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सूर्य राहु केतु के गोचर का आपके जीवन पर प्रभाव,जानिए चंद्र राशि और लग्न कुंडली से Use code FS497, Get conect on Call

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सूर्य का कन्या राशि में गोचर- 16 september 2020 सूर्य के गोचर को सूर्य संक्रांति कहा जाता है। इस लिहाज़ से प्रत्येक वर्ष में कुल बारह संक्रांतियां पड़ती हैं। सितंबर के महीने में सूर्य देव राशि चक्र की पांचवी राशि सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में इस दिन को कन्या संक्रांति भी कहा जाता है। ग्रहों की चाल हमारे जीवन को काफ़ी हद तक प्रभावित करती है। सूर्य देव 16 सितंबर 2020 को 19 बज-कर 07 मिनट पर सिंह से कन्या राशि में गोचर करेंगे 17 अक्टूबर 07 बज-कर 05 बजे तक सूर्य देव इसी राशि में रहेंगे और उसके बाद तुला राशि में गोचर कर जाएंगे। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। इसके अलावा ज्योतिष में सूर्य को पिता का भी कारक माना गया है। जहाँ चंद्रमा, मंगल और गुरु सूर्य के मित्र हैं, वहीं राहू, केतु, शुक्र, और शनि से सूर्य की कुछ ख़ास नहीं बनती है और बुध से सूर्य का समभाव का रिश्ता होता है। कुंडली में सूर्य यदि शुभ स्थान पर हो तो इससे व्यक्ति को मान-सम्मान, सरकारी नौकरी और राजनीतिक जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है। वहीं सूर्य के अशुभ प्रभाव से इन्सान की कुंडली में पितृ दोष, नौकरी में असफलता, मान-सम्मान की कमी और नेत्र पीड़ा इत्यादि दुःख भोगने पड़ते हैं।   जन्म लग्न कुंडली या चंद्र राशि से आप पर सूर्य से लेकर राहु केतु ग्रह गोचर का क्या प्रभाव रहेगा ,ग्रहों के इस राशि परिवर्तन का अपने जीवन पर सटीक और व्यक्तिगत असर जानना चाहते हैं तो फ्यूचर स्टडी ऑनलाइन एप के प्रोफाइल पर जाकर आप मुझसे बात कर सकते हैं
posted 6 days ago by Deepika Maheshwary

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ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों का जन्म शुक्रवार को हुआ है उन पर माँ लक्ष्मी और शुक्र दोनों का शुभ प्रभाव देखने को मिलता है, क्योंकि शुक्रवार के स्वामी शुक्र देव है और इसकी देवी लक्ष्मी है। यही कारण है कि इस दिन जन्म लने वाले व्यक्ति भौतिक सुख सुविधाओं के आदी और शौकीन मिजाज होते है l शुक्रवार को जन्मे लोग जीवन को मौज मस्ती से व्यतीत करने के पक्षधर होते है। इस दिन जन्मे लोग विरोधियों को भी अपने पक्ष में करने की कला जानते है, इनमे एक अलग ही आकर्षण होता है। जिससे ये अपने मित्रों के दायरे में काफी लोकप्रिय होते है। शुक्रवार को जन्में लोग बड़े ही खुशमिजाज होते है और जिंदगी को एक जश्न की तरह जीते है। इनको कलात्मक चीजों और कला से गहरा लगाव होता है, इसलिये ये अपना कैरियर भी संगीत, लेखन, चित्रकला, फिल्म, फैशन, ब्यूटी इंडस्ट्री में बनाना पसंद करते है। ऐसे व्यक्ति आमतौर पर प्रसन्न दिखाई देते है। इनके चेहरे पर रौनक होती है।
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मेष लग्न वालों को अपने परिवार और बैंक बैलेंस का भी अच्छे से ध्यान रखना चाहिए। वृष लग्न वालों को अगले 1.5 वर्षों के लिए अपनी कमर कस लेनी चाहिए । यह समय आपके लिए काफी अच्छा नहीं होगा। इस दौरान मिथुन राशि वालों का खर्च आसमान पर रहेगा। विदेश यात्रा के लिए अच्छा समय है। कर्क लग्न वालों को कुछ प्रमुख अप्रत्याशित लाभ का अनुभव होगा। सिंह लग्न वालों के लिए नई जगह या घर बदलने के लिए अच्छा समय होगा . कन्या लग्न वालों को किसी भी कार्य को पूरा करने में बहुत मुश्किल होगी क्योंकि यह अंत में अटक सकता है। तुला लगन वालों को कुछ अप्रत्याशित भारी नुकसान हो सकता है। किसी भी साझेदारी को बनाते समय वृश्चिक लग्न वालों को बहुत सावधान रहना चाहिए। अपने साथी के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें। धनु लग्न वालों को शरीर , मन और आत्मा के स्तर पर कुछ सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एक सख्त दिनचर्या बनाने की कोशिश करनी होगी मकर लगना के जातक के लिए कुछ पाचन तंत्र की समस्या को विकसित हो सकती है। पेट की समस्या उत्पन्न हो सकती है। कुंभ लग्न वाले घर के अंदर किसी भी तरह के निर्माण कार्य को करने से बचें !नौकरी या प्रोफेशन बदलने का समय। मीन लगन के जातक अपने प्रयासों में सफल होंगे। यह अवधि पिछले 1.5 वर्षों से आपके पास मौजूद सभी पीड़ाओं को समाप्त कर देगी। लग्न जन्म कुंडली के हिसाब से आपके जीवन पर गोचर फल की विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आप अपनी कुंडली कॉल पर डिस्कस कर सकते हैं धन्यवाद!
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★ एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। ★ सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। ★ बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें। ★ जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं। ★ जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। ★ जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए। ★ संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं। ★ दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए। ★ यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं। ★ शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करना श्रेष्ठ है, ★ कूमड़ा-मतीरा-नारियल आदि को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं। ★ भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए। ★ देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें। ★ किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए। ★ एकादशी, अमावस्या, कृृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए । ★ बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं। ★ शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं। ★ शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुंुकुम नहीं चढ़ती। ★ शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा, देवी जी को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे। ★ अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावंे। ★ नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं। ★ विष्णु भगवान को चावल गणेश जी को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें। ★ पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें। ★ किंतु बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें। ★पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें। ★ सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे। ★ गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं। ★ पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है। ★ दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं। ★ सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए। ★ पूजन करनेवाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें। ★ पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा, धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें। ★ घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें।
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