top button
    Futurestudyonline Community

----विष योग-----

0 votes
177 views
- किसी भी जातक की कुंडली में विष योग तब निर्मित होता है जब कुंडली में शनि और चंद्रमा का दृश्य अथवा युति संबंध बनता है, चंद्रमा को अमृत समान माना जाता है जबकि चंद्रमा पर शनि की दृष्टि से विष योग का निर्माण कर देती है। विष योग के बारे में कहा गया है कि ऐसा जातक जीवन से निराश हो जाता है। निराशा तब आती है जब मनोमस्तिष्क सही ढंग से साथ नहीं देता, ज्ञान बाधित हो जाता है। तात्पर्य यह कि विष योग विचारशून्यता देता है। यह कुंडली के जिस भाव में निर्मित होता है उस भाव से संबंधित फलों को छीन कर देता है और उससे संबंधित रिश्तो में भी दरार आ सकती है व्यक्ति स्वयं को अकेला महसूस करता है और इस वजह से मानसिक तनाव और डिप्रेशन में भी जा सकता है। विष योग के उपाय के लिए चंद्रमा और शनि के जाप करने चाहिए। भगवान शिव का रुद्राभिषेक समय-समय पर कराते रहना चाहिए और जातक के जन्म दिवस के अवसर पर अवश्य कराना चाहिए। जातक को रात्रि में दूध पीने से बचना चाहिए। अपने खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए बासी भोजन से परहेज करना चाहिए। ध्यान एवं योग का सहारा लेना चाहिए जिससे मानसिक स्थिति मजबूत बन सके। विकट स्थिति होने पर महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।

References

----विष योग-----
posted Jun 25, 2020 by Deepika Maheshwary

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
+1 vote
गज केसरी योग व्यक्ति की कुंडली मेँ गुरु और चन्द्रमा की स्तिथि बलवान होने से बनता हैँ. ऐसे जातक की प्रतिष्ठा आसमान छूती हैँ. सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैँ. गज केसरी योग होते हुये भी यदि शुभफल प्राप्त नहीं हों तो गुरु या चन्द्रमा मेँ से किसी एक ग्रह का कमजोर होना कारण होता है. ऐसे जातक को शिव आराधना रुद्राभिषेक करना चाहिए, पीला असली पुखराज रत्न जो 7 रत्ती से कम न हों अधिक हों को सोने मेँ धारण करना चाहिए. चन्द्रमा के लिये शुद्ध मोती चांदी मेँ धारण करना चाहिए. इससे शुभफल प्राप्त होने से अवसर प्राप्त होते हैँ. बाकि किस्मत से ज्यादा और समय से पूर्व किसी को कुछ भी प्राप्त नहीं होता हैँ. आगे ईश्वर इच्छा सर्वोपरि है
0 votes
मई दिन सोमवार ज्येष्ठ कृष्णपक्ष चतुर्थी दिन-10:00उपरांत पंचमी श्रीशुभसंवत-2077,शाके-1942,हिजरीसन-1440-41 सुर्योदय-05:25 सुर्यास्त-06:35 सुर्योदय कालीन नक्षत्र-मूल उपरांत पुर्वाषाढा,सिद्ध-योग,वा-करण सुर्योदय कालीन ग्रह विचार-सुर्य-मेष,चन्द्रमा-धनु,मंगल-कुम्भ,बुध-वृष,गुरू-मकर,शुक्र-वृष,शनि-मकर,राहु-मिथुन,केतु-धनु चौघड़िया प्रात:07:30 से 09:00 तक काल प्रातः 09.00 से 10.30 तक शुभ प्रातः10:30 से 12:00 रोग दोपहरः 01.30 से 03.00 तक चर शामः 03.00 से 04.30 तक लाभ शामः 04.30 से 06.00 तक अमृत खरीदारी के लिए शुभ समयः शामः 04.30 राहु काल: 07.30 से 9:00 तक. दिशाशूल-पूर्व एवं अग्नेय
0 votes
0 votes
0 votes
कोरोना वायरस (Coronavirus) और ज्योतिष,व ज्योतिषीय उपाय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जाहिर किया गया है कि कोरोनावायरस का प्रभाव सी-फूड से हुआ है यानि समुद्री उत्पादों से। ज्योतिष मानव जीवन को प्रभावित करने वाले पंचमहाभूतों में सामजस्य रखने पर जोर देता है। आइये जानते हैं कोरोना वायरस का ज्योतिषीय आधार: कोई भी रोग किसी एक ग्रह के कारण नहीं होता अपितु अनेक ग्रहों के संयोजन और राशियों के प्रभाव के कारण होता है। चंद्रमा का प्रभाव विशुद्ध रूप से इस रोग को फैलाने में शामिल है क्योंकि समुद्र और समुद्र से संबंधित उत्पादों पर चंद्रमा का आधिपत्य होता है। इसके अलावा विषाणु जनित रोगों के लिए राहु और केतु भी जिम्मेदार माने जाते हैं तथा बुध ग्रह पर शनि और मंगल का प्रभाव हो तो भी ऐसी ही परिस्थितियों का निर्माण होता है। सूर्य आरोग्य का कारक है और यदि वह गोचर में कमजोर चल रहा हो तो भी रोग होने की संभावना बढ़ जाती। वर्तमान में शनि की राशियों में जनवरी से सूर्य का गोचर हुआ है जोकि मध्य फरवरी तक मकर राशि में और उसके बाद मध्य मार्च तक कुंभ राशि में रहा। इस प्रकार शनि की राशि में होने से सूर्य कमजोर स्थिति में होता है। कोरोना वायरस की विकट स्थिति निमोनिया जैसे लक्षण भी पैदा करती है, जिसके लिए बुध ग्रह भी जिम्मेदार माना जाता है। बृहस्पति का काम है वृद्धि करना अर्थात बढ़ाना या प्रसार करना, तो इस रोग के फैलने में बृहस्पति भी मुख्य भूमिका निभा रहा है। इस प्रकार बृहस्पति और केतु की युति ने इसमें महत्वपूर्ण रोल निभाया और यह आज एक महामारी (पेंडेमिक) बन चुकी है। बृहस्पति राहु केतु के अक्ष में होने से पीड़ित और कमजोर स्थिति में है, जिसकी वजह से यह बीमारी तेजी से फैल रही है। मिथुन राशि से गले के रोग देखे जाते हैं तथा कर्क राशि फेफड़े और जल संबंधित बीमारियों को दर्शाती है। कर्क और मिथुन राशि का पीड़ित होना भी आवश्यक है। वर्तमान समय में राहु का गोचर मिथुन राशि में ही चल रहा है तथा मंगल भी बृहस्पति और केतु के साथ धनु राशि में बैठकर पूर्ण रूप से मिथुन और कर्क राशि को देख रहा है, ऐसी स्थिति में मिथुन और कर्क दोनों ही राशियाँ पीड़ित हैं। डॉक्टरी नतीजों से यह बात सामने आयी है कि जिन लोगों को डायबिटीज़ या डिप्रेशन की समस्या है, उन्हें कोरोना वायरस (coronavirus) ज्यादा और जल्दी प्रभावित कर रहा है। यहाँ भी ध्यान देने योग्य बात यह है कि डायबिटीज़ के लिए भी बृहस्पति और डिप्रेशन के लिए चन्द्रमा मुख्य रूप से जिम्मेदार ग्रह हैं। ये दोनों ही रोग व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर बना देते हैं। उपरोक्त स्थितियां वर्तमान समय में कोरोना वायरस (coronavirus) को फ़ैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कोरोना वायरस (Coronavirus) और ज्योतिषीय उपाय कोई भी विषाणु आप पर तभी आक्रमण कर सकता है, जब आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो। कोरोना वायरस (coronavirus) भी एक विषाणु है, जो आपको संक्रमित करता है, इसलिए आपको इसकी रोकथाम के कुछ उपाय करने चाहियें। ज्योतिष और आयुर्वेद का पुराना सम्बन्ध है और उसी के अनुसार कुछ विशेष उपाय बताये गए हैं: उपाय के रूप में सर्वप्रथम आपको अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार नींबू, हरी मिर्च, संतरा, लहसुन, दही खाने से आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है। इसके अलावा संक्रामक रोगों से बचने के लिए विटामिन सी का सेवन करना चाहिए जो कि नींबू और आंवले में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। विटामिन डी प्राप्त करना भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे रोगों से लड़ने में सहायता मिलती है। विटामिन डी का मुख्य स्रोत सूर्य की रोशनी है। इसके अलावा आपको इलायची, लौंग, काली मिर्च और जावित्री को मिलाकर अपने पास किसी पुड़िया में रखना चाहिए। इसके अलावा आप अपने माथे पर शुद्ध सिंदूर का तिलक लगाएँ क्योंकि इसमें सीसा (लेड) पाया जाता है और आयुर्वेद के अनुसार सीसा की भस्म कई रोगों को दूर करने में सक्षम होती है और यह शरीर की कांति को बढ़ाने वाला होता है तथा कफ को दूर करता है। इसके अलावा प्रतिदिन अपने घर में गाय के गोबर से बने उपले पर कपूर और गूगल तथा लोबान जलाकर पूरे घर में घुमाएं, जिससे विभिन्न प्रकार के कीटाणुओं का नाश हो सके और वातावरण भी शुद्ध हो जाये। आपको प्रतिदिन 3 – 4 बूँद गोमूत्र का सेवन करना चाहिए। इनके अलावा ऊपर जिन जिन ग्रहों का वर्णन किया गया है, उन ग्रहों को मजबूत करने के उपाय भी आपको करनी चाहिए ताकि इनसे होने वाली समस्याओं में कमी आए। प्रतिदिन योग और व्यायाम करें, जिससे आपका शरीर मजबूत हो और आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े तथा आप कोरोना वायरस की चपेट में आने से बच सकें। कोरोना वायरस से बचाव का सबसे अच्छा और सटीक उपाय माँ दुर्गा के सप्तशती से लिया हुआ यह मंत्र “रोगान शेषान पहंसि तुष्टा रुष्टा, तु कामान् सकलानभीष्टान। व्वांमाश्रितानां न विपन्नराणां, त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।” आपको रोग मुक्त रखने में मदद करेगा। प्रतिदिन इस मंत्र का यथाशक्ति जाप करने से रोग से मुक्ति मिलती है। • महामारी नाश के लिए मंत्र साधना " जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते"
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...