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मोरपंख से कैसे दूरे होते हैं दोष, जानिए यहां

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मोरपंख के बिना भगवान श्रीकृष्ण का शृंगार और पूजन अधूरा माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के साथ मोरपंख अवश्य लगाएं। मोरपंख को घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। घर के मुख्य द्वार पर भगवान श्रीगणेश की मूर्ति के साथ दो मोरपंख भी रखें। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा और जीव जंतु घर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। अगर बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता है तो बच्चे की किताबों में मोर पंख रख दें। ऐसा करने से बच्चे की एकाग्रता बढ़ेगी। अगर बच्चा जिद्दी है तो मोरपंख से बने पंखे से उसकी हवा करें। ऐसा करने से उसका व्यवहार बदल जाएगा। बच्चे के हाथ पर एक मोरपंख बांधकर रखने से बच्चे को कभी नजर नहीं लगती और डरावने सपने भी नहीं आते हैं। पीले रेशमी कपड़े में एक मोर पंख को लपेटकर सदा अपने पास रखें। ऐसा करने से आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है। आग्नेय कोण में मोरपंख लगाने से घर के वास्तु दोष को ठीक किया जा सकता है। किसी मंदिर में जाकर मोरपंख को श्रीराधा-कृष्ण की मूर्ति के पास रख दें। 40 दिन पूजा करने के बाद इसे घर में ले आएं। ऐसा करने से सभी बिगड़े काम बनने लगेंगे। पति-पत्नी के बीच तनाव रहता है तो शयनकक्ष में पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में मोर पंख रख दें।

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मोरपंख से कैसे दूरे होते हैं दोष, जानिए यहां
posted Jun 27, 2020 by Deepika Maheshwary

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*जानिए! कैसे नवग्रह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर डालते हैं प्रतिकूल प्रभाव* नवग्रहों का व्यक्ति की जिंदगी में बहुत महत्व होता है। व्यक्ति की कुंडली में अगर नवग्रहों की स्थिति खराब हो तो उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं नवग्रह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। हम आपको यहां नवग्रहों और उनके प्रभाव से व्यक्ति को होने वाले रोगों के बारे में बता रहे हैं ....... सूर्य :- सूर्य नवग्रहों में सबसे पहला ग्रह है। अगर किसी व्यक्ति की राशि में सूर्य की स्थिति सही नहीं हो, तो माना जाता है कि उसकी कुंडली में सूर्य की खराब दशा चल रही है। सूर्य यदि खराब हो, तो वह करियर, धन और सेहत से जुड़ी समस्याएं (दिल से जुड़ी समस्याएं, ब्लड प्रेशर, ब्लड सर्कुलेशन) पैदा कर सकता है। चंद्र :- चंद्र आपकी छाती, आंखें, खून, पानी, जेनेरेटिव सिस्टम, पानी का मालिक होता है। अगर चंद्र ठीक न हो तो यूरिनरी प्रॉब्लम, ड्रॉप्सी, कोलाइटिस, ब्रोंकाइटिस, वैरिकोज और ऐब्डोमन से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। मंगल :- मंगल इंसान के शरीर का मसक्युलर सिस्टम कंट्रोल करता है। अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मंगल की स्थिति बेहद खराब हो, तो यह ब्लड क्लॉट, ब्रेन फीवर, लंग्स प्रॉब्लम्स, टाइफॉइड और ब्लड से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है। बुध :- बुध जहां मनुष्य की जीभा, नाड़ी, सांस, सेल्स और नर्वस सिस्टम को कंट्रोल करता है, वहीं यह हवा को भी अपने नियंत्रण में रखता है। इस ग्रह के कमजोर होने से नाक से जुड़ी समस्या, हकलाने की समस्या, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, पैरालिसिस, नर्वस डिसऑर्डर आदि बीमारियां हो सकती हैं। गुरु :- थाई, मांस, फैट, किडनी, लिवर और आर्टेरियल सिस्टम का मालिक ग्रह है गुरु। अगर किसी की कुंडली में बुरी तरह प्रभावित हो, तो यह गठिया, डायबीटीज, पाइल्स, ट्यूमर, ब्लड कैंसर और लिवर मालफंक्शन जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है। शुक्र :- शुक्र त्वचा, चेहरा, आंखें, जेनेरेटिव सिस्टम, सीमेन औक डाइजेस्टिव सिस्टम को नियंत्रित करता है। जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह के दोषी होने पर व्यक्ति को आंखों, त्वचा से जुड़ी बीमारी, वेनेरियल प्रॉब्लम, इनडाइजेस्शन, भूख कम लगना, यहां तक कि नपुंसकता तक हो सकती है। शनि :- पांव, घुटनों, दिमाग, एसिड्स, बोन मैरो, सीक्रेटिव सिस्टम, रिब्स, बाल, नाखून, इन सभी का मालिक होता है शनि। यह जन्म से ही व्यक्ति की कुंडली में जुड़ जाता है। शनि ग्रह यदि खराब हो, तो यह अर्थराइटिस, रयूमैटिज्म, गठिया, बोन टीबी, अस्थमा, कोल्ड, नाखूनों में फंगस, बालों का झड़ना और नपुंसकता जैसी समस्या भी दे सकता है। राहु और केतु :- राहु और केतु मनुष्य को समस्याएं देने, उन्हें तबाह करने, उन्हें किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचाने के लिए ही होते हैं। लेकिन ये भी बहुत कुछ विशेष महत्व रखता है कुंडली के अनुसार रिज़ल्ट देखा जाता है https://youtu.be/zDDEuYT0H-8
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अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक और भाग्यांक क्या होते हैं। ज्योतिषशास्त्र की तरह ही अंक शास्त्र का भी महत्व ज्यादा होता है| अंक अपने सभी रुपो में हमारी जिन्दगी से एक या अनेक तरह से जुड़े हुए है | हमारे जन्म दिनांक में अंक है, हमारे नाम में अंक छिपा हुआ है और हमारे काम या व्यवसाय के नाम में अंक छुपा है | जब किसी माह के किसी दिन कोई घटना घटती है तो वह एक अंक में सिमट जाती है | इसी तरीके से हर साल का एक अंक होता है | अंक शास्त्र ज्योतिष विज्ञान का एक प्रकार है जिसमे अंको के विश्लेषण द्वारा भविष्य कथन किया जाता है | अंक शास्त्र के अनुसार लोगो के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में उनसे संबधित संख्या का विश्लेषण कर बहुत कुछ बताया जा सकता है | कई प्रकार के अंक और उनकी गणनाओं की तकनिक ने अंक शास्त्र एक नये विशाल क्षेत्र तक पहुँचाया है | अंक शास्त्र में कई प्रकार के अंक होते है जैसे जन्मांक, भाग्यांक, नामांक आदि | इसमें यह भी सिध्दान्त है कि जन्मांक में किसी अंक कि उपस्थिति और अनुपस्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति का व्यवहार कैसा होगा | अपने व्यक्तित्व को पहचानने के लिए इस का उपयोग किया जाता है | मूलांक - अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है। (उदा. - यदि किसी का जन्म 16 तारीख को हुआ है तो उसका मुलांक 1 + 6 = 7 साथ होगा.) भाग्यांक - दिन : महीना : साल के कुल योग को भाग्यांक कहते है। ( उदा - यदि किसी की जन्म तारीख - 16 / 12 /1991 है तो उसका भाग्यांक - 1 + 6 + 1 + 2 + 1 + 9 + 9 + 1 = 30 3 + 0 = 3 तीन होगा ) मूलांक और भाग्यांक के अनुसार काम करने से जीवन में रुके हुए काम पुरे होते चले जाते है। अंकज्योतिष में नौ ग्रहों के अंक - सूर्य, चन्द्र, गुरू, राहु, बुध, शुक्र, केतु , शनि और मंगल इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, हर ग्रह का किसी एक अंक पर विशेष प्रभाव होता है। अंक और उसके स्वामी :- 1 - सूर्य 2 - चंद्र 3 - गुरु 4 - राहु 5 - बुध 6 - शुक्र 7 - केतु 8 - शनि 9 - मंगल 10, 19, 28 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 1 11, 20, 29 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 2 3, 12, 21, 30 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 3 4, 13, 22, 31 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 4 5, 14, 23 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 5 6, 15, 24 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 6 7, 16, 25 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 7 8, 17, 26 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 8 9, 18, 27 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 9 आगे की लेखों में 1 से 9 तक मुलांक के जातकों के विषय में विस्तार से जानकारी बतायी जायेगी।
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सभी माता-पिता की यही इच्छा होती है कि उनके बच्चे पढ़ाई के मामले में अव्वल रहें। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए बच्चों की शिक्षापर विशेष ध्यान भी दिया जाता है। बच्चों का परिणाम श्रेष्ठ रहे, इसके लिए वास्तु की टिप्स का भी ध्यान रखना चाहिए। वास्तु घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म करके सकारात्मकऊर्जा बढ़ाता है। घर का वातावरण सकारात्मक रहेगा तो बच्चों का मन पढ़ाई में भी अच्छी तरह लगा रहेगा। वास्तु में स्टडी रूम के लिए भी कई बातें बताई गई हैं, जिनसे विद्यार्थियों को काफी लाभ मिल सकता है। ☆☆ विद्यार्थियों को ईशान कोण (उत्तर-पूर्व काकोना) की ओर मुंह करके पढ़ाई करनी चाहिए।यदि इस दिशा में पढ़ाई करना संभव न हो तो पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके पढ़ाई कर सकते हैं। ☆☆ यदि स्टडी रूम में चाय-पानी या नाश्ता भी किया हो तो जूठे बर्तन, प्लेट आदि को पढ़ाई करने से पहले वहां से हटा देना चाहिए। ☆☆ स्टडी रूम में पूर्व-उत्तर की ओर खिड़की होगी तो श्रेष्ठ रहता है। ☆☆ पढ़ाई करते समय अपने आस-पास का वातावरण शुद्ध होना चाहिए। सुगंध वाला वातावरण होना चाहिए, कमरे में दुर्गंध नहीं होना चाहिए। ☆☆पढ़ाई की टेबल पर आवश्यक सामग्री हीहोनी चाहिए। अनावश्यक सामग्री को तुरंत हटा देना चाहिए, अन्यथा पढ़ाई के समय मन भटक सकता है। ☆☆पढ़ने का समय सबसे अच्छा समय है ब्रह्ममुहूर्त। सूर्योदय से पहले यानी सुबह 4.30 बजेसे सुबह 10 बजे तक पढ़ाई करना लाभदायक रहता है। रात को अधिक देर तक पढऩा स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। ☆☆अपने स्टडी रूम में माता सरस्वती,गणेशजी या अपने प्रिय देवी-देवता की फोटोलगा सकते हैं। स्टडी रूम में ऐसी चीजें, फोटोहोने चाहिए जो पढ़ाई से संबंधित हों।। नकारात्मक विचारों वाले फोटो, फिल्मी फोटो, प्रेम से संबंधित फोटो नहीं लगाना चाहिए। ☆☆ स्टडी रूम में किताबें दक्षिण-पश्चिम दिशा के कोने में रख सकते हैं। उत्तर-पूर्व दिशा केकोने में हल्के सामान रखना चाहिए। ☆☆इस रूम का कलर हल्का पीला या सफेद होगा तो सबसे अच्छा रहेगा। गहरे रंगों के उपयोग से बचना चाहिए। इस रूम में दर्पणनहीं रखना चाहिए।
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ग्रह बाधा होने से पूर्व मिलते हैं ये संकेत: ग्रह अपना शुभाशुभ प्रभाव गोचर एवं दशा-अन्तर्दशा-प्रत्यन्तर्दशा में देते हैं । जिस ग्रह की दशा के प्रभाव में हम होते हैं, उसकी स्थिति के अनुसार शुभाशुभ फल हमें मिलता है । जब भी कोई ग्रह अपना शुभ या अशुभ फल प्रबल रुप में देने वाला होता है, तो वह कुछ संकेत पहले से ही देने लगता है ।इनके उपाय करके बढ़ी समस्याओं से बचा जा सकता है | ऐसे ही कुछ पूर्व संकेतों का विवरण यहाँ दिया है – सूर्य के अशुभ होने के पूर्व संकेत – सूर्य अशुभ फल देने वाला हो, तो घर में रोशनी देने वाली वस्तुएँ नष्ट होंगी या प्रकाश का स्रोत बंद होगा । जैसे – जलते हुए बल्ब का फ्यूज होना, तांबे की वस्तु खोना । किसी ऐसे स्थान पर स्थित रोशनदान का बन्द होना, जिससे सूर्योदय से दोपहर तक सूर्य का प्रकाश प्रवेश करता हो । ऐसे रोशनदान के बन्द होने के अनेक कारण हो सकते हैं । जैसे – अनजाने में उसमें कोई सामान भर देना या किसी पक्षी के घोंसला बना लेने के कारण उसका बन्द हो जाना आदि । सूर्य के कारकत्व से जुड़े विषयों के बारे में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है । सूर्य जन्म-कुण्डली में जिस भाव में होता है, उस भाव से जुड़े फलों की हानि करता है । यदि सूर्य पंचमेश, नवमेश हो तो पुत्र एवं पिता को कष्ट देता है । सूर्य लग्नेश हो, तो जातक को सिरदर्द, ज्वर एवं पित्त रोगों से पीड़ा मिलती है । मान-प्रतिष्ठा की हानि का सामना करना पड़ता है । किसी अधिकारी वर्ग से तनाव, राज्य-पक्ष से परेशानी । यदि न्यायालय में विवाद चल रहा हो, तो प्रतिकूल परिणाम । शरीर के जोड़ों में अकड़न तथा दर्द । किसी कारण से फसल का सूख जाना । व्यक्ति के मुँह में अक्सर थूक आने लगता है तथा उसे बार-बार थूकना पड़ता है । सिर किसी वस्तु से टकरा जाता है । तेज धूप में चलना या खड़े रहना पड़ता है । चन्द्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत जातक की कोई चाँदी की अंगुठी या अन्य आभूषण खो जाता है या जातक मोती पहने हो, तो खो जाता है । जातक के पास एकदम सफेद तथा सुन्दर वस्त्र हो वह अचानक फट जाता है या खो जाता है या उस पर कोई गहरा धब्बा लगने से उसकी शोभा चली जाती है । व्यक्ति के घर में पानी की टंकी लीक होने लगती है या नल आदि जल स्रोत के खराब होने पर वहाँ से पानी व्यर्थ बहने लगता है । पानी का घड़ा अचानक टूट जाता है । घर में कहीं न कहीं व्यर्थ जल एकत्रित हो जाता है तथा दुर्गन्ध देने लगता है । उक्त संकेतों से निम्नलिखित विषयों में अशुभ फल दे सकते हैं -> माता को शारीरिक कष्ट हो सकता है या अन्य किसी प्रकार से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है । नवजात कन्या संतान को किसी प्रकार से पीड़ा हो सकती है । मानसिक रुप से जातक बहुत परेशानी का अनुभव करता है । किसी महिला से वाद-विवाद हो सकता है । जल से जुड़े रोग एवं कफ रोगों से पीड़ा हो सकती है । जैसे – जलोदर, जुकाम, खाँसी, नजला, हेजा आदि । प्रेम-प्रसंग में भावनात्मक आघात लगता है । समाज में अपयश का सामना करना पड़ता है । मन में बहुत अशान्ति होती है । घर का पालतु पशु मर सकता है । घर में सफेद रंग वाली खाने-पीने की वस्तुओं की कमी हो जाती है या उनका नुकसान होता है । जैसे – दूध का उफन जाना । मानसिक रुप से असामान्य स्थिति हो जाती है मंगल के अशुभ होने के पूर्व संकेत भूमि का कोई भाग या सम्पत्ति का कोई भाग टूट-फूट जाता है । घर के किसी कोने में या स्थान में आग लग जाती है । यह छोटे स्तर पर ही होती है । किसी लाल रंग की वस्तु या अन्य किसी प्रकार से मंगल के कारकत्त्व वाली वस्तु खो जाती है या नष्ट हो जाती है । घर के किसी भाग का या ईंट का टूट जाना । हवन की अग्नि का अचानक बन्द हो जाना । अग्नि जलाने के अनेक प्रयास करने पर भी अग्नि का प्रज्वलित न होना या अचानक जलती हुई अग्नि का बन्द हो जाना । वात-जन्य विकार अकारण ही शरीर में प्रकट होने लगना । किसी प्रकार से छोटी-मोटी दुर्घटना हो सकती है । बुध के अशुभ होने के पूर्व संकेत व्यक्ति की विवेक शक्ति नष्ट हो जाती है अर्थात् वह अच्छे-बुरे का निर्णय करने में असमर्थ रहता है । सूँघने की शक्ति कम हो जाती है । काम-भावना कम हो जाती है । त्वचा के संक्रमण रोग उत्पन्न होते हैं । पुस्तकें, परीक्षा ले कारण धन का अपव्यय होता है । शिक्षा में शिथिलता आती है । गुरु के अशुभ होने के पूर्व संकेत अच्छे कार्य के बाद भी अपयश मिलता है । किसी भी प्रकार का आभूषण खो जाता है । व्यक्ति के द्वारा पूज्य व्यक्ति या धार्मिक क्रियाओं का अनजाने में ही अपमान हो जाता है या कोई धर्म ग्रन्थ नष्ट होता है । सिर के बाल कम होने लगते हैं अर्थात् व्यक्ति गंजा होने लगता है । दिया हुआ वचन पूरा नहीं होता है तथा असत्य बोलना पड़ता है । शुक्र के अशुभ होने के पूर्व संकेत किसी प्रकार के त्वचा सम्बन्धी रोग जैसे – दाद, खुजली आदि उत्पन्न होते हैं । स्वप्नदोष, धातुक्षीणता आदि रोग प्रकट होने लगते हैं । कामुक विचार हो जाते हैं । किसी महिला से विवाद होता है । हाथ या पैर का अंगुठा सुन्न या निष्क्रिय होने लगता है । शनि के अशुभ होने के पूर्व संकेत दिन में नींद सताने लगती है । अकस्मात् ही किसी अपाहिज या अत्यन्त निर्धन और गन्दे व्यक्ति से वाद-विवाद हो जाता है । मकान का कोई हिस्सा गिर जाता है । लोहे से चोट आदि का आघात लगता है । पालतू काला जानवर जैसे- काला कुत्ता, काली गाय, काली भैंस, काली बकरी या काला मुर्गा आदि मर जाता है । निम्न-स्तरीय कार्य करने वाले व्यक्ति से झगड़ा या तनाव होता है । व्यक्ति के हाथ से तेल फैल जाता है । व्यक्ति के दाढ़ी-मूँछ एवं बाल बड़े हो जाते हैं । कपड़ों पर कोई गन्दा पदार्थ गिरता है या धब्बा लगता है या साफ-सुथरे कपड़े पहनने की जगह गन्दे वस्त्र पहनने की स्थिति बनती है । अँधेरे, गन्दे एवं घुटन भरी जगह में जाने का अवसर मिलता है । राहु के अशुभ होने के पूर्व संकेत -> मरा हुआ सर्प या छिपकली दिखाई देती है । धुएँ में जाने या उससे गुजरने का अवसर मिलता है या व्यक्ति के पास ऐसे अनेक लोग एकत्रित हो जाते हैं, जो कि निरन्तर धूम्रपान करते हैं । किसी नदी या पवित्र कुण्ड के समीप जाकर भी व्यक्ति स्नान नहीं करता। पाला हुआ जानवर खो जाता है या मर जाता है । याददाश्त कमजोर होने लगती है । अकारण ही अनेक व्यक्ति आपके विरोध में खड़े होने लगते हैं । हाथ के नाखुन विकृत होने लगते हैं । मरे हुए पक्षी देखने को मिलते हैं । बँधी हुई रस्सी टूट जाती है । मार्ग भटकने की स्थिति भी सामने आती है । व्यक्ति से कोई आवश्यक चीज खो जाती है । केतु के अशुभ होने के पूर्व संकेत > मुँह से अनायास ही अपशब्द निकल जाते हैं । कोई मरणासन्न या पागल कुत्ता दिखायी देता है । घर में आकर कोई पक्षी प्राण-त्याग देता है । अचानक अच्छी या बुरी खबरें सुनने को मिलती है । हड्डियों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । पैर का नाखून टूटता या खराब होने लगता है । किसी स्थान पर गिरने एवं फिसलने की स्थिति बनती है ।भ्रम होने के कारण व्यक्ति से हास्यास्पद गलतियाँ होती है।
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केतु के गुण दोष प्रायः मंगल के समान होते हैं । केतु भी मंगल की भांति अपने युति तथा दृष्टि के प्रभाव में आने वाले पदार्थों को चोट अथवा क्षति पहुंचाता है । राहु के सामान केतु भी अचानक फल देता है । मंगल की भांति यह भी बुद्धि एवं प्रभाव में तीव्र होता है । केतु शब्द का अर्थ वेद आदि ग्रंथों में झंडे के अर्थ में आया है अर्थात ऊंचाई क, उच्चता का , महानता के प्राचुर्य का , उत्कृष्टता का प्रतीक है । अतः केतु भी अपने भीतर उत्कृष्टता आदि गुण रखता है ।
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