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बुधवार को क्या करें

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बुधवार के दिन एक अमरूद का पौधा लेकर भगवान गणेश के सामने रखें. श्रीगणेश के चरणों में देसी घी का दीपक जलाएं. इसके बाद उस अमरूद के पौधे को किसी मिट्टी के गमले में लगा दें और उसकी देखभाल करें. जब इस पौधे पर पहला फल आए तो उस फल को भगवान गणेश को अर्पित कर दें. माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान गणेश सभी दुख दूर करते हैं. इसके अलावा समय के साथ साथ सभी कष्ट धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं. इस अमरूद के पौधे को भगवान गणेश के सामने रखकर 'गं हं क्लौं ग्लौं उच्छिष्टगणेशाय महायक्षायायं बलिः' मंत्र का जाप भी करें.

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बुधवार को क्या करें
posted Jul 22, 2020 by Deepika Maheshwary

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हिन्दू धर्म के शास्त्रों के अनुसार कुछ ऐसे दिन बताएं गये है जो हमारी यात्रा के अनुसार अच्छे नही माने गये है इसलिए इन दिनों में हमें भूलकर भी यात्रा नही करनी चाहिए। इस संबंध में एक धार्मिक कथा भी प्रचिलत है जो इस प्रकार है। किसी समय एक व्यक्ति अपनी पत्नी को विदा करवाने अपने ससुराल गया। कुछ दिवस रहने के पश्चात उसने सास–ससुर से अपनी पत्नी को विदा करने को कहा। किन्तु सास ससुर ने बड़े विनीत भाव से कहा आज बुधवार का दिन हैं, आज के दिन गमन (यात्रा) नहीं करते। उस व्यक्ति ने किसी की नहीं मानी और जरूरी कार्य होने की बात कहकर उसी दिन अपनी पत्नी को विदा कराकर अपने नगर की तरफ चल पड़ा। रास्ते में उसकी पत्नी को प्यास लगी तो उसने अपने पति से कहा मुझे प्यास लगी है तब पति लोटा लेकर गाड़ी से उतरकर जल लेने चला गया। जब वह जल लेकर लौटा और अपनी पत्नी के निकट आया तो उसने देखा की उसका हमशक्ल उसकी पत्नी के निकट बैठा हैं। उसने क्रोध में पूछा तुम कौन हो ? तुम मेरी पत्नी के निकट क्यों बैठे हो। दोनों में झगड़ा हो गया दुर खड़े राजा के सैनिक आये और उसके असली पति को पकड़ लिया और पत्नी को पूछा तुम्हारा पति कौन सा हैं पर पत्नी को कुछ समझ नहीं आया पत्नी शांत रही। वह व्यक्ति मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगा। हे ! परमेश्वर यह क्या लीला हैं सच्चा झूठा बन रहा हैं। मुझसे कुछ भूल हुई तो क्षमा करे। तभी आकाशवाणी हुई की मुर्ख आज बुधवार के दिन तुझे गमन नहीं करना था। तूने किसी की बात नहीं मानी। यह लीला भगवान बुद्धदेव की हैं। उस व्यक्ति ने भगवान बुद्धदेव से क्षमा – याचना की। तब मनुष्य रूप में आये भगवान बुद्धदेव अंतर्ध्यान हो गये। पति प्रसन्नता पूर्वक अपनी पत्नी को लेकर अपने घर चला आया। दोनों पति – पत्नी नियम पूर्वक बुधवार का व्रत करने लगे। जों व्यक्ति नियम पूर्वक बुधवार की कथा पढ़ता, सुनता हैं उसको बुधवार के दिन यात्रा करने का दोष नही लगता तथा जो जिस मनोकामना से व्रत करता हैं भगवान गणेश उसकी सभी मनोकामनाए पूरी करते हैं।
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भगवान गणेश को विघ्नहर्ता के नाम से जाना जाता है। वे सभी कष्टों का नाश करने वाले हैं। उनकी महिमा अपरंपार है। ऐसी मान्यता है कि श्री गणेश की पूजा बुधवार के दिन करने से सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। श्री गणेश की पूजा करने से पहले उन्हें रोली और लाल सिंदूर का तिलक करें। सिंदूर की लालिमा श्री गणेश को बहुत पसंद है और ऐसा करने से आपके घर में किसी भी चीज की कमी नहीं होगी। श्री गणेश को मोदक बेहद पसंद है। ऐसे में मोदक का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। पूजा समाप्त हो जाने के बाद श्री गणेश को मोदक का भोग लगायें इससे भगवान बहुत खुश होते हैं। भगवान श्री गणेश की पूजा दूर्वा से करें। ऐसा करने से गणेश भगवान अपने भक्तों के भंडार भर देते हैं। शमी की आराधना करने से भगवान गणेश बहुत खुश होते हैं क्योंकि शमी एक ऐसा पौधा है जिसकी पूजा करने से भगवान शिव, शनिदेव और गणेश जी सारे देवता खुश होते हैं। कहते हैं कि जब भगवान श्रीराम को रावण पर विजय पानी थी तब उन्होंने ने भी शमी के पौधे की आराधना की थी। जो कोई भी भगवान गणेश के समक्ष घी के दीए जलाता है उसपर भगवान की हमेशा कृपा होती है। भगवान श्री गणेश की पूजा करने के लिए अखंडित चावल को प्रयोग करें। भगवान श्री गणेश जी को चावल चढ़ाने से पहले चावलों को गंगाजल में डालकर उसे गीला करे फिर ‘इदं अक्षतम् ऊं गं गणपतये नमः’ बोलते हुए तीन बार गणेश जी पर चावल चढ़ाएं। शास्त्रों के अनुसार गणपति जी के पीठ का दर्शन नहीं करना चाहिए ऐसा माना जाता है कि उनकी पीठ में दरिद्रता का निवास होता है। गणेश जी को भोग लगाते समय याद रखें कि तुलसी दल को प्रयोग न करें। पान के पत्ते पर स्वास्तिक बनाकर गणेश जी पर अर्पित करें। ऐसा करने से आपके शत्रुओं का नाश होगा। मक्के के दाने गणेश जी पर चढ़ाकर रसोई घर में छिपा कर रख दें इससे आपके घर में अन्न, धन की कभी कमी नहीं होगी।
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श्रीगणेश बुद्धि के देवता हैं । अक्षरों को ‘गण’ कहा जाता है, उनके ईश होने के कारण इन्हें ‘गणेश’ कहा जाता है । इसलिए श्रीगणेश ‘विद्या-बुद्धि के दाता’ कहे गये हैं । आदिकवि वाल्मीकि ने श्रीगणेश की वन्दना करते हुए कहा है—‘गणेश्वर ! आप चौंसठ कोटि विद्याओं के दाता तथा देवताओं के आचार्य बृहस्पतिजी को भी विद्या प्रदान करने वाले हैं । कठ को भी अभीष्ट विद्या देने वाले आप है (अर्थात् कठोपनिषद् के दाता है) । आप द्विरद हैं, कवि हैं और कवियों की बुद्धि के स्वामी हैं; मैं आपको प्रणाम करता हूँ ।’ श्रीगणेश असाधारण बुद्धि व विवेक से सम्पन्न होने के कारण अपने भक्तों को सद्बुद्धि व विवेक प्रदान करते हैं । इसीलिए हमारे ऋषियों ने मनुष्य के अज्ञान को दूर करने, बुद्धि शुद्ध रखने व काम में एकाग्रता प्राप्त करने के लिए बुद्धिदाता श्रीगणेश की सबसे पहले पूजा करने का विधान किया है । श्रीगणेश की कृपा से कैसे मिलता है तेज बुद्धि का वरदान ? श्रीगणेश का ध्यान करने से भ्रमित मनुष्य को सुमति और विवेक का वरदान मिलता है और श्रीगणेश का गुणगान करने से सरस्वती प्रसन्न होती हैं । तीव्र बुद्धि और स्मरण-शक्ति के लिए श्रीगणेश का करें प्रात:काल ध्यान!!!!!! विद्या प्राप्ति के इच्छुक मनुष्य को प्रात:काल इस श्लोक का पाठ करते हुए श्रीगणेश के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए— प्रात: स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम् उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्ड- माखण्डलादिसुरनायकवृन्दवन्द्यम् ।। अर्थात्—जो अनाथों के बन्धु हैं, जिनके दोनों कपोल सिन्दूर से शोभायमान हैं, जो प्रबल विघ्नों का नाश करने में समर्थ हैं और इन्द्रादि देव जिनकी वन्दना करते हैं, उन श्रीगणेश का मैं प्रात:काल स्मरण करता हूँ । विद्या प्राप्ति और तीव्र स्मरण-शक्ति के लिए बुधवार को करें श्रीगणेश के ये उपाय !!!!!! ▪️बुध ग्रह भी बुद्धि देने वाले हैं । बुधवार के दिन गणेशजी की पूजा बहुत फलदायी होती है । श्रीगणेश अपनी संक्षिप्त अर्चना से ही संतुष्ट हो भक्त को ऋद्धि-सिद्धि प्रदान कर देते हैं । गणेशजी को प्रसन्न करना बहुत ही सरल है । इसमें ज्यादा खर्च की आवश्यकता नही है । ▪️स्नान आदि करके पूजा शुद्ध पीले वस्त्र पहन कर करें । ▪️पूजा-स्थान में गणेशजी की तस्वीर या मूर्ति पूर्व दिशा में विराजित करें । श्रीगणेश को रोली, चावल आदि चढ़ाएं । कुछ न मिले तो दो दूब ही चढ़ा दें । घर में लगे लाल (गुड़हल, गुलाब) या सफेद पुष्प (सदाबहार, चांदनी) या गेंदा का फूल चढ़ा दें । ▪️श्रीगणेश को सिंदूर अवश्य लगाना चाहिए । ▪️श्रीगणेश को बेसन के लड्डू बहुत प्रिय हैं यदि लड्डू या मोदक न हो तो केवल गुड़ या बताशे का भोग लगा देना चाहिए । ▪️एक दीपक जला कर धूप दिखाएं और हाथ जोड़ कर छोटा-सा एक श्लोक बोल दें– तोहि मनाऊं गणपति हे गौरीसुत हे । करो विघ्न का नाश, जय विघ्नेश्वर हे ।। विद्याबुद्धि प्रदायक हे वरदायक हे । रिद्धि-सिद्धिदातार जय विघ्नेश्वर हे ।। ▪️एक पीली मौली गणेशजी को अर्पित करते हुए कहें—‘करो बुद्धि का दान हे विघ्नेश्वर हे’ । पूजा के बाद उस मौली को माता-पिता, गुरु या किसी आदरणीय व्यक्ति के पैर छूकर अपने हाथ में बांध लें। ▪️श्रीगणेश पर चढ़ी दूर्वा को अपने पास रखें, इससे एकाग्रता बढ़ती है । ▪️‘ॐ गं गणपतये नम:’ इस गणेश मन्त्र का 108 बार जाप करने से बुद्धि तीव्र होती है । ▪️गणपति अथर्वशीर्ष में कहा गया है—‘जो लाजों (धान की खील) से श्रीगणेश का पूजन करता है, वह यशस्वी व मेधावी होता है ।’ अत: गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने से भी विद्या, बुद्धि, विवेक व एकाग्रता बढ़ती है । बुद्धि के सागर और शुभ गुणों के घर गणेशजी का स्मरण करने से ही समस्त सिद्धियां प्राप्त हो जाती
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हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार के दिन को शिव जी का दिन माना जाता है। इस दिन किसी भी काम को करने से पहले यदि आप शिव जी का आशीर्वाद ले लें तो आपको लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही साथ जीवन में सुख शांति बरक़रार रखने के लिए सोमवार के दिन शिव जी के कुछ ख़ास उपायों को अपनाकर आप शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। आज हम आपको विशेष रूप से सोमवार के दिन शिव जी के कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें आजमाकर आप अपने जीवन को सफल बना सकते हैं। आइये जानते हैं कौन से हैं वो विशेष उपाय। सोमवार के दिन करें शिव जी के ये कारग़र उपाय जैसा की आप सभी जानते हैं कि सोमवार के दिन को शिव जी का दिन माना जाता है इसलिए इस दिन यदि शिव जी के कुछ ख़ास उपाय किये जाएँ तो आपको जीवन में अथाह सफलता मिल सकती है। इसके साथ ही सावन के सोमवार पर खासतौर से यदि शिव को प्रसन्न किया जाए तो आपका जीवन सुखी और सफल बन सकता है। सोमवार को शिव जी के निम्नलिखित उपायों को आजमाकर आप लाभ प्राप्त कर सकते हैं। सोमवार के दिन किसी भी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग का दूध या जल ये अभिषेक करना आपके लिए शुभ फलदायी साबित हो सकता है। सावन के माह में शिव का अभिषेक करना वैसे भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन शिव जी को सफ़ेद चावल अर्पित करना भी आपके लिए लाभदायक साबित हो सकता है। शिव जी को चावल चढ़ाने के बाद उसे गरीबों में जरूर बाँट दें। इस उपाय को करने से जिंदगी में मुसीबतों से छुटकारा मिलता है। सोमवार को जल में काला तिल मिलाकर शिव जी को चढ़ाने से आपको लाभ मिल सकता है। ऐसा करने से पारिवारिक सुखों में वृद्धि होती है। छात्रों को ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि करने के लिए सोमवार के दिन स्फटिक से बने शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। दूध में शक्कर मिलाकर शिव जी का अभिषेक करने से भी आपको अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। सोमवार के दिन गाय के घी से शिव जी का अभिषेक करने से भी आपको जीवन में सफलता और सुख शांति मिल सकती है। शिवलिंग पर सोमवार के दिन गन्ने का रस अर्पित करने से भी आपको जीवन के सभी क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है। इस दिन शिव जी की पूजा यदि श्रद्धा पूर्वक किया जाए और उनका अभिषेक शहद से किया जाए, तो इस उपाय को करने से आपको स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं से निजात मिल सकता है। सोमवार के दिन शिव जी की पूजा अर्चना करने के साथ ही साथ रूद्र गायत्री मंत्र का जाप करना फलदायी माना जाता है। रूद्र गायत्री मन्त्र इन प्रकार हैं “ॐ तत्पुरुषाय विद्दहे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात “
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कब बनता है कुंडली में ग्रह मारकेश, अष्टम द्वादश सिद्धांत, 8th to 12th Theory in Horoscope जन्म कुण्डली द्वारा मारकेश का विचार करने के लिए कुण्डली के दूसरे भाव, सातवें भाव, बारहवें भाव, अष्टम भाव आदि को समझना आवश्यक होता है. जन्म कुण्डली के आठवें भाव से आयु का विचार किया जाता है. लघु पाराशरी के अनुसार से तीसरे स्थान को भी आयु स्थान कहा गया है क्योंकि यह आठवें से आठवा भाव है (अष्टम स्थान से जो अष्टम स्थान अर्थात लग्न से तृतीय स्थान आयु स्थान है) और सप्तम तथा द्वितीय स्थान को मृत्यु स्थान या मारक स्थान कहते हैं इसमें से दूसरा भाव प्रबल मारक कहलाता है. बारहवां भाव व्यय भाव कहा जाता है, व्यय का अर्थ है खर्च होना, हानि होना क्योंकि कोई भी रोग शरीर की शक्ति अथवा जीवन शक्ति को कमजोर करने वाला होता है,इसलिये बारहवें भाव से रोगों का विचार किया जाता है. इस कारण इसका विचार करना भी जरूरी होता है. मारकेश की दशा में व्यक्ति को सावधान रहना जरूरी होता है क्योंकि इस समय जातक को अनेक प्रकार की मानसिक, शारीरिक परेशनियां हो सकती हैं. इस दशा समय में दुर्घटना, बीमारी, तनाव, अपयश जैसी दिक्कतें परेशान कर सकती हैं. जातक के जीवन में मारक ग्रहों की दशा, अंतर्दशा या प्रत्यत्तर दशा आती ही हैं. लेकिन इससे डरने की आवश्यकता नहीं बल्कि स्वयं पर नियंत्रण व सहनशक्ति तथा ध्यान से कार्य को करने की ओर उन्मुख रहना चाहिए.
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