूर्ति हेतु होली के दिन से शुरू करके प्रतिदिन हनुमान जी को पांच लाल पुष्प चढ़ाएं, मनोकामना शीघ्र पूर्ण होगी। 14. होली की प्रातः बेलपत्र पर सफेद चंदन की बिंदी लगाकर अपनी मनोकामना बोलते हुए शिवलिंग पर सच्चे मन से अर्पित करें। बाद में सोमवार को किसी मंदिर में भोलेनाथ को पंचमेवा की खीर अवश्य चढ़ाएं, मनोकामना पूरी होगी। 15. स्वास्थ्य लाभ हेतु मृत्यु तुल्य कष्ट से ग्रस्त रोगी को छुटकारा दिलाने के लिए जौ के आटे में काले तिल एवं सरसों का तेल मिला कर मोटी रोटी बनाएं और उसे रोगी के ऊपर से सात बार उतारकर भैंस को खिला दें। यह क्रिया करते समय ईश्वर से रोगी को शीघ्र स्वस्थ करने की प्रार्थना करते रहें। 16. व्यापार लाभ के लिए होली के दिन गुलाल के एक खुले पैकेट में एक मोती शंख और चांदी का एक सिक्का रखकर उसे नए लाल कपड़े में लाल मौली से बांधकर तिजोरी में रखें, व्यवसाय में लाभ होगा। 17. होली के अवसर पर एक एकाक्षी नारियल की पूजा करके लाल कपड़े में लपेट कर दूकान में या व्यापार स्थल पर स्थापित करें। साथ ही स्फटिक का शुद्ध श्रीयंत्र रखें। उपाय निष्ठापूर्वक करें, लाभ में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि होगी। 18. धनहानि से बचाव के लिए होली के दिन मुख्य द्वार पर गुलाल छिड़कें और उस पर द्विमुखी दीपक जलाएं। दीपक जलाते समय धनहानि से बचाव की कामना करें। जब दीपक बुझ जाए तो उसे होली की अग्नि में डाल दें। यह क्रिया श्रद्धापूर्वक करें, धन हानि से बचाव होगा। 19. दुर्घटना से बचाव के लिए होलिका दहन से पूर्व पांच काली गुंजा लेकर होली की पांच परिक्रमा लगाकर अंत में होलिका की ओर पीठ करके पांचों गुन्जाओं को सिर के ऊपर से पांच बार उतारकर सिर के ऊपर से होली में फेंक दें। 20. होली के दिन प्रातः उठते ही किसी ऐसे व्यक्ति से कोई वस्तु न लें, जिससे आप द्वेष रखते हों। सिर ढक कर रखें। किसी को भी अपना पहना वस्त्र या रुमाल नहीं दें। इसके अतिरिक्त इस दिन शत्रु या विरोधी से पान, इलायची, लौंग आदि न लें। ये सारे उपाय सावधानीपूर्वक करें, दुर्घटना से बचाव होगा। आत्मरक्षा हेतु किसी को कष्ट न पहुंचाएं, किसी का बुरा न करें और न सोचें। आपकी रक्षा होगी। 21. अगर आपके घर में कोई शारीरिक कष्टों से पीड़ित है - ओर उसको रोग छोड़ नहीं रहे है - तो 11 अभिमंत्रित गोमती चक्र बीमार ब्यक्ति के शरीर से 21 बार उसार कर होली की अग्नि में डाल दे शारीरिक कष्टों से शीघ्र मुक्ति मिल जायेगी 22. अगर बुध ग्रह आपकी कुंडली में संतान प्राप्ति में बाधा डाल रहा है तो किसी भी बच्चे वाली गरीब महिला को होली वाले दिन से शुरु कर एक महीने तक हरी-सब्जियाँ दें। माता वैष्णो-देवी से संतान की प्रार्थना करें। 23. शीघ्र विवाह हेतु : जो युवा विवाह योग्य हैं और सर्वगुण संपन्न हैं, फिर भी शादी नहीं हो पा रही है तो यह उपाय करें। होली के दिन किसी शिव मंदिर जाएं और अपने साथ 1 साबूत पान, 1 साबूत सुपारी एवं हल्दी की गांठ रख लें। पान के पत्ते पर सुपारी और हल्दी की गांठ रखकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके बाद पीछे देखें बिना अपने घर लौट आएं। यही प्रयोग अगले दिन भी करें। इसके साथ ही समय-समय शुभ मुहूर्त में यह उपाय किया जा सकता है। जल्दी ही विवाह के योग बन जाएंगे. इस अवसर पर सुन्दरकाण्ड, हनुमान अष्टक का पाठ सर्वश्रेष्ठ है।

References

होली के दिनों में किये जाने वाले अदभुत प्रयोग*
posted Mar 8, 2020 by Deepika Maheshwary

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
0 votes
आज के दौर में हर शख्स किसी ना किसी समस्या से पीड़ित है ऐसे में आप रोजगार से लेकर सुख समृद्धि तो विदेश यात्रा से लेकर ऋण मुक्ति के लिए होली के अवसर पर उपाय कर सकते हैं ध्यान रखें की गोली से 8 दिन पूर्व वह होली के 8 दिन बाद तक का समय उपाय में सफलता देने वाला होता है 1. होली की रात होलिका दहन में से जलती हुई लकड़ी घर पर लाकर नवग्रहों की लकड़ियों एवं गाय के गोबर से बने उपला की होली प्रज्वलित करनी चाहिए उसने घर की प्रत्येक सदस्य को देसी घी में भिगोए हुई दो लौगं एक बताशा एक पान का पत्ता चढ़ाना चाहिए सभी को उस होलिका की 11 परिक्रमा करते हुए सूखे नारियल की होली में आहुति देनी चाहिए परिक्रमा करते समय जो कि दाने उसमें डालते रहें स्वार्थ सिद्धि योग के दिन होली की इस राख को बहते जल में प्रवाहित कर दें यदि बहता हुआ जल ना हो तो किसी बड़े जलाशय कुएं में डाल दे सभी ग्रह ठीक हो जाएंगे और अच्छा फल देना शुरू कर देंगे 2. व्यापार ऊंचाइयों को छुए इसके लिए होली के दिन गुलाल के एक पैकेट को खोलकर उसमें एक मोती शंख सुपारी में चांदी का सिक्का रखकर लाल नए रुमाल में कलावा मौली से बांधकर तिजोरी में रख दें वर्ष भर इसे ऐसे ही रखा रहने दें 3. होली से शुरू कर प्रतिदिन हनुमानजी को पांच लाल फूल अर्पित कर मनोकामना की प्रार्थना करें मुकदमों में विजय प्राप्ति के लिए होली के दिन मूंगे से बने हनुमान जी के समक्ष बजरंग बाण के 51 पाठ करेंअंत में कपूर जलाकर उस पर दो फूल दार लौंग चढ़ाऐ 4. विदेश यात्रा में यदि अर्चना रही हो तो उसे दूर करने के लिए होली के दिन होली का पूजन के बाद विष्णु सहस्त्रनाम के 3 पाठ करें व मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करें 5. नौकरी में यदि पदोन्नति नहीं हो रही हूं तो ऐसे में जितने वर्ष की नोकरी आप कर चुके हो उतने ही प्राण प्रतिष्ठित गोमती चक्र होली के दिन शिवलिंग पर चढ़ा दे मनोभाव से प्रार्थना करें 6. व्यापार में निरंतर धन हानि हो रही हो तो होली के दिन अपने तिजोरी के नीचे काली गुंजा के 11 दाने रखें दाने रखते समय श्रीम श्रीम श्रीम मंत्र का मन में जाप करते रहे होली के दिन तिजोरी में धनदाव कार्य सिद्धि यंत्र स्थापित करें प्रतिदिन गुलाब का एक पुष्प चढ़ाएं नमन कर दर्शन करें समृद्धि स्वयं चलकर आएगी 7. यदि किसी अन्य स्त्री या पुरुष के कारण दांपत्य जीवन में क्लेश हो रहा हो तो 7 गोमती चक्र 7 लघु नारियल 7 मोती शंख और सवा मीटर पीला सूती वस्त्र लेना है सभी सामग्री को इसी पीले वस्त्र में बांधकर प्रभावित व्यक्ति पर से सात बार वारकर होली की अग्नि में डाल देवें और पीछे मुड़कर ना देखें 8. होली के दिन 5-5 अभिमंत्रित गोमती चक्र होलिका पूजन के पश्चात पति और पत्नी दोनों अपने बिस्तर पर सिरहाने के नीचे रखें इससे परस्पर प्रेम बढ़ता है 9. नौकरी प्राप्ति के लिए कौवा को नमकीन चावल होली के दिन से खिलाना शुरू कर दे फिर प्रत्येक शनिवार को खिलाएं 12 फल प्रतिदिन मंदिर में चढ़ाएं तो और भी उत्तम 10. विवाह बाधा होने पर छह केले मंदिर में 6 गुरुवार दें 8 सप्ताह में विवाह की खुशखबरी मिल जाएगी साथ ही मंगल स्नान करें तो अति उत्तम शनिवार को किसी गरीब व्यक्ति को काला छाता दान दे भोजन कराएं सारे विघ्न धीरे-धीरे दूर हो जाएंगे होली वाले दिन गरीब को भोजन अवश्य कराएं 11. पैसा टिकता ना वह बरकत ना हो तो होली के दिन सिद्ध प्राचीन हनुमान मंदिर जाएं सात बताशे एक जनेऊ एक पान अर्पित करें उसके बाद तीन मंगलवार लगातार चढ़ाऐ परिणाम स्वयं अनुभव करेंगे 12. घर मकान ना बन पा रहा हो अडचने अर्चना रही हो तो ऐसी में होली के दिन गरीब को उड़द की काली दाल की खिचड़ी बनाकर खिलाएं फिर 5 शनिवार ऐसा ही करें शीघ्र आपका घर बन जाएगा शनिवार अनार का पौधा लगाएं और रोज जल अर्पण करें 13. संतान प्राप्ति के लिए किसी भी बच्चे वाली महिलाओं को होली वाले दिन से शुरू कर 1 महीने तक हरी सब्जियां दे वैष्णो देवी माता से संतान प्राप्ति की प्रार्थना करें मनोरथ पूर्ण होने पर हलवा पूरी बांटे मंदिर में प्रसाद चढ़ाएं 14. पेंडुलम वाली घड़ी यदि पैतृक हो तो और भी अच्छा उसे पूर्वी या उत्तरी दीवार पर लगाए जीवन में कभी बुरा समय नहीं आएगा यदि आए भी तो कहां गायब हो गया पता नहीं चलेगा होली के दिन आप पर से दीवार पर लगाए 15. व्यवसाय में अत्यधिक घाटा हो रहा हो कर्ज बहुत ज्यादा चढ़ गया हो तो 400 ग्राम साबुत धनिया जल में प्रवाहित करें काली गुंजा की पांच दाने पीले कपड़े में बांधकर व्यवसाय की तिजोरी में रखे लाल गुंजा के दाने भी रख सकते हैं होली के दिन की गई साधना एवं प्रयोग सफल होते हैं हालांकि कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए होली वाले दिन प्रात काल किसी भी अन्य शख्स द्वारा दी गई वस्तु को खाना नहीं चाहिए खासकर जो आपसे से मन में विद्वेष भाव रखता हो सिर अवश्य ढक कर रखना चाहिए कोई आपका इस दिन पहना हुआ रुमाल या वस्त्र आदि मांगे या किसी भी युक्ति से ले जाना चाहिए उसे बिल्कुल ना दे होली के दिन दूसरे व्यक्ति विरोधी के द्वारा दिया गया पान इलाइची लोंग आदि का सेवन नहीं करना चाहिए
0 votes
हनुमान चालीसा का प्रयोग हमारे जीवन में एक अचूक उपाय के रूप में भी कार्य करता है। इसके साइकोलॉजिकल और साइंटिफिक कारण है। 1. यदि आपके मन में भय या हमेशा डर की स्थिति बनी रहती है तो हनुमान चालीसा व बजरंग बाण का रोज पाठ करें। व मेहरून वस्त्र ही पहनें। कुछ ही दिनों में आपको निडर और निर्भयता प्राप्त होने लगेगी। 2. घर से बाहर जाते समय विशेष रूप से वाहन चलाते समय अपने साथ एक छोटी हनुमान चालीसा व एक काला धागा अपने साथ हमेशा रखें । दुर्घटनाओं से रक्षा होगी। 3. जिन बच्चों को रात में सोते हुए अचानक डर जाने की समस्या होती है उनके सिराने पर सोते समय एक हनुमान चालीसा व चमेली के फूल रखें व हाथ मे एक काला धागा बांधे। उनकी यह समस्या दूर हो जाएगी। 4. यदि शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कारण जीवन में संघर्ष बढ़ रहा हो तो रोज हनुमान चालीसा का पाठ करें स्थिति अनुकूल बनेगी। 5. इंटरव्यू पर जाने से पहले तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें । आप मे कॉन्फिडेंस बढ़ जायेगा। आपको घबराहट की समस्या नहीं होगी। 6. कुंडली में मंगल की दशा चल रही हो तो नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करें व पीपल में पानी दें। अच्छे परिणाम मिलेंगे। 7. कर्ज की समस्या अधिक हो तो सुबह शाम तीन तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें , साथ मे गायत्री मंत्र का जप भी करें। लाभ मिलेगा। 8. यदि आपकी कोई जमीन या प्रॉपर्टी बिक नहीं पा रही हो तो घर में मारुती यन्त्र स्थापित करके उसके सामने रोज हनुमान चालीसा का पाठ करें जल्दी अच्छे परिणाम मिलेंगे। 9. यदि आपको अकारण ही जेल जाने की स्थिति बन जाये तो हनुमान चालीसा के 100 पाठ का एक अनुष्ठान पूरा करें । व महामृत्युंजय का जप करें। चमत्कारिक परिणाम होंगे। 10. सभी को श्री हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए इसे उनका आत्मबल हमेशा मजबूत बना रहता है । और जीवन में हमेशा आगे बढ़ने की शक्ति मिलती है।
0 votes
मेष लग्न-जन्म के समय यदि मेष लग्न हो तो जातक का औसत कद, सुघड़ शरीर, तीव्र स्वभाव, लालिमापूर्ण आंखें, महत्वाकांक्षी, साहसी, कमजोर टांगे, स्त्रीप्रिय, अभिमानी तथा अस्थिर धनवाला होता है। इस लग्न पर क्रूर ग्रहों का प्रभाव हो तो व्यक्ति आवेशात्मक व झगड़ालू हो जाता है। ये लोग प्राय: स्थिर स्वभाव के नहीं होते, अत: जीवन में ये बार-बार काम बदलते हैं। फिर भी इनमें वला की कार्य कुशलता तथा कभी निराश न होने का गुण होता है। इनका स्वभाव प्राय: गरम होता है तथा ये अपने ऊपर पड़ी जिम्मेदारी को जल्दी ही निबटाना पसन्द करते हैं अर्थात् काम में विलम्ब करना इनका स्वभाव नहीं होता है। ये भोजन के शौकीन होते हैं, लेकिन फिर भी कम भोजन कर पाते हैं तथा जल्दी भोजन करना इनका स्वभाव होता है। कभी कभी इनके नाखूनों में विकार देखा जाता हैं ये लोग साहसिक कामों में अपनी प्रतिभा का विस्तार कर सकते हैं। वृष लग्न-इस लग्न में जातक मध्यम शरीर, चर्बी रहित तथा शौकीन स्वभाव के होते हैं। ये प्राय: सुदर्शन व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। प्राय: रंग खुलता गेहुआं तथा बाल चमकदार होते हैं। इनकी जांघें मजबूत तथा इनकी चाल मस्तानी होती है। इनमें धैर्य खूब होता है, इसीलिए बहुत जल्दी ये लोग उत्तेजित नहीं होते हैं। यथासम्भव क्रोधित होने पर ये लोग खूंखार हो जाते हैं। ये लोग प्राय: प्रबल इच्छा शक्ति रखते हैं तथा जीवन में बहुत सफलता प्राप्त करते हैं। ये जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाते। ये धन कमाते हैं तथा संसार के सारे सुखों को भोगना चाहते हैं। इनके जीवन का मध्य भाग काफी सुखपूर्वक व्यतीत होता है। इनके यहां कन्या सन्तान की अधिकता होती है। मिथुन लग्न-मिथुन लग्न में उत्पन्न बालक लम्बे कद व चमकीले नेत्रों वाला होता है। इनकी भुजाएं प्राय: लम्बी देखी गयी हैं। ये लोग प्राय: खुश मिजाज व चिन्तारहित होते हैं। ये लोग प्राय: प्राचीन शास्त्रों में रुचि रखते हैं। तथा कुशल वक्ता होते हैं। अपनी बात को प्रभावी ढंग से पेश करना इनकी विशेषता होती है। इनकी नाम लम्बी व ऊंची होती है। ये लोग स्त्रियों या अपने से कम उम्र के लोगों से दोस्ती रखते हैं। इनकी एकतरफा निर्णय करने की शक्ति कुछ कम होती है। ये लोग कई व्यवसाय कर सकते हैं। स्वभावत: भावुक होते हैं तथा भावावेश में कभी अपना नुकसान सहकर भी परोपकार करते हैं। ये लोग उच्च बौद्धिक स्तर के होते हैं। तथा शीघ्र धनी बनने के चक्कर में कभी कभी सट्टा या लॉटरी का शौक पाल लेते हैं। इनकी मध्य अवस्था प्राय: संघर्षपूर्ण होती है। ये लोग कवित्व शक्ति से भी पूर्ण होते हैं। कर्क लग्न-इन लग्न के लोग छोटे कद वाले होते हैं। इनका शरीर प्राय: मोटापा लिए होता है तथा जलतत्व राशि होने के कारण जल्दी सर्दी की पकड़ में आ जाते हैं। इनके फेफड़े कमजोर होते है। इन्हें नशीले पदार्थों का शौक होता है। इनका जीवन प्राय: परिवर्तनशील होता है। पूर्वावस्था में इन्हें संघर्ष करना पड़ता है। इनकी कल्पना शक्ति अच्छी होती है तथा लेखन का इन्हें शौक होता है। आवेश इनकी कमजोरी होती है तथा जीवन में ये तेज रफ्तार से दौड़ना चाहते हैं। ये लोग प्राय: मध्यावस्था में धन व सम्मान अर्जित करते हैं तथा स्वयं को कुछ श्रेष्ठ मानते हैं। इनकी स्मरण-शक्ति भी अद्भुत देखी गई है। ये लोग प्राय: बातूनी होते हैं। यदि सप्तम स्थान पर शुभ ग्रहों का प्रभाव न हो तो इनका वैवाहिक जीवन सुखी नहीं होता। गृहस्थ जीवन से ये बहुत लगाव रखते हैं। धन जमा करना इनका स्वप्न होता है। इन्हें अच्छी चीजों का शौक होता है। इनकी विचारधारा कभी बहुत शूरतापूर्ण तथा कभी बहुत भीरू होती है। जीवन के तीसरे पहर में इन्हें विरासत में धन-सम्पत्ति भी प्राप्त होती है। सिंह लग्न-इस लग्न के जातक तीक्ष्ण स्वभाव वाले तथा क्रोधी होते हैं। इनका कद मध्यम व व्यक्तित्व रौबीला होता है, इन्हें पेट व दांत के रोग होने की सम्भावना रहती है। महत्वाकांक्षा बहुत होती है। ये लोग अपनी बात से बहुत हठी होते हैं तथा उच्चाधिकार प्राप्त होने पर ये खूब रौब जमाते हैं। इनका वैवाहिक जीवन प्राय: सुखी नहीं होता। ये लोग राजनीति में भी पड़ते हैं। ये लोग दूसरों पर अधिक विश्वास रखते हैं। प्राय: कृपालु व उदार-हृदय वाले ये लोग बहुत न्यायप्रिय होते हैं। माता के ये अधिक दुलारे होते हैं। इन्हें अभक्ष्य भक्षण का भी शौक होता है। पुत्र कम होते हैं। तथा सन्तान भी कम होती हैं। कन्या लग्न- इस लग्न के व्यक्ति प्राय: मोटे नहीं होते तथा इनकी तोंद कम निकलती है। ये लोग समय-चतुर तथा बुद्घिमान होते हैं। औपचारिक शिक्षा में इनकी6 अभिरुचि कम होती है। ये लोग दुनियादारी में काफी तेज होते हैं। ये लोग शास्त्र के अर्थ को समझने वाले, गणित प्रेमी,  चिकित्सा या ज्योतिष का शौक रखने वाले तथा गुणी होते हैं। ये लोग विवाह देर से करते हैं तथा विवाह के बाद गृहस्थी में रम जाते हैं। इनकी भौंहे आपस में मिली होती हैं। ये श्रृंगार प्रिय होते हैं। इनका झुकाव धन इकट्ठा करने की तरफ अधिक होता है। ये परिवर्तनशील स्वभाव के होते हैं। अत: ये हरफनमौला बनने का प्रयास करते हैं। यदि कमजोर लग्न हो तो भाग्यहीन होते हैं तथा बली लग्न में संघर्ष के बाद अच्छी सफलता पाते हैं। इन्हें यात्राओं का बहुत शौक होता है। इनकी अभिरुचियों में स्त्रीत्व का प्रभाव पाया जाता है। तुला लग्न-इन लग्न के लोगों का व्यक्तित्व शानदार तथा आकर्षक होता है। इनकी नाक लम्बी व रंग गोरा होता है। ये मूल रूप से बड़े धार्मिक, सत्यवादी, इन्द्रियों को वश में करने वाले तथा तीव्र बुद्घि वाले होते हैं। ये धीर गम्भीर स्वभाव रखते हैं। यदि अष्टम स्थान तथा वृहस्पति पर शुभ प्रभाव हो तो ये सांसारिक होते हुए भी मानवीय मूल्यों की मिसाल होते हैं। क्रूर प्रभाव पड़ने से प्राय: तेज, चालक व शारीरिक श्रम करने वाले हो जाते हैं। इन लोगों में वैरागय की भावना भी जाग सकती है। ये लोग प्राय: सांसारिक सम्बन्धों को अधिक विस्तार नहीं देते है तथा प्राय: अपने परिवार के विरोध का सामना करते हैं। इनकी कल्पना शक्ति व विचारों का स्तर सामान्यत: उन्नत होता है। ये लोकप्रियता प्राप्त करते हैं। कई बड़े सत्पुरुषों का जन्म तुला लग्न में हुआ है। महात्मा गांधी व विवेकानन्द तुला लग्न के व्यक्ति थे। तुला लग्न के व्यक्ति बहुत प्रेममय होते हैं। ये लोग प्राय: लेखक, उपदेशक, व्यापारी आदि भी पाए जाते हैं। वृश्चिक लग्न-इन लग्न के लोग संतुलित शरीर के होते हैं तथा इनके घुटने व पिंडलियां गोलाई लिए होती हैं। ये लोग अपनी बात पर अड़ जाते हैं, प्राय: ये बिना सोचे समझे भी बात को पकड़ कर अड़ते हैं। यद्यपि इनकी कल्पना शक्ति तीव्र होती है तथा ये बुद्धिमान भी होते हैं लेकिन अपने निकटवर्ती धोखेबाज को भी नहीं पहचान पाते। अक्सर ठगे जाने पर अक्लमंदी दिखाते हैं। इन्हें असानी से किसी तरफ भी मोड़ा जा सकता है। ये कामुक स्वभाव के होते हैं तथा अपनी स्त्री के अतिरिक्त भी अन्य स्त्रियों से शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं। दिखने में सरल होते हैं लेकिन अनेक फलितवेत्ता इस बात से सहमत हैं। कि इनमें छिपे तौर पर पाप  vकरने की प्रवृत्ति होती है। स्वभावत: ये खर्चीले स्वभाव के होते हैं, लेकिन अधिकांश खर्च अपने आराम व शौक पर करते हैं। इनका घरेलू जीवन अक्सर अस्त व्यस्त होता है, यदि शुभ प्रभाव से युक्त लग्न हो तो इनकी रुचि गुप्त विद्याओं की तरफ हो जाती है। शुभ प्रभाव वाले लग्न में उत्पन्न होने पर ये कुशल प्रशासक भी होते हैं। धनु लग्न-ये लोग अच्छे शारीरिक गठन वाले होते हैं। शुभ प्रभाव होने पर ये लोग काफी सुन्दर होते हैं। लग्न पर बुरा प्रभाव होने पर इनके दॉत व नाक मोटे हो जाते हैं। ये परिश्रमी तथा धैर्यवान होते हैं। ये लोग जल्दी निर्णय नहीं ले पाते तथा काफी सोच विचार के उपरान्त ही कोई काम करते हैं। ये जोशीले व आलस्य रहित होते हैं अत: जीवन में ये काफी आगे बढ़ते हैं। ये लोग अक्सर सत्यवादी तथा ईमानदार होते हैं लेकिन शनि, राहु, मंगल का प्रभाव लग्न पर हो तो ये प्राय: स्वार्थी व धोखेबाज भी बन जाते हैं। तब इनकी कथनी व करनी में बहुत अन्तर होता है। प्राय: ये लोग धनी तथा भाग्यशाली होते हैं। मकर लग्न-इस लग्न के लोग लम्बे कद के निकलते हैं। इनका शारीरिक विकास धीरे-धीरे होता है। ये दिखने में कठोर व्यक्तित्व वाले होते हैं। ये लोग दूसरों की बात को बड़े ध्यान से सुनते हैं तथा सुन-सुनकर ही बहुत कुछ सीखते हैं। इनकी सहन शक्ति बहुत होती है। ये लोग हर एक बात को बड़े व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखते हैं। ये लोग धीरे-धीरे सन्तोष से अपना काम करते है। यदि लग्न पर अशुभ प्रभाव हो तो ये लोग धोखेबाज, जेब कतरे, चोर तथा दादागिरी दिखाने वाले हो जाते हैं। इसके विपरीत शुभ प्रभाव होने पर ये ईमानदार तथा कर्तव्यनिष्ठ होते हैं। ये लोग अन्धभक्ति करने वाले, स्रेह से सब कुछ न्यौछावर करने वाले तथा शक्ति से वश में न होने वाले होते हैं। ये लोग बहुत परिश्रमी होते हैं। तथा सबके प्रति बड़ा सेवा भाव रखते हैं। यदि इनके स्वाभिमान की रक्षा होती रहे तो बड़े-बड़े दान-पुण्य के महान कार्य कर देते हैं। ये अड़ियल होते हैं। तथा मुसीबत का सीना तान कर सामना करते हैं। प्राय: ये पुरानी विचार धाराओं को मानने वाले होते हैं। कुम्भ लग्न-इस लग्न के व्यक्ति पूरे लम्बे कद तथा लम्बी गरदन वाले होते हैं। ये लोग बहुत सन्तुलित स्वभाव वाले तथा एकान्त प्रिय देखे गए हैं। संघर्ष करने की इनमें क्षमता होती है। ये लोग अपने सिद्घान्त के लिए सब कुछ दांव पर लगा सकते हैं। इनका कभी कभी थोड़े समय के लिए बहुत भाग्योदय हो जाता है।  ये लोग बीस वर्ष के उपरान्त ही सफलता पाना शुरू करते हैं। इनके काम रातों रात सम्पन्न नहीं होते, अपितु मेहनत से करने पड़ते हैं। इन्हें अपनी बात समझाकर अपने ढंग से चलाना बड़ा मुश्किल कार्य होता है। लेकिन बात समझ में आने पर ये पूरी ईमानदारी व तत्परता से उसे मान लेंगे। इन्हें जीवन में प्राय: हर सिरे से असन्तोष होता है। ये लोग अपने असन्तोष को कभी कभी संघर्ष की शक्ल में या विद्रोह के रूप में प्रकट करते हैं। शारीरिक कष्ट सहने की इनमें अद्भुत क्षमता पाई जाती है। इनका विवाह थोड़ी देर से तथा अक्सर बेमेल होता है। ये लोग सबको अपने ढंग से चलाने का प्रयास करते हैं। प्राय: इनका भाग्योदय स्थायी नहीं होता है। फिर भी ये अपने क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध होते हैं। मीन लग्न-इन लग्न के व्यक्ति प्राय: नाटे देखे जाते हैं। इनका माथा औसत शरीर के अनुपात में थोड़ा बड़ा दिखता है। ये लोग जीवन में बेचैनी अनुभव करते हैं तथा कभी कभी दार्शनिकता की तरफ झुक जाते हैं। ये लोग अस्थिर स्वभाव के होते हैं। इनमें अभिनेता, कवि, चिकित्सक, अध्यापक, या संगीतकार बनने योग्य गुण होते हैं। इन्हें प्राय: पैतृक सम्पत्ति प्राप्त होती है तथा ये लोग उसे बढ़ाने की पूरी कोशिश करते हैं। भीतरी तौर पर ये लोग दब्बू तथा डरपोक होते हैं। इन्हें सन्तान अधिक होती है। तथा ये स्वभाव से उद्यमी नहीं होते हैं। इन्हें जीवन में अचानक हानि उठानी पड़ती है। यदि वृहस्पति अशुभ स्थानों में अशुभ प्रभाव में हो तो प्रारम्भिक अवस्था में इनके जीवन की सम्भावना क्षीण होती हैं। इस तरह हमने जाना कि जन्म लग्न मानव स्वभाव व उसके व्यक्तित्व की संरचना में बड़ा योगदान करता है। लग्न पर प्रभाव से उपर्युक्त गुणों में न्यूनता या अधिकता देखी जाती है। यदि लग्नेश बलवान होकर शुभ स्थानों में शुभ ग्रहों से दृष्ट या युत हो तो बहुत से दोषों को दूर कर देता है।
+1 vote
जातक की कुंडली में होने वाले शनि दोष का मतलब होता है कि यदि किसी जातक की कुंडली में शनि ऐसी जगह पर विराजमान हो, जहां वह जातक के लिए कष्टदायक व नुकसानदायक हो। शनि धीमी चाल से चलते हैं, इसीलिए इनका प्रभाव भी जातक पर लम्बे समय के लिए रहता हैं। जैसे की शनि की साढ़ेसाती (साढ़े सात साल), शनि की ढैय्या (ढाई साल) आदि। वहीं शनि दोष का प्रभाव इतना बुरा होता है कि आसमान पर बैठा व्यक्ति जमीन पर आ जाता है। इसीलिए शनि को क्रूर व् दुष्ट ग्रह भी माना जाता है। लेकिन असल में यह लोगो को केवल उनके बुरे कर्मों के लिए ही दण्डित करते हैं और प्रसन्न होने पर जातक को आसमान की बुलंदियों पर भी पहुंचा सकते हैं। कुंडली में होने वाले शनि दोष से बचने के उपाय... यदि आप भी कुंडली में शनि दोष से परेशान हैं, तो कुछ आसान तरीकों का इस्तेमाल करके आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। शनिदेव को प्रसन्न करें यह उपाय... कोई भी अनुचित कार्य न करें, चूकिं शनि को न्याय का देवता माना जाता है। अत: यदि आप किसी प्रकार के बुरे कर्मों में शामिल नहीं होते हैं, तो माना जाता है कि शनि अपनी दशा आने पर भी ऐसे लोगों पर न्याय के अनुसार दया बरसाते हैं, न कि कोई दंड देते हैं। इसके अतिरिक्त यदि आपकी कुंडली में ही शनि परेशानी के कारक हैं, या शनि की दशा आपको काफी परेशान कर रही है तो इससे बचने के लिए... शनिवार को करें ये उपाय... : प्रत्येक शनिवार को शनि मंदिर में जाएं। : शनि जी की उपासना करें और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करें। : शनिवार के दिन राई, तेल, उड़द, काला कपड़ा, जूते आदि का दान करना चाहिए। : लोहे की चीजें शनिवार को न खरीदें। : शनि मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। : शनिवार के दिन कटोरी में सरसों का तेल डालकर उसमें अपना चेहरा देखें और उस तेल को दान करें। : शनिवार के दिन अपनी गलतियों के लिए शनिदेव से माफ़ी मांगे। : इसके साथ ही शनि के रत्न नीलम को कभी भी किसी जानकार के कहे बिना धारण न करें, यदि कोई जानकार नीलम धारण करने की सलाह भी दे तो भी उनसे पूरी विधि के साथ ही धारण करने का समय, दिन व किन मंत्रों के साथ धारण करनी है, ये पूरी तरह से समझ कर ही इसे पहनें। हनुमान जी की अराधना शनिवार के दिन आपको हनुमान मंदिर में जाना चाहिए और हनुमान जी के सामने लाल रंग के कपडे पहनकर खड़े होना चाहिए। हाथ जोड़कर हनुमान जी की अराधना करें व हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा हर शनिवार को करें ऐसा करने से भी कुंडली में शनि दोष को खत्म करने में मदद मिलती है। शनि दोष को कम करने के लिए करें पीपल की पूजा पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं। खासकर शनिवार के दिन ऐसा जरूर करें। पीपल के साथ शमी के पेड़ की भी पूजा करें। यह दोनों उपाय शनि दोष के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं। शिव उपासना: देती है शनि के प्रकोप से राहत नियमित रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। भोलेबाबा की अराधना करें। शिव मंत्रों का उच्चारण करें। ऐसा करने से भी जातक को कुंडली में शनि की दशा को सही करने में मदद मिलती है। पश्चिम दिशा में करें यह उपाय नियमित शाम के समय पश्चिम दिशा की और एक दीपक जरूर जलाएं। और उसके बाद शनि मंत्रो का उच्चारण करें। इससे भी आप पर शनि की कृपा बने रहने में मदद मिलती है। कौवे को रोटी नियमित कौवे को रोटी खिलाएं। चीटियों को आटा खिलाएं। दरवाज़े पर आये गरीब को भूखे पेट न भेजें। यह सभी कर्म भी शनि दोष को कम करने में मदद करते हैं।
0 votes
शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा होती है और शुभ फल प्राप्त होते हैं. शनिवार शनिदेव का दिन माना जाता है. मान्‍यताओं के मुताबिक इस दिन कुछ गलत चीजें घर में लाने से शनिदेव के प्रकोप का सामना करना पड़ सकता है. शनिदेव कुपित हो सकते हैं. ये कुछ ऐसी चीजें हैं, जिन्‍हें खरीदने और घर में लाने से इनसे धन की हानि के साथ-साथ दुर्भाग्य का सामना भी करना पड़ सकता है. हम आज आपको ऐसी ही कुछ चीजों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिन्हें शनिवार को नहीं खरीदना चाहिए. लोहा: शनिवार के दिन लोहा खरीदने से बचना चाहिए. ऐसा करने से धन की हानि हो सकती है. तेल: मान्‍यताओं के अनुसार शनिवार के दिन तेल का दान तो किया जा सकता है, लेकिन इस दिन इसे खरीदना नहीं चाहिए. काला रंग: शनिवार को काले कपड़े या काले जूते नहीं खरीदने चाहिए. इससे शनिदेव क्रोधित होते हैं. ऐसा करने से हर कार्य में असफलता मिलती हैं और भाग्‍य साथ नहीं देता. नमक: शनिवार को नमक खरीदने से बचें. यह कर्जदार बनाता है और रोग होते हैं. काले तिल: शनिदेव को काले तिल नहीं खरीदने चाहिए. मान्‍यता है कि इस दिन ऐसा करने से कार्यों में बाधा उत्‍पन्‍न होती है. कैंची: शनिवार के दिन कैंची खरीदने से बचना चाहिए. मान्‍यता है कि इस दिन कैंची खरीदने से रिश्तों में तनाव पैदा होता है. झाडू: इस दिन झाडू भी खरीदने से बचना चाहिए. मान्‍यता है कि इससे धन का नाश हो होता है.
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...