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चैत्र नवरात्रि 2020 जानिए महत्व और ग्रहों को शांत करने के उपाय

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हिन्दू धर्म में मुख्य रूप से नवरात्रि के त्यौहार को बेहद ख़ास माना जाता है। इस दौरान पूरे नौ दिनों तक देवी मान के विभिन्न नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि, देवी के विभिन्न रूपों की पूजा करने से विभिन्न प्रकार के ग्रहों की शांति भी होती है। आज हम आपको मुख्य रूप से नवरात्रि के नौ दिनों के अंतर्गत देवी के उन सभी रूपों के साथ ही उन ग्रहों के बारे में भी बताने जा रहे हैं जिनकी पूजा करने से उनकी शांति हो सकती है। प्रथम दिन नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माता शैलीपुत्री को विशेष रूप से चंद्रमा का कारक माना जाता है। लिहाजा इस दिन विशेष रूप से माँ शैलपुत्री की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति के चंद्रमा ग्रह की शांति होती है। दूसरा दिन नवरात्रि के दूसरे दिन मुख्य रूप से दुर्गा माँ के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजा की जाती है। माता ब्रह्मचारिणी विशेष रूप से मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से व्यक्ति के मंगल ग्रह की शांति होती है। तीसरा दिन नवरात्रि के तीसरे दिन खासतौर से देवी चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जाती है। माता चन्द्रघंटा को मुख्य रूप से शुक्रग्रह का कारक माना जाता है। इस दिन माता के इस रूप की पूजा अर्चना करने से विशेष रूप से शुक्र ग्रह की शांति होती है और व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि आती है। चौथा दिन नवरात्रि के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन माँ के इस रूप की पूजा उन लोगों को अवश्य करनी चाहिए जिनकी कुंडली में सूर्य की स्थिति कमजोर हो। सूर्य ग्रह की शांति के लिए श्रद्धा पूर्वक माता कुष्मांडा की पूजा की जानी चाहिए। पांचवां दिन नवरात्रि के पांचवें दिन खासतौर से देवी स्कंदमाता की पूजा अर्चना की जाती है। माँ स्कंदमाता को विशेष रूप से बुध ग्रह का नियंत्रण प्राप्त है। इस लिहाज से जिन व्यक्तियों को बुध ग्रह की शांति करनी हो उन्हें विशेषतौर पर आज के दिन माँ के इस रूप की पूजा जरूर करनी चाहिए। छठे दिन नवरात्रि के छठे दिन विशेष रूप से माता कात्यायनी की पूजा की जाती है। माँ के इस रूप को मुख्य रूप से बृहस्पति ग्रह का नियंत्रण प्राप्त है। इस दिन माता कात्यायनी की पूजा अर्चना करने से बृहस्पति ग्रह की शांति होती है। सातवां दिन नवरात्रि के सातवें दिन विशेष रूप से माँ के कालरात्रि की आराधना की जाती है। देवी के इस रूप को शनि ग्रह का नियंत्रण प्राप्त है। बहरहाल इस दिन आप माता कालरात्रि की पूजा अर्चना कर शनि ग्रह की शांति कर सकते हैं। आठवां दिन नवरात्र के आठवें दिन विशेष रूप से महागौरी की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन माँ के इस रूप की आराधना करने से आप राहु ग्रह दोष से मुक्त हो सकते हैं। माता के इस स्वरुप को मुख्य रूप से राहु ग्रह का नियंत्रण प्राप्त है। नौवां दिन केतु ग्रह के विपरीत प्रभावों से बचने के लिए नवरात्रि के नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन माता के इस स्वरुप का नमन कर और केतु ग्रह दोष से मुक्त हो सकते हैं।

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चैत्र नवरात्रि 2020 जानिए महत्व और ग्रहों को शांत करने के उपाय
posted Mar 25 by Deepika Maheshwary

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चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 25 मार्च से होने जा रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखें तो इस समय पंचक लगा रहेगा। बहुत सारे लोगों के मन में नवरात्रि का पंचक में शुरू होने को लेकर कई सवाल होंगे, जैसे इस दौरान पूजा करना शुभ रहेगा या नहीं! क्या आपके द्वारा की गयी पूजा फलदायक होगी ? या उसका पूर्ण फल आपको मिलेगा या नहीं मिलेगा? पंचक के दौरान कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए ? आपके ऐसे सभी सवालों का जवाब हम आपको देंगे। तो चलिए आपको बताते हैं नवरात्रि और पंचक से जुड़ी हुई कुछ खास बातें- नवरात्रि से पहले ही लग जाएगा पंचक नवरात्रों की शुरुआत 25 मार्च, बुधवार से हो रही है, जबकि पांच दिनों तक चलने वाले पंचक 21 मार्च से शुरू हो जाएंगे। पंचक की शुरुआत 21 मार्च, शनिवार को धनिष्ठा नक्षत्र में प्रातः 6:20 पर होगी, और पंचक की समाप्ति 26 मार्च, गुरुवार को रेवती नक्षत्र में प्रातः 7:16 पर होगी। शनिवार से शुरू होने वाले पंचक मृत्यु पंचक कहलाते हैं। यह पंचक काफी घातक और अशुभ पंचक माना जाता है। इस साल मृत्यु पंचक में ही नवरात्रों की शुरुआत हो रही है। पंचक शुभ या अशुभ? पंचक एक ऐसा समय होता है, जिसे ज्योतिष में अशुभ मानते हैं। आमतौर पर पंचक को लेकर लोगों के मन में एक डर होता है कि इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। जबकि आपको पता होना चाहिए कि सभी शुभ कार्यों के लिए पंचक वर्जित नहीं होता है। नवरात्र शक्ति की आराधना का त्यौहार होता है। हम सभी जानते हैं कि नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान लोग अपने घरों में कलश स्थापना करते हैं, और सच्चे मन से माँ दुर्गा की पूजा-पाठ, हवन आदि करते हैं। इतने पावन समय में पंचक मान्य नहीं होता है, इसीलिए चैत्र नवरात्रि के दौरान पूजा आदि में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी और आप पूरी भक्ति के साथ मां दुर्गा की आराधना कर सकते हैं। क्या होता है पंचक ? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पांच नक्षत्रों के मेल से बनने वाले विशेष योग को पंचक कहा जाता है। पंचक धनिष्ठा नक्षत्र के प्रारम्भ से रेवती नक्षत्र के अंत तक का समय होता है, जिस दौरान किसी भी शुभ कार्य को करना अच्छा नहीं माना जाता है। पंचक के दौरान भूलकर भी न करें ये काम पंचक के दौरान बेड या लकड़ी की कोई चीज़ बनवाना अच्छा नहीं माना जाता है। इसके अलावा पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय में घास, लकड़ी आदि जैसी जलने वाली वस्तुएँ इकट्ठी नहीं करते। दक्षिण दिशा में यात्रा भी इस समय में वर्जित माना जाता है, क्योंकि दक्षिण दिशा यमराज की दिशा मानी जाती है। पंचक में जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, तो उस समय घर की छत नहीं बनवानी चाहिए। पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करना सही नहीं रहता, इसीलिए ऐसा करने से पहले किसी योग्य कर्मकांडी विद्वान की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।
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पितृ पक्ष अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए कौन-कौन सा उपाय करना शुभ होगा। 1. कर्मकांड के जानकारों की मानें हो पितृ पक्ष अमावस्या और शनि अमावस्या का सबसे अधिक लाभ उठान के लिए जरूरतमंदों को काले तिल, जौ, कपड़े, जूते, उड़द दाल और गुड़ आदि दान करना चाहिए। 2. पितृ पक्ष अमावस्या के दिन पीपल की विशेष पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि इस दिन पीपल के पेड़ में शनिदेव का निवास होता है। इसके अलावा पितृ पक्ष की अमावसाया के दिन पीपल के पत्ते पर जल और तिल के साथ पांच प्रकार की मिठाईयां रखनी चाहिए। 3. पितृ पक्ष अमावस्या यानि श्राद्ध के अंतिम दिन गाय, कौआ, कुत्ता और चींटी को भोजन कराना शुभ माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितर खुश होकर परलोक गमन करते हैं।
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आज हम बात करेंगे महिलाएं और उनको प्रभावित करने वाले नौ ग्रहों के विषय मे वैसे तो सौरमंडल के सभी ग्रह धरती पर सभी प्राणियों पर एक जैसा ही प्रभाव डालते हैं। लेकिन सभी प्राणियों का रहन सहन और प्रवृत्ति या प्रकृति एक दूसरे से भिन्न होती है इसलिए ग्रहों का प्रभाव कुछ कम -ज्यादा तो होता ही है। यहाँ सिर्फ महिलाओं पर सभी ग्रहों के प्रभाव का ही जिक्र किया जा रहा है। कई बार महिलाएं असामान्य व्यवहार करती हैं तो उन्हें बहुत झेलना पड़ता है कि उसे किसी ने कुछ सिखा दिया है या बहाने बना रही है जबकि कई बार ग्रहों की अच्छी (उग्र) या बुरी ( कुपित ) स्थिति भी कारण होती है। जन्म -कुंडली में विभिन्न ग्रहों के साथ युति का अलग-अलग प्रभाव हो सकता है। ♐सूर्य सूर्य एक उष्ण और सतोगुणी ग्रह है,यह आत्मा और पिता का कारक हो कर राज योग भी देता है। अगर जन्म कुंडली में यह अच्छी स्थिति में हो तो इंसान को स्फूर्तिवान,प्रभावशाली व्यक्तित्व, महत्वाकांक्षी और उदार बनाता है। परन्तु निर्बल सूर्य या दूषित सूर्य होने पर इंसान को चिड़चिड़ा, क्रोधी, घमंडी, आक्रामक और अविश्वसनीय बना देता है। अगर किसी महिला कि कुंडली में सूर्य अच्छा हो तो वह हमेशा अग्रणी ही रहती है और निष्पक्ष न्याय में विश्वास करती है चाहे वो शिक्षित हो या नहीं पर अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देती है। परन्तु जब यही सूर्य उसकी कुंडली में नीच का हो या दूषित हो जाये तो महिला अपने दिल पर एक बोझ सा लिए फिरती है। अन्दर से कभी भी खुश नहीं रहती और आस -पास का माहौल भी तनाव पूर्ण बनाये रखती है। जो घटना अभी घटी ही ना हो उसके लिए पहले ही परेशान हो कर दूसरों को भी परेशान किये रहती है। बात-बात पर शिकायतें, उलाहने उसकी जुबान पर तो रहते ही हैं, धीरे -धीरे दिल पर बोझ लिए वह एक दिन रक्त चाप की मरीज बन जाती है और न केवल वह बल्कि उसके साथ रहने वाले भी इस बीमारी के शिकार हो जाते है। दूषित सूर्य वाली महिलायें अपनी ही मर्जी से दुनिया को चलाने में यकीन रखती हैं सिर्फ अपने नजरिये को ही सही मानती हैं दूसरा चाहे कितना ही सही हो उसे विश्वास नहीं होगा। सूर्य का आत्मा से सीधा सम्बन्ध होने के कारण यह अगर दूषित या नीच का हो तो दिल डूबा-डूबा सा रहता है जिस कारण चेहरा निस्तेज सा होने लगता है। ♐उपाय♏ सूर्य को जल देना ,सुबह उगते हुए सूर्य को कम से कम पंद्रह -मिनट देखते हुए गायत्री मन्त्र का जाप ,आदित्य-हृदय का पाठ और अधिक परेशानी हो तो रविवार का व्रत भी किया जा सकता है। संतरी रंग (उगते हुए सूरज) का प्रयोग अधिक करें . ♐चंद्रमा किसी भी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। स्त्री की कुंडली में इसका महत्व और भी अधिक है। चन्द्र राशि से स्त्री का स्वभाव, प्रकृति, गुण -अवगुण आदि निर्धारित होते है। चंद्रमा माता, मन, मस्तिष्क, बुद्धिमत्ता, स्वभाव, जननेन्द्रियाँ, प्रजनन सम्बंधी रोगों, गर्भाशय अंडाशय, मूत्र -संस्थान, छाती और स्तन का कारक है..इसके साथ ही स्त्री के मासिक -धर्म ,गर्भाधान एवं प्रजनन आदि महत्वपूर्ण क्षेत्र भी इसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। चंद्रमा मन का कारक है ,इसका निर्बल और दूषित होना मन एवं मति को भ्रमित कर किसी भी इंसान को पागल तक बना सकता है। कुंडली में चंद्रमा की कैसी स्थिति होगी यह किसी भी महिला के आचार -व्यवहार से जाना जा सकता है। अच्छे चंद्रमा की स्थिति में कोई भी महिला खुश -मिजाज होती है। चेहरे पर चंद्रमा की तरह ही उजाला होता है। यहाँ गोरे रंग की बात नहीं की गयी है क्योंकि चंद्रमा की विभिन्न ग्रहों के साथ युति का अलग -अलग प्रभाव हो सकता है। कुंडली का अच्छा चंद्रमा किसी भी महिला को सुहृदय ,कल्पनाशील और एक सटीक विचारधारा युक्त करता है। अच्छा चन्द्र महिला को धार्मिक और जनसेवी भी बनाता है। लेकिन किसी महिला की कुंडली में यही चन्द्र नीच का हो जाये या किसी पापी ग्रह के साथ या अमावस्या का जन्म को या फिर क्षीण हो तो महिला सदैव भ्रमित ही रहेगी। हर पल एक भय सा सताता रहेगा या उसको लगता रहेगा कोई उसका पीछा कर रहा है या कोई भूत -प्रेत का साया उसको परेशान कर रहा है। कमजोर या नीच का चन्द्र किसी भी महिला को भीड़ भरे स्थानों से दूर रहने को उकसाएगा और एकांतवासी कर देता है धीरे-धीरे। , महिला को एक चिंता सी सताती रहती है जैसे कोई अनहोनी होने वाली है। बात-बात पर रोना या हिस्टीरिया जैसी बीमारी से भी ग्रसित हो सकती है। बहुत चुप रहने लगती है या बहुत ज्यादा बोलना शुरू कर देती है। ऐसे में तो घर-परिवार और आस पास का माहौल खराब होता ही है। बार-बार हाथ धोना, अपने बिस्तर पर किसी को हाथ नहीं लगाने देना और देर तक नहाना भी कमजोर चन्द्र की निशानी है। ऐसे में जन्म-कुंडली का अच्छी तरह से विश्लेषण करवाकर उपाय करवाना चाहिए। ♐उपाय♐ अगर किसी महिला के पास कुंडली नहीं हो तो ये सामान्य उपाय किये जा सकते हैं, जैसे शिव आराधाना,अच्छा मधुर संगीत सुनें, कमरे में अँधेरा न रखें,हल्के रंगों का प्रयोग करें। पानी में केवड़े का एसेंस डाल कर पियें, सोमवार को एक गिलास ढूध और एक मुट्ठी चावल का दान मंदिर में दं, और घर में बड़ी उम्र की महिलाओं के रोज चरण -स्पर्श करते हुए उनका आशीर्वाद अवश्य लें। छोटे बच्चों के साथ बैठने से भी चंद्रमा अनुकूल होता है। ♈♈♈♈♈♈♈♈♈♈♈♈♈ ♐मंगल⏬ ग्रहों का सेनापति मंगल, अग्नितत्व प्रधान तेजस ग्रह है। इसका रंग लाल है और यह रक्त-संबंधो का प्रतिनिधित्व करता है। जिस किसी भी स्त्री की जन्म कुंडली में मंगल शुभ और मजबूत स्थिति में होता है उसे वह प्रबल राज योग प्रदान करता है। शुभ मंगल से स्त्री अनुशासित, न्यायप्रिय,समाज में प्रिय और सम्मानित होती है। जब मंगल ग्रह का पापी और क्रूर ग्रहों का साथ हो जाता है तो स्त्री को मान -मर्यादा भूलने वाली ,क्रूर और हृदय हीन भी बना देता है। मंगल रक्त और स्वभाव में उत्तेजना, उग्रता और आक्रामकता लाता है इसीलिए जन्म-कुंडली में विवाह से संबंधित भावों–जैसे द्वादश, लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम व अष्टम भाव में मंगल की स्थिति को विवाह और दांपत्य जीवन के लिए अशुभ माना जाता है। ऐसी कन्या मांगलिक कहलाती है। लेकिन जिन स्त्रियों की जन्म कुंडली में मंगल कमजोर स्थिति में हो तो वह आलसी और बुजदिल होती है,थोड़ी सी डरपोक भी होती है। मन ही मन सोचती है पर प्रकट रूप से कह नहीं पाती और मानसिक अवसाद में घिरती चली जाती है। ⏬उपाय⏬ कमजोर मंगल वाली स्त्रियाँ हाथ में लाल रंग का धागा बांध कर रखे और भोजन करने के बाद थोड़ा सा गुड़ जरुर खा लें। ताम्बे के गिलास में पानी पियें और अनामिका में ताम्बे का छल्ला पहन लें। जिन स्त्रियों की जन्म कुंडली में मंगल उग्र स्थिति में होता है उनको लाल रंग कम धारण करना चाहिए और मसूर की दाल का दान करना चाहिए। रक्त-सम्बन्धियों का सम्मान करना चाहिए जैसे बुआ, मौसी, बहन,भाई और अगर शादी शुदा है तो पति के रक्त सम्बन्धियों का भी सम्मान करें . हनुमान जी की शरण में रहना कैसे भी मंगल दोष को शांत रखता है। ◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀◀ ♐बुध♐ बुध ग्रह एक शुभ और रजोगुणी प्रवृत्ति का है। यह किसी भी स्त्री में बुद्धि, निपुणता, वाणी ..वाकशक्ति, व्यापार, विद्या में बुद्धि का उपयोग तथा मातुल पक्ष का नैसर्गिक कारक है। यह द्विस्वभाव, अस्थिर और नपुंसक ग्रह होने के साथ-साथ शुभ होते हुए भी जिस ग्रह के साथ स्थित होता है, उसी प्रकार के फल देने लगता है। अगर शुभ ग्रह के साथ हो तो शुभ, अशुभ ग्रह के अशुभ प्रभाव देता है। अगर यह पाप ग्रहों के दुष्प्रभाव में हो तो स्त्री कटु भाषी, अपनी बुद्धि से काम न लेने वाली यानि दूसरों की बातों में आने वाली या हम कह सकते हैं कि कानाें की कच्ची होती है। जो घटना घटित भी न हुई उसके लिए पहले से ही चिंता करने वाली और चर्मरोगों से ग्रसित हो जाती है। बुध बुद्धि का परिचायक भी है अगर यह दूषित चंद्रमा के प्रभाव में आ जाता है तो स्त्री को आत्मघाती कदम की तरफ भी ले जा सकता है। जिस किसी भी स्त्री का बुध शुभ प्रभाव में होता है वे अपनी वाणी के द्वारा जीवन की सभी ऊँचाइयों को छूती हैं, अत्यंत बुद्धिमान, विद्वान् और चतुर और एक अच्छी सलाहकार साबित होती है। व्यापार में भी अग्रणी तथा कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी समस्याओं का हल निकाल लेती हैं। उपाय♓ हरे मूंग (साबुत), हरी पत्तेदार सब्जी का सेवन और दान, हरे वस्त्र को धारण और दान देना उपुयक्त है। तांबे के गिलास में जल पीना चाहिए। अगर कुंडली न हो और मानसिक अवसाद ज्यादा रहता हो तो सफेद और हरे रंग के धागे को आपस में मिला कर अपनी कलाई में बाँध लेना चाहिए।

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मंगलवार हिंदू धर्म में हनुमान जी का दिन होता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक हनुमान जी उन देवताओं में शुमार होते हैं जो भक्तों पर बहुत जल्दी कृपा बरसाते हैं। हालांकि हनुमान जी का दिन शनिवार को भी माना जाता है लेकिन सबसे ज्यादा फलदायक अराधना का दिन मंगलवार ही होता है। मंगलवार को हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए लोग उनकी प्रिय वस्तुएं चढ़ाते हैं जैसे सिंदूर, चमेली का तेल और चोला आदि चढ़ाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन चीजों को मंगलवार को चढ़ाने से हनुमान जी प्रसन्न होकर भक्तों के संकट दूर करते हैं और सभी मनोरथ को पूर्ण करते हैं। हनुमान जी पर सिंदूरी चोला क्यों चढ़ाते हैं मंगलवार या शनिवार को दिन हनुमान जी की प्रतिमा को चोला चढ़ाते हैं। हनुमानजी की कृपा प्राप्त करने के लिए मंगलवार को तथा शनि महाराज की साढ़े साती, अढैया, दशा, अंतरदशा में कष्ट कम करने के लिए शनिवार को चोला चढ़ाया जाता है। हनुमान जी की प्रतिमा को सिंदूर का चोला चढ़ाने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। हनुमान जी को सिंदूर लगाने से प्रतिमा का संरक्षण होता है। इससे प्रतिमा किसी प्रकार से खंडित नहीं होती और लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। साथ ही चोला चढ़ाने से प्रतिमा की सुंदरता बढ़ती है, हनुमानजी का प्रतिबिंब साफ-साफ दिखाई देता है। जिससे भक्तों की आस्था और अधिक बढ़ती है। चोला चढ़ाए जाने को लेकर एक बात का ध्यान रखना चाहिए कि उसे पूरा चढ़ाया जाना चाहिए। यानी हनुमान जी की प्रतिमा उपर से लेकर नीचे तक पूरी तरह ढ़क जाएं। कैसे चढ़ाएं चोला -मंगलवार के दिन हनुमानजी को चोला चढाएं। -चोला चढ़ाने के लिए चमेली के तेल का उपयोग करें। - -चोला चढ़ाते समय एक दीपक हनुमानजी के सामने जलाकर रखें। दीपक में भी चमेली के तेल का ही उपयोग करें। -हनुमान की प्रतिमा पर सिंदूर का चोला चढ़ाने जा रहे हैं तो पहले उनकी प्रतिमा को जल से स्नान कराएं। -सभी पूजा सामग्री अर्पण करें। -इसके बाद मंत्र का उच्चारण करते हुए चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर या सीधे प्रतिमा पर हल्का सा देसी घी लगाकर उस पर सिंदूर का चोला चढ़ा दें। इस प्रक्रिया में कुछ बातें समझने की हैं। पहली बात चोला चढ़ाने में ध्यान रखने की है। अछूते (शुद्ध) वस्त्र धारण करें। दूसरी नख से शिख तक (सृष्टि क्रम) तथा शिख से नख तक संहार क्रम होता है। सृष्टि क्रम यानी पैरों से मस्तक तक चढ़ाने में देवता सौम्य रहते हैं। संहार क्रम से चढ़ाने में देवता उग्र हो जाते हैं। यह चीज श्रीयंत्र साधना में सरलता से समझी जा सकती है। यदि कोई विशेष कामना पूर्ति हो तो पहले संहार क्रम से, जब तक कि कामना पूर्ण न हो जाए, पश्चात सृष्टि क्रम से चोला चढ़ाया जा सकता है। -चोले में चमेली के तेल में सिन्दूर मिलाकर प्रतिमा पर लेपन कर अच्‍छी तरह मलकर, रगड़कर चांदी या सोने का वर्क चढ़ाते हैं। -चोला चढ़ाने के दिन सात्विक जीवन, मानसिक एवं शारीरिक ब्रह्मचर्य का पालन अनिवार्य है। -चोला कभी भी एक या दो नहीं चढ़ाया जाता। -चोला चढ़ाने के पहले संकल्प करना चाहिए। फिर 5, 11, 21, 51 या फिर 101 चोला (लगातार) चढ़ाना चाहिए। -ऐसा कहा जाता है कि 11 या 21 चोला चढ़ाने से हनुमान जी सभी मनोरथों को सिद्ध करते हैं। -चोला चढ़ाने के दिन बेहतर होगा कि उस मंदिर का सिंदूर तिलक आप ही बनाएं। फिर इसके बाद चमेली के तेल के कुछ छीटें हनुमान जी की प्रतिमा पर लगा दें और उन्हें जनेऊ पहनाएं। यह काम करने के बाद हनुमान जी को चने, गुड़ और मिठाई आदि का भोग लगाएं। भोग लगाने के बाद हनुमान जी को पान और सुपारी अर्पित करें। फिर धूप, दीप दिखाने के बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार हनुमान जी को दक्षिणा भेंट करें। अंत में हनुमान चालीसा का पाठ और आरती करें और फिर प्रतिमा से सिंदूर लेकर अपने माथे पर लगाएं और अपनी मनोकामना कहें।
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यदि कहीं पर आपका धन फंसा हुआ है तो घबराएँ नहीं, पढ़ें फंसा हुआ धन प्राप्त करने के उपाय और जानें कैसे आप अपना धन प्राप्त कर सकते हैं। हमारे जीवन में कई बार ऐसी परिस्थितियाँ निर्मित हो जाती हैं जिससे कि उधारी में हमारे पैसे डूबने, रुकने या फिर फंसने की नौबत आ जाती है। ऐसे में फंसा हुआ धन पाना मुश्किल हो जाता है और हम उसको लेकर परेशान होते हैं, हमारी रातों की नींद उड़ जाती है और दिन का चैन खो जाता है। पैसा फंसने पर आपके मन कई तरह के सवाल आते होंगे। जैसे- फंसा हुआ धन वापस कैसे लें?, फंसा धन पाने के क्या तरीक़े हैं? फंसा धन कैसे पाया जाए? पैसा वापस पाने के उपाय क्या हैं? रुका हुआ धन प्राप्ति के उपाय क्या है? इत्यादि। इसलिए फंसा हुआ पैसा निकालने के उपाय हमारे लिए बहुत ज़रुरी हैं। इसके साथ ही यदि किसी व्यक्ति ने आपसे पैसे उधार लिए हैं और वह उस उधारी को चुकाने के लिए आनाकानी कर रहा है तो आपके लिए इस लेख में उधारी वसूलने के उपाय दिए जा रहे हैं। इन उपाय को कर आप आसानी से अपना उधार दिया पैसा वापस पा सकेंगे। रुका हुआ पैसा निकालने के उपाय से संबंधित इस लेख में बहुत ही सरल उपाय बताए गए जा रहे हैं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण ज्योतिष शास्त्र में फंसा हुआ धन प्राप्त करने के उपाय के तहत विस्तृत उल्लेख है। परंतु इससे पहले हम आपको ज़रुरी बिंदुओं को बताना सही समझते हैं। यदि आपकी कुंडली में गुरु एवं शुक्र ग्रह मज़बूत हैं तो आपके रुके हुए धन के वापस आने के योग हैं। इसके विपरीत यदि कुंडली में मंगल, शनि एवं राहु अशुभ हों तो आपको धन हानि होगी। कुंडली में दशम भाव हमारे कर्म का और नवम भाव भाग्य का होता है। वहीं ग्यारहवां भाव लाभ का और दूसरा भाव हमारे द्वारा कमाए गए धन का होता है। जन्म कुंडली में छठे, आठवें और बारहवें भाव के स्वामी कुंडली में हावी हों तो धन हानि, क़र्ज़ और धन चोरी का सामना करना पड़ता है इसलिए किसी भी ज्योतिषीय उपाय को आजमाने से पूर्व किसी ज्योतिष के ज्ञानी को इन भावों को अवश्य दिखाएं। धन वापस पाने के ज्योतिषीय उपाय कुंडली में शुक्र व गुरु को मज़बूत करें कुंडली में द्वितीय, नवम, दशम एवं एकादश भाव एवं इनके भावेशों को मज़बूत करें कुडली में शनि, राहु एवं मंगल यदि बुरे भाव में हैं तो उनकी शांति का उपाय करें पितृ दोष निवारण के उपाय करें पूर्ण विधि के साथ श्रीयंत्र को स्थापित करें नियमानुसार महालक्ष्मी यंत्र को स्थापित करें व्यापार वृद्धि यंत्र को स्थापित करें पूजा विधि के अनुसार श्री धन वर्षा यंत्र को स्थापित करें गणेश लक्ष्मी रुद्राक्ष (दो सातमुखी एवं एक आठ मुखी रुद्राक्ष) धारण करें कुबेर यंत्र की आराधना करें श्रीसूक्त का पाठ करें फंसा हुआ धन प्राप्त करने का मंत्र वैदिक मंत्रों में शक्ति समाहित होती है। अतः फंसे हुए धन को पाने के लिए निम्न मंत्र को जपना चाहिए - “ॐ क्रीं कृष्णाय नमः” कृष्ण बीज मंत्र का जाप करने से फंसा हुआ धन वापस आता है।
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