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कायेन वाचा मनसेंद्रियौर्वा । बुदध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात् । करोमि यद्यत् सकलं परस्मै । नारायणायेति समर्पयामि ।। Whatever I do with my body, speech, mind, limbs, intellect or my inner self either intentionally or unintentionally, I dedicate it all to the supreme lord Narayan *मैं मेरे वाच, काच, मन, अंग और बुद्धि से अनजाने में या तो स्वेच्छा से जो कुछ भी करु, नारायण को समर्पित करुंगा।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
posted Oct 15 by anonymous

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दानेन तुल्यो विधिरास्ति नान्यो लोभोच नान्योस्ति रिपु: पॄथिव्या | विभूषणं शीलसमं च नान्यत् सन्तोषतुल्यं धनमस्ति नान्यत् || No ritual as sacred as charity. No enemy like greed. No ornament like chastity. No wealth like contentment. *दान के समान कोई यज्ञ नहीं, लालच के समान कोई शत्रु नहीं , शील (चरित्र) के समान कोई आभूषण नहीं, और संतोष के समान कोई धन नहीं।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्। सोत्साहस्य च लोकेषु न किंचिदपि दुर्लभम्॥ Enthusiasm is the power of noble men. Nothing is as powerful as enthusiasm. Nothing is difficult in this world for an enthusiastic person. *उत्साह श्रेष्ठ पुरुषों का बल है, उत्साह से बढ़कर और कोई बल नहीं है। उत्साहित व्यक्ति के लिए इस लोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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*अनुसूयुः कृतप्रज्ञः शोभनान्याचरन् सदा।* *नकृच्छं महदाप्नोति सर्वत्र च विरोचते॥* भावार्थ : *जो व्यक्ति किसी की निंदा नहीं करता, केवल गुणों को देखता है, वह बुद्धिमान सदैव अच्छे कार्य करके पुण्य कमाता है और सब लोग उसका सम्मान करते हैं।* *The person who does not condemn anyone, sees only the qualities, the wise always earns virtue by doing good deeds and everyone honors him.* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम ।
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परवाच्येषु निपुण: सर्वो भवति सर्वदा। आत्मवाच्यं न जानीते जानन्नपि च मुह्मति॥ Anybody is an expert to comment about others, anytime. But nobody knows about himself; even if, he knows, he knows incorrectly. *दूसरों के बारे में बोलने में सभी हमेशा ही कुशल होते हैं पर अपने बारे में नहीं जानते हैं, यदि जानते भी हैं तो गलत ही जानते है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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दुर्लभं त्रयमेवैतत् देवानुग्रहहेतुकम्। मनुष्यत्वं मुमुक्षुत्वं महापुरूषसंश्रय:॥ These three are very difficult to get and can be got only by the grace of the gods - human birth, desire for salvation and the company of the nobles. *यह तीन दुर्लभ हैं और देवताओं की कृपा से ही मिलते हैं - मनुष्य जन्म, मोक्ष की इच्छा और महापुरुषों का साथ।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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