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शुक्रवार को मां लक्ष्मी पूजा का महत्व जीवन में सभी सुख-सुविधाओं की प्राप्ति के लिए करें आज के दिन शुक्र ग्रह को मजबूत

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शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी एवं मां संतोषी की पूजा की जाती है। शास्त्रों में लक्ष्मी को चंचला कहा गया है। चंचला का मतलब है ऐसी देवी जिनका किसी एक स्थान पर अधिक समय तक रहना तय नहीं है। जी को हिंदू धर्म में सुख-समृद्धि, धन, वैभव तथा ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। देवी लक्ष्मी की कई मंत्रों से पूजा की जाती है लेकिन सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी मंत्र वैभव लक्ष्मी मंत्र को माना जाता है। मान्यता है कि लक्ष्मी जी की पूजा करते हुए वैभव लक्ष्मी मंत्र का जाप करने से व्यक्ति के घर में कभी धन का अभाव नहीं रहता है। पूजा पाठ करने वाले और भक्ति भाव में लीन लोग शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी को पूजते हैं। मान्यता है कि शुक्रवार को लक्ष्मी का पूजन करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन की वर्षा होती है। हिंदू धर्म में शुक्रवार को मां लक्ष्मी का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजन से धन की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत रखने का भी प्रावधान है। हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता या देवी को समर्पित है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी एवं मां संतोषी की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है। धन को अपने पास स्थाई बनाने के लिए मां लक्ष्मी का पूजन कर उन्हें प्रसन्न रखा जाता है ताकि वे कहीं ओर न जाएं। इसके लिए हिंदू धर्म में कई उपाय, पूजन, आराधना और मंत्र-जाप आदि का विधान है। शुक्रवार को पूरे दिन व्रत रख शाम को स्नान के बाद माता लक्ष्मी की पूजा करें। वैभव लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र की पूजा में खासतौर पर लाल चंदन, गंध, लाल वस्त्र, लाल फूल अर्पित करें। खीर का भोग लगाएं। मान्यता है घी के पांच बत्तियों वाले दीप से आरती कर माता को दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। श्री वैभव लक्ष्मी मंत्र का जाप करने से जातक के घर में कभी किसी वस्तु का अभाव नहीं रहता है और लक्ष्मी जी की कृपा से उसका जीवन सुख- शांति, धन- वैभव से हमेशा भरा रहता है।

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शुक्रवार को मां लक्ष्मी पूजा का महत्व
posted Mar 27 by Deepika Maheshwary

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शुक्रवार को लक्ष्मी का पूजन करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन की वर्षा होती है। हिंदू धर्म में शुक्रवार को मां लक्ष्मी का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजन से धन की प्राप्ति होती है। इसलिए वे लोग जो आर्थिक तंगी का सामना कर रहे होते हैं शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी का पूजन करते हैं। इस‍ दिन व्रत रखने का भी प्रावधान है। हिंदू धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवता या देवी को समर्पित है। शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी, मां संतोषी की पूजा की जाती है शास्त्रों में लक्ष्मी को चंचला कहा गया है। चंचला का मतलब है ऐसी देवी जिनका किसी एक स्थान पर अधि‍क समय तक रहना तय नहीं। वे चंचल हैं इसलिए एक स्थान पर ज्यादा नहीं रूकतीं। तभी तो कहते हैं न धन का क्या है आज आपके पास अपार है कल हो सकता है कि बिल्कुल न हो। हिंदू धर्म में लक्ष्मी को धन की देवी माना जाता है। इसलिए धन को अपने पास स्थाई बनाने के लिए मां लक्ष्मी का पूजन कर उन्हें प्रसन्न रखा जाता है, ताकि वे कहीं और न जाएं। इसके लिए हिंदू धर्म में कई उपाय, पूजन, आराधना और मंत्र-जाप आदि का विधान है। शुक्रवार के दिन भगवान विष्णु का दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर अभिषेक करें। अगर यह अभिषेक मन से किया जाए तो माँ लक्ष्मी प्रसन्न हो जाती हैं और आप को धन से संपन्‍न कर देती हैं। शुक्रवार के दिन शाम को गाय के घी का दीपक घर के ईशान कोण में लगायें। और दीपक में रुई की जगह पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें और दीपक में थोड़ा केसर भी डालें। शुक्रवार के एक पिला कपड़ा ले उसमे पांच लक्ष्मी (पिली) कौड़ी और थोड़ा सा केसर – चंडी के सिक्के डाले और वह सब बाँध ले और धन के स्थान पर रख दे। और बस देखिये कुछ दिनों में आपको इसका प्रभाव दिखेगा। शुक्रवार के दिन कुवांरी लड़कियों को घर बुलाकर उन्हें खीर खिलायें तथा उन्हें वस्त्र और दक्षिणा दें। ऐसा करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और धन प्राप्ति होती है। शुक्रवार के दिन अगर कोई भक्त गरीबों को दान करता है तो उसे धन के रूप में आशीर्वाद मिलता है। और गरीबों को सफ़ेद रंग की वस्तु या खाद्य पदार्थ दान करें तो बहुत शुभ रहता है। शुक्रवार के दिन गाय के दूध से श्रीयंत्र का अभिषेक करें और जो भी अभिषेक का जल बचेगा उसे पूरे घर में छिड़क दें और श्री यंत्र को धन रखने की जगह पर रख दें उससे धन का लाभ होगा।
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ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों का जन्म शुक्रवार को हुआ है उन पर माँ लक्ष्मी और शुक्र दोनों का शुभ प्रभाव देखने को मिलता है, क्योंकि शुक्रवार के स्वामी शुक्र देव है और इसकी देवी लक्ष्मी है। यही कारण है कि इस दिन जन्म लने वाले व्यक्ति भौतिक सुख सुविधाओं के आदी और शौकीन मिजाज होते है l शुक्रवार को जन्मे लोग जीवन को मौज मस्ती से व्यतीत करने के पक्षधर होते है। इस दिन जन्मे लोग विरोधियों को भी अपने पक्ष में करने की कला जानते है, इनमे एक अलग ही आकर्षण होता है। जिससे ये अपने मित्रों के दायरे में काफी लोकप्रिय होते है। शुक्रवार को जन्में लोग बड़े ही खुशमिजाज होते है और जिंदगी को एक जश्न की तरह जीते है। इनको कलात्मक चीजों और कला से गहरा लगाव होता है, इसलिये ये अपना कैरियर भी संगीत, लेखन, चित्रकला, फिल्म, फैशन, ब्यूटी इंडस्ट्री में बनाना पसंद करते है। ऐसे व्यक्ति आमतौर पर प्रसन्न दिखाई देते है। इनके चेहरे पर रौनक होती है।
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हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार के दिन को शिव जी का दिन माना जाता है। इस दिन किसी भी काम को करने से पहले यदि आप शिव जी का आशीर्वाद ले लें तो आपको लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही साथ जीवन में सुख शांति बरक़रार रखने के लिए सोमवार के दिन शिव जी के कुछ ख़ास उपायों को अपनाकर आप शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आज हम आपको विशेष रूप से सोमवार के दिन शिव जी के कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें आजमाकर आप अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। आइये जानते हैं कौन से हैं वो विशेष उपाय। सोमवार के दिन करें शिव जी के ये कारग़र उपाय जैसा की आप सभी जानते हैं कि सोमवार के दिन को शिव जी का दिन माना जाता है इसलिए इस दिन यदि शिव जी के कुछ ख़ास उपाय किये जाएँ तो आपको जीवन में अथाह सफलता मिल सकती है। इसके साथ ही सावन के सोमवार पर खासतौर से यदि शिव को प्रसन्न किया जाए तो आपका जीवन सुखी और सफल बन सकता है। सोमवार को शिव जी के निम्नलिखित उपायों को आजमाकर आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सोमवार के दिन किसी भी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का दूध या जल ये अभिषेक करना आपके लिए शुभ फलदायी साबित हो सकता है। सावन के माह में शिव का अभिषेक करना वैसे भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन शिव जी को सफ़ेद चावल अर्पित करना भी आपके लिए लाभदायक साबित हो सकता है। शिव जी को चावल चढ़ाने के बाद उसे गरीबों में जरूर बाँट दें। इस उपाय को करने से जिंदगी में मुसीबतों से छुटकारा मिलता है। सोमवार को जल में काला तिल मिलाकर शिव जी को चढ़ाने से आपको लाभ मिल सकता है। ऐसा करने से पारिवारिक सुखों में वृद्धि होती है। छात्रों को ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करने के लिए सोमवार के दिन स्फटिक से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। दूध में शक्कर मिलाकर शिव जी का अभिषेक करने से भी आपको अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। सोमवार के दिन गाय के घी से शिव जी का अभिषेक करने से भी आपको जीवन में सफलता और सुख शांति मिल सकती है। शिवलिंग पर सोमवार के दिन गन्ने का रस अर्पित करने से भी आपको जीवन के सभी क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है। इस दिन शिव जी की पूजा यदि श्रद्धा पूर्वक किया जाए और उनका अभिषेक शहद से किया जाए, तो इस उपाय को करने से आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से निजात मिल सकता है। सोमवार के दिन शिव जी की पूजा अर्चना करने के साथ ही साथ रूद्र गायत्री मंत्र का जाप करना फलदायी माना जाता है। रूद्र गायत्री मन्त्र इन प्रकार हैं “ॐ तत्पुरुषाय विद्दहे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात “
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सूर्यास्त के बाद किसी बाहरी व्यक्ति को न देें ये सामान, लक्ष्मी रूठ कर चली जाएंगी? प्राचीनकाल की कुछ परंपराएं आज भी बहुत सारे घरों में निभाई जाती हैं। इनका कोई आधार तो नहीं है, केवल विश्वास और आस्था है। माना जाता है की इनसे घर में सुख-शांति का माहौल तो रहता ही है साथ में सुख शांति और धन से संबंधित किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ता। सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध, दही अौर प्याज नहीं देना चाहिए। इनसे घर की सुख-समृद्धि खत्म हो जाती है। बुरे सपनों और अनजाने भय से मुक्ति के लिए रात को सोने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करें। महीने में एक बार अॉफिस में मिठाई जरुर ले जानी चाहिए। मिठाई अपने मित्रों अौर अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर खानी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं। रसोईघर में जूठे बर्तन नहीं रखने चाहिए। जूठे बर्तन रखने से लक्ष्मी रूठ कर चली जाती है। यदि अधिक इमरजेंसी हो तो जल से साफ करके रख लेने चाहिए। जिससे धन हानि होने से बचाव होगा। घर के मुख्यद्वार पर कूड़ादान न रखें। ऐसा करने से पड़ोसियों से दुश्मनी हो जाती है। महीने में एक बार मिश्री युक्त खीर बनाकर परिवार संग अवश्य खानी चाहिए। जिससे घर की दरिद्रता का नाश होता है । इसके साथ ही घर में लक्ष्मी का वास होता है। बिस्तर पर बैठकर भोजन करने से घर में अंशाति अौर पारिवारिक सदस्यों पर कर्ज चढ़ता है। रात को सोने से पूर्व रसोईघर में जल से भरी बाल्टी रखने से ऋण से मुक्ति मिलती है। इसी प्रकार बाथरूम में पानी से भरी बाल्टी रखने से जीवन में उन्नति के रास्ते खुलते हैं। घर में जाले अौर गंदगी जमा न होने दें। ऐसा करने से भाग्य दुर्भाग्य में परिवर्तित हो जाता है। इसके साथ ही बनते कार्य भी बिगड़ने लगते हैं। घर के मंदिर में जल से भरा कलश सदैव रखना चाहिए। ये पात्र मंदिर के ईशान कोण में रखना पारिवारिक सदस्यों के लिए शुभ होता l
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हिन्दू धर्म में यूँ तो ऐसी बहुत सी बातें हैं जिसका पालन हर किसी को करना चाहिए लेकिन उनमें से भी कुछ ही ऐसी बातें होती है जिसका पालन लोग कर पाते हैं। लेकिन जब बात आती है ईश्वर भक्ति की तो विशेष रूप से इस दौरान भूलकर भी कोई ऐसी गलती नहीं करनी चाहिए जिसके दुष्परिणाम आपको बाद में झेलने पड़े। पूजा पाठ के लिए अक्सर लोग कुछ ख़ास बर्तनों का प्रयोग करते हैं, आज कल बहुत से ऐसे भी लोग हैं जो पूजा के लिए स्टील के बर्तनों का प्रयोग करते हैं, जबकि उन्हें ऐसा भूलकर भी नहीं करना चाहिए। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों स्टील के बर्तनों को पूजा पाठ के लिए वर्जित माना जाता है। आइये जानते हैं क्या है इसके पीछे की मुख्य वजह। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा पाठ के लिए हर किसी को ख़ास नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। खासतौर से जो नियम हमारे शास्त्रों में बताये गए हैं उसकी अवहेलना भूलकर भी नहीं करनी चाहिए। ईश्वर की पूजा अर्चना के लिए विशेष रूप से स्टील के बर्तनों का प्रयोग वर्जित माना गया है। माना जाता है कि ईश्वर की पूजा के लिए प्रयोग किये जाने वाले विभिन्न धातुओं का अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। पूजा के लिए इन धातुओं के बर्तनों का प्रयोग वर्जित माना जाता है आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विशेष रूप से हिन्दू धर्म में पूजा पाठ के दौरान स्टील, एल्मुनियम और लोहे के बर्तनों का प्रयोग वर्जित माना जाता है। अगर आप इन धातु से बने ईश्वर की मूर्ती की भी पूजा करते हैं तो उसका फल आपको ना के बराबर ही मिलता है। आपके मन में ये सवाल जरूर उठ रहा होगा की आखिर इस धातु के बर्तनों को अशुभ क्यों माना जाता है। बता दें कि स्टील के बर्तन मानव निर्मित होते हैं इसलिए उसका प्रयोग वर्जित माना गया है। एल्मुनियम के बर्तनों में जल्द कालिख लग जाती है इसलिए उसे भी वर्जित माना जाता है। बात रही लोहे के बर्तनों की तो उनमें जंग लग जाने की वजह से पूजा के प्रयोग के लिए वर्जित माना गया है। पूजा के लिए इन बर्तनों का प्रयोग माना जाता है शुभ हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा पाठ के लिए जिन बर्तनों को शुभ माना जाता है वो खासतौर से प्राकृतिक धातु के बने होने चाहिए। इसलिए पूजा के दौरान पीतल, तांबा, सोना और चांदी के बर्तनों का प्रयोग करना शुभ फलदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि ईश्वर को प्रसाद चढ़ाने या जलाभिषेक करते समय केवल इन्हीं धातुओं से बने बर्तनों का प्रयोग करना चाहिए। बहरहाल अब आप जान चुके होंगें की आखिर क्यों स्टील आदि के धातुओं का प्रयोग पूजा-पाठ के दौरान करना वर्जित माना जाता है। अगर आप भी आजतक पूजा के लिए स्टील के बर्तनों का प्रयोग करते आ रहे हैं तो इसे तत्काल रूप से बंद कर दें।
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