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गुणवान् वा परजन: स्वजनो निर्गुणोपि वा निर्गुण: स्वजन: श्रेयान् य: पर: पर एव च || A friend, even without many good qualities, is better than an enemy with good qualities. After all enemy is enemy. *गुणवान शत्रु से भी गुणहीन मित्र अच्छा| शत्रु तो आखिर शत्रु है|* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
posted Jul 4, 2020 by anonymous

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क्रोधमूलो मनस्तापः क्रोधः संसारबन्धनम्। धर्मक्षयकरः क्रोधः तस्मात्क्रोधं परित्यज॥ Anger is the root cause of mental distress. Anger is the reason for bondage with this world. Anger reduces righteousness, hence give up anger. *क्रोध मन के दुःख का प्राथमिक कारण है, क्रोध संसार बंधन का कारण है, क्रोध धर्म का नाश करने वाला है, इसलिए क्रोध को त्याग दें।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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न धैर्येण विना लक्ष्मी-र्न शौर्येण विना जयः। न ज्ञानेन विना मोक्षो न दानेन विना यशः॥ Money without patience, victory without courage, liberation without knowledge and fame without charity cannot be achieved. *धैर्य के बिना धन, वीरता के बिना विजय, ज्ञान के बिना मोक्ष और दान के बिना यश प्राप्त नहीं होता है।* *हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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नरत्वं दुर्लभं लोके विद्या तत्र सुदुर्लभा। शीलं च दुर्लभं तत्र विनयस्तत्र सुदुर्लभः॥ To born as human is rare in this world. To be knowledgeable also is even rarer. To have great character is even more rare . To be humble is the rarest of all. *पृथ्वी पर मनुष्य जन्म मिलना दुर्लभ है, उनमें भी विद्या युक्त मनुष्य मिलना और दुर्लभ है, उनमें भी चरित्रवान मनुष्य मिलना दुर्लभ है और उनमें भी विनयी मनुष्य मिलना और दुर्लभ है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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नमन्ति फलिता वृक्षा नमन्ति च बुधा जनाः। शुष्ककाष्ठानि मूर्खाश्च भिद्यन्ते न नमन्ति च॥ Trees with fruits bend, wise people become humble but dry wood and fool do not bend even when they are cut. *फले हुए वृक्ष झुक जाते हैं और बुद्धिमान लोग विनम्र हो जाते हैं पर सूखी लकड़ी और मूर्ख काटने पर भी नहीं झुकते॥* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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न प्रहॄष्यति सन्माने नापमाने च कुप्यति। न क्रुद्ध: परूषं ब्रूयात् स वै साधूत्तम: स्मॄत:॥ Those, who do not become happy by honor and do not get angry by dishonor, do not use harsh words, even in anger, are said to be greatest among saints. *जो सम्मान करने पर हर्षित न हों और अपमान करने पर क्रोध न करें, क्रोधित होने पर कठोर वचन न बोलें, उनको ही सज्जनों में श्रेष्ठ कहा गया है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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