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सावन सोमवार व्रत का महत्व कैसे करें व्रत किन-किन चीजों का करें परहेज

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6 जुलाई से सावन का महिना शुरू गया है भोलेनाथ को ये महिना अति प्रिय है इस दिन देवो के देव महादेव यानी भगवान् शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है और इनकी पूजा अत्यन्य फलदायी होती है इस वार सावन के महीने में 5 सोमवार होंगे यानि सावन 6 जुलाई से शुरू होकर 3 अगस्त को ख़त्म होगा ! ऐसा माना जाता है कि सावन के महीने में भगवान् शिव की पूजा करने से जीवन के कष्टों से निवारण मिलता है ! सच्चे मन से भगवान् शिव की आराधना करने से मन वांछित फल मिलता है ! सावन का व्रत शुरू करने की विधि सोमवार का व्रत सूर्य उदय से शुरू होकर तीसरे प्रहार तक होता है, दिन में एक समय हो भोजन करना चाहिए, नमक नहीं खाना चाहिए ! ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर, घर की सफाई करें, फिर स्नान आदि करके घर में गंगाजल का छिडकाव करें ! उसके बाद व्रत का संकल्प ले और भगवान् शिव और देवी पार्वती की पूजा करनी चहिये ! शिव चालीसा का पाठ करें ! निम्न में से किसी भी मंत्र का 7, 11, 21 माला का उच्चारण करे, शिवलिंग में जल चढ़ाये, बेल पत्र, भांग चन्दन आधी चढ़ाये ! ॐ नमः शिवाय ॐ जूं स : ॐ ह्रीं नमः शिवाय शाम को सूर्य उदय पश्चात् भगवान् शिव की धुप द्वीप और चन्दन से पूजा करें ! पूजा के पश्चात् कथा सुने, आरती करने के वाद भगवान् शिव और देवी पारवती को भोग लगाये, आरती का प्रसाद वितरण करने के पश्चात ही भोजन ग्रहण करें ! इस तरह से पहले सोमवार से सावन के आखरी सोमवार तक व्रत का पालन करना चाहिए ! माना जाता है कि सावन के महीने में आने वाले सोमवार के व्रत करने से इसका फल 16 सोमवार के फल के बराबर मिलता है ! जो भी भक्त सच्चे मन से सावन का व्रत रखता है और विधि अनुसार पूजा करता है उसे मन वांछित फल प्राप्त होता है ! सावन के व्रत में न करे ये काम सावन के व्रत के दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए, गुस्सा नही करना चाहिए, बुरे विचार मन में नहीं लाने चाहिए और किसी के लिए मुख से अपशव्द नहीं कहने चाहिए ! ब्रह्मचार्य का पालन करना चाहिए, अनैतिक कार्य से दूर रहे ! शाश्त्रो के अनुसार बैंगन को अशुद्ध मन जाता है इसलिए इस महीने बैंगन खाने से परहेज़ करें ! मांस मदिरा का सेवन आदि न करें इससे आपको जीव हत्या का पाप लगता है साथ ही मन में अशांति बनती है ! पेड़ पौधों को तोड़ने से पाप लगता है !

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सावन सोमवार व्रत का महत्व कैसे करें व्रत किन-किन चीजों का करें परहेज
posted Jul 6, 2020 by Deepika Maheshwary

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हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार के दिन को शिव जी का दिन माना जाता है। इस दिन किसी भी काम को करने से पहले यदि आप शिव जी का आशीर्वाद ले लें तो आपको लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही साथ जीवन में सुख शांति बरक़रार रखने के लिए सोमवार के दिन शिव जी के कुछ ख़ास उपायों को अपनाकर आप शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आज हम आपको विशेष रूप से सोमवार के दिन शिव जी के कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें आजमाकर आप अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। आइये जानते हैं कौन से हैं वो विशेष उपाय। सोमवार के दिन करें शिव जी के ये कारग़र उपाय जैसा की आप सभी जानते हैं कि सोमवार के दिन को शिव जी का दिन माना जाता है इसलिए इस दिन यदि शिव जी के कुछ ख़ास उपाय किये जाएँ तो आपको जीवन में अथाह सफलता मिल सकती है। इसके साथ ही सावन के सोमवार पर खासतौर से यदि शिव को प्रसन्न किया जाए तो आपका जीवन सुखी और सफल बन सकता है। सोमवार को शिव जी के निम्नलिखित उपायों को आजमाकर आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सोमवार के दिन किसी भी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का दूध या जल ये अभिषेक करना आपके लिए शुभ फलदायी साबित हो सकता है। सावन के माह में शिव का अभिषेक करना वैसे भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन शिव जी को सफ़ेद चावल अर्पित करना भी आपके लिए लाभदायक साबित हो सकता है। शिव जी को चावल चढ़ाने के बाद उसे गरीबों में जरूर बाँट दें। इस उपाय को करने से जिंदगी में मुसीबतों से छुटकारा मिलता है। सोमवार को जल में काला तिल मिलाकर शिव जी को चढ़ाने से आपको लाभ मिल सकता है। ऐसा करने से पारिवारिक सुखों में वृद्धि होती है। छात्रों को ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करने के लिए सोमवार के दिन स्फटिक से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। दूध में शक्कर मिलाकर शिव जी का अभिषेक करने से भी आपको अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। सोमवार के दिन गाय के घी से शिव जी का अभिषेक करने से भी आपको जीवन में सफलता और सुख शांति मिल सकती है। शिवलिंग पर सोमवार के दिन गन्ने का रस अर्पित करने से भी आपको जीवन के सभी क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है। इस दिन शिव जी की पूजा यदि श्रद्धा पूर्वक किया जाए और उनका अभिषेक शहद से किया जाए, तो इस उपाय को करने से आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से निजात मिल सकता है। सोमवार के दिन शिव जी की पूजा अर्चना करने के साथ ही साथ रूद्र गायत्री मंत्र का जाप करना फलदायी माना जाता है। रूद्र गायत्री मन्त्र इन प्रकार हैं “ॐ तत्पुरुषाय विद्दहे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात “
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कब बनता है कुंडली में ग्रह मारकेश, अष्टम द्वादश सिद्धांत, 8th to 12th Theory in Horoscope जन्म कुण्डली द्वारा मारकेश का विचार करने के लिए कुण्डली के दूसरे भाव, सातवें भाव, बारहवें भाव, अष्टम भाव आदि को समझना आवश्यक होता है. जन्म कुण्डली के आठवें भाव से आयु का विचार किया जाता है. लघु पाराशरी के अनुसार से तीसरे स्थान को भी आयु स्थान कहा गया है क्योंकि यह आठवें से आठवा भाव है (अष्टम स्थान से जो अष्टम स्थान अर्थात लग्न से तृतीय स्थान आयु स्थान है) और सप्तम तथा द्वितीय स्थान को मृत्यु स्थान या मारक स्थान कहते हैं इसमें से दूसरा भाव प्रबल मारक कहलाता है. बारहवां भाव व्यय भाव कहा जाता है, व्यय का अर्थ है खर्च होना, हानि होना क्योंकि कोई भी रोग शरीर की शक्ति अथवा जीवन शक्ति को कमजोर करने वाला होता है,इसलिये बारहवें भाव से रोगों का विचार किया जाता है. इस कारण इसका विचार करना भी जरूरी होता है. मारकेश की दशा में व्यक्ति को सावधान रहना जरूरी होता है क्योंकि इस समय जातक को अनेक प्रकार की मानसिक, शारीरिक परेशनियां हो सकती हैं. इस दशा समय में दुर्घटना, बीमारी, तनाव, अपयश जैसी दिक्कतें परेशान कर सकती हैं. जातक के जीवन में मारक ग्रहों की दशा, अंतर्दशा या प्रत्यत्तर दशा आती ही हैं. लेकिन इससे डरने की आवश्यकता नहीं बल्कि स्वयं पर नियंत्रण व सहनशक्ति तथा ध्यान से कार्य को करने की ओर उन्मुख रहना चाहिए.
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शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त मां को प्रसन्न करने की कोशिश करते है. नवरात्रि में देवी पूजन और नौ दिन के व्रत का बहुत महत्व है. इन नौ दिनों में भक्तों नियमों के साथ मां की पूजा करते हैं. इसबार अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन पड़ेगी, जिसके कारण नवरात्र में देवी आराधना के लिए पूरे 9 दिन मिलेंगे. प्रतिपदा तिथि को माता के प्रथम स्वरूप शैल पुत्री के साथ ही कलश स्थापना के लिए भी अति महत्त्वपूर्ण दिन होता है. कलश स्थापना या कोई भी शुभ कार्य शुभ समय एवं तिथि में किया जाना शुभ माना जाता है, इसलिए इस दिन कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त पर विचार किया जाना अत्यावश्यक है. नवरात्र के 9 दिनों में मां भगवती के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और हर स्वरूप सौभाग्य का प्रतीक होता है. इन शुभ दिनों में मां की हर रोज पूजा की जाती है और ज्यादातर लोग 9 दिन का व्रत भी रखते हैं. वैसे तो मां को श्रद्धा भाव से लगाए गए हर भोग को ग्रहण करती हैं लेकिन नवरात्र के दिनों में मां के हर स्वरूप का अलग भोग लगता है. कलश स्था‍पना की तिथि और शुभ मुहूर्त कलश स्था‍पना की तिथि: 17 अक्टूबर 2020 कलश स्था‍पना का शुभ मुहूर्त: 17 अक्टूबर 2020 को सुबह 06 बजकर 23 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक। कुल अवधि: 03 घंटे 49 मिनट अभिजीत मुहूर्त सभी शुभ कार्यों के लिए अति उत्तम होता है। जो मध्यान्ह 11:43 से 12:29 तक होगा। शुभ का चौघड़िया सुबह 07:49 से 09:14 तक होगा जिसने कलश स्थापना की जा सकती है स्थिर लग्न कुम्भ दोपहर 2:30 से 3:55 तक होगा, साथ ही शुभ चौघड़िया भी इस समय प्राप्त होगी, अतः यह अवधि कलश स्थापना हेतु अतिउत्तम है। जानिए कैसे करें नवरात्रि पर कलश पूजन सभी प्राचीन ग्रंथों में पूजन के समय कलश स्थापना का विशेष महत्व बताया गया है. सभी मांगलिक कार्यों में कलश अनिवार्य पात्र है. दुर्गा पूजन में कलश की स्थापना करने के लिए कलश पर रोली से स्वास्तिक और त्रिशूल अंकित करना चाहिए और फिर कलश के गले पर मौली लपेट दें. जिस स्थान पर कलश स्थापित किया जाता है पहले उस स्थान पर रोली और कुमकुम से अष्टदल कमल बनाकर पृथ्वी का स्पर्श करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए- ओम भूरसि रस्यादितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धात्रीं। पृथिवीं यच्छ पृथिवी दृह पृथ्वीं माहिसीः।। ओम आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा विशन्तिवन्दवः। पुनरूर्जानि वर्तस्व सा नः सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुनर्मा विशताद्रयिः।।
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आमतौर पर हमारे देश में हर विशेष दिन कुछ न कुछ दान करने की परंपरा रही है। महाभारत के एक दृष्टांत में कहा गया है कि माघ मास के दिनों में अनेक तीर्थों का समागम होता है, वहीं पद्मपुराण में कहा गया है कि अन्य मास में जप, तप और दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते जितने कि वे माघ मास में स्नान करने से होते हैं। यही वजह है कि प्राचीन ग्रंथों में नारायण को पाने का सुगम मार्ग माघ मास के पुण्य स्नान को बताया गया है, विशेषकर आज के दिन गंगा स्नान का खास महत्व माना गया है। * माघ मास में पवित्र नदियों में स्नान करने से एक विशेष ऊर्जा प्राप्त होती है। * अमावस्या के दिन जप-तप, ध्यान-पूजन करने से विशेष धर्मलाभ प्राप्त होता है। * मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर आचरण तथा स्नान-दान करने का विशेष महत्व है। * शास्त्रों के अनुसार माघ मास में पूजन-अर्चन व नदी स्नान करने से भगवान नारायण को प्राप्त किया जा सकता है तथा इन दिनों नदी में स्नान करने से स्वर्ग प्राप्ति का मार्ग मिल जाता है। * जो लोग घर पर स्नान करके अनुष्ठान करना चाहते हैं, उन्हें पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर तीर्थों का आह्वान करते हुए स्नान करना चाहिए। * इस दिन सूर्यनारायण को अर्घ्य देने से गरीबी और दरिद्रता दूर होती है। * जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर है, व गाय को दही और चावल खिलाएं तो मानसिक शांति प्राप्त होगी। * आज के दिन 108 बार तुलसी परिक्रमा करें। * इसके अलावा मंत्र जाप, सिद्धि साधना एवं दान कर मौन व्रत को धारण करने से पुण्य प्राप्ति और भगवान का आशीर्वाद मिलता है। * इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। क्या करें दान :- मौनी अमावस्या के दिन तेल, तिल, सूखी लकड़ी, कंबल, गरम वस्त्र, काले कपड़े, जूते दान करने का विशेष महत्व है। वहीं जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा नीच ग्रह का है तो उन्हें दूध, चावल, खीर, मिश्री, बताशा दान करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।
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