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नमन्ति फलिता वृक्षा नमन्ति च बुधा जनाः। शुष्ककाष्ठानि मूर्खाश्च भिद्यन्ते न नमन्ति च॥ Trees with fruits bend, wise people become humble but dry wood and fool do not bend even when they are cut. *फले हुए वृक्ष झुक जाते हैं और बुद्धिमान लोग विनम्र हो जाते हैं पर सूखी लकड़ी और मूर्ख काटने पर भी नहीं झुकते॥* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
posted Jul 30, 2020 by anonymous

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ॐ सहनाववतु सहनौ भुनक्तु सह वीर्यं करवावहै। तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषा वहै। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्ति:॥ May He protect and nourish us togather. May we all acquire the capacity to study brilliantly and not quarrel with each other. Om peace, peace, peace #सर्वशक्तिमान ईश्वर हमें सुरक्षित रखें और पालन पोषण करें | बहुत बढ़िया विद्याभ्यास की योग्यता बढ़ाएं और आपस में झगडा न करें |* ॐ शांति शांति शांति हरि ॐ,प्रणाम, जय सियाराम।
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वृश्र्चिकस्य विषं पुच्छं मक्षिकायाः विषम् शिरः । तक्षकस्य विषं दन्तं सर्वांगम् दुर्जनस्य च ।। A scorpion has poison in its tail. A bee has poison in its head. Takshaka (a snake mention in Puranas) has poison in its teeth. An evil person has poison in all his limbs. *बिच्छूका जहर उसकी पूंछमें होता है, भौंरे का जहर उसके सर में होता है, तक्षक साँप का जहर उसके दांतों में होता है मगर दुष्ट आदमी के हरेक अंग जहर से भरे हुए होते हैं ।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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दुर्लभं त्रयमेवैतत् देवानुग्रहहेतुकम्। मनुष्यत्वं मुमुक्षुत्वं महापुरूषसंश्रय:॥ These three are very difficult to get and can be got only by the grace of the gods - human birth, desire for salvation and the company of the nobles. *यह तीन दुर्लभ हैं और देवताओं की कृपा से ही मिलते हैं - मनुष्य जन्म, मोक्ष की इच्छा और महापुरुषों का साथ।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावषिष्यते॥ Om! That is perfect; this is perfect Perfection arises only out of perfection Even when perfect is taken out of perfection What remains is perfect and perfect only. Aum! let there be peace, peace, peace *ये भी पूर्ण है वो भी संपूर्ण है, पूर्ण से हे परिपूर्णता उत्पन्न होती है।* *यहाँ तक की संपूर्ण से जब पूर्ण निकला जाय, तब भी जो अवशेष रहते है वे भी संपूर्ण ही रहते है*। *ॐ शांति शांति शांति* *हरि ॐ,प्रणाम, जय सियाराम*
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कायेन वाचा मनसेंद्रियौर्वा । बुदध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात् । करोमि यद्यत् सकलं परस्मै । नारायणायेति समर्पयामि ।। Whatever I do with my body, speech, mind, limbs, intellect or my inner self either intentionally or unintentionally, I dedicate it all to the supreme lord Narayan *मैं मेरे वाच, काच, मन, अंग और बुद्धि से अनजाने में या तो स्वेच्छा से जो कुछ भी करु, नारायण को समर्पित करुंगा।* *हरि ॐ,प्रणाम, जय सियाराम*
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