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गुरु पूर्णिमा व गुरु का महत्व

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गुरुकृपा के चार प्रकार.... १- #स्मरण से २- #दृष्टि से ३ -#शब्द से ४ -#स्पर्श से 1 - जैसे कछुवी रेत के भीतर अंडा देती है पर खुद पानी के भीतर रहती हुई उस अंडे को याद करती रहती है तो उसके स्मरण से अंडा पक जाता है । ऐसे ही गुरु की याद करने मात्र से शिष्य को ज्ञान हो जाता है - यह है #स्मरण दीक्षा ।। 2 - दूसरा जैसे मछली जल में अपने अंडे को थोड़ी थोड़ी देर में देखती रहती है तो देखने मात्र से अंडा पक जाता है !ऐसे ही गुरु की कृपा दृष्टि से शिष्य को ज्ञान हो जाता है । यह #दृष्टि दीक्षा है ।। 3 - तीसरा जैसे कुररी पृथ्वी पर अंडा देती है , और आकाश में शब्द करती हुई घूमती है तो उसके शब्द से अंडा पक जाता है । ऐसे ही गुरु अपने शब्दों से शिष्य को ज्ञान करा देता है ।यह #शब्द दीक्षा है ।। 4 - चौथा जैसे मयूरी अपने अंडे पर बैठी रहती है तो उसके स्पर्श से अंडा पक जाता है ।ऐसे ही गुरु के हाथ के #स्पर्श से शिष्य को ज्ञान हो जाता है । *5 जुलाई को उल्लास पूर्वक गुरुपूर्णिमा महोत्सव मानना चाहिए।* ज्ञान में अहंकार फलता-फूलता है किन्तु जब वह वैराग्य और भक्त्ति से समरस होता है तो ज्ञान और क्रिया का समन्वय स्थापित हो जाता है। ॐ स्वस्ति। जय गुरुदेव।
posted Jun 30 by anonymous

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5 जुलाई, गुरु पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 11:35:57 बजे, 4 जुलाई 2020 से गुरु पूर्णिमा तिथि समाप्त – 10:16:08 बजे, 5 जुलाई 2020 तक नोट: 5 तारीख को गुरु पूर्णिमा के साथ साथ उपच्छाया चंद्र ग्रहण भी लग रहा है| चंद्रग्रहण का समय सुबह 8:38 पर शुरू होगा और सुबह 11:21 पर खत्म हो जाएगा। हालांकि, चूंकि इस प्रकार के चंद्र ग्रहण को वैदिक ज्योतिष में ज्योतिषीय घटना के रूप में मान्यता नहीं दी गई है, इसलिए कोई सूतक काल नहीं देखा जाएगा। इसलिए, जातक गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि और अनुष्ठान बिना हिचक कर सकते हैं। गुरु पूर्णिमा पूजन विधि गुरु पूर्णिमा के दिन देश के कई मंदिरों और मठों में गुरुपद पूजन किया जाता है। हालाँकि अगर आपके गुरु अब आपके साथ नहीं हैं या वो दिवंगत हो गए हो तो भी आप इस तरह से गुरु पूर्णिमा के दिन उनका पूजन कर सकते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान आदि करें और उसके बाद घर की उत्तर दिशा में एक सफेद कपड़ा बिछाकर उसपर अपने गुरु की तस्वीर रख दें। इसके बाद उन्हें माला चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद उनकी आरती करें और जीवन की हर एक शिक्षा के लिए उनका धन्यवाद दें और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें। इस दिन सफेद रंग के या फिर पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना गया है। इस दिन की पूजा में अवश्य शामिल करें गुरु मंत्र। गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥ इस मंत्र का अर्थ है कि, “गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु हि शंकर हैं; गुरु हि साक्षात् परब्रह्म हैं; उन सद्गुरु को प्रणाम । वैसे गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूजन की यह विधि वो लोग भी अपना सकते हैं जो अपने गुरु से किसी कारणवश दूर रहते हो, या फिर किसी कारण से वो अपने गुरु के पूजन-वंदन को नही जा सकते हैं। हाँ लेकिन अगर आप गुरु का पूजन वंदन करने जा रहे है तो अपने गुरु के पैर पर फूल चढ़ाएं, उनके मस्तिष्क पर अक्षत और चंदन का तिलक लगायें, और उनका पूजन कर उन्हें मिठाई या फल भेंट करें। उनका शुक्रिया-अदा करें और उनका आशीर्वाद लें। गुरु नहीं हैं तो भगवान विष्णु को मानें अपना गुरु वैसे तो ऐसा मुमकिन ही नहीं है कि किसी भी इंसान का कोई गुरु नहीं हो लेकिन मान लीजिये कि किसी कारणवश आपके जीवन में कोई गुरु नहीं हैं तो आप गुरु पूर्णिमा के दिन क्या कर सकते हैं? सबसे पहले तो ये जान लीजिये कि हर गुरु के पीछे गुरु सत्ता के रूप में शिव जी को ही माना गया है। ऐसे में अगर आपका कोई गुरु नहीं हों तो इस दिन शिव जी को ही गुरु मानकर आपको गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाना चाहिए। आप भगवान विष्णु को भी गुरु मान सकते हैं। इस दिन की पूजा में भगवान विष्णु, जिन्हें गुरु का दर्जा दिया गया है या भगवान शिव की ऐसी प्रतिमा लें जिसमें वो कमल के फूल पर बैठे हुए हों। उन्हें फूल, मिठाई, और दक्षिणा चढ़ाएं।
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*5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा में गुरु का महत्व* सनातन धर्म में आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा(व्यास पूर्णिमा) पर्व के रूप में मनाया जाता है। गुरु परंपरा सृष्टि के आरंभ से ही चली आ रही है। गुरु के संतोष मात्र से शाश्वत सिद्धि प्राप्त होती है। *महाविद्याक्षरा ज्योतिष संस्थान के संचालक अजय शास्त्री* ने बताया है कि इस जगत में किसी ने सिद्धि पाई है तो वह गुरु कृपा से ही पाई है। शाश्वत सिद्धि के लिए गुरु का संतोष होना अत्यंत आवश्यक है। *शास्त्री जी ने बताया कि सद्गुरु साक्षात ब्रह्म है वे आनंद ज्ञान तथा करूणा के सागर हैं, वह सुख के स्रोत हैं,वह अपने शिष्यों के समस्त कष्टों बाधाओं को दूर करते हैं तथा उनके अहंकार वैर_भाव को हटाकर मुक्ति का मार्ग सहज व सरल करते हैं।* ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार इस संसार रूपी भवसागर से गुरु ही पार करते हैं। गुरु के ज्ञान और दिखाए गए मार्ग पर चलकर व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त करता है। प्रत्येक युग में गुरु की सत्ता कण-कण में व्याप्त रही है। गुरु विहीन संसार अज्ञानता के कालरात्रि हैं । *तमसो मां ज्योतिर्गमय* अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाना ही गुरुता है शिष्य को अपने गुरु को प्रणाम करके वस्त्र,फल, दक्षिणा ,पुष्पमाला आदि अर्पित करके आशीर्वाद लेना चाहिए। तुलसीदास जी कहते हैं---- *गुरु बिनि भवनिधि तरई न कोई।* *जो बिरंची शंकर सम होई।।* अर्थात- *गुरु की कृपा प्राप्ति के बगैर जीव संसार सागर से मुक्त नहीं हो सकता चाहे वह ब्रह्मा और शंकर के सामान ही क्यों न हो।जय गुरुदेव* श्री गुरुचरण कमलेभ्यो नमः
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6 जुलाई से सावन का महिना शुरू गया है भोलेनाथ को ये महिना अति प्रिय है इस दिन देवो के देव महादेव यानी भगवान् शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है और इनकी पूजा अत्यन्य फलदायी होती है इस वार सावन के महीने में 5 सोमवार होंगे यानि सावन 6 जुलाई से शुरू होकर 3 अगस्त को ख़त्म होगा ! ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान् शिव की पूजा करने से जीवन के कष्टों से निवारण मिलता है ! सच्चे मन से भगवान् शिव की आराधना करने से मन वांछित फल मिलता है ! सावन का व्रत शुरू करने की विधि सोमवार का व्रत सूर्य उदय से शुरू होकर तीसरे प्रहार तक होता है, दिन में एक समय हो भोजन करना चाहिए, नमक नहीं खाना चाहिए ! ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर, घर की सफाई करें, फिर स्नान आदि करके घर में गंगाजल का छिडकाव करें ! उसके बाद व्रत का संकल्प ले और भगवान् शिव और देवी पार्वती की पूजा करनी चहिये ! शिव चालीसा का पाठ करें ! निम्न में से किसी भी मंत्र का 7, 11, 21 माला का उच्चारण करे, शिवलिंग में जल चढ़ाये, बेल पत्र, भांग चन्दन आधी चढ़ाये ! ॐ नमः शिवाय ॐ जूं स : ॐ ह्रीं नमः शिवाय शाम को सूर्य उदय पश्चात् भगवान् शिव की धुप द्वीप और चन्दन से पूजा करें ! पूजा के पश्चात् कथा सुने, आरती करने के वाद भगवान् शिव और देवी पारवती को भोग लगाये, आरती का प्रसाद वितरण करने के पश्चात ही भोजन ग्रहण करें ! इस तरह से पहले सोमवार से सावन के आखरी सोमवार तक व्रत का पालन करना चाहिए ! माना जाता है कि सावन के महीने में आने वाले सोमवार के व्रत करने से इसका फल 16 सोमवार के फल के बराबर मिलता है ! जो भी भक्त सच्चे मन से सावन का व्रत रखता है और विधि अनुसार पूजा करता है उसे मन वांछित फल प्राप्त होता है ! सावन के व्रत में न करे ये काम सावन के व्रत के दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए, गुस्सा नही करना चाहिए, बुरे विचार मन में नहीं लाने चाहिए और किसी के लिए मुख से अपशव्द नहीं कहने चाहिए ! ब्रह्मचार्य का पालन करना चाहिए, अनैतिक कार्य से दूर रहे ! शाश्त्रो के अनुसार बैंगन को अशुद्ध मन जाता है इसलिए इस महीने बैंगन खाने से परहेज़ करें ! मांस मदिरा का सेवन आदि न करें इससे आपको जीव हत्या का पाप लगता है साथ ही मन में अशांति बनती है ! पेड़ पौधों को तोड़ने से पाप लगता है !
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