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यथा धेनुसहस्त्रेषु वत्सो विन्दति मातरम्। तथा पूर्वकॄतं कर्म कर्तारमनुगच्छत्॥ A calf recognizes its mother among thousands of cows; similarly, previous deeds go with the doer. *जिस प्रकार एक बछड़ा हजार गायों के बीच में अपनी माँ को पहचान लेता है, उसी प्रकार पूर्व में किये गए कर्म कर्ता का अनुसरण करते हैं |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
posted Jul 3 by anonymous

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माता मित्रं पिता चेति स्वभावात् त्रतयं हितम् | कार्यकारणतश्चान्ये भवन्ति हितबुद्धय: || Mother, father and friend are the one who think about our interests (well-being) in a very much natural manner. [It's part of their nature ('swaBAv').They think this without expecting any thing in return.] All others having the similar feelings towards us do so due to their personal benefits or any other reason [It is not part of their nature ('swaBAv')]. *माता,पिता और मित्र ये तीनो कहने के लिए तो तीन होते है पर ये एक ही होते है क्योंकि ये तीनो ही अपने स्वभाव से हमेशा हित ही करते है।* *जब कोई विशेष कार्य या विशेष परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है तब ये तीनो ही हमें सही दिशा या सही बुद्धि देते है जो हमारे हित में होता है।।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सियाराम।
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चन्दनं शीतलं लोके चंदनादपि चंद्रमा: | चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगत: || sandalwood is pleasant (cool), moon (or moon light) is more pleasant than sandal. (but) company of a good person (sAdhu) is pleasant then both moon and sandal. *संसार में चन्दन को शीतल माना जाता है लेकिन चन्द्रमा चन्दन से भी शीतल होता है | अच्छे मित्रों का साथ चन्द्र और चन्दन दोनों की तुलना में अधिक शीतलता देने वाला होता है |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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उद्यमेनैव हि सिध्यन्ति, कार्याणि न मनोरथै। न हि सुप्तस्य सिंहस्य, प्रविशन्ति मृगाः॥ Things are achieved by doing and not by desiring alone as deers by themselves don't go into a lion's mouth. *प्रयत्न करने से ही कार्य पूर्ण होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं, सोते हुए शेर के मुख में मृग स्वयं प्रवेश नहीं करते हैं।* *Hari Om,pranam,jai sitaram*
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न निर्मितः केन न दृष्टपूर्वः न श्रूयते हेममयः कुरङ्गः । तथापि तृष्णा रघुनन्दनस्य विनाशकाले विपरीतबुद्धिः ॥ Neither has one made golden deer nor has anyone seen a golden deer. Even though, Ram desired to get the golden deer. In the time of destruction the intelligence goes opposite. *स्वर्ण मृग न तो ब्रह्मा ने रचा था और न किसी ओर ने उसे बनाया था, न पहले कभी देखा गया था, न कभी सुना गया था, तब भी श्रीराम की उसे पाने (मारीच का मायावी रूप कंचन मृग ) की इच्छा हुई, अर्थात सीता के कहने पर वे उसे पाने के लिए दौड़ पड़े । किसी ने ठीक ही कहा है-"विनाश काले विपरीत बुद्धि।' जब विनाश काल आता है, तब बुद्धि नष्ट हो जाती है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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वज्रादपि कठोराणि मृदुनि कुसुमादपि । लोकोत्तराणां चेतांसि को हि विज्ञातुमर्हति ॥ Illustrious and noble persons become firm like the 'Vajra' the weapon of God Indra and very gentle like a flower depending upon the prevailing situation. They are famous because of this special trait in them. *महान व्यक्तियों का स्वभाव अति विशिष्ठ रूप से आवश्यकता अनुसार, देवराज इन्द्र के वज्र के समान कठोर और एक पुष्प के समान हो जाता है और इसी विशिष्टता के लिये ही वे समाज में प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध होते हैं* | हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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