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सूर्य का द्वितीय भाव का भविष्यफल

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सूर्य के द्वितीय भाव का फल शुभ स्थिति में जातक की जन्म कुंडली के दूसरे भाव में शुभ स्थिति होने पर यह जातक पर निम्नलिखित शुभ प्रभाव को डालता है 1-यदि जातक की कुंडली में सूर्य दूसरे भाव में शुभ स्थिति में बैठा हूं तथा साथ में गुरु की युति भी हो तो यह स्थिति अत्यंत शुभ फलदाई होती हैजातक का सारा परिवार सदा सुखी तथा समृद्ध बना रहता है तथा जातक को किसी भी प्रकार का अभाव नहीं होता जातक को कभी भी असफलता का मुंह नहीं देखना पड़ता तथा वह जिस कार्य में हाथ डालता है वह पूर्ण होता है ऐसा जापक हर प्रकार से योग होता है तथा अपनी योग्यता के बल पर सुखी समृद्ध जीवन व्यतीत करता है जातक राजा महाराजाओं के सामान ऐश्वर्य पूर्ण जीवन व्यतीत करता है तथा उसे कभी भी किसी प्रकार का अभाव नहीं रहता। 2- यदि जातक की जन्म कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य शुभ स्थिति में हो तथा कुंडली के छठे भाव में चंद्रमा का वास हो तो यह स्थिति अत्यंत शुभ होती है इस स्थिति सूर्य अधिक बलवान होकर जातक को अत्यंत शुभ फल प्रदान करता है इस प्रकार का जातक धनी एवं अत्यंत प्रभावशाली और तेज युक्त होता है। 3- यदि जातक की कुंडली के दूसरे भाव में शुभ शुभ स्थिति में हो तथा कुंडली के आठवें भाव में बुध स्थित हो तो यह स्थिति शुभ होती हैं इस प्रकार का जातक बहुत अमीर तथा स्वाभिमानी होता है तथा अपने बाहुबल से अपनी जीविका चलाता है। ऐसा जातक अपने मित्रों तथा सहयोगियों से कोई सहायता नहीं लेता। 4- यदि जातक की कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य शुभ स्थिति में हो तथा आठवें भाव में राहु का वास हो तो ग्रहों की यह स्थिति बहुत ही शुभ होती है। ग्रहों की इस स्थिति में परिणामस्वरूप जातक बहुत ही बुद्धिमान तथा बलवान होता है जातक को योग्यताओं का खजाना कहना अति उत्तम होगा जातक बहुत ही योग तथा बुद्धिमान होता है तथा अपनी बुद्धि के बल पर असंभव को भी संभव कर दिखाता है ऐसा जातक जीवन में कभी भी असफल नहीं होता सफलता सदैव उसके कदम चूमती है। 5- यदि किसी जातक की जन्म कुंडली के दूसरे भाव में शुभ अशुभ स्थिति में हूं तथा कुंडली के आठवें भाव में केतु बैठा हो तो ग्रहों की यह स्थिति शुभ है। ग्रहों की यही स्थिति जातक में न्याय प्रिय तथा सत्यवादी ता आदि गुणों के लिए उत्तरदाई होती है। इस प्रकार का जातक बहुत ही दयालु न्याय न्याय का पक्षधर सदा सत्यवादी होता है। पं- बृजेश कुमार शास्त्री
posted Jan 16 by anonymous

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द्वितीय भाव कुंडली के 12 भावों में से द्वितीय भाव को कुंटुंब भाव और धन भाव के नाम से जाना जाता है। यह भाव धन से संबंधित मामलों को दर्शाता है, जिसका हमारे दैनिक जीवन में बड़ा महत्व है। द्वितीय भाव परिवार, चेहरा, दाईं आँख, वाणी, भोजन, धन या आर्थिक और आशावादी दृष्टिकोण आदि को दर्शाता है। यह भाव ग्रहण करने, सीखने, भोजन और पेय, चल संपत्ति, पत्र व दस्तावेज का प्रतिनिधित्व करता है। द्वितीय भाव का महत्व और विशेषताएँ वैदिक ज्योतिष में द्वितीय भाव से धन, संपत्ति, कुटुंब परिवार, वाणी, गायन, नेत्र, प्रारंभिक शिक्षा और भोजन आदि बातों का विचार किया जाता है। इसके अतिरिक्त यह भाव जातक के द्वारा जीवन में अर्जित किये गये स्वर्ण आभूषण, हीरे तथा अन्य बहुमूल्य पदार्थों के बारे में भी बोध कराता है। द्वितीय भाव को एक मारक भाव भी कहा जाता है। ज्योतिष में द्वितीय भाव से क्या देखा जाता है? द्वितीय भाव का कारक ग्रह बृहस्पति को माना गया है। इस भाव से धन, वाणी, संगीत, प्रारंभिक शिक्षा और नेत्र आदि का विचार किया जाता है। आर्थिक स्थिति: कुंडली में आमदनी और लाभ का विचार एकादश भाव के अलावा द्वितीय भाव से भी किया जाता है। जब द्वितीय भाव और एकादश भाव के स्वामी व गुरु मजबूत स्थिति में हों, तो व्यक्ति धनवान होता है। वहीं यदि कुंडली में इनकी स्थिति कमजोर हो तो, आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शुरुआती शिक्षा: चूंकि द्वितीय भाव का व्यक्ति की बाल्य अथवा किशोरावस्था से गहरा संबंध होता है इसलिए इस भाव से व्यक्ति की प्रारंभिक शिक्षा देखी जाती है। वाणी, गायन और संगीत: द्वितीय भाव का संबंध मनुष्य के मुख और वाणी से होता है। यदि द्वितीय भाव, द्वितीय भाव के स्वामी और वाणी का कारक कहे जाने वाले बुध ग्रह किसी प्रकार से पीड़ित हो, तो व्यक्ति को हकलाने या बोलने में परेशानी रह सकती है। चूंकि द्वितीय भाव वाणी से संबंधित है इसलिए यह भाव गायन अथवा संगीत से भी संबंध को दर्शाता है। नेत्र: द्वितीय भाव का संबंध व्यक्ति के नेत्र से भी होता है। इस भाव से प्रमुख रूप से दायें नेत्र के बारे में विचार करते हैं। यदि द्वितीय भाव में सूर्य अथवा चंद्रमा पापी ग्रहों से पीड़ित हों या फिर द्वितीय भाव व द्वितीय भाव के स्वामी पर क्रूर ग्रहों का प्रभाव हो, तो व्यक्ति को नेत्र पीड़ा या विकार हो सकते हैं। रूप-रंग और मुख: द्वितीय भाव मनुष्य के मुख और चेहरे की बनावट को दर्शाता है। यदि द्वितीय भाव का स्वामी बुध अथवा शुक्र हो और बलवान होकर अन्य शुभ ग्रहों से संबंधित हो, तो व्यक्ति सुंदर चेहरे वाला होता है, साथ ही व्यक्ति अच्छा बोलने वाला होता है। वैदिक ज्योतिष के पुरातन ग्रन्थों में द्वितीय भाव उत्तर-कालामृत के अनुसार, द्वितीय भाव नाखून, सच और असत्य, जीभ, हीरे, सोना, तांबा और अन्य मूल्यवान स्टोन, दूसरों की मदद, मित्र, आर्थिक संपन्नता, धार्मिक कार्यों में विश्वास, नेत्र, वस्त्र, मोती, वाणी की मधुरता, सुंगधित इत्र, धन अर्जित करने के प्रयास, कष्ट, स्वतंत्रता, बोलने की बेहतर क्षमता और चांदी आदि को दर्शाता है। द्वितीय भाव आर्थिक संपन्नता, स्वयं द्वारा अर्जित धन या परिवार से मिले धन को दर्शाता है। यह भाव पैतृक, वंश, महत्वपूर्ण वस्तु या व्यक्ति आदि का बोध भी कराता है। कालपुरुष कुंडली में द्वितीय भाव की राशि वृषभ होती है जबकि इस भाव का स्वामी शुक्र को कहा जाता है। प्रसन्नज्ञान में भट्टोत्पल कहते हैं कि द्वितीय भाव मोती, माणिक्य रत्न, खनिज पदार्थ, धन, वस्त्र और व्यवसाय को दर्शाता है। मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, द्वितीय भाव का आर्थिक मंत्रालय, राज्य की बचत, बैंक बेलैंस, रिजर्व बैंक की निधि या धन व आर्थिक मामलों से संबंध है। प्रश्न ज्योतिष के अनुसार, द्वितीय भाव धन से जुड़े प्रश्न का निर्धारण करता है। इनमें लाभ या हानि, व्यवसाय से वृद्धि आदि बातें प्रमुख हैं। द्वितीय भाव का अन्य भावों से अंतर्संबंध द्वितीय भाव कुंडली के अन्य भावों से भी अंतर्संबंध रखता है। यह भाव छोटे भाई-बहनों को हानि, उनके खर्च, छोटे भाई-बहनों से मिलने वाली मदद और उपहार, जातक के हुनर और प्रयासों में कमी को दर्शाता है। द्वितीय भाव आपकी माँ के बड़े भाई-बहन, आपकी माँ को होने वाले लाभ और वृद्धि, समाज में आपकी माँ के संपर्क आदि को भी प्रकट करता है। वहीं द्वितीय भाव आपके बच्चों की शिक्षा, विशेषकर पहले बच्चे की, समाज में आपके बच्चों की छवि और प्रतिष्ठा का बोध कराता है। द्वितीय भाव प्राचीन ज्ञान से संबंधित कर्म, मामा का भाग्य, उनकी लंबी यात्राएँ और विरोधियों के माध्यम से लाभ को दर्शाता है। यह आपके जीवनसाथी की मृत्यु, पुनर्जन्म, जीवनसाथी की संयुक्त संपत्ति, साझेदार से हानि या साझेदार के साथ मुनाफे की हिस्सेदारी का बोध कराता है। द्वितीय भाव आपके सास-ससुर, आपके ससुराल पक्ष के व्यावसायिक साझेदार, ससुराल के लोगों से कानूनी संबंध, ससुराल के लोगों के साथ-साथ बाहरी दुनिया से संपर्क और पैतृक मामलों को दर्शाता है। यह भाव स्वास्थ्य, रोग, पिता या गुरु की बीमारी, शत्रु, मानसिक और वैचारिक रूप से आपके विरोधी, निवेश, करियर की संभावना, शिक्षा, ज्ञान और आपके अधिकारियों की कलात्मकता को प्रकट करता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में द्वितीय भाव बड़े भाई-बहनों की सुख-सुविधा, मित्रों का सुख, मित्रों के लिए आपका दृष्टिकोण, बड़े भाई-बहनों का आपकी माँ के साथ संबंध को दर्शाता है। यह भाव लेखन, आपकी दादी के बड़े भाई-बहन और दादी के बोलने की कला को भी प्रकट करता है। द्वितीय भाव गुप्त शत्रुओं की वजह से की गई यात्राओं पर हुए खर्च और प्रयासों को भी दर्शाता है।
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जय श्रीराम ।। ग्रहों के रूठ जाने और अशुभ फल देने का कारण ================================ सूर्य- जब जातक किसी भी प्रकार का टैक्स चुराता है एवं किसी भी जीव की आत्मा को कष्ट देता है। तब सूर्य अशुभ फल देता है। चंद्र- जब जातक सम्मानजनक स्त्रियों को कष्ट देता हैं। जैसे- माता, नानी, दादी, सास एवं इनके समान वाली स्त्रियों को कष्ट देता है तब चंद्र अशुभ फल देता है। धोखे से किसी से कोई वस्तु लेने पर भी चंद्रमा अशुभ फल देता है। मंगल- जब जातक अपने भाई से झगड़ा करें, भाई के साथ धोखा करें। अपनी पत्नी के भाई का अपमान करें, तो भी मंगल अशुभ फल देता है। बुध- जब जातक अपनी बहन, बेटी अथवा बुआ को कष्ट देता है, साली एवं मौसी को कष्ट देता है। जब जातक हिजड़े को कष्ट देता है, तो भी बुध अशुभ फल देता है। गुरु- जब जातक पिता, दादा, नाना को कष्ट देता है अथवा इनके समान पद वाले व्यक्ति को कष्ट देता है। साधु-संतों को कष्ट देने से भी गुरु अशुभ फल देता है। शुक्र- जब जातक जीवनसाथी को कष्ट देता है। घर में गंदे एवं फटे वस्त्र रखने एवं पहनने पर भी शुक्र अशुभ फल देता है। शनि- जब जातक ताऊ, चाचा को कष्ट देता है, मजदूर की पूरी मजदूरी नहीं देता है। घर या दुकान के नौकरों को गाली देता है। शराब, मांस खाने पर भी शनि अशुभ फल देता है। कुछ लोग मकान या दुकान किराए से लेते फिर बाद में खाली नहीं करते या खाली करने के लिए पैसे मंगाते है, तो शनि अशुभ फल देता है। राहु- जब जातक बड़े भाई को कष्ट देता है या अपमान करता है। ननिहाल पक्ष का अपमान करने पर एवं सपेरे का दिल दुखाने पर या कभी किसी सर्प को मारने पर भी राहु कष्ट देता है। केतु- जब जातक भतीजे, भांजे को कष्ट देता है या उनका हक छीनता है। कुत्ते को मारने या किसी के द्वारा मरवाने पर, मंदिर की ध्वजा तोड़ने पर केतु अशुभ फल देता है। किसी की झूठी गवाही देने पर भी राहु-केतु अशुभ फल देते हैं । अत: नवग्रहों का अनुकूल फल पाने के लिए मनुष्य को अपना जीवन व्यवस्थित जीना चाहिए, किसी का दिल नहीं दुखाना चाहिए। न ही किसी के साथ छल-कपट करना चाहिए। बृजेश कुमार शास्त्री
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सूर्य भविष्यफल और उपाय सूर्य आपके 8th भाव में स्थित है आठवें भाव स्थित सूर्य यदि अनुकूल हो तो उम्र के 22वें वर्ष से सरकार का सहयोग मिलता है। ऐसा सूर्य जातक को सच्चा, पुण्य और राजा की तरह बनाता है। कोई उसे नुकसान पहुँचाने में सक्षम होता। यदि आठवें भाव स्थित सूर्य अनुकूल न हो तो दूसरे भाव में स्थित बुध आर्थिक संकट पैदा करेगा। जातक अस्थिर स्वभाव, अधीर और अस्वस्थ्य रहेगा। उपाय: (1) घर में कभी भी सफेद कपड़े न रखें। (2) दक्षिण मुखी घर में न रहें। (3) हमेशा किसी भी नए काम शुरू करने से पहले मीठा खाकर पानी पिएं। (4) यदि सम्भव हो तो किसी जलती हुई चिता में तांबे के सिक्के डालें। (5) बहते हुए पानी में गुड़ बहाएं। चंद्र भविष्यफल और उपाय चंद्र आपके 6th भाव में स्थित है यह भाव बुध और केतु से प्रभावित होता है। इस घर में स्थित चंद्रमा दूसरे, आठवे, बारहवें और चौथे घरों में बैठे ग्रहों से प्रभावित होता है। ऐसा जातक बाधाओं के साथ शिक्षा प्राप्त करता है और अपनी शैक्षिक उपलब्धियों का लाभ उठाने के लिए उसे बहुत संघर्ष करना पडता है। यदि चंद्रमा छठवें, दूसरे, चौथे, आठवें और बारहवें घर में होता है तो यह शुभ भी होता है ऐसा जातक किसी मरते हुए के मुंह में पानी की कुछ बूंदें डालकर उसे जीवित करने का काम करता है। यदि छठवें भाव में स्थित चंद्रमा अशुभ है और बुध दूसरे या बारहवें भाव में स्थित है तो जातक में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति पाई जाएगी। ठीक इसी तरह यदि चन्द्रमा अशुभ है और सूर्य बारहवें घर में है तो जातक या उसके जीवनसाथी या दोनों को ही आंख के रोग या परेशानियों से ग्रस्त होंगे। उपाय: (1) अपने पिता को अपने हाथों से दूध परोसें। (2) रात के समय दूध कभी भी न पिएं। लेकिन दिन के समय दूध उपयोग किया जा सकता है। रात के समय दही और पनीर का सेवन किया जा सकता है। (3) दूध का दान न करें। केवल पूजा के धार्मिक स्थानों पर दूध दिया जा सकता है। (4) जातक अस्पताल या श्मशान भूमि में कुआं खुदवाएं। मंगल भविष्यफल और उपाय मंगल आपके 12th भाव में स्थित है यह घर बृहस्पति से प्रभावित घर होता है। इसलिए यहां पर मंगल और और बृहस्पति दोनों के अच्छे परिणाम मिलते हैं। यह राहू का पक्का घर भी कहा गया है इसलिए मंगल के यहां स्थित होने के कारण राहू का दुष्प्रभाव भी नहीं मिलता। उपाय: (1) सुबह खाली पेट शहद का सेवन करें। (2) मिठाई खाना और दूसरों को भी देने से जातक के धन की बृद्धि होती है। बुध भविष्यफल और उपाय बुध आपके 9th भाव में स्थित है नौवें घर में भी बुध बहुत बुरा प्रभाव देता है क्योकि यह बृहस्पति का घर होता है और बुध उसका शत्रु ग्रह है। यह लगातार मानसिक बेचैनी और विभिन्न प्रकार की मानहानि का कारण बनता है। यदि चंद्रमा केतु, और बृहस्पति 1, 3, 6, 7, 9 और 11 घरों में हों तो, बुध अधिक फायदेमंद परिणाम नहीं देता। उपाय: (1) हरे रंग के प्रयोग से बचें। (2) अपनी नाक छिदवायें। (3) किसी मिट्टी के बर्तन में मशरूम भरकर धार्मिक जगह दान करें। (4) किसी साधु या फ़कीर से कोई ताबीज़ न लें। गुरु भविष्यफल और उपाय गुरु आपके 9th भाव में स्थित है नौवां घर बृहस्पति से विशेष रूप से प्रभावित होता है। इसलिए इस भाव वाला जातक प्रसिद्ध है, अमीर और एक अमीर परिवार में पैदा होगा। जातक अपनी जुबान का पाक्का और दीर्घायु होगा, उसके बच्चे बडे अच्छे होंगे। यदि बृहस्पति नीच का हो तो जातक में उपरोक्त गुण नहीं होंगे और वह नास्तिक होगा। यदि बृहस्पति का शत्रु ग्रह पहले, पांचवें या चौथे भाव में हो तो बृहस्पति बुरे परिणाम देगा। उपाय: (1) हर रोज मंदिर जाना चाहिए। (2) शराब पीने से बचें। (3) बहते पानी में चावल बहाएं।
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सूर्य का कन्या राशि में गोचर- 16 september 2020 सूर्य के गोचर को सूर्य संक्रांति कहा जाता है। इस लिहाज़ से प्रत्येक वर्ष में कुल बारह संक्रांतियां पड़ती हैं। सितंबर के महीने में सूर्य देव राशि चक्र की पांचवी राशि सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में इस दिन को कन्या संक्रांति भी कहा जाता है। ग्रहों की चाल हमारे जीवन को काफ़ी हद तक प्रभावित करती है। सूर्य देव 16 सितंबर 2020 को 19 बज-कर 07 मिनट पर सिंह से कन्या राशि में गोचर करेंगे 17 अक्टूबर 07 बज-कर 05 बजे तक सूर्य देव इसी राशि में रहेंगे और उसके बाद तुला राशि में गोचर कर जाएंगे। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। इसके अलावा ज्योतिष में सूर्य को पिता का भी कारक माना गया है। जहाँ चंद्रमा, मंगल और गुरु सूर्य के मित्र हैं, वहीं राहू, केतु, शुक्र, और शनि से सूर्य की कुछ ख़ास नहीं बनती है और बुध से सूर्य का समभाव का रिश्ता होता है। कुंडली में सूर्य यदि शुभ स्थान पर हो तो इससे व्यक्ति को मान-सम्मान, सरकारी नौकरी और राजनीतिक जीवन में सफलता की प्राप्ति होती है। वहीं सूर्य के अशुभ प्रभाव से इन्सान की कुंडली में पितृ दोष, नौकरी में असफलता, मान-सम्मान की कमी और नेत्र पीड़ा इत्यादि दुःख भोगने पड़ते हैं।   जन्म लग्न कुंडली या चंद्र राशि से आप पर सूर्य से लेकर राहु केतु ग्रह गोचर का क्या प्रभाव रहेगा ,ग्रहों के इस राशि परिवर्तन का अपने जीवन पर सटीक और व्यक्तिगत असर जानना चाहते हैं तो फ्यूचर स्टडी ऑनलाइन एप के प्रोफाइल पर जाकर आप मुझसे बात कर सकते हैं
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14 मार्च से सूर्य एक माह तक मीन राशि में रहेंगे। मीन का स्वामी गुरु होता है। इस पूरे एक माह सात्विक रहिये। मन, वचन तथा कर्म से अहिंसा का पालन करना चाहिए। सूर्य एक राशि में एक माह रहते हैं। 14 मार्च से सूर्य एक माह तक मीन राशि में रहेंगे। मीन का स्वामी गुरु होता है। गुरु सूर्य का मित्र ग्रह है। सूर्य आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं। गुरु बहुत ही प्रभावशाली तथा महत्वपूर्ण ग्रह है। अतः मीन संक्रांति से सर्वाधिक मीन राशि ही प्रभावित होगी। मीन राशि पर मीन में सूर्य के गोचर का निम्न परिणाम हो सकता है- जब तक सूर्य गुरु के घर में रहते हैं तब तक कोई भी शुभ कार्य वर्जित रहता है। इस समय मीन राशि के जातकों को कोई नया कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए। इस समय आय प्राप्ति तो होगी लेकिन आप कुछ बड़े महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं जिससे धन का व्यय कुछ ज्यादा ही होगा। बच्चों का मन थोड़ा चंचल रहेगा, छात्रों का मन पढ़ाई से भटक सकता है। व्यवसाय में सिंह, कर्क या धनु राशि के लोगों के सहयोग से कोई बड़ा और नया व्यापार प्रारम्भ कर सकते हैं। स्वास्थ्य के दृष्टि से उदर विकार तथा नेत्र विकार की समस्या आ सकती है। उपाय तथा दान- 1- प्रतिदिन श्री आदित्यहृदयस्तोत्र का पाठ करें। 2- एक माला गायत्री मंत्र पढ़ें। 3- प्रत्येक गुरुवार को श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। 4- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें 5- प्रत्येक गुरुवार को गाय को केला तथा रविवार को गुड़ खिलाएं। 6- गुरुवार को चने की दाल का दान करें। 7- रविवार को गेंहू का दान करें। 8- स्वर्ण या ताबें का दान करें। 8- श्री रामचरितमानस के अरण्यकाण्ड का प्रत्येक गुरुवार को पाठ करें। 9- धार्मिक पुस्तकों का दान करें इस प्रकार इतना उपाय करने से आपके प्रत्येक कार्य सफल होना प्रारम्भ हो जाएंगे। इस पूरे एक माह सात्विक रहिये। मन, वचन तथा कर्म से अहिंसा का पालन करना चाहिए। माता-पिता तथा गुरु का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करने से आपके समस्त पापों का नाश होकर अनंत पुण्य की प्राप्ति होगी।
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