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आपकी कुण्डली में चन्द्रमा वृश्चिक राशि में स्थित है, तो क्या होगा उसका प्रभाव

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आपकी कुण्डली में चन्द्रमा वृश्चिक राशि में स्थित है, जो मंगल द्वारा शासित है तथा यह डंक मारने वाले कीट को चिन्हित करता है। यह स्थिर, नकारात्मक तथा जलीय राशि है। चन्द्रमा यहां ग्रसित है। आपमें ऊँची आकांक्षा होगी तथा आप विजय प्राप्त करने के जोश से भरे होंगे। आप परिश्रमी, ओजस्वी, अदम्य साहसी तथा सहनशील होंगे। आपमें शासन करने का गुण होगा। आप भाग्यशाली और आरामपरस्त होंगे। आपके कर्मचारी या अनुयायी बहुत निष्ठावान तथा विश्वसनीय होंगे। यदि चन्द्रमा का प्रभाव अशुभ है, तो आपका स्वभाव अहंकारी तथा दम्भी हो सकता है। आपकी छवि अत्याचारी की हो सकती है, जो क्रूरता की हद को पार कर सकता है। परन्तु, यदि चन्द्रमा का प्रभाव शुभ है, तो यह आपके विचारों को सकारात्मक और उत्पादक तथा आपके मनोयोग को आध्यात्मिक बना देगा। अपनी उत्कृष्ट विशेषताओं का सही उपयोग करने से आपके शौर्य में वृद्धि होगी। आपका स्वभाव कुछ हिंसात्मक और क्रोधी हो सकता है, जिसे यदि समय से पहले नहीं नियंत्रित किया गया, तो भयंकर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। आपके आवेगी होकर किसी गलत प्रेम-प्रसंग में फंसने की संभावना हो सकती है। वृश्चिक राशि में चन्द्रमा की उपस्थिति से आप आत्मनिर्भर तथा दृढ़ निश्चयी होंगे। आप अपनी रक्षा स्वयं कर सकते है। आप विनम्र तथा कम बोलने वाले होंगे तथा किसी भी लम्बी कहानी को काट कर छोटा कर देंगे। रूढि़वादी तथा परिवर्तनशील होने के कारण आप अपने रास्ते या तरीकों को बदलने में असक्षम होंगे, जिसकी वजह से कुछ लोग आपको हठी समझेंगे। यदि कोई आपका विरोध करता है, तो आप कभी माफ न करने वाले तथा प्रतिशोध लेने वाले होंगे। यदि चन्द्रमा का प्रभाव शुभ है, तो आपका वैवाहिक जीवन फलदायक तथा खुशहाल होगा। यदि चन्द्रमा का प्रभाव अशुभ है तो आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल नहीं हो सकता है। आप अपनी संतानों - खासकर पहली संतान के कारण परेशन हो सकते हैं। आपको रहस्यपूर्ण या उससे सम्बन्धित विषयों में रूचि हो सकती है। छोटी ही उम्र में परिवार के किसी सदस्य को असमय खोने के कारण धार्मिक क्रियाकलापों में आपकी रूझान हो सकती है। गुण: आपके कार्य और विचार रचनात्मक होंगे और उनमें कला की झलक होगी। अपनी अन्तर्निहित ऊर्जा के कारण आप सक्रिय और स्फूर्तिवान होंगे। िसंह की भांति आप किसी चीज से न डरने वाले और साहसी होंगे। आप उदार एवं खुशमिजाज होंगे। अपने बेहतरीन प्रबंधन कौशल के कारण चीजों को व्यवस्थित करने में आप दक्ष होंगे। आप गंभीर एवं संवेदनशील होंगे। अपने मित्रों तथा रिश्तेदारों से आपको प्रेम होगा, आप उनको महत्व देंगे तथा उनका ख्याल रखेंगे। अवगुण: आपकी सहन शक्ति कमजोर हो सकती है। आप छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा कर सकते हैं। आप किसी से न डरने वाले, घमंडी या अहंकारी हो सकते हैं। आप दूसरों पर अपनी मर्जी थोपने वाले हो सकते हैं। आपको कोई आदेश दे, यह आपको पसन्द नहीं हो सकता है। विशेष लक्षण: अपने खुल दिमाग और विचारों तथा परस्थिितियों के साथ सामंजस्य बिठाने की प्रवृति के कारण आप समाज के हर वर्ग के लोगों, चाहे वे ऊँचे या निम्न तबके के हों, के साथ आप आसानी से घुल-मिल सकते हैं। आप उदार होंगे। आप उत्तम कामों एवं कर्मियों की हमेशा प्रशंसा करेंगे और दूसरों से भी उम्मीद करेंगे की किसी की उपलब्धियों के लिए उसकी सराहना करेंगे। आप पुरानी पारिवारिक परम्पराओं को बनाए रखने में विश्वास करेंगे। कभी-कभी यह आपके परिवार में अप्रसन्नता का कारण बन सकती है। रोजगार: आप किसी विभाग में ऊँचे पद पर हो सकते हैं। आप कोई राजनीतिक नेता, वरिष्ठ अधिकारी, प्रबन्धक या राजदूत हो सकते हैं। आप विज्ञान या तकनीकी सम्बन्धी किसी अनुसंधान वाले कार्यों में भी संलग्न हो सकते हैं। आपको संगमरमर, लकड़ी आदि से काफी लाभ प्राप्त हो सकता है या जौहरी, भूगर्भशास्त्री, शिक्षक, अभिनेता या कलाकार के रूप में काफी नाम तथा यश अर्जित कर सकते हैं।

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आपकी कुण्डली में चन्द्रमा वृश्चिक राशि में स्थित है, तो क्या होगा उसका प्रभाव
posted Jul 14, 2020 by Deepika Maheshwary

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29 सितंबर को न्याय के ग्रह कहे जाने वाले शनि अब सीधी चाल चल रहे हैं। 142 दिन बाद यानी 29 सितंबर को सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर वक्री से मार्गी हो रहे हैं। शनि के मार्गी होने से जिस राशि पर भी शनि के प्रभाव थे, वे काफी हद तक कम हो जाएंगे। आपको बता दें कि शनि 11 मई 2020 को वर्की हुए थे। इससे पहले 24 जनवरी को शनि ने धनु से मकर राशि में गोचर किया था। आपको बता दें कि शनि का मार्गी होना एक बड़ी घटना है। शनि के मार्गी होने से मिथुन, कन्या, कर्क, धनु और वृश्चिक राशि वालों का फायदा होगा। शनि ढ़ाई साल में एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं। इससे शनि की साढ़े साती और ढ़ैया शुरू होती है। इस वक्त मिथुन और तुला राशि वालों पर शनि की ढैया और धनु मकर कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है For more information contact- Website :https://www.futurestudyonline.com/astro-details/497
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वैदिक ज्योतिष में भावानुसार उच्च के चंद्र का फल 〰️〰️
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इस संसार में अपने सपनों का घर ख़रीदना हर किसी की ख़्वाहिश होती है। आपका यह ख़्वाब कब पूरा होगा? आप यह ज्योतिष शास्त्र की मदद से जान सकते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार हमारी जन्म कुंडली में घर, ज़मीन या प्रॉपर्टी ख़रीदने जैसे विशेष मामलों का भी पता चलता है। ग्रहों व नक्षत्रों का योग हमें इस बात का संकेत करते हैं। विशेषकर ज्योतिषीय दशा पद्धति एवं ग्रहों की अनुकूल चाल से इन चीज़ों को ज्ञात किया जाता है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार घर, ज़मीन या अन्य प्रकार की अचल संपत्ति को ख़रीदने के लिए जातक की कुण्डली में चतुर्थ भाव बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह भाव इन चीज़ों को ख़रीदने के शुभ समय की सही व्याख्या करता है। जन्मपत्री में चौथा भाव मानसिक शांति, ख़ुशी, माता, घरेलू जीवन, रिश्तेदार, घर, आत्म समृद्धि, आनंद, वाहन, ज़मीन, पैतृक संपत्ति, शिक्षा आदि को प्रदर्शित करता है। इसको लेकर कुछ मुख्य तथ्य इस प्रकार है :- यदि जन्म पत्रिका में चतुर्थ भाव का स्वामी, प्रथम भाव के स्वामी के साथ हो और त्रिकोण अथवा केन्द्र भाव में स्थित हो तो, यह स्थिति जातक के लिए एक से अधिक घर अथवा प्रॉपर्टी ख़रीदने का संकेत करती है। यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में बुध ग्रह तृतीय भाव में हो और चौथे भाव का स्वामी शुभ स्थिति में हो तो उस जातक के लिए यह स्थिति आकर्षक घर ख़रीदने की होती है। यदि कुंडली में चतुर्थ भाव का स्वामी अपनी ही राशि अथवा नवांश में हो और उसकी राशि उच्च स्थिति में तो यह अवस्था जातक को एक आरामदेह घर या प्रॉपर्टी दिलाती है। यदि कुंडली के चतुर्थ भाव में ग्रह उच्च अवस्था में तो जातक एक से अधिक घरों एवं ज़मीन जायदादों का मालिक बनता है। यदि कुंडली में चतुर्थ भाव का स्वामी मित्र राशि या स्वयं की राशि में स्थित हो अथवा बलित हो तो यह अवस्था किसी जातक को आरामदेह घर, वाहन, ज़मीन आदि दिलाती है। नवम भाव का स्वामी केन्द्र में हो और चतुर्थ भाव का स्वामी अपनी मित्र राशि में स्थित हो या फिर चतुर्थ भाव में ग्रह का उच्च होना सुंदर घर दिलाता है। यदि किसी की जन्म कुण्डली में चतुर्थ भाव का स्वामी मंगल/शनि/शुक्र के साथ शुभ योग में हो तो यह स्थिति जातक को एक से अधिक सुंदर घरों को ख़रीदने का संकेत करती है। बृहस्पति, मंगल, शनि एवं शुक्र ग्रह की महादशा प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए शुभ होती है। घर, ज़मीन अथवा अन्य संपत्ति ख़रीदने में ग्रहों की भूमिका मंगल: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल ग्रह ज़मीन का नैसर्गिक कारक होता है। शनि: ज्योतिष विज्ञान में शनि को ज़मीन अथवा प्रॉपर्टी के लिए दूसरा कारक ग्रह बताया गया है। शुक्र: वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र ग्रह समृद्धि का कारक होता है। यदि इसकी कृपा हुई तो यह किसी भी जातक को सुंदर और आकर्षक घर दिला सकता है। वहीं शनि और मंगल आपको घर तो दिला सकते हैं परंतु उनकी साज-सज्जा के लिए इंटिरियर कार्य की आवश्यकता होती है जिसका कारक शुक्र ग्रह होता है। जैसा कि हमने आपको बताया है मंगल ग्रह ज़मीन का प्राकृतिक कारक होता है। लेकिन जिस स्थान पर आप रहते हैं उसके लिए मंगल और शुक्र ग्रह की जिम्मेदार होती है। घर, ज़मीन अथवा अन्य प्रॉपर्टी ख़दीरने में विभिन्न भाव का महत्व प्रथम भाव : ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुण्डली में प्रथम भाव जातक के शारीरिक स्वभाव और उसके व्यक्तित्व को दर्शाता है। इस भाव से आपके मन में अपने घर अथवा संपत्ति को लेकर विचार बनते हैं। द्वितीय भाव : जन्मपत्रिका में दूसरा भाव धन एवं धन की बचत को दिखाता है। बिना धन के नई प्रॉपर्टी आदि को ख़रीदना संभव नहीं है। चतुर्थ भाव: कुंडली में यह भाव व्यक्ति की ख़ुशियों और उसके घर-मकान को दर्शाता है। इसलिए घर या प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए कुंडली में चतुर्थ भाव और इसके स्वामी की परिस्थिति को देखा जाता है। एकादश भाव: हिन्दू ज्योतिष के अनुसार जन्म कुंडली में ग्यारहवें भाव से किसी भी जातक की आय और लाभ के बारे में पता चलता है। यदि यह भाव हमारे लिए अनुकूल परिणामकारी हो तो इससे हमारी आय में वृद्धि और धन का लाभ होता है। वहीं धन से हम अपनी प्रॉपर्टी को बढ़ा सकते हैं। ज्योतिष के अनुसार प्रॉपर्टी अथवा घर ख़रीदने का शुभ मुहूर्त महादशा को प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए बहुत महत्वपूर्ण समय माना जाता है। प्रॉपर्टी ख़रीदने के लिए चतुर्थ/द्वितीय/एकादश/नवम भाव के स्वामी एवं उनमें अवस्थित ग्रहों की महादशा शुभ होती है। व्यक्ति की मध्य आयु में सूर्य ग्रह घर ख़रीदने का बड़ा कारक माना जाता है। चंद्रमा व्यक्ति की प्रारंभिक आयु में घर दिलाने का बड़ा कारक होता है। मध्य आयु में घर ख़रीदने के लिए मंगल ग्रह सबसे बड़ा कारक होता है। बुध ग्रह 32 से 36 साल की आयु में घर प्राप्त करने का कारक होता है। गुरु को 30 की आयु में घर प्राप्त करने का कारक माना जाता है। शुक्र और राहु ग्रह की वजह से व्यक्ति को शुरुआती उम्र में घर मिलता है। शनि और केतु के कारण व्यक्ति को 44 से 52 की उम्र में घर मिलता है। ज्योतिष के अनुसार प्रॉपर्टी में हानि का कारण यदि कुंडली में चतुर्थ भाव का स्वामी चतुर्थ भाव से द्वादश भाव में अवस्थित हो अवथा नीच भाव में हो तो प्रॉपर्टी में हानि होने की संभावना है। यदि कुंडली में चतुर्थ भाव का स्वामी 6, 8 और 12 भाव में हो तो संपत्ति में नुकसान हो सकता है। यदि कुण्डली में चतुर्थ भाव का स्वामी नीच में हो , चतुर्थ भाव में ग्रह की अनुपस्थिति हो और शनि और मंगल कमज़ोर स्थिति में हो तो भी जातक को प्रॉपर्टी, जमीन आदि में हानि का सामना करना पड़ता है।
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सामान्य अवधारणा है कि कुंडली में ग्रहों का अस्त या नीच होना जातक के लिए अच्छा नहीं होता है लेकिन ऐसा देखा गया है कि बहुत से जातकों में नीच ग्रह या अस्त ग्रह की स्थिति से उनके जीवन बड़े काम हुए हैं . ज्योतिष में मान्यता के अनुसार बुध सूर्य के दोनों ओर 14 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माना जाता है. किन्तु यदि बुध अपनी सामान्य गति की बनिस्पत वक्र गति से चल रहे हों तो वह सूर्य के दोनों ओर 12 डिग्री या इससे अधिक समीप आने पर अस्त माना जाता है . मीन राशि में स्थित होने पर बुध को नीच का बुध कहा जाता है अर्थात मीन राशि में स्थित होने पर बुध अन्य सभी राशियों की तुलना में सबसे बलहीन हो जाता है अस्त ग्रह के कई कुपरिणाम देखने को मिलते हैं इसलिए इसका ज्योतिषीय समाधान करवाना चाहिए या सक्षम हो तो खुद करना चाहिए . पौराणिक मन्त्र ॐ प्रियङ्गुलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम्।। वैदिक मन्त्र ऊँ उदबुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते स सृजेथामयं च अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत।। बीज मंत्र ऊँ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः।। जप संख्या – 9000 समय: शुक्ल पक्ष में बुध की होरा में ग्रह पूजा मंत्र: ऊँ ऐं स्त्रीं श्रीं बुधाय नमः।। यह मंत्र बोलते हुए बुध प्रतिमा अथवा बुध यंत्र का पूजन करें। दान: बुध ग्रह हरे रंग का कारक होता है अगर कुंडली में बुध बुरी अवस्था में है या नीच है शरीर में हरा रंग अशुभ है या ज्यादा बलवान है तो इसके दुष्परिणाम हो सकते हैं ऐसे में हरे रंग को शरीर में संतुलित करने के लिए हरी चीजें का दान करना चाहिए। हरा वस्त्र, हरी सब्जी, मूंग की दाल, हरे फल, गन्ना, हरी इलायची, कांसे के बर्तन, बुध रत्न पन्ना, हरा कपडा, हरी सब्जियां, हरे रंग का कददू, दुधारू बकरी यह सब किसी पढ़ने वाले गरीब विद्यार्थी को देना चाहिए । हरे रंग की चूड़ी और वस्त्र का दान किन्नरो को देना भी इस ग्रह दशा में श्रेष्ठ होता है। बुध ग्रह से सम्बन्धित वस्तुओं का दान भी ग्रह की पीड़ा में कमी ला सकती है. इन वस्तुओं के दान के लिए ज्योतिषशास्त्र में बुधवार के दिन दोपहर का समय उपयुक्त माना गया है। व्रत: बुध की दशा में सुधार हेतु बुधवार के दिन व्रत रखना चाहिए। बुध के नीच अथवा अशुभ स्थिति में होने पर करें ये उपाय * घर में हरे रंग के परदे लगवाने चाहिए। * गाय को हरी घास और हरी पत्तियां खिलानी चाहिए। * ब्राह्मणों को दूध में पकाकर खीर भोजन करना चाहिए। * बुध की दशा में सुधार के लिए विष्णु सहस्रनाम का जाप भी कल्याणकारी कहा गया है। * बुधवार के दिन सुरु कर के 108 दिन लगातार हरी घास पर नंगे पांव चलने से बुध से होने वाली बीमारियां व् चर्म रोग दूर हो जाते हैं। * रविवार को छोड़कर अन्य दिन नियमित तुलसी में जल देने से बुध की दशा में सुधार होता है। * अनाथों एवं गरीब छात्रों की सहायता करने से बुध ग्रह से पीड़ित व्यक्तियों को लाभ मिलता है। मौसी, बहन, चाची बेटी के प्रति अच्छा व्यवहार बुध ग्रह की दशा से पीड़ित व्यक्ति के लिए कल्याणकारी होता है। * अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए। * हरी सब्जियाँ एवं हरा चारा गाय को खिलाना चाहिए। * बुधवार के दिन गणेशजी के मंदिर में मूँग के लड्डुओं का भोग लगाएँ तथा बच्चों को बाँटें। * ज्यादा से ज्यादा बुध का दान करना चाहिए। * दुर्गा सप्तसी का पाठ, विष्णु उपासना, तथा भगवान विघ्नहर्ता गणपति देव का पूजन-दर्शन करने से बुध का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है।
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वैदिक ज्योतिष के अनुसार अंगारक योग का निर्माण किसी भी कुंडली में उस स्थिति में होता है, जब एक ही भाव में मंगल ग्रह के साथ राहु अथवा केतु उपस्थित हों। इसके अलावा, यदि मंगल का दृष्टि सम्बन्ध भी राहु अथवा केतु से हो रहा हो तो भी इस योग का निर्माण हो सकता है। आमतौर पर अंगारक योग को एक बुरा और अशुभ योग माना जाता है और इससे जीवन में समस्याओं की बढ़ोतरी होती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार अंगारक दोष बुरे योगों में सम्मिलित किया गया है। अंगारक की प्रकृति से समझें तो अंगारे जैसा फल देने वाला योग बनता है। यह जिस भी भाव में बनता है, उस भाव के कारकत्वों को नष्ट करने की क्षमता रखता है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति के स्वभाव में परिवर्तन आते हैं, और उसमें गुस्से की अधिकता हो सकती है। यह योग व्यक्ति के निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करता है और वह अपने क्रोध तथा दुर्घटना आदि के कारण समस्याओं को निमंत्रण देता है। मंगल को भाई का कारक कहा जाता है, इसलिए इस योग के प्रभाव से कई बार व्यक्ति की अपने भाइयों से नहीं बनती तथा दुर्घटना होने की संभावना रहती है। इस प्रकार के योग वाले व्यक्तियों पर शत्रुओं का प्रभाव भी अधिक पड़ता है और वे मानसिक तनाव में बने रहते हैं। किसी योग्य विद्वान से अंगारक योग निवारण पूजा कराना सबसे उपयुक्त माना जाता है क्योंकि इससे ग्रह शांत हो जाते हैं और उनके नकारात्मक प्रभाव कम हो जाते हैं। मंगल राहु अंगारक योग अथवा मंगल केतु अंगारक योग उपाय के रूप में इन ग्रहों की शांति मंत्र जाप तथा हवन द्वारा कराना भी उत्तम परिणाम देता है। -मंगल केतु अंगारक योग उपाय के रूप में मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर में लाल रंग का झंडा लगाना चाहिये। -अंगारक योग निवारण के लिए माता महालक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए और यह पूजा तब करनी चाहिए, जब चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में स्थित हो। -मंगलवार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय की आराधना करने से भी अंगारक दोष से मुक्ति मिलती है। -अंगारक योग निवारण के लिए आप बजरंग बाण का नियमित पाठ कर सकते हैं और हनुमान जी को चोला चढ़ा सकते हैं। -यदि मंगल और राहु दोनों ही अशुभ परिणाम दे रहे हों तो मंगल और राहु का दान करना चाहिए। -अपने शरीर पर चाँदी धारण करें क्योंकि इससे इन दोनों ही ग्रहों को शांत करने में मदद मिलती है। -समय-समय पर अपने भाइयों की मदद करें और अपने ससुराल पक्ष से अपने संबंध सुधारें। -राह के कुत्तों को मीठी रोटी खिलानी चाहिए। -अंगारक योग का उपाय यह भी है कि आप अपने दाहिने हाथ में तांबे का कंगन पहनें और ॐ अं अंगारकाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें। -आप रात को सोते समय अपने सिरहाने या तकिए के निकट तांबे के जग अथवा लोटे में पानी भर कर रखें और सुबह किसी काँटे वाले पौधे या कैक्टस में इस पानी को डाल दें। -अनामिका उंगली में मंगलवार के दिन तांबे की अंगूठी पहनना भी अच्छा परिणाम देता है।
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