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शनि होंगे 29 सितंबर से मकर राशि में मार्गी क्या होगा इसका प्रभाव

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29 सितंबर को न्याय के ग्रह कहे जाने वाले शनि अब सीधी चाल चल रहे हैं। 142 दिन बाद यानी 29 सितंबर को सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर वक्री से मार्गी हो रहे हैं। शनि के मार्गी होने से जिस राशि पर भी शनि के प्रभाव थे, वे काफी हद तक कम हो जाएंगे। आपको बता दें कि शनि 11 मई 2020 को वर्की हुए थे। इससे पहले 24 जनवरी को शनि ने धनु से मकर राशि में गोचर किया था। आपको बता दें कि शनि का मार्गी होना एक बड़ी घटना है। शनि के मार्गी होने से मिथुन, कन्या, कर्क, धनु और वृश्चिक राशि वालों का फायदा होगा। शनि ढ़ाई साल में एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं। इससे शनि की साढ़े साती और ढ़ैया शुरू होती है। इस वक्त मिथुन और तुला राशि वालों पर शनि की ढैया और धनु मकर कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती चल रही है For more information contact- Website :https://www.futurestudyonline.com/astro-details/497

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शनि होंगे 29 सितंबर से मकर राशि में मार्गी क्या होगा इसका प्रभाव
posted Sep 29, 2020 by Deepika Maheshwary

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जातक की कुंडली में होने वाले शनि दोष का मतलब होता है कि यदि किसी जातक की कुंडली में शनि ऐसी जगह पर विराजमान हो, जहां वह जातक के लिए कष्टदायक व नुकसानदायक हो। शनि धीमी चाल से चलते हैं, इसीलिए इनका प्रभाव भी जातक पर लम्बे समय के लिए रहता हैं। जैसे की शनि की साढ़ेसाती (साढ़े सात साल), शनि की ढैय्या (ढाई साल) आदि। वहीं शनि दोष का प्रभाव इतना बुरा होता है कि आसमान पर बैठा व्यक्ति जमीन पर आ जाता है। इसीलिए शनि को क्रूर व् दुष्ट ग्रह भी माना जाता है। लेकिन असल में यह लोगो को केवल उनके बुरे कर्मों के लिए ही दण्डित करते हैं और प्रसन्न होने पर जातक को आसमान की बुलंदियों पर भी पहुंचा सकते हैं। कुंडली में होने वाले शनि दोष से बचने के उपाय... यदि आप भी कुंडली में शनि दोष से परेशान हैं, तो कुछ आसान तरीकों का इस्तेमाल करके आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। शनिदेव को प्रसन्न करें यह उपाय... कोई भी अनुचित कार्य न करें, चूकिं शनि को न्याय का देवता माना जाता है। अत: यदि आप किसी प्रकार के बुरे कर्मों में शामिल नहीं होते हैं, तो माना जाता है कि शनि अपनी दशा आने पर भी ऐसे लोगों पर न्याय के अनुसार दया बरसाते हैं, न कि कोई दंड देते हैं। इसके अतिरिक्त यदि आपकी कुंडली में ही शनि परेशानी के कारक हैं, या शनि की दशा आपको काफी परेशान कर रही है तो इससे बचने के लिए... शनिवार को करें ये उपाय... : प्रत्येक शनिवार को शनि मंदिर में जाएं। : शनि जी की उपासना करें और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना करें। : शनिवार के दिन राई, तेल, उड़द, काला कपड़ा, जूते आदि का दान करना चाहिए। : लोहे की चीजें शनिवार को न खरीदें। : शनि मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। : शनिवार के दिन कटोरी में सरसों का तेल डालकर उसमें अपना चेहरा देखें और उस तेल को दान करें। : शनिवार के दिन अपनी गलतियों के लिए शनिदेव से माफ़ी मांगे। : इसके साथ ही शनि के रत्न नीलम को कभी भी किसी जानकार के कहे बिना धारण न करें, यदि कोई जानकार नीलम धारण करने की सलाह भी दे तो भी उनसे पूरी विधि के साथ ही धारण करने का समय, दिन व किन मंत्रों के साथ धारण करनी है, ये पूरी तरह से समझ कर ही इसे पहनें। हनुमान जी की अराधना शनिवार के दिन आपको हनुमान मंदिर में जाना चाहिए और हनुमान जी के सामने लाल रंग के कपडे पहनकर खड़े होना चाहिए। हाथ जोड़कर हनुमान जी की अराधना करें व हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा हर शनिवार को करें ऐसा करने से भी कुंडली में शनि दोष को खत्म करने में मदद मिलती है। शनि दोष को कम करने के लिए करें पीपल की पूजा पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाएं। खासकर शनिवार के दिन ऐसा जरूर करें। पीपल के साथ शमी के पेड़ की भी पूजा करें। यह दोनों उपाय शनि दोष के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं। शिव उपासना: देती है शनि के प्रकोप से राहत नियमित रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। भोलेबाबा की अराधना करें। शिव मंत्रों का उच्चारण करें। ऐसा करने से भी जातक को कुंडली में शनि की दशा को सही करने में मदद मिलती है। पश्चिम दिशा में करें यह उपाय नियमित शाम के समय पश्चिम दिशा की और एक दीपक जरूर जलाएं। और उसके बाद शनि मंत्रो का उच्चारण करें। इससे भी आप पर शनि की कृपा बने रहने में मदद मिलती है। कौवे को रोटी नियमित कौवे को रोटी खिलाएं। चीटियों को आटा खिलाएं। दरवाज़े पर आये गरीब को भूखे पेट न भेजें। यह सभी कर्म भी शनि दोष को कम करने में मदद करते हैं।
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आपकी कुण्डली में चन्द्रमा वृश्चिक राशि में स्थित है, जो मंगल द्वारा शासित है तथा यह डंक मारने वाले कीट को चिन्हित करता है। यह स्थिर, नकारात्मक तथा जलीय राशि है। चन्द्रमा यहां ग्रसित है। आपमें ऊँची आकांक्षा होगी तथा आप विजय प्राप्त करने के जोश से भरे होंगे। आप परिश्रमी, ओजस्वी, अदम्य साहसी तथा सहनशील होंगे। आपमें शासन करने का गुण होगा। आप भाग्यशाली और आरामपरस्त होंगे। आपके कर्मचारी या अनुयायी बहुत निष्ठावान तथा विश्वसनीय होंगे। यदि चन्द्रमा का प्रभाव अशुभ है, तो आपका स्वभाव अहंकारी तथा दम्भी हो सकता है। आपकी छवि अत्याचारी की हो सकती है, जो क्रूरता की हद को पार कर सकता है। परन्तु, यदि चन्द्रमा का प्रभाव शुभ है, तो यह आपके विचारों को सकारात्मक और उत्पादक तथा आपके मनोयोग को आध्यात्मिक बना देगा। अपनी उत्कृष्ट विशेषताओं का सही उपयोग करने से आपके शौर्य में वृद्धि होगी। आपका स्वभाव कुछ हिंसात्मक और क्रोधी हो सकता है, जिसे यदि समय से पहले नहीं नियंत्रित किया गया, तो भयंकर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। आपके आवेगी होकर किसी गलत प्रेम-प्रसंग में फंसने की संभावना हो सकती है। वृश्चिक राशि में चन्द्रमा की उपस्थिति से आप आत्मनिर्भर तथा दृढ़ निश्चयी होंगे। आप अपनी रक्षा स्वयं कर सकते है। आप विनम्र तथा कम बोलने वाले होंगे तथा किसी भी लम्बी कहानी को काट कर छोटा कर देंगे। रूढि़वादी तथा परिवर्तनशील होने के कारण आप अपने रास्ते या तरीकों को बदलने में असक्षम होंगे, जिसकी वजह से कुछ लोग आपको हठी समझेंगे। यदि कोई आपका विरोध करता है, तो आप कभी माफ न करने वाले तथा प्रतिशोध लेने वाले होंगे। यदि चन्द्रमा का प्रभाव शुभ है, तो आपका वैवाहिक जीवन फलदायक तथा खुशहाल होगा। यदि चन्द्रमा का प्रभाव अशुभ है तो आपका वैवाहिक जीवन खुशहाल नहीं हो सकता है। आप अपनी संतानों - खासकर पहली संतान के कारण परेशन हो सकते हैं। आपको रहस्यपूर्ण या उससे सम्बन्धित विषयों में रूचि हो सकती है। छोटी ही उम्र में परिवार के किसी सदस्य को असमय खोने के कारण धार्मिक क्रियाकलापों में आपकी रूझान हो सकती है। गुण: आपके कार्य और विचार रचनात्मक होंगे और उनमें कला की झलक होगी। अपनी अन्तर्निहित ऊर्जा के कारण आप सक्रिय और स्फूर्तिवान होंगे। िसंह की भांति आप किसी चीज से न डरने वाले और साहसी होंगे। आप उदार एवं खुशमिजाज होंगे। अपने बेहतरीन प्रबंधन कौशल के कारण चीजों को व्यवस्थित करने में आप दक्ष होंगे। आप गंभीर एवं संवेदनशील होंगे। अपने मित्रों तथा रिश्तेदारों से आपको प्रेम होगा, आप उनको महत्व देंगे तथा उनका ख्याल रखेंगे। अवगुण: आपकी सहन शक्ति कमजोर हो सकती है। आप छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा कर सकते हैं। आप किसी से न डरने वाले, घमंडी या अहंकारी हो सकते हैं। आप दूसरों पर अपनी मर्जी थोपने वाले हो सकते हैं। आपको कोई आदेश दे, यह आपको पसन्द नहीं हो सकता है। विशेष लक्षण: अपने खुल दिमाग और विचारों तथा परस्थिितियों के साथ सामंजस्य बिठाने की प्रवृति के कारण आप समाज के हर वर्ग के लोगों, चाहे वे ऊँचे या निम्न तबके के हों, के साथ आप आसानी से घुल-मिल सकते हैं। आप उदार होंगे। आप उत्तम कामों एवं कर्मियों की हमेशा प्रशंसा करेंगे और दूसरों से भी उम्मीद करेंगे की किसी की उपलब्धियों के लिए उसकी सराहना करेंगे। आप पुरानी पारिवारिक परम्पराओं को बनाए रखने में विश्वास करेंगे। कभी-कभी यह आपके परिवार में अप्रसन्नता का कारण बन सकती है। रोजगार: आप किसी विभाग में ऊँचे पद पर हो सकते हैं। आप कोई राजनीतिक नेता, वरिष्ठ अधिकारी, प्रबन्धक या राजदूत हो सकते हैं। आप विज्ञान या तकनीकी सम्बन्धी किसी अनुसंधान वाले कार्यों में भी संलग्न हो सकते हैं। आपको संगमरमर, लकड़ी आदि से काफी लाभ प्राप्त हो सकता है या जौहरी, भूगर्भशास्त्री, शिक्षक, अभिनेता या कलाकार के रूप में काफी नाम तथा यश अर्जित कर सकते हैं।
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सभी ग्रहों में से शुक्र ग्रह को सबसे चमकीला ग्रह माना जाता है, जो प्रेम का प्रतीक होता है। जहाँ शास्त्रों अनुसार शुक्र को असुरों के देवता शुक्राचार्य बताया गया है, तो वहीं ज्योतिष विज्ञान में इसे स्त्री गृह माना गया है। शुक्र मनुष्य की कामुकता, उसके सौंदर्य, भौतिक सुख और ऐश्वर्य का कारक प्राप्त होता है। जिसके कारण जिस भी जातक की कुंडली में शुक्र शुभ स्थिति में या मजबूत होता है तो उसके परिणामस्वरूप जातक व्यक्तित्व से आकर्षक, सुंदर और मनमोहक होता है। शुक्र के सकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति जीवनभर सुखी रहता है। इसीलिए शुक्र को सुंदरता और सुख का कारक माना जाता है। कुंडली में शुक्र की स्थिति का प्रभाव सौरमंडल के सभी ग्रहों में से शुक्र की चमक एवं शान सबसे अलग व निराली मानी जाती है, जिस कारण हर किसी की राशि में शुक्र की स्थिति का खासा महत्व होता है। इसके विपरीत जिस भी कुंडली में शुक्र निर्बल या कमज़ोर होता है तो ज्योतिषी अनुसार वो व्यक्ति शुक्र की आराधना कर उसे अपनी राशि में बलवान बनाकर उनसे सुख व ऐश्वर्य की प्राप्ति कर सकता है। शुक्र की शान्ति के लिए करें कुछ विशेष उपाय जैसा सभी जानते हैं कि आज हम अपने जीवन में सुख-सुविधाओं की वस्तुओं पर अधिक खर्च करते हैं, जिसका संबंध सीधे तौर पर शुक्र से होता है। इसलिए ही कहा गया है कि यदि अपने स्थान परिवर्तन के दौरान शुक्र की स्थिति किसी भी कुंडली में खराब या नकारात्मक हो जाती है या कोई भी अपने जीवन को ऐश्वर्य और आराम से भरपूर बनाना चाहते हैं तो उस व्यक्ति को विशेष तौर से शुक्र के कारगर उपाय करने चाहिए। शुक्र का गोचर ऐसे में शुक्र देव हमेशा की तरह एक बार पुनः अपना राशि परिवर्तन करते हुए अपने शत्रु ग्रहण सूर्य की राशि सिंह से निकलकर अपने मित्र ग्रह बुध की राशि कन्या में अपना स्थान परिवर्तन करने वाले हैं। जिसके चलते शुक्र मंगलवार, 10 सितंबर 2019 को 01:24 बजे कन्या राशि में गोचर करेगा जो वहां 4 अक्टूबर 2019 तक इसी राशि में स्थित रहेगा। इसलिए इससे करीब-करीब हर राशि प्रभावित होंगी। अशुभ शुक्र के लिए अवश्य करें ये काम वैदिक ज्योतिष में अशुभ शुक्र की शांति के लिए जातक को उससे संबंधित कारगर उपाय करने की सलाह दी गई है। अपनी राशि में शुक्र की मज़बूती के लिए कुछ विशेष वस्तुओं का दान करना चाहिए। जिसमें चाँदी, चावल, दूध, श्वेत वस्त्र आदि शामिल होते हैं। इसके अलावा शुक्र के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए जातक को हर शुक्रवार दुर्गाशप्तशती का पाठ करना भी उचित माना गया है। कन्या पूजन एवं शुक्रवार का व्रत करने से भी शुक्र के शुभ फलों की प्राप्ति होती है। शुक्र को बली या मजबूत करने के लिए जातक को अच्छी क्वालिटी का हीरा धारण करना चाहिए। इसके साथ ही यदि किसी कारणवश हीरा पहनना संभव न हो तो व्यक्ति अर्किन, सफेद मार्का, ओपल, स्फटिक आदि किसी भी शुभ वार, शुभ नक्षत्र और शुभ लग्न में धारण कर सकता है। हर शुक्रवार शुक्र देव की पूजा के दौरान शुक्र के बीज मंत्र का जाप करना भी शुभ माना गया है ॐ शुं शुक्राय नमः। ॐ हृीं श्रीं शुक्राय नमः। शुक्र की शान्ति के लिए कारगर तांत्रिक उपाय काली चींटियों को चीनी खिलाना शुक्र से शुभ फलों की प्राप्ति हेतु बेहद कारगर होता है। शुक्रवार के दिन सफेद गाय को आटा खिलाना भी शुभ होता है। शुक्र को प्रबल बनाने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करें जिसकी एक आँख खराब हो। 10 वर्ष से कम आयु की कन्याओं का हर शुक्रवार पूजन करें। घर के फर्श पर और रसोई घर में सफेद पत्थर लगाएँ। किसी कन्या के विवाह में कन्यादान से भी शुक्र के शुभ फलों की प्राप्ति होती है। शुक्र देव से जुड़े कुछ विशेष मंत्र जीवन में आर्थिक संपन्नता, प्रेम और आकर्षण में वृद्धि हेतु जातक को शुक्र के बीज मंत्र “ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः” का उच्चारण करने की सलाह दी जाती है। इस मन्त्र का कम से कम 16000 बार उच्चारण करने से मान्यता अनुसार शुक्र के गोचर के दौरान उसके अशुभ प्रभावों से मुक्ति पाई जा सकती है। इसके अलावा देश-काल-पात्र सिद्धांत के अनुसार शुक्र के अशुभ प्रभावों को कम करने और राशि में उसके शुभ फलों की प्राप्ति के लिए इस बीज मंत्र का 64000 बार जाप करना चाहिए। इसके अलावा शुक्र को शांत करने के लिए “ॐ शुं शुक्राय नमः।” मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। *********
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