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नमन्ति फलिता वृक्षा नमन्ति च बुधा जनाः। शुष्ककाष्ठानि मूर्खाश्च भिद्यन्ते न नमन्ति च॥ Trees with fruits bend, wise people become humble but dry wood and fool do not bend even when they are cut. *फले हुए वृक्ष झुक जाते हैं और बुद्धिमान लोग विनम्र हो जाते हैं पर सूखी लकड़ी और मूर्ख काटने पर भी नहीं झुकते॥* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
posted Jul 30 by anonymous

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कायेन वाचा मनसेंद्रियौर्वा । बुदध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात् । करोमि यद्यत् सकलं परस्मै । नारायणायेति समर्पयामि ।। Whatever I do with my body, speech, mind, limbs, intellect or my inner self either intentionally or unintentionally, I dedicate it all to the supreme lord Narayan *मैं मेरे वाच, काच, मन, अंग और बुद्धि से अनजाने में या तो स्वेच्छा से जो कुछ भी करु, नारायण को समर्पित करुंगा।* *हरि ॐ,प्रणाम, जय सियाराम*
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लोके स्वास्थ्यं तथा वेदे हरिस्तु न करिष्यति । पुष्टिमार्गस्थितो यस्मा त साक्षिणो भवताऽखिलाः ।। In this path of grace, all witnessing Lord Krishna will definitely take care of his devotee's health, worldly and spiritual matters. *पुष्टि मार्ग में स्थित भक्त के लोक, स्वास्थ्य और वेद का पालन निश्चित रूप से सबके साक्षी (श्रीहरि) ही करेंगे ॥* *हरि ॐ, प्रणाम् जय सीताराम*
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*मन्त्रे ,तीर्थे ,द्विजे ,देवे ,दैवज्ञे ,भेषजे गुरौ|* *यादृशी भावना यस्य,सिद्धिर्भवति तादृशी।।* *मंत्र, पवित्र नदी का जल ,ब्राह्मण ,भगवान ,ज्योतिषी औषध और गुरू इनके उपर जिसकी जैसी श्रद्धा होगी वैसा उसको फल मिलेगा | श्रद्धा मन का सामर्थ्य है ,उसके कारण ही मनुष्य को यश की प्राप्ती होती है |* *Mantra, water of holy river, Brahmin, God, astrologer and gurus, will be rewarded according to whom he will have reverence. Belief is the strength of the mind, due to which man gets success.* *हरि ॐ, प्रणाम, जय सीताराम*
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सर्वदा सर्वकार्येषु नास्ति तेषाममङ्गलम् | येषां हृदिस्थो भगवान् मङ्गलायतनो हरिः || In all activities and at all times, there will be no inauspicious and obstacles for those persons, in whose heart resides bhagavaan Hari - the home of the auspiciousness *जिसके हृदय में श्रीहरी हों, जो स्वयं मंगलायातन हैं, उनका वास हो, उनके सदैव, सर्व कार्य निर्विघ्न और मंगलकारी होते हैं।* *हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम*
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मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम् । यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्दमाधवम् ॥ By whose grace dumbs start talking, lame men climb mountains, I worship that Sri Krishna, the supreme bliss. *जिनकी कृपा से गूंगे बोलने लगते हैं, लंगड़े पहाड़ों को पार कर लेते हैं, उन परम आनंद स्वरुप श्रीमाधव की मैं वंदना करता हूँ।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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