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कर्म बड़ा या भाग्य??? विष्णु जी की ये कहानी पढोगे तो आपका उद्धार ज़रुर होगा

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कष्टों और संकटो से मुक्ति पाने के लिए विष्णु जी ने मनुष्य के कर्मो को ही महत्ता दी है। उनके अनुसार आपके कर्म ही आपके भविष्य का निर्धारण करते हैं। भाग्य के भरोसे बैठे रहने वाले लोगों का उद्धार होना संभव नहीं है। भाग्य और कर्म को अच्छे से समझने के लिए पुराणों में एक कहानी का उल्लेख मिलता है। एक बार देवर्षि नारद जी बैकुंठ धाम गए। वहां नारद जी ने श्रीहरि से कहा, "प्रभु! पृथ्वी पर अब आपका प्रभाव कम हो रहा है। धर्म पर चलने वालों को कोई अच्छा फल नहीं प्राप्त हो रहा, जो पाप कर रहे हैं उनका भला हो रहा है।’’ तब श्री विष्णु ने कहा, "ऐसा नहीं है देवर्षि जो भी हो रहा है सब नियति के जरिए हो रहा है।’’ वही उचित है। नारद जी बोले, "मैंने स्वयं अपनी आंखो से देखा है प्रभु, पापियों को अच्छा फल मिल रहा है और, धर्म के रास्ते पर चलने वाले लोगों को बुरा फल मिल रहा है।’’ विष्णु जी ने कहा, “कोई ऐसी घटना का उल्लेख करो।”नारद ने कहा अभी मैं एक जंगल से आ रहा हूं। वहां एक गाय दलदल में फंसी हुई थी। कोई उसे बचाने नहीं आ रहा था। तभी एक चोर वहाँ से गुजरा। गाय को फंसा हुआ देखकर उसने गाय को बचाया नहीं, बल्कि उस पर पैर रखकर दलदल लांघकर निकल गया। आगे जाकर चोर को सोने की मोहरों से भरी एक थैली मिली।’’ थोड़ी देर बाद वहां से एक वृद्ध साधु गुजरा। उसने उस गाय को बचाने की पूरी कोशिश की, पूरे शरीर का जोर लगाकर अत्यन्त कठिनाई से उसने गाय की जान बचाई। लेकिन गाय को दलदल से निकालने के बाद वह साधु आगे गया तो एक गड्ढे में गिर गया। प्रभु! बताइए यह कौन सा न्याय है? नारद जी की बात सुनने के बाद प्रभु बोले, जो चोर गाय पर पैर रखकर भाग गया था उसकी किस्मत में तो एक खजाना था लेकिन उसके इस पाप के कारण उसे केवल कुछ मोहरें ही मिलीं। वहीं, उस साधु के भाग्य में मृत्यु लिखी थी। लेकिन गाय को बचाने के कारण उसके पुण्य बढ़ गए और उसकी मृत्यु एक छोटी-सी चोट में बदल गई। इसलिए वह गड्ढे में गिर गया इंसान के कर्म से उसका भाग्य तय होता है। सत्कर्मों के प्रभाव से हर प्रकार के दुख, और संकटों से मनुष्य का उद्धार हो सकता है। इंसान को सत्कर्म करते रहना आवश्यक है क्योंकि कर्म से भाग्य को बदला जा सकता है।विष्णु जी की बात से नारद जी को मानव जाति के उद्धार का मार्ग पता लग गया।

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कर्म बड़ा या भाग्य??? विष्णु जी की ये कहानी पढोगे तो आपका उद्धार ज़रुर होगा
posted Apr 2, 2020 by Deepika Maheshwary

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वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में कबूतर का घोंसला अस्थिरता के हालात पैदा करता है और साथ ही निर्धनता को भी आमंत्रण देता है। अगर आपके घर में ऐसा कुछ है तो जल्द से जल्द इसे हटाने का प्रयास करें। घर में मकड़ी क जाल बुनना दुर्भाग्य की निशानी है। इसे जल्द से जल्द हटवाएं और आगे से ऐसा ना हो इसके लिए घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। घर में टूटा हुआ शीशा ना सिर्फ वास्तु के नियमों के विरुद्ध है बल्कि ये पूरे प्रभाव के साथ नकारात्मक ऊर्जा को प्रवेश करने के लिए रास्ता भी देता है। चमगादड़ का दिखना बहुत अशुभ माना जाता है। अगर घर में यह प्रवेश कर जाए तो यह दुर्भाग्य, निर्धनता के साथ-साथ बुरे स्वास्थ्य का भी परिचायक है।
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जाने कुंडली से शनि आपका मित्र या शत्रु - शनि को लंगड़ा ग्रह भी कहते हैं क्योंकि यह बहुत ही धीमी गति से चलता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है कि इंद्रजीत के जन्म के समय में रावण ने हर ग्रह को आदेश दिया था कि वे सबके सब एकादश भाव में रहें। इससे जातक की हर इच्छा की पूर्ति होती है। शनि भी एकादश भाव में बहुत बढ़िया प्रभाव देता है; उतना ही बुरा प्रभाव द्वादश में देता है। शनि मोक्ष का कारक ग्रह, मोक्षकारक द्वादश में हो तो इससे बुरा फल और क्या हो सकता है? देवताओं के इशारे पर शनि ने इंद्रजीत के जन्म समय में अपना एक पैर द्वादश भाव में बढ़ा दिया, जिसे देख रावण का क्रोध सीमा को पार कर गया एवं शनि के एक पैर को काट कर उसको लंगड़ा ग्रह बना दिया। शनि का सूर्य एवं चंद्र के प्रति मित्रता का भाव नहीं होता है। शनि का आचरण सूर्य-चंद्र के आचरण के विरुद्ध होता है। यही वजह है कि सूर्य-चंद्र की राशियों-सिंह एवं कर्क के विपरीत इसकी राशियां मकर एवं कुंभ हैं। चंद्र किसी काम को जल्दी में अंजाम देना चाहता है, पर शनि और चंद्र का किसी तरह का संबंध हो गया, तो एक तो काम जल्दी नहीं होगा, दूसरे कई बार प्रयास करना होगा। सूर्य हृदय का कारक ग्रह कहलाता है। अगर शनि एवं सूर्य का संबंध होता है तो खून को ले जाने वाली नलिकाओं के छेद को संकीर्ण बना कर हृदय रोग पीछा करता है। शनि के ये सब अवगुण स्पष्ट नज़र आते हैं, किंतु इसमें गुणों की भी कमी नहीं है। शनि जनतंत्र का कारक ग्रह कहलाता है। राजनीति में शनि विश्वास का प्रतीक माना जाता है। अगर किसी राजनीतिज्ञ की कुंडली में शनि की स्थिति ठीक नहीं होती तो जनता को उस राजनेता की बातों का विश्वास नहीं होता है। शनि शुष्क, रिक्त, नियम पालन करने वाला, एकांतप्रिय, रहस्यों को अपने अंदर छिपाने वाला ग्रह है। यह एकांतप्रिय होता है, अतः पूजा, साधना आदि के लिए शुभ ग्रह माना जाता है। यह मन को शांत रखता है और अगर पूजा के समय मन शांत हो गया तो साधना में मन भी लगेगा एवं सिद्धि भी जल्दी होगी। पंचम भाव को पूजा से संबंधित भाव माना जाता है। अगर किसी जातक के पंचम भाव का उपस्वामी चंद्र है तो उस आदमी का मन पूजा में कभी भी नहीं लगेगा। पूजा के समय मन इधर-उधर खूब भटकेगा एवं हर बात की चिंता उस आदमी को उसी समय होगी। पर अगर शनि पंचम का उपस्वामी है, तो पूजा के समय मन एकदम शांत रहेगा। शनि के दोस्त ग्रहों में बुध एवं शुक्र के नाम आते हैं। पर शनि वृष एवं तुला लग्न वालों के लिए हमेशा ही लाभदायक होगा। पर यह बात मिथुन एवं कन्या लग्न वालों पर लागू नहीं होगी। उत्तर कालामृत के अनुसार शनि अगर अपनी राशि में स्थित हो या गुरु की राशि पर स्थित हो या उच्च का हो, तो शुभ होता है। पर शनि के बारे में एक विशेष बात यह कही गयी है कि शनि अगर अपनी भाव स्थिति के अनुसार शुभ है, तो उसे स्वयं की राशि पर, उच्च राशि में, या वर्गोत्तम नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो योगकारक शनि की दशा के समय राजा भी भिखारी बन जाएगा। शनि अगर अशुभ हो, तो काम में देरी हो सकती है, निराशा मिल सकती है, झगड़ा हो सकता है, शांति बाधित हो सकती है, जातक का निरादर हो सकता है, उसे अवहलेना का शिकार होना पड़ सकता है। पर अगर शनि शुभ हो, तो शांति से काम करने, धन की बचत का उपाय करने, मेहनत करने, जीवन में सफलता प्राप्त करने एवं अपने अंदर बहुत सारे रहस्यों को दबा रखने की क्षमता मिलती है। शनि आयुष्कारक ग्रह कहलाता है एवं अगर यह आयु स्थान, यानी अष्टम भाव में हो, तो उम्र को बढ़ाता है। गुरु में जहां वृद्धि की बात होती है, वहीं शनि में कटौती की। गुरु जहां संतान वृद्धि में कारक ग्रह होता है, वहीं शनि को, परिवार नियोजन के द्वारा, संतान वृद्धि को रोकने की क्षमता प्राप्त है। गुरु एवं शनि में एक और खास भेद है। गुरु जहां पुरोहित का काम, धर्म के प्रचारक का काम करता है, वहां शनि मौन रह कर साधना करता है। उसे भोज खाने के स्थान पर उपवास करना ही भाता है। शनि का रंग बैंगनी है। इसका रत्न नीलम होता है। अंकों में संख्या 8 होती है। शनि के प्रभाव की वजह से ही 8 अंक को छिपे रहस्यों का अंक कहा जाता है। शनि से संबंधित विषय इतिहास, भूगर्भ शास्त्र, चिकित्सा की पुरानी पद्धतियां आदि हैं। शनि एवं मंगल दोनों को ही जमीन से वास्ता होता है, पर मंगल जमीन की ऊपरी सतह से संबंधित होता है, जबकि शनि भीतरी सतह से। शनि अगर शुभ स्थिति में न हो, तो तरह-तरह की बीमारियां दे सकता है। शरीर से उस गंदगी को बाहर आने से रोक देता है, जिसे बाहर निकलना चाहिए था। पायरिया हो जाता है, झिल्ली कड़ी हो जाती है, शरीर में खून आदि का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। यह सब उस स्थिति में होता है जब शनि चंद्र को प्रदूषित करता है। अगर इस प्रदूषण में मंगल भी आता है तो चेचक की संभावना बनती है एवं शरीर में मवाद जम जाता है। शनि अगर सिर्फ मंगल को दूषित कर रहा हो, तो रीढ़ की हड्डी का टेढ़ा होना, गिर कर चोट लगना, पित्त की थैली में पथरी का होना इत्यादि बीमारियां होती हैं। इसी तरह से शनि अगर सूर्य एवं गुरु को प्रदूषित करता है तो, शरीर में कोलेस्ट्रोल की वृद्धि के कारण रक्त वाहक नलिकाओं में अवरोध पैदा होता है एवं हृदयाघात की संभावना पैदा होती है। इस तरह से अलग-अलग ग्रहों के साथ अलग-अलग रोग हो सकते हंै। शनि के द्वारा दी गयी बीमारी ज्यादा समय के लिए होती है
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आपकी कुण्डली में चन्द्रमा वृश्चिक राशि में स्थित है, जो मंगल द्वारा शासित है तथा यह डंक मारने वाले कीट को चिन्हित करता है। यह स्थिर, नकारात्मक तथा जलीय राशि है। चन्द्रमा यहां ग्रसित है। आपमें ऊँची आकांक्षा होगी तथा आप विजय प्राप्त करने के जोश से भरे होंगे। आप परिश्रमी, ओजस्वी, अदम्य साहसी तथा सहनशील होंगे। आपमें शासन करने का गुण होगा। आप भाग्यशाली और आरामपरस्त होंगे। आपके कर्मचारी या अनुयायी बहुत निष्ठावान तथा विश्वसनीय होंगे। यदि चन्द्रमा का प्रभाव अशुभ है, तो आपका स्वभाव अहंकारी तथा दम्भी हो सकता है। आपकी छवि अत्याचारी की हो सकती है, जो क्रूरता की हद को पार कर सकता है। परन्तु, यदि चन्द्रमा का प्रभाव शुभ है, तो यह आपके विचारों को सकारात्मक और उत्पादक तथा आपके मनोयोग को आध्यात्मिक बना देगा। अपनी उत्कृष्ट विशेषताओं का सही उपयोग करने से आपके शौर्य में वृद्धि होगी। आपका स्वभाव कुछ हिंसात्मक और क्रोधी हो सकता है, जिसे यदि समय से पहले नहीं नियंत्रित किया गया, तो भयंकर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। आपके आवेगी होकर किसी गलत प्रेम-प्रसंग में फंसने की संभावना हो सकती है। वृश्चिक राशि में चन्द्रमा की उपस्थिति से आप आत्मनिर्भर तथा दृढ़ निश्चयी होंगे। आप अपनी रक्षा स्वयं कर सकते है। आप विनम्र तथा कम बोलने वाले होंगे तथा किसी भी लम्बी कहानी को काट कर छोटा कर देंगे। रूढि़वादी तथा परिवर्तनशील होने के कारण आप अपने रास्ते या तरीकों को बदलने में असक्षम होंगे, जिसकी वजह से कुछ लोग आपको हठी समझेंगे। यदि कोई आपका विरोध करता है, तो आप कभी माफ न करने वाले तथा प्रतिशोध लेने वाले होंगे। यदि चन्द्रमा का प्रभाव शुभ है, तो आपका वैवाहिक जीवन फलदायक तथा खुशहाल होगा। यदि चन्द्रमा का प्रभाव अशुभ है तो आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल नहीं हो सकता है। आप अपनी संतानों - खासकर पहली संतान के कारण परेशन हो सकते हैं। आपको रहस्यपूर्ण या उससे सम्बन्धित विषयों में रूचि हो सकती है। छोटी ही उम्र में परिवार के किसी सदस्य को असमय खोने के कारण धार्मिक क्रियाकलापों में आपकी रूझान हो सकती है। गुण: आपके कार्य और विचार रचनात्मक होंगे और उनमें कला की झलक होगी। अपनी अन्तर्निहित ऊर्जा के कारण आप सक्रिय और स्फूर्तिवान होंगे। िसंह की भांति आप किसी चीज से न डरने वाले और साहसी होंगे। आप उदार एवं खुशमिजाज होंगे। अपने बेहतरीन प्रबंधन कौशल के कारण चीजों को व्यवस्थित करने में आप दक्ष होंगे। आप गंभीर एवं संवेदनशील होंगे। अपने मित्रों तथा रिश्तेदारों से आपको प्रेम होगा, आप उनको महत्व देंगे तथा उनका ख्याल रखेंगे। अवगुण: आपकी सहन शक्ति कमजोर हो सकती है। आप छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा कर सकते हैं। आप किसी से न डरने वाले, घमंडी या अहंकारी हो सकते हैं। आप दूसरों पर अपनी मर्जी थोपने वाले हो सकते हैं। आपको कोई आदेश दे, यह आपको पसन्द नहीं हो सकता है। विशेष लक्षण: अपने खुल दिमाग और विचारों तथा परस्थिितियों के साथ सामंजस्य बिठाने की प्रवृति के कारण आप समाज के हर वर्ग के लोगों, चाहे वे ऊँचे या निम्न तबके के हों, के साथ आप आसानी से घुल-मिल सकते हैं। आप उदार होंगे। आप उत्तम कामों एवं कर्मियों की हमेशा प्रशंसा करेंगे और दूसरों से भी उम्मीद करेंगे की किसी की उपलब्धियों के लिए उसकी सराहना करेंगे। आप पुरानी पारिवारिक परम्पराओं को बनाए रखने में विश्वास करेंगे। कभी-कभी यह आपके परिवार में अप्रसन्नता का कारण बन सकती है। रोजगार: आप किसी विभाग में ऊँचे पद पर हो सकते हैं। आप कोई राजनीतिक नेता, वरिष्ठ अधिकारी, प्रबन्धक या राजदूत हो सकते हैं। आप विज्ञान या तकनीकी सम्बन्धी किसी अनुसंधान वाले कार्यों में भी संलग्न हो सकते हैं। आपको संगमरमर, लकड़ी आदि से काफी लाभ प्राप्त हो सकता है या जौहरी, भूगर्भशास्त्री, शिक्षक, अभिनेता या कलाकार के रूप में काफी नाम तथा यश अर्जित कर सकते हैं।
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हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार के दिन को शिव जी का दिन माना जाता है। इस दिन किसी भी काम को करने से पहले यदि आप शिव जी का आशीर्वाद ले लें तो आपको लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही साथ जीवन में सुख शांति बरक़रार रखने के लिए सोमवार के दिन शिव जी के कुछ ख़ास उपायों को अपनाकर आप शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आज हम आपको विशेष रूप से सोमवार के दिन शिव जी के कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें आजमाकर आप अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। आइये जानते हैं कौन से हैं वो विशेष उपाय। सोमवार के दिन करें शिव जी के ये कारग़र उपाय जैसा की आप सभी जानते हैं कि सोमवार के दिन को शिव जी का दिन माना जाता है इसलिए इस दिन यदि शिव जी के कुछ ख़ास उपाय किये जाएँ तो आपको जीवन में अथाह सफलता मिल सकती है। इसके साथ ही सावन के सोमवार पर खासतौर से यदि शिव को प्रसन्न किया जाए तो आपका जीवन सुखी और सफल बन सकता है। सोमवार को शिव जी के निम्नलिखित उपायों को आजमाकर आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सोमवार के दिन किसी भी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का दूध या जल ये अभिषेक करना आपके लिए शुभ फलदायी साबित हो सकता है। सावन के माह में शिव का अभिषेक करना वैसे भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन शिव जी को सफ़ेद चावल अर्पित करना भी आपके लिए लाभदायक साबित हो सकता है। शिव जी को चावल चढ़ाने के बाद उसे गरीबों में जरूर बाँट दें। इस उपाय को करने से जिंदगी में मुसीबतों से छुटकारा मिलता है। सोमवार को जल में काला तिल मिलाकर शिव जी को चढ़ाने से आपको लाभ मिल सकता है। ऐसा करने से पारिवारिक सुखों में वृद्धि होती है। छात्रों को ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करने के लिए सोमवार के दिन स्फटिक से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। दूध में शक्कर मिलाकर शिव जी का अभिषेक करने से भी आपको अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। सोमवार के दिन गाय के घी से शिव जी का अभिषेक करने से भी आपको जीवन में सफलता और सुख शांति मिल सकती है। शिवलिंग पर सोमवार के दिन गन्ने का रस अर्पित करने से भी आपको जीवन के सभी क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है। इस दिन शिव जी की पूजा यदि श्रद्धा पूर्वक किया जाए और उनका अभिषेक शहद से किया जाए, तो इस उपाय को करने से आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से निजात मिल सकता है। सोमवार के दिन शिव जी की पूजा अर्चना करने के साथ ही साथ रूद्र गायत्री मंत्र का जाप करना फलदायी माना जाता है। रूद्र गायत्री मन्त्र इन प्रकार हैं “ॐ तत्पुरुषाय विद्दहे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात “
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सामान्य अवधारणा है कि कुंडली में ग्रहों का अस्त या नीच होना जातक के लिए अच्छा नहीं होता है लेकिन ऐसा देखा गया है कि बहुत से जातकों में नीच ग्रह या अस्त ग्रह की स्थिति से उनके जीवन बड़े काम हुए हैं . ज्योतिष में मान्यता के अनुसार बुध सूर्य के दोनों ओर 14 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माना जाता है. किन्तु यदि बुध अपनी सामान्य गति की बनिस्पत वक्र गति से चल रहे हों तो वह सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माना जाता है . मीन राशि में स्थित होने पर बुध को नीच का बुध कहा जाता है अर्थात मीन राशि में स्थित होने पर बुध अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलहीन हो जाता है अस्त ग्रह के कई कुपरिणाम देखने को मिलते हैं इसलिए इसका ज्योतिषीय समाधान करवाना चाहिए या सक्षम हो तो खुद करना चाहिए . पौराणिक मन्त्र ॐ प्रियङ्गुलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्।। वैदिक मन्त्र ऊँ उदबुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते स सृजेथामयं च अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत।। बीज मंत्र ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः।। जप संख्या – 9000 समय: शुक्ल पक्ष में बुध की होरा में ग्रह पूजा मंत्र: ऊँ ऐं स्त्रीं श्रीं बुधाय नमः।। यह मंत्र बोलते हुए बुध प्रतिमा अथवा बुध यंत्र का पूजन करें। दान: बुध ग्रह हरे रंग का कारक होता है अगर कुंडली में बुध बुरी अवस्था में है या नीच है शरीर में हरा रंग अशुभ है या ज्यादा बलवान है तो इसके दुष्परिणाम हो सकते हैं ऐसे में हरे रंग को शरीर में संतुलित करने के लिए हरी चीजें का दान करना चाहिए। हरा वस्त्र, हरी सब्जी, मूंग की दाल, हरे फल, गन्ना, हरी इलायची, कांसे के बर्तन, बुध रत्न पन्ना, हरा कपडा, हरी सब्जियां, हरे रंग का कददू, दुधारू बकरी यह सब किसी पढ़ने वाले गरीब विद्यार्थी को देना चाहिए । हरे रंग की चूड़ी और वस्त्र का दान किन्नरो को देना भी इस ग्रह दशा में श्रेष्ठ होता है। बुध ग्रह से सम्बन्धित वस्तुओं का दान भी ग्रह की पीड़ा में कमी ला सकती है. इन वस्तुओं के दान के लिए ज्योतिषशास्त्र में बुधवार के दिन दोपहर का समय उपयुक्त माना गया है। व्रत: बुध की दशा में सुधार हेतु बुधवार के दिन व्रत रखना चाहिए। बुध के नीच अथवा अशुभ स्थिति में होने पर करें ये उपाय * घर में हरे रंग के परदे लगवाने चाहिए। * गाय को हरी घास और हरी पत्तियां खिलानी चाहिए। * ब्राह्मणों को दूध में पकाकर खीर भोजन करना चाहिए। * बुध की दशा में सुधार के लिए विष्णु सहस्रनाम का जाप भी कल्याणकारी कहा गया है। * बुधवार के दिन सुरु कर के 108 दिन लगातार हरी घास पर नंगे पांव चलने से बुध से होने वाली बीमारियां व् चर्म रोग दूर हो जाते हैं। * रविवार को छोड़कर अन्य दिन नियमित तुलसी में जल देने से बुध की दशा में सुधार होता है। * अनाथों एवं गरीब छात्रों की सहायता करने से बुध ग्रह से पीड़ित व्यक्तियों को लाभ मिलता है। मौसी, बहन, चाची बेटी के प्रति अच्छा व्यवहार बुध ग्रह की दशा से पीड़ित व्यक्ति के लिए कल्याणकारी होता है। * अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए। * हरी सब्जियाँ एवं हरा चारा गाय को खिलाना चाहिए। * बुधवार के दिन गणेशजी के मंदिर में मूँग के लड्डुओं का भोग लगाएँ तथा बच्चों को बाँटें। * ज्यादा से ज्यादा बुध का दान करना चाहिए। * दुर्गा सप्तसी का पाठ, विष्णु उपासना, तथा भगवान विघ्नहर्ता गणपति देव का पूजन-दर्शन करने से बुध का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।
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