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आपके जन्म कुंडली पर शनि के मार्गी होने का कैसा रहेगा फल

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ज्योतिषशास्त्र में व्रकी का अर्थ उल्टा और मार्गी का अर्थ सीधी चाल चलना। वक्री अवस्था में ज्यादतर ग्रह नकारात्मक प्रभाव डालते हैं जबकि मार्गी होने पर जातकों के जीवन पर इसका प्रभाव सकारात्मक रूप से पड़ता है। ऐसे में 29 सितंबर से शनि की मार्गी चाल से कई जातकों के जीवन में चल रही बाधाएं कम होंगी और उन्हें किस्मत का साथ मिलना आरंभ हो जाएगा। शनि 29 सितंबर 2020 के बाद मकर राशि में रहते हुए सीधी चाल यानी मार्गी होकर भ्रमण करेंगे। शनि की साढ़ेसाती धनु, मकर और कुंभ राशि पर है। शनि की साढ़ेसाती तीन चरणों में होती है। पहला, दूसरा और तीसरा। धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण है, मकर राशि पर दूसरा चरण और कुंभ राशि पर पहला चरण चल रहा है। शनि की साढ़ेसाती चलने पर कई तरह की परेशानियां आने लगती है। समय पर काम पूरा नहीं होता है। बीमारियां घेरे रहती हैं और आर्थिक संकट बना रहता है।

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आपके जन्म कुंडली पर शनि के मार्गी होने का कैसा रहेगा फल
posted Sep 29, 2020 by Deepika Maheshwary

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सूर्य का कन्या राशि में गोचर- 16 september 2020 सूर्य के गोचर को सूर्य संक्रांति कहा जाता है। इस लिहाज़ से प्रत्येक वर्ष में कुल बारह संक्रांतियां पड़ती हैं। सितंबर के महीने में सूर्य देव राशि चक्र की पांचवी राशि सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में इस दिन को कन्या संक्रांति भी कहा जाता है। ग्रहों की चाल हमारे जीवन को काफ़ी हद तक प्रभावित करती है। सूर्य देव 16 सितंबर 2020 को 19 बज-कर 07 मिनट पर सिंह से कन्या राशि में गोचर करेंगे 17 अक्टूबर 07 बज-कर 05 बजे तक सूर्य देव इसी राशि में रहेंगे और उसके बाद तुला राशि में गोचर कर जाएंगे। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। इसके अलावा ज्योतिष में सूर्य को पिता का भी कारक माना गया है। जहाँ चंद्रमा, मंगल और गुरु सूर्य के मित्र हैं, वहीं राहू, केतु, शुक्र, और शनि से सूर्य की कुछ ख़ास नहीं बनती है और बुध से सूर्य का समभाव का रिश्ता होता है। कुंडली में सूर्य यदि शुभ स्थान पर हो तो इससे व्यक्ति को मान-सम्मान, सरकारी नौकरी और राजनीतिक जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है। वहीं सूर्य के अशुभ प्रभाव से इन्सान की कुंडली में पितृ दोष, नौकरी में असफलता, मान-सम्मान की कमी और नेत्र पीड़ा इत्यादि दुःख भोगने पड़ते हैं।   जन्म लग्न कुंडली या चंद्र राशि से आप पर सूर्य से लेकर राहु केतु ग्रह गोचर का क्या प्रभाव रहेगा ,ग्रहों के इस राशि परिवर्तन का अपने जीवन पर सटीक और व्यक्तिगत असर जानना चाहते हैं तो फ्यूचर स्टडी ऑनलाइन एप के प्रोफाइल पर जाकर आप मुझसे बात कर सकते हैं
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ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों का जन्म शुक्रवार को हुआ है उन पर माँ लक्ष्मी और शुक्र दोनों का शुभ प्रभाव देखने को मिलता है, क्योंकि शुक्रवार के स्वामी शुक्र देव है और इसकी देवी लक्ष्मी है। यही कारण है कि इस दिन जन्म लने वाले व्यक्ति भौतिक सुख सुविधाओं के आदी और शौकीन मिजाज होते है l शुक्रवार को जन्मे लोग जीवन को मौज मस्ती से व्यतीत करने के पक्षधर होते है। इस दिन जन्मे लोग विरोधियों को भी अपने पक्ष में करने की कला जानते है, इनमे एक अलग ही आकर्षण होता है। जिससे ये अपने मित्रों के दायरे में काफी लोकप्रिय होते है। शुक्रवार को जन्में लोग बड़े ही खुशमिजाज होते है और जिंदगी को एक जश्न की तरह जीते है। इनको कलात्मक चीजों और कला से गहरा लगाव होता है, इसलिये ये अपना कैरियर भी संगीत, लेखन, चित्रकला, फिल्म, फैशन, ब्यूटी इंडस्ट्री में बनाना पसंद करते है। ऐसे व्यक्ति आमतौर पर प्रसन्न दिखाई देते है। इनके चेहरे पर रौनक होती है।
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