top button
    Futurestudyonline Community

Devi Durga sapatsati paath

0 votes
66 views
*श्री दुर्गासप्तशती पाठ* (हिंदी अनुवाद सहित सम्पूर्ण) (द्वादशोध्याय) ।।ॐ नमश्चण्डिकायै।। 〰️〰️

References

Devi , Durga
posted Oct 25, 2020 by Rakesh Periwal

  Promote This Article
Facebook Share Button Twitter Share Button Google+ Share Button LinkedIn Share Button Multiple Social Share Button

Related Articles
0 votes
हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क: 1- कान छिदवाने की परम्परा: भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है। वैज्ञानिक तर्क- दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है। 2-: माथे पर कुमकुम/तिलक महिलाएं एवं पुरुष माथे पर कुमकुम या तिलक लगाते हैं। वैज्ञानिक तर्क- आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है। कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है। इससे चेहरे की कोश‍िकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता l 3- : जमीन पर बैठकर भोजन.. भारतीय संस्कृति के अनुसार जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात होती है। वैज्ञानिक तर्क- पलती मारकर बैठना एक प्रकार का योग आसन है। इस पोजीशन में बैठने से मस्त‍िष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त अगर दिमाग शांत हो तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस पोजीशन में बैठते ही खुद-ब-खुद दिमाग से एक सिगनल पेट तक जाता है, कि वह भोजन के लिये तैयार हो जाये। 4- : हाथ जोड़कर नमस्ते करना, जब किसी से मिलते हैं तो हाथ जोड़कर नमस्ते अथवा नमस्कार करते हैं। वैज्ञानिक तर्क- जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उन पर दबाव पड़ता है। एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है, ताकि सामने वाले व्यक्त‍ि को हम लंबे समय तक याद रख सकें। दूसरा तर्क यह कि हाथ मिलाने (पश्च‍िमी सभ्यता) के बजाये अगर आप नमस्ते करते हैं तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते। अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा। 5-: भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से, जब भी कोई धार्मिक या पारिवारिक अनुष्ठान होता है तो भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से होता है। वैज्ञानिक तर्क- तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं। इससे पाचन तंत्र ठीक तरह से संचालित होता है। अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है। इससे पेट में जलन नहीं होती है। 6-: पीपल की पूजा, तमाम लोग सोचते हैं कि पीपल की पूजा करने से भूत-प्रेत दूर भागते हैं। वैज्ञानिक तर्क- इसकी पूजा इसलिये की जाती है, ताकि इस पेड़ के प्रति लोगों का सम्मान बढ़े और उसे काटें नहीं। पीपल एक मात्र ऐसा पेड़ है, जो रात में भी ऑक्सीजन प्रवाहित करता हl 7-: दक्ष‍िण की तरफ सिर करके सोना, दक्ष‍िण की तरफ कोई पैर करके सोता है, तो लोग कहते हैं कि बुरे सपने आयेंगे, भूत प्रेत का साया आ जायेगा, आदि। इसलिये उत्तर की ओर पैर करके सोयें। वैज्ञानिक तर्क- जब हम उत्तर की ओर सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है। शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा दिमाग की ओर संचारित होने लगता है। इससे अलजाइमर, परकिंसन, या दिमाग संबंधी बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। यही नहीं रक्तचाप भी बढ़ जाता है। 8-सूर्य नमस्कार, हिंदुओं में सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते हुए नमस्कार करने की परम्परा है। वैज्ञानिक तर्क- पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आंखों में पहुंचती हैं, तब हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है। 9-सिर पर चोटी, हिंदू धर्म में ऋषि मुनी सिर पर चुटिया रखते थे। आज भी लोग रखते हैं। वैज्ञानिक तर्क- जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थ‍िर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता, सोचने की क्षमता बढ़ती है। 10-व्रत रखना, कोई भी पूजा-पाठ या त्योहार होता है, तो लोग व्रत रखते हैं। वैज्ञानिक तर्क- आयुर्वेद के अनुसार व्रत करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से शरीर का डीटॉक्सीफिकेशन होता है, यानी उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से कैंसर का खतरा कम होता है। हृदय संबंधी रोगों, मधुमेह, आदि रोग भी जल्दी नहीं लगते। 11-चरण स्पर्श करना , हिंदू मान्यता के अनुसार जब भी आप किसी बड़े से मिलें, तो उसके चरण स्पर्श करें। यह हम बच्चों को भी सिखाते हैं, ताकि वे बड़ों का आदर करें। वैज्ञानिक तर्क- मस्त‍िष्क से निकलने वाली ऊर्जा हाथों और सामने वाले पैरों से होते हुए एक चक्र पूरा करती है। इसे कॉसमिक एनर्जी का प्रवाह कहते हैं। इसमें दो प्रकार से ऊर्जा का प्रवाह होता है, या तो बड़े के पैरों से होते हुए छोटे के हाथों तक या फिर छोटे के हाथों से बड़ों के पैरों तक। 12-क्यों लगाया जाता है सिंदूर, शादीशुदा हिंदू महिलाएं सिंदूर लगाती हैं। वैज्ञानिक तर्क- सिंदूर में हल्दी, चूना और मरकरी होता है। यह मिश्रण शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करता है। चूंकि इससे यौन उत्तेजनाएं भी बढ़ती हैं, इसीलिये विधवा औरतों के लिये सिंदूर लगाना वर्जित है। इससे स्ट्रेस कम होता है। 13- तुलसी के पेड़ की पूजा, तुलसी की पूजा करने से घर में समृद्ध‍ि आती है। सुख शांति बनी रहती है। वैज्ञानिक तर्क- तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। लिहाजा अगर घर में पेड़ होगा, तो इसकी पत्त‍ियों का इस्तेमाल भी होगा और उससे बीमारियां दूर होती हैं।
0 votes
*नवदुर्गा (नवरात्रि) में माँ दुर्गा के प्रथम स्वरूप श्री शैलपुत्री जी की उपासना विधि* 〰〰
0 votes

राहु केतु का राशि परिवर्तन और गोचर फल राहु वृष राशि में और वृश्चिक केतु के घेरे में कुंडली मे राहु का गोचर जन्म के गोचर से कुछ अलग ही माना जाता है जन्म के समय का राहु तो व्यक्ति के अन्दर अपनी शक्ति के अनुसार सम्बन्धित भाव और राशि तथा ग्रहों का प्रभाव अजीवन देता है लेकिन गोचर का राहु अपने अनुसार कुछ अलग से ही अपने असर को प्रदान करता है। एक प्रसिद्धि आदमी बदनामी को झेलने लगता है और एक बदनाम आदमी प्रसिद्ध हो जाता है यह सब राहु का खेल ही माना जाता है। कहा जाता है कि नशा आदमी को या तो बरबाद कर देता है या इतना आबाद कर देता है कि उसकी सात पुस्तो में कोई आबाद या बरबाद नही हुआ होता है। आदमी को कई प्रकार के नशे झेलने को मिलते है,कुंडली के बारह भावो के अनुसार नसे भी बारह भावो से जुडे होते है बदलती है तो केवल प्रकृति राशि ग्रहो के असर और ग्रहो की द्रिष्टि से नशे की लत बदल जाती है।मानसिक भ्रम देने का कारक राहु है और केतु साधन देने के लिये माना जाता है,जिस प्रकार का भ्रम पैदा होना है उसके लिये साधन देने का कार्य केतु करता है,बिना केतु के राहु असमर्थ है और बिना राहु के केतु बेकार है।गुरु के कुंडली मे गोचर के अनुसार यह अपनी मर्यादा को लेकर चलते है और शनि के इशारे से अपने कार्यों को पूरा करते है। अक्सर जब राहु राशि मे हो और केतु सप्तम मे हो तो बडे बडे अनर्थ करवा देता है। वर्तमान मे वृष राशि पर राहु का गोचर चल रहा है और वृश्चिक राशि पर केतु का गोचर चल रहा है। शनि का योगात्मक रूप राहु केतु तथा इन दोनो राशियों के लिये बरबाद करने के लिये और मिट्टी मे मिलाने के लिये अपने प्रभाव को देने लगा है। बाकी के ग्रह भी राहु केतु से नही बचते है और शनि भी अपनी शिफ़्त से सभी ग्रहों को कोई न कोई कारण देकर उसी प्रकार के कार्य करवाने के लिये अपनी गति को प्रदान कर रहा है जिससे राहु केतु के घेरे मे आकर उसी ग्रह के अनुसार अपनी स्थिति को इन दोनो स्थितियों से मुलाकात करवायी जा सके। गुरु परिवार समाज धर्म और विद्या को देने वाला है सामाजिक ज्ञान और इसी प्रकार के कारणो को प्रदान करने वाला है। जब गुरु मार्गी होता है तो वह अपने स्वभाव से सभी भावो को राशियों को अपनी गति को देकर उपरोक्त कारणो पर चलने या उनसे लाभ हानि देने के लिये अपने प्रभाव को देता है तथा वक्री होकर अपने प्रभाव से जो भी उपरोक्त कारण है उनके अन्दर उल्टी गति को देने के लिये माना जाता है। उदाहरण के लिये इस राशि वाले जातक अगर वृष राशि का है तो उसके ऊपर राहु का असर एक के तरह से काम करेगा,वह व्यक्ति अपने को भौतिक धन के मामले मे नामी ग्रामी बनना चाहता है वह चाहता है कि लोग उसे धनपति के रूप मे देखे और वह अपने को जहां भी जाये एक धनी व्यक्ति की हैसियत से दिखावा करे,लोग उसके प्रति अपने सम्मान को उसकी आज्ञा को उसके प्रति किये जाने वाले व्यवहार को धन के कारण ही उच्च का समझे,वह जो भी चाहे करे और जो भी चाहे खरीदे जिसे भी चाहे प्राप्त करे। इस बात के लिये उसके अन्दर एक प्रकार का नशा पैदा हो जाता है वह केवल हर बात को काम को इन्सान को व्यवहार को धन के रूप मे ही देखना पसन्द करता है उसे इस बात से कतई भरोसा होता है कि इन्सानियत की भी कीमत होती है व्यवहार मे भी केवल एक दूसरे की सहायता का कारण होता है या इन्सान का जन्म ही केवल लोगो की सहायता करने के लिये हुआ है। उसके लिये केवल सहायता का कारण भी पैदा होता है तो वह केवल अपनी सहायता को धन के रूप मे करना चाहता है उसे अपने धन की कीमत जब पता चलती है जब वृश्चिक का केतु अपना असर देकर असहनीय दर्द और कष्ट देना शुरु करता है,तब वह सोचता है कि वह धन के नशे के अन्दर कितना दुनियादारी को भूल गया था,वह अपने धन से बडे अस्पतालो के चक्कर लगाता है जगह जगह मारा मारा घूमता है और उस समय वह वृश्चिक का केतु मजे से उसका धन हरण भी करता है और वह अपने शरीर को भी बरबाद करता है। इस राशि के आठवें भाव मे गुरु होने से जो भी कारण बनेंगे वह गुप्त रूप मे बनेंगे,गुरु के मार्गी रहने तक तो समाज और परिवार के साथ धर्म तथा कानून का पालन करेगा जैसे ही गुरु वक्री अपना प्रभाव देगा वह कानून और समाज धर्म मर्यादा को त्याग कर उल्टे काम करना शुरु कर देगा जातक गुरु के वक्री होते ही गुप्त रूप से अपने कार्य व्यवहार को लेकर चलने लगेगा,जैसे वह शिक्षा मे है तो वह शिक्षा को छोड कर अपने जीवन को बनाने और जीवन साथी को खोज कर उसके साथ अपने जीवन को बिताने का सोचने लगेगा,वह अगर समझदार है तो अपने शिक्षा स्थान को भी छोड सकता है और अपने संभावित चाहने वाले व्यक्ति के साथ भाग भी सकता है। उसकी इस कार्य मे सहायता करने के लिये केतु अपना पूरा प्रभाव देगा,यानी जो भी साधन इस राहु को चाहिये केतु प्रदान करता रहेगा,जैसे मोबाइल को प्रदान करवाना,कम्पयूटर या लेपटाप को दिलवाना,संचार का कोई न कोई जरिया प्रदान करवाना आदि माना जाना भी उचित ही है। अगर इन साधनो से कोई कारण नही बनता है तो वह किन्ही दो व्यक्तियों से अपनी संचार व्यवस्था से अपने कार्यों को अंजाम देने की कोशिश करेगा। इस राहु का प्रभाव जो जातक के ऊपर डालता है वह सबसे पहले राहु से अपने सम्पर्क को बनाना राहु की तीसरी द्रिष्टि कर्क राशि पर होने से यानी जो व्यक्ति वायव्य दिशा का रहने वाला होगा तथा संचार के कारणो को अपने द्वारा प्रदर्शित करने के बाद बुद्धि स्थान को भ्रमित करने के लिये भी अपनी शक्ति को देगा,इस शक्ति से अगर व्यक्ति विद्या के क्षेत्र मे है तो वह अपनी विद्या वाली शक्ति के अन्दर भ्रम को पैदा करने के बाद अपनी याददास्त को खोने लगेगा या किसी प्रकार के अफ़ेयर आदि के चक्कर में आकर या जल्दी से धन कमाने की कोशिश को समझ कर अपने परिवार और समाज से दूरी प्राप्त करने की कोशिश करेगा। सातवी द्रिष्टि से यह सहयोग देने वाले साधनो संचार और सहयोग के लिये धन के साधन को तथा अपनी गुप्त मंत्रणा के लिये अपने सहयोगी को जो छुपे रूप में होगा उससे अपनी युति को प्राप्त करने लगेगा,सबसे बडा असर अपनी समाज की मर्यादा को समाप्त करने वाला होगा वह अपने पिता को भी बडी बुरी तरह से आहत कर सकता है,पिता की सामाजिक अवस्था को समाप्त करना और पिता की खानदानी स्थिति को बरबाद करने का झटका जातक देने से नही चूक सकता नोवी नजर मकर पर यहां शनि गोचर कर रहें हैंआने वाले  उन्हे कि18 महीने तक वृष और वृश्चिक राशि वालो को जिनकी कुण्डली में भी राहु केतु यहां पर स्थित है।अपने को बहुत ही संभाल कर चलने की जरूरत है,वे किसी प्रकार के मानवीय संबन्ध को बिना विचारे नही बनाये,अपने लिये खोजे जाने वाले रोजगार मे किसी प्रकार की ऐसी नौकरी आदि का चुनाव नही करे जहां प्रलोभन देकर उनका आगे का शोषण किया जाये उन्हे किसी से भी राय लेने मे भी बहुत ही सोच समझ कर चलने की जरूरत है कि वे अपने को इतना किसी भी व्यक्ति पर निर्भर नही कर ले कि वह वक्त पर आकर अपनी आदत से शरीर समाज परिवार और स्थिति पर ग्रहण को लगा दे.यह समय इन दोनो राशियों के लिये बहुत ही कनफ़्यूजन और एक साथ दो दो रास्ते चुनाव करने के लिये माना जाता है जिससे शरीर धन हिम्मत पहिचान बुद्धि पति पत्नी के सम्बन्ध पारिवारिक और सामाजिक स्थिति को बरबाद करना भी माना जा सकता है,किसी भी समस्या के सुझाव के लिये समर्पक कर सकते हैं आचार्य राजेश www.futruestudyonline.com

0 votes

राहु केतु का राशि परिवर्तन और गोचर फल राहु वृष राशि में और वृश्चिक केतु के घेरे में कुंडली मे राहु का गोचर जन्म के गोचर से कुछ अलग ही माना जाता है जन्म के समय का राहु तो व्यक्ति के अन्दर अपनी शक्ति के अनुसार सम्बन्धित भाव और राशि तथा ग्रहों का प्रभाव अजीवन देता है लेकिन गोचर का राहु अपने अनुसार कुछ अलग से ही अपने असर को प्रदान करता है। एक प्रसिद्धि आदमी बदनामी को झेलने लगता है और एक बदनाम आदमी प्रसिद्ध हो जाता है यह सब राहु का खेल ही माना जाता है। कहा जाता है कि नशा आदमी को या तो बरबाद कर देता है या इतना आबाद कर देता है कि उसकी सात पुस्तो में कोई आबाद या बरबाद नही हुआ होता है। आदमी को कई प्रकार के नशे झेलने को मिलते है,कुंडली के बारह भावो के अनुसार नसे भी बारह भावो से जुडे होते है बदलती है तो केवल प्रकृति राशि ग्रहो के असर और ग्रहो की द्रिष्टि से नशे की लत बदल जाती है।मानसिक भ्रम देने का कारक राहु है और केतु साधन देने के लिये माना जाता है,जिस प्रकार का भ्रम पैदा होना है उसके लिये साधन देने का कार्य केतु करता है,बिना केतु के राहु असमर्थ है और बिना राहु के केतु बेकार है।गुरु के कुंडली मे गोचर के अनुसार यह अपनी मर्यादा को लेकर चलते है और शनि के इशारे से अपने कार्यों को पूरा करते है। अक्सर जब राहु राशि मे हो और केतु सप्तम मे हो तो बडे बडे अनर्थ करवा देता है। वर्तमान मे वृष राशि पर राहु का गोचर चल रहा है और वृश्चिक राशि पर केतु का गोचर चल रहा है। शनि का योगात्मक रूप राहु केतु तथा इन दोनो राशियों के लिये बरबाद करने के लिये और मिट्टी मे मिलाने के लिये अपने प्रभाव को देने लगा है। बाकी के ग्रह भी राहु केतु से नही बचते है और शनि भी अपनी शिफ़्त से सभी ग्रहों को कोई न कोई कारण देकर उसी प्रकार के कार्य करवाने के लिये अपनी गति को प्रदान कर रहा है जिससे राहु केतु के घेरे मे आकर उसी ग्रह के अनुसार अपनी स्थिति को इन दोनो स्थितियों से मुलाकात करवायी जा सके। गुरु परिवार समाज धर्म और विद्या को देने वाला है सामाजिक ज्ञान और इसी प्रकार के कारणो को प्रदान करने वाला है। जब गुरु मार्गी होता है तो वह अपने स्वभाव से सभी भावो को राशियों को अपनी गति को देकर उपरोक्त कारणो पर चलने या उनसे लाभ हानि देने के लिये अपने प्रभाव को देता है तथा वक्री होकर अपने प्रभाव से जो भी उपरोक्त कारण है उनके अन्दर उल्टी गति को देने के लिये माना जाता है। उदाहरण के लिये इस राशि वाले जातक अगर वृष राशि का है तो उसके ऊपर राहु का असर एक के तरह से काम करेगा,वह व्यक्ति अपने को भौतिक धन के मामले मे नामी ग्रामी बनना चाहता है वह चाहता है कि लोग उसे धनपति के रूप मे देखे और वह अपने को जहां भी जाये एक धनी व्यक्ति की हैसियत से दिखावा करे,लोग उसके प्रति अपने सम्मान को उसकी आज्ञा को उसके प्रति किये जाने वाले व्यवहार को धन के कारण ही उच्च का समझे,वह जो भी चाहे करे और जो भी चाहे खरीदे जिसे भी चाहे प्राप्त करे। इस बात के लिये उसके अन्दर एक प्रकार का नशा पैदा हो जाता है वह केवल हर बात को काम को इन्सान को व्यवहार को धन के रूप मे ही देखना पसन्द करता है उसे इस बात से कतई भरोसा होता है कि इन्सानियत की भी कीमत होती है व्यवहार मे भी केवल एक दूसरे की सहायता का कारण होता है या इन्सान का जन्म ही केवल लोगो की सहायता करने के लिये हुआ है। उसके लिये केवल सहायता का कारण भी पैदा होता है तो वह केवल अपनी सहायता को धन के रूप मे करना चाहता है उसे अपने धन की कीमत जब पता चलती है जब वृश्चिक का केतु अपना असर देकर असहनीय दर्द और कष्ट देना शुरु करता है,तब वह सोचता है कि वह धन के नशे के अन्दर कितना दुनियादारी को भूल गया था,वह अपने धन से बडे अस्पतालो के चक्कर लगाता है जगह जगह मारा मारा घूमता है और उस समय वह वृश्चिक का केतु मजे से उसका धन हरण भी करता है और वह अपने शरीर को भी बरबाद करता है। इस राशि के आठवें भाव मे गुरु होने से जो भी कारण बनेंगे वह गुप्त रूप मे बनेंगे,गुरु के मार्गी रहने तक तो समाज और परिवार के साथ धर्म तथा कानून का पालन करेगा जैसे ही गुरु वक्री अपना प्रभाव देगा वह कानून और समाज धर्म मर्यादा को त्याग कर उल्टे काम करना शुरु कर देगा जातक गुरु के वक्री होते ही गुप्त रूप से अपने कार्य व्यवहार को लेकर चलने लगेगा,जैसे वह शिक्षा मे है तो वह शिक्षा को छोड कर अपने जीवन को बनाने और जीवन साथी को खोज कर उसके साथ अपने जीवन को बिताने का सोचने लगेगा,वह अगर समझदार है तो अपने शिक्षा स्थान को भी छोड सकता है और अपने संभावित चाहने वाले व्यक्ति के साथ भाग भी सकता है। उसकी इस कार्य मे सहायता करने के लिये केतु अपना पूरा प्रभाव देगा,यानी जो भी साधन इस राहु को चाहिये केतु प्रदान करता रहेगा,जैसे मोबाइल को प्रदान करवाना,कम्पयूटर या लेपटाप को दिलवाना,संचार का कोई न कोई जरिया प्रदान करवाना आदि माना जाना भी उचित ही है। अगर इन साधनो से कोई कारण नही बनता है तो वह किन्ही दो व्यक्तियों से अपनी संचार व्यवस्था से अपने कार्यों को अंजाम देने की कोशिश करेगा। इस राहु का प्रभाव जो जातक के ऊपर डालता है वह सबसे पहले राहु से अपने सम्पर्क को बनाना राहु की तीसरी द्रिष्टि कर्क राशि पर होने से यानी जो व्यक्ति वायव्य दिशा का रहने वाला होगा तथा संचार के कारणो को अपने द्वारा प्रदर्शित करने के बाद बुद्धि स्थान को भ्रमित करने के लिये भी अपनी शक्ति को देगा,इस शक्ति से अगर व्यक्ति विद्या के क्षेत्र मे है तो वह अपनी विद्या वाली शक्ति के अन्दर भ्रम को पैदा करने के बाद अपनी याददास्त को खोने लगेगा या किसी प्रकार के अफ़ेयर आदि के चक्कर में आकर या जल्दी से धन कमाने की कोशिश को समझ कर अपने परिवार और समाज से दूरी प्राप्त करने की कोशिश करेगा। सातवी द्रिष्टि से यह सहयोग देने वाले साधनो संचार और सहयोग के लिये धन के साधन को तथा अपनी गुप्त मंत्रणा के लिये अपने सहयोगी को जो छुपे रूप में होगा उससे अपनी युति को प्राप्त करने लगेगा,सबसे बडा असर अपनी समाज की मर्यादा को समाप्त करने वाला होगा वह अपने पिता को भी बडी बुरी तरह से आहत कर सकता है,पिता की सामाजिक अवस्था को समाप्त करना और पिता की खानदानी स्थिति को बरबाद करने का झटका जातक देने से नही चूक सकता नोवी नजर मकर पर यहां शनि गोचर कर रहें हैंआने वाले  उन्हे कि18 महीने तक वृष और वृश्चिक राशि वालो को जिनकी कुण्डली में भी राहु केतु यहां पर स्थित है।अपने को बहुत ही संभाल कर चलने की जरूरत है,वे किसी प्रकार के मानवीय संबन्ध को बिना विचारे नही बनाये,अपने लिये खोजे जाने वाले रोजगार मे किसी प्रकार की ऐसी नौकरी आदि का चुनाव नही करे जहां प्रलोभन देकर उनका आगे का शोषण किया जाये उन्हे किसी से भी राय लेने मे भी बहुत ही सोच समझ कर चलने की जरूरत है कि वे अपने को इतना किसी भी व्यक्ति पर निर्भर नही कर ले कि वह वक्त पर आकर अपनी आदत से शरीर समाज परिवार और स्थिति पर ग्रहण को लगा दे.यह समय इन दोनो राशियों के लिये बहुत ही कनफ़्यूजन और एक साथ दो दो रास्ते चुनाव करने के लिये माना जाता है जिससे शरीर धन हिम्मत पहिचान बुद्धि पति पत्नी के सम्बन्ध पारिवारिक और सामाजिक स्थिति को बरबाद करना भी माना जा सकता है,किसी भी समस्या के सुझाव के लिये समर्पक कर सकते हैं आचार्य राजेश www.futurestudyonline.com

Dear friends, futurestudyonline given book now button (unlimited call)24x7 works , that means you can talk until your satisfaction , also you will get 3000/- value horoscope free with book now www.futurestudyonline.com
...