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ज्योतिष और आध्यात्म

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ज्योतिष और आध्यात्म

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ज्योतिष और आध्यात्म (महत्त्वपूर्ण लेख
posted Jun 4, 2020 by Pandit Vedic Jyotish

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ज्योतिष के अनुसार चांदी में तेजी और मंदी के योग ज्योतिष में ग्रह की पूरे मार्केट को प्रभावित करती है यह पर चाँदी के बारे मे जानकारी दी जा रही है चांदी में अचानक बहुत तेजी आ जाती है या यहमंदीहो जाती है। ऐसा क्यों होता है? इसके लिए ज्योतिष में कुछ ग्रहों को कारक माना जाता है। चांदी में तेजी या मंदी निम्र ग्रह योगों के होने पर भी तेजी और मंदी की सम्भावना रहती है | मंदी का योग * मंगल अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण पर आए तो यह चांदी में मंदी का संकेत है। * सोमवारी अमावस्या चांदी को मंदी करती है। * शनि के मार्गी या वक्री होने पर चांदी में मंदी आ सकती है। * शुक्र का वक्री होकर अस्त होना चांदी में मंदी करा सकता है। * बुध, शुक्र या बुध-चंद्र की युती चांदी में मंदी ला सकती है। * शुक्लपक्ष 16 दिनों का हो तो चांदी में मंदी आती है। * बुधवार के दिन चंद्र दर्शन चांदी में मंदी करता है। तेजी के योग * बुध या गुरु के वक्री होने पर चांदी के भाव तेज होना संभव है। * शुक्रवार, शनिवार का चंद्र दर्शन चांदी में तेजी करवा सकता है। * शुभ ग्रह रहित पुष्प या धनिष्ठा नक्षत्र चांदी में तेजी का कारण बनते हैं। * बुध-गुरु-शुक्र में से कोई भी ग्रह अस्त होने पर चांदी में तेजी होना संभव है। * किसी महीने में पांच बुधवार होने पर चांदी में उतार-चढ़ाव आकर तेजी होना संभव है। * शुक्लपक्ष की पंचमी मंगलवारी हो तो चांदी में तेजी हो सकती है। * सूर्य की संक्रांति के समय सूर्य चंद्र एक राशि पर आने से चांदी में तेजी आना संभव है। * बुध, गुरु का उदय तथा पश्चिम का शुक्रास्त चांदी में तेजी लाता है। www.futurestudyonline.com https://youtu.be/OLMp3Uw2HLc
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धन और ज्योतिष और पैसे का डूबना आज के समय में धन होना सबसे आवश्यक माना गया है वैसे भी पुरानी कहावत है की पहला सुख निरोगी काया दूजा सुख घर में धन माया यानी धन को प्राचीन समय से ही प्रमुखता दी गई है | आप खुद देखिये की तीजा सुख सुलक्षना नारी चोथा सुख पुत्र आज्ञाकारी पांचवां सुख राज में पासा छटा सुख देश में वासा और सातवां सुख संतोषी जीवन यानि इन सभी मुख्य सुखों में धन के सुख को दूसरा स्थान दिया गया है | ज्योतिष में हमारी कुंडली का दूसरा भाव धन का भाव माना गया है तो ग्यारवाँ भाव आय लाभ का तो सप्तम भाव हमारी दैनिक आमदनी का | यदि ये किसी प्रकार से दूषित हो रहे हो तो धन की समस्या रहती है | दूसरा भाव हमारी पारिवारिक धन की सिथ्ती और संचित धन की सिथ्ती दर्शाता है जब ये भाव इसका मालिक और इस भाव का कारक ग्रह सभी दूषित हो तो जातक को धन की समस्या का सामना अवस्य करना पड़ता है | इसी प्रकार यदि 11 वा भाव दूषित हो तो जातक को आमदनी में समस्या का सामना करना पड़ता है | इसी प्रकार कुंडली का चोथा भाव जातक द्वारा खुद की कमाई से बनाये हुवे मकान भूमि वाहन आदि का होता है और इस भाव की कमजोरी इन सब सुखों में कुछ न कुछ कमी करती है | जैसा की उपर बताया की पहला सुख निरोगी काया यानी हमारी कुंडली का लग्न लग्नेश और पहले भाव का कारक इन सब की सिथ्ती सही हो तभी जातक इन सब सुखो को भोग सकता है |सबसे बड़ी समस्या जो की आजकल लोगों को उसका सामना करना पड़ता है वो है धन का डूब जाना | जब भी हमारी कुंडली में दुसरे भाव और छ्टे भाव का सम्बन्ध आपस में स्थापित हो जाता है यानी की जब धनेश छ्टे भाव में हो या छ्टे भाव का मालिक दुसरे भाव में हो तब ऐसे जातक के दिए हुवे पैसे जल्दी से वापिस नही आते| ऐसी सिथ्ती में जब आय भाव के मालिक भी त्रिक भाव में हो तो ये सिथ्ती और ज्यादा भयानक हो जाती है और ऐसे जातक के पैसे डूबता ही डूबता है | इसिलिये ऐसे जातकों को विशेष सावधानी रखने की आवश्यकता होती है |अब समस्या आती है की धन की समस्या को कैसे दूर किया जाए | तो सबसे पहले तो हमे अपनी कुंडली में उपर लिखित भावों में से यदि कोई भाव दूषित उस से सम्बन्धित उपाय करके कुछ हद तक समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है | साथ ही कुंडली का 12वा भाव हमारे व्यय का होता है और यदि ये भाव बली हो तो जातक को खर्च का अधिक सामना करना पड़ता है ये अलग बात है की इसमें यदि शुभ ग्रह हो तो शुभ कार्यों पर खर्च होता है और अशुभ ग्रह हो तो अशुभ कार्यों जैसे बिम्मारी आदि पर अधिक खर्च होता है | अब बात आती है धन के सामान्य उपाय सबसे पहले तो आप अपने घर में धन या तिजोरी जहाँ रखते है वो स्थान घर के दक्षिण पश्चिम कोने में हो तो आपके लिय सबसे अच्छा रहेगा | दूसरी मुख्य बात ये की आपक धन रखने का स्थान कभी भी खाली न होना चाहिए उसमे कुछ न कुछ रूपए अवश्य रखे यदि रूपए न हो तो बादाम आदि सूखे मेवे उस स्थान में अवश्य रखे | जिनकी भी कुंडली में विष योग बन रहा हो उसे कभी भी लोहे की अलमारी या चमड़े से बनी हुई किसी वस्तु में अपना धन नही रखना चाहिए | जिनकी भी कुंडली में गुरु बुध का योग हो उन्हें अपने सोने के जेवर किसी हरे रंग के वस्त्र में लपेट कर रखने चाहिए | ग्रहों के दुस्प्रभाव को दूर करने के लिय अपने भोजन में से गाय कुते और कोवे को खिलाना चाहिए { अपने परोसे गये भोजन में से एक हिसा अलग निकल कर रख लें } घर में पत्नी शुक्र यानी साक्षात लक्ष्मी स्वरूप होती है अत: उसको भी खुश रखना आवश्यक है | माता चन्द्र स्वरुप होती है जो की धनदायक माने गये है अत : माँ को खुश रखे बगैर सभी सुखों की कल्पना भी नही की जा सकती | इसी प्रकार जिनकी कुंडली में चन्द्र चोथे भाव में हो उनको दिल खोलकर खर्च करना चाहिए क्योंकि लाल किताब में ऐसा माना गया है की ऐसा आदमी जितना खर्च करता है उसकी आमदनी उतनी ही ज्यादा बढती है | इन सबके साथ माँ लक्ष्मी जी की उपासना धन दायक मानी गई है
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आज पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। भारत में भी इस बीमारी ने अपना भरपूर कब्जा़ कर लिया है। लगभग 1 महीने से ऊपर हो चला है, पूरे देश में लॉकडाउन के चलते हम सभी अपने-अपने घरों में बंद हैं। घर में हर कोई अपनी रुचि अनुसार समय व्यतीत कर रहा है। किंतु कुछ लोग ऐसे हैं, जो कि न्यूज़ चैनल में टकटकी लगाए कोरोना अपडेटस् पर पूरी निगाह रखते हैं। कितने लोग संक्रमित हुए, कितनों की मौतें हुई, क्या करें, क्या ना करें? बस सारा दिन इस बीमारी के बारे में सोचते रहते हैं। ऐसे में उनमें डिप्रेशन यानी अवसाद की संभावना बढ़ती जा रही है। कोरोना से अपने बचाव के लिए हम बार-बार हाथ धो रहे हैं, जिससे जल का अपव्यय हो रहा है। लेकिन अभी ऐसा करने के अलावा हमारे पास कोई और उपाय भी नहीं है। ज्योतिष में जल का अपव्वय होने से व्यक्ति का चंद्रमा कमज़ोर हो जाता है। चंद्रमा के कमज़ोर होने से व्यक्ति मे अवसाद, भय, मानसिक चिंताएं व आत्मविश्वास में कमी आती है। कुलमिलाकर कहें तो कोरोना वायरस से बचाव के लिए घर में रहते हुए भी हम बहुत सी ऐसी चीज़ें कर रहे है, जिसकी वजह से कुछ अन्य बीमारियां या कह ले समस्याएं जन्म ले रही हैं। इन समस्यायों के उपचार हेतु आप घर में रहते हुए बड़ी आसानी से कलर थेरेपी का प्रयोग कर सकते हैं। आईये जानते हैं कुछ खास रंगों के महत्व और बीमारियों से बचाव वके लिए इन रंगों के उपयोग के बारे में– नारंगी रंग का महत्व आमतौर पर किसी व्यक्ति को डिप्रेशन से बचाने के लिए नारंगी रंग के वस्त्र, भोज्य पदार्थ का सेवन व उसके कक्ष की साज-सज्जा नारंगी रंग की जाती है। नारंगी रंग लाल व पीले रंग का मिश्रण होता है, अर्थात सूर्य की ऊर्जा जो कि व्यक्ति को आत्मविश्वास व सकारात्मक देती है व पीले रंग से गुरू यानी विवेक की वृद्धि होती है। इन दोनों रंगो के मिश्रित प्रभाव से भगवा रंग जन्म लेता है। जो कि व्यक्ति को शक्ति के साथ ज्ञान भी समुचित मात्रा में देता है। तभी तो साधु संतों का चोला भगवा रंग का होता है। वे अपने परिवार और करीबियों से दूर होकर भी समाज सेवा कर, दूसरों के जीवन को प्रकाशित करते हैं। इस रंग में तंत्रिका तंत्र को मजबूती प्रदान करने की अद्भुत शक्ति होती है। महत्वकांक्षा को बढ़ाना, भूख बढ़ाना व श्वास के रोगों से आराम देना इस रंग के गुण हैं। हरा रंग का महत्व हरा रंग ताज़गी का प्रतीक है। यह रंग व्यक्ति के “बुध ग्रह” की शुद्धि करता है और व्यक्ति की बुद्धि का विकास कर जीवन में नए आयामों की ओर आकर्षित करता है। ऐसे में यदि हम हरे रंग के वस्त्र धारण करें, हरे रंग की कांच की बोतल से जल का सेवन करें , हरा भोजन खाए यानी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें व आस-पास पेड़ पौधे लगाए, तो घर बैठे ही मन की अशांति दूर होकर नए रास्ते खुलेंगे। हरे रंग का यह उपचार कोरोना मरीज़ों की शीघ्र उपचार के लिए भी प्रयुक्त किया जा सकता है। इस रंग के प्रयोग से व्यक्ति को नेत्र रोग, कमजोर ज्ञानतंतु, अल्सर, कैंसर व चर्म रोग जैसी बिमारियों में राहत मिलती है। बौद्धिक विकास के लिए जातक को हरे रंग का पन्ना रत्न ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। नीला रंग का महत्व नीला रंग सत्य ,आशा, विस्तार, स्वच्छता व न्याय का प्रतीक है। यह रंग स्त्री रोग, पेट में जलन, गर्मी, महत्वपूर्ण बल की कमी आदि के उपचार में प्रयुक्त किया जाता है। अब नीले रंग के भी कई प्रकार होते हैं, जैसे गहरा नीला और हल्का नीला। कोरोना लॉकडाउन के समय यह अति आवश्यक है कि हम गहरे नीले या काले रंग का प्रयोग कम से कम करें। गहरा नीला या काला रंग अकेलेपन को बढ़ाता है और व्यक्ति में निराशा व तामसिक सोच का विकास करता है। और वो कहते हैं ना, खाली दिमाग शैतान का घर होता है। ज्यादातर लोग इस वक्त अपने खाली दिमाग व समय को भरने के लिए प्रयोजन में लगे हैं। अवसाद जैसी स्थिति में इस रंग का प्रयोग कदापि न करें। ऐसे में हल्का रंग जैसे हल्के नीले रंग का प्रयोग अति शुभ रहेगा। हल्का नीला रंग श्वेत व नीले रंग के मिश्रित होता है। श्वेत रंग व्यक्ति को शीतलता, पवित्रता व शांति देता है। वही नीला रंग व्यक्ति में दृढ़ता लाता है। आसमानी या हल्के नीले रंग वाले वस्त्र पहनने से व्यक्ति को असीम शांति व सुख का अनुभव होता है और इस रंग से व्यक्ति की ग्रहण शीलता में सात्विकता आती है। लाल रंग का महत्व हर रंग की अपनी एक आभा शक्ति होती है। लाल रंग की आभा शक्ति सर्वाधिक होती है। तभी तो विवाह समारोह में वधू को लाल रंग का जोड़ा पहनाने का चलन है। हर रंग की अपनी एक उपचारक क्षमता भी होती है। लाल रंग प्रेम, उत्साह व शक्ति का प्रतीक है। लाल रंग “मंगल ग्रह” का भी प्रतिनिधित्व करता है। जिस जातक की कुंडली में मंगल ग्रह दूषित होता है, उससे लाल वस्तुओं का दान करने की सलाह दी जाती है। लाल रंग अनेकों बीमारियों के उपचार में भी प्रयोग किया जाता है। जैसे निम्न रक्त संचार, खून की कमी, अवसाद ,जोड़ों का दर्द, पैरालिसिस आदि। कलर थेरेपी में इस रंग को जातक को पहनने व भोज्य पदार्थ द्वारा ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। किंतु इस रंग का अत्यधिक प्रयोग क्रोध में हिंसा को जन्म देता है। पीला रंग का महत्व पीला रंग ज्ञान और सात्विकता का प्रतिनिधित्व करता है। खांसी, जुखाम, लीवर संबंधित बीमारियाँ कब्ज़, पीलिया, सूजन व तंत्रिका तंत्र की कमज़ोरी के उपचार में प्रयुक्त होता है। पीला रंग “गुरु ग्रह” का प्रतिनिधित्व करता है। व्यक्ति में ज्ञान और वैराग्य भावना विकसित कर सम्मानित जीवन जीने के लिए पीले रंग का पुखराज रत्न ग्रहण करने की सलाह दी जाती है। बैंगनी रंग का महत्व बैंगनी रंग लाल व नीले रंग के मिश्रण से बनता है। इस रंग का प्रयोग यश, प्रसिद्धि व उत्साह प्रदान करता है। यह रंग रक्त शोधन के लिए प्रयुक्त किया जाता है। दर्द, सूजन, बुखार व कार्य क्षमता की वृद्धि के लिए इस रंग का प्रयोग किया जाता है। बैंगनी रंग सुस्त मस्तिष्क को उत्सव व आशा प्रदान करता है। सब रंगों की अपनी उपचारक क्षमता होती है। कलर थेरेपी में अलग-अलग रंगों के बल्ब, पानी की बोतल, वस्त्र, खाद्य पदार्थ, क्रिस्टल, पिरामिड, चादर व पर्दे के रूप में उपचार दिया जाता है। यह उपचार आंतरिक रूप से हमारी हर बीमारियों के इलाज में सहायक है। चाहे वह मानसिक हो या शारीरिक। विशेषज्ञ की निगरानी में किए हुए उपचार से उचित लाभ मिलता है। आशा करते हैं कि इन कलर थेरेपी के छोटे-छोटे उपचारों द्वारा आप का यह कठिन समय सही तरीके से व्यतीत कर पाएंगे
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कोरोना वायरस (Coronavirus) और ज्योतिष,व ज्योतिषीय उपाय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जाहिर किया गया है कि कोरोनावायरस का प्रभाव सी-फूड से हुआ है यानि समुद्री उत्पादों से। ज्योतिष मानव जीवन को प्रभावित करने वाले पंचमहाभूतों में सामजस्य रखने पर जोर देता है। आइये जानते हैं कोरोना वायरस का ज्योतिषीय आधार: कोई भी रोग किसी एक ग्रह के कारण नहीं होता अपितु अनेक ग्रहों के संयोजन और राशियों के प्रभाव के कारण होता है। चंद्रमा का प्रभाव विशुद्ध रूप से इस रोग को फैलाने में शामिल है क्योंकि समुद्र और समुद्र से संबंधित उत्पादों पर चंद्रमा का आधिपत्य होता है। इसके अलावा विषाणु जनित रोगों के लिए राहु और केतु भी जिम्मेदार माने जाते हैं तथा बुध ग्रह पर शनि और मंगल का प्रभाव हो तो भी ऐसी ही परिस्थितियों का निर्माण होता है। सूर्य आरोग्य का कारक है और यदि वह गोचर में कमजोर चल रहा हो तो भी रोग होने की संभावना बढ़ जाती। वर्तमान में शनि की राशियों में जनवरी से सूर्य का गोचर हुआ है जोकि मध्य फरवरी तक मकर राशि में और उसके बाद मध्य मार्च तक कुंभ राशि में रहा। इस प्रकार शनि की राशि में होने से सूर्य कमजोर स्थिति में होता है। कोरोना वायरस की विकट स्थिति निमोनिया जैसे लक्षण भी पैदा करती है, जिसके लिए बुध ग्रह भी जिम्मेदार माना जाता है। बृहस्पति का काम है वृद्धि करना अर्थात बढ़ाना या प्रसार करना, तो इस रोग के फैलने में बृहस्पति भी मुख्य भूमिका निभा रहा है। इस प्रकार बृहस्पति और केतु की युति ने इसमें महत्वपूर्ण रोल निभाया और यह आज एक महामारी (पेंडेमिक) बन चुकी है। बृहस्पति राहु केतु के अक्ष में होने से पीड़ित और कमजोर स्थिति में है, जिसकी वजह से यह बीमारी तेजी से फैल रही है। मिथुन राशि से गले के रोग देखे जाते हैं तथा कर्क राशि फेफड़े और जल संबंधित बीमारियों को दर्शाती है। कर्क और मिथुन राशि का पीड़ित होना भी आवश्यक है। वर्तमान समय में राहु का गोचर मिथुन राशि में ही चल रहा है तथा मंगल भी बृहस्पति और केतु के साथ धनु राशि में बैठकर पूर्ण रूप से मिथुन और कर्क राशि को देख रहा है, ऐसी स्थिति में मिथुन और कर्क दोनों ही राशियाँ पीड़ित हैं। डॉक्टरी नतीजों से यह बात सामने आयी है कि जिन लोगों को डायबिटीज़ या डिप्रेशन की समस्या है, उन्हें कोरोना वायरस (coronavirus) ज्यादा और जल्दी प्रभावित कर रहा है। यहाँ भी ध्यान देने योग्य बात यह है कि डायबिटीज़ के लिए भी बृहस्पति और डिप्रेशन के लिए चन्द्रमा मुख्य रूप से जिम्मेदार ग्रह हैं। ये दोनों ही रोग व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बना देते हैं। उपरोक्त स्थितियां वर्तमान समय में कोरोना वायरस (coronavirus) को फ़ैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कोरोना वायरस (Coronavirus) और ज्योतिषीय उपाय कोई भी विषाणु आप पर तभी आक्रमण कर सकता है, जब आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो। कोरोना वायरस (coronavirus) भी एक विषाणु है, जो आपको संक्रमित करता है, इसलिए आपको इसकी रोकथाम के कुछ उपाय करने चाहियें। ज्योतिष और आयुर्वेद का पुराना सम्बन्ध है और उसी के अनुसार कुछ विशेष उपाय बताये गए हैं: उपाय के रूप में सर्वप्रथम आपको अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार नींबू, हरी मिर्च, संतरा, लहसुन, दही खाने से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा संक्रामक रोगों से बचने के लिए विटामिन सी का सेवन करना चाहिए जो कि नींबू और आंवले में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। विटामिन डी प्राप्त करना भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे रोगों से लड़ने में सहायता मिलती है। विटामिन डी का मुख्य स्रोत सूर्य की रोशनी है। इसके अलावा आपको इलायची, लौंग, काली मिर्च और जावित्री को मिलाकर अपने पास किसी पुड़िया में रखना चाहिए। इसके अलावा आप अपने माथे पर शुद्ध सिंदूर का तिलक लगाएँ क्योंकि इसमें सीसा (लेड) पाया जाता है और आयुर्वेद के अनुसार सीसा की भस्म कई रोगों को दूर करने में सक्षम होती है और यह शरीर की कांति को बढ़ाने वाला होता है तथा कफ को दूर करता है। इसके अलावा प्रतिदिन अपने घर में गाय के गोबर से बने उपले पर कपूर और गूगल तथा लोबान जलाकर पूरे घर में घुमाएं, जिससे विभिन्न प्रकार के कीटाणुओं का नाश हो सके और वातावरण भी शुद्ध हो जाये। आपको प्रतिदिन 3 – 4 बूँद गोमूत्र का सेवन करना चाहिए। इनके अलावा ऊपर जिन जिन ग्रहों का वर्णन किया गया है, उन ग्रहों को मजबूत करने के उपाय भी आपको करनी चाहिए ताकि इनसे होने वाली समस्याओं में कमी आए। प्रतिदिन योग और व्यायाम करें, जिससे आपका शरीर मजबूत हो और आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े तथा आप कोरोना वायरस की चपेट में आने से बच सकें। कोरोना वायरस से बचाव का सबसे अच्छा और सटीक उपाय माँ दुर्गा के सप्तशती से लिया हुआ यह मंत्र “रोगान शेषान पहंसि तुष्टा रुष्टा, तु कामान् सकलानभीष्टान। व्वांमाश्रितानां न विपन्नराणां, त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।” आपको रोग मुक्त रखने में मदद करेगा। प्रतिदिन इस मंत्र का यथाशक्ति जाप करने से रोग से मुक्ति मिलती है। • महामारी नाश के लिए मंत्र साधना " जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते"
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अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक और भाग्यांक क्या होते हैं। ज्योतिषशास्त्र की तरह ही अंक शास्त्र का भी महत्व ज्यादा होता है| अंक अपने सभी रुपो में हमारी जिन्दगी से एक या अनेक तरह से जुड़े हुए है | हमारे जन्म दिनांक में अंक है, हमारे नाम में अंक छिपा हुआ है और हमारे काम या व्यवसाय के नाम में अंक छुपा है | जब किसी माह के किसी दिन कोई घटना घटती है तो वह एक अंक में सिमट जाती है | इसी तरीके से हर साल का एक अंक होता है | अंक शास्त्र ज्योतिष विज्ञान का एक प्रकार है जिसमे अंको के विश्लेषण द्वारा भविष्य कथन किया जाता है | अंक शास्त्र के अनुसार लोगो के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में उनसे संबधित संख्या का विश्लेषण कर बहुत कुछ बताया जा सकता है | कई प्रकार के अंक और उनकी गणनाओं की तकनिक ने अंक शास्त्र एक नये विशाल क्षेत्र तक पहुँचाया है | अंक शास्त्र में कई प्रकार के अंक होते है जैसे जन्मांक, भाग्यांक, नामांक आदि | इसमें यह भी सिध्दान्त है कि जन्मांक में किसी अंक कि उपस्थिति और अनुपस्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति का व्यवहार कैसा होगा | अपने व्यक्तित्व को पहचानने के लिए इस का उपयोग किया जाता है | मूलांक - अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है। (उदा. - यदि किसी का जन्म 16 तारीख को हुआ है तो उसका मुलांक 1 + 6 = 7 साथ होगा.) भाग्यांक - दिन : महीना : साल के कुल योग को भाग्यांक कहते है। ( उदा - यदि किसी की जन्म तारीख - 16 / 12 /1991 है तो उसका भाग्यांक - 1 + 6 + 1 + 2 + 1 + 9 + 9 + 1 = 30 3 + 0 = 3 तीन होगा ) मूलांक और भाग्यांक के अनुसार काम करने से जीवन में रुके हुए काम पुरे होते चले जाते है। अंकज्योतिष में नौ ग्रहों के अंक - सूर्य, चन्द्र, गुरू, राहु, बुध, शुक्र, केतु , शनि और मंगल इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, हर ग्रह का किसी एक अंक पर विशेष प्रभाव होता है। अंक और उसके स्वामी :- 1 - सूर्य 2 - चंद्र 3 - गुरु 4 - राहु 5 - बुध 6 - शुक्र 7 - केतु 8 - शनि 9 - मंगल 10, 19, 28 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 1 11, 20, 29 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 2 3, 12, 21, 30 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 3 4, 13, 22, 31 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 4 5, 14, 23 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 5 6, 15, 24 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 6 7, 16, 25 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 7 8, 17, 26 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 8 9, 18, 27 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 9 आगे की लेखों में 1 से 9 तक मुलांक के जातकों के विषय में विस्तार से जानकारी बतायी जायेगी।
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