top button
    Futurestudyonline Community

Daily knowledgeable

0 votes
41 views
उद्यमेनैव हि सिध्यन्ति, कार्याणि न मनोरथै। न हि सुप्तस्य सिंहस्य, प्रविशन्ति मृगाः॥ Things are achieved by doing and not by desiring alone as deers by themselves don't go into a lion's mouth. *प्रयत्न करने से ही कार्य पूर्ण होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं, सोते हुए शेर के मुख में मृग स्वयं प्रवेश नहीं करते हैं।* *Hari Om,pranam,jai sitaram*
posted Aug 2 by anonymous

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
0 votes
नात्यन्त गुणवत् किंचित् न चाप्यत्यन्तनिर्गुणम् उभयं सर्वकार्येषु दॄष्यते साध्वसाधु वा || There is no work which is good in all respects. There is no work bad in all respects. Both good and bad points are present in every work. *ऐसा कोई भी कार्य नही है जो सर्वथा अच्छा है। ऐसा कोई भी कार्य नही जो सर्वथा बुरा है। अच्छे और बुरे गुण हर एक कार्य मै होते ही है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
0 votes
नमन्ति फलिता वृक्षा नमन्ति च बुधा जनाः। शुष्ककाष्ठानि मूर्खाश्च भिद्यन्ते न नमन्ति च॥ Trees with fruits bend, wise people become humble but dry wood and fool do not bend even when they are cut. *फले हुए वृक्ष झुक जाते हैं और बुद्धिमान लोग विनम्र हो जाते हैं पर सूखी लकड़ी और मूर्ख काटने पर भी नहीं झुकते॥* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
0 votes
पिता रक्षति कौमारे भर्ता रक्षति यौवने । पुत्रो रक्षति वार्धक्ये न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति ॥ In childhood, a woman is protected by her father, by her husband in her youth and by her sons in her old age. A woman should never be left alone to fend for herself. *इस श्लोक के अनुसार बालपन में यानी बचपन में स्त्री की रक्षा की जिम्मेदारी उसके पिता की होती है। जब स्त्री का विवाह हो जाता है तो उसकी रक्षा की पूरी जिम्मेदारी उसके पति की होती है। बुढ़ापे में स्त्री की संतानों को ही उसकी रक्षा करनी चाहिए। जिन घरों में इस बात का ध्यान रखा जाता है, वहां नारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है और घर का मान-सम्मान बना रहता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
0 votes
माता मित्रं पिता चेति स्वभावात् त्रतयं हितम् | कार्यकारणतश्चान्ये भवन्ति हितबुद्धय: || Mother, father and friend are the one who think about our interests (well-being) in a very much natural manner. [It's part of their nature ('swaBAv').They think this without expecting any thing in return.] All others having the similar feelings towards us do so due to their personal benefits or any other reason [It is not part of their nature ('swaBAv')]. *माता,पिता और मित्र ये तीनो कहने के लिए तो तीन होते है पर ये एक ही होते है क्योंकि ये तीनो ही अपने स्वभाव से हमेशा हित ही करते है।* *जब कोई विशेष कार्य या विशेष परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है तब ये तीनो ही हमें सही दिशा या सही बुद्धि देते है जो हमारे हित में होता है।।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सियाराम।
0 votes
चन्दनं शीतलं लोके चंदनादपि चंद्रमा: | चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगत: || sandalwood is pleasant (cool), moon (or moon light) is more pleasant than sandal. (but) company of a good person (sAdhu) is pleasant then both moon and sandal. *संसार में चन्दन को शीतल माना जाता है लेकिन चन्द्रमा चन्दन से भी शीतल होता है | अच्छे मित्रों का साथ चन्द्र और चन्दन दोनों की तुलना में अधिक शीतलता देने वाला होता है |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...