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मृगा मृगैः संगमुपव्रजन्ति गावश्च गोभिस्तुरगास्तुरंगैः। मूर्खाश्च मूर्खैः सुधयः सुधीभिः समानशीलव्यसनेषु सख्यं॥ Deers stay with deers, cows stay with cows, horses stay with horses, fools stay with fools and wise men stay with wise. Friendship in people with similar character and habits is natural. *मृग मृगों के साथ, गाय गायों के साथ, घोड़े घोड़ों के साथ, मूर्ख मूर्खों के साथ और बुद्धिमान बुद्धिमानों के साथ रहते हैं; समान आचरण और आदतों वालों में ही मित्रता होती है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
posted 6 days ago by anonymous

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न चोराहार्यम् न च राजहार्यम्, न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि। व्यये कृते वर्धत एव नित्यं, विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥ It cannot be stolen by thieves, nor can it be taken away by the kings. It cannot be divided among brothers, it does not have a weight. If spent regularly, it always keeps growing. The wealth of knowledge is the most superior wealth of all! *जिसे न चोर चुरा सकते हैं, न राजा हरण कर सकता है, न भाई बँटा सकते हैं, जो न भार स्वरुप ही है, जो नित्य खर्च करने पर भी बढ़ता है, ऐसा विद्या धन सभी धनों में प्रधान है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम
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उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्। सोत्साहस्य च लोकेषु न किंचिदपि दुर्लभम्॥ Enthusiasm is the power of noble men. Nothing is as powerful as enthusiasm. Nothing is difficult in this world for an enthusiastic person. *उत्साह श्रेष्ठ पुरुषों का बल है, उत्साह से बढ़कर और कोई बल नहीं है। उत्साहित व्यक्ति के लिए इस लोक में कुछ भी दुर्लभ नहीं है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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क: काल: कानि मित्राणि को देश: को व्ययागमौ | कस्याहं का च मे शक्ति: इति चिन्त्यं मुहुर्मुहु: || "How is situation around me (i.e. is it favourable or not)? who are (my) friends? how is condition in the country? what are the things for and against me (or what do I have and what I don't have)? who am I? what are my strengths?" one should always worry about these questions. Subhashitkar is suggesting us that we must be always alert and consider all this prior to any action. *चाणक्य के अनुसार, मनुष्य को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए। हमारा समय कैसा चल रहा है, कौन हमारा मित्र और कौन हमारा शत्रु है, हमारा निवास-स्थान कैसा है, हमारी आय और व्यय कितना है, हमारी शक्ति कितनी है- ये सब बाते ही मनुष्य के चिंतन और मनन का केंद्रबिंदु होनी चाहिए। इन्हें ध्यान में रखकर आचरण करनेवाला मनुष्य जीवन में कभी असफलता का मुख नहीं देखता।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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लालयेत पंचवर्षाणि दशवर्शाणि ताडयेत् । प्राप्तेषु षोडषे वर्षे पुत्रे मित्रवदाचरेत् ॥ Allow pampering of the children for (first) five years, reprimand them (after that) for ten years, (but) once they become sixteen years of age treat them like friends. *प्रथम पांच वर्ष पुत्रना लालन-पालन करो, बाद में दस वर्ष तक उसका ताडन करो, और पुत्र सोलह वर्ष का हो जाए तो उसके साथ मित्र जैसा व्यवहार करो |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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चन्दनं शीतलं लोके चंदनादपि चंद्रमा: | चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगत: || sandalwood is pleasant (cool), moon (or moon light) is more pleasant than sandal. (but) company of a good person (sAdhu) is pleasant then both moon and sandal. *संसार में चन्दन को शीतल माना जाता है लेकिन चन्द्रमा चन्दन से भी शीतल होता है | अच्छे मित्रों का साथ चन्द्र और चन्दन दोनों की तुलना में अधिक शीतलता देने वाला होता है |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।
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