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कायेन वाचा मनसेंद्रियौर्वा । बुदध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात् । करोमि यद्यत् सकलं परस्मै । नारायणायेति समर्पयामि ।। Whatever I do with my body, speech, mind, limbs, intellect or my inner self either intentionally or unintentionally, I dedicate it all to the supreme lord Narayan *मैं मेरे वाच, काच, मन, अंग और बुद्धि से अनजाने में या तो स्वेच्छा से जो कुछ भी करु, नारायण को समर्पित करुंगा।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
posted Oct 15, 2020 by anonymous

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संपूर्णकुंभो न करोति शब्दं अर्धोघटो घोषमुपैति नूनम् । विद्वान्कुलीनो न करोति गर्वं जल्पन्ति मूढास्तु गुणैर्विहीनाः ॥ A fully filled water container will not create much noise as compared to the half filled one. (When the containers are given some jirk the water inside it will also move and create some noise.). Similarly 'Vidvaan' (Intelligent) people always remain calm and will not have any mis-placed pride as opposed to the people who know very less but always keep talking. *जिस प्रकार से आधा भरा हुआ घड़ा अधिक आवाज करता है पर पूरा भरा हुआ घड़ा जरा भी आवाज नहीं करता उसी प्रकार से विद्वान अपनी विद्वता पर घमंड नहीं करते जबकि गुणविहीन लोग स्वयं को गुणी सिद्ध करने में लगे रहते हैं।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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शैले शैले न माणिक्यं मौक्तिकं न गजे गजे। साधवो न हि सर्वत्र चन्दनं न वने वने॥ Not every mountain has gems in them, and not every elephant has pearl on its forehead. Saints are not found everywhere and not every forest has sandal trees. *सभी पर्वतों में मणियाँ नहीं होती, सभी हाथियों के मस्तक में मोती नहीं होते, साधु पुरुष सभी स्थानों में नहीं मिलते और चन्दन सभी वनों में नहीं पाया जाता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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पिता रक्षति कौमारे भर्ता रक्षति यौवने । पुत्रो रक्षति वार्धक्ये न स्त्री स्वातन्त्र्यमर्हति ॥ In childhood, a woman is protected by her father, by her husband in her youth and by her sons in her old age. A woman should never be left alone to fend for herself. *इस श्लोक के अनुसार बालपन में यानी बचपन में स्त्री की रक्षा की जिम्मेदारी उसके पिता की होती है। जब स्त्री का विवाह हो जाता है तो उसकी रक्षा की पूरी जिम्मेदारी उसके पति की होती है। बुढ़ापे में स्त्री की संतानों को ही उसकी रक्षा करनी चाहिए। जिन घरों में इस बात का ध्यान रखा जाता है, वहां नारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है और घर का मान-सम्मान बना रहता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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मृगा मृगैः संगमुपव्रजन्ति गावश्च गोभिस्तुरगास्तुरंगैः। मूर्खाश्च मूर्खैः सुधयः सुधीभिः समानशीलव्यसनेषु सख्यं॥ Deers stay with deers, cows stay with cows, horses stay with horses, fools stay with fools and wise men stay with wise. Friendship in people with similar character and habits is natural. *मृग मृगों के साथ, गाय गायों के साथ, घोड़े घोड़ों के साथ, मूर्ख मूर्खों के साथ और बुद्धिमान बुद्धिमानों के साथ रहते हैं; समान आचरण और आदतों वालों में ही मित्रता होती है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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न चोराहार्यम् न च राजहार्यम्, न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि। व्यये कृते वर्धत एव नित्यं, विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥ It cannot be stolen by thieves, nor can it be taken away by the kings. It cannot be divided among brothers, it does not have a weight. If spent regularly, it always keeps growing. The wealth of knowledge is the most superior wealth of all! *जिसे न चोर चुरा सकते हैं, न राजा हरण कर सकता है, न भाई बँटा सकते हैं, जो न भार स्वरुप ही है, जो नित्य खर्च करने पर भी बढ़ता है, ऐसा विद्या धन सभी धनों में प्रधान है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम
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