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सतां हि दर्शनं पुण्यं तीर्थभूताश्च सज्जनाः। कालेन फलते तीर्थम् सद्यः सज्जनसङ्गतिः॥ Seeing the saints makes us holy, saints are living temples. Sacred places benefit only at appropriate time but saints benefit immediately. *सज्जनों के दर्शन से पुण्य होता है, सज्जन जीवित तीर्थ हैं, तीर्थ तो समय आने पर ही फल देते हैं, सज्जनों का साथ तो तुरंत फलदायी होता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
posted Sep 12 by anonymous

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विवेक: सह संपत्या विनयो विद्यया सह। प्रभुत्वं प्रश्रयोपेतं चिन्हमेतन्महात्मनाम्॥ Right discrimination with money, humility with knowledge and protection with power are said to be the characteristics of great men. *संपत्ति के साथ विवेक, विद्या के साथ विनय और शक्ति के साथ दूसरों की सुरक्षा, ये महापुरुषों के लक्षण हैं।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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वने रणे शत्रुजलाग्निमध्ये महार्णवे पर्वतमस्तके वा। सुप्तं प्रमत्तं विषमस्थितं वा रक्षन्ति पुण्यानि पुरा कृतानि।। When one is trapped in the middle of a jungle ,in the war, in the midst of enemies, water/flood or fire, in the ocean or on the mountains; while sleeping, in unconsciousness, or in (any kind of) odd situation - The good deeds that one might have done in the past, protect oneself. *अरण्य में, रणभूमि में, शत्रु समुदाय में, जल, अग्नि, महासागर या पर्वत शिखर पर, सोते हुए, तथा उन्मत्त स्थिती में या प्रतिकूल परिस्थिती में। मनुष्य के पूर्व पुण्य उसकी रक्षा करतें हैं।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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प्रेरकः सूचकश्वैव वाचको दर्शकस्तथा । शिक्षको बोधकश्चैव षडेते गुरवः स्मृताः ॥ The one who infuses courage, gives instructions, shows the path for emancipation, punishes, and the one who is engaged in preaching is equal to that of a GURU (Teacher). *प्रेरणा देनेवाले, सूचना देनेवाले, (सच) बतानेवाले, (रास्ता) दिखाने वाले, शिक्षा देनेवाले, और बोध कराने वाले – ये सब (शिक्षक) गुरु समान है ।* *शिक्षक दिवस कि हार्दिक शुभकामनाएं* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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अत्यन्तकोपः कटुका च वाणी दरिद्रता च स्वजनेषु वैरं । नीचप्रसङ्ग: कुलहीनसेवा चिह्नानि देहे नरकस्थितानाम् ॥ Extreme of anger, harsh speech, poverty, enmity with relatives, association with evil men, service of people from not so good a family – these are the marks of people living in Hell *अत्यंत क्रोध करना अति कटु कठोर तथा कर्कश वाणीक होना, निर्धनता, अपने ही बंधु बांधवों से बैर करना, नीचों की संगति तथा कुलहीन की सेवा करना यह सभी स्थितियां पृथ्वी पर ही नरक भोगने का प्रमाण है*।’’ हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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वने रणे शत्रुजलाग्निमध्ये महार्णवे पर्वतमस्तके वा। सुप्तं प्रमत्तं विषमस्थितं वा रक्षन्ति पुण्यानि पुरा कृतानि।। When one is trapped in the middle of a jungle ,in the war, in the midst of enemies, water/flood or fire, in the ocean or on the mountains; while sleeping, in unconsciousness, or in (any kind of) odd situation - The good deeds that one might have done in the past, protect oneself. *अरण्य में, रणभूमि में, शत्रु समुदाय में, जल, अग्नि, महासागर या पर्वत शिखर पर, सोते हुए, तथा उन्मत्त स्थिती में या प्रतिकूल परिस्थिती में। मनुष्य के पूर्व पुण्य, उसकी रक्षा करतें हैं।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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