top button
    Futurestudyonline Community

Daily knowledgeable

0 votes
209 views
LIFE’S LESSONS FROM A GIRAFFE We the human being are the best creature but sometimes we also have to get lessons from animal bcz they are very close to nature. This is a lesson that we may get from the giraffe. Baby giraffes never go to school. But they learn a very important lesson rather early in life. A lesson that all of us would do well to remember. The birth of a baby giraffe is quite an earth-shaking event. The baby falls from its mother's womb, some eight feet above the ground. It shrivels up and lies still, too weak to move. The mother giraffe lovingly lowers her neck to smooch the baby giraffe. And then something unbelievable happens. She lifts her long leg and kicks the baby giraffe, sending it flying up in the air and tumbling down on the ground. As the baby lies curled up, the mother kicks the baby again and again until the baby giraffe, still trembling and tired, pushes its limbs and for the first time learns to stand on its feet. Happy to see the baby standing on its own feet, the mother giraffe comes over and gives it yet another kick. The baby giraffe falls one more time, but now quickly recovers and stands up. Mama Giraffe is delighted. She knows that her baby has learnt an important lesson: Never mind how hard you fall, always remember to pick yourself up and get back on your feet. Why does the mother giraffe do this? She knows that lions and leopards love giraffe's meat. So unless the baby giraffe quickly learns to stand and run with the pack, it will have no chance of survival. Most of us though are not quite as lucky as baby giraffes. No one teaches us to stand up every time we fall. When we fail, when we are down, we just give up. No one kicks us out of our comfort zone to remind us that to survive and succeed, we need to learn to get back on our feet. This message goes out to each and everyone who hasn't given up and those who will always have the courage to get back , dust everything off and start again. This is the theory of survival. Stay blessed.

References

Daily knowledgeable
posted May 20, 2020 by Vaswati Baksiddha

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
0 votes
न ही कश्चित् विजानाति किं कस्य श्वो भविष्यति। अतः श्वः करणीयानि कुर्यादद्यैव बुद्धिमान्॥ No one knows what is going to happen tomorrow. So doing all of tomorrow's task today is a signature of wise. *कल क्या होगा यह कोई नहीं जानता है इसलिए कल के करने योग्य कार्य को आज कर लेने वाला ही बुद्धिमान है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
0 votes
नरत्वं दुर्लभं लोके विद्या तत्र सुदुर्लभा। शीलं च दुर्लभं तत्र विनयस्तत्र सुदुर्लभः॥ To born as human is rare in this world. To be knowledgeable also is even rarer. To have great character is even more rare . To be humble is the rarest of all. *पृथ्वी पर मनुष्य जन्म मिलना दुर्लभ है, उनमें भी विद्या युक्त मनुष्य मिलना और दुर्लभ है, उनमें भी चरित्रवान मनुष्य मिलना दुर्लभ है और उनमें भी विनयी मनुष्य मिलना और दुर्लभ है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
0 votes
Simple Basic of Jyotish shastras 1. If there is malefic planet is in 2nd house from any house or badly afflicted house by malefic aspects the house we will get those things in life but we will never be able to sustain it 2. Malefic or enemy planet in 2nd and 12th to any planet or house then the significance of the planet and house get locked we have to put 10 times extra efforts to achieve them 3. Friendly planet or sign lord placed in 2nd house the result flows smooth 4. Friendly planet or sign lord in 12th but malefic or enemy in next we get the things but it goes away later 5. Friendly planet or sign lord in 2nd but malefic or enemy in 12th then after much efforts we get the signification but later we enjoy the significance a lot 6. House it self afflicted but good planet in 2nd and 12th we lack desire for that things but still have it 7. House is afflicted plus malefic in 2nd and 12th forget the things u will never have it
+1 vote
|| सम्पूर्ण जीवन ग्रहो के द्वारा संचालित है और ग्रहो की रश्मियों का प्रभाव इंसान के जीवन पर अपना प्रभाव डालकर शुभ अशुभ फल देते है।ग्रहो के रत्न एक ऐसी औषधि है जो ग्रहो को बलवान बनाकर ग्रहो से लाभ दिलाती है और मनोनुकूल फल दिलाने में सहायता करती है लेकिन यह सब शुभ परिणाम तब ही ग्रहो के रत्न पहनकर लिया जा सकते है जब सही ग्रह या ग्रहो का रत्न पहना जाए और रत्न भी शुभ और शुद्ध हो।कुंडली के केंद्र और त्रिकोण ग्रहो के स्वामियों के रत्न पहनना हमेशा ही लाभ देता है इसमें भी त्रिकोण 1,5,9 के स्वामियों के रत्न धन, सम्मान, प्रतिष्ठा, कामयाबी या कामयाबी में कमी होने उसमे वृद्धि, भाग्य का साथ दिलाकर कार्यो को सिद्ध करते है इसके अलावा जो भी ग्रह अपने फल पूरी तरह नही दे पा रहा है और वह ग्रह महत्वपूर्ण फल देने वाला ग्रह है तब उसका रत्न पहनना उस ग्रह के फल दिलाकर काम सिद्ध कराने में मदद करता है जैसे प्रॉपर्टी या घर बनाने में बिघ्न आ रहे हो या मकान बनाने की परिस्थितिया न बन रही हो तब चौथे भाव के स्वमू का रत्न पहनना इस काम मे सफलता दिला सकता है लेकिन चौथे भाव के स्वामी का रत्न हमेशा कुंडली मे उस ग्रह की जांच पड़ताल कराकर ही पहनना चाहिए उसके अलावा रत्न हमेशा कुंडली की जांच कराकर पहनना चाहिए क्योंकि रत्न हमेशा रत्नों के वजन, ग्रहो की शक्ति कितनी है? आदि के अनुसार पहने जाते है।जैसे हमेशा डॉक्टर दवाई भी रोग की स्थिति क्या और कितनी मात्रा में मरीज को है के अनुसार ही दवाई की पावर होती उसी तरह कुंडली मे ग्रह की स्थिति के अनुसार रत्नों के वजन निर्धारित करके रत्न पहनाए जाते जिससे जातक को लाभ मिल सकें, जैसे माना नवे भाव का स्वामी अस्त है और शत्रु राशि का भी है और रत्न नवे भाव के स्वामी कस पहना दिया 7रत्ती का तो यह कभी भी जातक को कोई खास लाभ नहीं देगा क्योंकि 7रत्ती का रत्न ज्यादा वजनदार नही होता ऐसे अस्त और शत्रु राशि मे बैठे ग्रह को कमसे कम सवा 11रत्ती से सवा12रत्ती तक का रत्न पहनाया जाएगा तब ही लाभ देगा क्योंकि अस्त और शत्रु राशि दोनो स्थितियों में ग्रह होने पर बहुत ही ज्यादा कमजोर होता है इसीलिय ज्यादा शक्ति(पावर) के रत्न ही पहनाए जाते है ऐसी स्थिति में।अस्त ग्रह इस ग्रह का हमेशा रत्न पहनना ही फायदा देता है बस अस्त ग्रह 6, 8, 12 भाव का स्वामी न हो और 6, 8, 12भाव का स्वामी होने के साथ 1,5,9 का भी स्वामी है ऐसा ग्रह तो भी रत्न पहना जा सकता है लेकिन रत्न हमेशा उत्तम क्वालिटी का और असली(प्राकृतिक) ही होना चाहिए।। माना किसी जातक की कर्क लग्न की कुंडली है अब यहाँ मंगल योगकारक होता है 5 और 10 भाव का स्वामी होने से तो मंगल 10वे भाव का स्वामी और योगकारक होने नोकरी/ व्यवसाय और सफलता का कारक है लेकिन माना मंगल कुछ कमजोर है या पीड़ित है जिस कारण यह नोकरी अच्छी नही दे पा रहा तो यहाँ मंगल के लिए त्रिकोणी लाल मूंगा पहनने से तुरंत नोकरी/ व्यवसाय/ सफलता के रास्ते मिलकर उसमे तरक्की होगी क्योंकि मूंगा मंगल को बल देकर उसके फलो को बढ़ा देगा।जैसे हम पानी पीकर तुरंत अपने शरीर की पानी की मात्रा को पूरा करके या बढ़ाकर अपने आप को मजबूत महसूस करते है ऐसे ही ग्रह रत्नों के रत्न उनको बल देकर तुरंत फायदा देते है।हमेशा अनुकूल ग्रहो से संबंधित फल मिलने में दिक्क्त या बिघ्न आने पर उनका रत्न पहनना हमेशा लाभ देता है रत्न का वजन, क़्वालिटी अच्छी होनी चाहिए।। रत्न बिना सलाह लिए कभी नही पहनने चाहिए
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...