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जानिए! कैसे नवग्रह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर डालते हैं

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*जानिए! कैसे नवग्रह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर डालते हैं प्रतिकूल प्रभाव* नवग्रहों का व्यक्ति की जिंदगी में बहुत महत्व होता है। व्यक्ति की कुंडली में अगर नवग्रहों की स्थिति खराब हो तो उसे कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं नवग्रह व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। हम आपको यहां नवग्रहों और उनके प्रभाव से व्यक्ति को होने वाले रोगों के बारे में बता रहे हैं ....... सूर्य :- सूर्य नवग्रहों में सबसे पहला ग्रह है। अगर किसी व्यक्ति की राशि में सूर्य की स्थिति सही नहीं हो, तो माना जाता है कि उसकी कुंडली में सूर्य की खराब दशा चल रही है। सूर्य यदि खराब हो, तो वह करियर, धन और सेहत से जुड़ी समस्याएं (दिल से जुड़ी समस्याएं, ब्लड प्रेशर, ब्लड सर्कुलेशन) पैदा कर सकता है। चंद्र :- चंद्र आपकी छाती, आंखें, खून, पानी, जेनेरेटिव सिस्टम, पानी का मालिक होता है। अगर चंद्र ठीक न हो तो यूरिनरी प्रॉब्लम, ड्रॉप्सी, कोलाइटिस, ब्रोंकाइटिस, वैरिकोज और ऐब्डोमन से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। मंगल :- मंगल इंसान के शरीर का मसक्युलर सिस्टम कंट्रोल करता है। अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मंगल की स्थिति बेहद खराब हो, तो यह ब्लड क्लॉट, ब्रेन फीवर, लंग्स प्रॉब्लम्स, टाइफॉइड और ब्लड से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है। बुध :- बुध जहां मनुष्य की जीभा, नाड़ी, सांस, सेल्स और नर्वस सिस्टम को कंट्रोल करता है, वहीं यह हवा को भी अपने नियंत्रण में रखता है। इस ग्रह के कमजोर होने से नाक से जुड़ी समस्या, हकलाने की समस्या, ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, पैरालिसिस, नर्वस डिसऑर्डर आदि बीमारियां हो सकती हैं। गुरु :- थाई, मांस, फैट, किडनी, लिवर और आर्टेरियल सिस्टम का मालिक ग्रह है गुरु। अगर किसी की कुंडली में बुरी तरह प्रभावित हो, तो यह गठिया, डायबीटीज, पाइल्स, ट्यूमर, ब्लड कैंसर और लिवर मालफंक्शन जैसी गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है। शुक्र :- शुक्र त्वचा, चेहरा, आंखें, जेनेरेटिव सिस्टम, सीमेन औक डाइजेस्टिव सिस्टम को नियंत्रित करता है। जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह के दोषी होने पर व्यक्ति को आंखों, त्वचा से जुड़ी बीमारी, वेनेरियल प्रॉब्लम, इनडाइजेस्शन, भूख कम लगना, यहां तक कि नपुंसकता तक हो सकती है। शनि :- पांव, घुटनों, दिमाग, एसिड्स, बोन मैरो, सीक्रेटिव सिस्टम, रिब्स, बाल, नाखून, इन सभी का मालिक होता है शनि। यह जन्म से ही व्यक्ति की कुंडली में जुड़ जाता है। शनि ग्रह यदि खराब हो, तो यह अर्थराइटिस, रयूमैटिज्म, गठिया, बोन टीबी, अस्थमा, कोल्ड, नाखूनों में फंगस, बालों का झड़ना और नपुंसकता जैसी समस्या भी दे सकता है। राहु और केतु :- राहु और केतु मनुष्य को समस्याएं देने, उन्हें तबाह करने, उन्हें किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचाने के लिए ही होते हैं। लेकिन ये भी बहुत कुछ विशेष महत्व रखता है कुंडली के अनुसार रिज़ल्ट देखा जाता है

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नव ग्रह
posted Jul 10, 2020 by Rakesh Periwal

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मोरपंख के बिना भगवान श्रीकृष्ण का शृंगार और पूजन अधूरा माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या चित्र के साथ मोरपंख अवश्य लगाएं। मोरपंख को घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। घर के मुख्य द्वार पर भगवान श्रीगणेश की मूर्ति के साथ दो मोरपंख भी रखें। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा और जीव जंतु घर में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। अगर बच्चे का मन पढ़ाई में नहीं लगता है तो बच्चे की किताबों में मोर पंख रख दें। ऐसा करने से बच्चे की एकाग्रता बढ़ेगी। अगर बच्चा जिद्दी है तो मोरपंख से बने पंखे से उसकी हवा करें। ऐसा करने से उसका व्यवहार बदल जाएगा। बच्चे के हाथ पर एक मोरपंख बांधकर रखने से बच्चे को कभी नजर नहीं लगती और डरावने सपने भी नहीं आते हैं। पीले रेशमी कपड़े में एक मोर पंख को लपेटकर सदा अपने पास रखें। ऐसा करने से आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है। आग्नेय कोण में मोरपंख लगाने से घर के वास्तु दोष को ठीक किया जा सकता है। किसी मंदिर में जाकर मोरपंख को श्रीराधा-कृष्ण की मूर्ति के पास रख दें। 40 दिन पूजा करने के बाद इसे घर में ले आएं। ऐसा करने से सभी बिगड़े काम बनने लगेंगे। पति-पत्नी के बीच तनाव रहता है तो शयनकक्ष में पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा में मोर पंख रख दें।
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यदि सूर्य कमजोर है तो नित्य सूर्य उपासना सूर्य को अर्ध्य देने से हरिवंशपुराण पढ़ने या सुनने से रविवार का व्रत करने से और सूर्यदेव के नित्य दर्शन करने से सूर्यदेवता प्रसन्न व बली होते हैं। यदि प्रतिदिन ऐसा नहीं कर सकते तो रविवार को सूर्य उपासना करें। शास्त्रों में बताए गए विशेष मंत्र का स्मरण सफलता के साथ व्यक्ति को यशस्वी भी बनाता है। इस उपासना से त्वचा संबंधी रोगों का अंत भी होता है। किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए प्रयास कर रहे व्यक्ति के लिए सूर्य मंत्र का स्मरण कामना सिद्धि प्रदान कर सकता है। रविवार को प्रातः स्नान के बाद यथा संभव लाल कपड़े पहनें तथा सूर्य देव का ध्यान कर पवित्र जल में कुमकुम मिलाकर अर्घ्य दें। पूजा घर में नवग्रह के चित्र अथवा पारद शिवलिंग पर घी का दीपक जलाएं। चमेली के सुगंध वाली अगरबत्ती जलाएं। सूर्य देव और शिवलिंग पर लाल चंदन चढ़ाएं। लाल कनेर के फूल अर्पित करें। सूर्यदेव को लड्डू या गुड़ का भोग लगाएं। पूर्व दिशा की ओर मुख कर किसी लाल आसन पर बैठकर इस मंत्र का लाल चंदन की माला से जाप करें। मंत्रः - ह्रीं सूर्याय सर्वभूतानां शिवायार्तिहराय च। नमः पद्मप्रबोधाय नमो वेदादिमूर्तये।।
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अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक और भाग्यांक क्या होते हैं। ज्योतिषशास्त्र की तरह ही अंक शास्त्र का भी महत्व ज्यादा होता है| अंक अपने सभी रुपो में हमारी जिन्दगी से एक या अनेक तरह से जुड़े हुए है | हमारे जन्म दिनांक में अंक है, हमारे नाम में अंक छिपा हुआ है और हमारे काम या व्यवसाय के नाम में अंक छुपा है | जब किसी माह के किसी दिन कोई घटना घटती है तो वह एक अंक में सिमट जाती है | इसी तरीके से हर साल का एक अंक होता है | अंक शास्त्र ज्योतिष विज्ञान का एक प्रकार है जिसमे अंको के विश्लेषण द्वारा भविष्य कथन किया जाता है | अंक शास्त्र के अनुसार लोगो के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में उनसे संबधित संख्या का विश्लेषण कर बहुत कुछ बताया जा सकता है | कई प्रकार के अंक और उनकी गणनाओं की तकनिक ने अंक शास्त्र एक नये विशाल क्षेत्र तक पहुँचाया है | अंक शास्त्र में कई प्रकार के अंक होते है जैसे जन्मांक, भाग्यांक, नामांक आदि | इसमें यह भी सिध्दान्त है कि जन्मांक में किसी अंक कि उपस्थिति और अनुपस्थिति के आधार पर किसी व्यक्ति का व्यवहार कैसा होगा | अपने व्यक्तित्व को पहचानने के लिए इस का उपयोग किया जाता है | मूलांक - अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है। (उदा. - यदि किसी का जन्म 16 तारीख को हुआ है तो उसका मुलांक 1 + 6 = 7 साथ होगा.) भाग्यांक - दिन : महीना : साल के कुल योग को भाग्यांक कहते है। ( उदा - यदि किसी की जन्म तारीख - 16 / 12 /1991 है तो उसका भाग्यांक - 1 + 6 + 1 + 2 + 1 + 9 + 9 + 1 = 30 3 + 0 = 3 तीन होगा ) मूलांक और भाग्यांक के अनुसार काम करने से जीवन में रुके हुए काम पुरे होते चले जाते है। अंकज्योतिष में नौ ग्रहों के अंक - सूर्य, चन्द्र, गुरू, राहु, बुध, शुक्र, केतु , शनि और मंगल इन में से प्रत्येक ग्रह के लिए 1 से लेकर 9 तक कोई एक अंक निर्धारित किया गया है, हर ग्रह का किसी एक अंक पर विशेष प्रभाव होता है। अंक और उसके स्वामी :- 1 - सूर्य 2 - चंद्र 3 - गुरु 4 - राहु 5 - बुध 6 - शुक्र 7 - केतु 8 - शनि 9 - मंगल 10, 19, 28 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 1 11, 20, 29 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 2 3, 12, 21, 30 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 3 4, 13, 22, 31 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 4 5, 14, 23 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 5 6, 15, 24 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 6 7, 16, 25 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 7 8, 17, 26 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 8 9, 18, 27 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक - 9 आगे की लेखों में 1 से 9 तक मुलांक के जातकों के विषय में विस्तार से जानकारी बतायी जायेगी।
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ग्रह योग जो छप्पर फाड़ के देते हैं धन यदि आप Rich बनने का सपना देखते हैं, तो अपनी जन्म कुण्डली में इन ग्रह योगों को देखकर उसी अनुसार अपने प्रयासों को गति दें। १ यदि लग्र का स्वामी दसवें भाव में आ जाता है तब जातक अपने माता-पिता से भी अधिक धनी होता है। २ मेष या कर्क राशि में स्थित बुध व्यक्ति को धनवान बनाता है। ३ जब गुरु नवे और ग्यारहवें और सूर्य पांचवे भाव में बैठा हो तब व्यक्ति धनवान होता है। ४ शनि ग्रह को छोड़कर जब दूसरे और नवे भाव के स्वामी एक दूसरे के घर में बैठे होते हैं तब व्यक्ति को धनवान बना देते हैं। ५ जब चंद्रमा और गुरु या चंद्रमा और शुक्र पांचवे भाव में बैठ जाए तो व्यक्ति को अमीर बना देते हैं। ६ दूसरे भाव का स्वामी यदि ८ वें भाव में चला जाए तो व्यक्ति को स्वयं के परिश्रम और प्रयासों से धन पाता है। ७ यदि दसवें भाव का स्वामी लग्र में आ जाए तो जातक धनवान होता है। ८ सूर्य का छठे और ग्यारहवें भाव में होने पर व्यक्ति अपार धन पाता है। विशेषकर जब सूर्य और राहू के ग्रहयोग बने। ९ छठे, आठवे और बारहवें भाव के स्वामी यदि छठे, आठवे, बारहवें या ग्यारहवे भाव में चले जाए तो व्यक्ति को अचानक धनपति बन जाता है। १० यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हों और ग्यारहवें भाव में शनि या मंगल या राहू बैठा हो तो व्यक्ति खेल, जुंए, दलाली या वकालात आदि के द्वारा धन पाता है। ११ मंगल चौथे भाव, सूर्य पांचवे भाव में और गुरु ग्यारहवे या पांचवे भाव में होने पर व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से, खेती से या भवन से आय प्राप्त होती है, जो निरंतर बढ़ती है। १२ गुरु जब कर्क, धनु या मीन राशि का और पांचवे भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति पुत्र और पुत्रियों के द्वारा धन लाभ पाता है। १३ राहू, शनि या मंगल और सूर्य ग्यारहवें भाव में हों तब व्यक्ति धीरे-धीरे धनपति हो जाता है। १४ बुध, शुक और शनि जिस भाव में एक साथ हो वह व्यक्ति को व्यापार में बहुत ऊंचाई देकर धनकुबेर बनाता है १५ दसवें भाव का स्वामी वृषभ राशि या तुला राशि में और शुक्र या सातवें भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति को विवाह के द्वारा और पत्नी की कमाई से बहुत धन लाभ होता है। १६ शनि जब तुला, मकर या कुंभ राशि में होता है, तब आंकिक योग्यता जैसे अकाउण्टेट, गणितज्ञ आदि बनकर धन अर्जित करता है। १७ बुध, शुक्र और गुरु किसी भी ग्रह में एक साथ हो तब व्यक्ति धार्मिक कार्यों द्वारा धनवान होता है। जिनमें पुरोहित, पंडित, ज्योतिष, प्रवचनकार और धर्म संस्था का प्रमुख बनकर धनवान हो जाता है। १८ कुण्डली के त्रिकोण घरों या चतुष्कोण घरों में यदि गुरु, शुक्र, चंद्र और बुध बैठे हो या फिर ३, ६ और ग्यारहवें भाव में सूर्य, राहू, शनि, मंगल आदि ग्रह बैठे हो तब व्यक्ति राहू या शनि या शुक या बुध की दशा में अपार धन प्राप्त करता है। १९ गुरु जब दसर्वे या ग्यारहवें भाव में और सूर्य और मंगल चौथे और पांचवे भाव में हो या ग्रह इसकी विपरीत स्थिति में हो व्यक्ति को प्रशासनिक क्षमताओं के द्वारा धन अर्जित करता है। २० यदि सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हों और ग्यारहवें भाव में केतु को छोड़कर अन्य कोई ग्रह बैठा हो, तब व्यक्ति व्यापार-व्यवसार द्वारा अपार धन प्राप्त करता है। यदि केतु ग्यारहवें भाव में बैठा हो तब व्यक्ति विदेशी व्यापार से धन प्राप्त करता है।
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मेष लग्न-जन्म के समय यदि मेष लग्न हो तो जातक का औसत कद, सुघड़ शरीर, तीव्र स्वभाव, लालिमापूर्ण आंखें, महत्वाकांक्षी, साहसी, कमजोर टांगे, स्त्रीप्रिय, अभिमानी तथा अस्थिर धनवाला होता है। इस लग्न पर क्रूर ग्रहों का प्रभाव हो तो व्यक्ति आवेशात्मक व झगड़ालू हो जाता है। ये लोग प्राय: स्थिर स्वभाव के नहीं होते, अत: जीवन में ये बार-बार काम बदलते हैं। फिर भी इनमें वला की कार्य कुशलता तथा कभी निराश न होने का गुण होता है। इनका स्वभाव प्राय: गरम होता है तथा ये अपने ऊपर पड़ी जिम्मेदारी को जल्दी ही निबटाना पसन्द करते हैं अर्थात् काम में विलम्ब करना इनका स्वभाव नहीं होता है। ये भोजन के शौकीन होते हैं, लेकिन फिर भी कम भोजन कर पाते हैं तथा जल्दी भोजन करना इनका स्वभाव होता है। कभी कभी इनके नाखूनों में विकार देखा जाता हैं ये लोग साहसिक कामों में अपनी प्रतिभा का विस्तार कर सकते हैं। वृष लग्न-इस लग्न में जातक मध्यम शरीर, चर्बी रहित तथा शौकीन स्वभाव के होते हैं। ये प्राय: सुदर्शन व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। प्राय: रंग खुलता गेहुआं तथा बाल चमकदार होते हैं। इनकी जांघें मजबूत तथा इनकी चाल मस्तानी होती है। इनमें धैर्य खूब होता है, इसीलिए बहुत जल्दी ये लोग उत्तेजित नहीं होते हैं। यथासम्भव क्रोधित होने पर ये लोग खूंखार हो जाते हैं। ये लोग प्राय: प्रबल इच्छा शक्ति रखते हैं तथा जीवन में बहुत सफलता प्राप्त करते हैं। ये जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाते। ये धन कमाते हैं तथा संसार के सारे सुखों को भोगना चाहते हैं। इनके जीवन का मध्य भाग काफी सुखपूर्वक व्यतीत होता है। इनके यहां कन्या सन्तान की अधिकता होती है। मिथुन लग्न-मिथुन लग्न में उत्पन्न बालक लम्बे कद व चमकीले नेत्रों वाला होता है। इनकी भुजाएं प्राय: लम्बी देखी गयी हैं। ये लोग प्राय: खुश मिजाज व चिन्तारहित होते हैं। ये लोग प्राय: प्राचीन शास्त्रों में रुचि रखते हैं। तथा कुशल वक्ता होते हैं। अपनी बात को प्रभावी ढंग से पेश करना इनकी विशेषता होती है। इनकी नाम लम्बी व ऊंची होती है। ये लोग स्त्रियों या अपने से कम उम्र के लोगों से दोस्ती रखते हैं। इनकी एकतरफा निर्णय करने की शक्ति कुछ कम होती है। ये लोग कई व्यवसाय कर सकते हैं। स्वभावत: भावुक होते हैं तथा भावावेश में कभी अपना नुकसान सहकर भी परोपकार करते हैं। ये लोग उच्च बौद्धिक स्तर के होते हैं। तथा शीघ्र धनी बनने के चक्कर में कभी कभी सट्टा या लॉटरी का शौक पाल लेते हैं। इनकी मध्य अवस्था प्राय: संघर्षपूर्ण होती है। ये लोग कवित्व शक्ति से भी पूर्ण होते हैं। कर्क लग्न-इन लग्न के लोग छोटे कद वाले होते हैं। इनका शरीर प्राय: मोटापा लिए होता है तथा जलतत्व राशि होने के कारण जल्दी सर्दी की पकड़ में आ जाते हैं। इनके फेफड़े कमजोर होते है। इन्हें नशीले पदार्थों का शौक होता है। इनका जीवन प्राय: परिवर्तनशील होता है। पूर्वावस्था में इन्हें संघर्ष करना पड़ता है। इनकी कल्पना शक्ति अच्छी होती है तथा लेखन का इन्हें शौक होता है। आवेश इनकी कमजोरी होती है तथा जीवन में ये तेज रफ्तार से दौड़ना चाहते हैं। ये लोग प्राय: मध्यावस्था में धन व सम्मान अर्जित करते हैं तथा स्वयं को कुछ श्रेष्ठ मानते हैं। इनकी स्मरण-शक्ति भी अद्भुत देखी गई है। ये लोग प्राय: बातूनी होते हैं। यदि सप्तम स्थान पर शुभ ग्रहों का प्रभाव न हो तो इनका वैवाहिक जीवन सुखी नहीं होता। गृहस्थ जीवन से ये बहुत लगाव रखते हैं। धन जमा करना इनका स्वप्न होता है। इन्हें अच्छी चीजों का शौक होता है। इनकी विचारधारा कभी बहुत शूरतापूर्ण तथा कभी बहुत भीरू होती है। जीवन के तीसरे पहर में इन्हें विरासत में धन-सम्पत्ति भी प्राप्त होती है। सिंह लग्न-इस लग्न के जातक तीक्ष्ण स्वभाव वाले तथा क्रोधी होते हैं। इनका कद मध्यम व व्यक्तित्व रौबीला होता है, इन्हें पेट व दांत के रोग होने की सम्भावना रहती है। महत्वाकांक्षा बहुत होती है। ये लोग अपनी बात से बहुत हठी होते हैं तथा उच्चाधिकार प्राप्त होने पर ये खूब रौब जमाते हैं। इनका वैवाहिक जीवन प्राय: सुखी नहीं होता। ये लोग राजनीति में भी पड़ते हैं। ये लोग दूसरों पर अधिक विश्वास रखते हैं। प्राय: कृपालु व उदार-हृदय वाले ये लोग बहुत न्यायप्रिय होते हैं। माता के ये अधिक दुलारे होते हैं। इन्हें अभक्ष्य भक्षण का भी शौक होता है। पुत्र कम होते हैं। तथा सन्तान भी कम होती हैं। कन्या लग्न- इस लग्न के व्यक्ति प्राय: मोटे नहीं होते तथा इनकी तोंद कम निकलती है। ये लोग समय-चतुर तथा बुद्घिमान होते हैं। औपचारिक शिक्षा में इनकी6 अभिरुचि कम होती है। ये लोग दुनियादारी में काफी तेज होते हैं। ये लोग शास्त्र के अर्थ को समझने वाले, गणित प्रेमी,  चिकित्सा या ज्योतिष का शौक रखने वाले तथा गुणी होते हैं। ये लोग विवाह देर से करते हैं तथा विवाह के बाद गृहस्थी में रम जाते हैं। इनकी भौंहे आपस में मिली होती हैं। ये श्रृंगार प्रिय होते हैं। इनका झुकाव धन इकट्ठा करने की तरफ अधिक होता है। ये परिवर्तनशील स्वभाव के होते हैं। अत: ये हरफनमौला बनने का प्रयास करते हैं। यदि कमजोर लग्न हो तो भाग्यहीन होते हैं तथा बली लग्न में संघर्ष के बाद अच्छी सफलता पाते हैं। इन्हें यात्राओं का बहुत शौक होता है। इनकी अभिरुचियों में स्त्रीत्व का प्रभाव पाया जाता है। तुला लग्न-इन लग्न के लोगों का व्यक्तित्व शानदार तथा आकर्षक होता है। इनकी नाक लम्बी व रंग गोरा होता है। ये मूल रूप से बड़े धार्मिक, सत्यवादी, इन्द्रियों को वश में करने वाले तथा तीव्र बुद्घि वाले होते हैं। ये धीर गम्भीर स्वभाव रखते हैं। यदि अष्टम स्थान तथा वृहस्पति पर शुभ प्रभाव हो तो ये सांसारिक होते हुए भी मानवीय मूल्यों की मिसाल होते हैं। क्रूर प्रभाव पड़ने से प्राय: तेज, चालक व शारीरिक श्रम करने वाले हो जाते हैं। इन लोगों में वैरागय की भावना भी जाग सकती है। ये लोग प्राय: सांसारिक सम्बन्धों को अधिक विस्तार नहीं देते है तथा प्राय: अपने परिवार के विरोध का सामना करते हैं। इनकी कल्पना शक्ति व विचारों का स्तर सामान्यत: उन्नत होता है। ये लोकप्रियता प्राप्त करते हैं। कई बड़े सत्पुरुषों का जन्म तुला लग्न में हुआ है। महात्मा गांधी व विवेकानन्द तुला लग्न के व्यक्ति थे। तुला लग्न के व्यक्ति बहुत प्रेममय होते हैं। ये लोग प्राय: लेखक, उपदेशक, व्यापारी आदि भी पाए जाते हैं। वृश्चिक लग्न-इन लग्न के लोग संतुलित शरीर के होते हैं तथा इनके घुटने व पिंडलियां गोलाई लिए होती हैं। ये लोग अपनी बात पर अड़ जाते हैं, प्राय: ये बिना सोचे समझे भी बात को पकड़ कर अड़ते हैं। यद्यपि इनकी कल्पना शक्ति तीव्र होती है तथा ये बुद्धिमान भी होते हैं लेकिन अपने निकटवर्ती धोखेबाज को भी नहीं पहचान पाते। अक्सर ठगे जाने पर अक्लमंदी दिखाते हैं। इन्हें असानी से किसी तरफ भी मोड़ा जा सकता है। ये कामुक स्वभाव के होते हैं तथा अपनी स्त्री के अतिरिक्त भी अन्य स्त्रियों से शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं। दिखने में सरल होते हैं लेकिन अनेक फलितवेत्ता इस बात से सहमत हैं। कि इनमें छिपे तौर पर पाप  vकरने की प्रवृत्ति होती है। स्वभावत: ये खर्चीले स्वभाव के होते हैं, लेकिन अधिकांश खर्च अपने आराम व शौक पर करते हैं। इनका घरेलू जीवन अक्सर अस्त व्यस्त होता है, यदि शुभ प्रभाव से युक्त लग्न हो तो इनकी रुचि गुप्त विद्याओं की तरफ हो जाती है। शुभ प्रभाव वाले लग्न में उत्पन्न होने पर ये कुशल प्रशासक भी होते हैं। धनु लग्न-ये लोग अच्छे शारीरिक गठन वाले होते हैं। शुभ प्रभाव होने पर ये लोग काफी सुन्दर होते हैं। लग्न पर बुरा प्रभाव होने पर इनके दॉत व नाक मोटे हो जाते हैं। ये परिश्रमी तथा धैर्यवान होते हैं। ये लोग जल्दी निर्णय नहीं ले पाते तथा काफी सोच विचार के उपरान्त ही कोई काम करते हैं। ये जोशीले व आलस्य रहित होते हैं अत: जीवन में ये काफी आगे बढ़ते हैं। ये लोग अक्सर सत्यवादी तथा ईमानदार होते हैं लेकिन शनि, राहु, मंगल का प्रभाव लग्न पर हो तो ये प्राय: स्वार्थी व धोखेबाज भी बन जाते हैं। तब इनकी कथनी व करनी में बहुत अन्तर होता है। प्राय: ये लोग धनी तथा भाग्यशाली होते हैं। मकर लग्न-इस लग्न के लोग लम्बे कद के निकलते हैं। इनका शारीरिक विकास धीरे-धीरे होता है। ये दिखने में कठोर व्यक्तित्व वाले होते हैं। ये लोग दूसरों की बात को बड़े ध्यान से सुनते हैं तथा सुन-सुनकर ही बहुत कुछ सीखते हैं। इनकी सहन शक्ति बहुत होती है। ये लोग हर एक बात को बड़े व्यावहारिक दृष्टिकोण से देखते हैं। ये लोग धीरे-धीरे सन्तोष से अपना काम करते है। यदि लग्न पर अशुभ प्रभाव हो तो ये लोग धोखेबाज, जेब कतरे, चोर तथा दादागिरी दिखाने वाले हो जाते हैं। इसके विपरीत शुभ प्रभाव होने पर ये ईमानदार तथा कर्तव्यनिष्ठ होते हैं। ये लोग अन्धभक्ति करने वाले, स्रेह से सब कुछ न्यौछावर करने वाले तथा शक्ति से वश में न होने वाले होते हैं। ये लोग बहुत परिश्रमी होते हैं। तथा सबके प्रति बड़ा सेवा भाव रखते हैं। यदि इनके स्वाभिमान की रक्षा होती रहे तो बड़े-बड़े दान-पुण्य के महान कार्य कर देते हैं। ये अड़ियल होते हैं। तथा मुसीबत का सीना तान कर सामना करते हैं। प्राय: ये पुरानी विचार धाराओं को मानने वाले होते हैं। कुम्भ लग्न-इस लग्न के व्यक्ति पूरे लम्बे कद तथा लम्बी गरदन वाले होते हैं। ये लोग बहुत सन्तुलित स्वभाव वाले तथा एकान्त प्रिय देखे गए हैं। संघर्ष करने की इनमें क्षमता होती है। ये लोग अपने सिद्घान्त के लिए सब कुछ दांव पर लगा सकते हैं। इनका कभी कभी थोड़े समय के लिए बहुत भाग्योदय हो जाता है।  ये लोग बीस वर्ष के उपरान्त ही सफलता पाना शुरू करते हैं। इनके काम रातों रात सम्पन्न नहीं होते, अपितु मेहनत से करने पड़ते हैं। इन्हें अपनी बात समझाकर अपने ढंग से चलाना बड़ा मुश्किल कार्य होता है। लेकिन बात समझ में आने पर ये पूरी ईमानदारी व तत्परता से उसे मान लेंगे। इन्हें जीवन में प्राय: हर सिरे से असन्तोष होता है। ये लोग अपने असन्तोष को कभी कभी संघर्ष की शक्ल में या विद्रोह के रूप में प्रकट करते हैं। शारीरिक कष्ट सहने की इनमें अद्भुत क्षमता पाई जाती है। इनका विवाह थोड़ी देर से तथा अक्सर बेमेल होता है। ये लोग सबको अपने ढंग से चलाने का प्रयास करते हैं। प्राय: इनका भाग्योदय स्थायी नहीं होता है। फिर भी ये अपने क्षेत्र में बहुत प्रसिद्ध होते हैं। मीन लग्न-इन लग्न के व्यक्ति प्राय: नाटे देखे जाते हैं। इनका माथा औसत शरीर के अनुपात में थोड़ा बड़ा दिखता है। ये लोग जीवन में बेचैनी अनुभव करते हैं तथा कभी कभी दार्शनिकता की तरफ झुक जाते हैं। ये लोग अस्थिर स्वभाव के होते हैं। इनमें अभिनेता, कवि, चिकित्सक, अध्यापक, या संगीतकार बनने योग्य गुण होते हैं। इन्हें प्राय: पैतृक सम्पत्ति प्राप्त होती है तथा ये लोग उसे बढ़ाने की पूरी कोशिश करते हैं। भीतरी तौर पर ये लोग दब्बू तथा डरपोक होते हैं। इन्हें सन्तान अधिक होती है। तथा ये स्वभाव से उद्यमी नहीं होते हैं। इन्हें जीवन में अचानक हानि उठानी पड़ती है। यदि वृहस्पति अशुभ स्थानों में अशुभ प्रभाव में हो तो प्रारम्भिक अवस्था में इनके जीवन की सम्भावना क्षीण होती हैं। इस तरह हमने जाना कि जन्म लग्न मानव स्वभाव व उसके व्यक्तित्व की संरचना में बड़ा योगदान करता है। लग्न पर प्रभाव से उपर्युक्त गुणों में न्यूनता या अधिकता देखी जाती है। यदि लग्नेश बलवान होकर शुभ स्थानों में शुभ ग्रहों से दृष्ट या युत हो तो बहुत से दोषों को दूर कर देता है।
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